DHURANDHAR – A Bhagavad Gita Perspective – Caitanya Charan
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हरे कृष्णा हरे कृष्णा तो मैं ऑनलाइन लाइव जो ये ड्रामा आपने किया था वो देख रहा था कि किस तरह से अलग-अलग समस्याएं हमारे जीवन में होती है और कुछ समस्याएं छोटी है होती है कुछ बड़ी होती है कुछ समस्याओं का सामना करते हुए हम अलग समस्या निर्माण कर देते हैं तो क्वाइट क्रिएटिव था। आईआईटी क्या था? इडियट इंस्टट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी। इट्स क्वाइट क्रिएटिव। तो मैं आज क्या धुरंधर ये भगवत गीता की दृष्टि से हम कैसे देखना है वो समझेंगे। तो मैं इसको तीन चीजों में तीन जगह तीन पार्ट्स में देखूंगा। इसको मीनिंग आई विल टॉक अबाउट अ मैप। मीनिंग एनालिसिस एंड प्रैक्टिकल। तो अभी जो धुरंधर शब्द है यह डायरेक्टली कहीं भगवत गीता में नहीं आता है। पर वो जो शब्द है मैं दो और संकल्पनाओं से तुलना करूंगा। धुरंधर वर्सेस वीर वर्सेस नायक। तो वीर का अर्थ क्या है? कोई वीर होता है, मतलब क्या कहते हैं? उसका अर्थ क्या होता है?
करेज, कोई हिरइक है। कोई बहुत साहसी है। नायक का मतलब क्या होता है?
हीरो जो एज अ हीरो है। कोई जो बहुत प्रोमिनेंट में होता है। जो लीडर होता है। जैसे नायक मतलब लीडर या प्रोमिनेंट या हीरो। तो, दोनों एक तरह से हीरो होते हैं। पर नायक में क्या होता है? यहां पे वीर में करेज दिखता है। नायक में एक तरह से लीडरशिप दिखता है। डायरेक्शन है दूसरों के प्रति। हम् पर जो धुरंधर शब्द का अर्थ क्या है? धर मतलब उठाना। धुरण मतलब बोझा, बर्डन। तो भगवान का एक नाम है धरणीधर। धरणीधर का मतलब क्या है? जो पृथ्वी को उठाते हैं। तो धुरंधर मतलब क्या है? कि जो एक तरह से एक बहुत बड़े जिम्मेदारी का, बहुत बड़े टास्क का, बहुत बड़ी समस्या का जो बोझा है वो कैरी करता है। तो अभी ये जो मूवी आया है उसमें धुरंधर नाम सुनने को अच्छा लगता है। इसलिए नाम रख दिया रख दिया है। पर आईडिया क्या है? कोई स्पाई मिशन में जाता है। तो अभी स्पाई मिशन में मूवीज में बहुत मूवीज में एक्शन होता है। एक्टिंग वगैरह होता है। पर उसमें क्या होता है? सबसे को स्पाई बनना है। तो उसको जो अपने पूरी आइडेंटिटी है, अपनी प्रायोरिटी है। अपना मेंटालिटी है उस सबको कंसील करना होता है। कोई अगर स्पाई बन रहा है उसको अपने राष्ट्र के प्रति लगाव और प्रेम होना चाहिए। पर जितना स्ट्रांग इमोशन है उतना ही स्ट्रांग कैपेसिटी टू कंसील इमोशन होना चाहिए। तो एक तरह से ये जो बोझा उठाना है यह आसान नहीं है। तो कोई तो स्पाई मूवी अगर होता है मैं मेरे एक मित्र है वो इजराइली भक्त है और उनका जो भाई है वो जो इजराइल की स्पाई एजेंसी है मोसाद वो विश्व भर में बहुत फेमस है एक तरह से दैट स्टंग दे द बेस्ट स्पाई एजेंसी तो उसमें वो काम करते हैं तो ही कैन नॉट टेल एनी स्पेसिफिक डिटेल्स ऑफ़ ऑपरेशंस पर वो बताते हैं किस तरह से जैसे यहां पे भी बताया गया है कोई स्पाई के रूप में भारत से पाकिस्तान जाता है और क्या है एक वहां पे एक तरह से जो हीरो होता है उसमें क्या होता है? एक ड्रामा और डिस्प्ले होता है कि बहुत कुछ कर रहे हैं और कोई बड़ा योद्धा आ गया। उसमें बहुत साहस दिखाते हैं और जोश दिखाते हैं। लीडरशिप में होता है क्या है? एक तरह से डायरेक्शन होता है कि मैं ऐसे करने वाला हूं। तुम ऐसे करो। मैं ये तुमको दिखाऊंगा कैसे करना है। पर धरंधर का मेन कैरेक्टर से क्या है? इट इज अ लॉन्ग गेम। लॉन्ग गेम मतलब क्या है? उसमें यश तुरंत नहीं मिलता। है तो एक तरह से हर व्यक्ति शायद वीर नहीं बन सकता। मतलब क्या ऐसा व्यक्ति शायद योद्धा नहीं बनने वाले हैं। उनको रणभूमि जाकर युद्धा करने का मौका नहीं मिलने वाला है। हर व्यक्ति में जो है जो जनरल लीडरशिप क्वालिटीज कहते हैं। हर व्यक्ति एक स्तर पर लीडर हो सकता है। पर अगर कोई कहेगा हर व्यक्ति हर विद्यार्थी कहेगा क्लास में मुझे मॉनिटर बनना है। तो मॉनिटर सारे मॉनिटर रहेंगे। कोई मॉनिटर करेगा किसको? तो एवरीबडी कैन नॉट लिटरली बी अ लीडर। पर क्या है? हर एक व्यक्ति जो है जो धुरंधर है वो बन सकता है। तो उसमें क्या मैं तीन कररेक्टर्स के बारे में चर्चा करूंगा। एक है जैसे मैं पहले बताया कि कि हैव इमोशंस बट रिस्ट्रेन और कंसील इमोशंस। यह जो है भगवत गीता के सिद्ध प्रज्ञ का जो भावना है वैसे कोई स्पाई है। उसने बताया था उसका राष्ट्र प्रेम होना जरूरी है। पर वो राष्ट्र प्रेम होते हुए उसको छिपा के रखना भी जरूरी है। तो एक बहुत स्ट्रांग इमोशनल जो रेगुलेशन है वो रखना जरूरी है। दूसरा चीज क्या है? इसके लिए काफी पेशेंस जरूरी है। पेशेंस मतलब क्या? स्पाई होता है। धैर्य कह सकते हैं। जो स्पाई है। जैसे आज वहां पे गया और कल बॉमस्पॉट कर दिया। ऐसे नहीं होता है। उसको दिन लगते हैं, हफ्ते लगते हैं, महीने लगते हैं, साल लगते हैं। कभी-कभी इस दशक लग जाते हैं कहीं। यू अर्न द ट्रस्ट। तो वो एक लॉन्ग गेम प्ले करना है। और तीसरा क्या है कि उसमें एक तरह से एक बर्डन कैरी करना है। कि एक बोझा कैरी करना है। तो, अभी यह वास्तव में कैसे होता है? यह इसका अर्थ है। और अभी ऐसे करना क्यों जरूरी है कि अगर हमारे जीवन में हमें कुछ अर्थपूर्ण करना है तो फिर वास्तव में हमारी भावनाएं अगर हमारे कंट्रोल कर लेते हैं तो हम कुछ कर नहीं पाएंगे। अगर हम इंपेशेंट हो जाएंगे तो क्या है? हम मेरे मित्र डॉक्टर कहते हैं कि अगर आप इंपेशेंट हो जाओगे तो आप इंपेशेंट हो जाओगे। इंपेशेंट मतलब क्या है? एक आईसीयू एक एक ओपीडी होता है और एक आईपीडी होता है। कोई बहुत इंपेशेंट हो जाएगा तो फिर क्या उसके वो परिस्थिति और खराब कर देगा। तो बर्डन कैरी करना मतलब क्या है कि हर एक व्यक्ति को अगर कुछ अपने जीवन में करना है तो उसको कोई ना कोई तो जिम्मेदारी लेना जरूरी है। तो वी लुक एट दी थ्री थिंग्स नाउ तो जो अभी इनसाइड जो है इसके बारे में एमएपी जो हम जो सॉरी एनालिसिस जो है एमएपी सेकंड पॉइंट हम देख रहे हैं। तो अभी कैसे है कि हम कुछ भी करेंगे हम जीवन में जा रहे हैं। कोई ना कोई बोझा तो हम पर आने वाला है। किसी के पास कोई भी बोझा नहीं है। मतलब क्या है? मान लीजिए कोई आर्थिक चिंता नहीं है। कोई माता-पिता बहुत धनवान है। स्वास्थ्य भी अच्छा है। वो लोकप्रिय भी है। उसके जीवन में कोई भी बोझा नहीं है। पर क्या होता है? अरे कोई भी बोझा नहीं होगा तो मन एक बोझा निर्माण कर देता है। और वो बोझ के नीचे वो व्यक्ति दब जाता है। अभी मन बोझा निर्माण करता है। मतलब क्या है कि छोटी सी भी समस्या क्यों ना हो मन उसको बड़ा बना देता है। शास्त्रों में वर्णन आता है हिरण्यकश्यपु का। हिरण्यकश्यपु जो था बड़ा असुरी प्रवृत्ति का बड़ा शक्तिशाली राजा था। सब उसको प्रणाम कर रहे थे। और उसको भय के कारण क्यों ना सब आदर कर रहे थे। पर एक व्यक्ति ने उसका आदर नहीं किया। कौन कौन था वो? और एक्चुअली प्रह्लाद ने उसका आदर नहीं किया। ऐसी बात नहीं थी। प्रह्लाद भी उसका आदर कर रहा था। पर जिस तरह से वो अपेक्षा कर रहा था वैसे आदर नहीं कर रहा था वो। और क्या होगा? इससे इतना गुस्सा हो गया और किसी भी चीज में उसको कोई भी रस नहीं मिल रहा था। तो ये जगत में सबको कोई ना कोई तो बोझा कैरी करना ही है। तो अगर हम द ओनली चॉइस इज नॉट वेदर वी विल कैरी अ बर्डन। द चॉइस इज व्हाट बर्डन विल बी कैरी तो किसी कोई कोई बोलता है कि मुझे सिर्फ ऐशो आराम करना है। ठीक है? पर उससे क्या होता है? आसक्ति हो जा सकती है। उसे कुछ बुरी आदत लग जाती है। और फिर अगर शराब के ड्रग्स की आदत लग जाती है तो क्या होता है? वो एक बोझा हो जाता है। अभी आजकल स्क्रोलिंग तो बहुत होता है। आपने एक शब्द सुना है डेथ डूम स्क्रोलिंग। डूम स्क्रोलिंग मतलब क्या है? कि अगर हम अरे यहां पे युद्ध हो गया। यहां पे बम स्पॉट हो गया। यहां पे हो गया है। एक दो तीन चीज़ ऐसे देख लेते हैं हम तो क्या वो एल्गोरिथम और सोशल मीडिया का वही चीज़ हमको दिखाते रहता है। तो अरे सब कुछ बुरा ही हो रहा है। हर जगह पे ये ऐसे हो रहा है, वैसे हो रहा है, वैसे हो रहा है। और फिर वो सारे दुनिया का बोझा जो होता है यहां पे ये हो गया है, वहां पे वो हो गया, वहां पे हो