Hindi What kind of ruler is the best Bhagavatam 1103 Chaitanya Charan
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राज्य करना शुरू किया है और जब राज्य शुरू किया है तो इसके तात्पर्य में श्री प्रभुपाद जी विस्तार रूप से बोल रहे हैं कि किस प्रकार से इस जगत में राज्य होना चाहिए और किस तरह से एक अनुशासन होना चाहिए तो हम उस विषय में चर्चा करेंगे कि किस तरह से अनुशासन इस जगत में होता है और किस तरह से होना चाहिए सीन एनीथिंग ओवर तो अभी यहां पे संदर्भ क्या हो रहा है? अभी भीष्म पितामह भगवत धाम चले गए हैं और फिर महाराज युधिष्ठिर पुनः राज्य में आ गए और भी राज्य करने लगे हैं। तो एक तरह से जो महाराज युधिष्ठिर करते हैं वो एक चमत्कार है। जो मैं नॉर्मल फ्रेमवर्कित कॉन्टेक्स्ट इनाइट और टेक अवे वही मैं यूज़ करूंगा अभी सीआईटी तो संदर्भ यहां पर क्या है जो आजकल के समाज में हम कहेंगे महाराज युधिष्ठिर जो करते हैं इट इस लाइक अ इकोनमिक मिरेकल कि जो जो वॉर जब युद्ध होता है तो युद्ध से केवल विनाश नहीं होता है लोगों की मृत्यु होती है और उस समय युद्ध होता था उसने सिविलियंस को डमेज नहीं होता था। ऐसे लोग घर नहीं करते थे। पर फिर भी क्या है कि युद्ध करने के लिए बहुत पैसा लगता है। तो एक तरह से जो समाज होता है उसका छोड़ दो उसके लिए यहां पे सेटअप करना पड़ेगा। प्रोजेक्ट करना चाहिए। यू हैव एक्सटेंशन टू कनेक्ट दिस। ये वायरलेस से कनेक्ट हो जाएगा। विल सी तो जब उन्होंने जो किया कि जो वहां पर पूरा विनाश हो रहा था उस विनाश की परिस्थिति से उन्होंने क्या कर दिया कि इस जगत में एक तरह से बहुत समृद्धि ला और आगे बताया जाएगा यहां पे किस प्रकार की समृद्धि आ गई है कि जो गाय थी उसे इतना दूध आता था कि जो जमीन थी वो गीली हो जाती थी ना तो जल से नहीं पर दूध से और जो पृथ्वी थी वो बहुत प्रचुर मात्रा में अपने जो रिसोर्सेज एक आशीर्वाद के रूप में दे रही थी तो एक बहुत ही समृद्ध जगह समृद्ध परिस्थिति आ गई थी और वही जो राज्य बड़ा विध्व उसमें विध्व विनाश हो गया था विध्वंस हो गया था उसमें अभी एक समृद्धि आ गई थी तो ये एक तरह से एक इकोनमिक मिरेकल युधिष्ठिर महाराज ने किया और उसका कारण क्या है यहां कहता है भागवत में भीष्मत्तम तथा अचुतोम जो भीष्म ने बताया है जो अचुत भगवान ने बताया है उनके निर्देशन में महाराज युधिष्ठिर कार्य कर रहे हैं तो अभी आगे हम श्लोकों में देखेंगे किस तरह से जो युधिष्ठिर महाराज का राज्य था कैसे वो एक तरह से आदर्श राज्य था बट अभी जो इनसाइट है इस पे कि जो इस जगह में कोई जगह में कोई भी कलेक्टिव सिस्टम होता है जहां पे कोई एडमिनिस्ट्रेशन लगता है चाहे एक घर में भी एडमिनिस्ट्रेशन होता है ऑफिस में एडमिनिस्ट्रेशन होता है एक कम्युनिटी में होता है एडमिनिस्ट्रेशन राज्य में होता है विश्व में होता है तो अभी वो किस तरह से होना चाहिए इसके बारे में अलग-अलग विचारधाराएं होती है तो अभी शास्त्र शास्त्रों में बताया गया है पहले शास्त्र बताया था कि वहां पे साधारणत राजा हुआ करता था तो राजा जो होता राज्य करता था और प्रपा तात्पर्य बोलते हैं कि राजा के पास जो शक्ति थी उससे वो अगर उस अगर द किंग वाज़ वेल इंटेंशन उनका उद्देश्य अच्छा है और वह कॉम्पिटेंट है तो क्या होना चाहिए? बेसिकली उनके पास पावर भी होनी चाहिए। पर अगर पावर क्या तीन चीज़ें हैं फर्स्ट ऑफ़ ऑल जो राजा के पास जो भी इंचार्ज है ही हैज़ टू हैव गुड इंटेंशन। लोगों का कल्याण करने की इच्छा होनी चाहिए। उसके बाद में उनके पास वो स्किल्स चाहिए। क्योंकि राज्य करना कोई भी कोई भी किसी भी कोई भी बड़ा फेस्टिवल मैनेज करना है। कुछ भी कुछ भी चीज को मैनेज करना है उसके लिए स्किल्स लगती है। अगर वो कॉम्पिटेंस लगता है। कॉम्पिटेंस नहीं है। हो पाएगा। स्किल चाहिए। उसके बाद में क्या है? उसको पावर चाहिए। क्या है? मतलब अधिकार चाहिए। कई बार होता है लोगों के पास कि उनको रिस्पसिबिलिटी होती है पर अथॉरिटी नहीं होगी। क्योंकि ये काम करना है पर तुम्हें काम करने के लिए जो अथॉरिटी है वो तुमको नहीं दी गई। तुम ये काम करवाओ और तुम्हारे नीचे जो लोग हैं उनको बताया जाता है तुम इंचार्ज है। तो फिर क्या हुआ? तुम्हारी बात सुनते नहीं तो हम काम करेंगे कैसे? तो जो होता है हमको अथॉरिटी चाहिए। तो प्रभुपाद जी यहां पे तात्पर्य में ये तीसरी जो चीज है कि की जो अथॉरिटी जो पावर होता है वो जरूरी है। प्रभु जी कहते हैं कि जो आजकल का जो समाज है उसमें जो हेड ऑफ स्टेट होता है वो एक तरह से पपट होता है वो कठपुतली होता है। और किसका कठपुतली होता है वो? वो अभी अलग-अलग लोग उसे अलग विचार करते हैं। जो अभी प्रधानमंत्री है जो प्रेसिडेंट है आजकल सारे विश्व में जो डेमोक्रेसी है उस पर काफी जोर दिया जाता