Hindi – Chapter 15 Bhagavad Gita And Decision Making Bhagavad Gita Overview Insights – Chaitanya Charan
- Home
- Lecture Series
- Bhagavad Gita & decision making
- Hindi – Chapter 15 Bhagavad Gita And Decision Making Bhagavad Gita Overview Insights – Chaitanya Charan
Disclaimer: This transcript was generated using AI and may contain occasional errors or inaccuracies.
संक्षिप्त सारांश
हरे कृष्णा कृतग्यों कि आज आप सबके बीच में वापस आप आया हूँ जो भगवद गीता हमने चालू की थी अगले 2-3 दिनों में हम जो बाकी अध्याये बच्चे हैं वो पुरा करेंगे करने का प्रयास करेंगे तो अभी तक हमने जो 14 अध्याय गीता के लिए थे तो आज 15 अध्याय ले गए और फिर शाम को मैं कल शाम को 16 अध्याय लोगा क्योंंकि वो थोड़ जादा सब के लिए रेलिवन्ट है आज 15 फिर 17 आज शाम को कल सुबह 18 का एक पार्ट ले गे और फिर कुछ प्रश्न उत्तर हो गए या ज़रूरी होगा तो फिर थौस्ड़े इवनिंग को भी एक क्लास रखेगे और इस तरह से हम गीता पूरा करने का।
मुख्य ट्रांसक्रिप्शन
हरे कृष्णा कृतग्यों कि आज आप सबके बीच में वापस आप आया हूँ जो भगवद गीता हमने चालू की थी अगले 2-3 दिनों में हम जो बाकी अध्याये बच्चे हैं वो पुरा करेंगे करने का प्रयास करेंगे तो अभी तक हमने जो 14 अध्याय गीता के लिए थे तो आज 15 अध्याय ले गए और फिर शाम को मैं कल शाम को 16 अध्याय लोगा क्योंंकि वो थोड़ जादा सब के लिए रेलिवन्ट है आज 15 फिर 17 आज शाम को कल सुबह 18 का एक पार्ट ले गे और फिर कुछ प्रश्न उत्तर हो गए या ज़रूरी होगा तो फिर थौस्ड़े इवनिंग को भी एक क्लास रखेगे और इस तरह से हम गीता पूरा करने का प्रयास करेंगे गीता पूरी करने का तो अभी थोड़ा बैक ग्राउंड लेते हैं जो गीता के अध्याय है उन में से जो पंद्रावा अध्याय और बारावा अध्याय ये सबसे चोटे अध्याय हैं जो पंद्रावा और बारावे हैं वो दोनो जो है बीस बीस शलोकों के हैं 20 वर्स हैं और सबसे बड़े जो है वो पहला और आखरी है पहला जो है अगर दूसरा जो है पहले बोलना लगते हैं वो 72 शलोकों का है और जो यहाँ जो है वो 78 शलोकों का है अध्याय तो अभी इसमें से जो आखरी सेक्षिन है जो एक तरह से जो गीता है आर्जुन को मारगदर्शन दे रही है कि आपको किस तरह से फैसला करना है क्या फैसला करना है तो जो गीता है एक तरह से कोई तीर… use the other one यह बेटर है या तो कोई अगर तीर मांदी जीज़े कोई target है target कोई निशाना मारना है तो सामने से एक तरसे मारना आसान है पर कोई अगर साइड से मारता है बराबर वही पर लगता है तो फिर क्या है वो बहुत एक्सपर्ट आर्चर है तो वैसे ही भगवान जो अर्जिन को बोल रहे है फाइट आपको युद्ध करना ज़रूरी है पर वह युद्ध करने का संदेश है पहले वो कर्म योग के दुश्टी से देते हैं पहले से 6 अध्यायों में फिर भक्ति योग के दुश्टी से देते हैं 7 से 12 के अध्यायों में और फिर ज्यान योग के दुश्टी से देते हैं 13 से 18 अध्यायों में तो एक तरह से जो call for action है वह हर जगह सेम है जो उसके पिछे जो philosophical analysis है तत्वग्यान के स्थरपे जो analysis हो रहा है वो अलग है तो विज्ञान के दुश्टी से जब भगवान बता रहे है तो बताने की ज़रूरत क्या है उनको क्योंंकि तेरवे अध्याय में गीता में कुछ ऐसे अध्याय है जो क्रिश्न आर्जुन का कोई जवाब दे रहे है इसलिए शारू हो रहा है वो तो जो तेरवे अध्याय में शुरुवात होती है आर्जुन जो सवाल पूछते है छे शब्दो के बारे में पूछते है वो पूछते है कि ज्यान क्या है गिन्य क्या है परुष्य क्या है परकृति क्या है खेत्र खेत्र गिन्य रेवं तो वोलते है कि ये सब मुझे जानना चाहता हूँ तो अभी वो शब्दो के बारे में जानना चाहते है उसके पिछे संकल्पना जो है वो जो वोल्ड व्यू है जो विचार धारा है वो जानना चाहते है तो उसका जवाब भगवान देते है तो ये आर्जुन के सिक्स टर्म्स के क्वेश्चन्स है ये दीज आर अबाउट कैसे जो पुरुष है वो प्रकृति में फसता है उसका वर्ण है पुरुष प्रकृति बॉंडेज कैसे बंदन होता है कैसे मुक्ति होती है उसका वर्ण वहाँ पे 13 अध्याय में था और जो 14 अध्याय में था की जो गुण जो है तो ये है पुरुष और ये है प्रकृति पुरुष प्रकृति में क्योंं फस गया है क्योंंकि भूंगते भूंगते मतलब वो भोक करना चाहता है और ये प्रकृति में क्या आ रहा है प्रकृति में जो दिख रहा है वो क्या है प्रकृति जान गुणान जो गुण है गुण से जो मोहा आ रहा है वो दिख रहा है तो अभी इसमें व्यक्ति फसा हुआ है तो अभी ये जो मोहा होता है जैसे मैं टीवी पे अनेक चानल होते है कुछ अच्छी सात्मिक हो सकते है कुछ भक्ति के वारे में हो सकते है कुछ बहुत तामसिक हो सकते है वैसे जो भौतिक