गया है। तो लोग हम हमारे दिमाग के ऊपर रखते हैं। हमारे सिर के ऊपर रखते हैं। हमारे हृदय के ऊपर रखते हैं। तो जो बर्डन है वो उसको टालना संभव नहीं है। पर क्या है? हम उसको चूज़ कर सकते हैं। व्हाट काइंड ऑफ़ बर्डन डू आई वांट टू कैरी? हम सब चाहते हैं एक तरह से हैप्पीनेस चाहते हैं। पर वास्तव में हम केवल हैप्पीनेस नहीं चाह रहे। हम चाहते हैं मीनिंगफुल हैप्पीनेस। अर्थपूर्ण सुख चाहते हैं। अभी कोई आप में से कितने लोगों को हास्य अच्छा लगता है? ह्यूमर अच्छा लगता है? सबको अच्छा लगेगा ह्यूमर। कोई कौन बोलेगा अच्छा ही लगेगा ह्यूमर? पर अगर कोई कहता है कि ठीक है कल से आपको कोई आर्थिक जिम्मेदारी नहीं है, शारीरिक जिम्मेदारी, सामाजिक जिम्मेदारी नहीं है। सुबह से शाम को आपको एक ही करना है। क्या? सुबह से शाम को अगले जिंदगी भर आपको कॉमेडी शो देखना है। कॉमेडी शो को देखो और हंसो। तो, क्या अच्छा लगेगा वो? आधे घंटे के लिए एक घंटे के लिए बहुत फ्रस्ट्रेट हो गए तो एक दिन भर हम देखेंगे कॉमेडी जो पर बाद में क्या होगा वो हंसने से हम फ्रस्टेट हो जाएंगे क्योंकि क्या है कि वो मीनिंगफुल हैप्पीनेस नहीं है तो भगवत गीता में बताया गया है कि हम सत चित और आनंद है। तो इसका मतलब क्या है? सबसे पहले हम चाहते हैं कि आई शुड एकिस्ट। आत्मा सत्य है। आत्मा का शाश्वत अस्तित्व है। इसलिए हम चाहते हैं कि मेरा जीवन रहे। फिर उसके हम चित है। हमें ज्ञान प्राप्त करने की प्राप्त की क्षमता है। इसीलिए हम क्या चाहते हैं? हम अर्थ चाहते हैं। जो मैं देख रहा हूं वो समझने का प्रयास कर रहा हूं। हम मीनिंग चाहते हैं। और क्योंकि आत्मा आनंदी है इसीलिए हम हैप्पीनेस चाहते हैं। पर क्या आइडियली क्या है? ये इसी प्रोग्रेशन में है। पहले हम अस्तित्व है। दूसरा अर्थ है और तीसरा हैप्पीनेस है। पर कभी-कभी क्या होता है? हम हैप्पीनेस के लिए मीनिंग छोड़ देते हैं और फिर अपना एक्सिस्टेंस भी छोड़ देते हैं। किसी को आसक्ति हो जाती है, किसी एडिक्शन हो जाता है। तो थोड़ा डोपामिन हिट हो रहा है, कुछ मिल रहा है उसके लिए क्या हो जाता है? वो व्यक्ति अपने जीवन को ही जोखिम में डाल देता है। तो यहां पे जो अगर हमको बोझा लेना ही है तो यह मीनिंग कहां से आता है? सारी दुनिया हमको बोलती है कि यू यू शुड एंजॉय लाइफ। ईट दिस, वाच दिस, बाय दिस, टच दिस। सी दिस इससे आपको सुख मिलेगा। वो थोड़ा सा प्लेजर मिल सकता है पर वो धीरे-धीरे मीनिंगलेस प्लेजर हो जाएगा। अर्थहीन हो जाएगा। तो मीनिंग कहां से आता है? मीनिंग आता है रिस्पांसिबिलिटी से। शास्त्रों में बताया रिस्पांसिबिलिटी क्या करता है? धर्म। और धर्म से क्या आता है? अर्थ। अभी अर्थ का अर्थ पैसा हो सकता है। अर्थमंत्री पर अर्थ का अर्थ एक अर्थ है कि अर्थ है वह। मतलब क्या है? मीनिंग है। तो अभी हर एक व्यक्ति को हमारे परिस्थिति में मैं जिस परिस्थिति में हूं मुझे कोई ना कोई तो बोझा लेना ही पड़ेगा। और अगर कोई बोझा नहीं लूंगा तो मेरा मन ही एक बड़ा बोझा बन जाएगा। और जो होता है कि द पीपल हु हैव द लीस्ट रिस्पांसिबिलिटी। तो कम से कम ज्यादा जिम्मेदारी कम से कम जिम्मेदारी लेते हैं। कई बार द पीपल वि द लीस्ट रिस्पांसिबिलिटी हैव द मोस्ट एंग्जायटी। जो कम जिम्मेदारी होती है, क्या होता है? उनका मन की कल्पना इधर ये करो ये हो गया, वो हो गया, वो हो गया चिंता उनकी और बढ़ जाती है। जो जिम्मेदारी लेते हैं उनको भी चिंता होती है। पर ठीक है मैं यह जिम्मेदार हूं। यह करूंगा, यह करूंगा, यह करूंगा। तो अभी यह जो है हाउ डू वी डू दिस? अर्जुन जब भगवत गीता युद्ध करने को आए थे तो क्या हो गया? अर्जुन के पास ऐसे देखा मुझे मेरे ही वरिष्ठों से युद्ध करना है। मुझे मेरे ही रिश्तेदारों से युद्ध करना है। और अगर कोई युद्ध कर रहा है सुख के लिए तो वो बोले कि भंजी भोगान रुधिर प्रदान कि मेरे ही रिश्तेदारों के खून से अगर मुझे राज्य मिला है तो क्या भोग होगा उससे? किमनो राजन गोविंदा किम भोगे जीविते यशा का राज्य सुखानी कि अगर अगर हम सिर्फ प्लेजर मोटिव मुझे सुख चाहिए ऐसे मार्ग से जाएंगे तो कभी-कभी क्या होगा कभी-कभी हमारा जीवन ऐसा होता है कि इधर जाओ तो आपको सुख है इधर जाओ तो दुख है तो फिर साधारणत इतना मुश्किल नहीं है जहां सुख है वहां चले जाओ पर कभी-कभी हमारे जीवन में ऐसी परिस्थिति आ जाती है कि कि कहीं भी जाओ कहीं भी सुख नहीं दिख रहा है। तो क्या होता है? ऐसे परिस्थिति में कहां जाए कि कहीं भी देयर इज नो हैप्पीनेस। ऐसा नहीं कि हैप्पीनेस है नहीं पर कहीं दिख नहीं रहा है। ठीक है? मैं पढ़ाई करूंगा मैं और डिग्री मैं अभी स्टूडेंट हूं तो शायद मैं और तो पोस्ट ग्रेजुएशन करूंगा तो उतना मेहनत करना पड़ेगा। नौकरी करने जाऊंगा तो नौकरी मिलेगा कि नहीं? कैसे होगा? ये करूंगा घर के पिताजी का माता-पिता का बिज़नेस चालू करूंगा तो ये प्रॉब्लम है। में यह प्रॉब्लम है। तो कभी-कभी ऐसा लगता है कोई भी मार्ग चुनू मैं वहां पर कुछ मुझे सुख दिख ही नहीं रहा है। तो अर्जुन की ऐसी परिस्थिति होती रहती है कि अगर हम वो सुख की दृष्टि से अभी युद्ध करना से सुख नहीं है। युद्ध ना करने से भी सुख नहीं है। तो अभी करें क्या? तो जब ऐसे होता है तो व्यक्ति कभी-कभी क्रश हो जाता है। तो इसीलिए भगवान को बोलते हैं कि तुमको अभी जो करना है वो तुम सुख के कारण मत करो धर्म के कारण करो तो रिस्पांसिबिलिटी मतलब क्या है कि एक एक सिंपल परिभाषा है कि जब मैं बता रहा था कि अगर हमारे जीवन में अर्थ चाहिए हमको तो हमें रिस्पांसिबिलिटी लेनी है। अभी रिस्पांसिबिलिटी मतलब क्या है? इसका मतलब है कि अरे मेरे घर में इतना आर्थिक समस्या है। मुझे ये ऋण है। ये है ये करना है। रिस्पांसिबिलिटी है। कोई बोलेगा अभी पॉलिटिकल इलेक्शन है। तुमको जिम्मेदारी चाहिए। तुम्हारी पॉलिटिकल पार्टी में आ जाओ। ये जिम्म ले लो। अभी धर्म का मतलब क्या है? एक तरह से अगर हमको अर्थ चाहिए हमारे जीवन में तो क्या धर्म से अर्थ आएगा? तो इसमें भगवता बोलती है कि जैसे अब आगे जो गुण है वो मैं उसको थोड़ा उल्लेख करूंगा कि जब हम हमारे जीवन में हैं तो हमको आगे देखना है। कभी-कभी ऐसे आगे देखते हैं तो कहीं भी कुछ हमको दिखता नहीं है। क्या करना है मुझे। सब कुछ अगर ऐसे लगता है कि कुछ भी है नहीं यहां पर करने के लिए। जो भी करूंगा उसे कुछ नहीं मिल रहा है। सो एट दैट टाइम जो लुक अप सबसे पहले क्या है? लुक अप, लुक अपवर्ड। लुक इनवर्ड। एंड देन लुक फॉरवर्ड। तो इसका मतलब क्या है? अर्जुन जब हमको पता नहीं चलता है क्या करना है तो वो कृष्ण के तो अर्जुन एक तरह से वीर है वो नायक है पर तभी क्या होता है परिस्थिति उनके ऊपर एक बहुत बड़ा बोझा डाल देती है और जो जो धुरंधर का का संकल्पना जो है वो एक तरह से गीता में दूसरे अध्याय में भगवान स्थित प्रज्ञ बोलते हैं मतलब क्या है कि आप आपके भावनाओं के वश में मत जाओ आप ऐसे नहीं कि भावना रहित हो जाओ पर भावनाओं के वश मत जाओ वो कैसे संभव है कि इसके लिए लुक अपवर्ड तो अर्जुन जब कार्पण्य दोषोत स्वभाव वो क्या करते हैं अर्जुन से शरणागत कृष्ण से शरणागत हो जाते हैं तो तभी व्हेन वी लुक अप तो उससे क्या होता है उससे वास्तव में वी लर्न टू लुक एट आवर गिफ्ट्स जब हम ऊपर देख हैं तो केवल भगवान के भगवान की ओर देखना मतलब एक आसमान की ओर देखना जैसे नहीं है। आसमान जितना देखते रहेगा उतना दिखते रहेगा। आसमान कोई अंत नहीं है। पर एक्चुअली इफ वी लर्न टू सी गॉड उससे होता क्या है? वी लर्न टू सी आवरसेल्व्स बेटर। कि गॉड जब हम भगवान के बारे में स्मरण करते हैं तो हम समझते हैं कि भगवान मैं भगवान का अंश हूं। भगवान मेरे साथ है। तो हमको यहां पर क्या है? एक स्पिरिचुअल मिरर मिल जाता है। तो अभी किस प्रकार की का धर्म मुझे करना है, किस प्रकार की जिम्मेदारी मुझे लेनी है? तो हमारे जीवन में अनेक समस्याएं होती है। पर वास्तव में वी हैव टू सी व्हाट आर माय गिफ्ट्स। तो जो मेरे गिफ्ट्स होते हैं उसमें अगर मैं कोई जिम्मेदारी लेता हूं तो वो मैं रिलेटिवली आसानी से कर सकता हूं। आसानी से नहीं होगा तो भी वह वह करने के लिए उत्साह और प्रेरणा रहती है। तो अभी हमारे जो गिफ्ट्स है वो कैसे समझते हैं? तो यहां पे पॉइंट क्या देख रहे हैं हम? हमारे सबके जीवन में कुछ ना कुछ तो बोझा आने वाला है। पर कौन सा बोझा उठाना है जिससे कि वो सिर्फ मैं जिंदगी भर बोझा उठाने नहीं बैठने रहा हूं। वो बोझा उठाने से कुछ होने वाला है।