है। ये कहते हैं कि हमें जो डेम सी होती है तो उसमें जो लोग होते हैं वो चुनते हैं। मैं अभी आज सुबह एक डेढ़ घंटे पहले बाहर से आया था। आया हूं अभी तो मिडिल ईस्ट में अभी कहीं भी एक तरह से डेमोक्रेसी नहीं है। वहां पे जो राजा है उनके अंदर जो ब्यूरोक्रेसी होती है वो काम करती है। पर वहां पे एक तरह से काफी हद तक प्रोस्पेरिटी है। तो वहां पे अभी अलग-अलग दुनिया में अलग-अलग सिस्टम्स है। अगर हम देखते हैं चाइना में एक तरह से इलेक्शन नाम के वास्ते होते हैं वहां तो एक ही व्यक्ति के पास कई कई डिकेड से पावर है। रशिया में भी वैसे ही है। चाइना काफी प्रोग्रेस हो गया है। प्रोस्पेर हो गया है। तो अभी एक तरह से मेन स्ट्रीम ओपिनियन दुनिया में ऐसे है कि डेमोक्रेसी इज द बेस्ट फॉर्म ऑफ़ गवर्नमेंट। एंड बट अगर हम देखते हैं प्रोस्पेरिटी के रूप में हां अमेरिका में काफी प्रोस्पेरिटी आई है। पर अमेरिका के अलावा दूसरे जो देश देखते हैं हम कहां ऐसे बहुत प्रोस्पेरिटी डेमोक्रेसी से आई है। यहां पे मैं डेमोक्रेसी क्रिटिसाइज नहीं कर रहा हूं। एक ऑब्जेक्टिव एनालिसिस कर रहा हूं और जो प्रपाद हमको बता रहे हैं उसको हम समझने का प्रयास कर रहे हैं। तो हम देखते हैं जो कुछ देश है जो बहुत प्रोग्रेस किया है सिंगापुर जो है तो सिंगापुर एक इकोनमिक मिरेकल है। भारत के 20 साल बाद वो लगभग इंडिपेंडेंस हुआ है और फिर भी उसका प्रोस्पेरिटी बहुत बढ़ गया है। और एक तरह से जो होता है वहां वहां पे कुछ नेचुरल रिसोर्सेस भी ज्यादा नहीं है। उसका एक ही एडवांटेज है। उसका लोकेशन अच्छा है। लोकेशन मतलब क्या है? वहां पर लोग ट्रेडिंग कर सकते हैं, बैंकिंग कर सकते हैं। तो कई जो ऐसे देश है वो बहुत प्रोस्पर हो चुके है। जापान भी प्रोस्पर हुआ है। पर जापान को अमेरिका ने बहुत सपोर्ट किया सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद। साउथ कोरिया भी वैसे ही है। तो जो प्रोस्पर हुए है जो समृद्ध हुए हैं वो अफ्रीका जो है अभी काफी अफ्रीका में बहुत नेचुरल रिसोर्सेज है। पर वो प्रोस्पर नहीं हो पाया है काफी समय तक। तो अभी जो प्रोस्पेरिटी होता है उसकी जो समृद्धि होती है वो अभी हम दो एक है भौतिक एक है आध्यात्मिक एक स्पिरिचुअल प्रोस्पेरिटी मटेरियल प्रोस्पेरिटी पर अगर हम मतलब दोनों की चर्चा करेंगे पर जो मटेरियल प्रोस्पेरिटी है समृद्धि आती है वो कहां से आती है तो इसके लिए एक तरह से दो फैक्टर्स है एक है नेचुरल फैक्टर्स और दूसरा है ह्यूमन फैक्टर्स कि नेचुरल फैक्टर्स मतलब निस्ग से कितने अच्छा है निसर्ग से कितना रिसोर्सेज नेचुरल रिसोर्सेज कितने हैं रिलीज जो है उनका सारा प्रोस्पेरिटी जो प्राइमरी है वहां पे ऑइल हो गया है उसके कारण क्या है उनका प्रोस्पेरिटी है पर जो नेचुरल रिसोर्सेज होते हैं उसके ऊपर जो ह्यूमन एबिलिटी होता है जो मानव किस तरह से कार्य करते हैं वो बहुत महत्वपूर्ण है जो साउथ अमेरिका में एक थे मैं उस समय तीन चारही मैं अमेरिका में था वहां पे मैं एक भक्त मेरे से मिला था वहां वेनेजुला से है मैंने अभी वेनेजुला आजकल बहुत न्यूज़ में है वहां पे क्या है एक्चुअली वेनेजुएला में विश्व का सबसे बड़ा ऑइल रिजर्व है सऊदी अरेबिया से भी बड़ा है वहां पे जब बोल डिस्कवर हुआ था तो कहते दैट इस कॉल्ड द सऊदी ऑफ़ साउथ अमेरिका और द वर्ल्ड लार्जेस्ट वहां पे है ऑयल रिजर्व है पर फिर भी वहां पे एक समय पे इतना प्रोस्पेरिटी था कि वहां पे लोग आते थे वहां वेनेजुए के लोग एक्चुअली अमेरिका से ज्यादा नहीं थे और अमेरिका से जो प्रोडक्ट्स खरीद जाते थे अमेरिका के एक बहुत बड़ा मार्केट था पर क्या हो गया उनका जो ऑइल का प्राइस गिर गया और बहुत मिसमनेजमेंट हो गया पूरा वहां पे अभी वहां पे अभी एकदम पॉवर्टी है वहां पे एक तरह से नेचुरल रिसोर्सेज बहुत है तो एक तरह से हम कहते हैं रिसर्च के आशीर्वाद बहुत है पर फिर भी वो मिसमनेजमेंट के कारण बहुत पॉवर्टी है तो क्या है कि एक है कि नेचुरल रिसोर्सेस कितना है ह्यूमन एबिलिटी कितना है तो यहां पे हम शास्त्रों की दृष्टि से देखते है क्या है तो निस्ग के जो आशीर्वाद है और जो मानव की क्षमता है ये दोनों भगवान से आते हैं जो भगवान की कृपा से निस्ग को आशीर्वाद मिलता है और भगवान की कृपा से ही जो मानवों में शक्ति होती है क्षमता होती है और जो क्षमता पूर्ण जो इंटेग्रिटी जो अच्छे मानव है उनको शक्ति मिलती है फिर वो अच्छा कार्य होता है कल्याण होता है अभी अमेरिका देखते हैं अमेरिका इतना प्रोस से अमेरिका कुछ समय तक तो विश्व का सुपर पावर था। अभी हम मल्टीपोलर वर्ल्ड में जा रहे हैं। यूनपोलर नहीं है। पर फिर भी अमेरिका जो प्रोस्पेरिटी है, समृद्धि है वो एक तरह से एक एग्जांपल है कि नेचुरल और ह्यूमन दोनों अच्छे से जो सारे विश्व में राष्ट्र है उनमें अमेरिका जो है वह जियोग्राफिकली सबसे ब्लेस्ड कंट्री है। कोई भी ऐसा देश नहीं जिसको क्या है? सबसे पहले अमेरिका के दोनों बाजू में है तो किसी को आक्रमण करना बड़ा मुश्किल है। तो सेफ्टी है उनकी। भारत कैसे है? भारत के ऊपर हिमालय है उस थोड़ा संरक्षण है उसका। पर क्या है? उसमें जो पास वगैरह होते हैं उससे लोग आते हैं और नीचे सागर है। पर सागर के बहुत दूर लैंड मासेस नहीं है। लोग आक्रमण कर सकते हैं। तो वी हैव सम लेवल ऑफ प्रोटेक्शन। बट नो उसको सिर्फ ऑन कर यहां पर उसको वाइट वाइट लगा ऑन हो
