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Hindi Gita for empowerment 1 How chance & choice shape our life

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जीवन को हमें सामना करना है। समस्या कैसे वह सामना कर सकते हैं? उसके बारे में आज हम चर्चा करेंगे। तो मैं आज और अगले तीन दिन सुबह भागवतम क्लास लेने वाला हूं और उसमें हम कि गीता विज़डम फॉर इनर एंपावरमेंट कि गीता फॉर एंपावरमेंट कैसे इससे हमको शक्ति मिल सकती है यह विषय पर हम चर्चा करने वाले हैं। तो आज जो है मैं जो फ्रेमवर्क किस दृष्टि से मैं देखने वाला हूं। उसके बारे में आज चर्चा करूंगा। जो हमारा जीवन है वास्तव में पूरा जीवन दो चीजों पर निर्भर होता है। क्या दो चीजें हैं? चॉइस और चांस। चॉइस और चांस। मतलब क्या है? कि अगर हम सोचते हैं कि मैं इस कॉलेज में पढ़ाई करने जाऊंगा। मैं यह नौकरी करूंगा। मैं इस व्यक्ति से विवाह करूंगा। हम चुनाव करते हैं और क्या होता है वह चुनाव के बाद क्या होने वाला है कई बार हमारे नियंत्रण में नहीं होता है वो चांस होता है वो कल मैं बेंगलुरु से यहां पर आ रहा था तो वो इंडिगो का फ्लाइट कैंसिल हो गया और फिर दूसरा फ्लाइट था और दूसरा फ्लाइट जब था तो उसमें क्या हो गया कि वो हैदराबाद जाके कनेक्टिंग था पर जो एयरलाइंस का पॉलिसी होता है कि जो मैं व्हीलचेयर यूज करता हूं कि मुझे कच्चे चाहिए होते हैं। तो व्हीलचेयर के जो लोग होते हैं वो सबसे लास्ट निकलना होता है। उनको निकलने में थोड़ा टाइम लग जाता है। पर मेरा कनेक्टिंग फ्लाइट था। तो वो हुआ क्या वो जिस भक्ति ने मेरा टिकट बुक किया था वो दूसरा फ्लाइट वाले फोन कर रहे थे कि तुम जल्दी आओ। और ये फ्लाइट वाले बोल रहे थे कि तुम पहले नहीं जा सकते। तुमको लास्ट जाना है। तो सम हाउ वो लास्ट मोमेंट पे हम पहुंच गए और वो फ्लाइट मिल गया। नहीं तो फिर अगला फ्लाइट आज सुबह ही था मेरा। अगर पूरा दिन मुझे हैदराबाद में रहना पड़ता था। तो क्या है अभी कुछ हद तक मेरा चॉइस है कि मैं क्या कर सकता हूं। कुछ हद तक चांस है पहला फ्लाइट लेट हो गया था थोड़ा सा निकलने के लिए पहुंचने के लिए लेट हो गया तो हर परिस्थिति में क्या होता है हमारे जीवन में कुछ चांस होता है। चांस मतलब मैं ये बोल रहा हूं कि जो हमारे नियंत्रण में नहीं है। हम अभी कह सकते हैं कोई चांस नहीं होता है। सब भगवान की योजना होती है। वो हम उसके बारे में बाद में चर्चा करेंगे। पर हमें क्या है? हमारी दृष्टि से वो एक अनकंट्रोलेबल है। एक है चॉइस और एक है चांस। तो अभी हमारे जीवन में जो भी परिस्थितियां आती है वो कैसे आती है? तो चॉइस और चांस इससे क्या होता है हमारे जीवन में सरकमस्टेंस जो परिस्थितियां आती है और क्या होता है? कुछ परिस्थिति अनुकूल होती है, अच्छी होती है, कुछ बुरी होती है। और हम चाहते हैं कि जो परिस्थिति है वो अच्छी बन जाए और जो परिस्थिति बुरी है वो बुरी अगर है तो कम हो जाए। तो एक तरह से जीवन का जो उद्देश्य है वो प्रह्लाद महाराज कहते हैं कि हमारे जीवन में कुछ प्रिय होता है और कुछ अप्रिय होता है। तो कुछ चीजें हमें अच्छी लगती है, कुछ अच्छी नहीं लगती है। और हम चाहते क्या है? जो प्रिय है उनसे हमारा योग हो जाए। योग मतलब क्या? उसके करीब आ जाए हम। हम कहीं पिकनिक जा रहे हैं, कहीं कहीं टूर पर जा रहे हैं तो कोई हमारा मित्र है। चाहते हैं शायद शायद हम दोनों एक रूम शेयर कर लेंगे तो हमको ज्यादा समय मिलने को मिलेगा। तो जो प्रिय है उसे योग चाहते हैं और जो अप्रिय है उससे हम वियोग चाहते हैं कि अगर शायद उसी पार्टी में जा उसी पिकनिक को जा रहे हो वहां पर कोई एक व्यक्ति है जिसे हमको बिल्कुल अच्छा नहीं लगता है। तो मैं आशा करता हूं उसे उसका चेहरा भी नहीं देखूंगा मैं। हम्म तो हम चाहते हैं कि उससे वियोग हो जाए। पर होता क्या है कभी-कभी जिस मित्र के लिए हम जा रहे हैं वो लास्ट में बोलता है कैंसिल कर दे। मैं नहीं जा रहा हूं। और जिसको हम टालना चाहते हैं वही हमारा रूम पार्टनर बन जाए। जाता है तो क्या होता है कभी-कभी ऐसे हो जाता है जो प्रिय है उससे वियोग हो जाता है और जो अप्रिय है उससे योग हो जाता है तो यस्मात प्रिया प्रिय वियोग संयोग जन्म शोका अग्नि ना सकल योनिश यमान तो अभी यह हमारे जीवन में कितना नियंत्रण में है कि जो प्रिय है उससे हम योग ला सके और जो अप्रिय है उससे वियोग ला सके तो साधारणतया अगर प्रिय से जो है वो योग आता है तो उसको हम हम सुख कहते हैं। इन दोनों चीजों को हम सुख कहते हैं। और जिस हद तक प्रिय से वियोग हो जाता है और अप्रिय से योग हो जाता है उसको हम दुख कहते हैं। तो अभी एक तरह से हम हमारी चॉइस से हम प्रयास करते हैं कि हम हम इस तरह से चुनाव करें ताकि जो प्रिय है वो हमको मिले पर कभी होता उल्टा है तो वो जो हमारे जीवन में परिस्थिति आती है वो किस हद तक हमारे चॉइस का रिजल्ट है और किस हद तक वो चांस का है और क्या इसके बारे में हम कुछ समझ सकते हैं कुछ कर सकते हैं ये हम देखेंगे तो अभी अर्जुन जो होते हैं एक तरह से जब अर्जुन युद्ध करने आते हैं तो तभी वो तैयार होते हैं युद्ध करने के लिए। तो अभी एक तरह से बोला कुछ परिस्थिति में अप्रिय होती है। कुछ परिस्थितियां अप्रिय होती है। पर जीवन में कैसे होता है? कई बार जो हमारे जीवन में परिस्थितियां आती है। अगर हम जा रहे हमारे जीवन में रास्ते में तो जो परिस्थिति आती है उसमें कुछ प्रिय होता है। और उसके बारे में कुछ अप्रिय होता है। ऑफकोर्स बीच में कुछ हो सकता है जो क्या है? प्रिय है। प्रिय पता नहीं हमको पता चलेगा बाद में पर क्या है अभी अर्जुन जब आए तो युद्ध करने के लिए पूरे तैयार हो के आए थे और क्या उन्हें बहुत प्रयास किया था सारे पांडवों ने कि हम युद्ध नहीं करेंगे युद्ध को टालने का प्रयास करेंगे पर जो दुर्योधन की उदंडता थी जो दुर्योधन का स्टबननेस था ऑब्ट्सिनसी था एोगेंस था अहंकार था उसके कारण जब पहले उसी सभा में पहले उसने द्रोपदी का अपमान किया वो पांडव के लिए असहनीय था कुछ तरह से सहन कर लिया पर उसी सभा में जब उन्होंने कृष्ण का भी अपमान किया अभी दोनों अपमान में यशस्वी नहीं हुए वो पर