तो व्हिच रिस्पांसिबल शुड टेक अप? उसके लिए हमें खुद के गिफ्ट्स देखने हैं। और खुद के गिफ्ट्स कैसे देखने हैं? भगवान कहते हैं आप गुण और कर्म को देखो। गुण और कर्म को देखो मतलब क्या है कि क्या चीजें हैं जिस करने से आप कंटेंट होते हैं। क्या करने से आपको संतुष्टि मिलती है और क्या करने से आप कंपटेंट होते हो। मतलब क्या करने में आप अच्छे हो। अभी अर्जुन को हम देखते हैं तो अर्जुन को धनु विद्या में इतनी रुचि एक्सचेंजे थी। हां जरूर एक्सीलेंट था। बहुत टैलेंट था उसमें पर उसमें इतना रुचि थी कि उसको रात को भी जब कुछ दिख भी नहीं रहा था तभी वह प्रैक्टिस करता था कि मुझे अंधकार में केवल ध्वनि के आधार पर क्या अभी इस तरह से किसी में डेडिकेशन है तो कैसे आता है वो केवल कोई बोल रहा है इसलिए डेडिकेशन नहीं आता है। व्यक्ति को कुछ अंतरंग रुचि होनी है। अंतरंग रुचि अगर नहीं होगी तो वो व्यक्ति नहीं कार्य कर सकता है। तो इसमें क्या है जब हम ऊपर देखते हैं तो जो क्या होता है हम खुद को हमेशा दूसरों की दृष्टि से देखते हैं। क्या है इसको इंग्लिश में कहते हैं सोशल मिरर। क्या है? जैसे अगर दूसरे के दृष्टि से हम देखते हैं और फिर अच्छा कोई तुम इसमें इतने अच्छे हो। तुम उसके जैसे क्यों नहीं हो? तुम वैसे क्यों नहीं कार्य करते? वैसे क्यों नहीं बोलते? तो ये सोशल मिरर से क्या होता है? कई बार हमको लगता है कि इनसिक्योरिटी हो जाता है, इनफीरियरिटी हो जाता है। मैं इतना अच्छा नहीं हूं। और आजकल ये सोशल मिरर के ऊपर क्या आ गया है? सोशल मीडिया मिरर आ गया है। सोशल मीडिया मिरर मतलब क्या होता है? कि मैं मैं कहीं जाता हूं और उसके फोटो में मेरे सोशल मीडिया पे डालता हूं और कोई जाता है फोटो डालता है। मुझे 10 लाइक आते हैं और उनको 50 लाइक आते हैं। तो उनको 50 लाइक आ गए मतलब क्या होता है? मैं खुद को डिसलाइक करने लगता हूं। तो कम लाइक आ गए हैं तो उससे क्या होता है? हम समझते हैं कि आई एम मसेल्फ नॉट लाइकेबल। तो हमें कितने लाइक मिल रहे हैं वो महत्वपूर्ण है। पर क्या वो अगर बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण जाता है तो क्या होता है? हम खुद को ही डिसलाइक करने लगते हैं। और ये सबसे घातक हो सकता है। क्या है कि जब स्पिरिचुअल मिरर होता है हमारे पास तो दुनिया कभी-कभी कुछ गुण जो है उनका गुणगान करेगी। कुछ ग्लैमराइज करेगी। हम वो कैसे है कि सोशल मिरर हो सकता है कि हमारे माता-पिता बोल सकते हैं अरे तुम इंजीनियर बनो तुम डॉक्टर बनो। अगर हम स सोशल सोशल मीडिया पे देखते हैं अरे मुझे मुझे क्रिकेटर बनना है। आईपीएल क्रिकेटर बनना है। मुझे मूवी स्टार बनना है। आजकल मुझे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरर बनना है। तो क्या होता है कि हम जो समाज में दिखता है वो ग्लैमराइज होता है। उसको प्रेस्टीजियस लगता है। तो उसके पीछे जाते हैं। अगर वो गुण हम में नहीं ले रहे या कम है में तो हमको लगता है कि मैं वर्थलेस हूं। तो इसीलिए यह जो मिरर है स्पिरिचुअल मिरर है उससे हम सेल्फ ऑब्जरवेशन कर सकते हैं। अभी आपने शायद सुना होगा कभी-कभी कि आपको हमें बहुत मैं बताया था पेशेंस रखना चाहिए। बहुत प्रयास करते हो और प्रयास करो प्रयास करो आपको यश मिल जाएगा। फेलियर द स्टेपिंग स्टोंस टू सक्सेस। ऐसे बताते हैं कि एडिसन के बारे में बताया जाता है कि उसने हजारों बार बल बनाने का प्रया किया यशस्वी नहीं हुआ बाद में एंड में यशस्वी हो गया तो अभी यह जो है यह सत्य है तो एक तरह से कोई कार्य काफी समय तक करते रहना यह आसान नहीं है किसी को स्पाई बनना है तो काफी समय तक कुछ भी यश नहीं होता है तो हर हर समय क्या होता है चिंता होती है कि पकड़ा तो नहीं जाऊं और एक ड्रामेटिक मिशन होगा उसमें एकदम बहुत बड़ा यश आ जाएगा तो वैसे होता है तो काफी समय तक कार्य करना है तो कार्य कैसे करते रहेंगे वह तो उसके लिए यह कुछ तो उसमें गुण होना चाहिए। गुण का मतलब क्या है कि अभी जो हम खुद की ओर देखते हैं तो यहां पे जो व्यक्ति का कैरेक्टर कैसे है? कैरेक्टर नहीं व्यक्ति का नेचर कैसे है? इसके बारे में दो संकल्पनाएं हैं। एक है कि हमारे जो नेचर है वह क्ले के समान है। क्ले जानते हैं मिट्टी के समान है। मतलब क्या है? कोई पॉटर होता है वो उसको जो उसे अलग-अलग प्रकार के वो मटका बना सकता है, ग्लास बना सकता है, प्लेट बना सकता है। तो हम सब क्ले के समान है। अभी ये जो क्ले के समान है, यह दोनों तरह से आ सकता है। यह पैरेंट्स से आ सकता है। यहां पे पैरेंट्स बोलते हैं कि तुम हम तुमको शेप करेंगे। पर क्या है ये चिल्ड्रन से भी आ सकता है। मतलब क्या है? चिल्ड्रन से आ सकता है। कि कोई बच्चा सोचे मैं जो भी बनना चाहता हूं मैं बन सकता हूं। अभी भगवत गीता बताते हैं कि वास्तव में हमारा नेचर क्ले नहीं है। हम जो है एक सीड के समान है। सीड मतलब क्या है? हम सब एक बीज है। तो अभी कितना भी प्रयास करें अगर कोई एप्पल सीड है उससे मैंगो नहीं आने वाला। है। वो कितना भी प्रयास करे वह नहीं होने वाला है। कोई मैंगो सीड से एप्पल नहीं ला सकता है। तो यह धारणा कि वी कैन हमारे विल के आधार पर हम खुद को पूरा बदल देंगे। ऐसे नहीं होता है। तो क्या है कि हमें सेल्फ ऑब्जरवेशन करना है जिसे हम समझे कि मैं कौन किस प्रकार का सीड हूं। जब वो समझेंगे और उसके अनुसार कार्य करेंगे तो का काफी समय तक हम कार्य करते रह गए। तो जो मैं बोला था कोई एडिसन के बारे में बता बात कर रहा था। अभी इतने बार वो यशस्वी नहीं हुआ पर ऐसे नहीं कि वो फ्रस्ट्रेट हो गया था। अरे यशस्वी नहीं हुआ यशस्वी नहीं हुआ। वो प्रोसेस में ही आनंद था उसको। रिजल्ट आएगा तो बहुत आनंद आएगा। पर प्रोसेस में ही आनंद था। एक नोबेल लॉरेन लेखक है। वो बोलता है कि आई लव बीइंग रेड। बट आई लव इवन मोर हैविंग रिटन। कि कोई भी लेखक है चाहता है कि मैं मैं जो लिखा वो लोग पढ़े। पर मैंने मैंने ये लिखा इसी से मुझे आनंद है। तो ये जो अंतरंग सुख होता है वो कैसे आता है? जब हमारे स्वभाव के अनुसार हम कुछ कार्य करते हैं तब वो आता है। और यह अभी हम सबको कोई ना कोई बोझा उठाना है पर अगर हम ऐसा बोझा उठा रहे हैं जिसमें हमें कुछ भी आनंद नहीं आ रहा है। मान लीजिए कोई डॉक्टर बन जाता है और उसको दूसरों की दूसरों को ठीक करने में कुछ भी आनंद नहीं मिलता है। तो फिर क्या होगा उसका आनंद वो दूसरों का शरीर ठीक करने में नहीं आ रहा है तो दूसरों के बैंक अकाउंट को ठीक करने में आ जाएगा। क्या कहते हैं वह अ डॉक्टर हील्स यू विद अ डॉक्टर हील्स यू विद पिल्स एंड किल्स यू विद बिल्स कैसे होता है कभी-कभी तो अभी अगर भगवान बताते हैं पर धर्मो भयाव अगर कोई ऐसा बोझा ले रहा है जिसका कुछ उसमें प्रवृत्ति नहीं है, कुछ क्षमता नहीं है, कुछ कुछ टैलेंट नहीं है, कुछ इंटरेस्ट नहीं है। तो बिल्कुल फ्रस्ट्रेट हो जाएगा वो। हर तरह से फ्रस्टेट हो जाएगा वो। अभी तो इसीलिए ये सेल्फ ऑब्जरवेशन बहुत जरूरी है। कि मैं किस प्रकार का सीड हूं। जैसे कई लोग बोलते हैं कि मेरे पिता माता पिता बोलते तुम ये करो। यह करो। यह करो। बच्चे बोलेंगे नहीं मुझे जो करना है मैं करूंगा। पर माता-पिता जो बोलते हैं वो करना है। मुझे जो करना है वो करना। दोनों में महत्वपूर्ण क्या है? सेल्फ ऑब्जरवेशन कि मैं व्हाट काइंड ऑफ सीड एम आई? तो आजकल पाश्चात देशों में तो इतना लोग युवा उस समय कंफ्यूजिंग हो गए। मेरे एक मित्र है एक भक्त ही है वो। वो बोले कि उनके कॉलेज में ऐसे हो गया कि अभी शायद आपको पता होगा थोड़ा पाश्चात्य देशों में ट्रांस जेंडर नाम का उसका बहुत क्रेज है। ट्रांस जेंडर मतलब क्या है कि ये जो भारतीय माता-पिता थे वो अमेरिका में गए और उनका बच्चा उसको स्कूल में थोड़ा ऐसे लग रहा था और मास मायूस लग रहा था डीजे ने बोला शायद तुमको डिप्रेशन है क्या तुम जाके स्कूल में एक थेरेपिस्ट है तुम उनसे जा के मिलो उनसे और वो थेरेपिस्ट से मिलने गया और पहला सवाल एक दो तीन सवालों का सवाल ने पूछा