Hindi When chanting increases anxiety instead of decreasing it Chaitanya Charan
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थैंक यू प्रभु। एम आई ऑडिबल टू यू?
यस प्रभु जी वेरी मच। थैंक यू।
सो आई एम डिलाइटेड टू बी हियर। इंग्लिश और हिंदी प्रभु
हिंदी इज प्रेफर्ड प्रभु बट बिलीव इट अप टू यू व्हाटएवर योर।
नहीं नहीं आई एम फाइन। ज्ञानसलाय चक्ष्मतना तस्मै श्री गुरुवे नमः नम ओम विष्णु पादाय कृष्ण प्राय भूतले श्रीमते भक्ति वेदांत स्वामी नामने नमस्ते सरस्वती देवी गौरवाणी प्रचार विशेष शून्यवादी पाश्चात्य देश वाचा कल्पतरोस कृपा सिंधुएव पतन पावने वैष्णवेभ्यो नमो नमः जय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद श्री अद्वैत गदा श्रीवासादी गौरा भक्त वृंदा हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे रामा हरे रामा राम रामा हरे हरे हरे कृष्णा मैं कृतज्ञ हूं आज आप सबके बीच में आने का मौका मिला है शिव विलास प्रभु वन ऑफ द मोस्ट डायनामिक डिवोटी दैट आई नो बहुत हमारे आंदोलन में बहुत से प्रचारक हैं बहुत से लेखक हैं बहुत से मैनेजर है पर शिव विलास प्रभु फ्यू भक्तों में से है जो यह तीनों रोल एक साथ और तीनों बहुत सक्सेसफुली कर रहे हैं। गोवा में जो प्रचार चल रहा है श्यामा गुरु से मैं बात कर रहा था वो बता रहे थे और कई और भक्त भी है कि इतना डायनामिकली उस एरिया में प्रचार चल रहा है। अभी मॉर्निंग प्रोग्राम का इनिशिएटिव आपने चालू किया है और इतना अच्छी तरह से चल रहा है। मोर देन 100 डिवोटी आई सॉ जस्ट नाउ और शिव विलास मेरे किताब के बारे में कुछ बता रहे थे। आई थिंक ही इज़ द पनियर हमारे सेकंड जनरेशन में मेन स्ट्रीम पब्लिशिंग को पेनिट्रेट करने में और उनके बाद ही हम सब बाकी सब ऑथर्स जो मेन स्ट्रीम पब्लिशिंग में गए हैं। सो ही इस डायनामिक इन दैट और वो भी विश्व भर में प्रचार करते हैं। तो आई एम फॉर्चूनेट दैट आई कैन बी ऑफ़ सम सर्विस टुडे। और शिवलास फ्रू कैन आई आई आल्सो जॉइन इन माय टैबलेट? कैन आई शेयर फॉर माय टैबलेट? आई वुड लाइक टू राइट एंड एक्सप्लेन समथिंग्स इफ पॉसिबल। यस प्रभु जी शोरली
आई थिंक इट बट आई डोंट हैव द परमिशन टू शेयर राइट नाउ उसके लिए
कैन यू ओके आई विल जस्ट मेक यू अ कोहोस्ट
नहीं नॉट द फ़ यू विल हैव टू मेक देयर विल बी अ Samsung टैबलेट देयर
ओके
चेतन चरण टोपा नाम से आया होगा
पोल इज़ कोऑर्डिनेट आल्सो को
या
ओके बोथ आर को होस्ट दैट्स व्हाट इट तो आज मैं एक प्रधान विषय पर चर्चा करूंगा। यह सवाल मुझे मैं कुछ समय पहले यूके में था एक महीना पहले। वहां पे भी ये सवाल आया था और मैं कल परसों ही गुड़गांव में था और वहां पे भी भक्तों ने वैसे ही सवाल पूछा कि वो बता रहे थे कि जब मैं हम भक्ति में आए तो हमको बताया गया कि आप जप करो। और जप करने से बताया गया हमको कि जप करने से हमारी जो ए्जायटी है हमारी चिंता चली जाएगी। चैट एंडली हैप्पी जैसे हम कहते हैं पर उस वक्त सवाल पूछ रहे थे कि अभी जैसे मैं जप चालू किया है जप की ए्जायटी मेरे जीवन में आ गई है। कि जप का पहले क्वांटिटी पूरे करने की एंग्जायटी है। फिर जप की क्वालिटी इंप्रूव करने की एंग्जायटी है। तो अभी चिंता कम होने जाकर के जगह पे मुझे लगता है मेरी चिंता बढ़ गई है और तो फिर क्या यह एक मार्केटिंग कंपनी होती है वो एडवर्टाइजमेंट करती