Eradicate Sanatana-Dharma – Hindi
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संक्षिप्त सारांश
सनातन धर्म को सिर्फ रोकना ही नहीं है सनातन धर्म को पूरी तरीके से खटम कर देना है ऐसा कहना है तम्मिल नारू के मिनिस्टर उध्या निधी स्टॉलिन का उनका कहना है कि जैसे मलेरिया है, कोरोना है हम उसको रोकते नहीं है, हम उसको जर से मिता देते हैं, पूरी तरीके से ख़टम करदेते हैं सनातन धर्म कों भी हमको इसी तरिके से ख़टम कर देना है इनकी बात सुनकर मुझे वो राजकोमार का एक Dialogue गयादा आगया अब सनातें धर्म तो बेचारे क्या हैं मिटा應ें? इनके जैसे लाकों आए, लाकों चले गये. जुन उनने सानातें धर्म को मिटाने की कोशिष की।
मुख्य ट्रांसक्रिप्शन
सनातन धर्म को सिर्फ रोकना ही नहीं है सनातन धर्म को पूरी तरीके से खटम कर देना है ऐसा कहना है तम्मिल नारू के मिनिस्टर उध्या निधी स्टॉलिन का उनका कहना है कि जैसे मलेरिया है, कोरोना है हम उसको रोकते नहीं है, हम उसको जर से मिता देते हैं, पूरी तरीके से ख़टम करदेते हैं सनातन धर्म कों भी हमको इसी तरिके से ख़टम कर देना है इनकी बात सुनकर मुझे वो राजकोमार का एक Dialogue गयादा आगया अब सनातें धर्म तो बेचारे क्या हैं मिटा應ें? इनके जैसे लाकों आए, लाकों चले गये. जुन उनने सानातें धर्म को मिटाने की कोशिष की इतिहास गवाएकी वो समे के साथ कुद मिटते चले गये लेकिन बात है कि ये ऐसा चाहते क्योंं हैं?
क्योंं चाहते हैं कि सनातन धर्म मिड़ जाए? इनका कहना है कि सनातन धर्म की वाज़ा से समाज में भेद भाव होता है Untouchability है, अच्छूतपन है, जातिवाद है, ये सारी समस्यां सनातन धर्म की वाज़ा से है बागवतम है, पुरान है, वेदाज है क्या उसमें से ये जातिवाद आ रहा है? और नहीं तो फिर ये समाज में धीरे धीरे कैसे एड हो गया?
ये कुरितियां कहां से आ गई? और जैसे कि ये लोग बोल रहे हैं, अगर सनातन धर्म को वैसे तो संभव नहीं है, लेकिन चलो एक बार को मान भी लिया जाए कि सनातन धर्म को हटा दो, तो क्या ये प्रॉबलम सॉल्व हो जाएंगे सनातन धर्म को हटाने से? और आखरी बात ये है कि ऐसे लोग जो जान बूच कर इन मुद्धों को खतम नहीं होने दे रहे हैं?