वो थेरेपिस्ट ने उनको पूछा कि डू यू थिंक यू आर अ गर्ल अभी वो लड़का है अच्छा ताता हेल्दी बॉय है डू यू थिंक यू आर अ गर्ल? क्या बात कर रहे हो वह तो वैसे ही क्या है वो वो आईडिया है किसी को लगता है कि अरे मैं गलत शरीर में हूं। और लोग अभी कनाडा में ऐसे रूल है कि आपको आपके शरीर का हार्मोन दे सकते हैं, शरीर का सर्जरी कर सकते हैं। और अपने माता-पिता को बताने की भी जरूरत नहीं है। तो क्या है मैं खुद को जैसे चाहे बदल सकता हूं। पर वो बदल नहीं पाते वो। क्या होता है वो बाद में उनको 15 साल में अपने शरीर को सर्जरी कर देते हैं और फिर 20-2 साल के जब हो जाते हैं तो रिग्रेट होता है उनको ये क्या कर दिया मैंने तो क्या है वो सर्जरी को रिवर्स नहीं कर सकते ये एक्सट्रीम एग्जांपल है पर मेरा पॉइंट क्या बता रहा हूं मैं ये कि रादर देन थिंकिंग कि मुझे मुझे मुझे विल पावर से ये करना है ये मुझे ये करना है समाज में जो ग्लैमराइज होता है वो मुझे करना है उसकी जगह पे थोड़ा सा पॉज लो खुद को ऑब्जर्व करो कि मुझे भगवान ने किस प्रकार के गिफ्ट्स दिए हैं। वो जो है वो अगर हम देखेंगे तो फिर ईच वन ऑफ अस हम में दिखेंगे कि हम में क्षमता है, एक शक्ति है कि हम जो भी समस्या हमारे जीवन में आएगी वो बोझे को हम सहन कर सकते हैं। तो सेल्फ ऑब्जरवेशन जो है सीड है। यह समझना है तो इसके लिए सेल्फ ऑब्जरवेशन जरूरी है। अभी इसके लिए हमारे माता-पिता हमको मदद कर सकते हैं। हमारे टीचर्स हमको मदद कर सकते हैं। भक्त हमें मदद कर सकते हैं। पर यह सेल्फ ऑब्जरवेशन बहुत जरूरी है। अभी यह हो गया। आई विल जस्ट मेक टू मोर पॉइंट्स। बताया था कि हमारी भावनाओं को जो हमें रिप्रेस नहीं करना है। वो रिप्रेस करेंगे तो क्या होगा? वो चलेगा नहीं। वो एक विस्फोट हो जाएगा। पर कैसे है कि अगर किसी को बहुत गुस्सा आ गया है। यहां पे दो व्यक्ति है और एक व्यक्ति के प्रति बहुत गुस्सा आ गया। तो अगर वो गुस्से को हमको दबा के रखना है, दिखाना नहीं है तो क्या होना चाहिए? देयर हैज़ टू बी अ स्ट्रांग इमोशन अफेक्शन है, रिस्पेक्ट है, जो भी है, डेडीकेशन है वो कहीं और इमोशन ज्यादा होना चाहिए। तो अभी जो स्पाई है, अगर स्पाई कार्य कर रहा है तो क्या उसका अफेक्शन अपने राज्य से होता है? तो राज्य के बारे में कुछ बुरा बोल रहा है कोई उसके बारे में कोई बदनामी कर रहा है उसके बारे तो उससे गुस्सा आएगा पर क्या है उससे बड़ा क्या है मेरा जो रिस्पांसिबिलिटी है उसके में ज्यादा इमोशन होता है तो इसीलिए हमारे जो इमोशंस है उसको हमें रिप्रेस या सप्रेस नहीं करने हैं। उसको हमें रीडायरेक्ट करना है। तो जब प्रभु श्री राम को वनवास में भेजा जाता है तभी क्या होता है? जब भरत और शत्रुघ्न वापस आते हैं तो उनको पता चलता है कि क्या हो गया। पूरा शॉक हो जाते हैं। पूरा दशरथ महाराज का देहांत हो गया है तो उनके अंत क्रिया करते हैं और अंतक्रिया करने के बाद जब वो नदी से श नदी से वापस आ रहे होते हैं तो पास में ही कैकई का महल होता है। और भरत और शत्रुगुण आ रहे हैं तो भरत भरत अभी अगले राजा बनने वाले हैं। तो कुछ मंत्री उनसे बात कर रहे होते हैं। शत्रुगुण थोड़ा आगे जाते हैं। शत्रुगुण जब आगे जाते हैं तो वहां पे वो देखते हैं कि कैकई के महल से मंथरा बाहर आ रही है और मंथरा ने बहुत ही कीमती जेवर पहने हैं। बहुत ही महंगे कपड़े पहने हुए हैं। और यह देख के शत्रुघ्ण को बहुत गुस्सा आ जाता है। वो सीधा उसकी ओर दौड़ के जाता है। पकड़ लेता है। खींचने लगता है। उसे शेक करने लगता है। तुम्हारे कारण सारे अयोध्या में अभी एक दुख का सागर आ गया है। पूरा जो सागर में दुख के सागर में डूब रहा है। उसका कारण तुम हो। अभी क्या है? उसने जो षड्यंत्र किया वो तो किया। पर अभी राजा की मृत्यु हो गई है। साधारणत किसी किसी के किसी किसी की मृत्यु हो जाती है। तो क्या होता है कि हम थोड़े कपड़े जो पहनते हैं सोबर कपड़े पहनते हैं। कोई कोई अगर फ्यूनरल के जा रहा है तो वह पार्टी में जा रहा है वैसे कपड़े पहन के नहीं जाएगा वो तो अभी क्या था जो ऐसे ऐसे पूरे ऐश्वर्यशाली आजकल के फैशनेबल कपड़े जो मंथरा ने पहने थे वो देख के मतलब क्या है उसको कुछ कुछ रिग्रेट नहीं है कुछ शेम नहीं है कुछ भी सेल्फ अवेयरनेस भी नहीं है ये देख के शत्रु को बहुत गुस्सा आ गया शत्रु उसको शेक कर रहे थे चिल्ला रहे थे उस पे तो चीख के कैकई को पुकारने लग गई। जब कैकई वहां पे आ गए कैकई कहे शत्रु रुक जाओ छोड़ो उसको। शत्रु ने बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। तभी ये क्या हो रहा है देखते हुए सब लोग देखने लग गए तो भरत भी वहां पे आ गए और भरत कैकई भरत की ओर भरत शत्रु को बोलो रोको इसको तो भरत ने कैकई की ओर देखा ही नहीं और भरत ने क्या कहा कि हे शत्रुघ्न जो तुम अभी यह कर रहे हो वह करने की इच्छा कई बार मेरे मन में भी आई है। पर बोले क्या कि हमें राम को वापस लाना है। और राम को वापस लाने के लिए जब हम जाएंगे अगर राम को पता चलेगा कि हमने मंथरास के साथ कुछ बुरा व्यवहार किया है तो वह हमसे नाराज हो जाएंगे। तो लेट हर गो नॉट फॉर हर सेक बट फॉर राम से। तो राम के लिए तुम उनको छोड़ दो। इसका मतलब क्या है कि हमारे जीवन में कई ऐसी परिस्थितियां आएगी जिससे हमारे इमोशंस बहुत एक्सप्ल हो सकते हैं। और अगर वह इमोशंस को एक्सप्ललोड नहीं होना है तो हमारे इमोशंस जो है वो कहीं हायर जगह पर वह स्थित होने चाहिए। तो जब हम भक्ति करते हैं कोई बोलेगा भक्ति क्या है? यह एक और रीति रिवाज है। हमारे घर में बताया गया करना चाहिए या यह राष्ट्र हमारी संस्कृति है। ये ट्रेडिशन है इसलिए करना है। वो सही है बट वेरी इट्स अ वेरी पार्शियल ट्रुथ। एक छोटा पार्ट है ट्रुथ का। भक्ति का एक बहुत पावरफुल फंक्शन क्या है? भक्ति से क्या होता है? भक्ति इज द एलिवेटर ऑफ इमोशन। अभी एलिवेटर का मतलब क्या है? कि मान लीजिए कोई आपको पीटने को आ रहा है। और आप एक एलिवेटर में जाते हो। एलिवेटर का दरवाजा बंद हो जाता है और आप बटन दबा देते हो। क्या होता है? वो पीट रहा है। वो गोली भी मार रहा है। आप ऊपर चले जाते हो। तो एलिवेटर क्या है? रादर देन उस व्यक्ति से झगड़ने फाइट करने के उसके ऊपर उठ जाते है। तो भक्ति कैसे है? वैसे ही एक एलिवेटर है। इस दुनिया में चिंता आ सकती है। इस दुनिया में वासना आ सकती है। इस दुनिया में क्रोध आ सकता है। जो भी आता है वो एक तरह से जो भावनाएं हैं वो हम पर आक्रमण करती है। जब वो आक्रमण होता है तो वो भावनाओं को को दमन नहीं करना है उनको। दमन करते रह गए, दमन करते रह गए तो क्या होगा? बाद में वो विस्फोट हो जाएगा। तो अंदर दबाते रह गए, दबाते रह गए। एक समय दबाना नामुमकिन हो जाएगा और फिर वह विस्फोट हो जाएगा। तो वी आर नॉट मेंट टू पुश आवर इमोशंस डाउन। वी आर मेंट टू राइज अबव आवर इमोशंस। और ऐसा नहीं कि सारी भावनाओं के ऊपर जाना है। हमारे पास क्या है? एक और ऊंची भावना आ जाती है तो नीचे की भावना को हम सहन कर सकते हैं। जब पांडव वनवास में होते हैं। तो अभी अर्जुन जो होते हैं वह तपस्या कर जाते हैं। तो अभी अर्जुन को क्या बोलते हैं? व्यासदेव बोलते हैं कि युद्ध आने वाला है। युद्ध होने वाला है। उसके लिए तुम्हें और दिव्य अस्त्र की प्राप्ति करनी चाहिए। अभी यह एक बहुत महत्वपूर्ण फर्क था अर्जुन और कर्ण में। क्या है? दोनों को अपने गुरु से क्या था कि कुछ दिव्य अस्त्र शिक्षा मिला था और दिव्यास्त्र भी मिले थे। पर क्या है कि अर्जुन ही वास कंटीन्यूअसली लर्निंग। आज के लैंग्वेज में हम कह सकते हैं वो अपस्केलिंग कर रहे थे। अपस्किल कर रहे थे खुद को। पर जो कर्ण ने क्या किया? कर्ण ही वास कॉल्ड नॉट ओनली इन प्लीजिंग दुर्योधन वो युद्ध कर रहे थे पर क्या करण ऑलरेडी बहुत अच्छे योद्धा थे ऑलरेडी अ टॉप आर्चर और बाकी राज्यों को युद्ध करके हरा के ही वाज़ गेनिंग अवार्ड्स बट नॉट एबिलिटीज अभी जैसे अर्जुन जैसे युधिष्ठिर ने राजसू यज्ञ किया वैसे कर्ण ने भी दुर्योधन के लिए क्या करवाया उसके लिए वैष्णव यज्ञ किया अभी दुर्योर का विष्णु में कोई श्रद्धा नहीं थी फिर भी उसको वैष्णव यज्ञ करना था क्यों? उसे यज्ञ इसलिए करना था कि आदर चाहिए था। भक्ति नहीं देनी थी। तो उसके