है कि ये प्रोडक्ट ऐसे है और एक्चुअली प्रोडक्ट वैसे होता नहीं है वो तो चिंता कम करने की जगह पे ये मेरी चिंता और बढ़ गई है तो क्या ये डिसेप्टिव है तो मैंने जो जवाब दिया वो मैं आज शेयर करना चाहूंगा थोड़ा इबोरेट करके कि कैसे होता है कि जब भी पेन होता है। पेन दर्द होता है। हमें महसूस जो होता है वह दर्द ही होता है। पर दर्द दो अलग-अलग सोर्सेज से आ सकता है। एक है कि बीमारी का दर्द, डिसीज का दर्द होता है। और दूसरा है दवाई का दर्द। तो एक्सपीरियंस के स्तर पे दोनों दर्द ही है। पर इंटेलिजेंस के दर्द पे वो दोनों दर्द बहुत अलग है। का दर्द मतलब क्या होता है? कोई कड़वी दवाई हो सकती है, कोई इंजेक्शन हो सकता है, वो कोई ऑपरेशन हो सकता है। तो एक्सपीरियंस के स्तर पे वो यद्यपि सेम है। इंटेलिजेंस के स्तर पे ना केवल वो अलग है वो ऑोजिट है। जो बीमारी का दर्द है वो क्या करेगा हमें? वो वास्तव में हमें वो रहेगा और वो बढ़ते जाएगा। कुछ करेंगे नहीं तो वो एक तरह से तो ये जो डिसीज का पेन है वो एक तरह से हार्मफुल पेन। है वो हमारे शरीर को खराब कर देगा। उसका विनाश भी कर सकता है। जो दवाई का पेन है वो हेल्पफुल पेन है। तो यह जो भाव है यही पेन का भाव है। वही एंग्जायटी को भी लगता है। जो ए्जायटी होती है कुछ अनकंस्ट्रक्टिव कुछ अनप्रक्टिव अनप्रडक्टिव एंग्जायटी होती है। ऐसी एंग्जायटी जिससे कुछ व्यर्थ व्यर्थ ही एंजाइटी होती है। अर्थपूर्ण कुछ आता नहीं है और कोई ए्जायटी होती है वो प्रोडक्टिव एंग्जायटी होती है। तो हां जो हमें साधना करनी है जो हमें जप करना है उसमें उससे भी साधना में ऐसी चिंता होती है थोड़ी सी। एंग्जायटी होती समय मिलेगा कि नहीं ध्यान लगेगा कि नहीं तो पर हमें यह बुद्धि के स्तर पर समझना है कि यह ए्जायटी और वो ए्जायटी अलग है। तो अभी किस तरह से दोनों ए्जायटी अलग है यह कहेगा कि ठीक है मैं तो बुद्धि के स्तर पर समझ जाता हूं कि कोई दवाई की जो दर्द है इंजेक्शन का दर्द है वह वास्तव में मुझे ठीक करने वाला है पर जप के ए्जायटी का और ये हमारे बाकी चिंताएं जो हमारे जीवन में है ए्जाइटटी है उसमें फर्क क्या है तो इसमें फर्क ये मेनली है कि जब हम जो होती है वो दो स्तर पे हो सकती है अनेक स्तर पे हो सकती है पर से दो स्तर से दो स्तर पे हो सकती है एक है सरकमस्टेंशियल कि जो हमारे परिस्थितियों से ए्जायटी आती है अरे ये काम करना है मुझे वो काम करना है ये ये कैसे होगा वो कैसे होगा ये ऐसा हो गया तो क्या होगा अभी ये जो है सरकमस्टेंशियल एंजाइटटी होती है जो जगत में द्वंद होते हैं उनके कारण और यह सरकमस्टशियल ए्जायटी एक तरह से अनिवार्य है क्योंकि जो परिस्थितियां है हमारे जीवन में बदलते रहने वाली है। पर ये जो सरकमस्टेंशियल ए्जायटी होती है कि अभी मुझे हम मुझे कहीं जाना है फ्लाइट पकड़नी है तो अगर ट्रैफिक जाम हो गया है फ्लाइट को पहुंच पाऊंगा कि नहीं पता नहीं है तो वो ए्जायटी होगी बड़ी चिंता हो गई पर ये परिस्थिति के कारण आज जो आने वाली एंग्जायटी है इससे अलग एक प्रकार की ए्जायटी है वो है एग्जिस्टेंशियल ए्जायटी। एग्जिस्टेंशियल ए्जायटी मतलब क्या है? कि मैं मेरे जीवन के अस्तित्व के स्तर पे मैं इस जगत में अकेला हूं। मैं अकेला हूं। और यह सारी दुनिया बड़ी क्रूर है। और आई हैव टू फाइट अलोन अगेंस्ट दिस बिग बैड वर्ल्ड। तो यह जो एकिस्टेंशियल