Acceptance is the beginning of transcendence – where all does this apply – Hindi?
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Lecture Summary
यह व्याख्यान परिपक्वता (Maturity), भावनात्मक नियंत्रण और आध्यात्मिक ज्ञान के बीच के संबंध पर आधारित है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- परिपक्वता की पहचान (Emotional Balance): परिपक्व व्यक्ति की पहचान यह नहीं है कि उसके जीवन में कभी सुख या दुख नहीं आता, बल्कि यह है कि वह सुख और दुख दोनों ही परिस्थितियों में अपनी प्रतिक्रिया को नियंत्रित और संतुलित रखना जानता है।
- सराहना और निंदा के प्रति तटस्थता: जब कोई व्यक्ति हमारी प्रशंसा करता है, तो बहुत अधिक प्रसन्न होकर अहंकार में न आना और जब कोई आलोचना या अपमान करता है, तो तुरंत क्रोधित न होकर शांत रहना—यह उच्च भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) और परिपक्वता का लक्षण है।
- अहंकार और हीनभावना से मुक्ति: प्रशंसा मिलने पर स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ मानना या असफलता मिलने पर स्वयं को तुच्छ समझना—ये दोनों ही मन की अस्थिरता दर्शाते हैं।
- ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग: वास्तविक ज्ञान केवल शास्त्रों को रटने में नहीं, बल्कि जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने मन को स्थिर रखने और भगवान के प्रति भक्ति भाव में अडिग रहने में है।
Full Transcription
तो स्वीकृति जो है वही दिव्या परस्थिनी को सुखार करना यही परस्थिनी परस्थिनी जाने के लिए शुरुवात है। वहाँ कहाँता हमल कर सकते हैं। बासतर में हर जगर कई बार देखते हैं कि हम एक समाज में हो सकते हैं, सोशल सरकल में हो सकते हैं जहांपे हम में कुछ गुण कम हैं, कुछ शम्ताएं कम हैं, किसी अदर नहीं शम्ताएं हैं। तो हम कहते हैं, मैं इसकी जस्य प्रोशल कुछ नहीं हो सकता, मैं इसकी जस्य कुछ नहीं गा सकता, मैं इसकी जस्य कुछ नहीं गा सकता, क्योंकि कई बार हमारे मान ऐसे आकांचा करते हैं, ऐसे क्यों नहीं हूँ, ऐसे क्यों नहीं हूँ। तो बासता में हमें खुद को स्विकार करते हैं, मैं जैसे हूँ, वैसे हूँ। इसका मतलब कि मैं जैसे हूँ, वैसे ही रहना हूँ, पर मुझे यहां पर यहां पर हूँ स्विकार करता है। तो वो खुद को स्विकार करना जो है, कि यहां भी बहुत से लोगी हैं। कई बार है, कई लोगों देखें कि एक है, एक है की self-centered की त्हवासीत लेंगे, खँद को बहुत मोऩ बड़ा बानना हैं। कि कुछ लोग बहुत अअहंकार होते हैं। हा gwhaat lounkaar hote hain. यहने यह किया, मैंने वो किया, मैंने वो किया, मैं कितना बड़ा बान चाहीं॥ वो एक प्रकार का सेल्प सेंटर्टनस है। खुद को केंडर बनाये जाते हैं। पर दूसरा है खुद को केंडर बनाया कैसा है। मैं ये भी नहीं कर सकता। ये भी नहीं कर सकता। ये भी नहीं कर सकता। बहुत लोगों को ये समस्या होती है कि कोन गुरी मुझा नहीं कर सकता। अपनी से नफ़रत करते है छाए। मैं ये कर दा और मैं कहा है ये नहीं कर सकता, मैं वो नहीं कर सकता। वासितब में ये भी मकटी संगीर है। भोत प्रकार को बढ़ा जक्छुर्ण होती है। हाँ हम सबने गल्दिया की हैं हाँ हमने बहुत बड़ी गल्दिया भी की हो सकते हैं हमने कम्यां हो सकते हैं शायद बहुत बड़ी कम्यां भी हो सकते हैं पहला है वास्तव में हम सब एक अश्छवे का भगवान की हैं अगर हम कुछ से नफरत कर रहे हैं कुछ से नफरत करते हैं हम बगवान से प्रें कउसे कर सकते हैं कि हुँबे बगवान क्यी नयम हैं हम बगवान चाहीं हैं तो खुछ से इतना कर लेना कि किसीर उपा सॉचना थी वह एक भौत है बहुत एक अक्श्ट्रिम है पर जो भी हो से उसको सुखार क्रुना to all be in soit और मक्से इसे नहीं है कि समभाव नहीं है। पर कभी-कभी हमें लगता है कि यह बदल नहीं है, इतना मुश्किल है। तो ठीक है, कोई कमी होगी हमें, उसको बदल नहीं पा रहे हैं। ठीक है, सुखार करलें। दूसरी कमी हम उसको बदल सकते हैं। तो खुद को सुखार करना ये भी बहुत मतलब है। तो, हम जब खुद को सुखार कर लेते हैं, तो फिर उससे हम क्या कर रहे हैं? भगवान ने हमें एसे बनाये है। कोई कहा कर नहीं, भगवान नहीं बनाया। मेरे पूर्व कर्मों ने उसे बनाया। पहले कर्मा बहुत बुरे थे उसके आपने एसे बनाएँ। पर ऐसे नहीं है। हम पूर्व कर्मों का संगथन हैं, जो इसके दौरा हम बने हैं, वह वास्तो में हमारे बुद्धी के लिए अनूपर है। तो हम जिस तरह से बढ़ सकते हैं, जिस तरह से बुद्धी कर सकते हैं उसके लिए जो अनूपूल है वो संगर्थन भगवान ने मैंने बनाया है तो हम केवल कर्म के दुरगढ़ना नहीं है पूर दुरगढ़ना हम वास्तव में भगवान की योजना भी है हमारे कर्म के पूरव कर्म भी है उनको भगवान ने ऐसे बनाया है जो हमारे प्रगर्दी के लिए नहीं है उसने खुद को सुखार करना है यह बहुत जरूरी है इस तरह से हमारे समास्प्रस्थी में आलग लोग हो सकते हैं हर व्यक्ति तो हम ज़िसे चाहे वैसे नहीं होगा कुछ व्यक्ति मुश्किल होगा इस बात उनसे उसको सुखार करना है उनके ज़्यादा करी जाने के जरूरत नहीं है सुखार करना है यह व्यक्ति ऐसे है इसके थोड़ा इतना अंतर लग के मैं आदार्ट बन करूँगा तो इस व्यक्ति जो है वहां हमें बड़ी शांति दे सकती है उसके बाद में हमारे शक्ती हमें कहां डालेंगे वहां हम सोच उचार करते हैं उस व्यक्ति को डालेंगे परिवर्तन कर सकते है इसके बाद में आदार्ड बन करूँगा