हां दिख रहा है तो सबसे पहले लगा सकते तो अभी जो मैं व्हाट आई वाज़ ट्राइंग टू से इज़ दैट अमेरिका में जो है उसका सेफ्टी बहुत है। और ना केवल सेफ्टी है। दूसरा है कि अमेरिका में एस्पेशली मिडिल अमेरिका में बहुत फ्लैट एंड वेल इरिगेटेड लैंड है। तो इसमें क्या है उसमें ऐसी नदी है नदी बहुत फ्लैट टेरिटरी में है। तो दुनिया में सबसे बड़ा जो फ्लैट बेसिन है वो अमेरिका में है। तो अभी भारत में कैसे है कि जो नर्दन पार्ट है उसमें नदियां है और बहुत बहुत फर्टाइल लैंड है। और वहां पे प्रॉब्लम क्या है कि सागर वो माउंटेन से आता है, हिमालय से आता है तो वहां पर फ्लड्स बहुत हो जाते हैं। तो कभी-कभी बहुत ग्रेंस आते हैं पर कभी-कभी फ्लड से पूरा विनाश हो जाता है। तो जो स्टेबल नेचुरल रिसोर्सेज है वो अमेरिका में बहुत है। और फिर वहां पे जो सिस्टम थी, डेमोक्रेसी सिस्टम थी और कुछ भी तो वहां पे प्रोस्पेरिटी है। तो एक है कि अभी अगर हम अलग अगर देखते हैं तो रशिया के पास बहुत लैंड है और जो लैंड है उसमें बहुत सारा नेचुरल रिसोर्सेज भी है क्या रशिया के पास जो ऑइल है कुछ मिनरल्स है पर रशिया का एक बहुत बड़ा डिसएडवांटेज है कि क्या है उसके पूरे टेरिटरी में कोई माउंटेंस नहीं है तो यूरोप से कोई अटैक करता है तो पूरा फ्लैट टेरिटरी है तो नेचुरल प्रोटेक्शन कुछ नहीं है तो हर एक जो राष्ट्र होता है इस जगत में कोई भी प्योर ब्लेसिंग नहीं होता है। हर एक राष्ट्र के उसमें कुछ पॉजिटिव होता है, कुछ नेगेटिव होता है। बट रिलेटिवली स्पीकिंग अमेरिका का जो है 95% पॉजिटिव है। और जो नेगेटिव थोड़ा 5% होगा नेचुरल। तो अमेरिका इस द मोस्ट ज्योग्राफिकली ब्लेस्ड कंट्री इन द और जो यूरोप जो यूके था वो भी ब्लेस था। एक तरह से यूके क्या था? यूरोप के पास था पर यूरोप से सेपरेट था। आइलैंड का तो यूरोप में युद्ध होता रहता है। पर सागर से आक्रमण करना इतना आसान नहीं है। जमीन पे आक्रमण करना उतना आसान। तो यूके क्या? काफी समय तक प्रोटेक्टेड था। पर जैसे ही सेकंड फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के एंड में सेकंड वर्ल्ड वॉर में एयरप्लेस यूज़ होने लगे वो यूके का पावर पूरा चला गया। जर्मनी ने हिटलर ने यूके को इतना बम कर दिया कि वो उनका पावर कभी रहा नहीं। उतना नहीं। सो पॉइंट ये है कि देयर इज़ नेचुरल रिसोर्सेज। तो नेचुरल नेसेसरी जो रिसोर्सेज है वो जितने है उतने हैं। हम हमारे जीवन में देखते हैं कि हम सबको कुछ एबिलिटी होती है। वो हमारी तरह से हमारे नेचुरल रिसोर्स है। कुछ गिफ्ट्स है हमारे पास। तो वो जो है जितने हैं किसी के पास बहुत ज्यादा टैलेंट होता है, किसी के पास कम टैलेंट होता है। तो इन वन सेंस द इंडिविजुअल एंड द कंट्री आर सिमिलर। कि जो मानव और राष्ट्र है एक तरह से दैव से कुछ चीजे दोनों को मिलती है। कुछ लोगों को उनका उनके लुक्स बहुत आकर्षक होते है। कुछ लोगों की बुद्धि बहुत एक्स्ट्राऑर्डिनरी होती है। कुछ लोगों की वाणी बहुत मधुर होती है। तो कुछ नेचुरल गिफ्ट्स होते हैं। हर एक व्यक्ति को होते हैं राष्ट्र को होते हैं। और फिर उसी तरह से क्या होता है? कि वो व्यक्ति के जो कार्य होते हैं वैसे ही इंडिविजुअल किस प्रकार के चॉइस करता है तो किस प्रकार के कार्य करता है
यस सर ये लाइट्स ऑन नहीं इसको ठीक है वायरस ही कनेक्ट कर ओके कैन दिस लाइट्स बी क्लोज ओके उसको वो जो उसी का प्रोजेक्टर ऊपर होता है उसका मेन पार्ट ऊपर होता है हां नाइस दिख रहा है आपको
क्लियर है ये क्लियर है