ए्जायटी होती है यह व्यक्ति को अंदर से खा जाती है। ये जो एंग्जायटी होती है इससे व्यक्ति खोखला पड़ जाता है। इससे इस स्तर पे अगर कोई झुंझ रहा होता है तो वो अंत में हताश हो जाएगा। हताश होके फिर डिप्रेशन में चला जाएगा। इनसिक्योरिटी इनफीरियरिटी के कॉम्प्लेक्स हो जाएगा। सुसाइड के सर पे चला जाएगा। व्हाट इज द पॉइंट ऑफ लिविंग? तो इसको उदाहरण के सर पे समझना है कि अगर कोई वॉर है वॉर में एनिमी है। शत्रु है। शत्रु कहां से आक्रमण करने वाला है? और शत्रु कैसे मैं उनका प्रतिकार करने वाला हूं। यह जो है वह ए्जायटी अनिवार्य है और आवश्यक है। शत्रु से प्रतिकार करना है अच्छी तरह से तो। पर दूसरा क्या है कि अगर यह भाव है कि आई एम फाइटिंग अलोन। यहां पे बाकी सब ने मुझे छोड़ दिया है और या कोई और है ही नहीं। मैं अकेला हूं युद्ध करने वाला। तो यह जो है वह भाव से जो योद्धा है वह हताश हो जाएगा। तो अभी ये सरकमस्टेंशियल एक्सिस्टेंशियल ए्जायटी दोनों अलग है पर वो अनरिलेटेड नहीं है। दे आर दे आर सेपरेट बट नॉट अनरिलेटेड। तो जैसे बताया था सरकमस्टेंशियल हमारी परिस्थितियां तो हमेशा बदलते रहने वाली है। और ये परिस्थितियों का जो बदल है वह हम नहीं रोक सकते। हम प्रयास कर सकते हैं। पर स्टॉक मार्केट ऊपर नीचे होने वाला है। लोग कभी हमारे साथ अच्छा बर्ताव करेंगे, कभी कभी पोलाइट रहेंगे, कभी इंपोलाइट रहेंगे तो वातावरण जो है कभी ठंडा होगा, गर्म होगा वो तो होने ही वाला है। तो अगर क्या है एग्जिस्टेंशियल स्तर पे जो अस्तित्व के स्तर पे जो है वह अगर हमें यहां पे क्या हो सकता है? ए्जायटी हो सकता है या सिक्योरिटी हो सकता है। तो अगर एकिस्टेंशियल ए्जायटी है तो अभी आप अगली क्लास से पूरा भूल जाइए तो ये आप एक डायग्राम याद रख सकते हैं कि हमारा जो ए्जायटी होता है एक है सरकमस्टैंशियल एंग्जायटी और दूसरा है एग्जिस्टेंशियल ए्जायटी तो सरकमस्टैंशियल नो और यस तो हम कह सकते हैं कि जो परिस्थिति के स्तर पर चिंता है अस्तित्व के स्तर पर चिंता है। तो अगर दोनों चिंताएं हैं तो मतलब क्या है यहां पे कि वो व्यक्ति पर मनोस्थिति के स्तर पर खुद को अकेला मानता है और परिस्थिति के स्तर पे भी बहुत समस्या है। तो एक तरह से ये जो है ये रजोगुण का लक्षण है। हम कि रजोगुण का लक्षण क्या है? कि व्यक्ति को बहुत झगड़ा करना है, संघर्ष करना है। ये चाहे जीतूंगा, चाहे हारूंगा ऐसा भाव होते रहता है। तो अगर व्यक्ति को एग्जिस्टेंशियल ए्जायटी है पर सरकमस्टैंशियल ए्जायटी नहीं है तो सरकम तो कैसे है? अगर हम देख सकते हैं मैं बिफोर आई इबोरेट दिस एग्जिस्टेंशियल मतलब क्या? था कि मैं अकेला हूं अस्तित्व में ब्रह्मांड में कुछ है ही नहीं मैं अकेला युद्ध कर रहा हूं तो अगर किसी को एकिस्टेंशियल ए्जायटी है तो हम चार क्वाड्रेंट्स है यहां पे एक दो तीन और चार तो अगर सरकमस्टेंशियल ए्जायटी नहीं है पर एक्सिस्टेंशियल ए्जायटी है मतलब क्या है ये भी रजोगुण का सकारात्मक भाव है दिस इज़ रजस नेगेटिव दिस इज़ रजस पॉजिटिव रजोगुण में जब कोई कंट्रोल में होता है तो क्या होता है उसको कंट्रोल में जब तक होता है वो तो उसको लगता है कि अभी मुझे कोई चिंता नहीं है पर वो सिर्फ कुछ समय तक रहती है क्योंकि अंदर से तो पता होता है कि अभी मेरे पास पैसा है अभी पास शक्ति है अभी पास पोजीशन है इसीलिए कंट्रोल