लोगों के बीच में भेदबाव खतम होता जा रहा है, बहुत तेजी से गिर रहा है, लेकिन जो ये मंतरी लोग हैं, संतरी लोग हैं, ये अपने वोट बैंक के चक्र में आज भी इन मुद्धों को जिवित रखते हैं, बार बार लोगों के दिमाक में इसके उपर डालते हैं, क्योंंकि इनकी वोट बैंक पॉलिटिक इसी से चलती है, तो इस से लोगों का क्या करा जाये, क्या सुलुशन है, हम एक आम आदमी इस बारे में क्या कर सकता है, इन सारे सवालों को लेके मैं फिर से एक बार अपने सब के प्रिये चेतन चन पभू जी के पास गया हूँ, जो नहीं जानते हैं, बाई चांस चेतन चन पभू जी जो हैं, बहुत वरिष्ट भक्त हैं, भगवत गिता के उपर हजार आर्टिकल लिखे हैं, कईं किताबे वो लिख चुके हैं, और शास्त्रों को ठीक से कैसे समझा जाए, उनकी बहुत घहरी इसमें अंडर्स्टेंडिंग है, और समाज को, जो भी हमारे सोचल इशुस होते हैं, उनको शास्त्रों की नजर से कैसे देखा जाए, इसमें उनका बहुत अच्छा परस्पेक्टिव रहता है, तो ये सारे प्रश्न, कि हमारे शास्त्रों जातिवात के विशे में क्या बोलते हैं, और जो जातिवात हमने देखा है, वो क्या, इसमें अंतर क्या है, और सनातन धर्म का इसमें क्या योगदान हो सकता है, इन मुद्धों को हम कैसे देख सकते हैं, और कैसे सही कर सकते हैं, इन सारे प्रश्न को लेकर मैं चेतनाचरन पभुजी के पास गया हूँ, अगर आप इन मुद्धों को ठीक से, गहराई से, बहुत अच्छे से समझना चाहते हैं, तो ये पॉटकास्ट आपके लिए बहुत helpful हो सकता है, तो चले शुरू करते हैं, हरे किषना चेतनाचरन पभुजी, आपको देखके बहुत खुशी हो रही है, बहुत आनंद आता है आपको हमेशा से देखके, और मैं आशा करता हूँ, आप स्वस्थ होंगे पभु, खुश होंगे, और अपनी सेवा में लगवे होंगे हमेशा की तरह. हरे किषना इच्छर गुरांग पभु, हरे किषना इच्छर गुरांग पभु, करता हूँ थेंक्यू सो मज़ पभू पभू आज हम बात करना चाहते हैं जैसे मैंने आपसे फोन पर बात की जो तमिल नाडो के मिनिस्टर है उनके लड़के ने स्टेट्में दी है की सनातन धर्म जो है वो एक मलेरिया की तरह है कोविट की तरह है तो इसको नहीना है तो कह दो काफ ंग्रनी करना है एक निर्वादापपन धर्मने बाद तो आपमाद में से और िसस्पलं धर्म की अपना कुम परिवारा करना की बूलपरी रत में बाव हो रहे हुझों थे बगवत दीता का जो हमारा फेवरेट वर्स है पूर पूर थृटीन जिसमें किष्ण क्लेली बोलें चत्रुवर्ण नयमया सिस्टम गुणा कर्म विभागशा गुण और कर्म से विभाजन है अठारे अध्याय में फिर से भगवान बता रहे हैं क्या क्या गुण होने चाहि और सारे धर्मकुरु बार बार एकी बात बोलते हैं सबी लोग एकी बात बोलते हैं कि कहीं पे भेदबाव नहीं हैं काश सिस्टम नहीं है हमारा पे वर्ण व्यवस्ता है पूरा सनातन धर्म वर्ण व्यवस्ता के ओपर है उसके बावजूत केवल मिनिस्टर्स हैं जो का तो एसके क्योंं है इनको बात समझ में आ नहीं रही है ये समझना चाहते नहीं है ये इनका अपना स्वार्थ के चक्र में इतने ज़्यादा फसे वें कि वो इस बात पर भिचारी नहीं कर रहे कि वो समाज में कितना बड़ा एक दुशपरिणाम इसका हो सकता है उनकी इस त आपको क्या लगता है प्रभुजी?
वो क्योंं इस तरह का विचार रखते हैं? आपने बताया उसके बहले से मैं इसके बारे में विचार कर रहा हूं तो मैं तीन चीज़ों देखने चाहते हूं मैं अपने चीज़ों देखने चाहते हूं जब सनातन धर्म इस शब्द का इस्तमाल हो रहा है कई बार एक भाषा में ये समस्ते आती है हम एक शब्द का उलेक कर रहे हैं तो किस चीज़ को उलेक कर रहे हैं? तो अभी सनातन धर्म जो है उसका एक उलेक हो सकता है untouchability के साथ अच्छूतता और फिर उसके परे एक उलेक हो सकता है caste system जाती पद्धती उसके परे एक उलेक हो सकता है कि जो हिंदू धर्म है Hinduism और उसके परे जो है उसके परे जो है उसका उलेक हो सकता है कि जो आत्मग्यान है spiritual knowledge जो है उसका तो अभी सनातन धर्म का जब उलेक हो रहा है तो किस चीज से उलेक किया जा रहा है?