फिर भी प्रयास तो किया तो ये दुर्योधन बदलने वाला नहीं है समझ गए तो युद्ध करने के लिए तैयार होकर वो आ गए जिस दुर्योधन ने द्रोपदी का इतना अपमान किया है इतना अत्याचार किया है उसको हम सजा देने वाले एक तरह से यह प्रिय था प्रिय मतलब आनंद नहीं हो रहा था पर अभी करना है जरूरी है करना पड़ रहा है पर जब वो वहां पे आ गए अर्जुन जब वो सेनयो भयो मध्य रथम स्थापयमे अचुत जो रथ के बीच में आ गए तो उनको क्या दिख गया भीष्म द्रोण प्रमुखता सर्वेशाम च महीक्षिता और देखा कि कौन है यहां पे भीष्म द्रोण है बौद्धिक स्तर पर उनको पता था कि हां भीष्म द्रोण से युद्ध करना है मुझे पर क्या हो गया जब वो परिस्थिति आ गई तो अभी क्या है इसके पहले विराट में भी युद्ध किया था उन्होंने पर विराट में जो युद्ध था उनको कौरवों को मारने की कोई इच्छा नहीं थी। उनको एक लेसन सिखाना था कि हमारी कितनी शक्ति है ये देखो और बेहतर है हमसे तुम झगड़ा मत करो। हमारा राज्य हमको वापस दे दो। तो वो जो युद्ध था उसमें स्टेक्स इतने हाई नहीं थे। ये युद्ध है इसमें क्या था? एक पक्ष वापस जीवित नहीं जाने वाला था। तो अभी क्या हो गया? अभी भीष्म और द्रोण से युद्ध करना है। यह बहुत ही अप्रिय है अर्जुन के लिए। और जब यह करना है और युद्ध करना है कब तक कि मृत्यु तक भीष्म और द्रोण ये केवल उनके वरिष्ठ नहीं थे। यह वो वरिष्ठ है जिनसे अर्जुन ने धनुर विद्या सीखी। यह वो वरिष्ठ है जिनके प्रसन्नता के लिए अर्जुन ने धनुर विद्या सीखी। और अभी यही वही वो वरिष्ठ है जिनको उसी धनुर विद्या से अर्जुन को उनका वध करना है। ये इतना अप प्रिय है। मैं यह नहीं कर सकता। तो अभी और यह कह के अर्जुन ने अपना जो है शस्त्र बाजू को रख दिए। मैं युद्ध नहीं कर सकता। तो अभी ये जो परिस्थिति आ गई थी एक तरह से अनिवार्य है। वो अर्जुन का चॉइस नहीं था। तो जो हमारा चॉइस नहीं है उसको हम चांस कह सकते हैं। हम वो शब्द इस्तेमाल यहां पे कर रहे हैं। तो अभी किस हद तक हमारे जीवन में क्या चॉइस है और क्या चांस है। और हमें कैसे जीवन जीना है उसके बारे में हम गीता के गीता के विश्लेषण करेंगे। तो अभी कई बार होता है जो चॉइस और चांस मतलब चॉइस मतलब क्या है? जो विदिन माय कंट्रोल। जो मेरे नियंत्रण में है उसको मैं चॉइस कह रहा हूं। जो बिय्ड माय कंट्रोल जो है वह हम क्या कह रहे हैं? वो चांस है। तो अभी जब हम कर्म के बारे में बात करते हैं गीता में धर्म ये शब्द आता है। कर्मय शब्द आता है। धर्म भी शब्द आता है। पर अर्जुना के अर्जुन क्या कर रहे हैं? अर्जुन जब कृष्ण की ओर शरणागत होते हैं तो पूछते हैं प्रच्छामि धर्म समूढ़ चेतः तो अभी धर्म का अर्थ क्या है? कि एक अर्थ है पर एक सिंपल अर्थ है व्हाट इज द राइट थिंग टू डू सही चीज क्या है करनी तो अगर हम देखेंगे इन दोनों में धर्म किस दिशा में आता है चॉइस की ओर आएगा या चांस की ओर आएगा हां धर्म जो है वो चॉइस है हमारा मतलब क्या है कि जो भी परिस्थिति मेरे जीवन में आ रही है उसमें मुझे क्या करना है अभी धर्म का जो शब्द है यह दो तरह से होता है राइट चीज क्या है एक है नैतिक दृष्टि मोरल और दूसरा है सिंपली फंक्शनल या ऑपरेशनल। फंक्शनल मतलब क्या कि व्यवहारिक रूप से अभी क्या करना है? अगर हम किसी के विवाह के लिए जा रहे हैं, किसी उत्सव के लिए जा रहे हैं और वो जो फ्लाइट कैंसिल हो गया, ट्रेन कैंसिल हो गया तो अभी जाना है नहीं जाना है। इसमें नैतिक कोई ज्यादा बात नहीं है। वो एक व्यवहारिक डिसीजन है। मान लीजिए हमारे हम ऑफिस में काम कर रहे हैं और जो से बहुत परेशान करता है हमको तो क्या हमको वही नौकरी रखनी है या दूसरी नौकरी लेनी है इसमें नैतिक ज्यादा कोई बात नहीं है एक व्यवहारिक डिसीजन है हम पर हमारे घर में परिवार में ही हमारा किसी से बहुत झगड़ा हो रहा है तो अभी उनसे सेपरेट होना है क्या तो ये क्या है ये केवल एक फंक्शनल डिसीजन नहीं है ये एक नैतिक डिसीजन भी हो जाता है तो जब हम सही गलत क्या है वो देखते हैं तो उसमें एक मोरल साइड है एक फंक्शनल साइड भी है। तो पर दोनों में क्या है हमें फैसला करना जरूरी है। हमारा फैसला महत्वपूर्ण है। क्या करना है? तो जो धर्म है यह अधिकांश रूप से चॉइस की ओर आता है। अभी दूसरा एक शब्द है कर्म। अभी कर्म जो आता है इसका संबंध किसकी ओर होता है? चांस की ओर या चॉइस की ओर? चांस की ओर। कर्म जो है ये दोनों की ओर आएगा। कर्म का अर्थ क्या होता है? कि हमने जो हमें जो करना है या हमने जो किया है और हम जो हमें प्रतिक्रिया मिल रही है तो अभी कर्म ये दोनों दृष्टि में आता है तो भगवता में जो कर्म शब्द है ये वास्तव में इसका चार पद्धतियों से इस्तेमाल किया गया है। तो उसको मैं एक्रोनिम बोलता हूं आर्क्स। इसके अलग-अलग श्लोक है। आई वांट गोइंग टू कॉल से श्लोक में कहां इस्तेमाल किया गया है। पर आर्क्स मतलब क्या है? कि कर्म का मतलब है एक्शन। हम क्या कार्य कर रहे हैं? तो भगवान कहते हैं नहीं कश्चित क्षणम जात त्य अकर्मकृत आप एक क्षण भी ऐसे नहीं कर सकते जब आप कर्म नहीं कर रहे हो। यहां पे क्या है? कर्म मतलब आप हमेशा कार्य कर रहे हो। कर्म का एक और अर्थ है रिएक्शन। मतलब क्या है? कि जो हमने कार्य किया है उसकी प्रतिक्रिया हमें मिलती है। तो एक तरह से कहेंगे जो कर्म जो रिएक्शन है वो चांस की ओर जाएगा। जो हमको चांस लगता है कब यह मेरे जीवन में क्या आ रहा है वो हम कर्म के सिद्धांत से कहेंगे तो वो क्या है? वो रिएक्शन आ रहा है। तीसरा पॉइंट है ये कनेक्शन कि एक्शन और रिएक्शन में जो कनेक्शन होता है उसको भी कर्म बोलते हैं। कर्म का नियम हम कहते हैं। कर्म का नियम मतलब क्या? जो मैं कार्य करूंगा उसके अनुसार मुझे उसकी प्रतिक्रिया उसका फल मिलेगा। यह कनेक्शन है। तो दिस इज और आखिरी जो कर्म का अर्थ है वो है सिलेक्शन। सिलेक्शन मतलब क्या है? कि हमेशा मैं कुछ ना कुछ तो कार्य करने वाला हूं। पर कौन सा कार्य करना है मुझे। कौन सा कार्य सही है, कौन सा कार्य उचित है? तो यह जो अर्थ है वह धर्म है। तो अभी क्या है? अर्जुन एक तरह से पूछ रहे हैं मुझे मैं कर्म तो करने वाला हूं। युद्ध करना एक कर्म है। युद्ध ना करके जंगल में जाकर वनवास में