है इसीलिए आदर है पर कल ये चला जाएगा तो कुछ भी नहीं रहेगा तो बेसिकली होता क्या है अगर एकिस्टेंशियल सिक्योरिटी नहीं है तो सरकमस्टेंशियल ए्जायटी आते रहेगा पर उसका प्रभाव यह होगा कि साइकोलॉजिकल स्तर पर बहुत ऊपर और बहुत नीचे हम जाते रहेंगे। जब अच्छा होगा तो बड़ा आनंद होगा। कुछ बुरा हो जाएगा तो ऐसे लगा कि विश्व का अंत हो गया है। तो ये दोनों है वो एक ही सिक्के के दो भाग है। और अधिकांश रूप से हम भौतिकवादी जीवन में इस तरह से जीते हैं। क्या है कि कभी जो होता है सर परिस्थिति के स्तर पर चिंता होती है कभी नहीं होती और अधिकांश रूप से 50-50% नहीं होता है कई बार 70 80% जो होता है परिस्थिति के स्तर पे चिंता होती है और अस्तित्व के स्तर पे भी चिंता होती है तो अभी कभी कई बार होता है कि अस्तित्व के स्तर पे जो चिंता है एकिस्टेंशियल ए्जायटी है इसका हम ज्यादा विचार नहीं करते इसको हम पहचानते नहीं है बट ये वास्तव में ये अंदर से व्यक्ति को बहुत खोखला बना देती है। तो अभी हम देखते हैं कैसे है कि अ इबोरेट सब्जेक्ट पर अगर हम देखेंगे तो जैसे प्रगति हुई है वैज्ञानिक दृष्टि से हम कहते हैं तो अगर हम से 10 1000 एडी को देखते हैं और अभी 2025 देखते हैं तो क्या हुआ है हमारा जो एक तरह से टेकोलॉजिकल कंट्रोल एक्सटर्न जो कंट्रोल है, एक्सटर्नल पावर है वो बढ़ गया है। इनक्रीस हुआ है। टेक्नोलॉजी से प्रोग्रेस हुआ है। टेक्नोलॉजी से इनक्रीस हुआ है। वैसे हमारा पावर भी इनक्रीस हो गया। आज हम काफी कंफर्ट में रहते हैं। हम कई बार जो है तुलना करते हैं। सतयुग से तुलना करते हैं। सतयुग में कितनी चीज अच्छी थी। पर अगर हम 200 300 5000 साल पहले देखते हैं तो जीवन काफी कठिन था। हम ना केवल राज्य एक दूसरे पे आक्रमण कर रहे थे और आक्रमण करते हुए हुंकार युद्ध हुआ करता था। पर काफी और समस्याएं थी। तो आजकल हमारे पास कंफर्ट्स है, अभी इलेक्ट्रिसिटी है, इंटरनेट है, एयर सप्लाई है। ये सब तो एक तरह से कहने का पॉइंट है कि हमारा एक्सटर्नल कंट्रोल इनक्रीस हो गया है। पर एक्सटर्नल कंट्रोल इनक्रीस होने के बावजूद एंग्जायटी बढ़ गया है। यह वैज्ञानिक प्रगति का यह प्रॉमिस था कि जितना प्रगति होगा वैज्ञानिक प्रगति उतना हमारे जीवन में कंफर्ट आ जाएगा। कंफर्ट आ जाएगा तो सुख आ जाएगा। पर कंफर्ट आ गया है पर सुख आया नहीं है। शांति भी नहीं आई है। क्यों? क्योंकि क्या हुआ है? जैसे वैज्ञानिक प्रगति हुई है उसके साथ साथ नास्तिक भी बढ़ गया है। नास्तिकवाद नहीं तो कम से कम भौतिकवाद तो बढ़ गया है। और भौतिकवाद का मतलब क्या है? भगवान अनइंपेंट हो गए। भगवान ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। और इसलिए क्या हुआ है कि भले ही सरकमस्टेंशियल ए्जायटी शायद हम कर कम कर पाए हैं। हमारे पास हेल्थ इंश्योरेंस है हमारे पास ये लाइफ ये लाइफ इंश्योरेंस है ये है वो है पर फिर भी क्या है एकिस्टेंस के स्तर पे अगर भगवान का अस्तित्व नहीं है भगवान का कोई महत्व नहीं है भगवान कोई मायने नहीं रखते मेरे जीवन में तो फिर वो स्तर पर चिंता बहुत बढ़ गई है और इसीलिए क्या हुआ है यद्यपि कंफर्ट्स हमारे जीवन में बढ़े हैं पर उसके साथ-साथ क्या हुआ है एंग्जायटी भी बढ़ी है तो ये जो ए्जायटी के सरकमस्टेंशियल नहीं है वो एकिस्टेंशियल है। छोटी-छोटी चीजों से क्या होता है? मन बहुत विचित्र हो