तो अभी जब हम साधारन तया कृष्णे भावना में से प्रभुबा जी ने बताया है कि सनातन धर्म मतलब क्या है? कि वो एक आध्यात्मिक ज्यान है जो भगवान भगविता में पताते है कि ये प्रभुबा जी की शिक्षा है ये भगवित गिता की शिक्षा है कि हम आध्यात्मिक ज्यान जो है सरव जगब सब लोगों के लिए है तो ये उल्लेग किया जा रहा है पर कुछ लोग सनातन धर्म का उल्लेग करते हैं तो वो कहते है कि ये अंटचेबलित्ति है अच्छूत्ता का भाव है यह सनातन धर्म है और वो कहते है कि इसका जो है हमको पूरा इसको विनाश कर देना चाहिए इसको बिल्कुल रखना ही नहीं चाहिए तो अभी यह सवाल होता है कि जब कोई सनातन धर्म के बारे में बात कर रहा है तो Who is speaking the right thing?
तो दो चीज़े हैं इसमें Who has the right to speak? and Who is speaking right? इसके पास अधिकार है ये बोलने के लिए और कोई जो बोल रहा है बहुत कुछ लोग बोल सकते हैं मुझे पास अधिकार है तुम कोई कहते है कि मुझे अधिकार नहीं है ठीक है तो Who is speaking right?
अलग लोग बोल सकते है तो कौन सही बोल रहा है? तो अभी कोई कहे गया कि मैंने भेदभाव का अनुभव किया है मैं अच्छुतता के कारण जो मुझे बहुत पीडा हुई है तो इसलिए मुझे अधिकार है इसके बारे में बोलने के तो अभी जो जलित समाज जो है जो अच्छुत प्रभावित हुई है तो मान लिए इन में से प्रधान जो है वो अम्बेड कर जी है महाराश्टा से ही हूँ महाराश्टा से उनका बहुत प्रभाव है तो उनने इसके बारे में कहा है तो जिसका हम कह सकते है anyone affected कोई भी इससे प्रभावित हुआ है उनको इसके बारे में कहने का अधिका है हम यह नहीं कह सकते हैं कि तुम्हें इसके बारे में बोलना ही नहीं चाहिए पर ठीक है अगर आप बोल रहे हैं तो who is speaking right आपके अनुभव के नसर आप बोल रहे है पर कोई भी यह तो नहीं कह सकता है कि मेरा अनुभव जो है वही परम सत्य है वही सम्पुर्ण सत्य है तो मान लिजे अगर हम किसी और धर्म का उधारन लेते हैं तो अभी हम इसलाम के बारे में बात करते हैं तो इसलाम भी बहुत बड़ी चीज है उसमें अलग अलग परकार के लोग है उसमें से एक छोटा सा भाग है वो है एक्स्ट्रिमिजम वो क्या है उसमें आतंखवाद आता है उसमें जिहाद आता है तो अभी अगर किसी को उसका अनुभा हुआ है तो वो शायद इसलाम के बारे में बुरा कहेंगे पर क्या इसलाम वही है आजकल के समाज में आजकल के जगत में every fourth person जो मुस्लिम है तो क्या सारे मुस्लिम आतंखवादी होते हैं इससे होते हैं तो सारा विश्व बहुत और कत्रे में होता है हम क्रिश्चानिटी के बारें बात कर सकते हैं किसी भी चीज के बारें बात कर सकते हैं अभी क्रिश्चन्स जो थे क्रिश्चानिटी में कई लोग ऐसे थे काफी समय तक जो गुलामी स्लेवरी को जस्टिफाई करते थे तो अभी कोई कहेंगा क्या कि क्रिश्चानिटी में स्लेवरी थी इसलिए हम क्रिश्चानिटी को ही पुरा हमको उसका विनाश कर देना चाहिए उसको इराडिकेट कर देना चाहिए तो अगर कोई ऐसे कहेंगा इसलाम के बारे में कोई कहेंगा कि हमें पुरा इसलाम को इराडिकेट कर देना चाहिए तो उसका पतिकार होगा बहुत मीशन होगा तो इसलिए अभी क्या है कि जब उसे कोई कह रहा है तो वो उस धर्म के बहुती चोटे