जगत में मोहा होता है वहाँ भी अलग अलग परकार का होता है तो अभी जो 13.28 जो है इसको कभी कभी ये बीज शलोक कहते है जैसे किसी बीज से व्रुक्षा आता है तो जो बीज शलोक है इससे जो व्रुक्षा आया है वो व्रुक्षा का वरणन भी 15 अध्याय में है 15 अध्याय में क्या है जो पुरुष्य इस जगत में फसा है तो कैसे फसा है उसका वरणन यहां पे हो रहा है तो अभी इसका मतलब क्या है कि इस अध्याय में अभी भगवान बताएगे कि कैसे जो व्यक्ति मोह में फसा है तो वो मोह क्या है तो जो उर्धमूलमदः शाक्हम है तो अभी इसका I just go over the chapters इसमें क्या है कि जो मोह है the illusion illusion उसको एक त्री के मेटफर से त्री के उपमा से समझा जा जा रहा है पिर उसके आपने स्वलावे अध्या में क्या है इसके टू एक्स्ट्रीम एक्स्ट्रीमिटीज of the tree कि जो रुक्ष्य होता है कि उसके उपर क्या है उसके नीचे क्या है बिल्कुल opposite direction तो दैवा और आसुरी प्रवृत्ति है सत्रवे अध्या में क्या है जो उननों के बिट्वीन है जो दैवी नहीं लगते है जो पूरु तरह से आसुरी नहीं लगते है उनके बारे में क्या वर्ण दे उनके क्या स्तर है वर्ण दे आक्रे अथ्रवे अध्यामे फिर वर्णा आता है कि ये सारा ज्यान प्राप्त करके कैसे हाऊ टू आक्ट कैसे हमें कारे करना चाहिए जिसे की बंधन में न फसे तो नो बॉंडिज जिसे की बंधन न हो यह वर्ण इस आक्रे अध्यामे में हो रहा है तो अभी हम पंद्रवे अध्यामे देखें तो पंद्रवे अध्यामे में जो मोह व्याप्त है उसका अभी वर्णन हो रहा है तो जो वर्णन हो रहा है कि वो पहले प्रसिद्ध शलोके उससे हम चुरू करते हैं श्री भगवान वाचव भव अउशदाच्रोत्र मनोभिरामा हरी नाम हरी कता यह एक अउशद है अलग अलग उप्माएं दिजाती हैं हमारी जो इस जगत में परिस्थिती हैं उसे समसमच सके और उससे बाहर निकल सकते हैं हर एक उप्मा का अलग अउद्देश होता है तो अभी यहां पर जो उप्मादी बताई है क्या है एक व्रुक्ष की उप्मादी है पर कैसा व्रुक्ष है वो वो एक उर्ध्वमूलम अधःशाकम ऐसा व्रुक्ष है जो उल्टा है तो अभी ये उल्टे बता जा रहा है कि जो परिस्थिती है ये अन्मैचिरल है ये निसर्ग के विब्रीत है हर जो उधारन होता है उससे कोई एक पॉइंट बता जाता है क्योंंकि हॉस्पिटल का उधारन होगा तो क्या है अगर हॉस्पिटल में है तो दवाई लेनी है अगर जेल में है तो क्या आपको अच्छा बरताव करना है फिर आपको जेल से कोई छोड़ देगा अगर आप सागर में हो तो क्या है आपको नाव से बहार निकले आप अगर आप सपने में हो तो क्या है आपको उठना है किसी न आपको उठाना है धोई लगेगी आपको तो अलग अलग उधारना का क्या है अलग अलग उद्दिश होता है तो यह उससे अलग अलग पॉइंट करने के जाता है तो यहां पे यह जो गीता का अध्याय है उसका एक उद्दिश है कि यह अन्नाचुरल एकजिस्टन्स अन्नाचुरल एकजिस्टन्स जो हमारी परिस्थति जो अभी है वो अस्वाभाविक है अस्वाभाविक से स्वाभाविक परिस्थति कैसे जाए इसका वर्ण यहां पे हो रहा है तो अब इसमें जो अभी कोई व्रुक्ष होता है मान लिए कोई व्रुक्ष है तो अगर कोई व्रुक्ष किसी को उल्टा दिख रहा है तो उसका मतलब क्या है कि वो जो है ये एक reflection है ये एक प्रतिबिम्ब है तो प्रतिबिम्ब इस शब्द का सब्शरूप से उलेक नहीं किया गया है गीता में पर वो एक तरह से उसके संकीत किया गया है उसके बारे में तो आपको व्रुक्ष उल्टा दिखेगा तो कहां दिखेगा किसी प्रतिबिम्ब में दिखेगा तो अगर प्रतिबिम्ब है तो एक तरह से जो वेक्ति अगर यहां पर है उसको अभी प्रतिबिम्ब को देख रहा है तो क्या करना है उसकी दुरिश्टी जो है प्रतिबिम्ब से सत्य के ओर ले जानी है और यह जो जर्णी है वही पंधरवे अध्याय की जर्णी है पंधरवे अध्याय में यह शलोक बता जा रहे है कि यह प्रतिबिम्ब क्या है यह प्रतिबिम्ब अभी यह क्या है जर्णी तू एन्लाइटनमेंट और लिबरेशन कि इस मोहों में अगर फसा हुआ है कोई प्रतिबिम्ब देख रहा है और प्रतिबिम्ब कोई आम का व्रुक्ष है तो वो नदी में तो अभी जो गीता में जो वरनन है जो इस पंधरम की पहले जो पाँच शलोक है दुक जेल रहा है तो यहां से जो यह जो कैसे यह यह reflection है इस प्रतिबिम्ब है इसके परे भी और कुछ है क्या तुम कलपना कर रहे है ऐसे कुछ है तो अगले पाँच जो describing and attaining reality यह सत्य क्या है यह प्रतिबिम्ब है जो प्रतिबिम्ब से सत्य के ओर जाना है वो कैसे जाना है उसके लिए क्या करना है उसका वरनन है तो अभी एक तरह से देखेंगे तो यह जो है इसमें जो जो पहला, अगर इसको चार सेक्शलles बोलती हैं वन,टू, थी, और फोर तो यहांपे पहला क्या है यह इसका वरनन है पिर दूसरा क्या है कि इसमें हम कैसे दूल बुगत रहे है हम कैसे इसका nature है यह फिर इसके बाद में हम कैसे दुख बुगत रहे हैं?