थैंक यू फॉर तो अभी मैं तुलना कर रहा था जैसे कि हमने संदर्भ में देखा मैं इनाइट्स में हूं अभी इनाइट में हमने क्या देखा कि कोई भी राज्य का प्रोस्पेरिटी होता है समृद्धि होता है उसके दो कारण होते हैं एक है कि नेचुरल गिफ्ट्स और दूसरे क्या भेज दिया है और दूसरा है ह्यूमन चॉइससेस कि मानव किस तरह से कार्य करता है कैसे चुनाव करते हैं तो कुछ देश होते हैं जिनके अभी हम कह सकते हैं जो और जो जो प्रोस्पेरिटी होता है एक तरह से कंट्री के लिए होता है राष्ट्र के लिए होता है और वह जो है वो इंडिविजुअल व्यक्ति के लिए भी वही होता है हर एक व्यक्ति को कुछ नेचुरल गिफ्ट दिए होते हैं और वो कुछ खुद चुनता है। तो अभी देखेंगे यहां पर किस प्रकार के गिफ्ट्स है और किस प्रकार के चॉइससेस है। किस प्रकार के व्यक्ति का क्या गिफ्ट दिए गए हैं और किस प्रकार के चॉइससेस दिए गए हैं। तो अगर दोनों सही है, दोनों अच्छे हैं तो फिर क्या होता है? उस पर बहुत सारा प्रोस्पेरिटी हो जाता है। तो एक तरह से कह सकते हैं जो यूएसए है ये आजकल के समाज में दोनों एक गिफ्ट्स बहुत है उनके पास और चॉइससेस भी अच्छे हैं। अभी गिफ्ट्स काफी हो सकते हैं पर चॉइससेस अगर पूरे करते हैं तो उसका उदाहरण रहता है वेनेजुएला जो है ये क्या है कि वहां पे बहुत नेचुरल रिसोर्सेज है पर मिसमनेजमेंट से बहुत कोलैप्स करप्शन है अभी ऐसे हो सकता है कि किसी कोई ऐसा होता है कि गिफ्ट्स भी नहीं है और चॉइससेस भी बुरे की तो फिर उससे बहुत प्रॉब्लम होता है और अगर गिफ्ट्स है सर यहां पे ओवर किया तो अभी भारत के इतिहास में हम देखते हैं जो बड़े-बड़े सिविलाइजेशन हुए हैं वो नॉर्मली क्या होता है नदी के तट पे होते हैं क्योंकि वहां पे नदी के तट पे वाटर इज अ रिसोर्स नेचुरल रिसोर्स लगता है तो उसे फार्मिंग होता है सिटी होते हैं तो अभी जो पांडव थे उन्होंने क्या किया उन्होंने खांडव प्रस्थ को इंद्रप्रस्थ बना दिया तो एक जंगल था तो जंगल में उन्होंने राज्य बनाया वहां पर क्या था वो एक ह्यूमन चॉइस से उन्होंने एक एक्सपर्ट राज्य बना दिया। तो अभी अगर हम देखते हैं सिंगापुर जो है उसके पास ज्यादा कुछ नेचुरल रिसोर्सेज नहीं है। वहां पे कुछ उगता नहीं है। पर क्या है वहां पे जो चॉइससेस दिए गए हैं। एक तरह से कह सकते हैं कि ऐसे पूरा नेगेटिव नहीं है। पर क्या है गिफ्ट जो होते हैं उससे काम होता है। तो मुझे पूरा इंडिया का पॉलिटिकल एनालिसिस यहां पे नहीं करना है। पर यहां पे अभी हम देखते हैं कि प्रोस्पेरिटी की बात है। अभी हम स्पिरिचुअली देखते हैं तो क्या होता है कि आजकल के समाज में हम जो एक तरह से हम इन जनरल जो रिलजन है स्पिरिचुअलिटी है या स्पेसिफिकली कृष्णा कॉन्शियसनेस है ये अभी कहां बढ़ रहा है तो अगर हम देखते हैं जहां पर डेमोक्रेटिक कंट्रीज है जैसे अमेरिका है यूके है तो उसमें क्या है कि पॉलिटिकली हमारे लिए फ्रीडम है पॉलिटिकली हमारे लिए फ्रीडम के फ्रीडम है यूके में तो ऐसा सिस्टम है कि एक तरह से यूके अमेरिका में यहां पे अगर मुझे सैफन में अगर इंटेल माइक्रोसॉफ्ट पे लेक्चर देना है तो बहुत प्रॉब्लम आता है परदेश में बड़ा आसान होता है क्योंकि क्या है कि वहां पे हम माइनॉरिटी रिलजन है तो माइनॉरिटीज को फैसिलिटेट करते हैं सपोर्ट करते हैं तो कई बार मैं अभी अमेरिका में जब इंडिया में लेक्चर देता हूं सेल्स पे ले जाता हूं तो वो जब वो रिपोर्ट इंडिया में देता हूं तो फिर इंडिया में आसान हो जाता है लेक्चर तो बेसिकली पॉलिटिकली द वेस्ट इज़ एक्चुअली मच मोर रिसेप्टिव तो कल्चरली वहां पे क्या है मटेरियलिज्म बहुत है सेंसुअलिटी बहुत है इंद्रदक्ति बहुत है तो उसके कारण थोड़ा प्रॉब्लम आता है अगर मिडिल ईस्ट में हम देखते हैं तो वहां पे कल्चरली क्या है इतनी ओवर्ट इंद्रक्ति नहीं है वो इस्लामिक कल्चर थोड़ा कंजर्वेटिव है पर क्या है पॉलिटिकली काफी लिमिटेशंस है तो भक्त भक्ति कर रहे हैं मिडिल ईस्ट में पर क्या है सब कुछ वो कुछ पब्लिकली नहीं कर सकते जो कुछ नहीं कर सकते हैं हम कुछ पब्लिक रथ यात्रा नहीं कर सकते रथ यात्रा करते हैं पर कैसे करते हैं बड़ा हॉल लेते हैं हॉल के अंदर रथ यात्रा होता है तो अभी कुछ कुछ जगह पे शायद मंदिर बन रहे हैं पर मोस्टली मंदिर भी अलाउड नहीं है तो हम हॉल में ही प्रोग्राम्स करते हैं तो एक तरह से कोई भी ऐसी जगह नहीं है जहां पे तो अभी पॉलिटिकली चाइना में मिस्टर कॉन्शियसनेस जो है हिंदूइज़्म इटसेल्फ इललीगल नहीं है एक तरह से और मिस्टर कॉन्शियसनेस सब कुछ चल रहा है वो अंडर ग्राउंड चल रहा है तो डिवोटी जाते हैं वो योगा टीचर्स के रूप में जाते हैं फिर भक्ति योगा टीच करते हैं तो जो रशिया पहले था सोवियत रशिया वहां पे क्या था वो एक तरह से उनका कम्युनिज्म था पर वो डिक्टेटरशिप था एक व्यक्ति जो स्टिन हो या लेनिन हो जो भी है तो जो है वो उसका पूरा था और के अंदर जो है वो भक्तों को प्रोब्ली सबसे बड़े समस्या भक्तों को अभी तक जो आई है वो रशिया में भक्तों को टॉर्चर भी किया गया था और भक्तों को इन जनरल वेरी अग्रेसिवली अगेंस्ट रिलजन सब धर्मों के खिलाफ है तो क्या है कि जो लिव रियलिटी है हमारी जो है मतलब क्या है हम तीन चीजें देख रहे हैं कई जगह कोई एक एरिया है उसमें एक तरह से एक इकोनमिक चीज है कि अगर लोगों के पास पैसा ही खाने को अगर खाने के लिए पैसा नहीं है तो वो जीवित भी नहीं रहेंगे और भक्ति भी नहीं कर पाएंगे। दूसरा है पॉलिटिकल और तीसरा है कल्चरल। ये संस्कृति के