रहना वो भी कर्म है। हम तो अभी अनेक कर्म हम कर सकते हैं। उनमें से कौन सा कर्म सही है वो धर्म कहलाता है। तो अभी कई बार जब कर्म के नियम के बारे में बात करते हैं या कर्म के बारे में बात करते हैं तो इसमें दो चीजें आती है। चॉइस और चांस। ऐसे बताया कि जो कर्म जो है उसको दोनों संबंध है। तो अगर रिएक्शन के रूप में देखते हैं या कनेक्शन के रूप में देखते हैं तो क्या है? एक नियम के अनुसार जो चांद से परिस्थिति आपके जीवन में आई है वो चांस से नहीं आई है। वो तुम्हारे ही पूर्व कर्म से आई है। वो समझाने के लिए। पर अगर हम चॉइस के रूप में देखते तो इसमें एक्शन है और सिलेक्शन है कि हमें हम हमेशा कुछ ना कुछ तो कर सकते हैं। हमारे पास एक्शन करना करने की संभावना हमेशा है। मैं कुछ समय पहले इंग्लैंड में था तो ये एक वक्त एक वक्त मुझे आया कि वो बोल रहे थे कि मेरा मेरा जो भाई है हम में बहुत झगड़ा हो रहा है। और मैं कुछ भी करूं इतना अनरिजनेबल व्यक्ति है कुछ सुनता ही नहीं है। और मैं पिताजी के प्रॉपर्टी के लिए कोर्ट केस किया है। ये एलिगेशन किया है। ये एक्यूजिशन किया है। ये किया है। मैं कुछ भी करूं कुछ ठीक नहीं हो रहा है। सॉरी हां बुरी बात है। मैं पूरा हेल्पलेस हूं मैं बोला। तो मैं उनको बोला ठीक है। कभी-कभी लगता है कि हमारे पास कोई चॉइस है ही नहीं। ये क्या है? ऐसी परिस्थिति है पूरा दुख ही दुखा रहा है। तो बोला कि ये रिलेशनशिप बहुत खराब हो गया है। बोले। तो बोला कि मैंने उनको पूछा फिर कैन यू क्या आप कह रहे हो की ये परिस्थिति में आप कुछ भी नहीं कर सकते हो? तो तो क्या आप इस परिस्थिति को क्या आप इस संबंध को और खराब कर सकते हो? हैं? क्या इतना खराब है? मैं और खराब क्यों करूंगा? नहीं खराब कर करना नहीं है बोल रहे। मैं करने को नहीं बोल रहा। मैं बोला क्या? क्या आप खराब और कर सकते हो? तो क्या है? कितना भी खराब संबंध हो, हम उसको और खराब तो आसानी से कर सकते हैं। ये 5 मिनट के लिए जीवा का जो नियंत्रण है छोड़ दो। जो बोलोगे 50 साल तक वो दूसरा व्यक्ति याद रखेगा। तो क्या होता है कि नो मैटर हाउ बैड अ सिचुएशन इज वी ऑलवेज हैव द चॉइस टू मेक इट वर्क्स। कितना भी खराब कितनी भी खराब परिस्थिति क्यों ना हो हम ये चुनाव कर सकते हैं कि उसको मैं और खराब कर सकूं। और अगर मैं उसको और खराब कर सकता हूं तो मैं उसको और अच्छा भी कर सकता हूं। मैं किस मात्रा तक अच्छा कर सकता हूं? किस मात्रा तक खराब कर सकता हूं वह परिस्थिति पर निर्भर है। वो हम के बाद में पर क्या है? पॉइंट है वी ऑलवेज हैव अ चॉइस। हमेशा हमारे पास एक चुनाव करने की क्षमता होती है। ना केवल हमारे पास क्षमता होती है पर परिस्थिति का भी उस पे कुछ परिणाम हो सकता है। किस हद तक परिणाम होगा वो हम बाद में देखेंगे। तो अभी कई बार जब हम कर्म के बारे में विचार करते हैं तो क्या होता है? उसका एफेसिस जो होता है कई बार एक जजमेंट पे होता है। कि तुमने ही पूरा कुछ बुरा कर्म किया है। उसके कारण तुम्हें यह भुगतना पड़ रहा है। है तो चुपचाप सहन कर लो और भुगत लो। तो अभी यह गलत नहीं है। पर जहां तक मैंने शास्त्र पढ़े हैं उसमें यह एमफेसिस नहीं है कि जब द्रोपदी का अपमान होता है, सीता का अपहरण होता है। तो कोई नहीं तुमने ही कुछ-पूरा कर्म किया था। उसके तुम ये भुगत रहे हो। चुपचाप भुगतो अभी ये। ऐसा भाव नहीं होता है। अभी अर्जुन के साथ कृष्ण स्वयं वहीं पे है। और कृष्ण स्वयं अर्जुन से यह भी कहते हैं कि बहु नेमे व्यतीतानी जन्मानी तवचार्जुना तान्यहम वेद सर्वाण न त्वमत्त परंतप कि कहते हैं कि हम दोनों अनेक जन्म में गए हैं और वो सारे जन्म मुझे याद है पर तुम्हें याद नहीं है। तो अभी जब जो हमारे जीवन में चांस लगता है हमको कि हम हम ना साधारणत क्या है कि हम अच्छी तरह से अपने स्वास्थ्य का देखभाल कर रहे हैं। पर अचानक किसी को हम जाते है कुछ रूटीन चेकअप के लिए और पता लगता है कैंसर हो गया इतना क्रूर है इतना चांस लगता है क्या हो गया यह कैसे हो गया क्यों हो गया यह तो उस समय अगर कोई कहता है यह तुम्हारा ही पूरा कर्म था उसके कारण हो गया तो अभी क्या है जब हम ये कर्म के नियम में जजमेंट पे फोकस करते हैं तो उससे क्या होता है एक प्रॉब्लम प्रैक्टिकली होता है कि वो मैंने क्या किया था जिसके कारण ऐसे हो गया वो हमको पता नहीं है साधारण कोई भी कोई भी न्याय का सिस्टम होता है तो किसी को गुनाह पर कोई सजा देनी जाती है तो क्या गुनाह किया उसको बताना पड़ता है बताने का मौका तो दिया जाता है और फिर उसको अपना स्पष्टीकरण देने का भी मौका दिया जाता है तो यहां पर कुछ भी नहीं है और कह सकते हैं कि हम सीमित जीव हैं जो पूर्व जन्म में कर्म किया है वो भूल गए हम वो सत्य है पर अभी ये भगवान के लिए लागू नहीं है अभी भगवान अर्जुन को बता सकते थे कि पिछले जन्म में भीष्म ये थे तुम वो थे द्रोण ये थे और भीष्म ने ऐसे किया द्रोण ने ऐसे किया तुमने ऐसे किया उसके कारण तुमको इस जन्म में युद्ध करना पड़ रहा है। तो भगवान तो सर्वज्ञ हैं। वेदा समानी वर्तमान अर्जुन भविष्य भूतानी माम वेदन कश्चन भगवान दोनों बताते कि मुझे भूत भविष्य वर्तमान सब पता है और यह भी बताते हैं कि मुझे हमारे पूर्व जीव भी याद है। वो जन्म भी याद है। फिर भी भगवान कुछ बैक फ्लैश नहीं देते। जैसे मूवीज में क्या होता है? कुछ बैकफ्लैश होता है। दो हीरो और विलन में झगड़ा हो रहा है तो क्यों झगड़ा हो रहा है? उसका बैक फ्लैश होता है। तो भगवान कुछ बैक फ्लैश नहीं देते हैं। भाई जब परीक्षित महाराज को श्राप मिलता है छोटा से छोटी सी गलती है। बहुत बड़ा श्राप मिल जाता है उनको। अभी उस समय सुखदेव गोस्वामी बहुत कहानियां बताते हैं। पर वो कोई कहानी नहीं बताते कि पिछले पिछले जन्म में कुछ तुमने ऐसे किया था। उसके इस छोटी सी गलती के लिए तुमको इतना बड़ा इतनी बड़ी सजा मिल गई। तो पॉइंट में ये कहने का क्या है कि जो शास्त्रों में जहां तक जोर है ये कर्म का उल्लेख कई बार आता है। पर उसका फोकस जजमेंट नहीं है कि कहीं भी इतने हजारों हजारों श्लोक सुखदेव गोस्वामी परीक्षित महाराज को बताते नहीं एक भी बार नहीं बताते तुमने कुछ कर्म किया होगा