सी चीज को ले रहा है और उसके आधार पे कुछ कह रहा है और फिर हम कह सकते है कि क्रिश्चानिटी में कुछ शलोक आते है बाइबल में जिसे स्लेवस को अपने मास्टर्स को ओबे करना चाहिए गुलामों को अपने मालिकों को ओबे करना चाहिए इसलाम में कुछ ऐसे विधान आते है कि जो भी काफीर हैं उनको मार डेना चाहिए जो लोग ऐसे कोट कर रहे है क्या वो सही में जो क्रिश्चानिटी का एसेंस है या इसलाम का एसेंस है उसके बारे में बता रहे है या कुछ एक फ्रिंचीज बता रहे है ये समझने के लिए हमें वो पूरी जो सिस्टिम है उसको देखना चाहिए केवल उसके एक चीज को देखना उचित नहीं है तो अभी अगर हम हम जो सनातन धर्म देखते हैं उसमें untouchability जो आती है तो untouchability ये जरूर एक historical reality है ये historical एतिहातिक दुर्शिस्य से रहते है और ये this is definitely a regrettable ये बहुती दुरभाज्य का ये बहुती बुरा सत्य है भारतिय समाच का पर ये आया कहां से है इसका source क्या है अगर हम देखते है तो untouchability खास करके ये हिंदू धर्म के बारे में सबसे गुणास्पत जो चीज है ये बतायी आती है हम जाती पत्यति के बारे में धिर धिर आगे बड़के पर ये जो है इसका source है इसको गीता में कहीं नहीं बताय गया है भागोतम में कहीं नहीं बताय गया है इसको रामायन महाभारत में कहीं नहीं बताय गया है तो इसको अगर वेदों में जाते है तो रिगवेद में या किसी वेदों में इसका उलेक नहीं है इसका वेदों में उलेक नहीं है तो कहीं भी हमारे शास्त्र है उनके प्रधान कोई शास्त्र में इसका उलेक नहीं है कुछ लोग कहते है कि ये धर्मशास्तर में आता है पर धर्मशास्तर में जो भी आता है वो बिल्कुल सप्ष्ट नहीं है कि अभी चंडाल, मलेच ऐसा उलेक आता है ये भागोतम में भी आता है पर ऐसो लोगों को अच्छूत मानना ये जो है इसका कहीं भी उलेक नहीं आता है धर्मशास्तर में भी कहीं एसे क्लियर नहीं है नो रेफरेंस, नो क्लियर रेफरेंस तो ये कहां से आया है ये इसको, जो भी हम हिंदुईजम ये सनाधन धर्म कहते है उसके मूल शास्त्रों में ये कहीं भी नहीं है तो इसको हिंदुईजम से जोड़ना और यहाँ तकि इसको सनाधन धर्म से एक्वेट करना ये एक्वेटली रॉंग है ये तो कि ये भले ही एतिहास्तिक सत्य हो लेकिन हिस्टॉरिकल ही नहीं सक्रिप्ट्रियल है क्योंंकि सब कुछ इतिहास में जो हुआ है हिस्टॉरिकल नहीं सक्रिप्ट्रियल है और रिलिजियस और स्पिरिट्रियल है तो जो भी भारत में हुआ है हम इसे नहीं कहते कि वो सब सनाधन धर्म ही था और इसका क्या सबूत है कि हम कह सकते सनाधन धर्म नहीं है तो इसका हम तीन जुरुष्टि से देख सकते हैं कि शास्त्रों में ही बताया गया है कि अभी कुछ कह रहे हैं कि हाई अन्टचेबिलिटी बहुत बुरी चीज़ है हाँ हम भी स्विकार करते हैं इसे आपने ही सुरुवात में बताया कोई भी धर्म गुरू है आजकल के समाज में कोई भी अन्टचेबिलिटी को प्रोपेगेट नहीं कर रहा है अच्छुटिता को प्रस्थाबित करके उसको विस्तारित करने का बिल्कुल प्रयास नहीं कर रहा है तो इसलिए यह इसको इक्वेट करना कि अन्टचेबिलिटी सनातन धर्म और इसलिए हमको सनातन धर्म को इराडिकेट कर देना चाहिए यह क्या है this is a horrendous misrepresentation