जाता है। तो अभी इफ आई गो बैक टू दिस जब हम भक्ति कर रहे होते हैं तो भक्ति करने भक्ति करने का मतलब क्या है? वो केवल इतने माला करना है या ऐसे बैठ के जप करना है या यह रूल फॉलो करना है वह नहीं है। भक्ति करने का प्रभाव क्या होता है? कि पहले जब हम भौतिकवादी जीवन जी रहे होते हैं तो हमारे लिए जगत बहुत बड़ा होता है और भगवान छोटे होते हैं। हां भगवान है नहीं है कुछ फर्क नहीं पड़ता है। हो गए नहीं होंगे पता नहीं है। मैं जब 30 साल पहले भक्ति शुरू की थी तो मेरे सारे रिश्तेदारों को मैं बताने लग गया कि कृष्ण भगवत गीता का सिखाती है। तो मेरे चाचा थे वो बोले कि भगवान उनसे तो मेरा बहुत अच्छा संबंध है। अच्छा क्या संबंध है? क्या मतलब है? कभी उनको धार्मिक चीजें कुछ करते हुए देखा नहीं था। भगवान के तत्व ज्ञान के बाद कुछ नहीं करते थे। बोले क्या है कि मेरा भगवान से अच्छा संबंध क्या है? मैंने उनको पूछा आपको क्या संबंध? उसका मतलब क्या है? बोले म्यूचुअल नॉन इंटरफेयरेंस। वो वहां पे सुख है। सुखी है। मैं यहां पे सुखी हूं। तो क्या है? भगवान को अगर मानते भी अस्तित्व है तो इरिलेवेंट बना देते हैं। तो पर जब हम भगत में प्रगति करते हैं तो क्या होता है? हमारे लिए जगत छोटा बन जाता है और भगवान बड़े बन जाते। तो जब जगत छोटा हो जाता है तो जगत के जो द्वंद होते हैं वो भी छोटे हो जाते हैं। और जब भगवान बड़े हो जाते हैं तो यहां से हमको एक सिक्योरिटी आता है। एक सेफ्टी आता है। तो ये कह तो ये क्या है? ये एक अंदर से सेफ्टी आता है। तो अभी हां हमारा स्ेड्यूल में जप को फिट करना जो है उसको सब चीजों को टाइम लगता है। इसके लिए भी टाइम लगता है। भक्ति टाइम लगता है। पर क्या है वो एक सरकमस्टेंशियल स्तर पे शायद उसका ए्जायटी होगा। पर एकिस्टेंशियल स्तर पे जो है क्या होगा हमारे लिए? हम अंदर से और सिक्योर बनते जाएंगे। तो हां भले कैसे मैं इसको टाइम मिलेगा जब करने के लिए वो देखना है ये करना है वो करना है। पर बाद में कोई समस्या आ जाएगी। कोई जॉब में प्रॉब्लम आ जाएगा। रिश्तों में प्रॉब्लम आ जाएगा। स्वास्थ्य में प्रॉब्लम आ जाएगा। हम देखेंगे कि हमारा स्टेबिलिटी जो है उस समय में ज्यादा हो जाएगा वो संप वो विपत्ति आएगी तो भी उससे हम इतना विचलित नहीं होंगे क्योंकि क्या है वो सरकमस्टेंस के स्तर पर थोड़ा टेंशन है पर एकिस्टेंशियल स्तर पे जो है एक सिक्योरिटी आ गई है तो जब हम साधना कर रहे हैं तो आई विल कंक्लूड विद वन लास्ट पॉइंट तो अभी क्या होता है कि जब रजोगुण का प्रभाव अभी तक हम में होता है तो हम तो अभी ये क्या है ये स्तर है जिसमें हम नीचे का दो स्तर है इसमें हम कोई भक्ति नहीं कर रहे हैं तो भले ही चिंता हो या ना हो वो कैसे है व्यक्ति को बीमारी है पर कभी पेन किलर लेने के कारण बीमार का दर्द नहीं महसूस हो रहा है कभी महसूस हो रहा है इसके विपरीत क्या है कि जब हम जप करने की जिम्मेदारी लेते हैं जब हम साधना करने की जिम्मेदारी लेते हैं तो क्या भगवान का स्मरण करने की जिम्मेदारी लेते हैं तो उससे शायद कभी व्यवहार के स्तर पे थोड़ा ए्जायटी हो सकता है सरकमस्टेंशियल स्तर पे पर क्या होता है वो एकिस्टेंस के स्तर पर सिक्योरिटी और बढ़ते जा रहा है और ऐसे हो सकता है कि जब हम साधना भक्ति कर रहे हैं तो इनिशियली तो हमारा साधना भक्ति का जर्नी जो है साधना भक्ति