लिए जिससे भी युद्ध करना था कर्ण ने उनके लिए युद्ध दुर्योधन के युद्ध किया। पर पॉइंट ये मैं बता रहा हूं यहां कि जो अर्जुन तभी क्या कर रहे थे? अर्जुन तपस्या करने के लिए हिमालय में चले गए। और जब अर्जुन हिमालय में गया तो क्या था कि वो और अस्त्र प्राप्त कर रहे थे। और स्किल्स प्राप्त करते। कर्ण को भी एक और अस्त्र मिला। वो क्या था? वो शक्ति अस्त्र था इंद्र का। पर वो अस्त्र चला गया घटोत्कच के ऊपर फिर उसके हाथ में कुछ भी नहीं रहा और अर्जुन कर्ण को पता था कि मेरे गुरु ने जो मुझे दिव्य अस्त्र दिए हैं मुझे श्राप भी मिला है कि मेरे महत्वपूर्ण युद्ध में मैं वो अस्त्र को भूल जाऊंगा। परशुराम ने शाप दिया था। पर इसके अभी परशुराम ने ये शाप नहीं दिया था कि कोई भी दिव्य अस्त्र तुम सीख लोगे तुम भूल जाओगे उसको। जो मैंने दिव्य अस्त्र दिए हैं उसके मंत्र तुम भूल जाओगे। तो ही कुड हैव उसने और अस्त्र प्राप्त कर सकता था। और वह नहीं किया। अर्जुन ने वह किया। अभी अर्जुन ने जब किया तो पहले तो बहुत कठोर तपस्या करनी पड़ी। अभी वनवास में ही रहना तपस्या थी। पर वनवास में भी क्या है? और वो अपने परिवार के साथ थे। वो खाने के लिए जब कुछ मिलता था। पर यहां पे क्या था? अर्जुन बहुत तपस्या कर रहे थे। तो एक तरह से तपस्या कठोर तपस्या थी। उसके बाद में इंद्र उनको स्वर्ग में ले गए। महादास भागवत में बता कि अर्जुन को मानव शरीर में ही स्वर्ग में इंद्र के आसन पर बैठने का मौका मिला। इंद्र के साथ वो बैठे थे उसी तो वहां पर बहुत आदर मिल गया। तो पहले बहुत तपस्या हो गई फिर बाद में बहुत आदर ऐश्वर्य स्वर्ग का ऐश्वर्य मिल गया। पर जो अर्जुन थे दोनों से प्रभावित नहीं हुए। क्यों? उनका भाव था कि मुझे भगवान की सेवा करनी है। और भगवान की सेवा के तपस्या करनी पड़ेगी। तपस्या स्वीकार कर लूंगा। भगवान की सेवा के लिए अगर स्वर्ग में जाकर मुझे ऐश्वर्य स्वीकार करना है वो भी स्वीकार कर लूंगा। तो इसीलिए भक्ति क्या है? वो एलिवेटर ऑफ इमोशन है। तो इसलिए जब हम भक्ति करेंगे तो हम हमारी क्षमता जो है वो और बढ़ जाएगी। जो दुनिया में बोझा आएगा वो बोझे को सहन करने की क्षमता जो है पहले कौन सा बोझा लेना है वो चुनना है। और दूसरा है कि वो बोझे को बना बोझ से एक सकारात्मक भावना आती है वो अगर नहीं आनी है तो हमारा एलिवेशन ऑफ इमोशन होना चाहिए और आखिरी पॉइंट है जैसे मैं करूंगा कैसे है कि हमारे जीवन में रोज हम कुछ चॉइस कर रहे हैं हर पल में चॉइस कर रहे हैं तो अभी अभी आप बैठे हैं यहां पे आप ये क्लास सुन रहे हैं तो आपने चॉइस किया ये क्लास में आके आने का कोई और कोई टीवी देख रहा होगा कोई और कुछ कर रहा होगा पार्टी को जाएगा कोई आप यहां पे आए पर यहां पे भी आए हैं। तो क्या है एक पॉइंट बोला जा रहा है तो ध्यान से सुन रहे हैं। अगला थोड़ा बोर हो गए अभी बहुत थक गए। बहुत सारे पॉइंट आ गए यह अभी। तो फिर मन हम फोकस नहीं करते। हर पल हम चुन रहे होते हैं। और हर चॉइस जो होता है उस चॉइस का कुछ इफेक्ट होता है। पर कभी-कभी कैसे होता है? कोई ऐसा पल आ जाता है हमारे जीवन में। उस चॉइस का बहुत ज्यादा पॉजिटिव या बहुत ज्यादा नेगेटिव इफेक्ट हो सकता है। तो अभी कब वो मूवमेंट आएगा शायद हम थोड़ा उसको एंटीिसिपेट कर सकते हैं थोड़ा देख सकते हैं। ठीक है? रोज मैं कैसे समय स्पेंड करता हूं। अगर मैं साधारण क्लासरूम में हूं और कुछ सवाल पूछते हैं। मैं जवाब दूंगा नहीं जवाब दूंगा। ठीक है? उससे इमेज मेरा पॉजिटिव नेगेटिव होगा। पर जब फाइनल एग्जाम होता है और तभी फाइनल ओरल एग्जाम है शायद उसमें सही जवाब दूंगा नहीं जवाब दूंगा वो क्या है उससे बहुत फर्क पड़ता है तो अभी कुछ-कुछ हमारे जीवन में जो होते हैं जो ऐसे बिग बिग मोमेंट्स होते हैं वो दे कम बाय प्लान हमारे प्लान हां इस समय बड़ा मूवमेंट आने वाला है पर कभी-कभी होता है हमारे जीवन में जो बड़े मूवमेंट्स आते हैं वो कभी भी आ जाते हैं उसको हमें पता नहीं होता कि अभी ये मूवमेंट आने वाला है। अचानक मान लीजिए हम कहीं हम कहीं ट्रैवल कर रहे हैं। बाजू में कोई व्यक्ति बैठा है। शायद हमको कुछ हमको कुछ टैलेंट है। हमको कुछ बिजनेस करना है। हमको कुछ स्टार्टअप करना है। हमको यो करना है। और वो व्यक्ति जो है उसको उसमें बहुत रुचि है। और क्या हो सकता है? उससे मैत्री हो जाएगी। कुछ पार्टनरशिप हो जाएगा। बहुत बदल सकता है। तो समटाइम्स बिग मोमेंट्स कम अनएक्सेक्टेडली। एंड दिस इज द कैरेक्टरिस्टिक जो है अभी जो स्पाई कोई बनता है। अभी जो स्पाई होते हैं उनको शायद योजना होती है कि 10 साल के बाद हम ऐसे करेंगे तो शायद क्या है कि 10 साल के बाद सरकार बदलेगी। सरकार और फेवरेबल बनेगी और वो हमको सपोर्ट करेगी। तब तक हम वहां पे जाएंगे। पर कभी-कभी क्या होता है अचानक व्यक्ति के प्लानिंग के बिना ही एक बहुत बड़ा मूवमेंट आ जाता है। हम तो जब वैसे मोमेंट आता है तो हर मोमेंट में हम जो चॉइसेस कर रहे हैं दैट विल इदर प्रिपेयर और लीव अस अनप्रिपयर्ड कि जब वो बड़ा चॉइस का मोमेंट आ जाएगा तो हम सब चाहते हैं कि मेरा जीवन अच्छा हो मैं अच्छा हूं मैं कुछ अच्छा करूं पर क्या है कि जो हमको लगता है कि बड़ा मोमेंट मेरे जीवन में नहीं आ रहा है। कोई बड़ा अपॉर्चुनिटी नहीं मिल रहा है मुझे। पर क्या है जो हम बोझा उठाते हैं जो रोज जो हम चॉइसेस कर रहे हैं दी स्मॉल चॉइसेस मे हैव स्मॉल इफेक्ट्स बट क्या है दो राइट चॉइससेस जो हम करते हैं स्मॉल दे प्रिपेयर अस फॉर द बिग मोमेंट्स और तभी तो सही जब मौका आ जाता है वो मौका उठा लेना मौका फिर वो अवसर का पूरा फायदा लेना तो अर्जुन को पता नहीं था कि इस समय कौरव आक्रमण करने वाले हैं। जब अर्जुन अज्ञातवास में थे वो उन्होंने तो बहन अल्लाह का रूप लिया था। वो तो ऐसा रूप था कुछ युद्ध करना ही था उसमें। पर वो नाचना सिखा रहे थे जो क्षत्रिय के लिए सबसे ह्यूमिलिएटिंग हो सकता है। ऐसे था वो। पर वो अर्जुन ने स्वीकार किया। पर क्या था? उससे जब उनको वो अवसर मिल गया तो फिर ऐसा युद्ध किया। कुरुक्षेत्र में भी अर्जुन ने जो युद्ध किया उससे एक तरह से और स्पेक्टकुल युद्ध का मौका था विराट में। तभी अर्जुन अकेले थे और सारे कौरवों की सेना थी। सारे उनके सेनापति थे। बड़े-बड़े योद्धा थे। पर अर्जुन ने सबको हरा दिया। तो अभी जो मोमेंट है वो प्लान से नहीं आया। वो एकाएक आ गया। पर जो पूरी अर्जुन ने तपस्या की थी। स्वर्ग में जाकर पहले धनुर विद्या को निपुण कर वो उसका एक औसत दिखाने का आ गया। तो इसीलिए जब हम पेशेंस रखते हैं, पेशेंस मतलब यह पैसिविटी नहीं है। यह हर पल अभी जब हम भक्ति कर रहे हैं तो अगर हम जप करते हैं, सत्संग में आते हैं, इससे क्या होता है कि जो पॉजिटिव चॉइससेस करने ये हर पॉजिटिव चॉइस जो हम कर रहे हैं उससे पॉजिटिव चॉइससेस करने की एक शार्पनेस आ जाता है। एक स्ट्रेंथ आ जाता है। एक हैबिट बन जाती है। और फिर जब अपॉर्चुनिटी आएगा तो एक बड़ा इंपैक्ट बड़े इंपैक्ट का पॉजिटिव चॉइस हम कर पाएंगे। तो ये जो हमारे जीवन में छोटे-छोटे छोटे पॉजिटिव चॉइससेस हम कर रहे हैं। मतलब कौन देख रहा है? अभी जो स्पाई होता है स्पाई अगर दूसरे देश में है तो जो ओरिजिनल उसको उसके जो सपोर्टर्स हैं, उसके जो बॉसेस हैं वो क्या हर उनके मूवमेंट को नहीं देख रहे हैं। मुश्किल होता है देखना इस तरह से पर क्या है रोज छोटे-छोटे चॉइससेस कर रहे हैं। है तो एक दिन मौका आ जाएगा। तो हमारे जीवन में भी वो वो अवसर कब आएगा कि जब हम हम कुछ हमको एक बड़ा मौका मिल जाएगा। हम कुछ बड़ा कर सकते हैं। वो पता नहीं है। पर जब वो आएगा तो इफ वी आर नॉट रेडी वी कैन मेक अ बिग मेस। बिग क्या है वो बिग मेस हम खुद के लिए दूसरों के लिए कर सकते हैं। वो नहीं करना है। तो एव्री स्मॉल चॉइस मेक्स अ बिग डिफरेंस। तो कैसे है कि हम जो बोझा उठा रहे हैं यह बोझा उठाते जाते हैं उठाते जाते हैं तो क्या होता है वी आर बिकमिंग स्टंगर रोज जो बूठा उठा रहे हैं उससे हम स्ट्रांगर बनते जा रहे हैं और जब वो वो अवसर आएगा तो ईच वन ऑफ अस जैसे अर्जुन के लिए वो विराट युद्ध और कुरुक्षेत्र युद्ध ये एक अवसर था और उसके लिए वो प्रिपेयर कर रहा था तो हम सबके लिए हमारा विराट युद्ध हमारा कुरुक्षेत्र