फिर जो तीसरा है, ये क्या है? पॉइंटर्ज है, ये क्या है? ज्यान चक्षु है. कैसे हम देख सकते हैं कि इस जगत में ही इसके परे कुछ है?
और आख्री है, कि कैसे इसको हम प्राप्त कर सकते हैं? कि अटीनिंग, प्रतिबिंब क्या है? समझ दिया हमने, पर उसके बाद में उसको हमें सत्य जो है प्राप्त करना है. तो इस तरह से इस अध्याय में ये चार विभाग हैं. और पहले विभाग में, जो पाच शलोक है, उसमें भगवान वरनन करते है, कैसे जो इस जगत में वेद है, तो एक तरह से भगवत गीता, ये एक वेदिक ग्रंत है, पर भगवत गीता, अधिकान शुरूप से, जो वेद शब्द के दो अर्थ होते हैं, वेद है, जो चतुर वेद होते हैं, और वेद मतलब, जो सारा सनातन धर्मे ग्यान आया, उसको वेदिक ग्यान बोलते हैं, वेदिक वेदिक संस्कुर्ति बोल सकते हैं, तो क्या है, गीता जो है, it is both वेदिक and ट्रांस वेदिक, ट्रांस वेदिक मतलब क्या है, गीता कई बार बोलते है, कि त्रईगुन्य विशया वेदा, तो जो वेद ये शब्द का आर्था है, अगर उसका एक छोटा आर्था होता है, क्या है, चतुरवेद, तो अगर ये आर्था लिया, तो क्या है, ये अधिकांश रूप से कर्मकांड के बारे में हैं, और भंगोदिता बोलती है, कि गीता जो है, फिर क्या होगा, गीता इस, ट्रांस वेदिक, और फिर गीता, अगर वेदा का, गीता का, वेद ये शब्द का आर्था बोलते है, कि all knowledge, वेद का आर्था, सो भी ज्यान है, तो फिर, जो गीता क्या है, गीता ज़रूर वेदिक है, और गीता समिठ है वेदिका, तो इसमें क्या है, या, परमार्थिक ज्यान जो है, आध्यात्मिक ज्यान जो है, उसके बारे में वरना आता है, परमार्थ के बारे में, तो अभी, यहाँ पे क्या बता जा रहा है, कि इसी वुरुख्ष में जो पन्ने है, जो परन है, जो वुरुख्ष के पत्ते है, वह क्या है, वह वेद है, तो अभी इसका मतलब क्या है, कि अभी वुरुख्ष के पत्तों से क्या आता है, फूल आता है, फल आते है, तो जो वेदों में जो विधिविधान बताये है, वेदों के विधिविधानों से, इस जगत में भौतिक फल मिलते है, धर्मा अर्थकाम मिलता है, पर क्या है, वह फल मिलेगे भी, किसी को एश्वरे मिल जाएगा, किसी को क्याती मिल जाएगी, वो सब भी भौतिक ही है, वह जो है, वह वास्तों में आध्यात्मिक नहीं है, इसलिए जो वेद है, वह भी इस जगत के मोह का ही एक विभाग है, इसलिए यहां पर ऐसे बता जा रहा है, तो इसलिए अभी इसी श्लोक में आ गया बताते है, कि यस्तम वेद सवेदवित, जो यह वेदों को जानेगा, उसको वेदवित नहीं बता रहे है, जो इस वुरुक्ष को समझेगा, वह वेदवित है, सिर्फ वेदों के श्लोक जानके क्या होता है, बगवान बताते हैं दूसरे अध्या में, वेद वादरतः पार्थ, जो कर्मकाण में फ़स जाता है कभी कोई, तो इसलिए हमें इस समझना की, सारा जो वुरुक्ष है, वो एक तरह से मोह है, और वुरुक्ष के हमें परे जाना है, तो बगवान बताते हैं आगे, इसका रूप है, इसको समझना बड़ा मुश्किल है, इसको, जो रूप है, इस समझना बड़ा मुश्किल है, उसका अंत कहा, उसका शुरुवात कहा है, उसका मूल कहा है, ये बहुत मुश्किल समझना है, तो किसी वुरुक्ष को तोड़ना है तो क्या है, उसको मूल को तोड़ना है, तो मूल कहा है, पता करना पड़ेंगा उसको, तो अभी यहाँ पे क्या बताते हैं, कि हमें, वासतों में, तो इसकी जो मूल है, वो बहुत, बहुत निचे गए है, तो उसको हमें तोड़ना लगबग नामुमकिन है।
पर कैसे हम तोड़ सकते हैं? असंगशस्त्रेन दुरुधेन अचित्वा। तो असंग, असंग, संग मतलब आ सकती है।
वे तेरावे वध्याय का बाविसाशोग जी पता था। पुरुष्यः प्रकतिस्तोही भुंग्ते प्रकति जानगुणान कारणं गुण संगोस्य। असंगशस्त्रेन दुरुधेन अचित्वा।
आचारे बताते हैं कि हम वास्तमें इस वुरुख्ष को नहीं तोड़ सकते हैं। क्या है? वो वुरुख्ष को बता रहे हैं।
अवयय यह हमेशा से रहता है। बहुत एक जगत हमेशा से रहेगा। पर क्या होगा?