उसके तुमको यह फल मिला है। क्या कर्म किया ये भी नहीं बताते हैं और यह भी नहीं बोलते तुम्हारे कर्म के कारण तुम भुगत रहे हो। इसके विपरीत क्या करते हैं वो कि अभी तुम जो परिस्थिति में हो तुम व्हाट इज द बेस्ट चॉइस यू कैन मेक? तो इसीलिए जहां तक मैं समझता हूं कर्म का फोकस क्या है? वो एनकरेजमेंट है। एनकरेजमेंट क्या है? कि ऐसे हो सकता है कि चांस लगता है कि उससे हमारे जीवन में कुछ भी कंट्रोल में नहीं है। पर नहीं आवर एकशंस मैटर इवन व्हेन दे डोंट सीम टू मैटर। हमारे कार्यों से परिणाम होता है। और इसीलिए हमें सही चुनाव करना महत्वपूर्ण है। तो एक तरह से अगर हम कहते हैं यह रणभूमि है और रणभूमि के बीच में कृष्ण और अर्जुन यहां पर है तो कृष्ण क्या करते हैं? कृष्ण जो है जो बैक फ्लैश है पास्ट जो है उसकी ओर जाते ही नहीं है। ना तो रिमोट पास्ट की ओर जाते हैं कि पिछले जन्म में क्या हुआ? और रीसेंट पास्ट की ओर भी नहीं जाते वो। रीसेंट पास्ट मतलब क्या है? कृष्ण ये नहीं कहते अरे उसने कैसे द्रोपदी का अपमान किया था। कैसे इसने ये किया था वो किया था। तुम्हें बदला नहीं लेना है क्या अभी? वो दोनों की ओर नहीं जाते। भगवान रिमोट पास्ट या रीसेंट पास्ट दोनों की ओर वो नहीं जाते तो क्या भगवता का भाव क्या है अभी तुम इस परिस्थिति में हो हाउ कैन यू मेक द बेस्ट ऑफ दिस सिचुएशन जब तो यहां पे मतलब क्या है कि शास्त्रों का फोकस क्या है कि कैसी भी परिस्थिति आपके जीवन में आ जाए आपको चॉइस क्या करना है तो जो चांस को एक्सप्लेन एक एक बौद्धिक स्तर पे नहीं भौतिक नहीं एक कॉन्सेप्चुअल तत्व के स्तर पर संकल्पना धारणाओं के स्तर पे हम समझ सकते हैं कि यह कर्म के कारण होगा। पर वो प्राइमरी फोकस नहीं है। क्या है? हमारे जीवन में कभी-कभी ऐसी परिस्थिति आती है कि अब ये चॉइस चांस ये हर परिस्थिति में होता है हमारे जीवन में। तो अभी ऐसे हो सकता है कि अगर यहां पर अगर मैं बोलता हूं चॉइस है। चॉइस मैक्सिमम है। एक्चुअली लेट्स पुट इट अनदर वे। हां ये जो है चांस है। तो कुछ ऐसी परिस्थिति हो सकती है जिसमें चांस 100% है और चॉइस 0% है। मतलब क्या है कि हम हमारे घर में बैठे हैं और वहां पर कोई बॉम्ब गिर जाता है। जैसे अभी वो जो अहमदाबाद में प्लेन क्रैश हुआ था। तो वो कुछ यूथ थे अपने हॉस्टल में बैठे थे और वह प्लेन उनके हॉस्टल में क्रैश हो गए। तो वहां पे क्या है वो उन्होंने कुछ कुछ किया ही नहीं वहां पे। तो कभी-कभी ऐसे हो सकता है वो 100% चांस है मतलब हमारे नियंत्रण में नहीं है। जो 0% चॉइस है। पर ऐसे नहीं है कि सारे परिस्थितियां ऐसे ही होती है। हम कुछ ऐसे भी होते हैं जो 100% हमारा चॉइस है और वहां पे 0% चांस है। हम कभी-कभी हम कहते हैं ना तुमने जानबूझ के किया ये तुम्हें पता था तुम क्या कर रहे हो और फिर भी तुमने वो किया तो हमारे जीवन में ऐसी भी परिस्थिति होती है और कुछ ऐसे हो सकते हैं जो 50% चॉइस है 50% चांस है तो अभी कौन सी परिस्थिति में हमें कितना चांस है कितना चॉइस है ये अलग-अलग होता है पर किसी का जीवन ऐसे नहीं होता है कि कभी उनको कुछ चॉइस है ही नहीं उनको चॉइस हमेशा होता है। तो हमारा जो चॉइस है जो हमें चुनाव करने की क्षमता है, उसको कैसे मैक्सिमाइज करना है, उसको कैसे सकारात्मक पद्धति से इस्तेमाल करना है, वह प्राइमरली भगवत गीता का संदेश है। तो क्या है इसको जो हमारा मैं 9.6 आज मैं एक तो अभी ये चॉइस को कैसे भगवत गीता एंपावर करती है वो मैं अगले अगले तीन सेशंस में लेने वाला हूं। पर आज मैं ये चॉइस और चांस का जो प्रिंसिपल है उसको एक उदाहरण से इलस्ट्रेट करके फिर हम प्रश्न उत्तर करेंगे। अभी 9.6 में भगवत गीता कहते हैं यथा आकाश स्थितो नित्यम वायु सर्वत्र गो महान तथा सर्वाणि भूताणी मतस्थानी उपधारया। भगवान यहां पर उदाहरण क्या दे रहे हैं कि जब हम कार्य कर रहे हैं तो तो अगर कोई जमीन है तो अभी उसके ऊपर आसमान है तो अभी आसमान में जो वायु है ये स्काई है और यह वायु है तो जो हवा है वो ऊपर जा सकती है, नीचे जा सकती है, लेफ्ट जा सकती है, राइट जा सकती है। अलग-अलग दिशाओं में जा सकती है। तो अभी हवा कहां कहां जाएगी उसको जो आसमान है नियंत्रण नहीं करता है। अगर हम यहां पे आसमान को कल्पना कर सकते हैं। आसमान क्या है? एक तरह से एक अपसाइड डाउन बाउल है। एक उल्टा पात्र है और उसमें वायु है। तो अभी जो वायु की जो मूवमेंट है, वायु का जो महलना है वो जो है वो आसमान नियंत्रित नहीं कर रहा है। पर वो किस हद तक जाएगा। किस किस कितने डिस्टेंस तक जाएगा वो निर्भर करता है। छोटा सा पात्र है तो फिर अगर ग्लास है उसको उल्टा कर देता तो उसमें ये वायु थोड़ी जगह जाएगी। एक थोड़ा बड़ा पात्र होगा तो वायु थोड़ी और जाएगी। अगर हम000 लोगों के लिए कुकिंग कर रहे हैं और वो पात्र उल्टा रखा हुआ है तो उसमें वायु काफी जाएगी। तो कैसे है कि ये जो जगह है हम सब तो यहां पे जो तुलना की गई है जो स्काई है जो विंड है तो अभी विंड जो मूव कर रही है कहां तक मूव कर सकती है वो हमारा चॉइस है। हम जो जो मूव कर सकती है वो चॉइस है और वो किस मात्रा में हमको मुंह करने की क्षमता है वह हमारा चांस है। एक और शब्द इसे इस्तेमाल करते हैं। यह आता है भगवता के 13व अध्याय में क्षेत्र। क्षेत्र मतलब अभी वहां पे दो शब्द आते हैं। प्रकृति और क्षेत्र तो प्रकृति का अर्थ है निस्ग नेचर। हम पर क्षेत्र का अर्थ क्या है? उस वो निस्ग में जो है स्फीयर ऑफ कंट्रोल। कि उसमें मेरा नियंत्रण कितना है? तो वह हमारा क्षेत्र है। तो अभी हमारे जीवन में अलग-अलग लोगों का अलग-अलग क्षेत्र हो सकता है। किसी व्यक्ति का क्षेत्र छोटा होता है। किसी व्यक्ति का क्षेत्र बड़ा होता है। किसी व्यक्ति का क्षेत्र बहुत छोटा हो सकता है। पर सबका अलग-अलग क्षेत्र होता है। अब उस क्षेत्र के अंदर क्या करते हैं? है वह हमारा चुनाव है। हम पर अभी वह क्षेत्र कितना है वो हम कह सकते हैं पूर्व कर्म से आता है। पर वह क्षेत्र भी बदलते रहता है। वो हम चांस कह सकते हैं। तो अभी अभी आप यह प्रवचन सुनने के लिए आए हैं। तो अब जब यह प्रवचन सुनने के लिए आए हैं तो क्या है कि यह जब मैं यह प्रवचन दे रहा हूं। आप यह सुन