के जर्नी में हां पहले ऐसे होगा कि हमें ऐसे लगेगा कि व्यवहार के स्तर पर मुझे और चिंता बढ़ गई है। पर जितना हम भक्ति और करते रहेंगे तो हम सतोगुण में आ जाएंगे। सतोगुण में आ जाएंगे तो फिर हम हमारा स्ेड्यूल में क्या इंपॉर्टेंट है? कैसे बैलेंस करना है? वो और सीख लेंगे। और फिर क्या है? जैसे हमारे जीवन में और स्ट्रक्चर आ जाएगा और ऑर्गेनाइजेशन ऑर्डर आ जाएगा तो हमारा सरकमस्टेंशियल ए्जायटी भी धीरे-धीरे कम हो जाएगा। ठीक है? ये समय इसके लिए है और इस समय मैं इस समय में ये करने वाला हूं। ये यहां पे नहीं हुआ तो फिर इस समय में कर लूंगा ये। तो जब हमारे मन में वो बैठ जाएगा कि हां ठीक है इसके लिए में निकालना है और निकालने लगे तो फिर उसका ए्जायटी नहीं रहेगा। उसका ए्जायटी कम हो जाएगा। तो एक तरह से क्या है ये ग्रेजुअल है। ये धीरे-धीरे होने वाला है। तो पर इसके साथ-साथ एक आखरी पॉइंट बोलूंगा मैं कि जब हम जप करते हैं, जब हम साधना करते हैं तो हमें एक संकल्पना बहुत महत्वपूर्ण है समझना। कई बार ऐसे होता है कि जब हम भक्ति करते हैं कि हम भक्ति को केवल एक रूल्स के रूप में देखते हैं। अरे इस समय तक जप करना चाहिए। इतना जप करना चाहिए या ये ऐसे इतने घंटे पढ़ाई करना चाहिए। यह सब क्या है? वी शुड नॉट भक्ति में रूल्स महत्वपूर्ण है। पर भक्ति क्या है? एक रिलेशनशिप है। वो भगवान से संबंध है। और भगवान जो है हमारी परिस्थिति समझते हैं। एक साधारण बॉस भी होगा। अगर हमारे हमको काम करना है पर हमारे घर में कुछ इमरजेंसी आ गया। हमारा बच्चा बीमार हो गया है। तो फिर ऐसे नहीं कि बॉस बोलेगा कि तुम्हारा बच्चा मर भी जाए तुम यहां पर आकर नौकरी करो। नहीं वो भी समझता है। तो भगवान तो परम करुणामय है। तो कृष्ण ऐसे नहीं है कि तुम्हारे जीवन में कुछ भी हो रहा हो तुम्हें मेरा जप करना चाहिए। जब पे ध्यान नहीं देगा तो मैं तुम पर गुस्सा हो जाऊंगा। ऐसे नहीं कृष्णा इस आल्सो एन अंडरस्टैंडिंग गॉड। तो कभी अगर डिस्ट्रैक्ट हो जाते हैं हम कुछ और परेशानी है ये है। ऐसे नहीं कि वो परेशानी पे ध्यान देना है हमको। पर अगर समस्या होती है तो कृष्णा समझते हैं। वी हैव टू अंडरस्टैंड दैट कृष्णा ये डिमांडिंग गॉड नहीं है। ही इज अंडरस्टैंडिंग गॉड। तो ऑफकोर्स हमारी दृष्टि से ये भगवान का प्रेम है कि भगवान हमारे जीवन में परेशानी भी आएगी। हम हमारा हम भक्ति इत से नहीं भी कर पाएंगे। तो भी ऐसे नहीं कि भगवान गुस्सा हो जाते। वो भगवान के प्रेम का लक्षण। हमारे प्रेम का लक्षण क्या है कि हम जो जो भी हो जितना अच्छा कर सके उतना कर सके। वही उदाहरण को उल्टा कर देंगे। मान लीजिए हमारे ऑफिस में कुछ बहुत काम है। तो फिर भी अगर हम बच्चों के लिए हम कुकिंग कर रहे हैं तो ऐसे नहीं है कि जो भी घर में है वो किचन में उठा लो। फ्रिज से उठा लो। ये डाल दो और खा लो। नहीं हमें कुकिंग कर रहे हैं। हम बच्चों के लिए जो कर रहे हैं परिवार हमारा प्रेम क्या है? यहां ऑफिस में कितना भी टेंशन हो। आई विल ट्राई टू बी मैं जो मेरे जो बच्चों से प्रेम से व्यवहार करूंगा। अच्छी तरह से व्यवहार करूंगा। तो हमारे प्रेम का लक्षण है कि हम जितना अच्छी तरह से भक्ति कर सकते हैं उतना अच्छे से भक्ति करना चाहिए। पर ऐसे नहीं है कि भक्ति को हम रूल्स को रिड्यूस कर दे। रूल्स आरेंट बट द रिलेशनशिप इज इवन मोरेंट। भक्ति क्या