हम जो बंधे हैं इस वुरुख्ष में, उससे हम निकल सकते हैं। जैसे वो कोई मूइ थियेटर है, उसमें मूइ के शो चलते रहेगे, पर हम फैसला कर सकते हैं कि मुझे अभी नहीं देखना इसको। तो हम वो टीवी को मन नहीं कर सकते हैं, मूइ चलते रहेगा, पर हम जो खुद देख रहे हैं, उसको बंध कर सकते हैं।
तो इसलिए हर एक व्यक्ति को जो असंग है, वो कल्टिवेट करना है, उसको विक्सित करना है। और उसके बाद में क्या बहुते हैं भगवान? ततः पदम तक परिमार गितव्यम ततः पदम तक परिमार गितव्यम यस्मिन गता ननिवर्तन्ति भूया तमेव चाध्यम पुरुषम् प्रपध्ये पुरुषो उत्तम् योग यतः प्रवृत्ति प्रसुरुता पुराणि उस परम पुरुष को सम्जो अश्वत्थः उधारन यह उपनिशेदों में दिया गया है उपनिशेदों में क्यी बार थोड़ा वो इम्परस्नलिस्त दुश्यी पताएगा पर भगवान यहाँ पे पताएगे आश्वत्थः उधारन ले रहे और इसके साथ सात्वों का कर रहे हैं?
उसके परए एक फुरुश है बोल रहे हैं और उसके परे मदबपर पूरुष को प्राप्ट करना है तो अभी ये बताने के बद पहले भगवान थोड़ा उलेग कर देते हैं कैसे है कि अभी मैं पता है कि यह जगत का मोह है यह इसमें बहुत फसे हुए हैं हम तो भगवान बोलते हैं कि इसके परे क्या है पहले एक बता नहीं थे कि यह reflection है यह reality है वो reality क्या है? बोलते हैं कि यह वो उनका धाम है न तद्भासयते सूर्यो न शाशां को न पाव कहा तो बताते हैं कि उस धाम का लक्षन क्या है कि उसको सूर्य के ज़रूरत नहीं पड़ती है उसको अगनी के ज़रूरत, न तो अगनी न तो चंडर के ज़रूरत पड़ती है रोशनी के लिए तो उसका मतलब क्या है?
वो स्वयम रोशनी ने वाला है, वो सेल्फ एफल्जुन्त है तो यह जो उपनी स्वयम में विख्यात के लोग आता है तमसोमा जोतिर्गमा तो वही भाव है कि जगत जो है, वो तमस की जगा है और वो जो भगवधाम है, वो रोशनी की जगा है जोती की जगा है वो और जो जोती है मतलब क्या है? उसमें बाहर किसी जोती की जूर्वत नहीं है और इसका वर्ण आता है, पर भगवधाम बताते है कि वहां पे जाओगे तो आप वापस नहीं आओगे यदगत्वाननिवर्तन्ते तो आप वापस नहीं आओगे पर वो क्या है? तध्धाम पर मंममम तो इस जगत के परे वो जगत है, वो मेरा ध्धाम है वो सेल्फ एफाल्जेंट है, वो स्वयम रोशन देने वाला है स्वयम प्रभाय आती है उससे तो अभी ठीक है अभी कोई अभी भारत में रह रहा है उससे पतलता है कि ये अमेरिका नाम की जगा है और वहाँ पर ऐसे लोग रहते हैं, ये करते हैं तो अभी सिर्फ किसी जगत के बारे में सुनने से वहाँ पर जाने की इच्छा जागरूत नहीं होती है वह जगा कितनी अच्छी है या ये जगा कितनी बुरी है तो जो तुल्ला होती है ठीक है यहां से मुझे यहां पर जाना है तो अभी पहले भगवान बताते है कि कैसे इस जगत के मोह में हम वसे हुए हैं तो जो अगला शलोक आता है उसमें विख्याच शलोक है हम साथ में इसको रिस्पॉंस करते है साथ में ममैवाम्शो जीवलोके जीवभूता सनातनह मनः शष्ठानिन्द्रियाणी प्रकृति स्थानिकर्षती यहां पर बहुत कुछ बता जाया है शलोक में पर यह संधर्ब में सबसे महत्वपूर्ण क्या है दो चीज़े है बोलते है कि हर जीव मेरा ममैवाम्श है सनातन के लिए है पर क्या होता है जब वो डिस्कन हो जाता है तो क्या होता है कर्षती कर्षती मतलब वो दुख बुगत रहा है तो अभी पहले यह इस जगत का मोह बताया क्या है मोह और मोह में दुख क्योंं है वो बता जा रहा है तो अभी क्या बोलते है कर्षती अभी जो इस जगत में कर्षन हो रहा है वो कर्षन अलग-अलग तो यहां पे भगवान जो कर्षती बता रहे है वो किसी दुख से बता रहे है कर्षती क्या दुख है इस जगत में वो बोलते है कि हमारा सारा जो अस्तित्व है वह किसी भी किशन पर हमसे छिना जा सकता है तो जो पुनर जन्म का वरनन यह दूसरे अध्यां में आया था संक्षिप्त में वासामसी जिर्णानिय था अब यहां आया कैसे कि हमारा शरीर जो है वो एक वस्तर के समान है और वस्तर को हम त्याग देते हैं जब वो खराब हो जाता है पर यहां पे क्या वरना आता है वो बोलते हैं कि केवल एक वस्तर नहीं है हमारी सारी जिर्ण की संकल्पना होती है वो सबकुछ छिनी जाती है और भगवानत देते है यच्चापे उत्क्रामतीश्वर हा उशीश्वर बोल रहे है जीव को पर वो बोलते है कि कैसा इश्वर है जो उसकी इच्छा के बिना उसके जानकारी के बिना एक शरीर में आता है कुछ समय तक रहता है और फिर उस शरीर से बाहर के लिए आता है अभी हमें मुत्यू कब आने वाली है हमको पता नहीं है और हम इस जगत