रहे हैं। तो मेरी ओर से चॉइस और चांस क्या है? चॉइस यह है कि मैं किस विषय पे बोलूंगा। यह मैंने फैसला किया है। हम पर कितने लोग आएंगे प्रवचन के लिए? यह मेरे नियंत्रण में नहीं है। यह चांस है। कितने लोग प्रवचन ध्यान से सुनेंगे वो चांस है। कभी कब प्रवचन देता हूं और ऐसे सब लोग ऐसे देख रहे होते हैं जैसे कोई फॉरेन लैंग्वेज मूवी देख रहे हैं सबटाइटल के बिना। तो अभी क्या होता है? जो चॉइस होता है चांस होता है। हम भाई उसके बाद में तो जब मैं प्रवचन दे रहा हूं तो एक तरह से कह सकते हैं मेरा चॉइस ज्यादा है। तो पर अभी प्रवचन के बाद कुछ क्वेश्चन आंसर्स होंगे। तो उस क्वेश्चन आ- आंसर्स में क्या होगा? मेरा चॉइस कम हो जाएगा चांस बढ़ जाएगा। कि कौन सा प्रश्न आने वाला है? क्या वो प्रश्न का उत्तर मुझे पता है कि नहीं? पता भी होगा तो क्या मुझे याद आने वाला है कि नहीं? हम तो हमारे जीवन में चॉइस और चांस ये हर परिस्थिति में होता है। जब हम किसी से बात कर रहे हैं तो फिर जब डिस्कशन कर रहे हैं तो जब हम बोल रहे हैं तभी हमारा चॉइस ज्यादा होता है। हम क्या वचन बोलते हैं? किस टोन से बोलते हैं वो सब हमारा चॉइस है। और अभी वो व्यक्ति कितना सुनेगा वो चांस है। अभी उसके बाद में क्या होगा? जब वो व्यक्ति बोल रहा है तो अभी उनका चॉइस बढ़ जाता है। हमारा चॉइस कम हो जाता है। फिर भी हमारा चॉइस है। जब वो बात करने लगते हैं हमारे फोन की ओर देखने लगते हैं या हम इधर-उधर देखने लगते हैं। क्या हो जाएगा फिर? हमें लगेगा कि वो वो हमारे एटीट्यूड से वो नाराज हो जाएगा शायद। तो इसलिए चॉइस और चांस जो है वो हमारे जीवन में एक डायनेमिक बदलते रहता है। पर जो कभी पर ऐसे बहुत ही मैं हाइपोथेटिकली बोला कि यहां पे 0% चॉइस और 100% चांस पर वो बहुत ही रेयरली होता है। तो ऐसे हो सकता है कि हम गाड़ी चला रहे हैं और हम अच्छे से गाड़ी चला रहे हैं। पर कोई शराबी दूसरे गाड़ी से दूसरे से आता है हमको ठक्कर ठोकर मार देता है। तो हम कह सकते हैं पूरा चांस है। पर ठीक है जब वह कोलाइड आता है तो क्या हम हम पैनिकिक करते हैं? हम बाजू को जाते हैं। हम क्या करते हैं? वह फिर भी हमारा ही चुनाव है। तो फिर उसके बाद में क्या करते हैं? हम फ्रीज हो जाते हैं या उसको गाली देते हैं या फिर इमरजेंसी को कॉल करते हैं। क्या है? वो हमारा चुनाव है। तो इसलिए चॉइस हमेशा होता ही है अधिकांश रूप से। तो यह एक तरह से इसको हम टेनिस मैच का उदाहरण दे सकते हैं। टेनिस मैच में क्या होता है? जब कोई प्लेयर सर्विंग कर रहा है तो उसका चॉइस काफी ज्यादा होता है कि मैं कहां मैं आगे फोर हैंड पे सर्व करूं, बैक हैंड पे सर्व करूं, बॉडी पे सर्व करूं, कितनी रफ्तार से सर्व करूं। और जब वो रिटर्न कर रहा होता है तो उसका चॉइस काफी कम होता है। जहां पे भी बॉल आएगा वहां पे मुझे जो रैकेट है वहां पे मुझे टच करवाना है और बॉल को कैसे ना कैसे कम से कम वापस कोर्ट में रखना है। तो अभी कोई-कोई ऐसे हो सकता है कि जो दूसरे साइड से सर्व करने वाला बहुत अच्छा सर्व कर रहा है। तो बार-बार ऐसेसे ही मार रहा है तो वो पहुंच भी नहीं पा रहे तो लगे ऐसे प्लेयर से खेलेंगे कैसे मैं तो कभी ऐसे लगता है कि चॉइस है ही नहीं कुछ पर वो पॉइंट है कि वो हमेशा सर्व नहीं करने वाला है क्या है हमारा भी सर्व आने वाला है तो जीवन में कई बार ऐसे होता है कि अगर हम फेसेस देखें जैसे लास्ट पॉइंट में कि कुछ कुछ ऐसे होते हैं फेसेस हमारा हमारा जो चॉइस है चॉइस कभी-कभी बहुत हाई होता है। फिर कभी-कभी बहुत लो हो जाता है। फिर कभी-कभी वापस हाई होता है। वापस लो हो जाता है। तो ये जो ऐसे है यह बदलते रहता है हमारे जीवन में। चॉइस और चांस। तो अभी क्या है यहां पर? कई बार ऐसे हो सकता है कि अगर हमारा यह जीवन है तो हम अलग-अलग फेसेस से जा रहे हैं। तो एक तरह से जो हमारे लिए आपको ये जेट लैग शब्द पता है जेट लैग मतलब क्या होता है कि अगर आप एक देश से दूसरे देश में जाते हो अगर मैं अमेरिका से भारत में आता हूं तो मेरा जो शरीर है का क्लॉक अमेरिका में काम करता है। अमेरिका उसको लगता है मैं अमेरिका में हूं अभी। और इसीलिए जब सुबह होती है यहां पे तो मुझे वहां पर रात होती है तो नींद आने लगती है। और जब मैं यहां पे दिन होता है रात होती है तो वहां पे सुबह होते हैं तो आप पूरा जाग जाते हैं। तो उसको थोड़ा एडजस्ट करने के लिए टाइम लगता है। तो जैसे जेट लैग होता है वैसे कई बार क्या होता है? हमारा माइंड लैग हो जाता है। माइंड लैग मतलब क्या है कि अभी जब मैं यहां पे हूं तो मेरा चॉइस काफी है। और उसे तभी मुझे चॉइस पूरा एक्सरसाइज करना है। जिम्मेदारी से करना है। पर उसके बाद में जब यहां पर आता हूं मैं तो तभी मेरा चॉइस कम हो गया है। तो चॉइस कम हो गया है। स्वीकार करना है मुझे। पर कई बार क्या होता है कि यह चॉइस कम क्यों हुआ है? उसी को हम रिजेंट करते रहते हैं। अरे ये व्यक्ति मेरी बात सुन क्यों दे रहा है? और हम यहां पे होते हैं पर हमारा मन क्या होता है? हमारा माइंड यहां पे होता है। और कई बार हमारा कंट्रोल कम हो गया होता है। पर हम उसके बारे में इतना रिजेंट करते रहते हैं। इतनी घृणा करते रहते हैं। तो वो परिस्थिति में हम कुछ करते ही नहीं है। पर उसके बाद में वापस यहां पे भी आ जाते हैं तो तो जब क्या होता है कई बार ऐसा लगता है कि जब हमारा चॉइस कुछ कम हो जाता है तो लगता है मैं कुछ भी करूं कुछ फर्क पड़ता ही नहीं है और जब हम जो करेंगे उससे फर्क जब पड़ता भी है पड़ सकता है तभी में हम कुछ करते नहीं है तो इसीलिए क्या है कि मेन प्रॉब्लम जो है हमारे जीवन में अनेक प्रॉब्लम कह सकते हैं पर दिस इज द प्रॉब्लम वी विल ट्राई टू एड्रेस हमारे अगले तीन सेशंस में कि क्या है कि हमारा जो हमारे जो अस्तित्व है भगवान कहते हैं आत्मा है मन है और शरीर है। तो आत्मा, मन और शरीर हमारा तीन स्तर है अस्तित्व का। तो जब मैं माइंड लैग कहता हूं उसका मतलब क्या है कि कई बार क्या होता है कि हमारा शरीर अगर इसी उदाहरण पे जाते हैं हम तो क्या है मेरा शरीर यहां पर है पर मेरा मन यहां पर है। सॉरी ओके मेरा मन यहां पर है। तो जब ऐसे क्या होता है यह आउट