इन्हें केवल एक गलत समझाना है पर यह एक भावती भयानक गलत समझ है क्या गलत समझाना है नहीं इपने सबसे कोई अच्छा क्या है तो आप कुछ पर देखें जा सकते हैं नहीं परभु मैं अभी तक आपकी बास समझ रहा हूँ कि हिस्टोरी में हिस्ट्री में जो भी सीज़े चल रही हैं उसको सनातन धर्म के तरह रिपेजेंड करना और उससे भी ज़्यादा जो आप बता रहे हैं उसको मान लेना कि ये वही है सनातन धर्म का मूल उदेशी ही untouchability है तो उसका तो कोई सेंसी नहीं बन रहा है एक्जेक्ट्ली अभी हम ये कह रहे हैं कि ये नहीं है कैसे हम कह सकते हैं कि ये नहीं है सनातन धर्मा और untouchability एक नहीं है कह सकते है सरे में no scriptural reference ये पहले चीज़ हमने अलडी बता दी पर अभी कई और कारण देख सकते हैं दूसरा कारण ये है कि हम कहते हैं कि much internal reform कि जो internal reform मतलब वैदिक संस्कृति वैदिक शास्त्रों से ही जो लोग प्रेज़ित हुए है उन्होंने ही इसके बारे में इसके विरुद्ध में कहा है तो अगर हम देखते हैं कई भकती में संत हुए हैं और जो भकती के संत थे वो अनेग lower caste थे महराश्टा में गोरा कुमभार थे असे बहुत से संत हुए हैं जो अलग अलग ये पॉटर थे कुमभार मतलब पॉटर थे पर ऐसे ही बहुत से ऐसे है कि जो कोबलर थे चामर थे तो अभी हम देखते हैं गौडिया वेशन पंदेती में भी हरिदास ठाकुर थे वह जो थे उनको सानातान प्रसंद मिलेच्च कहा जाता था क्योंंकि वह सानातान धर्म के बाहर के एक परिवार में चेन में हुआ था तो नो के नोट ओन्ली वेर दे एक्सेप्टेड ना केवल उनको सुपकार किया था पर उनको रिस्पेक्ट किया गया था कि अगर कोई कहता है कि यही सानातान धर्म है तो सानातान धर्म में जो महान व्यक्ति महान हस्तिया माने जाती है तो उन में भी ऐसे लोग हैं जो नीची के कास्ट थे और वह ऐसा बहुत इंटरनल रिफॉर्म हुआ है और ऐसे नहीं कि इंटरनल रिफॉर्म कुछ लोगों नहीं किया है अनेग बक्षन्तों ने किया है भवु रिफॉर्म का मतलब यहाँ पे क्या बोलना चाह रहे हो कि किस मतलब रिफॉर्म क्या रिफॉर्म हुआ है मतलब रिफॉर्म मतलब यहाँ करेक्ट हिस्टोरिकल रियालिटी जो हिस्टोरिकल रियालिटी थी कि अंटेक् पर वो गलत चीज आता है तो उसी धर्म में उसके खेलाफ प्रतिकार किया गया है जैसे मैं बोला था स्लेवरी था गुलामी थी स्क्रिश्ट्यानिटी में तो जब अमेरिका में सिविल वार जब हुआ था कुछ स्क्रिश्ट्यानिटी कह रहे थे कि बाइबल के अनुसास स्लेवर रखनी चाहिए गुलामी रखनी चाहिए और कुछ स्क्रिश्ट्यानिटी कह रहे थे कि नहीं रखनी चाहिए तो क्या है कि किसी नहीं कहा कि क्रिश्ट्यानिटी के लिए गुलामी होगी तो क्रिश्ट्यानिटी को आप निकाल दो तो यह कहना बहुत गलत है एक तरह से और फिर दूसरा हम देख सकते है कि यह untouchability कहां से आई है तो इसको अभी मैं इसको I am not justifying it I am not at all justifying it I am only explaining it कहां से आ सकती है इसके बहुत से थियोरीज है कि भारत का इतिहास है भारत बहुत बड़ा विशाल देश था और सब पे किसी एक का नियंत्र नहीं था अलग अलग पद्धतिया थी तो कई बार यह untouchability का जो आया था वो एक तरह से हाईजीन से आया हो सकता है नहीं कहा