Can an animal become a ghost – Hindi?
Answer Podcast
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Lecture Summary
- कर्मों का विभाजन और फल: कर्मफल का प्रभाव जीवन के विभिन्न चरणों में मिलता है—कुछ नर्क में, कुछ पशु योनि में और कुछ मनुष्य योनि में। एक ही पशु योनि (जैसे कुत्ता) में भी जीवन की स्थितियाँ (पालतू बनाम सड़क का कुत्ता) पूर्व जन्म के कर्मों के आधार पर भिन्न होती हैं।
- भूत बनने का कारण: जब आत्मा के पास मन तो होता है पर भौतिक शरीर नहीं होता, तब वह ‘भूत’ कहलाती है। मुख्य रूप से तामसिक जीवन जीने या मनुष्य योनि में आत्महत्या करने के कारण शरीर नष्ट हो जाता है और बचे हुए आयु-काल तक आत्मा को भूत के रूप में रहना पड़ता है।
- तीन गुणों का प्रभाव (सत्व, रज, तम): सत्वगुणी व्यक्ति स्वयं सुखी रहकर दूसरों को सुख देता है; रजोगुणी स्वयं के सुख के लिए दूसरों को दुख देता है; जबकि तमोगुणी न स्वयं सुखी रहता है और न दूसरों को सुखी रहने देता है।
- पशु योनि और भूत प्रेत: पशु अज्ञानवश कार्य करते हैं और वे निराशा में आकर आत्महत्या नहीं करते। इसलिए साधारणतया पशु योनि के बाद कोई जीव भूत नहीं बनता, बल्कि उसकी आत्मा का विकास ऊपर की ओर ही होता है।
Full Transcription
तो क्या कोई जीव, प्राणी के शरीर से, क्या वहाँ से भूत बन सकता है?
अभी इस भौतिक जगत में क्या हो सकता है, क्या नहीं हो सकता है, इसके बारे में मैं बहुत बता नहीं सकता क्योंकि गहना कर्मणोगतिः (कर्म की गति बहुत गहन है)। तो काफी जटिल है यह।
साधारणतया हमारे जो कर्म हैं, उनका फल हमको तीन प्रकारों से मिलता है—या तीन प्रकारों में विभाजित होता है। एक है कि अगर हमारे कर्म की मात्रा 100 है, तो उसमें ऐसा हो जाता है कि 33% जो कर्म का फल है—यह गुणात्मक रूप से सिर्फ उदाहरण के लिए दे रहा हूँ मैं, यह ऐसे कोई प्रमाणात्मक सिद्ध नहीं है, सिर्फ उदाहरण के लिए बता रहा हूँ मैं—कि अगर 100% मेरा पाप या मेरा पूरा कर्म का फल मिलने वाला है, तो ऐसा हो जाता है कि उसका 33% जो है, व्यक्ति को नर्कों में जाकर भुगतना पड़ेगा, 33% जो है, वह इस भौतिक जगत में ही जानवरों के शरीर में मिल सकता है, और 33% जो है, वह मानव शरीर में मिल सकता है।
हम देखते हैं कि जानवर के शरीर में भी, सब जानवरों के स्तर ऐसे ही नहीं होते हैं। जो कोई रास्ते पर कोई कुत्ता रह रहा है, कोई पालतू कुत्ता किसी रईस के घर में रह रहा है—उनके जो जीवन की सुविधाएँ हैं, वह काफी अलग हैं। ऐसा फर्क क्यों है? यह उस आत्मा के पहले मानव योनि में किए गए कर्मों के अनुसार है।
भूत बनने का कारण और तीन गुण