में जब जी भी रहे हैं तो किस हथ तक हम स्वतंतर हैं किस हथ तक वास्तव में हम स्वतंतता से सुख प्राप्ट कर सकते हैं यहाँ पता रहे हैं कि जीव है वो खुद को समझता है कि मैं इश्वर हूँ पर वास्तव में इश्वर नहीं है अगर मालिजी हम किसी घर में रह रहे हैं और वो जो घर का मालिक है वो कभी भी हमें घर से निकाल सकता है तो फिर किस हथ तक हम उस घर में संतुष शानत रह सकते हैं संतुष हो सकते हैं किस हथ तक हम कह सकते हैं कि मैं इस घर का स्वामी हूँ तो यह जो है इस श्लोक में जो दुख का बढ़न हो है वो एक बिक पिच्चर अनालिसिस है कह रही है यह मेरी बात नहीं सुन रहा है यहाँ पर यह घरमी हो गई, यहाँ पर यह आवाज आ रहा है तो चोड़ी-चोड़ी समस्याई है पर जो बहुत बड़ी समस्या क्या है कि हमारा जो सर्वस्व है हमसे छिना जाता है तो बोलते हैं कि कैसे जीव जो है हर जीवन में एक हर लाइफ्टाइम में एक नया ही संकल्पना लेके एक नया जीवन चुड़ू कर देता है तो इससे क्या है कि कैसे अगर वो देख रहे हैं तो एक टीवी शो खतम हो जाता है हर टीवी शो इस जगत में जो होता है इस जगत के मोहमे वो ट्राज़िडी होता है कोई अगर मुवी देख रहा होता है कुछ लोगों ट्राजिक मुवी देखने में अच्छा लगता है पर क्या साधा है तो लोग जो मुवी देखने जाते हैं थोड़ा कुछ जीवन वैसे दुखी है थोड़ा कुछ सुख चाहिए, मुझे रहा चाहिए, रिलिफ चाहिए पर अभी हर एक जो जिस जगत का मुवी होता है वो लगता है कि ये एक अच्छा मुवी है कोई देखने जाता है उसको लगता है कि ये एक रोमैंटिक कॉमेडी है पर निकलता है वो ट्राज़ेडी है और तो ट्राज़ेडी ऐसे ही नहीं है कि वो हीरो हीरो निकला ट्राज़ेडी हो रहा है वो ट्राज़ेडी हमारे साथ हो रहा है तो क्या है हर बार होता है पर क्या होता है ऐसे नहीं है कि वो ठीक है अभी एक ट्राज़ेडी हो गया तो क्या ठीक है अभी बंद कर तो अभी मैस बाहर निकल जाओँगा अभी कुछ समय पहले पाकिस्तान भारत से हार गया क्रिकेट में तो बहुत से पाकिस्तानी के पाकिस्तानी के जो फैन्स का भी सोचल टीमारे से रियाक्शन आता है तो तो टीवी तोड़ दिया वो कोस रहे वोले कि क्रिकेट कभी देखोगा ही नहीं अब जो बारत पाकिस्तान का राइवल्री था ये राइवल्री रहा ही नहीं है अभी कभी बाकिस्तान भारत का मैच नहीं करता है तो क्या लोग फर्स्ट हो जाते हैं मैं अभी कुछ इसमें रुची नहीं रखूंगा पर क्या होता है अगले बार राइच हो जाएगे सब आपस देखे लग जाएगे तो ये जो है कि हम इस जो मोहा है इससे बाहर नहीं निकलते हैं एक हौरर मूवी ख़तम हो गया तुरंत दूसरा हौरर मूवी चाल हो जाता है और शुरुरात में लगता नहीं है वो हौरर मूवी है तो भगवान कह रहे है यहां पे कैसे की हर जीवन में हमको एक शुरुत्रम चक्षु सपर्शरम चाल है हमको अलग अलग इंद्रिया मिलती है और इंद्रियों से हम जीवन जीने का उठक्रामन्तम् स्थितंवापि अगर हम अमेरिका में जाएगे, अभि थोड़े बार्तिया लोग अमेरिका में ज़्यादा हो गये, पर दस साल पहले ज़्यादा था अमेरिका, वो देख, वहाँ पर लोगों को क्रिकेट ये शब्त शुनता है, तो उनको एक इंसेक्ट यादाता है, उनको गेम यादाता ही नहीं है।
क्रिकर यादा पता नहीं, वहाँ पे लोग बेसबॉल खेलते हैं। अगर आप कैनेडा में जाएगे तो आईस होकी खेलते हैं। क्रिकर यादा पता नहीं, वहाँ पे लोग बेसबॉल खेलते हैं।
क्रिकर यादा पता नहीं, वहाँ पे लोग बेसबॉल खेलते हैं। भुञ्जानम्वागुणान्वितम् साभी उस जगत मैं जो जीव फ़सा हुआ है पर ये कहा है विमूढा नानु पशंधि जो मूरख वेक्ति है वहां जो मूहित हो गया है पशंधी नाओ वो देख नहीं पाता है और बोसे कर हैने आ है आ रह. मैं तो सुकी हूँ मैं भोग कर रहा हूँ क्या समस्या है विमूढा नानु पश्यन्ती तो कौन देख सकता है पश्यन्ती ज्ञान चक्षुशा तो कुछ मोह ऐसे होता है कि वो अभी उस मोह में दुख भी हो रहा है पर वो दुख से बाहर निकलने की पश्यन्ती नहीं होता है सोचल मेडिया में अलगोर्थम्स ऐसे होते हैं कि लोग सर्फिंग करते हैं तो क्या होता है वो दस रील देखेगे दस शॉट देखेगे यह देखेगे पर उसके हाथ में एक ऐसे आता है तो यह अच्छा है लगता है तो माया का मोह ऐसे होता है कि यह जो मोह में हमारा दुख होता है यह इलूजन ऐसे है कि कभी हम होपलेस्ली फ्रस्ट्रेटेट नहीं होते हैं फ्रस्ट्रेट कई बार हो जाते हैं पर क्या होता है वो हमेशा होपलेस्ली फ्रस्ट्रेटेट होते हैं मतलब क्या है कि ऐसे नहीं है कि हम हजार बार भोग