ऑफ सिंक हो जाता है। तो जब आउट ऑफ सिंक हो जाता है तो उससे क्या होता है कि जब कोई जब मौका है सुविधा है वो करना करने का कुछ करना है पर हमारा मन कहीं और है तो उससे हम कुछ कर नहीं पाते तो हमारे चॉइस को मैक्सिमाइज कैसे करना है और सकारात्मक चॉइस कैसे करना है अगर ये बॉडी और माइंड आउट ऑफ सिंग का मतलब क्या है कभी-कभी किसी ने वीडियो रिकॉर्ड किया है और शायद उन्हें एक वीडियो एक डिवाइस पर रिकॉर्ड किया है फिर दूसरे डिवाइस पे रिकॉर्ड किया है और दोनों को सिंक किया है। पर सिंक अच्छा नहीं हुआ है। तो क्या होता है वो क्या होता है व्यक्ति बोलता है कुछ और फिर क्या होता है वो हमको सब लोगों के हंसने की आवाज़ आती है पर क्या बोला है वो समझ में नहीं आता है। या सब लोग हंस रहे हैं पर ध्वनि बाद में आ रही है। हम वीडियो में देखते हैं सब लोग हंस रहे हैं पर ध्वनि बाद में आ रही है। कोई एक्शन मूवी हो या कोई वो मारता है। वो पंच मारने के पंच के आवाज़ आने के पहले ही व्यक्ति नीचे गिर जाता है। तो वह आउट ऑफ सिंक हो जाता है तो फिर वो प्रॉब्लम आता है। तो हमारा अभी अर्जुन का मन क्या आउट ऑफ सिंक हो गया है कि ये युद्ध नहीं होता तो कितना अच्छा होता। पर वो युद्ध ना होना वो चॉइस है नहीं उसके पास अभी। युद्ध तो होना ही है। तो हाउ टू गेट आवर बॉडी एंड माइंड इन सिंक विथ ईच अदर? कि जो परिस्थिति है, परिस्थिति और मनस्थिति साथ में अगर हम लाते हैं तो हम क्या कर सकते हैं? हम हमारे चॉइस को मैक्सिमाइज कर सकते हैं। तो अगर परिस्थिति और मनोस्थिति जो है वो आप ऑोजिट है हम तो फिर क्या होता है जो हमारा चॉइस जो हम कर सकते हैं वो हम कर नहीं पाते हैं। तो अगले सेशंस में हम जो है गुणों के बारे में चर्चा करेंगे। मन के बारे में चर्चा करेंगे। अलग-अलग चीजों में चर्चा करके किस तरह से हमारे हम चॉइस को जो भी परिस्थिति में आए हैं उसको मैक्सिमाइज कर सकते हैं। कैसे भगवान अर्जुन को जो तत्वज्ञान बताते हैं उससे जो अर्जुन है उनका भाव पूरा सकारात्मक हो जाता है। तो वह कैसे होता है उसके बारे में हम चर्चा कल करेंगे। कल से करेंगे। तो आज सारांश में तीन पॉइंट चर्चा किए कि गीता हमारा टॉपिक था गीता फॉर एंपावरमेंट। कि हमारी जो भी परिस्थिति हमारे जीवन में आती है उससे कैसे हम एंपावरमेंट महसूस कर सकते हैं। तो पहला पॉइंट मैंने देखा कैसे कि हमारा पूरा जो लाइफ होता है उसमें दो चीजें हैं। चॉइस और चांस और इसको ही कैसे नेविगेट करना है वह हमें फैसला करना है। जैसे हम देखा कैसे कि हम जो सुख कहते हैं जो चॉइस और चांस से वास्तव में हमारे जीवन में सरकमस्टेंस आते हैं परिस्थितियां आती है। तो किस हद तक वो चॉइस से आई है? किस हद तक से सरकमस्टेंस से आई है? पता नहीं। चांस से आई हमको पता नहीं है। तो हम चाहते क्या है? ये सरकमस्टेंससेस ऐसे हो कि हमें सुख मिले। और सुख की परिभाषा क्या है? जो प्रिय है उससे योग हो जाए और जो अप्रिय है उससे वियोग हो जाए। तो यह हम चाहते हैं पर कभी-कभी उल्टा हो जाता है। तो अभी अर्जुन के लिए क्या हो गया है? जो अप्रिय है उससे योग हो गया है। कि भीष्म और द्रोण से युद्ध करना है। वह अप्रिय है उससे योग हो गया उसके लिए। उसके कारण बहुत वो दुख हो गया उसको। तो अभी हम देखा दूसरी चीज कि क्या कि हमारा जो हमने कर्म और धर्म इनके बारे में चर्चा की गीता में। अभी जो जो भी परिस्थितियां हमारे जीवन में आती है जो कर्म है इसका संबंध दोनों से आता है। जो हमारा चॉइस है और जो चांस भी है। हमने देखा कि कर्म के अर्थ है चार अर्थ हो सकते हैं। ए आर सी एस। क्या है? एक्शन, रिएक्शन, कनेक्शन और सिलेक्शन। तो एक्शन और सिलेक्शन के रूप में जो है वो कर्म चॉइस है हमारा। और जो रिएक्शन और जो कनेक्शन है कैसे किस अभी कौन सा प्रतिक्रिया आ रही है और कौन से कार्यकार प्रतिक्रिया आ रही है ये हमको पता नहीं है तो कर्म में हम चांस पे जोर देंगे तो क्या है कर्म वो जजमेंट हो जाता है कि तुमने किया है तुम भुगतो पर जो हमारा चॉइस है अगर हम वो समझते हैं तो कर्म से क्या होता है हमको एनकरेजमेंट मिलता है एंपावरमेंट मिलता है कि ठीक है मुझे चॉइस करने की क्षमता अभी भी है तो कैसे उचित चॉइस करना है तो यह जो है जो हम एनकरेज से जो सिलेक्शन करना है हमको सही सिलेक्शन जो है वह हमारा धर्म है। धर्म मतलब हमने देखा कि दो दृष्टि से देख सकते हैं। एक है एक नैतिक दृष्टि से क्या सही है गलत है? दूसरा है कि एक ऑपरेशनल या फंक्शनल दृष्टि से ठीक है। इसमें क्या उचित उचित पर्याय है? क्या अच्छा है वो हमें देखना है। तो हमने देखा कैसे कि आखिरी पॉइंट लिखा चॉइस चांस का इंटरेक्शन कैसे होता है कि हमें जो कर्म करना है धर्म के अनुसार वो चॉइस चॉइस का इंटरेक्शन कैसे होता है? हमने तीन उदाहरण देखे तीन पॉइंट देखे इसके लिए ऐसे लगता है कभी-कभी जो ऐसे हो सकता है कि चॉइस वो 100 हो सकता है और चांस जीरो हो सकता है या चांस 100 हो सकता है। चॉइस जीरो हो सकता है। पर ये बहुत रेयर है। साधारणत दोनों होते हैं हमने। तो हमने वो क्षेत्र का उदाहरण देखा। एक है कि लेख एक बाउल अपसाइड डाउन बाउल का उदाहरण देखा गीता के अनुसार के अनुसार जो जब अपसाइड डाउन बाउल होता है यथाकाशितो नित्यम और फिर दूसरा टेनिस का उदाहरण लिया किस तरह से कि कभी हम सर्विंग कर रहे हैं कभी हम रिटर्निंग कर रहे हैं तो हमेशा हमारे पास कुछ ना कुछ तो चॉइस है। वो चॉइस को हम मैक्सिमाइज करेंगे सकारात्मक कुछ उसको इस्तेमाल करेंगे तो हमारे जीवन में हम जो है कम अगर सिचुएशन को अच्छा ना बना पाए कम से कम उसको और खराब तो नहीं बनाएंगे। तो वो चॉइस को कैसे हम मैक्सिमाइज कर सकते हैं इसकी चर्चा हम कल करेंगे। जो चॉइस नहीं मैक्सिमाइज करते तो क्या होता है कि जो हमारी परिस्थिति है हमारा मन एक जगह पे होता है। शरीर एक जगह पे होता है। तो मन उस जगह पे चॉइस कम है। शरीर उस जगह पे जहां पे चॉइस ज्यादा है। तो हमें क्या करना है? कि हमारे बॉडी और माइंड को सिंक में अगर लाएंगे तो वी कैन मेक बेटर चॉइसेस। थैंक यू वेरी मच। हरे कृष्णा। किसी को कोई सवाल है? कोई कमेंट्स हैं? यस प्लीज। हरे कृष्णा प्रभु जी। थैंक यू फॉर नाइस क्लास। कोई