तो साधारणतया, व्यक्ति भूत क्यों बनता है? इसलिए बनता है कि वह व्यक्ति तामसिक जीवन जी रहा है। और खास करके भूत मतलब क्या? आत्मा, मन और शरीर—ये तीन चीज़ें हैं। तो जब व्यक्ति को शरीर… जब आत्मा को शरीर नहीं मिलता है, तो आत्मा और मन जब रहते हैं, तो वह ‘भूत’ कहलाते हैं, क्योंकि शरीर है नहीं उसके पास।
तो अभी ऐसी परिस्थिति क्यों आती है? कभी-कभी किसी ने बहुत बुरा कर्म किया है, तो ऐसा हो सकता है कि उसको शरीर मिले ही नहीं कुछ समय तक। जो आत्मा भूत के रूप में रहती है, तो वह पीड़ा की परिस्थिति होती है। दूसरों को पीड़ित करते हैं, पर खुद भी पीड़ित रहते हैं।
वास्तव में तमोगुणी जीवन का यह लक्षण है कि:
- सत्वगुणी व्यक्ति में व्यक्ति स्वयं खुश रहता है और जहाँ तक हो सके दूसरों को खुश रखने का प्रयास करता है।
- रजोगुणी व्यक्ति में क्या होता है—व्यक्ति खुद खुश रहता है और दूसरों को दुखी करता है (खुद के सुख के लिए व्यक्ति दूसरों को दुखी करता है)।
- पर तमोगुणी व्यक्ति न तो खुद खुश रहता है, न दूसरों को खुश रहने देता है।
तो तमोगुण का यह स्पष्ट उदाहरण है। तो जो व्यक्ति, जो आत्मा भूत के रूप में होती है, तो क्या है कि उनको इच्छाएँ हैं, पर इच्छाएँ पूरी करने की सुविधा नहीं है! गुलाब जामुन दिख रहा है, गुलाब जामुन खाना है, पर खाने के लिए जिह्वा (जीभ) ही नहीं है! तो क्या करेंगे? तो फिर क्या होता है—तभी वह किसी के शरीर में चला जाता है, शरीर में घुसकर फिर वहाँ से इच्छा पूरी करने का प्रयास करता है। इसलिए ऐसी परिस्थिति क्यों आती है? क्योंकि उस व्यक्ति ने बुरे कर्मों से शरीर न प्राप्त करने का कर्म कमाया है।
आत्महत्या और सूक्ष्म शरीर की स्थिति
तो अगर कोई व्यक्ति 70 साल एक शरीर में जीना है उसको, और 30 साल की उम्र में वह आत्महत्या कर लेता है, तो आगे के 40 साल की उम्र में उसको शरीर नहीं मिलेगा। तो वह 40 साल के समय में भूत के रूप में रहेगा। तो साधारणतया जो है, यह मानव शरीर में आत्महत्या करने के कर्म से होता है।
तो साधारणतया जानवर के शरीर से जो व्यक्ति की प्रगति है, आत्मा की प्रगति ऊपर की ओर होती है। तो वह किसी और योनि में जाएगा या मानव योनि में आएगा।
साधारणतया आत्मा जानवर के शरीर से… क्योंकि जहाँ तक आजकल देखा गया है कि जिस तरह से मानव आत्महत्या करते हैं, जानवर आत्महत्या नहीं करते हैं। अब कुछ-कुछ जानवर हैं, कुछ-कुछ कुत्ते हैं जो सिगरेट पीते हैं क्योंकि मालिक ने उनको पीने की आदत लगा दी है, तो मालिक के साथ सिगरेट पीता है—अमेरिका में होता है ऐसा।
जो जानवर होते हैं, उनकी अपनी वृत्तियाँ होती हैं। कभी-कभी भेड़ें होती हैं—एक भेड़ अगर पहाड़ से कूद जाती है, तो बाकी सब कूद जाती हैं। तो वे जान-बूझकर हताश होकर अपने जीवन का अंत नहीं कर रही हैं, वे अज्ञान से वह कार्य कर रही हैं।
तो क्योंकि जानवर आत्महत्या नहीं करते हैं, इसलिए साधारणतया जानवर के शरीर से कोई भूत नहीं बनता है।