दृष्टि से कि संस्कृति क्या फेवरेबल है या अनफेवरेबल है? अगर संस्कृति ऐसी है कि उसमें सब लोग मांस खा रहे हैं, नशापान कर रहे हैं, अवैध संग कर रहे हैं। है तो फिर क्या है कि वो आध्यात्म के लिए अनफेवरेबल हो तो अभी जब हम कार्य कर रहे हैं तो जो हमारी परिस्थिति है तो प्रभुपाद जी एक तरह से मैं बताता था यहां पे इस तात्पर्य में बोलते हैं कि कैसे राजा के पास अथॉरिटी होना चाहिए अगर अथॉरिटी नहीं है तो अभी जो प्रेसिडेंट भी होता है वो प्रेसिडेंट जो होता है द प्रेसिडेंट इस आंसरेबल जिन्होंने प्रेसिडेंट को इ किया डेमोक्रेसी जो होती है डेमोक्रेसी में एक तरह से इलेक्शन हो रहा है पर इलेक्शन में कैंपेनिंग करने के लिए पैसा चाहिए और जो पैसा आपको जो इंडस्ट्रियलिस्ट जो अमीर लोग देते हैं फिर उनके लिए आपको काम करना होता है। तो एक तरह से कई बार होता है जैसे जो जो हेड ऑफ स्टेट होता है डेमोक्रेसी में उसके पास पावर नहीं होता। एक अमेरिकन प्रेजेंट में वो कहते हैं कि वो रिटायर हुए उन्होंने एक अपनी किताब लिखी बायोग्राफी लिखी ऑटोबायोग्राफी कहते हैं कि मैं चार साल जो वाइट हाउस में था मुझे ऐसे लग रहा था कि आई एम ऑन अ फोन कॉल कॉल एंड आई एम स्पीकिंग। मैं फोन कॉल पे बात कर रहा हूं और दूसरे साइड कोई सुन ही नहीं रहा है। तो ऐसे बोल क्योंकि मेरे पास वो गद्दी थी पर पावर था ही नहीं। तो इट्स नॉट अब्सोलुटली ट्रू पर कहते हैं कि व्हेन देयर इज़ प्रभुपाद जी का कंसर्न क्या था कि कोई वी शुड हैव अ वेल ट्रेन पर्सन वेल इंटेंशन पर्सन बट द पर्सन शुड आल्सो हैव पावर। पर अभी कैसे है कि जब पावर आता है तो पावर का अब्यूज भी हो सकता है। तो अभी प्रभुपाद जी ने एक चीज जो है राष्ट्रों के लिए बताया था कि राज्य होना चाहिए। पर जो कृष्ण भावना का आंदोलन है प्रभुपाद जी ने इसके लिए वो एक तरह से खुद एक ट्रांजेंडर ऑटोक्रेट थे। वो प्रभुपाद अथॉरिटी थी। पर प्रभुपाद जी ने कृष्ण भावना का आंदोलन जो बनाया उसके मैनेजमेंट के लिए प्रभुपाद जी ने एक किंग नहीं बोला। एक एक हेड नहीं बोला। प्रभुपाद जी ने क्या किया? एक बॉडी बनाई। एक जीबीसी बॉडी बनाई उसके लिए। तो साधारणत ऐसा होता था कि जो भी बड़े-बड़े जो जो भी मठ होते हैं उनमें से एक आचार्य होते हैं वो मधिपति होते हैं या उस के आचार्य होते हैं जब वो जाते हैं तो वो एक सक्सेसर आचार्य अपॉइंट करते हैं। तो एक तरह से प्रभुपाद जी ने किया है इस का प्रभुपाद जी ने एक तरह से पब्लिकली जो है मोनार्की मतलब एक राजा है उसको रेकमेंड किया पर इस के मैनेजमेंट के लिए प्रभुपाद जी ने कोई वन अथॉरिटी नहीं बनाया उन्होंने एक ग्रुप बनाया एक कमेटी बनाया बॉडी कमीशन और फिर उसके लिए क्या किया है? दैट कमीशन विल वर्क बेस्ड ऑन डेमोक्रेसी। डेमोक्रेसी मतलब क्या है? नॉट डेमोक्रेसी बट कंसेंसस क्या है? सब लोग उस साथ में आके वोटिंग करके फिर वो कार्य करेंगे। तो पॉइंट यहां पे है प्रभुपाद जी ने देखा उनके गुरुदेव ने भी देखा था कि गुरु उनके गुरुदेव को भी ऐसे कि ऐसे ही कमीशन बनाया जाए। पर उनके शिष्यों ने वैसे किया नहीं। प्रपा जी कहते दैट वास द रीज़ और कारण था कि गम मट जो है थोड़ा स्प्लिट हो। सो पॉइंट ये है कि प्रभुपाद ये एक आचार्य है और आचार्य का मतलब क्या है कि वो अपने आचार्य से सिखाते हैं ऐसे कार्य तो प्रभुपाद जी ने अपने ग्रंथों में कुछ चीजें लिखी है और वो प्रिंसिपल्स और प्रपा जी ने अपने आचरण से कुछ सिखाया है कुछ सिखाया है वो भी प्रिंसिपल तो इसीलिए प्रभुपाद जी ने ये नहीं कहा है कि इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर रीस्टब्लिशिंग मोनार हमारी अंतरराष्ट्रीय संस्था इसलिए नहीं कि हमें पूरा राजा को पूरा प्रपा जी ने कहा कि इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर डेमोक्रेसी तो जो पिटिकल सिस्टम है जो कल्चरल सिस्टम है जो इकोनमिक सिस्टम है ये महत्वपूर्ण है पर जो आध्यात्म है इन सब का उद्देश्य है कि स्पिरिचुअल कॉन्शियसनेस लाना है एक तरह से तो हमारे संस्था का उद्देश्य है कि स्पिरिचुअल कॉन्शसनेस लाना है अभी स्पिरिचुअल कॉन्शियसनेस कौन से सिस्टम से आएगा ये कुछ फिक्स तो कैसे है कि हमारे लिए जो टेक अवे है मैंने एनालिसिस क्यों किया कि स्पिरिचुअल कॉन्शसनेस कौन से सिस्टम से आए मैंने बताया कि जहां पे भी ऑटो जहां पे किंगशिप है मिडिल ईस्ट में है या चाइना में है तो वहां पे भक्ति करना मुश्किल है जहां पे डेमोक्रेसी है वहां पे भक्ति करना आसान है हम कह सकते हैं कि पर अगर वो राजा भक्त होगा तो फिर भक्ति करना भक्ति का प्रचार करना आसान हो जाएगा पर क्या है? हां वो सत्य है। पर क्या है वो राजा भक्त है पर भक्तों में भी अलग-अलग विचार होते हैं। डिवोटी है डिफरेंट ओपिनियंस। तो वो राजा एक भक्त को सपोर्ट करेगा तो