Rama temple inauguration: 3 lessons-RAM acronym (Hindi)
Disclaimer: This transcript was generated using AI and may contain occasional errors or inaccuracies.
Lecture Summary
इस व्याख्यान में श्री प्रभुपाद और भगवान श्री रामचंद्र के जीवन के प्रसंगों के माध्यम से जीवन में आने वाली कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने के तीन मुख्य सिद्धांतों (RAM – Resilience, Adherence, Munificence) को विस्तार से समझाया गया है:
- रेजिलियन्स (Resilience – पुनरुत्थान/प्रत्यावर्तन):
- जीवन में बिना किसी गलती के अचानक आने वाली बड़ी विपत्तियों या ‘सेटबैक्स’ (Setbacks) से हार नहीं माननी चाहिए।
- भगवान राम के वनवास (Exile) और शिला प्रभुपाद के अमेरिका प्रस्थान (जो कि उनके लिए एक प्रकार का वनवास जैसा था) से यह प्रेरणा मिलती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी व्यक्ति को अपने उद्देश्य के प्रति अडिग रहना चाहिए।
- हमें अपनी योजनाओं (Plans) में लचीलापन रखना चाहिए, लेकिन अपने उद्देश्यों (Purpose) में हमेशा स्थिर और दृढ़ रहना चाहिए (Fixed in purpose, flexible in plans)।
- एडियरन्स (Adherence to Dharma – धर्म निष्ठा):
- इसका अर्थ है सुविधाओं की कमी की शिकायत करने के बजाय, उपलब्ध हर अवसर को जिम्मेदारी के भाव के साथ स्वीकार करना (No facility, but deep sense of responsibility)।
- जिस प्रकार भगवान राम ने बिना किसी बड़ी सैन्य सुविधा के अपने कर्तव्यों का पालन किया और शिला प्रभुपाद ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने गुरु के आदेश को निभाया, उसी प्रकार हमें भी धर्म और अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं होना चाहिए।
- म्यूनिफिसेंस (Munificence and Generosity – उदारता):
- संघर्ष या विरोध का सामना करते समय भी किसी के प्रति मन में घृणा या बदले की भावना नहीं रखनी चाहिए।
- भगवान राम द्वारा रावण वध के बाद विभीषण को लंका का राजा बनाना और प्रभुपाद जी का अपने विरोधियों के प्रति भी क्षमाशील व उदार रवैया यह सिखाता है कि हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अधर्म के खिलाफ होना चाहिए। हमारा अंतिम उद्देश्य विनाश नहीं, बल्कि समन्वय और धर्म की स्थापना (Harmonization) है।
Full Transcription
प्रभुपाद और भगवान राम के जीवन से रेजिलिएंस (Resilience) की शिक्षा
जो प्रभुपाद जी के और हम प्रभुपाद और लोड रामचेंडर के सिमिलारिटी के लिए देखेंगे। तीन वर्च, तो हम देखेंगे ये अक्रोनिम लेंगे आर, ए, एम – RAM। तो पहला है रेजिलिएन्स, किसी को पता है रेजिलियन्स का मतलब क्या है? मैं नहीं लोड रामचेंडर के लिए देखेंगे। रेजिलियन्स, मतलब क्या है कि हम सब कभी-कभी निचे गिरते हैं. तो गिरते हैं, हम साभ परिस्सति विकट हो जाती हैं, हमें सेट बैक्स हैं।
तो Resilience को English में कह सकते हैं From Setback to Comeback। कोई Sports player होता है वो Comeback करता है। Comeback मतलब क्या है वो Team से निकल गया है Team से उसको निकाल दिया है पर बाद में वो अच्छा खेलता है आपस टीम में जा रहे हैं तो उसको Comeback कहते हैं। तो सबके जीवन में Setback होते हैं पर सेड़ बैक से जो कम बैक है, जो कर पाते है, उसे हार नहीं मानना, पर पुना प्रयास करना और पीशस भी होना। वहाँ रेजिलियन्स का लक्षन होता है।
तो अभी हम देखेगे, तो हम चार स्टरों पर देखेगें, कि ये प्रभुशि राम चन्दर कैसे दिखाते हैं, फिर शिलब प्रभुपाद कैसे दिखाते हैं, और फिर हम ये देखेगें कि जो अब राम मंदिर बन रहा है, उसके संगर्ष में भी तिक किस तरह से हम नी देख सकता है, ये हँआ है, और फिर हम देख सकते हैं कि हमारे जीवन में कैसे हम यहां अमल कर सकते हैं हमारे जीवन।
प्रभु श्री रामचंद्र का जीवन और वनवास
तो अभी प्रभुशि रामचंद्र का जीवन में जो सेट बैक था जो एक तरह से विपत्ती थी सबसे पहले क्या हुआ था उनका राजय अबिशेक होने वाला था यूराज बनके राजय अबिशेक होने वाला था और उस समय एका एक बिना किसी गल्ती के क्या हो गया उनको वनवास में भीज दिया गया।
अभी हम सब ने सुना है कई बार वनवास में चले गये पर अगर हम उसकी कलपना करते हैं ये बहुत ही बड़ी विपत्ती है इसे होता है कि कोई भी something bad कुछ बुरा होता है तो वो सेहन करना मुझ्किल होता है पर अगर कुछ बुरा होता है something bad and unfair वो और मुझ्किल होता है सेहन करना। कवी गब क्या होता है मैंने कुछ बुरा कारे किया है मैं speed limit के ऊपर चला गया हूँ और पूलिस ने पकड़ लिया है तो भी बुरा लगता है मुझे पर मैंने speed limit के ऊपर तो गया हूँ पर हम speed limit में ही travel कर रहे है और फिर भी अमको पुलीस ले पकड़ गया है. तो वो तो और बुरा लगता है अमको.
मतलब क्या है, हमारी कोई गल्टी है भी नहीं. और तभी अमको पकड़ा जाता है. तो unfair मतलब क्या है कि no fault हमारे साथ कुछ बुरा होता है हमारे कोई गलती भी नहीं है पर सबसे मुश्किल चीज़ क्या है कि no fault and worst punishment। कोई speed limit के हम speed limit के उपर गए ही नहीं है और उनको कहते हैं तुमको फासी की सदा दियाती है। हरे यह क्या बकवास है भाई गलती की भी नहीं है बिलकुल।
तो एक तरसे प्रभुशी रांचेंडरने कभी किसी को किसे का कुछ बिगारा नहीं था उनको कैकैई को अपने मां की समानी आधर दिया करते थे और उन्होंने काई काई के लिए कुछ भी बुरा नहीं किया था और फिर भी क्या हो गया उनके साथ उनको वनवास भेज दिया गया।
तो अभी जो है एक तरह से जो वनवास होता है ये जो था ये प्रभुजी राम चंद्र का राम’s exile it is no fault and the worst punishment। ऐसी विपत्ति जब आती है ये बड़ा मुश्किल है अभी एक तरह से exile exile और वनवास है और दूसरा है execution execution मतलब किसी का सिर काट देना किसी को मृत्यू धन्डे देना तो जो legally है न वो नियम के दुष्टी से exile is just one sentence lesser than execution। किसी को वनवास में भेजना उसको मृत्यू धन्डेने से सिर्फ एक स्टर नीचे है वो एक तरह से वनवास ये उम्र कैज से भी कभी कभी और बुरा माना जाता है क्यों क्या होता है कि जब किसी को वनवास में भेजते हैं मतलब everything is taken away from them except their life। वो वनवास में जाते हैं तो कुछ भी उनके पास नहीं है अपने संपत्ति नहीं है अपना कुछ influence नहीं है कुछ power नहीं है कुछ भी नहीं है तो ये बहुत बुरी सजा है।
तो अब जबी कोई परतेश से कोई लोग आते है किसी देश में और वो गैर कानुनी रूप से आये तो उनको deport करते है तो वो deportation है आजकल के समाजीवन में deportation is the nearest we can get to exile। आजकल किसी को वनवास में भेजते हैं नहीं है क्योंकि वन है ही नहीं ज़्यादा करके पर ये बहुत बुरी सजा है पर क्या हुआ? प्रोविशी राम चंद्र ने उसको बिल्कुल नकारात्मक रूप से नहीं लिया उन्होंने क्या किया?