है? ये एक रिलेशनशिप का भाव है। और इसका एक और इसी का एक और पॉइंट क्या है? कि हम जब साधना कर रहे हैं। आवर साधना इज नॉट मेंट टू अर्न कृष्णा। लव कभी-क कैसे होता है कि इस भौतिक जगत में हमें दूसरों का प्रेम अर्न करना पड़ता है। कोई कहेगा कि कोई किसी लड़के किसी लड़के से विवाह करना है तो वो देखेगा पैसा कितना कमाता है ये। इतना पैसा कमाएगा तो ये मुझे सिक्योरिटी देगा। तो इसलिए मैं करूंगा। और कोई लड़का किसी लड़के से विवाह कर जाता है तो ये कितनी सुंदर है। इससे मुझे कितना सुख मिलने वाला है। तो हमें लगता है कि मुझे इस तरह से फिगर रखना चाहिए ताकि फिर मुझे आकर्षण तो क्या थिंक हमको लगता है कि मुझे किससे का लव अर्न करना है। ये हमें भौतिक जगत में कई बार होता है ऐसे कि मुझे किसी का लव अर्न करना होता है। पर साधना जो है वो इट इज नॉट टू अर्न कृष्णास लव इट इज टू रियलाइज कृष्णास लव। टू रियलाइज दैट कृष्णा ऑलरेडी लव्स अस। ऐसे नहीं है कि हम साधना करने से भगवान हमें प्रेम करना शुरू कर देंगे। भगवान हमसे पहले से प्रेम करते हैं। सुरदम सर्वभूत नाम भगवान कहते हैं पिता अस जगत मैं सबका पिता हूं। तो भगवान सबसे प्रेम करते हैं। पर क्या है? सूरज जिस तरह से सबको रोशनी देता है। पर अगर किसी के आंखें बंद है तो उनको रोशनी नहीं दिखती है। उसी तरह से क्या होता है कि अभी हमारे आंखें बंद है। जीव जागो जीव जागो गौरा चंद भक्ति ठाकुर गाते हैं कि हमें आंखें खोलनी है तो आंखें खोलने से हम सूर्य की रोशनी जा पैदा नहीं कर रहे हैं। आंखें खोलने से हम सूर्य की रोशनी जो है वो जो दिख रही वो पहले से थी उसको हम देख पाते हैं। तो हमें जब साधना करनी है तो हमें क्या है कृष्ण मुझसे पहले से प्रेम करते हैं और हमेशा प्रेम करते रहेंगे। उसके लिए हमारी आंखें खुलती है। तो कृष्ण हमें कभी कुछ भी नहीं करना है। कृष्ण टू अर्न कृष्णास लव। कृष्णा हमसे ऑलरेडी प्रेम करते हैं। उसकी हमें केवल जागृति करनी है। उसके लिए हमें रियलाइजेशन प्राप्त करना है। तो इसीलिए साधना करते समय हमें ए्जायटी में नहीं रहना है। कि अरे मैं जब नहीं करूंगा तो भगवान गुस्सा हो जाएंगे। भगवान हमेशा हमसे प्रेम करते हैं। तो जितना शांत मन लगे कि हमारा प्रेम जितना हमारे रूप में प्रेम है हृदय में या प्रेम का हमें व्यक्त करने का इच्छा है वो हमें हम जप के द्वारा कर सकते हैं। तो इस तरह से जो सरकमस्टेंशियल ए्जायटी है जप में कभी-कभी आता है अगर हमारी भ्रांत धारणा है कि मुझे कृष्ण का प्रेम अर्न करना पड़ेगा। तो वो सरकमस्टेंशियल ए्जायटी हम एलिमिनेट कर सकते हैं समझकर कि कृष्ण अभी भी हमसे प्रेम करते हैं। तो सारांश में आई टॉक अबाउट थ्री पॉइंट्स। तो एंग्जायटी एनचंटिंग जब हमें एंजाइटटी होती है तो वो कैसे होती है क्यों होती है उसको उसको कैसे ढेल फेस करना है उसमें तीन पॉइंट्स मैंने देखे सबसे पहला पॉइंट क्या था कि टू काइंड्स ऑफ़ एंग्जायटी एंग्जायटी जो होती है कोई ए्जायटी ऐसी होती है वो प्रोडक्टिव होती है और कुछ अनप्रक्टिव होती है जैसे कि कोई किसी को बीमारी होती है तो पेन जो होता है कोई डिसीज़ के कारण होता है और कोई क्योर के कारण होता है। ट्रीटमेंट के कारण होता है। तो दोनों एक सामान नहीं है। इनका फर्क समझना है तो ये फर्क समझने के लिए कैसे समझ सकते हैं हम फर्क? तो हमने देखा कि जो दो प्रकार की