दूसरे भक्तों को नहीं सपोर्ट करेंगे। तो क्या बाकी भक्त क्या करेंगे? भक्तों में भी अलग-अलग ओपिनियन होते हैं। सो द पॉइंट इज वी कैन नॉट प्रभुपाद जी जब अपने ठाकुर से बात कर रहे थे। ठाकुर ने कहा कि जो पॉलिटिकली कौन राज्य कर कर रहा है कौन राज्य करना कर रहा है दैट इज नॉट आप क्या करो आप कृष्ण भावना बचाओ तो इसका मतलब हमारे लिए एक अभी क्या है टू फोल्ड है कि एक है जो सोशल स्तर पे है और दूसरा है स्पिरिचुअल स्तर सोशल स्तर पे क्या होता है मुझे पता है कि तीनों चीजें है इकोनमिक है इकोनमिक पिटिकल कल्चरल तो अभी जो है कि यह डिपेंड्स कौन फेवरेबल है कौन फेवरेबल नहीं है इसके बारे में देश काल पात्र है उसके आधार पर हमें फैसला करना है कभी भारत में कुछ पिटिकल पार्टीज है कुछ जो है धर्म के ज्यादा समर्थन करते हैं कुछ धर्म के ज्यादा समर्थन भी करते हैं तो अभी क्या है कि एक तरह से अगर हम एक्सपेक्ट करेंगे कोई पिटिकल पार्टी शुड सपोर्ट एवरीथिंग दैट वी स्टैंड जो हम सिखाते हैं जो हम कहते हैं हम हम कहते हम शास्त्र सिखाए शास्त्र सिखा रहे है बट शास्त्र सिखा जो भी है अगर हम अपेक्षा करेंगे कि कोई ऐसी पॉलिटिकल पार्टी होगी जो सब कुछ सपोर्ट करेगी वैसा वो क्या है यूटोपिया है वैसे नहीं बोले तो प्रभुपाद जी कह रहे थे ऑलवेज द बेस्ट मेक द बेस्ट ऑफ अ बैड पार्टी तो जो एक है कि हम जो चॉइस कर रहे हैं हमें चॉइस करना है। चॉइस एक है अगर आइडियल होगा तो एक्सीलेंट है। पर आइडियल क्या होता है? हमें चॉइस जो करना होता है इट इज इन व्हाट इज अवेलेबल। तो आइडियल आइडियल इस जगह पे कभी होता ही नहीं है। तो आइडियल अवेलेबल में जो होता है देयर कुड बी समथिंग व्हिच इज मोस्ट फेवरेबल एंड समथिंग व्हिच इज़ मोस्ट अनफेवर। जो सबसे प्रतिकूल है और सबसे सबसे अनुकूल है। तो इसीलिए शरणागत का एक लक्षण क्या बताया गया है? अनुकूल्य से संकल्प प्रतिकूल्य से वक्त को जो आर्थिक परिस्थिति है, सांस्कृतिक परिस्थिति है, जो राजनीतिक परिस्थिति है, कौन सी भक्ति के लिए अनुकूल है वह विचार करके फैसला करना है कि मुझे किस तरह से भक्ति और जो भक्त लीडरशिप में है उनको यह फैसला करना है कि किस प्रकार के सिस्टम जो है वह वह किस प्रकार का जो सिस्टम है वह एक तरह से मोस्ट कंस्ट्रक्टिव होगा। तो अभी मैं जब अमेरिका में जाता हूं तो कई बार भारतीय भक्त वहां पर होकर पूछते हैं कि हमारे बच्चों की हमें अच्छी तरह से परवरिश करनी है। तो क्या हम भारत में वापस आ जाए? या हम अमेरिका में थे। तो अभी मैंने मेरी बुद्धि से जो समझा है मैंने समझा से मिला था तो मैंने उनको पूछा कि अगर ये सवाल पूछते हैं तो महाराज हाउ डू यू आंसर और व्हाट शुड आई आंसर? तो महाराज ने बताया मुझे कि कैसे है कि आई हैव सीन मैंने देखा है किस तरह से जो बच्चे हैं वो भारत में अनेक बच्चे हैं वो बहुत अच्छे भक्त बन गए हैं। और जो अमेरिका में है बहुत अच्छे भक्त बन गए। और ये भी देखा है कि भारत में ऐसे है कि भारत में रहते हुए कई बच्चे के भक्त ही बने हैं। और जो अमेरिका में जो है वो वहां पे रहते हुए भक्ति तो वो उनका कहना ये था कि दिस इज अ इंडिविजुअल चेंज इंडिविजुअल परिस्थिति के अनुसार ऐसा नहीं है कि अमेरिका अनफेवरेबल है और भारत फेवरेबल है। वो क्या है कि वो किस प्रकार का फैमिली सपोर्ट है? किस प्रकार का कम्युनिटी सपोर्ट है। किस प्रकार की कॉलेज एनवायरमेंट है। किस प्रकार की सेवा की अपॉर्चुनिटी है। किस प्रकार का फाइनशियल अपोरर्चुनिटी है? वो सब जो है सबसे प्रभाव जिस प्रकार कहा एजुकेशन अपोर्चुनिटी है अगर कोई अमेरिका में ऐसे है जहां पे कोई भक्तों भक्त स्कूल रन कर रहे हैं तो फिर वहां पे भक्ति का एनवायरमेंट ज्यादा होगा अगर भारत में आके वो कोई मल्टी स्कूल में जा रहा है तो फिर वो उतना फेवरेबल नहीं होगा तो यहां पे वो सो व्हाट वी टोल्ड मी इस दैट डोंट दैट हमारा ये जिम्मेदारी नहीं है कि नॉट सी इट्स नॉट दैट वी गिव इंस्ट्रक्शन व्हाट वी गिव इज इन कि ये जो है इंडिविजुअल्स को फैसला करना है किस तरह से हमें कार्य करना है कि हमें ये संस्था के रूप में हमको इंस्ट्रक्शन नहीं देना है कि संस्था के रूप में हमें ये नहीं बताना है कि तुम ये कंपनी में नौकरी करो या तुम ये कॉलेज में अपने बच्चों को रखो या तुम इस राष्ट्र में रहो। ये जो है ये इंडिविजुअल होता है। तो पर क्या है कि हर एक तो हमें खुद हमारी जिम्मेदारी लेके हमें खुद विचार करना है कि क्या भक्ति के लिए अनुकूल है और क्या भक्ति के लिए तो महाराज निश्चय यहां पे जो करते हैं वो क्या है उनका एक तरह से वो एक आदर्श लेता है और कृष्ण का उनका समर्थन है वहां पे पृथ्वी भी समृद्ध है तो एक एरा ऑफ प्रोस्पेरिटी आ जाता है उसमें एक बहुत ही भौतिक और आध्यात्मिक प्रोस्पेरिटी आ जाता है तो हम अभी