He did three things over there Exile में सबसे पहले He got the association of the sages और उससे उन्होंने ने कहा कि हम और होले कि मुझे और घ्यान मिल सकता है और मैं चरितर का विकास कर सकता हूं तो उन्होंने उसको एक मोक्य के रूप में लिया और उसका एक सकारात्मक उप्योग किया। फिर दुसरा उन्होने क्या किया? न केवल उन्होंं machine सझ लिया पर उन्होंं कि सेवा की उन्होंने और वो सेवा केस्थ रह कर और फिर उसके बाद में, उससे में, ये दूसरे सर्विस का ही थर्ड पार्ट था ये, एक अलग पार्ट था, कि क्या है उनने? कि किलिंग ओफ रावन, तो अभी प्रभुशी रामचंडर जो थे, एक तरह से, वो शत्रिय थे, शत्रिय मतलब, कभी कभी हिंसा करनी पड़ती है, पर फिर भी प्रभुशी रामचंडर जहाते थे, कि हिंसा जितना कम करे, उतना कम हो, इसलिए, हम उसको आंड में आएगे वापस, आकरी गुण जब हम देखेगे, तो क्या है कि हम सबको, ये देखना ज़रूरी है किस तरह से, कि प्रभुशी रामचंडर ने, जब तक रावन ने उनको प्रवोक नहीं किया, रावन ने जब सीता का अपरण नहीं किया, रावन बड़े समस्या कर रहा था.
पर प्रभुशी रामचंडर ने, थींके वो राक्षस है, उसके राकषस के प्रवुट्ति है, उसके कारे करना है, कर ने दो. पर जब उनने सीताका अपरण किया उसने, और नकेव सीताका अ कई चेतावनिया देने के बावजूद जब उसने कुछ बात मानी नहीं तभी उन्होंने युद्ध किया और उसके बाद में क्या हुआ जब पूरा यश्यस्वी होके प्रभुशी राम चंद्र वापस आये और फिर उनका पटाबिशे का लंक्रितरामा।
तो रेजिलियंस मतलब क्या है बड़ी विपत्ती में चले गए पर विपत्ती में उन्होंने बहुत कुछ किया और वापस आएगा जब राज्य में तो क्या हुआ उनका एक राज्याभिशेक जैसे हो गया।
शिला प्रभुपाद का जीवन और अमेरिका प्रस्थान
अगर हम प्रभुपाजी को देखते हैं तो प्रभुपाजी को किसी ने वनवास में नहीं भेजा था पर एक तरह से प्रभुपाजी की दुष्टी से जब वो व्रिंदावन ये एक वन है वो छोड़के अमेरिका में जए वो कॉंक्रीट वन था वो वो एक तरह से जो भागवतम के पास्च्वे सकन में पताया गया है जो हम साधायनते हैं भव सागर बोलते हैं पर पास्च्वे सकन में भव अरण्य उताया गया है तो प्रभुपाजी क्या था वो गये व्रिंदावन से वो अमेरिका चले गये।
अभी जब कोई अमेरिका जाता है भारत से तो उनके आखों में ऐसे तारे चमक रहे होते हैं कि मैं तो आध्यात्मिक जगत में ही पहुँच गया है ऐसे लगता है। मैं जब लग 25-26 साल पहले ब्रह्मचारी बन गया था तो तभी मेरे मुझे अमेरिका जाने का बवका था। मेरे एक बामा है उनकी खुद की कमपणी है अमेरिका में और उनकी बच्चा नहीं था तो उनकी इच्छा थी कि मैं वहाँ पर जाओ और वहाँ पर मैं उनकी कमपणी संभालू तो मैंने उनको निराश कर दिया तो उसके बाद मेरे सारे लिश्टेजार जो थे मुझे कुछ बात नहीं कर रहा था सो रूट गए थे। तो अगर दगबाए 10 साल पहले 2014 में पहली बार मैं अमेरिका गया था तो जब अमेरिका से वापस आ गया मैंने सारे लिश्टेजार मुझे फोन कर रहे थे और वोले थे अमेरिका गया थे तो तुम्हारा जीवन यश्यस्वी हो गया।
अभी यह कहने का मतलब यह है कि अमेरिका जाना मतलब क्या है कि ऐसे आपके बहुत बड़ा सप्ना है जो पूरा हो गया है। मैं पहुछ समय हाइधराबाद में था, पहले हाेधराबाद ये था, हाइधराबाद में एक बड़ा प्रसंध मंदिर है। उस मंदिर को कहते है, Visa Ganesh Mandir. यह Ganesh जो होते है, वो क्या करते हैं वो हमारे समच्याओ, कोई शुरू करना है काम उसमें जो विज़ा उसको निकालते हैं.
तो मुझे अमेरिका जाना है या अमेरिकन एमबसी जो है उसे वीजा मिलना बड़ा विज़ा है. तो वो गनेश स्पेशलाइस करते हैं वो. उनका मौडरन स्पेशलाइजेशन है sanctioning visa. तो मैं कहने का बात है कि ये बहुत बड़ी बात है सब के लिए, खासकर भारत में जो हैं अमेरिका जाने के लिए. पर प्रहोपाद चाहिए पहले व्यक्ति होगे जो अमेरिका गए और वो क्या कहते हैं? अपने जोने संगीत गीत बनाया है तो अमेरिका को प्रहोपाद जी उग्र स्थान कहते है शायद ही कोई भारत बार्थिये ने अमेरिका जाने के लिए उग्र स्थान वो कहा है.