करेंगे और हजार बार पुरा दुखी मिलने वाला है जितना अपेक्षा होती है उतना सुक कभी नहीं मिलता है पर अगर हजार बार भोग करते हैं तो क्या होता है कि होपलेस्ली फ्रस्ट्रेटेट मतलब थाउजन टाइम्स हजार बार हर बार क्या है सफरिंग ही है दुखी है पर क्या होता है जब यह होपलेस्ली फ्रस्ट्रेटेट मतलब क्या होता है जब भोग करते हैं तो शायद 900 बार दुखोगा 90 बार थोड़ा कम दुखोगा 9 बार थोड़ा सा little happiness होगा, थोड़ा सा सुख होगा एक बार कुछ lot of happiness होगा तो क्या होता है इसके कारण अगर टोटली देखेंगे तो क्या है वो दुखि है उसने पार वो एक बार जो सुख मिलessa का उससे क्या होता है कि अगरी बार मिल जाएगा माया का मुझां एसे है अच्छा अबी नहीं मिल blob पर अबी मिल जाएगा अभी मिल जाएगा और जो पूरा.. जो पूरी तरह से ऐसेनहीं है जो जगत में सुकनहीं है परालाद माहाराज दौ उधारन देते हैं एक उधारन देतहं है की वो मुर्गतृषणी रूपा बोलते हैं कहते हैं कि मुर्गतृषणी मतलब क्या है उसमें कोई पानी है ही नहीं।
पर उसी शलोक में कुट्राशिशेशुति सुखाम्रुगत्रिश्णिरूपा क्वेदं कलेवरं अशेष रुजामिरोह। वो बोलते है कि ये शरीर जो है ये आपको लगता है सुख मिलेगा अशेष रुजामिरोह। अनेग दुखातु का कारण है।
निर्वध्यते नतु जनो पीति विद्धुमान। फिर भी क्या है इतनी बिमारी है इस शरीर में इतने प्रकार से दुखाते हैं फिर भी जो मुद्धिमान लोग भी छोड़ नहीं बाते क्योंंकि क्या है मधु लवई शामयन्दु रापई क्या है थोड़ा सा मधु का एक लव है उसमें तो ऐसे नहीं है कि मुरुखतु रुष्टी में कोई भी पानी नहीं है पर यगत में अधिकांश रूप से कुछ भी सुक नहीं है और बीच में क्या है नकेवल मधु जैसे स्वाद आता है बहुत आनना आता है तो लगता है रे अभी अगली बार मुझे मिल जाएगा हम जो होते हैं ये होपलेसली फ्रस्ट्रेटेट नहीं होते हैं इसलिए क्या है जिसमें ज्यान चक्षु नहीं है ज्यान चक्षु मतलब क्या है एक बड़ा पिच्चर देखना मैं इतने समय से कर रहा हूं क्या मिला है मुझे इसमें पर जो स्मॉल पिच्चर देखता है अभी नहीं मिला अगली बार मिल जाएगा अगली बार मिल जाएगा तो अभी ये ज्यान चक्षु क्या है इसको हम प्राप्त कर सकते है वो अभी अगली सेक्षन बताते है भगवान भगवान बोलते है कि ये ज्यान चक्षु समझने के लिए भी क्या है तो इसे बाता थोड़ा सत्व चाहिए अगली सेक्षन बोलते है यतन्तो योगिनश्चाइनम् पश्चन्त्यात्मन्यवस्थितम् यतन्तो अप्यक्रतात्मानों नयिनं पश्चन्त्यचेत सहां तो जो थोड़ा शांत है जो थोड़ा आत्मन्यंत्रन किया है वह क्या है वह समझ सकता है कि वास्तो में मैं जो भोग कर रहा हूँ मैं जो आनंद प्राप्त करने को प्रयास करो उसके योजना किसी और ने की है नहीं तो फिर इसके बाल भोग में फसा हुआ है वेक्ति और कुछ इसके परे है ये समझ में नहीं आता है उसको तो अगले चार शलोकों में बारा, तेरा, चौदा में भवान बताते है कि अभी हम क्या चाह रहे है हम enjoyment चाह रहे है तो जो enjoyment है this is our desire हम चाहते हैं कि मुझे enjoyment मिले पर enjoyment के पहले क्या है existence हमारा अस्तित्व होना ये ज़रूरी है जैसे क्या है कि हम चाहते हैं कि मुझे स्वादिश्ट अन्न मिले स्वादिश्ट अन्न है ये इच्छा है हमको भोग मिलेगा पर उससे पहले क्या अन्न तो ज़रूरी है अन्न ही नहीं है तो फिर अस्तित्व ही नहीं रहेगा स्वादिश्ट अन्न की छोड़े दो तो भगवान बोलते है कि कैसे जो existence है इसके लिए ही हम we are there is dependence हम निर्भर है किसी और की कुछ ऐसी चीज़ जिसके हमारे परे है उस पर निर्भर है और भगवान ये तीन स्थर पर बोलते है अभी जो जीव है हम जहांपे जी रहे है तो हम एक ब्रह्मान्ड में जी रहे है तो एक कॉज्मिक स्थर पर एक ब्रह्मान्ड के स्थर पर भगवान बोलते है यदादित्यगतम् तेजो जगदभासे ते अखिलम् चंद्राम् सी अच्छागनव् तद्देजो विद्धिमामकम् यदादित्यगतम् तेज्देजो विद्धिमामकम् दुनिया में बहुत से ये फूड इंडस्ट्री होता है पर सारी जो इंडस्ट्री है वो फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री है कोई फूड प्रोडीूसिंग इंडस्ट्री नहीं है यो फूड इंडस्ट्री है कोई अन्न बना नहीं सकता है जो फूट पड्जूसिव है, only nature, निसर्ग बनाता है, और फिर निसर्ग के साथ हम कुछ कर सकते हैं, और निसर्ग में अगर अनाज नहीं आएगे, निसर्ग में विक्षन नहीं आएगे, तो हम कुछ नहीं कर सकते हैं, तो भगवान क्या बताते हैं, कि जो हमें खाने के लिए ज़रूरी है हम कह सकते हैं ना ही महनत कर रहा हूं मैंने महनत कर के पैसा कमाया और I have earned money मैंने कखाना लाया है सही है वो पर फिर भी वास्तों में हम कित्ना भी महनत केओं न करे।