एंग्जायटी होती है जो ए्जायटी एक है सरकमस्टैंशियल जो परिस्थिति के स्तर पे होती है क्योंकि द्वंद होते हैं जगत में और दूसरी है एकिस्टेंशियल कि मैं इस जगत में अकेला हूं और उससे जो ए्जायटी होती है वो बहुत ज्यादा है। तो एक तरह से हम कह सकते हैं कि आज जो यद्यपि आधुनिक प्रगति हो रही है, प्रोग्रेस हुआ है, उससे कंट्रोल आया है, कंफर्ट आया है। फिर भी उससे ए्जायटी भी साथ-साथ बढ़ रही है। क्योंकि क्या हो गया है? यह जो हुआ है कि सरकमस्टशियल स्तर पे हम पे कंट्रोल आ गया है। पर नास्तिकवाद के कारण, भौतिकवाद के कारण क्या एक्सिस्टेंशियल स्तर पे ए्जायटी बढ़ गया है। तो जो स्पिरिचुअल ग्रोथ होता है उसका मतलब क्या है कि हमारा भले ही सरकमस जो एकिस्टेंशियल ए्जायटी है वो कम हो जाएगा क्योंकि हम समझेंगे कि भगवान बड़े हैं और ये जगत जो है वो छोटा है। तो छोटा हो जाएगा तो जगत के द्वंद भी छोटे हो जाएंगे। तो इसमें हम देखा कि किस तरह से जब हम कार्य कर रहे हैं तो पहले ऐसे हो सकता है कि कुछ समय तक हमें लगे कि भौतिक जीवन में ही ए्जायटी कम है। पर वो क्या है? वो रजोगुण का एक मोह है। रजस का जो सकारात्मक होता है मतलब क्या है? रजस में जब हमारे पास कंट्रोल होता है तो फिर क्या होता है? हमको लगता है चिंता नहीं है। पर अस्तित्व के सर पर चिंता रहती है। और रजस में जब कंट्रोल चला जाता है तो वह ए्जायटी और बढ़ जाती है। तो यह दोनों जो है यह वास्तव में नकारात्मक ही है और इनको टालना वी शुड नॉट इससे मोह में नहीं पड़ना है। दोनों जो है वह अनहेल्ी है और इसके विपरीत जब हम भक्ति कर रहे हैं तो वो ऑस्पिशियस ही है हर स्तर पे कि जो सरकमस्टेशियल एंग्जायटी है वो शायद रहेगी क्योंकि हमें स्केेड्यूल में फिट करना है। पर धीरे-धीरे हम जो है ऐसी परिस्थिति में आएंगे कि सरकमस्टेशियल एंजायटी भी नहीं रहेगा और एग्जिस्टेंशियल एंजाइटी भी नहीं रहेगा। और यह जर्नी एक तरह से जो यह ग्रेजुअल है। पर इसको एक्सलरेट करने के लिए दो चीजें देखी हमने। क्या था कि हमें मेनली कृष्ण का स्वभाव और कृष्ण का प्रेम इन दोनों को समझना है। कृष्णा नेचर क्या है? वो डिमांडिंग नहीं है। वो अंडरस्टैंडिंग है। जैसे कोई बॉस भी समझेगा अगर हमें घर में कोई इमरजेंसी है तो भगवान जरूर समझते हैं। तो भगवान समझते हैं। इसका मतलब हमें नहीं कि हमें ढीला स्टैंडर्ड्स में हमें हमारा प्रेम दिखाना है भगवान को जितना स्ट्रिक्ट हो सके उतना होकर और दूसरा क्या है कृष्णास लव जो है ऐसे नहीं कि हम साधना करके इट इज नॉट अर्न बाय साधना हमें कुछ करना नहीं जिससे कि हमें भगवान का प्रेम खरीदना है प्राप्त करना है क्या इट इज सिंपली रियलाइज्ड बाय साधना हमारी आंखें बंद है और आंखें जब खुल जाएगी तो फिर फिर हम और रियलाइज कर पाएंगे कि भगवान ऑलरेडी मुझे प्रेम करते हैं। और इस तरह से जप करते समय जो सरकमस्टेंशियल ए्जायटी होता है हमारा कम हो जाएगा और हम शांति से जप करते हुए धीरे-धीरे उस स्तर पर पहुंच जाएंगे। तभी सरकमस्टेंशियल और ए्जायटी दोनों कम हो जाएगा। सतगुण में जैसे आ जाएंगे तो भगवान की अनुभूति और हो जाएगी। हमारे शेड्यूल के स्तर पर स्टेबिलिटी आ जाएगी और फिर हम क्वाड्रेंट फोर है उसमें आ जाएंगे तब हम क्या हो गया सुसुखम कर चट एंड बी हैप्पी एक व्यावहारिक स्तर पर हम और अनुभव कर पाएंगे बहुत-बहुत धन्यवाद हरे कृष्णा