वो अमेरिका जाते है तो वो गरें भारते हैं उग्र स्थान है चाहिए तो भी अमेरिका तो बड़ा सौम्य स्थान है लोग कहते है पर प्रहोपाद जी क्या देख रहे थे तो प्रहोपाद जी को वो ये नहीं देख रहे थे कि वहाँ पर भौतिक सम्रुद्धी है वहाँ पर तंत्रग्यान है देख रहे थे वो पर प्रहोपाद जी देख रहे थे कि वहाँ पर स्पिरिच्वल बैंकरप्रसी है वहाँ पर आध्यात्मी दुश्य से कुछ नहीं है।
और प्रहोपाद जी जब उनके पहली गौर पूर्णिमा हुई प्रहोपाद जी जनमाश्टमी के एक दिन पहले निकले थे तो जनमाश्टमी और उनका जो जन्मदिन था वह प्रहोपाद जी ने जल्दूत में जो शिप था उसे भी सेलिबरेट किया फिर बाद में वह अमेरिका में गए और जो पहली गौर पूर्णिमा वहाँ पर हुई थी तभी प्रहोपाद जी को कोई अन्याई नहीं थे तो तभी प्रहोपाद जी अपने डायरी में लिखते है कि मेरे सारे गुरु भाई हैं वो विंदावन मायापूर में वो गौर कथा सुन रहे होगे गौर कीरतन कर रहे होगे और यहाँ पर यहाँ पर एक भी व्यक्ती नहीं जो जानता है कि गौरांग महाप्रभु कौन है तो मैं बड़ा अकेलापन यहाँ पर मास्सुस कर रहा हूँ पर प्रहोपाद जी बोलते है कि मेरे गुरु देव का आदेश है इसलिए मैं यहाँ पर हूँ तो मैं कहने का उद्देश है कि for प्रभुपाद प्रभुपाद जी क्या था कि अमेरिका जो था वो एक तरह से वनवास के समान ही था क्योंकि वन में, वनवास मतलब क्या है जो हमारे करीब है, जो हमारे प्रिय है उन सब से हमको दूर जाना पड़ रहा है तो प्रभुपाद जी कृष्ण, बृंदावन, मायापूर जो जगह थे उन से दूर गये थे पर प्रभुपाद जी ने उस वनवास में क्या किया वहाँ पे भी प्रभुपाद जी ने बड़ा पराकरम करे थे।
अभी एक वरिष्ण भकतों से बात कर रहा था कि वह प्रभुपाद जी के जीवन पे एक बूक लिक रहे है खास कर कि प्रभुपाद जी ग्रहस्त जीवन पे तो हम वह बात कर रहा था कि उनके क्या अनूबव है। अभी थोड़ा मुश्किल है वो खिताब लिखना क्योंकि उस समय के जो सब लोग थे वो तो चले गए हैं। तो हम बात कर रहे थे कि कैसे जो भी योजनाय प्रवपात बना रहे थे। प्रवपाजी ने बहुत सी योजनाय बनाय थी। और आप देखते हैं प्रवपाजी का जन्म कहा हुआ था कलकत्ता में। तो कलकत्ता में प्रवपाजी ने अपना पहले बिजनस चालू किया था। फिर वो बॉंबे में आय थे। और फिर बाद में वो प्रयाग में गए। प्रयाग फार्मसी था उनका। कलकत्ता, मुंबई और प्रयाग ये तीनों भारत के अलग-अलग कोनों में हैं। और इतना लोग उस समय ट्रावल नहीं किया करते थे।
न केवल प्रवपाजी इतना ट्रावल कर रहे थे, पर उनोंने अपना पूरा बिजनस यहां से वहां शिफ्ट किया था। अपने परिवार के साथ वो शिफ्ट हुए थे। तो कहने का मतलब यह है कि प्रवपाजी अपने बिजनस में भी बहुत प्रयास कर रहे थे। इसलिए नहीं कि वो सिर्फ भोतिकवादी थे, पर उनके इच्छा थी कि वो बिजनस में यश्यस्वी होकर, फिर वो अपने गुरुदेव के अंधोलन में वो सह्योग कर सके कोई आर्थिक रूप से। पर क्या प्रवपाजी नहीं है कि वो सिर्फ भोतिकवादी है। तो कोई दवाई के लिए आता था, दवाई के साथ प्रवपाजी उनको प्रचार करने लगते थे।
तो प्रवपाजी के लिए वो क्या था, वो सिर्फ भोतिकवादी नहीं हुआ। तो एक तरह से, जब हम कुछ सेवा करने का प्रयास करते हैं, जब हम कुछ सेवा करने का प्रयास करते हैं, जब हम कुछ सेवा करने का प्रयास करते हैं, जो हमारे योजनाएं हैं, कभी-कभी एशस्वी नहीं होती है, पर हमारा उद्देश जो है, वो एशस्वी होता है। तो मतलब क्या है, कि प्रवपाजी ऐसे प्लान नहीं किया था, मैं अमेरिका में जाओंगा, हिप्पी लोगों से मिलूंगा और हिप्पी लोगों से प्रचार करूँगा।
जब प्रवपाजी भारत से अमेरिका गए थे, उनको हिप्पी क्या है ये पता भी नहीं था, क्योंकि वो बहुत विलक्षन नमुना था एक तरह से, कि लोग बड़े एश्वरेशाली परिवार भी जन्मु हो रहे हैं और सब कुछ छोड़के वो नशा पान कर रहे हैं, क्योंकि क्योंकि नशे से उनको अध्यातम मिलेगा, ऐसे उनकी भावना थी, तो प्रभुपाजी का प्रचार उन लोगों को हुआ, तो कही बार क्या होता है, कि हम सब अपनी योजनाएं बनाते हैं, कि मुझे मेरा जीवन ऐसे जाना चाहिए, मुझे ये ऐसे करना है, तो और कभी नहीं होता है, तो फिर हताश हो जाते हैं, तो हमें, अगर हमारे जीवन में रेजिलियन्स रखना है, तो हमें क्या करना है, एक एक्स्ट्रीम है, कि हम बहुत, हम यारी योजना बनाते हैं, और उससे बहुत आसक्त हो जाते हैं, तो, जिए ऐसे ही करना है, और जब वो नहीं होता है, तो फिर क्या होता है हम, पूरा डिस्करीज हो जाते हैं, हम हताश हो जाते हैं, क्या प्रभुपाजी अगर अत्टाश होते हैं अपने प्लान्स के, बिजनस करना है तो प्रभुपाजी, सप पजाज 70-80 साल से अपना ब्इसने से चरए करते हैं आती हैं थे परभोपा milj blur क्या खेला की वो अतने प्लैनस से आसकत नहीं थे यह प्लान नहीं हुआ वो चरवोो करते हैं वो प्लान नी नहीं है वो चरवो करते हैं पर कभी कद क्या होता है, अमेरा एक प्लान बनाते हैं, उससे बहुत आसक औई रहे थे।
वो प्लान नहीं हुआ है, तो फिर हम खताश हो जाते हैं। क्या? Plans and Purpose. क्या हम योजना भी नहीं मिलाते हैं, कुछ उद्देश भी नहीं रखते हैं, छोड़ दो. हम प्रचार करने, हम एक जगब जाते हैं, कुछ प्रचार करने का प्रयास करते हैं औरप प्रिचान होता नहीं है,लोग कुछ रुची नहें रहती हैं to। फोलते हैं, कई हाँ कुछ होता ही नहीं, चौदोज They lose, they say, nothing happens, leave it. लोगों में कुछ रची नहीं है, मैं ही पतीत हूँ,। कुछ होने वाला नहीं है।
पर ऐसे नहीं था, प्रोपा जी को यश नहीं मिला तो उन्होंने छोड नहीं दिया हमारा जो सेवा भाव है, जो अगर हमको resilience चाहिए हमारे जीवन में तो resilience के लिए हमें क्या चाहिए है? कि attached, let’s say को बोल सकते है, fixed in purpose हमारे उद्देश में हम fixed रहते है, flexible in plans कि मेरा उद्देश है कि भगवान की सेवा करनी है, बगवान का प्रचार करना है पर जो योजणा है, ठीक योजणा काम करें, अच्छी बात है, योजणा काम नहीं करेंगे तो योजणा ट्राय करतें वो उज्ञानी काम करेंगे तो वो ट्राय करते हैं।