युद्ध कब आएगा हमको पता नहीं है। पर हमारे लिए सबको अवसर मिलेगा। और जब अवसर मिलेगा उसके लिए हमें तैयार रहना है। तो सारांश में आई टॉक अबाउट थ्री पॉइंट्स टुडे जो धुरंधर जो है वो संकल्पना। सो आई स्पोक नॉट सो मच ऑन द मूवी बट द कांसेप्ट ऑफ धुरंधर। गीता की दृष्टि से अगर हम देखते हैं तो क्या था? तीन पॉइंट मैंने देखे जो एम ए ए और पी पहला क्या था मीनिंग तो धुरंधर का अर्थ हमने तुलना की जो वीर है जो नायक है तो वीर मतलब क्या कर होता है नायक मतलब क्या है लीडरशिप होता है हिरइज्म होता है पर धुरंधर मतलब क्या है जो धर जो बोझा उठाता है जो बर्डन को संभाल सकता है तो इसके एनालिसिस में तीन पॉइंट देखे सबसे पहले क्या है कि हमारा जो चॉइस है ये चॉइस कभी नहीं है कि नो बर्डन मैं अगर कोई भी बर्डन बोझा नहीं उठाऊंगा तो क्या है मेरा मन ही एक बोझा बन जाएगा तो हमारा चॉइस क्या है कि वि बर्डन हम सबको हमारे जीवन में कुछ बोझा उठाना है तो कौन सा बोझा उठाना है तो वो समझने के लिए क्या है हमें देखना है कि हमको क्या चाहिए हमारे जीवन में वास्तव में हमको सुख चाहिए हैप्पीनेस चाहिए पर सुख के पहले हमको क्या चाहिए? मीनिंगफुल हैप्पीनेस चाहिए। हमको अर्थ चाहिए। अर्थपूर्ण सुख चाहिए हमको। तो धर्म से अर्थ आता है। मतलब क्या है? कि जब हम रिस्पांसिबिलिटी लेते हैं तो रिस्पांसिबिलिटी से जो सुख आता है वो मीनिंग आता है। फिर मीनिंग से सुख आता है। तो क्या धर्म से अर्थ आता है? तो इसका मतलब क्या है? कि धर्म क्या है? उसके हमने देखा कैसे कि हम कई बार सोशल मिरर से खुद को देखते हैं और उससे हम इनसिक्योर हो जाते हैं। अरे मेरे पास यह क्वालिटी नहीं है। तो हमें क्या स्पिरिचुअल मिरर से खुद को देखना है। स्पिरिचुअल मिरर मतलब क्या? भगवान मुझे कैसे देखते हैं। तो इस सोशल मिरर से देखेंगे तो क्या? हम खुद को सोचेंगे कि मैं एक क्ले के समान हूं। दुनिया मुझे बोल रही है। लोग बोले ऐसे बन जाओ ऐसे बन जाओगे। पर क्या है? हम वास्तव में एक सीड के समान हैं। तो सीड जो है उसको क्या है तो कैसे समझना है उसके लिए सेल्फ ऑब्जरवेशन है कि हमें देखना है कि मुझ में कौन से गुण हैं और कौन सा कर्म मैं कर सकता हूं। क्या करते हुए मैं कंटेंट हूं और क्या करते हुए मैं कॉमटेंट हूं। तो इस दिशा में अगर हम बोझा उठाएंगे तो वो बोझा उठाना हमको बोझा नहीं लगेगा। वो क्या होगा? वह हमको यहां पे एक इंट्रेंसिक जॉय आ जाएगा। कि जो करने में मुझे आनंद आता है, जो मैं अच्छा कर सकता हूं। तो ऐसे अर्जुन को वो धनु विद्या में एक्सपर्ट था। चैंपियन आर्चर था। पर उसमें नेचुरल उसको जॉय था। तो ये सोशल मीडिया मिरर से हम देखेगा अरे इसको ग्लैमराइज हो गया है। ये कैसे करना है। ये ये करियर मुझे करना है। उस जगह पे हमें देखना है कि मुझे क्या गिफ्ट्स है। कि मुझे मुझे आम नहीं चाहिए। पर मुझे बीच कौन मिला है पहले वो देखना है और सेल्फ ऑब्जरवेशन से रखते हैं तो उसके बाद में जो हमारा प्रैक्टिकल बात था हमने देखा कैसे कि जो भक्ति है वो क्या है इट इज अ एक रिचुअल नहीं है पर यह इमोशन एलिवेटर है कि जो हमारा इमोशन है कभी-कभी हमें इतना कंट्रोल कर देता है कि हम कुछ ऐसे गलत भी कर देते हैं तो गुस्सा आ सकता है वासना आ सकता है निराशा आ सकता है। तो जैसे कोई एलिवेटर में चला जाता है तो ऊपर चला जाता है। तो हमें हमारे इमोशंस को रिप्रेस नहीं करना है। पर हमारे इमोशंस को भगवान की भक्ति के द्वारा एलिवेट करना है। जैसे हमने देखा कि भरत ने जो बताया शत्रुघ्ण को कि तुम कैकई तुम मंथरा को कुछ करो मत। इसलिए नहीं कि वो अच्छी है। पर क्योंकि हमको राम को प्रसन्न करना है। इमोशंस वहां के राम पे ज्यादा कंसंट्रेटेड थे। तो अगर हम ये इस तरह से भक्ति एलिवेटर करते रहे में आप खुद को चढ़ाते रहेंगे तो क्या होगा? हमारे जीवन में जो स्मॉल चॉइसेस हम करते हैं वैसे करते रहेंगे एक ऐसा मोमेंट आएगा जो बहुत बड़ा चॉइस हो जाएगा और वी विल बी एबल टू गैब दैट अपॉर्चुनिटी जैसे अर्जुन के लिए विराट युद्ध कुरुक्षेत्र युद्ध का मौका था वो सिर्फ उस समय स्पेक्टकुलर नहीं किया अर्जुन भी एक धुरंधर के समान थे। इतने सालों तक तपस्या की इतने सालों तक प्रैक्टिस किया जो बाकी सब अपने भाई वनवास में थे। पर अर्जुन ने और तपस्या की और उससे और अस्त्र प्राप्त किए और जब वो बिग मोमेंट आ गया और तभी उनका बिग सक्सेस भी आ गया। तो इस तरह से हर एक हम में से जो क्षमता है वी कैन डेवलप दैट पोटेंशियल एंड डू गुड फॉर आवरसेल्व्स एंड डू गुड फॉर द वर्ल्ड। थैंक यू वेरी मच। हरे कृष्णा। कोई सवाल है किसी का?
यस प्लीज जैसे कि मेहनत अगर गलत दिशा में की जाए तो भी फल नहीं मिलता है। अगर फल देर से मिलता है तो कैसे हम सही दिशा में काम कर रहे हैं कि नहीं?
तो अगर मेहनत हम गलत दिशा में करते हैं तो भी फल नहीं मिलता है। तो अभी कैसे पता चले कि सही दिशा में हम कर रहे हैं? तो है कि हर एक फील्ड में जो अलग-अलग पैराटर्स होते हैं सक्सेस के तो भी अगर एक्शन जो है ये एक पहाड़ है।
हरे कृष्णा प्रभु जी सॉरी फॉर इंटरप्शन। देयर इज अनाउंसमेंट। कार नंबर 2578 गलत तरीके से पार्क हुआ है। जल्दी से उसको आप निकाल लीजिए। कार नंबर 2578 कार नंबर 2578 गलत तरीके से पार्क हुआ है। जिसका भी है प्लीज उसको आप निकाल लीजिए। सॉरी। तो अभी क्या है? एक्शन से रिजल्ट तक अगर जाना है तो उसमें तीन मेन वेरिएबल्स होते हैं। अगर एक पहाड़ है। एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ पे जाना है तो हमको ब्रिज बनाना है। तो मान लीजिए ऐसे ब्रिज है। इसमें तीन लकड़ियों के प्लैंक्स हैं। तो इसको मैं इंग्लिश में टेक बोलता हूं। क्या है? टैलेंट एनवायरमेंट और कमिटमेंट कि अधिष्ठानम तथा कर्ता करण चकविदा विविधा पुत चेष्टा दवं चवात्र पंचम तो अगर मैं कौन सी दिशा में कार्य कर रहा हूं वो यश नहीं मिल रहा है तो क्या वो गलत दिशा है कैसे समझना है मैं इसको क्या मुझ में वो टैलेंट है क्या मैं सही एनवायरमेंट में हूं और क्या मैंने कमिटमेंट दिखाया है। तो इसका उदाहरण कैसे ले सकते हैं कि अगर हम गार्डनिंग कर रहे हैं तो क्या है? गार्डनिंग अगर कर रहे हैं तो पहले डू आई हैव द राइट सीड? अगर सीड ही गलत है या सीडी खराब है तो कुछ गार्डनिंग नहीं होने वाला है। फिर क्या है कि वो एनवायरमेंट सही है क्या? ये इस सीड को बड़ा होने के लिए ये सोइल सही है क्या? ये टेंपरेचर सही है क्या? अभी भारतीय लोग हिंदू लोग अगर अमेरिका में जाते हैं उनको अपने घर में तुलसी रखना होता है। तुलसी बड़ा पवित्र है पर हां पर पाश्चात दश में टेंपरेचर बहुत ठंडा हो जाता है। तो फिर क्या उनको एक आर्टिफिशियल अपने घर में ग्रीन हाउ जैसे बनाना पड़ता है। टेंपरेचर रखना पड़ता है। एनवायरमेंट सही है क्या? तो मतलब अगर किसी को किसी को एक फील्ड में बहुत टैलेंट है। कोई किसी को लैंग्वेज में बहुत टैलेंट है मान लीजिए। पर वो ऐसे स्कूल में वहां पे लैंग्वेज में कुछ ए्फसिस है ही नहीं। कुछ लैंग्वेज पढ़ने की और उसमें ग्रो करने की फैसिलिटी है नहीं तो। तो तो क्या है टैलेंट के साथ एनवायरमेंट जरूरी है। अर्जुन के पास टैलेंट था पहले से आर्चरी का पर द्रोण के गुरुकुल में जब गए तो वो एनवायरमेंट सही में आ गया और तीसरा क्या है टैलेंट भी हो एनवायरमेंट भी हो बीज भी है और फिर हमारे पास सही सही जमीन भी है पर फिर भी क्या है ऐसे आज भी डाल दिया कल मुझे फूल या फल नहीं मिलने वाले कमिटमेंट मतलब प्रयास करना है तो अगर हम गलत दिशा में जा रहे हैं कैसे समझना है कि ऑब्जेक्टिवली क्या कि मुझ में सही में टैलेंट है या नहीं है अभी वी डोंट हैव टू हैव द बेस्ट टैलेंट इन द वर्ल्ड। पर क्या इसमें टैलेंट है मुझे? फिर क्या मैंने सही एनवायरमेंट में खुद को डाला है? और क्या मैंने पर्याप्त कमिटमेंट दिखाया? अगर तीनों के बाद अगर नहीं हो रहा है, तो मतलब समझते हैं कि यह दैव है या नहीं होने वाला है। शायद मुझे कुछ और ट्राई करना चाहिए। ओके? थैंक यू। यस, प्लीज़।
