Dealing with insecurity Mahabharata San Diego
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संक्षिप्त सारांश
हरे कृष्णा तो आज मैं जो हमारे जीवन में एलग-एलग प्रकार के भय होते हैं इंसेक्यूरिटीज होते हैं उसके बारे में चर्चा करूँगा और कुछ हद तक जब भक्ति फुल टाइम करने का प्रयास कर रहे हैं ब्रह्मचारी जीवन में उसके बारे में इंसेक्यूरिटीज हैं उसके बारे में चर्चा करूँगा थोड़ा जीवन को स्वामिपाद भगवाद गीता के उनके जो विश्टलेशन उन्हें किया है शत्संदर्बों में उसमें वे विश्टलेशन करते हैं कि भगवाद गीता का मूल संदेश क्या है और इसके लिए भगवाद गीता का पहला शलोक और आख्री शलोक उसके चर्चा करते हैं पहला शलोक जो भगवाद ने।
मुख्य ट्रांसक्रिप्शन
हरे कृष्णा तो आज मैं जो हमारे जीवन में एलग-एलग प्रकार के भय होते हैं इंसेक्यूरिटीज होते हैं उसके बारे में चर्चा करूँगा और कुछ हद तक जब भक्ति फुल टाइम करने का प्रयास कर रहे हैं ब्रह्मचारी जीवन में उसके बारे में इंसेक्यूरिटीज हैं उसके बारे में चर्चा करूँगा थोड़ा जीवन को स्वामिपाद भगवाद गीता के उनके जो विश्टलेशन उन्हें किया है शत्संदर्बों में उसमें वे विश्टलेशन करते हैं कि भगवाद गीता का मूल संदेश क्या है और इसके लिए भगवाद गीता का पहला शलोक और आख्री शलोक उसके चर्चा करते हैं पहला शलोक जो भगवाद ने इंस्ट्रक्षन उपदेश के रूप में बोला है आख्री शलोक जो उपदेश के रूप में बोला है पहले वचन जो भगवाद गीता में बोलते हैं वो पहले अध्याय के 25 शलोक में बोलते हैं पर यह जो वचन है यह डिस्क्रिप्टिव है यह इंस्ट्रक्षन नहीं है तो बनन कर रहे हैं देखिए आप दूसरे अध्याय में दूसरे और तीस्र शलोक में बगवान पुना कुछ बोलते हैं पर वो ही क्या है वो मित्र के रूप में एक दूसरे को प्रोटसाहन दे रहे हैं हे अर्जुन ऐसा अनारे करमत तो मत करो एसे कश्मा कलमश्टम में कहां से आ रहे हैं।
ऐसे मत आना जा तूम्हें। क्लिएग्म्यम्मास्वगम्हापार्थानई तत्त्वे वपद्यते सुत्रम्रदेधर्बल्यम् त्यक्तोथिष्टपरंतपां। तो यह दोनों श्लोक भगवान भी एक मित्र के रूप में बोर रहे हैं और उसके बाद में अरुजुन शर्णावल होते हैं और जो पहला श्लोक भगवान बोलते हैं, दूसरे अध्यावन ग्यारावा श्लोक अशोचान अन्वशोचस्त्वं प्रज्यावादां श्यभाशसे गतासुन गताउत्मिष्य नानुशोचन्दि पंडितः अशोचान अशोचान मतलब जिसके बारे में शोक करना उचित नहीं है जो शोक करने के यूग्य नहीं है अभी एक तरह से शोक और भै ये अलग-अलग भावनाई हैं पर शोक भी होता है वो भै से ही सम्बन्नित है वही शब्द जो है जो मूल शब्द है शोचान का शोच वह भगवाईदा का आखरी शब्द भी है जो भगवाईदा उब्दिश आत्मक रूप में बोलते हैं भगवाईदा जो अथ्वावे अज्ञे के 72 श्लोक तक बोलते हैं पर सथ-सत्-72 तक वो फलश होती है 72 श्लोक यह एक प्रश्णा आत्मक श्लोक है पर जो आखरी उब्दिश आत्मक श्लोक है वो सर्वधर्मान परित्यच मामे कंशन प्रजब अहम् तौम सर्वपापेभ्यो मोक्षेशामि माशुचः यह देखिए symmetry अशोच्चान और माशुचः मूल शब्द एक ही है और अशोच्च है यहाँ पर माशुचः है मतलब भगवाइदा का संदेश जिन्गो स्वाइन बोलते है इन शुरुवाग बलके श्लोक से हम देख सकते हैं कि आप शूक मत करो आप भय मत करो तो अभी यस्यां वैशुरुय मानायां कृष्णे परमपूरुषे भक्तिर उत्पत्यते पुंसां शोक मोह भयापहां