तो प्रभुपाची पहले Butler, Pennsylvania में थे, फिलेडलफिया में गए, फिलेडलफिया से New York में गए, और इन तीनों जगमें कुछ यश नहीं मिला, फिर New York के जो थोड़ा ऐश्वर शाली जग़ा थे, उससे फिर वो लोवर इस्ट साइड में गए, जहांपे सोहरे हिप्पी लोग रहते हैं। फिर वहाँ पे उनको यश मिला।
तो हमें जब Resilience रखना है, तो क्या है कि क्या हम कर पाएगे, क्या भगवान चाहते है हम यह करें, यह हमको पहले से पता नहीं होता है। तो अगर हम उद्देश में फिक्स्ट रहते हैं, और योजना काम करती है, अच्छी बात है, योजना काम नहीं करती है, अच्छी बात है।
राम मंदिर निर्माण और गंगा का मार्ग
तो अभी चोरो सालों से जो रम मंद्र बानाने का परैआस होा रहा था. अलग-अलग तरहों से परैआस हुआ हैं। कुछ योजनाulations है, सुफ नहीं हूई। कुछ कोट case हुए, वो Jason свет सबस्य नहीं हूँ है, कुछ खोड के शेंतले भी हुए, अलग अलग पतियद परायास किया, पर इवन्चूली जो था ही यहां पे नी हुआ, यहाँ पे नी हुआ, इस पतियद पर नहीं हुआ, उस पतियद पर नहीं हुआ, हम प्रयास करते रहे हैं।
तो ये फिक्स्ट इन परपस, फ्लेक्सिबल इन प्लान्स, इसका उधारण क्या है? गंगा किस तरह से सागर के ओर जाती है? गंगा जब सागर के ओर जा रही है, तो क्या होता है? कभी-कभी उसके बीच में बड़ा पत्थर आ जाता है, तो बड़ा कोई पहार आ जाता है शाज। तो Phil, कभी-कभी गंगा क्या गरती है? उसके निचे से चल जाती है, कभी-कह उसके एक साइट से जाती हैं, दुसरे साइट जाती है, या कभी-कभी उसको ही पानी आते रहता हैं, एसे जींने के लिए वो आजाना है epic तो गङ्गा का उद्देश साघर के ओर जाना पर किस मार्ग से साघर के ओर जाना है वो ठीक है एसे नहीं होगा तो एसे हो जाएगा एसे नहीं होगा तो तोई में अनंय का विशया मतिर्मदूपते सक्रत। रत्तिम् उद्वहताद अध्धा गंगेवावगमुदन्वती। इस तरह से गंगा जाती है हमेशा सागर की ओर।
वैसे हमें भी सागर की ओर जाना है। तो अभी ये रिवर और ओशिन ये जो मेटफर है, ये जो उपमा है नदी और सागर, ये इम्परस्णलिस्ट यूज़ करते हैं, जो अध्धाइतवादी लोग हैं वो यूज़ करते हैं, और वो भक्त भी यूज़ करते हैं। तो जो अध्धाइतवादी यूज़ करते हैं, वो इसलिए यूज़ करते हैं कि एंड, एंड्पॉइंट, जैसे नदी सागर में चले जाती हैं और उसकि आथ एक हो जाती हैं, waise हम एक हो जाते हैं, पर जब भक्त यूज़ करते हैं, वो फलीक खेल के लिए यूज़ करते हैं, इसे क्या है, end point of existence.
वो सोचते हैं कि कै, जैसे हम, जैसे नदी सागर में जाके मिल जाती हैं, वैसे हम परमसत्य में जाके लीन हो जाएगें. पर भक कहते है, it is for the flow of consciousness. कि जिस तरह से नदी हमेशे सागर के ओर भेथे रहती हैं, वैसे हमारी चेतना हमेशा भगवाण की ओर बैती रहे थो एक व्यत्ते आ जाये से किसी अखरसास पढ़ती। ये नहीं होंगा तो वो करेंगे। वो नहीं होंगी तो वो करेंगे। तो उस तरह से, ये रेऋजिल्यन्स है। कि ठीक है मैं ये सेवा नहीं कर पा रहा हूँ इस पद्धती से मेरे चेतना भगवान के ओर नहीं जा रही है तो उस पद्धती से जाएगी, उस पद्धती से नहीं तो उस पद्धती से जाएगी।
एडियरन्स (Adherence to Dharma)
तो अभी ये Resilience कैसे रखते हैं हम? हम कौन सा Acronym यूज़ कर रहे हैं? राम। तो ए जो है, ये है Adherence। Adherence मतलब? किसी को पता Adherence का अर्था क्या है? Adhere Adhesive सुना हैं आपने, Adhere ये Adhesive Chemistry में आपने शायद सुना होगा जो चिपकाने के लिए में यूज़ करते हैं, कोई Adhesive यूज़ करते हैं तो Adherence to Dharma, to Instruction।
कि अभी जो Resilience है, वो भोतिकवादी लोग भी रख सकते हैं कि हम हार जाते हैं, पुना उठते हैं, पुना प्रयास करते हैं पर जब हम आध्यात्मी दुष्टी में कर रहे हैं तो क्या हमारा धर्म जो है,हमारी सेवा जो है उसमें हम जुड़े रहते हैं Adherence to Dharma।
तो प्रभुपाद जी का क्या प्रभुपाद जी राम चंद्र जब ज्वनवास में गए तो एक तरह से क्या हुआ कि जब हमको सर्विस होती है हमको कोई सेवा होती है, हमारे कोई ड्यूटी होती है तो उसके लिए एक तरह से एक है facility उसके लिए कोई सुविधा होती है। अभी मान लिजे हमको प्रचार करना है तो फिर सुविधा क्या है, कोई साउंड सिस्टिम चाहिए किसी कोई publicity करना चाहिए फिर लोग आते हैं प्रोग्राम के लिए तो कोई publicity करने वाला, कोई साउंड सिस्टिम set up करने वाला कोई प्रोग्राम होस्ट करने वाला यह सब facility है पर facility के साथ क्या है responsibility यह भी महुत महत्वूर्ण है। कोई प्रचार करना चाहता है तो क्या उसको प्रचार करने का कि जिम्मेदारी लगती है उसको मुझे प्रचार करना है यह कि तो अगर वो जिम्मेदारी है तो फिर जो बोलने वाला है वो अच्छी सथा प्रिपेर करेंगे और फिर वो अच्छी सथा से class देखे।
कई बार क्या होता है कोई लोग कम्प्लेंट करते है कि आमेरे फैसिलिटी है ही नहीं तो we are more eager for facility than responsibility मुझे और सुविधा चाहिए, सुविधा चाहिए, सुविधा चाहिए responsibility है कि आपको responsibility का भाव नहीं होता है।
अभी रामचंडर जब जंगल में गए तो शत्रिय की कोई भी facility उनके पास नहीं था शत्रिय मतलब उनके राज होता है, सेना होती है पर कुछ नहीं था पर फिर भी उनको रामचंडर के पास जिम्मेदारी का भाव था क्या जिम्मेदारी का भाव कि मैं शत्रिय हूँ मतलब मुझे ब्राम्मणों के सादु संतों की सेवा करनी है मुझे जो ब्राम्मिनिकल कल्चर है उसको सरक्षन करना है तो राम in exile जंगल में तो क्या था no facility but deep sense of responsibility तो ये प्रभुशी राम संद्रें दर्शा आया इसलिए वहाँ कोई सेना नहीं थी फिर भी वह असुर से युद्ध कर रहे थे और फिर जब वहाँ नरों के साथ संधी बनाई तो अभी हनुमान जी और कुछ वानर तो बहुत बड़ी शक्ति शाली थे पर वहाँ नरों के सेना के साथ उन्होंने युद्ध किया और वह भी क्या था वह रावन जैसे एक तरह से कहे सकते है कि रावन जो थी उसके सेना हाई टेक थी पुरी और हनुमान जी के पास वानरों के पास कोई शस्तर थे नहीं पेड़ उठाते थे अपने बुक्के मारते थे वह ऐसे युद्ध कर रहे थे तो उनके पास फैसिलिटी नहीं थी पर वह सेंस अफ रिस्पॉंसबिलिटी थी।