अगर निसर्ग से ही अनन नहीं आएगा तो हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं तो हमारा जो एफ़र्ट है वो सेकेंडरी है बगवान का जो प्रोविजिन है वो प्राइमरी है जब पंची होते हैं, रोज सुबह उठते हैं ची ची ची ची ची करके वो अभी दूनने लगते हैं कहां मुझे कहां अनाज मिल जाएगा कहां मुझे खाने का चीज मिल जाएगा तो उनको प्रयास करना पड़ता है उनको इदर उदर दूनना पड़ता है देखना पड़ता है फ्लाय करना उड़ना पड़ता है तो उनका प्रयास है पर उनके प्रयास के द्वारा अनाज निर्मित नहीं हो रहा है वो अनाज किसी और किसी और की उजदा से हो गया है बैसे क्या है हमारे लिए बगवान बता रहे है कि हम जो जिससे जी रहे है ग्यान चक्षू मतलबे देखना कि मैं सारा इस जगत में जी रहा हूं पूछ भोग करने का प्रयास कर रहा हूं पर ये सब मुझसे परे किसी और चीज़ पर निर्भारित है निर्भर है वह तो वह एर्थली स्थर पे और फिर आखरी है जो फिजिकल स्थर पे भगवान बोलते है आहम वैश्वानरो भूत्वा प्राणि नाम देहमाश्रितः प्राणापान समायुक्तः पचाम्यन्नम् चतुर्विधम् वो बताते है कि किस रह से मैं जो है न केवल तुमको बाहर से अन्न देता हूं पर आन्डर से अन्न का पचल भी मैं घर वाता हूं हम पचल की प्रक्रिया को कभिया अढ नहीं करते हैं दिक्स खिल ने न हम कर्ये के लिए होते हैं बॉंद, कि derrière न हे नहीं हीं चाना कि जिंगेंदर काम नहीं कर रहे हैं तब भी हम याद करते हैं, तो कैसे है?
कि पर ये जो पचन है वास्तों में हम नहीं कर रहे हैं वो जो भगवाने एक अंतरणा बनाई है उसके अनुसार वो हो रहा है तो इस तरह से ज्ञान जक्षों से हम देख सकते हैं कि हम वास्तों में हमारे अस्तित्व के लिए ही किसी और पे निर्धारित है तो अभी अस्तित्व तो बेसिक है, उसके बाद में भोग है हम भोग भी करना चाहते है कोई आम खाना जाता है तो आम हम तो नहीं बना रहे हैं तो क्या है? कि इसे जब रावन सिता को देखता है तो वो बोलता है कि तुम्हे बना कर ब्रह्मा जी जो सृष्टि करता है वो रेटायर हो गए होगे कि तुम्हारा सौंदर्य ऐसे है कि इसके परे और कोई सौंदर्य बना ही नहीं सकता है तो जब मैंने पढ़ा वो तभी मुझे बच्चपन में एक उम्ही का सौंग था वो यादा गया था वो क्या था कि तारीफर करू क्या उसकी जिसने तुम्हे बनाया तो अभी क्या है वो भाव उसमें क्या है कि किसी ने इस जगत में जो आकरशिक चीदे वो बनाई है पर हम उसको भूल जाते हैं हम भोग के लिए वस्तो को लेते हैं तो हमारा अस्तित्व और हमारा भोग जो है वो सब जो है किसी और चीज पे निर्भर है कोई और सत्य है जिसे निर्भर है वो और भगवान बताते है कि मत्तः स्मृतिर ज्ञानम अपोहनम चो वो कहते है कि अगर तुम मेरा स्मर्ण करना चाहोगे तो मैं स्मर्ण करना दिदांगा तुमको अगर तुम किसी और चीद का स्मर्ण चाहते हो तो तुमको उस चीज का स्मर्ण होगा तो अभी यह ज्ञान चक्षु है उससे हम देख सकते है पर देखना चाहते है क्या हम तो जो है हमारा जो एक तरह से हमारा जो डिजायर है जो डिजायर अगर हमारा material enjoyment के लिए है भोग के लिए तो क्या होगा तो फिर भगवान क्या करेगे हमको remembrance देगे कि कैसे उसमें इतना सारा भोगे memory of enjoyment how enjoyable it is और यह forgetfulness जो है जो अपोहनम क्या देगे कि वो कितना miserable है उसमें भोग है थोड़ा सा पर भोग के बाद में दुख है तो भगवान हमें यह जो है किस चीज का स्वरंद देगे वो है हमारे इच्छा के अनुसार है अगर हमारे इच्छा है कि हमें भक्ति करनी है तो फिर भगवान क्या करेगे हमें यह याद दिलाएगे कि भक्ति में कितना अनंद है कितना ecstasy है कितना bliss है और जो forget है कि ठीक है उसके तपस्चा करनी पड़ती है भक्ति की ओर देखे गए तो भक्ति में कितना आनंद है उसकी भी स्मृति हो जाएगी भक्ति में कितनी तपस्चा है उसकी स्मृति हो जाएगी और अगर है कितनी तपस्चा करनी है यह करना है वो करना है वो करना है तो फिर क्या होगा फिर हम करने की इच्छा ही नहीं रहेगी हमको हमारी इच्छा के अनुसर भगवान हमें ज्यान, स्मर्ण और स्मृति देते हैं तो इसलिए हमारी इच्छा महत्वपूर्ण