लेवल ऑफ़ माइक। हरे कृष्णा। यही कॉन्टेक्स्ट में द लेवल ऑफ टैलेंट अह कितना भी रहा तो भी चलेगा। बट आपने जैसा बोला कि टैलेंट भी होना चाहिए। बट टैलेंट का जो लेवल है वो कितना रहना चाहिए? मतलब इन व्हाट प्रपोर्शन अभी कैसा है कि देयर आर टू डिफरेंट सिचुएशंस। कि किसी में बहुत टैलेंट्स है और उनको सेलेक्ट करना है। कौन सा टैलेंट है। तो फिर उसमें उनको देखना है कि किस चीज में सबसे ज्यादा टैलेंट है मुझे। या किस चीज में सबसे ज्यादा कमिटमेंट दिखा सकता हूं मैं वो। बट कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनको ज्यादा टैलेंट नहीं होते। ऐसे ये बुरा नहीं है। क्या होता है कि बहुत टैलेंट होते हैं तो वो लोग बहुत कंफ्यूज हो जाते हैं कभी-कभी। क्या है कि कुछ इतना कर सकता हूं क्या करूं मैं? कुछ लोग होते हैं उनको कुछ टैलेंट नहीं होता है। तो एक टैलेंट दिख गया तो यही करना है मुझे और क्या कर सकता हूं मैं? तो कभी-कभी टू मच टैलेंट लीड्स टू कन्फ्यूजन एंड लेस टैलेंट लीड्स टू ग्रेटर क्लेरिटी।
ऐसे भी हो सकता है। तो माय पॉइंट ये है कि जो हमारा टैलेंट है वंस यू सी ओके आई हैव सम टैलेंट इन दिस एरिया। तो फिर टैलेंट को मेजर करने के के लिए कुछ हद तक ऑब्जेक्टिव पैराटर्स हैं। अभी क्या है कि किसी को आईक्यू लेवल कितना है मेजर कर सकते हैं। किसी हम म्यूजिक का टैलेंट कितना है? किसी राइटिंग का टैलेंट कितना है? वो कितना कर सकते हैं। पर क्या है कि जो भी हमारा टैलेंट है अगर हम एडिक्वेट कमिटमेंट दिखाते हैं तो टैलेंट कम भी होगा तो भी काफी कुछ कार्य व्यक्ति कर सकता है। इट इज़ नॉट ऑलवेज द मोस्ट टैलेंटेड पीपल आर द मोस्ट सक्सेसफुल। क्या है? जीरो टैलेंट होगा तो फायदा नहीं है। कुछ तो टैलेंट होना चाहिए। पर मॉडेस्ट टैलेंट एंड ह्यूज कमिटमेंट अगर वो होगा तो उससे भी सिग्निफिकेंट सक्सेस आ सकता है।
यस
थैंक यू प्रभु जी। प्रभु जी आई हैड अ क्वेश्चन। तो जैसे आपने बोला कि इमोशंस को रिडायरेक्ट करना होता है। तो यू गव यू गव एन इंस्टेंस ऑफ़ एंगर कि लाइक एंगर आए तो वी मस्ट रिीडायरेक्ट इट विद रिस्पेक्ट और एनीथिंग एनी अदर इमोशन। तो प्रोज़ी एंगर इज़ लाइक एक्शन का रिएक्शन इज़ एंगर। तो प्रोज़ एट दैट मोमेंट हम रिडायरेक्ट कैसे करें? लाइक विल यू प्लीज इलैबोरेट
रिडायरेक्ट रिस्पेक्ट मतलब शायद उस व्यक्ति के प्रति रिस्पेक्ट नहीं होगा जिसने हमको गुस्सा किया है। पर किसी और व्यक्ति के प्रति रिस्पेक्ट है। तो मान लीजिए जैसे बता रहा था कि जहां पे भरत ने शत्रुगुरु से ये नहीं कहा कि कहीं मंथरा ने बुरा नहीं किया है।
मैंने ये नहीं कहा कि मंथरा को आप रिस्पेक्ट करो।
पर क्या है? राम को रिस्पेक्ट करो। और उसके कारण क्या है कि आप मंथरा को बुरा कुछ मत करो। तो इसीलिए क्या है कि वी हैव टू सी एंगर का एक मेन कैरेक्टरिस्टिक क्या होता है? एंगर डिस्टोर्ट्स परसेप्शन। जब एंगर आ जाता है तो यही चीज सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। इसको अभी सबक सिखाना चाहिए और अभी ही सिखाना चाहिए।
ऐसे हो जाता है। तो वो एंगर का जब डिस्टोर्ट होता है परसेप्शन वो डिस्टोर्ट कैसे नहीं हो? तो देयर हैज़ टू बी समथिंग बिगर इन आवर लाइफ। क्या बिगर हो सकता है? मैं ऑस्ट्रेलिया में था और वाज़ वन कपल हु केम टू मीट मी और पति पति थोड़े थोड़े थोड़े से अ थोड़े से एंबरेस थे दोनों तो फिर वो पत्नी मुझे बता रही थी क्या हो गया कि कि मैं मैं पति के साथ विवाह करके यहां पे आ गई और बहुत अच्छे पर जब कभी उनको गुस्सा आ जाता है तो इतना गुस्सा आ जाता है मुझे उनका डर लगता है। तो फिर वह पति बोल रहे थे कि यू नो आई मुझे तो आई वांट टू प्रोटेक्ट माय वाइफ आई डोंट वांट वांट एवर टू हर टू फील अफ्रेड ऑफ मी कि मैं उनको हिंसा करूं अगर कुछ बोलता है कि मुझे जब गुस्सा आता है तो मुझे कुछ क्या कर रहा हूं ये ध्यान ही नहीं रहता है
तो आई जस्ट कांट कंट्रोल माय एंगर
तो मैं उनको बोला कि आप क्या काम करते हो बोला कि मैं सॉफ्टवेयर में हूं तो क्या आपको आपको कभी आपके बॉस पे गुस्सा आता है हां कई बार बहुत ज्यादा काम देते हैं अनफेयरली मुझे ज्यादा काम दे देते हैं
तो गुस्सा आता है मुझे
हम बोला क्या आपके बॉस पे चिल्लाते हो कभी?
बोला देखने लग गए मेरे वैसे पागल हो गया हूं मैं। बॉस पे चिल्लाऊंगा तो मेरा जॉब चला जाएगा। तो मैंने उनको बोला एक जुइश कहावत हैव योर इयर्स हर्ड व्हाट योर माउथ हैज़ सेड। कि क्या आपके कानों ने सुना है? क्या आप जो आपके मुंह ने बोला है? क्या आपके कानों ने वो सुना है वो? मतलब क्या है कि बोले थे। मैं उनको बोला आप क्या सुन रहे हो? आप क्या बोल रहे हो? आप कह रहे हो कि आपको गुस्सा आता है। बॉस के प्रति भी
पर क्योंकि नौकरी जाएगी इसीलिए आप गुस्से को नियंत्रण कर लेते हो। तो ऐसे नहीं कि गुस्से को नियंत्रण करने की क्षमता नहीं है। पर क्या है कि आपके मन में यह बैठ गया है कि लूजिंग द जॉब इज टू हैवी अ कॉस्ट। ये नहीं करने वाला मैं कभी। वो एक बाउंड्री है मैं क्रॉस नहीं करूंगा। पर क्या है? इज लूजिंग योर फैमिली अ कॉस्ट दैट यू आर रेडी टू पे। कि बोले नहीं। तो क्या है कि हम सब कोई भी कोई बाउंड्रीज के बिना कोई नहीं जी सकता है। तो जब हमारे इमोशंस को हमको रेगुलेट करना है तो बाउंड्री मतलब क्या है? मेरा जॉब बहुत इंपॉर्टेंट है। उस कितना भी गुस्सा आए मैं एक्सप्रेस नहीं करने वाला हूं।
तो क्या है कि हमें व्हाट रादर देन सेइंग नो टू दिस इमोशन वी हैव टू फाइंड एंड डेवलप अ बिगगर इमोशन इन आवर लाइफ। इस व्यक्ति को सबक सिखाना, गुस्सा करना महत्व मुझे अभी बहुत महत्वपूर्ण लगता है। पर कितना भी महत्वपूर्ण हो क्या है? है कि मुझे इस मुझे यह मेरा जॉब कभी नहीं जाना चाहिए। तो इसीलिए क्या है कि फाइंड आउट व्हाट इज द सोर्स ऑफ़ हायर इमोशन एंड स्ट्रेंथन योरसेल्फ इन दैट। वो कनेक्शन जब आ जाएगा तो फिर उससे लोअर इमोशन को हम ना बोलना आसान हो जाता है। थैंक यू प्रभु जी। हरे कृष्णा प्रभु जी। तो मेरा क्वेश्चन ये था कि हाउ टू डील विद फेलर एंड हाउ टू स्टॉप ओवरथिंकिंग? मतलब आजकल का जो युवा है उसके मतलब युवा के युवा को सब फैसिलिटी अवेलेबल है। मतलब उनके मां-बाप हो या टीचर हो सब अवेलेबल करके दे दे। इंटरनेट है आज सोशल मीडिया है तो भी वो गलत चीज के पीछे क्यों पड़ जाता है ये सब? एक्चुअली सब कुछ है इसलिए तो गलत इधर उधर जाते हैं। एक तरह से यू नो सब मैं जब अमेरिका में जाता हूं तो मेनी टाइम्स अमेरिका यूके में तो इंडियंस जो होते हैं अभी पूरे विश्व में जितने भी अलग-अलग नेशनलिटीज हैं उस इंडियंस एंड चाइनीस पीपल आर द मोस्ट सीरियस अबाउट पैरेंटिक। कि इंडियन के बच्चों को लगता है ज्यादा ही सीरियस है मेरे माता-पिता। पर वो बहुत सीरियस रिस्पांसिबल लेते हैं। तो कभी-कभी माता-पिता बोलते हैं मुझे कि हमारे बच्चे हमारी बात सुन नहीं रहे। इतने डिफिकल्ट है। तो आई ट्राई टू टेल देम दैट कि दे आर नॉट जस्ट बीइंग डिफिकल्ट। दे आर इन डिफिकल्टी। तो बोले क्या डिफिकल्टी है? हम तो इतने आर्थिक गरीबी में आए। अभी उनको भी सब कुछ दिया है। पर क्या है कि डिफिकल्टी आजकल के युवकों में क्या है सबसे बड़ी दिस इज टू मेनी ऑप्शंस कि हर चीज के लिए ये हजार ऑप्शन टीवी शो क्या देखना है कैसे कपड़े पहनने हैं किस प्रकार के मित्र रखने हैं बहुत से ऑप्शन आ जाते हैं तो वो बहुत से ऑप्शन से ही दिमाग में बहुत बोझा पड़ जाता है तो इसीलिए फर्स्ट ऑफ ऑल कोई भी अगर गलत चॉइससेस कर रहा है तो उसको जजमेंटल नहीं होना ज्यादा तो अभी फेल जो है वह सबके जीवन में आएगा। पर क्या है? फेलियर इज एन इवेंट। फेलियर शुड नेवर बिकम अ सेल्फ डेफिनेशन। कि मेरे जीवन में फेलियर आया। मैं फेलियर नहीं हूं। तो क्या होता है? कई बार एक दो तीन चार अगर फेलियर आ जाता है किसी के जीवन में तो व्यक्ति को लगने लगता है मैं ही फेलियर हूं। तो इसीलिए अगर वैसे हो रहा है तो हमें बी हमें देखना है कि वी शुड लुक फॉर द स्मॉल विस। हमारे जीवन में कैसे होता है कि हम कार्य करते हैं तो कुछ एरियाज ऐसे होते हैं जिससे हमको स्ट्रेंथ मिलता है। जो करने में हमको उत्साह लगता है जो करने में हमको कुछ अच्छा कर पाते हैं हम। और कुछ एरियाज होते हैं वो करने के लिए हमको दी गिव स्ट्रेंथ टू अस। एंड कुछ ऐसे होते हैं दे रिक्वायर स्ट्रेंथ। मतलब वो करना बड़ा मुश्किल। होता है और कभी-कभी शक्ति कम लग गई तो फिर हम उससे क्या होता है? हम हताश हो जाते हैं। अगर हम