तो कई बार क्या होता है कि हमारे जीवन में हम अमेशा बहुत बड़ा आसान है कम्प्लेंट करना कि मेरे पास कोई फैसिलिटी नहीं है जब प्रहुपा जी जब अमेरिका गए थे तो उनके पहच जो मैं विश्लोग मार्कीने भागवधर में जो गीत गाया था तो पहली पंक्ती क्या है बोरो कुरुपा कोईले कृष्णा कि कृष्णा आपने बड़ी कुरुपा किये मुझपे जब मैंने पहली बार यह बढ़ा था मैं सोच रहा था यह क्या कुरुपा है प्रहुपा जी अकेले अमेरिका गए है उनके पास कोई फॉलोवर्स नहीं है कोई अनुयाई नहीं है कोई इंस्टिटूशिन का सपोर्ट नहीं है कुछ पैसे भी नहीं है प्रहुपा जी कितने पैसे लेके गये थे उनके साथ चालिस रुपे और आपको पता है वो चालिस रुपे का क्या हुआ मौका है क्या? मौका है, तो हमारे responsibility जम्मेदारी के भाव के कारण जो भी मौका हो, कितना छोटा सा भी मौका क्यों न हुआ, उसका इस्तमाल करते हैं उसका इस्तमाल करते हैं उसका उप्योग करके हम क्या करते हैं? तुरंत, हम जो उच्छित कार्य है वो करने का प्रयास करते हैं तो चाहिए हम है कोई जैसे facility नहीं कि हमारे ओजस्विवानी नहीं है हम कोई ज्यादा हास्य नहीं जोक्स नहीं करते हैं या हम में कोई जैसे charisma नहीं है कि हजारों लोग आएगे हमारे पर एक वेक्ति से भी जो बात करने का मौका मिल रहा है दो बेक्तियों को बात करने का मौका मिल रहा है तो वो जो मौका है उससे हम सिकार करते हैं तो adherence means कि we don’t demand facility we take opportunity with a sense of responsibility हम मौका लेते हैं एक जिम्मदारी के भाव के साथ।
और एक तरह से जब भारत independent हो गया तो ऐसी आशा थी अभी स्वस्थंतर भारत में जो वएदिक संस्कुरती है वो योग संस्कुरती है उसका पढ़ना करने का बहुत सविदा मिल जाएगी बहुत से जो भारत के सोथतंतर आजाति के प्रतास करने वाले जो नेता थे वो काफी कुछ हद तक आध्यात्मिक प्रवुत्ति के थे पर क्या हो गया? दो चीजे हो गई 1947 के बाद जो पार्टिशन हुआ हमारा तो उसमें ऐसे लोगों को लगा कि सरकार ने ऐसे प्रतीत करवाया कि ये धर्म के कारण हुआ है और इसलिए अगर भारत को प्रकति करना है तो धर्म को समाज में कुछ रोली देना चाहिए और उसकी साथ साथ क्या हो गया? उसके बाद में गांदी जी के हत्या हो गई और उसका पॉलिटिकल रीजन था पर वो उसको हिंदुज पर ब्लेम कर दिया और इसके कारण क्या हो गया? एक सो रिलियं कोई बुरा नाम दे दिया पर खास करेंगी हिंदुज्यम को सबसे बड़ बाड़ा नाम दू दिया तो उसके कारण क्या हो गया काफाई सालों तक जो लोक चाह हरहे थे एक तरह से जो फैसिलिटीज रिवर्स हो गई थी।
जब सब जब ब्रितिश थे, पहले आये थे, 1857 के मिूटिनी के पहले, तो उस अभी, अभी मैं पहले जगनाथपूरी गया था, तभी जगनाथपूरी में जब रथ्यात्रा होती थी, तो ब्रितिश सरकार जो थी, वो अपने जो गार्ड से, वो गार्ड से उनको एसकॉर्ट करते थी, जैसे कोई वियाइपी आता है, तो गोली मारते हवा में, जगनाथपूरी जब बाहर आते थे, वो गोली मारा करते थे, तो क्योंकि उनको कहा, ब्रितिश पहले जब आये थे, वो कहते थे कि ये भारती लोग बड़े धार्मिक है, और हमें उनका कुछ, उनके धर्में हमको इंटरफियर नहीं करना है, क्योंकि क्या है कि, हम को यहांपे हम बिजनस के लिए आये हैं, हमें धर्मक के बारे में कुछ नहीं करना है, पर क्या हो गया, 1857 में वो इस्ट इंडिया कमपणी चली गए, और ब्रितिश गॉर्मेंड ने रूल ले लिया, और तभी ब्रितिश एलेक्शन्स में, जो पार्टी टॉरी पार्टी थी, जो बहुती क्रिश्वन पार्टी है, वो पार्टी में आ गए, और उन्हें कहा, यह भारत तो इतना बड़ा देश है, और यहां पर हमको इसपे रूल करने का मौका मिला है, तो इसको हमको रिलिजियस कंवर्शन करना चाहिए, तो मैं कहने का मतलब है कि, जो सुविधा थी, वो धीरे धीरे चली गई, कम होती गई, कम होती गई, कम होती गई, पर इससे कोई हताश हो सकता था, पर क्या हो गया, जो राम भक्त थे, जिनमें राम में शद्धा थी, उन्हें प्रयास करते रहे हैं, तो एड़ियरन्स मतलब क्या है, जो हमारा उद्देश है, अभी कोई कहते हैं, यह पॉलिटिकल हो गया है, कहते हैं, पॉलिटिक्स, यह एक तरह से हर जगह में आता है, हमें पॉलिटिकस में कोई रुची नहीं होगी, पर पॉलिटिक्स को हमें रुची है, मतलब क्या है, पॉलिटिक्स से जो प्रेणाम होता है, वो हम सब पे भी होता ही है, तो पॉलिटिक्स के दो अर्थ होते है, पॉलिटिक्स का एक अर्थ है, और पॉलिटिक्स का दूसरा अर्थ है, कि मैनिप्यूलेश़न और बैक बैटिंग, तो क्या है, दूसरों के बारे में जुड बोलना, उनके पिछे कोई शरीयाद्र करना, तो हमें पॉलिटिक्स में इंट्रेस्ट नहीं है, मतलब क्या है, यह मैनिपिलेशन, बैंक बाइटिंग उसमें इंट्रेस्ट नहीं है।
पर जो किस तरह से राज्य कर रहा है वह महतु पुर्ण है। एक तरह से कहते हैं, हम देखते हैं, जब भगवान अवतार लेते हैं, पुरे अवतार का उद्देश क्या है? पुरे अवतार का उद्देश क्या है? लोकॉ? भगावन कहा गया हुए, मिनाशय ये दुश्घृता, परिथ्रानय सादून, मतल्ब क्या है? कि जो अनेतिक राजा है, उनको निकाल दे, और जो नयतिक राजा है, उनको प्रस्थापित करें। तो राम राज्य जो है, उसका उद्देश क्या है? एक तरह से पॉलिटिकल चेंज है। तो पॉलिटिक्स का दो अर्थ हैं। तो हम नहीं अपने नेगेटिव क्या है? मैनिप्यूलेशन। वो तुम politics कर रहे हो, मतलब क्या है, तुम इससे जोड रहे हो, तुम इसके विरावार बुरा बोल रहे हो, तुम इसको ये कर रहे हो, उस अर्थमे हमें इंट्रेस्ट नहीं है, पर यह सकारात्मक अर्थमे है, यह है administration.