है तो जो अभी कोई टीवी का उधान देखते हैं जो टीवी में कोई देख रहा है क्या वो प्रोग्राम कुछ उसके एक नया प्रोग्राम देख जाता है कि वो टीवी देखना छोड़ना चाहता है उसकी इच्छा क्या है तो भगवान हमारी इच्छा के अनुसर वो रेसिप्रोकेट करते हैं और फिर आखरी सेक्षन है उसमें परम सत्य हम समझें कि इस प्रतिविम्ब में हम देख सकते हैं कि इस प्रतिविम्ब के परे कुछ है जो मुझे यहाँ पर दर्शा रहा है जो मुझे मेरा इसकी जलक में देख सकता हूँ कि वो मुझे मेरा पालन पोशन कर रहा है तो अभी वो परम सत्य क्या है तो वो थोड़ा टेकनिकल सेक्षन है पर उसमें कैसे है सोला, सत्रा, अठ्रा शलोग जो है इसमें भगवान ब्रह्मन परमात्म और भगवान का वरनन करते है मुतलब कि किस तरह से जो परम सत्य है वो सर्वव्यापी एक आध्यात्मिक रोशनी है उसमें एक मार्गदर्शक है और उसमें एक परमाकरच्यक, परमपुर्शोत्तम प्रेमपूर्ण व्यक्ति है उसका धीरे धीरे साक्षात कर होता है यो मामेव असमूडो जानाति पुर्शोत्तमं स सर्ववित भजतिमाम सर्वभावेन भारतव जो वास्तम समझेगा कि क्या है कि यह पुर्शोत्तम है वही वास्तम में मेरे हिच्छिंतक है वही मेरा कल्यान कर रहे है मैं उनको भूल जाता हूँ तो भी वो मेरा पालंपोशन करते है तो मैं अगर उनका स्मर्ण करूँगा तो क्योंं मेरा देखबाल नहीं करेगे मेरा सरक्षन नहीं करेगे परकल्प परकल्प कृतकृत्यश्च भारत उसको यश्मिल जाएगा यह जो ज्ञान है गुहियतमम् शास्त्रम् शास्त्रमें बड़ा गुहिय ज्ञान है और इसको प्राथ करने से मुक्ती उसको इस जगत के मोह से मिल जाएगी तो साराण्श में चार पॉंट देखिया हैं जमने किस तरह से पंधरावा अध्याय क्या जो था कि सबसे पहले basically it is from illusion to reality जो मोह से सत्य के ओर कैसे जाना है उसके बारे में वर्ण है तो उसके चार भी भागते जो एक से पाँच लोग है उसमें क्या है कैसा मोह है nature of illusion उसका वर्ण है तो उसके लिए क्या था जो एक व्रुक्ष है upside down tree तो upside down tree का मतलब क्या है कि ये एक प्रतिबिम्ब है और प्रतिबिम्ब का क्या उधारने देखा कैसे कोई है ये प्रतिबिम्ब या मोह जो है कोई बच्चा है वो टीवी देख रहा है बड़े स्क्रीन पे और उसमें ही वो फसा हुए जो भूंगते है जो भोग है उसके कारण विक्ति फसा हुआ है तो ये पूरा जगत कैसे योजना है जिसमें हम इस मोहम में फसे हुए है फिर दूसरा जो है छे से दस वो क्या था suffering in illusion किस तरह से हम इस जगत में दुख भुगत रहे है तो दुख क्या है कि यहाँ पर एलग रभा कासे दुख बोल जा सकते है यहाँ पर तीन चीज़ें बता जाते हैं कि which body हम कौन से शरीर में जाएगे हम छुनते नहीं है कि हम मैं फुरुज बनना है, श्री बनना है, मुझे सफेद वरन होना चाहिए, मुझे काला वरन होना चाहिए हम कुछ छुनते नहीं है क्या भोग करने की योग्य है, वह भी वास्तव में हम निधारित नहीं करते हैं जो परिस्तिती है, जो मनस्तिती है, उसके पिछे हम लग जाते हैं अलग अलग खाद्डे अच्छे लगते हैं, अलग अलग गेम्द अच्छे लगते हैं तो इस तरह से हम, हमारे नियंतर में कुछ भी नहीं है और एक जगत से, एक जीवन से जीवन में जा रहे हैं हर एक जीवन में क्या लगता है, कि ये जो है एक रॉम कॉम है पर उस निकल जाता है क्या है, वो हॉरर मूवी बन जाता है और सब कुछ जो है, हम से चला जाता है और फिर तुरंद एक नए आ जाता है तो फिर उसमें, उस से गए निकलना है तो क्या है, ग्यान चक्षू है ग्यान चक्षू से मतलब क्या देखना है हमसे की चोलूर करिएन, वालित डे parts शमीलियादना है हमसे सब के भी क्या, उरे मोहतों के մिक उरे मोहतों को invested करा है जाकता है अपना चवल अर्जीन दिखा है कॊई बरंभ्रान्ड के स्तरपिय, पुण्त्वी के स्थरBC और शरीर के स्थर पे कैसे?
जो अगर भगवान की योज़ना नहीं होगी तो हम जीविद भी नहीं रह सकते तो इसलिए जो बुद्धिमान व्यक्ति है वो देख सकता है कि इस मोह के परे कुछ जरूर होना चाहिए और फिर आखर जो था फिर वो जो मोह के परे क्या है? उसका जो वर्णन है वहाँ पे ब्रह्मन है सर्वव्यापी जोती है वहाँ पे भगवान एक मार्गदर्शक के रूप में है और भगवान जो है परमसत्य जो है वो एक प्रेम के वास्तध होते है मोक्ष उसको मिल जाएगा इस बहुत जगत के मोह से बहुत-बहुत धन्यवाद हरे कृष्णा किसे को एक सवाल है? Thank you very much श्रिमत भगवत गीता की श्रिल प्रभुपाद की गौर भक्तिन की जाय गौर प्रिमान