कलयुग में है तो शायद वैसी परिस्थिति हमें नहीं आएगी पर इसका मतलब नहीं है कि हमें पूरा निराशाजनक हो जाना है, पैसे हो जाना है। ये सब अंधकार भी है। हमें जो हमारी परिस्थिति है उसमें जो क्या अनुकूल है उसको हमें खुद चुनना है। अगर हमारा चुनाव करना है और अगर लार्जेस्ट सिस्टम है तो उसमें क्या अनुकूल है उसका हमें समर्थन करना है। और जो अनुकूल चीज चुनना है अनुकूल चीज उसका समर्थन करना। इसका जो प्रभाव है छोटा नहीं है। स्माल चॉइससेस कैन मेक अ बिग ये छोटे चुनाव जो हम करते हैं उससे बड़ा फर्क हो सकता है। मैं जब न्यूजीलैंड में था तो वहां पे न्यूजीलैंड छोटा सा कंट्री है तो बताए थे कि वहां पे जैसे न्यूजीलैंड के जो प्राइम मिनिस्टर थे वो वहां पे वक्त होली होली का उन्होंने किया था तो न्यूजीलैंड के प्राइम मिनिस्टर होली खेल होली खेलने के लिए वहां पर मंदिर में आ गए और वहां पे दिखा वो न्यूजीलैंड के प्राइम मिनिस्टर के ऊपर होली कलर डाल रहे हैं कलर डालते हैं के ऊपर तो रिलेटिव से का ज्यादा सिक्योरिटी भी नहीं होता है तो बताया था कि सम आउट फॉर अ वॉक यू सी द प्राइम मिनिस्टर गोइंग आउट फॉर अ वॉक तो थोड़ा सिक्योरिटी होता ही है नो डाउट पर पॉइंट ये है कि वो प्राइम मिनिस्टर को किसी भक्त ने पहले एक बुक दिया था और जब बुक दिया था उसके हाथ पे एक कुकी दिया था तो बोला कुकी वाज़ वै टेस्टी आई रिवर टेस्टी व्हेन देम तो वो एक छोटा सा चीज अभी तभी वो प्राइम मिनिस्टर नहीं था तभी तभी ही वाज़ अ नॉर्मल सिटीजन पर क्या उसको वो एक दे दिया था उसको याद रखो इसलिए क्या है स्मॉल चॉइसेस जो है क्या फेवरेबल है क्या अनफेवरेबल है उसको हमें करना हमारे जीवन में या हमारे राष्ट्र में शुड समराइज तीन चीजें हमने देखी आज टॉपिक ब्रॉड जो था कि कैसे कैसे सोशल सामाजिक स्तर पे सोशल सपोर्ट फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस और स्पिरिचुअल प्रोस्पेरिटी कैसे क्या सिस्टम होती है जिससे कि आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि आ सकती है तो हमने तीन चीजें देखी जो कॉन्टेक्स्ट का संदर्भ था कि कैसे युधिष्ठिर महाराज जो है उन्होंने समृद्धि लाई है प्रोस्पेरिटी लाई है और उन्होंने क्या था एक तरह से एक इकोनमिक मिरेकल कर दिया है जो राज्य था युद्ध से विध्वंस हो गया था उसका विनाश हो गया था उसको पूरा परिवर्तित कर तो इसमें इनसाइड क्या देखा हमने कि जब कोई प्रोस्प जो प्रोस्पेरिटी आता है, समृद्धि आता है तो वो कैसे आता है? उसमें दो चीजें हैं। एक है नेचुरल गिफ्ट्स है और दूसरा है ह्यूमन चॉइससेस। तो अभी बेस्ट ये है कि हमारे जो गिफ्ट्स है वो हम यूज़ करें। और जो चॉइससेस है हम अच्छे करें। तो ये एक इंडिविजुअल के लिए होता है। एक राष्ट्र के लिए होता है और ये इंडिविजुअल के लिए भी होता है। तो अभी जो गिफ्ट्स होते हैं वो नेचुरल होते हैं। जो चॉइससेस होते हैं उसमें क्या होता है? उसमें पॉलिटिकल चॉइससेस होते हैं। उसमें कल्चरल चॉइससेस होते हैं। उसमें इकोनमिक चॉइस होते हैं। तो क्या है? समाज हम कहते समाज में क्या होता है? तीन चीज होते हैं। आर्थिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक। तो अभी हमारे लिए टेक अवे क्या है कि हमने देखा कि प्रभुपाद जी एक तरह से बोला की प्रभुपाद ने क्या किया एक तरह से रेकमेंड क्या किया रेकमेंड एक तरह से उन्होंने मोनारकी किया था कि उन्होंने अपने पता को बोला कि राजा जो होता है वो सिस्टम होना चाहिए पर उन्होंने जो एस्टब्लिश क्या किया एक तरह से जहां तक उनके पास पावर थी इसको उन्होंने एस्टब्लिश क्या किया था एक तरह से एक तरह से कलेक्टिव डिसीजन मेकिंग कैन नॉट कॉल डेमोक्रेसी एक्सक्टली जो जीबीसी मेंबर थे उनको इलेक्ट नहीं करते पर ये इंडिविजुअल डिसजन मेकिंग नहीं है कलेक्टिव डिसीजन मेकिंग जैसे होता है वो उन्होंने एस्टैब्लिश किया तो पॉइंट क्या है प्रोफेशन क्या लिखते हैं तो क्या अनुकूल है व्हाटएवर इस डिरेबल तो इसीलिए हमारा टेक अवे है कि जो भी हमारी परिस्थिति है उसमें हमें हमें चूस क्या करना है कि जो आइडियल हमें मिलने वाला नहीं है कई लोग बोलते हैं अरे ये कलयुग इतना बुरा है पहले परिस्थिति इतनी अच्छी थी पर क्या है कि वो आइडियल जो नहीं मिलने वाला था उसका नस्टिया में रहेंगे ज्यादा फायदा नहीं होने वाला। तो इसीलिए हमें क्या करना है कि हमारे पास जो अवेलेबल है जो भी अवेलेबल है पॉलिटिकल चॉइस है, इकोनमिक चॉइस है, कल्चर चॉइस है, उसमें जो फेवरेबल है उसको हमें चुनना है। और जो अनफेवरेबल है उसकी ओर जून लेना है। और यह जो है हम ऐसे नहीं कि किसी से एक्सपेक्ट कर सकते। तुम मुझे इंस्ट्रक्शन दो मैं कर लूंगा। वैसे नहीं होता है क्योंकि हर एक वस्तु की परिस्थिति अलग-अलग होती है। तो हमें क्या है? विज़ हम दे सकते हैं। हमें हम भक्तों से बात कर सकते हैं। हमारे गुरुदेव या गुरु काउंसलर से सीनियर से बात कर सकते हैं। पर अल्टीमेटली जो डिसजन है हम सबको इंडिविजुअली स्वयं है। थैंक यू वेरी मच।