जैसे कोई सब्द होता है political science, जो विशे होता है, विशे होता है स्कुल में पढ़ाई करने के लिए, तो क्या है, उसमें जरूर हमें इंट्रेस्ट है, पूरा आवतार जो आते है, उनका उद्देश क्या है, यह है change लाना, तो धर्म का एक अद्देश है, धर्म संस्था अपन था यह संभवामी हो कहेंगे, मतलब क्या है, वो एक भगवान चाहते है कि अच्छा administration tool में आए, तो यह दूसरी चीज़ है कि adherence, हमें धर्म में हमें लगे रहना है, तो धर्म में लगे रहना है, मतलब क्या है, हमारा जो कर्तव यह है, adherence मतलब कि हम, we continue with opportunity, जो भी मौका है, उसको हम स्विकार करते है, opportunity even without facility, अगर हमें कोई सुविधा भी नहीं मिल रही है, पर जो भी मौका है, उसको स्विकार करते रहे, और धीरे धीरे कुछ सुविधा मिल जाए, छोटी सुविधा मिलेगी, फिर बड़ी सुविधा मिलेगी, फिर और बड़ी सुविधा मिलेगी, और फिर उससे प्रचार बढ़ते जाएगा.
अभी प्रहुपा जी 1970 में, 71 में एक लेक्शर देते है, प्रहुपा जी कह रहे है, भारत में है, this movement is from India, यह भारत मात्रा में आ रहे हैं लोग, तो प्रहुपा जी का एडियरन्स है, कि मैं सुविधा हो या ना हो, प्रचार करते रहूंगा. और एक तरह से प्रहुपा जी के समय में, 1977 तक, जाधा कुछ उनको भारत में यश नहीं बने नहीं जाधा, पूरे नहीं हुए जाधा, रिंदावन मंदिर पुरा हो गया था, पर जुहों मंदिर पुरा नहीं हो पाया. और उस समय जाधा लोग भक्त नहीं बन रहे थे, काफी लोग बढ़ाये, मेम्बर्स बन गये थे. प्रहुपा जी के बाद में, प्रशार बहुत बढ़ गया और भारत में अभी तो एक तरसे एक फ्लॉड अप डिवोर्शन आ रहा है. तो अधियरन्स अगर हम, हमारा जो धर्म है, हमारा जो कर्तव है, हमारा जो कुर्महराज जो आदेश दिया है, वो अगर पूरा करने का हम उसमें बने रहे गे, तो फिर जरूर हमको यश मिलेगा.
म्यूनिफिसेंस (Munificence and Generosity)
और आख्री पाठ है M. M is Munificence. Munificence का मतलब क्या है? ओदार्य, generosity, charity.
तो अभी क्या है? हां, कभी कभी युद्ध करना जर्विय होता है, जैब प्रभुशि राम चेंज्र का युद्ध हुआ, रावन केसाथ, तो युद्ध ये महत्वपोर रहो, युद्ध के बाद प्रभुशी रामचन्दर ये नहीं कहा ये लंका वास्तियों ने मेरी सिता का आपरण किया है मैं पूरी लंका को चला दूँगा नहीं ने रावन का वद किया और विबीशन जब कह रहा था प्रभुणने विबीशन से कहा कि तूम जो है, तुम क्या करो रावन का अंतःसंशकार करो अभी और विबीशन ने कहा कि येतो इतना ख्रूर व्यक्ति था, इतना दुष्टे व्यक्ति था ये इसने आपकी जो बहर्या है, आपकी जो राणि है उसको आपरण किया है उसको अन्तसंसकार भी नहीं करना चाहिए। अब प्रभुशी रामचेंडर ने कहा कि ऐसे भाव रखके तुम दूशित हो जाओगे। कि भले उसने उसका कर्तवे नहीं किया है, वो अपने कर्तवे खिलाफ गया है, उसके कारव कारण तुम अपना कर्तवे मत भूलो। भावतिक दुरिश्टी से आध्याति दूशित कहा हो ने कि आत्मा का कोई दोश नहीं होता है, तो आत्मा का अगला गंटवे है, उसको जाने के लिए तुम मदद करो। और बावतिक दुरिश्टी से, उस ही, यह पर्सन में नहीं करतवे करो। तो यह प्रवुशी रामचेंडर का जो उधार भाव है।
प्रवुशी रामचेंडर ने लंका को उद्धुवस्थ नहीं किया। लंका को उन्होंने आयोध्या का भी एक अंग्ष पर नहीं मना लिया। प्रवुशी रामचेंडर जो उन्होंने राक्षिसों के साथ किया, तो उनका उद्धेश क्या था? उनका उद्धेश destruction नहीं था। उनका राक्षिसों का विनाश नहीं करना उनका उद्धेश नहीं था। और उनका उद्धेश क्या था? Harmonization। कि वो राक्षिस दुसरों को उद्ध्वस्थन करें। हमें तुमको उद्ध्वस्थ नहीं करना है। तुमें हमें उद्ध्वस्थ नहीं करना चाहिए। तो जो उन्होंने देखा कि ऐसे नहीं है कि सारे राक्षिस जात, राक्षिस का कुल है वही बुरा है। वह राक्षिस का कुलों का राजा बुरा था, और उनके कुछ अनुयाई बुरे थे। तो उनका विनाश कर दिया, और फिर उसके बाद में उसी ग्रूप से विबीशन को राजा बना दिया।
तो प्रभुची रामचन्दर क्या है, जब वो राक्षिस हार गए थे, तो उनका पुरा विनाश कर सकते थे, पर उन्होंने ऐसे नहीं किया। प्रभुपाजी ने भी एक तरह से जुहु का मंदिर था, उसके लिए युद्ध किया प्रभुपाजी, जो मिस्टर एन थे, तो क्या हुआ, वो पॉलिटिशन जैसे थे, और वो पॉलिटिशन सेकंड कैटेगरी, नहीं पॉस्ट कैटेगरी, मतलब, अड्मिनिस्टेशन नहीं, मैनिपुलेशन, तो वो क्या कर रहा थे, वो पैसा लेके जमीन भी देने के तयार नहीं थे, तो फिर प्रभुपा जी नहीं कहा, अगर वो क्रिष्ण का, भगवान के मंदिर की जमीन, अगर चुराने का प्रयास करता है, तो उसको मेरे मुरुत शरीर के ऊपर जाना पड़ेगा, ये प्रभुपा जी का युद्ध करने के लिए, उनका डिटरिमिनेशन था, तो मिस्टर एन का कुछ हाट एटाक आ गए, उनकी मृति हो गई, पर जो उनकी पत्नी थी, उसने सोचा, उसको लॉयर दे, कुछ एसे अडवाइस दे दिया, उसने कहा, उंडो को भीज दिया, मंदिर को उद्वस्ट करने के लिए, और फिर तबी प्रावपाजी शिश्यों ने, बड़ा उसके लिए, अपने जीवन जोखिम में डाल के सहरक्षन किया, और कहा, उससे पी आर पुरा उसके खलाफ हो गया, कि मंदिर को उद्वस्ट कर रहे हैं, और जब उसने देखा, तो फिर वो, मिसस एंड प्रावपाजी से मिलने आ गए, बोले कि, मुझे आप माफ कर दो, और प्रावपाजी ने तबी ये नहीं कहा, कि तुम तो नरक में जाने वाले हो, तुमने मंदिर उद्वस्ट करने का प्रयास किया, तुम्हारे लिए कोई उद्धार का मौका नहीं है, नहीं, अब प्रावपाजी को किसी के प्रति घुणा नहीं थी, प्रावपाजी को किसी के प्रति घुणा नहीं थी, प्रावपाजी को किसी के प्रति घुणा नहीं थी, तुम मेरी बेटी के समानों, तो क्या है कि हमें कभी उद्ध भी करना पड़ सकता है, पर हमें किसी के