भी एक्शन हम लेते हैं तो हम ये लेक्चर सुनने के बाद वी बिकम मोर कॉन्शियस अबाउट और एनालाइजिंग द थिंग्स वेदर इट इज बाय चॉइस और वेदर इट इज बाय चांस वेयर इज द फैक्टर ऑफ मर्सी देन हाउ वी कैन नो इट इज लॉर्ड मर्स ठीक है तो यहां पे भगवान की कृपा कहां पे आती है कहां पे आती है देखिए तो जो मैं ये शुरुआत किया है क्लास का आई एम स्टार्टिंग इट फ्रॉम अ कंप्लीटली नॉन फिलॉसोफिकल पर्सपेक्टिव क्या है कि एक व्यवहारिक जीवन में हम जैसे जीवन जी रहे हैं तो परिस्थितियां परिस्थिति कैसे आ रही है। उस दृष्टि से हम देख रहे हैं। अभी तो अभी क्या है कि मैं पहली बार जब यह लेक्चर दिया तो अमेरिका में लेक्चर दिया था तो एक प्रभुपाद जी के शिष्य थे बोले थे कि देयर इज़ नो सच थिंग एस चांस इन लाइफ। कोई चांस है ही नहीं। भक्त को ये चांस ये शब्द इस्तेमाल ही नहीं करना चाहिए। क्योंकि सब कुछ कृष्ण का प्लान है। अब वो सत्य है। पर क्या है कि हमारे व्यवहारिक दृष्टि से तभी कृष्ण की योजना क्या है? वो समझना बहुत मुश्किल होता है। तो इसलिए क्या है कि आवर फिलोसफी फी जो हमारा तत्वज्ञान है आवर फिलॉसोफी शुड शुड ब्रॉडन आवर विज़न नॉट लिमिट आवर विज़न क्या है मतलब क्या है ब्रॉडन आवर विज़न मतलब क्या है कि जो हो रहा है उसको मैं अच्छी तरह समझ सकूं तत्वज्ञान के द्वारा पर क्या है कि यह चांस है ही नहीं पर नहीं एक व्यवहारिक दृष्टि से तो चांस है अभी अगर कोई व्यक्ति फैसला करता है कि हमारा यहां पर एक मंदिर है वहां पर हम मंदिर बनाएंगे और उसके लिए इतने भक्तों को वहां पर जगह इतना पैसे से हम जगह खर्च करेंगे जगह पैसे के जगह खरीदेंगे वहां से खर्च करेंगे पैसे तो अभी उससे यशस्वी होने वाला है नहीं हमारे दृष्टि से वो चांस है अंत में वो भगवान की योजना उससे कुछ होगी क्या सीखना है उससे हम सीख सकते हैं हम बट व्हेन वी स्टार्ट क्या है कि हमको पता नहीं है प्रभुपाद जी भी कहते थे कि एक तरह से प्रभुपाद जी कहते हैं कि अच्छे की कार्य तब ए अनुमाने आप कुछ तो योजना हो गई ये मेरा अनुमान है पर प्रभुपाद जी ये भी कहते हैं कि जब मैं अमेरिका में गया तो मुझे लेफ्ट जाना है या राइट जाना है पता नहीं था मुझे तो किस प्रकार के लोग उनको मिलेंगे वहां पे वो एक तरह से चांस था चांस के पीछे भगवान का प्लान हो सकता है पर ब्रॉडली क्या है जो हमारा जो भगवान का मर्स जो होता है जो भक्ति होता है उससे क्या होगा दो चीजें होगी तो चॉइस है हमारा वो और पॉजिटिव बन जाएगा कि जितना हम मैक्सिमाइज कर सकते हैं वो चॉइस को मैक्सिमाइज करेंगे और जो चांस है चांस से जो नेगेटिव आता है वो लेस हो जाएगा चॉइस से पॉजिटिव जो हम कह सकते हैं वो मोर हो जाएगा चांस से जो नेगेटिव आता है वो लेस हो जाएगा तो अहम तम सर्व पापे मोक्ष्यामि भगवान कहते हैं तो एक तरह से जो 1866 जो है मोक्ष्यामि मास वो क्या है? जो भी नकारात्मक परिस्थितियां आने वाली है मैं उसको कम करने वाला हूं। और जब अर्जुन कहते हैं 1873 में करिश वचनम तव वो अपने चॉइस को मैक्सिमाइज कर रहे हैं। पर इसमें समस्या क्या होती है कि चांस से कितना नकारात्मक आने वाला था और उसको किस मात्रा में कम किया ये दोनों हमको पता नहीं है। इसलिए जब हमारे जीवन में कुछ हम इसीलिए हमारे जीवन में जब कुछ नकारात्मक आता है तो अरे ये क्या हो गया लगता है तो हम एक बौद्धिक स्तर पे एक संकल्पना के स्तर पे विचार कर सकते हैं कि हां शायद और आने वाला था पर कम आ गया पर लगता है अरे इतना बड़ा अभी भी आ गया है ना कैसे सामना करना है इसका क्यों आया ये तो इसीलिए कई बार क्या होता है कि भक्ति में जो भक्ति है इसके आई एम गोइंग टॉक अबाउट दिस इन लास्ट सेशन पर अभी भक्ति का एक रैशन एस्पेक्ट है और एक मिस्टिकल एस्पेक्ट है रैशन मतलब क्या है जो बुद्धि से तर्क करके हम समझ सकते हैं और मिस्टिकल मतलब जो है हम समझ नहीं सकते। तो कई बार जो भक्ति के मिस्टिकल एस्पेक्ट पे जोर दिया जाता है कि आप जप करो आप कीर्तन करो कीर्तन में तालियां बजाओगे आपके सारे हाथ के आपके जो लकीर है बदल जाएगी। अभी ये हो भगवान की क्षमता है ये कर सकते हैं। पर भगवान कब करते हैं कैसे करते हैं ये हमको पता नहीं है। तो इसीलिए जब मैं व्हेन आई इन जब मैं खुद के जीवन में अप्लाई करता हूं और जब मैं क्लास देता हूं तो वी एक्सेप्ट हम स्वीकार करते हैं बट क्या होता है इफ फोकस ऑन द रैशन एस्पेक्ट कि क्या है कि जो हमारा चॉइस है उसको कैसे हम और एमावर कर सकते हैं। परीक्षित महाराज सात दिन जब वो भागवतम सुन रहे थे तब तक एक भी बार उन्होंने नहीं पूछा शुरुदेव गोस्वामी से अरे सात दिन के बाद वो सांप आएगा तो क्या बहुत दर्द होगा उसे? वो जब काटेगा मुझे तो कैसे मेरी मृत्यु होगी? क्या मैं इतना भागवतम का श्रवण कर रहा हूं तो सांप के काटने से दर्द कम होगा तभी वो एक भी बार पूछा नहीं उनको। तो जा जो आने वाला है जो हमारे बियों्ड माय कंट्रोल है वो उस पे क्या उस पे फोकस करने से क्या होता है? उसको एक्सेप्ट करना है कि ये भगवान करेंगे। पर वो एक्सेप्ट करने की जगह पे हम क्या करते हैं? एक्सपेक्ट करते हैं बहुत। और जब जितना हम एक्सपेक्ट करते हैं ना सी इन जनरल एक्सपेक्टेशन इज डिस डिसएवरिंग रिस्पांसिबिलिटी इज एंपावरिंग जितना हमारा अपेक्षा रहती है अपेक्षा से क्या होता है अपेक्षा मतलब हमारे नियंत्रण में नहीं है तो उससे क्या लगता है हमको असह्य अलग लगते हैं और जो जिम्मेदारी है जिम्मेदारी मतलब क्या है कि जहां पे चॉइस की बात कर रहा हूं मैं जितना हमारे चॉइस के बारे में देखते हैं तो उससे क्या होता है हमको एंपावरिंग लगता है तो इसीलिए भक्ति में भगवान बहुत कुछ करेंगे हमारे लिए। पर उस पे हम फोकस करेंगे तो क्या होगा? हमको एम हमको बहुत अनसर्टेन लगेगा। अरे ये भगवान ने ये क्यों नहीं किया? ये ऐसे क्यों होने दिया? ये क्या हो रहा है? तो इसीलिए वी फोक बेटर टू फोकस ऑन दिस। ये नहीं तो क्या होता है? हमको बहुत डिसएवरिंग लगने लगता है ये।