हरे कृष्णा हरे
किसी को कोई सवाल है? क्वेश्चन का एग्जांपल बताया उसमें उनके पास गिफ्ट है लेकिन चॉइससेस ठीक नहीं है।
के जीवन में कैसे होता है कि कभी उनके पास गिफ्ट्स हो लेकिन उनका चॉइससेस ना हो तो उसके वजह से वो मेक प्रोग्रेस देनी जैसे मैं कभी गिफ्ट्स होते हैं पर चॉइससेस नहीं होते। तो कैसे है कि अभी एक तरह से भक्ति में एक तरह से आपको पता है कि डोंट बी अटैच टू द और वो इंपॉर्टेंट है बट दे डिफरेंस बिटवीन नॉट बी अटैच टू द रिजल्ट्स एंड नॉट बोदरिंग अबाउट द नॉट बी कंसर्न अबाउट द ऐसे है कि दो एक्सट्रीम्स है इसमें एक है कि हम पूरी तरह से अटैच हो जाते हैं। तो अटैच होते क्या होता है आपको माइक्रो कंट्रोल चाहिए होता है सब कुछ हर चीज ऐसे ही होना चाहिए पर दूसरा है कि बिल्कुल हम अनकेयरिंग हो जाए। मान लीजिए हमारे घर में कोई हम किसी को गेस कोर्स को गेस्ट साथ के लिए बुला रहे हैं। तो अगर हम प्रसाद के लिए बुला रहे हैं तो क्या होता है? ठीक है जब वो आ जाएंगे तो देख मेरे फ्रिज में क्या है देख जो भी होगा उसे थोड़ी नहीं वैसे नहीं कर रहे आप। क्या है अगर हम कुछ हम कुछ चीज कोेंस मानते हैं तो क्या है उसके बारे में हम प्लानिंग करते हैं। तो अभी प्लानिंग एक तरह से प्लानिंग शोज़ सीरियसनेस कि आई एम सीरियस अबाउट दिस। अगर हम कोई एक क्लास देने वाले हैं अगर वो बहुत इंपॉर्टेंट क्लास है तो हम प्रिपेयर कर जाएंगे। अगर हम प्रिपेयर नहीं करते मन में आ जाएगा बोल दूंगा। तो उससे भी शायद कुछ अच्छे पॉइंट्स आ जाएंगे। बट क्या है? इट टू सम एक्सेंट शोज़ दैट वी आर नॉट टेकिंग दैट सी। तो प्लानिंग इज़ अ साइन ऑफ़ सीरियस। तो पर क्या है? सो वी हैव टू हमारे जो गिफ्ट से क्या गिफ्ट्स है मेरे पास और उसको कैसे यूज़ करना है उसके पहले थोड़ा प्लान होना चाहिए तो ठीक है अगर मेरे पास किसी का सिंगिंग एबिलिटी है तो फिर ये सिंगिंग एबिलिटी को कैसे मैं डेवलप कर सकता हूं कोई अच्छा गा सकता है पर वो खुद क्या होता है वो पूरा मैनेजमेंट फस जाते हैं या कोई और सेवा में फस जाते है तो अभी जो सेवा दिया है वो करना चाहिए पर हमें जो भेंट दिए है जो गिफ्ट्स भगवान ने दिए हैं उनको भी डेवलप करना ये भी हमारा कर्तव्य ही है तो अगर हम प्लानिंग नहीं करते हैं तो क्या होता है कई बार जो सोशल प्रेशर में आकर या मूड पर आकर जो भी हम ऐसे चॉइस कर लेते हैं तो फिर वो सब ऑप्टिमल वो इतने अच्छे चॉइससेस नहीं हो पाए तो साधारण भक्त जो है व्हेन वी से बैड चॉइससेस भक्त अनैतिक चॉइससेस नहीं करने वाले पर क्या होता है कि सेवा भी करते हैं तो एक है कि ठीक है जो जरूरत है मैं कर लेता हूं जो मुझे अच्छा लगता है मैं कर जो मेरा मूड है वो कर लेता हूं अच्छा अच्छी बात है तो सेवा में कर रहे है और अगर हम सोचते हैं कि मुझे भगवान के हाथ में एक इंस्ट्रूमेंट बनना है। एंड आई वांट टू बी नॉट जस्ट इंस्ट्रूमेंट आई वांट टू बी एस स्किल्ड एन इंस्ट्रूमेंट एस कि अभी जो भगवान ने अर्जुन को अपना इंस्ट्रूमेंट के रूप में निमित्त मात्र चुना तो वो अर्जुन सरेंडर थे शरणागत थे पर वो केवल सरेंडर नहीं थे वो स्किल्ड थे निमित्त मात्रम भव सव्य साची सव्य साची मतलब क्या दोनों हाथों से बड़ी ही दक्षता से वो कर सकते हैं। और आर्चरी में एक्सपर्ट होने के लिए भगवान ने कुछ उनको कुछ इंस्ट्रक्शन नहीं दिया। भगवान से पहली बार वो जब मिले बड़े आर्चर ऑलरेडी बन चुके थे द्रोपदी के स्वयंवर के बाद में। उन्होंने देखा कि अर्जुन ने देखा कि मुझे आर्चरी का गिफ्ट है और वो कैसे खुद उन्होंने जिम्मेदारी के डेवलप की? तो इसका मतलब क्या है कि हमें कुछ प्लानिंग करना जरूरी है। सो एक कि मेरे पास क्या गिफ्ट है? से और कैसे उनको डेवलप करना चाहिए। अगर हम लापरवाह हो जाएंगे। सो हमको अटैच नहीं होना है। मतलब क्या है कि अगर मुझे कोई गिफ्ट है पर जो मैं कम्युनिटी में हूं उनको अभी कोई दूसरी सर्विस की जरूरत है। तो वी शुड बी रेडी टू अदर सर्विज आल्सो। तो हमें बहुत अटैच होके माइक्रो कंट्रोल नहीं करना है। पर पूरा लापरवाह भी नहीं है। तो प्रॉब्लम जब कहते है ना कर्मण्यवाद मालिश तो वहां पे बहुत फर्क है कि व्हाट कृष्णा इस सेइंग इस डोंट बी अटैच टू द डिसाइड। बट क्या है? वी शुड बी कंसर्न अबाउट पुटिंग द बेस्ट एफर्ट्स। तो वो पुटिंग द बेस्ट एफर्ट जो है वह हमारे उसमें प्लानिंग करने से हमारा एफर्ट्स और अच्छा हो सकता है। तो इसीलिए प्लानिंग कैन हेल्प अस टू मेक गुड चॉइससेस एंड दैट वे वी कैन मेक मोस्ट ऑफ़ द गिफ्ट्स दे। थैंक यू वेरी मच। भागवतम की
जय।
प्रभुपाद की
जय।