प्रति घुणा नहीं रखनी है, क्या है कि घुणा रखेगे तो उससे हम दुशित हो जाएगे, बगवान कहते हैं आर्जुन से उद्ध करो, पर निर्वैरह सर्वभूतेशु, किसी को शत्रू मत मानो, कोई शत्रू हो सकता है, शत्रू हो सकता है तो उनसे उद्ध करना पड़ता है, पर हमारे मन में घुणा या बदला का भावना नहीं लाना है, मैं क्या करना है, जो पुरुषी राम चंदरी म्यूनिफिसंस दिखाया है, और अभी मैं जब ही अमेरिका में जाता हूँ, तो अमेरिका में नियोर्क टाइम्स हो, जब न्यूस्पेपर है न, वो अमेशा काफी समय भारत के खिलाफ रहते हैं, तो वो कहते हैं भारत में हिंदो-मुस्लिम्स का हमेशा जगडा होते रहता है, तो जब मैं अमेरिका में आता हूँ, यह सवाल आता है कई बार थे, मैं स्टेटिस्टिक्स कोड करता हूँ, कि अमेरिका में ब्लाक्स और वाइट्स में जो टेंशन होता है, वो अगर अमेरिका का पॉपिलेशन का, सबसे कि आता है पॉपिलेशन, पूछने में दो सोथे, मैं देखता हूँ कि तुम उससे बहुत गुशु।
तो क्या तुम मुंझे बढ गुलते हो? मैंने क्या किया है? इसलिए उससे इतना गुशु होगे। तो मुर्सरे बख्तीम मूल, तुम जिंग है। हह अह तुम ने क्या गएया है कि तूम अस्तित्व में हो इसे तुम अपने गुशा हो गया हो तो अगर ऐसा भाव रखेंगे तो कभी हमें कभी वघ्टों के बीच में भी हम एक ऑग ओंटी कभी निला सकते हैं कभी कभी हमको लग सकता है कि ये लोग हमारे शत्रु हैं। हाँ हो सकता हैं, पर अगर मान लीजे कल सुबह मुठ्ते एक मैजिक से कि सारे विश्व में जो भी चीजे हैं लोगों को डिवाइड करती हैं, यो धरन हो सकता है, ज़ाती हो सकते हैं, राश्टृ यवाद हो सकता है। वो सारे चीजे, जो लोगों को डिवाइड कर रही हैं, वो सारे चल जाती हैं। कल सुभाय मुढल मैजिक से सब लोग एकी धरन के हैं, सब लोग एक ही जाती के हैं, सब लोग एक ही देश के हैं।
तो क्या उससे सारा संगर्च दुनिया से चला जाएगा? नहीं, कल दोपार तक हम कारण ढूंडेगे और जगड़ा करने लग जाएगे। तो क्या है? तो जगडे होते है इस जगड़में अनिवार एहें। के भारता होने हही वाले हैं, वो कोई दो धर्मोँ के बीच में उसकते हैं, एक ही धर्म के बीच में उसकते हैं और examples एक ही समुधाई, एक ही GLISH में हो सकते हैं। मुनिफिसंस रखना है। प्रहुपा जी बोला करते थे Your love for me will be shown by how you cooperate.
तो कभी-कभी हम co-operate नहीं कर सकते हैं, पर कम से कम co-operate कर सकते हैं। मतलब क्या? कि co-operate मतलब एक ढर से साथ में काम करना, पर साथ में अगर काम नहीं कर सकते हैं, तो co-operate. मतलब तुम यहाँ पर ओपरेट करो, मैं यहाँ पर ओपरेट करता हूँ. और हम दोनों जगड़ा नहीं करेंगे. दुनिया बहुत बड़ी है, दुनिया में बहुत सेवा करने के लिए मौका है. तो क्या है? हमें किसी को अपना शत्रु नहीं बनाना है, किसी का अपना शत्रु नहीं मानना है. कुछ लोग हमें विरोद कर सकते हैं, और अगर विरोद कर सकते हैं, तो हमें जगड़ा, कभी कभी हम conflict करना पड़ सकता है.
पर जब, I’ll conclude with this point, हम जब fighting होता है, तो fighting is for a purpose, किसी उद्धेश के लिए हम युद्ध कर रहे हैं, not against a person. हम जब उद्ध कर रहे हैं, हम किसी उद्धेश के लिए उद्ध कर रहे हैं, हम किसी व्यक्ति के खिलाफ़ युद्ध नहीं कर रहे हैं.
अभी जब पांड़ोने ने युद्ध किया, कोरो धर्म का विरोध कर रहे थे, इसलिए उनसे युद्ध हो गया। प्रभुशी रामचंडर का युद्ध राक्षसों से नहीं था, वो अधर्म से था, और जो राक्षस अधर्म कर रहे थे, उनका उनने धमन किया, पर ऐसे नहीं कि राक्ष्यस खुल का ही विनाश कर दिया। तो जन्रोसिटी मतलब क्या है। जो उदार चित्त है। उसका मतलब क्या है कि अफटर बैटल is ओवर। अगर एक बार जीत हो गई है, तो फिर दूसरे के विनाश करने के कोई ज़रूरत नहीं है। अगर एक बार जीत हो गई है, तो फिर दूसरे के विनाश करने के कोई ज़रूरत नहीं है।
हम यहां पर बगवान से सम्मन जोड़ने के लिए आए हैं। कभी कभी हमारा, एक बार मुझे बताया थे, मैं उस्ट्रेलिया से अब आया। कि हमारे कृष्णे भावनारत अंदोलन में, कैसे है? कृष्णे ने कृष्णिला कृरुकशेतर में की, कृष्णिला व्रिंदावन में की. तो हमें हमारे मंदिरों में कृरुकशेतर व्रिंदावन दोनों साथ में रखना पड़ता है। तो क्या है? हमें कभी कोई युद्ध भी करना पड़ता है, पर जो व्रिंदावन का रस है, उसको हमें छोड़ना नहीं है।
तो कैसे possible है? अगर हम हमारा उद्देश दागते हैं, हमारा शत्रुत्व किसी व्यक्ती से नहीं है। अगर हम कुछ युद्ध कर रहे हैं, वो इसलिए कर रहे हैं कि हमें क्या करना है? हमें हमारी सेवा कर रही है। प्रहुपा जी जो ब्रिंदावन में गए थे, तो कभी कभी उनके थोड़े गुरु भाई थे, उनको थोड़ा insecurity हो रहा था कि हम तो इतने वरिष्ट भकते हैं, हम जो आजिवन सन्यासी रहे हैं, और ये कोई उनके दुश्टी से क्या था? प्रहुपा जी को नए भक्त ज तो थोड़ा सा insecurity था उनको, तो कभी कभी प्रहुपा जी थोड़ी निदा किया करते थे, तो प्रहुपा जी जो और वो कहते थे, तुम हमारे पास आजाओ, हम तुमको कृष्ण की अलग-अलग कहानिया बताएगे, हम तुमको और आगे बढ़ाएगे, तो जब ऐसे हुआ एक गुरुभाई ने उनको ऐसे किया, तो प्रहुपा जी ने अपने शिश्यों से कहा कि उनके पास तुम कभी मज़ जाओ, वो है एक इरशालु साप के समान है, अब एक सबसे यह बहुत बड़ी निदा हो गया, किसी वैश्णों को बोलना इरशालु साप के समान है, तो फिर बाद में क्या हो गया, वो जो उनके गुरुभाई थे सन्यासी थे, वो उनका देहान्त हो गया, तो फिर भक्तों ने पूछा प्रावपाद जी से, प्रावपाद जी कहा, कहां गए वो, कभी कभी जो जो जिनको हम बुरा मानते हैं, वो नरक में गए ये सुनने में को बड़ा आनन्द लगता है, तो प्रावपाद जी बड़े गंबीर थे, प्रावपाद जी बड़े, कि वो भगवधाम गए.