ओके। कोई और सवाल है? यस माता जी। क्या अच्छे कर्मों से हम पूर्व कर्मों के फलों को बदल सकते फल को बदल सकते हैं? क्या अच्छे कर्म से हम अच्छे चुनाव से हम पूर्व कर्म के फल बदल सकते हैं? डेफिनेटली हां यस डेफिनेटली। अभी किस हद तक होगा हम वो पता नहीं है हमको। क्या है कि अभी मेरे चॉइससेस जो है हम अभी एक तरह से मैं यहां पे हूं तो चॉइससेस मुझसे आ रहे हैं। हम और मेरे आजू-बाजू जो सरकमस्ट्ससेस हैं वो कहीं और से आ रहे हैं। कहीं और से मैं कह सकते हैं मतलब मेरे ही पूर्व कर्म से आ रहे हैं। हम कह सकते हैं अभी तो जो मैंने पहले किया था उसका परिणाम है। क्या किया था कब किया था। कुछ हद तक पता हो सकता है हमको। अगर मैंने पहले किसी व्यक्ति से बहुत बुरा उससे बहुत डांटा है। उसके बारे में कुछ बुरा भला बोला है और अभी वो व्यक्ति मेरा बॉस बन गया है तो तो क्या होगा अभी जो व्यक्ति मेरे साथ जो कर रहा है वो एक तो जैसे करनी वैसे भरनी है हम कह सकते हैं हम पर तो कभी-कभी हमें पता चलता है कि मैं मेरे साथ जो हो रहा है वो क्यों हो रहा है कभी-कभी शायद पता नहीं होता है हमको हम तो अभी जब ऐसे हो रहा है तो उसमें देयर आर थ्री डिफरेंट थिंग्स क्या है कि क्या हमारे चॉइस जिससे हमारे जो जो चांस है जो पूर्व कर्म से आने वाला है क्या वो बदल सकता है? थ्री थिंग्स कि सबसे पहले जब हमारे जीवन में कोई परिस्थिति आती है हम कि वो अगर मैं इस जीवन में जा रहा हूं ये परिट पुट इट दिस वे थोड़ा इसको इलस्ट्रेट करने में टाइम लग जाएगा। कैसे है कि हम हमारे जीवन में जा रहे हैं और हम क्या होता है कि यह हमारा पूर्व जन्म का कर्मा क्लाउड है। अभी जो कर्मा क्लाउड से क्या होता है? इससे कुछ बारिश आने वाली है। तो कभी कुछ अच्छा होता है कभी कुछ बुरा होता है। मतलब क्या होता है? कभी हम कहीं जाते हैं और हमको कंपनी में नौकरी मिल बॉस बहुत अच्छा होता है। हमको बहुत मदद करता है। ज्यादा काम नहीं देता है। सपोर्ट देता है समझने के लिए। हम ग्रो अच्छा होता है। सब अच्छी परिस्थिति आती है। कभी-कभी होता है कहीं जाते हैं। हमारा पड़ोसी बहुत खराब होता है। परेशान करता है। ने क्या नेगेटिव आता है। दोनों आ सकता है। तो अभी जो पास्ट का जो इफेक्ट है वो एक तरह से क्या हो सकता है? अभी जो हमारे जीवन में परिस्थिति आती है वो परिस्थिति केवल पास्ट से नहीं आ रही है। पास्ट और प्रेजेंट दोनों से आ रही है। तो अभी द चेंज कैन हैपन एट थ्री लेवल्स। पहला है सबसे पहले द इंपैक्ट ऑफ द पास्ट। इंपैक्ट मतलब क्या है? उसका परिणाम। तो मान लीजिए कि मैं मैंने पहले कुछ बुरा कर्म किया है। उसके कारण कोई व्यक्ति मुझे चीट करने वाला है। हम वो फाइनशियली हो सकता है। रिलेशंस में हो सकता है। इस गोइंग टू चीट मी। हम बेईमानी करने वाला है वो। तो अगर मेरा इस जीवन का चॉइस जो है अगर मैं इस जीवन में आई एम काइंड, आई एम हेल्पफुल, आई एम एक्सटेंडिंग मैं लोगों से अच्छा बर्ताव कर रहा हूं। तो एक तरह से कह सकते हैं कि उसके बावजूद वो मुझे चीट करता है तो बहुत बुरा लगेगा। वो सत्य है। पर दूसरा क्या है कि जब वो मुझे चीट करेगा जब वो मेरे साथ कोई बेईमानी करेगा गद्दारी करेगा जो भी है तो तभी बाकी लोग मुझे मदद करने आएंगे। क्योंकि क्या है कि आई हैव बीन काइंड। आई हैव बीन हेल्पफुल। आई हैव बीन एक्सटेंडिंग। पर इसके विपरीत अगर मैं इस जीवन में मैं हारश हूं। मैं रूढ़ हूं। मैं मैनपुल ेटिव हूं। मैं एक्सप्लइटेटिव हूं। तो क्या होगा? जब दूसरे लोग जब वो व्यक्ति मुझे चीट करेगा तो कोई मदद करने के लिए नहीं आएगा। तो इसीलिए जो मिस्टिकल बात छोड़ देंगे हम रैशन दृष्टि से भी क्या है कि अगर हम अगर हम अच्छे चॉइस कर रहे हैं तो वो अच्छे चॉइस से पूर्व कर्म का इंपैक्ट कम हो जाएगा। कोई व्यक्ति के मान ले उनका डाइट अच्छा है, एक्सरसाइज करते हैं। अपने स्वास्थ्य का अच्छा ख्याल रखते हैं वो। उसके बाद में उसके बावजूद उनको कैंसर हो जाता है। वो तो उससे बोलता है कि चॉइस का क्या फायदा हुआ? पर नहीं अगर आपको वो हैबिट है अच्छा डाइट अच्छा जॉय डाइट अच्छा एक्सरसाइज करने की तो कैंसर को बीट करने के तुम्हारा प्रोबेबिलिटी बढ़ जाता है। क्योंकि तुम्हारा तुम्हारा बेसिक कॉन्स्टिट्यूशन अच्छा है। वो कैंसर आ भी गया है तो। तो इसलिए क्या है? जो पास्ट कर्मा का जो इंपैक्ट है वो कम हो सकता है। दैट्स द फर्स्ट यह जो है यह रैशन स्पिरिचुअलिटी का पार्ट है। रैशन भक्ति का पार्ट है। नाउ अभी दूसरा क्या है कि भगवान की कृपा से उसका क्वांटिटी वो कम कर सकते हैं। क्वांटिटी मतलब क्या है कि ये ये मिस्टिकल पार्ट है हम कि शायद उस समय जो व्यक्ति वो हमें हमने बेईमानी करने वाला था शायद हमसे ₹1 लाख लेके जाएगा। पर कुछ होता है तभी वो ₹1 लाख लेके जाता है। ₹1 लाख भी बहुत खराब है। पर फिर भी क्या है? इट्स नॉट 10 लाख। और तीसरा है कि इसका टाइमिंग भगवान बदल सकते हैं। एंड दिस कैन आल्सो मेक अ बिग डिफरेंस। क्या है कि अगर हमारे जीवन में कि मान लीजिए किसी के जीवन में के पूर्व कर्म के अनुसार तीन बड़ी समस्या आने वाली है। उनको हेल्थ क्राइसिस आने वाला है। उनको कोई बेईमानी करने वाला है। और उनके सारे पैसे डूबने वाले हैं। तो अगर ये तीनों 10-10 साल के बाद आएंगे। मुश्किल है डील करना। डील कर लेंगे पर तीनों अगर एक साथ आ जाएंगे तो क्या है वो असहनीय हो जाएगा हम तो अभी क्या होता है कि कब प्रॉब्लम्स आते हैं दे आल्सो मैटर तो भगवान की कृपा से जो कैसे हो सकता है कि वो प्रॉब्लम आएगा पर उस समय नहीं आएगा किसी और समय आ जाएगा और उससे उससे भी क्या होता है कि हम जो आई कैन ओनली टैकल दिस मच राइट इतना सामना कर सकता हूं यानी और नहीं कर सकता मैं तो योर टाइमिंग और क्वांटिटी है वो भगवान बदल सकते हैं। हम कह सकते हैं कि भगवान क्वांटिटी को जीरो भी कर सकते हैं। पर जो है वो भगवान हमारे भक्ति से जो प्रेजेंट चॉइस में जो हम सही अच्छे अच्छे बुद्धि से जिम्मेदारी से चॉइस करेंगे तो क्या होगा? वो रैशन तरह से बुरे कर्म का इंपैक्ट कम होगा। और भक्ति के साथ कार्य करेंगे तो क्या है? भगवान उसका टाइमिंग और क्वांटिटी दोनों कम भी कर सकते हैं। ओके? थैंक यू। एनी लास्ट क्वेश्चन बिफोर वी स्टॉप? शिक्षाश्रम एनी कमेंट थैंक यू वेरी मच। श्रीमद् भगवत गीता की जय। श्रील प्रभुपाद की

जय।

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