पढ़ाई कर रहे हैं तो कुछ सब्जेक्ट ऐसे हो सकते हैं कि करना पढ़ना बड़ा मुश्किल लगता है। कुछ सब्जेक्ट अच्छे लगते हैं। तो क्या है कि जो हम अभी हर एक के जीवन में ऐसे होगा कि कुछ हमारे सोशल सर्कल में कुछ लोग हो गए होंगे। उनसे मिलना बातचीत करना हमको बहुत अच्छा लगता होगा। कुछ लोग ऐसे होंगे उनको बिल्कुल अच्छा नहीं लगता उनसे मिलना। इंग्लिश में कहते टू काइंड्स ऑफ पीपल। सम पीपल ब्रिंग हैप्पीनेस व्हेयरवर दे गो एंड सम पीपल ब्रिंग हैप्पीनेस व्हेनवर दे गो तो अभी कैसे है इसमें कि दोनों प्रकार के हमारे जीवन में होंगे तो कुछ ऐसे एरियाज है उसमें बार-बार हमको फेलियर आ रहा है तो शायद हमें वो अभी शक्ति नहीं है बाद में आएगी तो वी हैव टू लुक एट द एरियाज जहां पे हमको शक्ति मिलती है जहां पे हम कुछ कर पाते शायद उसमें स्मॉल विस भी हो वो स्मॉल विंस को हमको वी शुड वैल्यू दैट उससे पॉजिटिविटी आएगा और जो ओवरथिंकिंग है ही कर रहा है और कब वो डीप थिंकिंग कर रहा है कि डीप थिंकिंग जरूरी है तो इसका मेन फर्क क्या है जब ओवरथिंकिंग होता है तो व्यक्ति एक गोल गोल गोल गोल वही विचार कर रहा है और कहीं जा ही नहीं रहा है वो उसी विचार में फंस जाते हैं। पर डीप थिंकिंग मतलब क्या है कि कोई विषय है उसमें हम अंदर जाते हैं उसको देखते हैं और फिर देख के बाहर आ जाते हैं। तो एक है कि जब हम किसी विषय के बारे में विचार करना है हमको करियर के बारे में विचार करना है, रिलेशनशिप के बारे में विचार करना है। जो भी बड़े-बड़े इश्यूज हैं उनको विचार करना है। तो बेस्ट थिंग वी कैन डू इज कि स्केेड्यूल इट। यू कैन नोट स्टॉप ओवरथिंकिंग। उसको मन को बोलो तुम इसके सोचो मत। वो नहीं होता है। पर यू कैन स्केेडल इट। स्ेड्यूल इट एंड स्लो इट। मतलब क्या है? मुझे करियर के बारे में विचार करना है। आई विल डू इट। हर हफ्ते मैं वीकेंड में एक घंटा मेरे करियर में क्या करना है, कैसे करना है? उसके विचार करूंगा। एंड आई विल ऑलवेज थिंक अबाउट इट ओनली बाय राइटिंग और टाइपिंग। क्या होता है जब हम मन में विचार करते रहते हैं तो वो घूमते रहता है, घूमते रहता है और हम थक जाते हैं। और उसे कुछ क्या विचार आते रहते हैं? कंजेस्ट हो जाता है अंदर से। पर अगर हम लिखते हैं तो तो वही विचार बार-बार आ रहा है तो हम उससे लिखना छोड़ देंगे उसको। कोई नए डायरेक्शन में जाएंगे। तो लिखने से क्लेरिटी आता है। और मन को अगर बोले तुम इसका विचार मत करो। तो वैसे भी चलता है। पर क्या है कि हमें जब बड़े इश्यूज का विचार करना है। कोई अच्छा संबंध, कोई अच्छा संबंध था हमारा किसी के साथ तो संबंध खराब हो गया है। अरे उसने ऐसे बोला था, मैंने ऐसे बोला था, उसने ऐसे क्यों किया? मैंने ऐसे क्यों किया? हम बहुत कुछ विचार कर सकते हैं। पर उसमें मन हमेशा फंसे रहेगा। तो फिर क्या है? ऐसे विचार करने के लिए हमको थोड़ा सतोगुण चाहिए। अगर रजोगुण या तमोगुण होगा तो तो उसमें हम विचार नहीं कर पाएंगे। तो मतलब क्या है? शायद हफ्ते के एंड में कुछ आप थोड़ी प्रार्थना करो, कुछ जप करो, मन को शांत करो, कुछ डीप प्राणायाम करो, डीप ब्रीथिंग करो। फिर उसके बाद वो लिखो। और वो स्ेड अगर मन बोलता है हफ्ते में कह रहा है मुझे अभी अभी इसका विचार करना है। उसके लिए समय है। हम बाद में विचार कर सकते हैं। पर तभी कुछ नया विचार आ रहा है तो उसको नोट करो। पर डोंट वेल ऑन इट। उसका चिंतन मत करो। हमें उसके लिए समय है। तो स्केेड्यूलिंग एंड स्लोइंग ये दोनों से ओवरथिंकिंग हम एक्चुअली क्वाइट पावरफुली डील कर सकते हैं। यस नो ओके हरे कृष्णा प्रभु जी। समटाइ्स वी आर बाउंड विद रिस्पांसिबिलिटीज़ दैट वी डोंट वांट एंड डोंट लाइक। वेयर वी आर लुकिंग फॉर द रिस्पांसिबिलिटी दैट क्रिएट्स बिग इंपैक्ट फॉर द पीपल। सो हाउ शुड वी वि दैट
हां तो वही यहां पे ऐसे रिसोंसिबिलिटी होते हैं कि जो हमको नहीं करना चाहते हैं। ये सबके जीवन में होगा। कैसे होता है कि इवन इफ वी डू व्हाट वी लाइक टू डू स्टिल वी वोंट लाइक एवरीथिंग अबाउट इट। किसी को मान लीजिए अगर क्रिकेट अच्छा लगता है। वो क्रिकेटर बन जाता है। हम वो क्रिकेट खेलना अच्छा लगता है। पर क्रिकेट के साथ ट्रैवलिंग आता है। जेट लैग आता है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कठिन सवाल आते हैं। बाकी टीम मेंबर्स होते हैं जो उनसे झगड़ अलग होते हैं। कुछ भी कार्य करना है किसी के जीवन में ऐसा नहीं होगा कि जो वह करना चाहते हैं वही उनको करने का मौका मिलता है। तो इसीलिए क्या है कि ऐसे हमारे जीवन में ऐसे नहीं होना चाहिए कि जो रिस्पांसिबिलिटी हम चाहते हैं वो हम अपेक्षा करें कि वो ही मैं करूंगा और कुछ नहीं करूंगा। वैसे नहीं होने वाला है। पर ऐसे भी नहीं होना चाहिए कि जो हमें प्रेरणा है करने की वो बिल्कुल भी हम ना कर पाए। कुछ हद तक तो कुछ समय तक वी शुड स्क्वीज़ आउट सम टाइम। क्योंकि क्या है कि अगर हम ऐसा ही कार्य कर रहे हैं जो जो जिम्मेदारियां कर रहे हैं क्योंकि मुझे करनी पड़ रही है पर वही कर रहे हैं और कुछ नहीं कर रहे हैं तो क्या होगा वो जिम्मेदारियां करतेकरते हम चिड़चिड़े बन जाएंगे हम इरिटेबल हो जाएंगे क्या उसको उसको कहते हैं विक्टिम या मार्टर विक्टिम मतलब क्या अरे सब अपना काम मुझ पर थोप देते हैं मेरे कोई परवाह ही नहीं करता है और मतलब क्या कि अरे मैंने इतना त्याग कर दिया मेरा सारा जीवन तुम्हारे लिए दे दिया है मैंने तो वो जो भाव है वो दोनों लॉन्ग टर्म अच्छे भाव नहीं है तो इसीलिए कभी-कभी ऐसी परिस्थिति हो सकती है कि जो हमें करना है वो करने की सुविधा बहुत कम होती है पर जितनी भी है हमारी बाकी जिम्मेदारी होते हुए थोड़ा तो करने का समय निकालना चाहिए और धीरे-धीरे शायद उसके लिए हमको और समय मिल जाएगा
प्रभु जी आई हैव अ क्वेश्चन मींस आपने जो बोला कि हम टैलेंट आइडेंटिफाई करते हैं। लेकिन कभी-कभी ना एक प्रैक्टिकल थिंकिंग भी आ जाती है कि हम भले ही उस फील्ड में बहुत टैलेंटेड है लेकिन जिस फील्ड में हम टैलेंटेड है उस फील्ड में कंपटीशन भी बहुत है। तो इस थिंकिंग से कैसे टैकल करें या फिर इस पर्सपेक्टिव से कैसे टैकल करें? नहीं वैलिड है ये। कैसे कि टैलेंट ये केवल इकलौती चीज नहीं है सक्सेस के लिए। तो फिर कभी-कभी कैसे होता है कि कोई टैलेंट जो है हम में इतना हो सकता है कि हम उस चीज में कुछ कर सकते हैं। बट दैट मे नॉट बी द मीन्स बाय व्हिच वी कैन अर्न आवर लिविंग। तो फिर ऐसे हो सकता है कि वी कैन कीप इट एज अ हॉबी। हम तो बहुत से लोगों को चाहते हैं कि उनको म्यूजिक में लिखने में कुछ रुचि है। पर सब लोग जो लिखना चाहते हैं वो फुल टाइम ऑथर नहीं बन सकते। वो क्योंकि उससे उसे लाइवलीहुड मुश्किल है। पर ऐसा नहीं राइट पार्ट टाइम। तो एक तरह से लाइफ में जो बैलेंस होता है कैसे हाउ लाइफ आई वुड लाइक इट टू बी एंड हाउ लाइफ इज। यह दोनों में बैलेंस है कि सिर्फ अगर मैं केवल हाउ लाइफ इज ही रखूंगा तो फिर मेरा जीवन पूरा निराशाजनक हो जाएगा। तो इन दोनों के बीच में हाउ लाइफ इज जीवन ऐसा है कि कोई आर्ट करेगा, कोई म्यूजिक करेगा। क्या है कि उसमें किसी को पैसा नहीं मिलता है। कुछ लोगों को मिलता है। बाकी सब कुछ मिलता ही नहीं है तो ये करूंगा ही नहीं मैं और दूसरा है हाउ लाइफ शुड बी तो अगर हाउ लाइफ इज ही हम देखेंगे तो क्या हो जाएगा हम बिल्कुल अनएंबिशियस बन जाएंगे अरे कुछ करना ही नहीं है कुछ होता ही नहीं है और फिर हताश हो जाएंगे बस हाउ लाइफ शुड भी देखते रहेंगे तो हम अनरियलिस्टिक हो जाएंगे और अनरियलिस्टिक हो जाएंगे तो क्या है हम कुछ कर नहीं पाएंगे तो इसीलिए ये दोनों का बैलेंस रखना है हमको क्या है कि एक पार्ट से कुछ पार्ट तो हम एक हॉबी के रूप में कुछ तो सम एरिया में लाइफ इज वैसे हमें करना है तो एक है अवेयरनेस कि मैं कहां हूं किस परिस्थिति में क्या रियलिटी है पर दूसरा है एस्पिरेशन कि मुझे क्या करना है है कहां जाना है दोनों का बैलेंस रखना है हमको हमारे जीवन में ओके थैंक यू यस माइक कहां है अभी फिनिश ओके सो लास्ट क्वेश्चन लेट्स चालू हो गया ना अभी वी विल टॉक सेपरेटली आफ्टर डोंट माइंड थैंक यू वेरी मच श्रीमद् भगवत गीता की प्रभुपाद की गौर भक्त वृंद की जय गौर प्रेमानंद