और वह बदवा, आशा जी को था वो ले कि, प्रावपाद जी, आपने उनको पूची के रिशालू साप है, तो वो भगवधाम कैसे गये? मेरे गुरुदेव बहुत शक्तिशाली है। और उन्होंने मेरे गुरुदेव की सेवा आजी उनकी है। तो प्रहुपाजी क्या था? When it came to protecting his disciples, अपने शिष्चों का सरक्षन करना है, तो तभी उन्होंने कहा कि वो एक एर्शालु साहब के समाल है, पर इसका मतलब यह नहीं था कि प्रहुपाजी पूरे तरसे एक तरसे उन्होंने जो उनके गुरुदेव की सेवा की थी वो नहीं देख रहे थे।
यह मेरे गुरुदेव, उनकी शिष्चों थे, प्रहुपाजी की जौनुया आई है, वो क्या है? कि अगर हम कहते हैं, यह बक्तिस्वान सरी ठाकुर है, यह प्रहुपाज है, और यह उनके गुरुभाई है, तो अभी प्रहुपाजी के द्वारा उनके जो डिसाइपल्स हैं, तो प्रहुपाजी कह रहे थे कि तुम उनके साथ मझ जाओ, मतलब यहाँ पर उन्होंने एक बैरियर लगा दिया, कि तुम उनके पास मझ जाओ, क्योंकि वो तुम्हे पदब्रश्ट कर देगे, वो तुम्हे मुहित कर देगे, यह इसलिए नहीं बता रहा था कि वो बुरे वेक्ती है, तुम्हारे लिए कन्फ्यूज हो जाएगा, मैं तुमको एक चीज बताओगा, वो कलाची चीज बताओगा, तुम कन्फ्यूज हो जाओगे, पर प्रहुपाजी ने ऐसे नहीं सोच था कि यहाँ पर कोई सं ज़रूर है, और उनने गुरुदेव की सेवा की है, बलेई वो मेरी सेवा का विरोध कर रहे थे, मेरे सेवा में व्यद्धेला रहे थे, तो क्या प्रहुपाजी, sometimes he spoke strongly, but he was fighting not against a person, यह बता रहा था मैं, कि प्रहुपाजी fighting कर रहे थे, किसी व्यक्ति के लाँफ नहीं कर रहे थे, वो एक उद्देश के लिए कर रहे थे, मेरी सेवा को प्रोटेक्ट करने के लिए मैं यह कर रहा हूँ, तुम्हारा शत्वं से कोई शत्वत्व नहीं है मेरा, तो यह भाव हमें रखना ज़रूरी है, कि जो म्युनिफिसंस होगा, जन्दरोसिटी होगी, जो उदार दिल होगा, तो उससे क्या होगा, समस्या भी खतम हो गई, तो उसको वापस और पढ़ाने का ज़रूरत नहीं है, हम अपनी सेवा करते हैं, हम धर्म का प्रचार करके हमारे रुदय में और समाज में धर्म को और प्रस्थापित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
प्रसारांश में तीन पॉइंट में चर्चा की, कैसे की, पहला क्या था किसे को पता है, रेजिलियन्स, रेजिलियन्स मतलब क्या, कि हम हार भी होते हैं, from set back to come back, तो हमने चार स्थर पर देखा, कि प्रभुशी रामचंडर जो थे, उनका exile था, उसमें कैसे, उन्होंने क्या किया, साधों की सेवा की, साधों का संग लिया, और फिर जुनिया को राक्षिसों से मुक्त किया, तो उसके बाद में उनका victorious return था, तो actually, ये तो प्रभुशी exile था, क्योंकि आध्यात्म में, किसी वहाँ पर, किसी को राम के बाद, कृष्ण के बादें पता नहीं है, राम के बादें, चेतमहाव के बादें पता नहीं है, पर फिर भी क्या किया प्रभुशी जी ने, वहाँ पर बड़ा परचार किया, और वो victorious return हुए, और फिर हमन पर फिर भी there is a victorious return, अभी जो मंदिर बनने वाला है वहाँ पर, और हमारे जीवन में हम देखा, इसका मतलब क्या है, resilience के लिए दो extremes है, हम plants से attached होते हैं, attached to plants वो बुरा है, और apathetic to purpose, हमारे जो उद्देश है, उससे ही हतास हो जाते है, तो resilience रखना है, तो क्या करना है हमको, fixed in purpose, और flexible in plants, तो अगर ऐसा रखेंगे हम fixed in purpose, और हमारे जो plants है, उसके लिए हम flexible होते हैं, कि ये सेवा नहीं हुई, इस तरह से नहीं हुई, तो उस तरह से करेंगे, ऐसा अगर हम भाव रखेंगे, तो हम सब जो है, हमारे जो भी परिस्थियों से हम प्रगती कर सकते हैं।
दुसरा point क्या था, इसे हो पता है, adherence, adherence मतलब, क्या है, कि जब हम, हमारे जो भी उद्देश है, धर्म है, we are steady in dharma, हम हमेशा एकागर रहते हैं, तो हम देखा प्रभुषी रामचन्द्र, क्या है, no facility but full responsibility, उनको राज शत्र की कोई सुविधा नहीं थी, पर शत्र की जम्मेदारी जो थी, वह स्विखार कर रहते हैं, शिला प्रभुपा देखे हमने क्या है, कि no facility, पर फिर भी, क्या है, उनके बास कुछ अनुयाई नह है, हम देखा, कम से का मैं अमेरिका आ तो गया हूँ, तो post-independence इंडिया में भी क्या था, हम देखा कि कई चीज़ों के कारण, जो state से हमें कोई facility नहीं मिल रही थी, पर फिर भी क्या है, वो जिम्मेदारी का भाव रखा, और फिर उससे परिवर्तन आ गया, हमारी जीवनें भी हमें देखना क्या है, कि हम resentful, हम गुर्णा हो सकती है, resentful कि no facility, कोई सुविधा नहीं मिल रही है इसलिए, या हम grateful हो सकते हैं, कि हम सब के पास कुछ न कुछ सेवा करने का तो मौका है।
और आखरी point हमने देखा, क्या था, munificence, munificence मतलब क्या है, कि हमें एक उदार दिल का भाव रखना है, हम देखा किसी प्रभुषी रामचंड्र जो थे, उन्हें राक्षों के साथ जो परताव किया, उन्हें किसी का विनाश नहीं किया, उन्हें में से ही राक्षों से नहीं, एक को राजा बना दिया उन्होंने, उसी तरह से हम देखा शिलप्रभुपाद, वो मिसस एन के साथ, और फिर उनके जो गॉड़ बरदर थे, उनके साथ भी, क्या है, उन्होंने देखा कि, ठीक है, वो मेरा विरोध कर रहे हैं, पर उन्होंने उसके खिलाफ कुछ नहीं किया, तो हमें क्या, हमारा उद्देश क्या है, it is ultimately, हमारा purpose जो है, वो destruction नहीं है किसी का, किसी का विनाश नहीं क्या है, वो harmonization है, हमें धर्म का establish करना है, इसलिए क्या करना है, अगर fighting भी करना हैं हमें, तो fighting is for a purpose, जो हमारा उद्देश है, उसके लिए हम संगर्च कर रहे हैं, नकिले, against a person, अगर किसी के खिलाफ हम करते हैं, तो क्या होता है, उससे हमारे चीतना दूशिद हो जाती है, और उससे कभी, जो resolution है, वह नहीं आएगा।
बहुत बधन्यवाद, हरे कृष्णा।