रहा है जो लोग मल मुत्र ऐसे चीजों से जो मास से ऐसे संपर्क में रहते है तो उसमें जर्म्ज आ सकते है वो अभी जो लोग ऐसा काम हमेशा करते है तो उनको कुछ हरता से immunity आ जात है उसमें पर बाकी लोग इससे संपर्क नहीं है उतना तो उनको उतना immunity नहीं आता है तो शायद हम जो टर्म्ज यूज़ करते है जर्म्ज या immunity वो उस समय लोगों को वो टर्म्ज यूज़ नहीं करते होगे पर एक तरह से थोड़ी-थोड़ी समझ होती है तो अभी जैसे कोविड के समय जो social distancing हमने रखा था कोई एक दूसरी के बास नहीं आना चाहिए तो वो एक तरह के untouchability के संपर्क थोड़ी थोड़ी थी तो अभी ये जो है मैं एक सपश्टे बोल रहा हूँ कि I am not justifying it ये सही है नहीं बोल रहा हूँ मैं ये बोल रहा हूँ कि एक थाँ से आया हो सकता है कि इसके लिए अलग-अलग theories बताई गई है और hygiene की एक theory हो सकती है कि सही होगी नहीं होगी पता नहीं पर ये एक शास्त्रों से आया हुआ एक discrimination जो है ये नहीं है शास्त्रों में ऐसी पद्धती नहीं बताई गई कि किसी को आप अच्छूद बोल के उनको मानवी स्थर्थे का आदर भी न दो उससे भी नीचे कुछ कर दो ऐसा भाव नहीं है तो अभी कुछ लोग कहते हैं ऐसे अलग-अलग कारम कोई दून सकता है और उसके लिए historical research चाहिए जो भी इसको करना है research कर सकते है but we are not justifying it पर अभी इसके लिए एक justification दिया जाता है कभी-कभी कि जो पुनर जन्म है reincarnation and karma इसके द्वारा से बता जाता है कि जो लोग ऐसे का कारे कर रहे हैं उनको बता जाता है कि तुम्हारा तुमने पूरो जन्में बुरे कर्म की है तुम्हारा ऐसे जात्यों में जन्म हुआ है और से तुमको अभी ऐसे ही रहना चाहिए प्रभु मेरी understanding यह बनी है कि जो जो main principle है जो भगवान भगवदीता के 4.30 में बता रहे हैं वो गुन और कर्म के अधार पर ही है मला main principle वो है लेकिन अगर शत्रिय पुरुष है शत्रिय इस्तरी है जब वो आपस में सात्मे रहते हैं तो बहुत high probability है कि उनका पुत्र भी श शत्रि होते हैं जब बन वेवस्था का ठीक से इस्तमाल होता था तो वहाँ से जनव भी important हो जाता है practical purpose से कि अगर किसी ब्रह्मन का पुत्र है तो most likely वो भी ब्रह्मन नहीं होगा तो इसलिए वहाँ से जनव को भी जो धीरी धीरी importance देनी शुरू हो गई exactly perfect तो अभी कैसे है कि एक है इसे विज्ञान में होता है एक है science और दूसरी है technology तो science और technology अभी हम zoom का technology का इस्तमाल कर रहे हैं internet का इस्तमाल कर रहे हैं तो अभी internet कैसे काम करता है ये बहुत कम लोगों वास्तवे पर पता है पर internet का use बहुत सारे लोग करते हैं तो उसी तरह से क्या है एक है philosophy तत्वज्ञान और दूसरा है culture संस्कृति तो तत्वज्ञान क्या है वहाँ बहुत से लोगों पता नहीं होता है पर वह संस्कृति उसका अनुशलन कर रहे है तो अब मान लेंगे कोई फोन यूज करता है तो अब उसको बोलते है कि ठीक है आप जो फोन है पानी में यूज मत कीजिए उससे कुछ शॉक हो सकता है कुछ भीमार हानी हो सकती है पर लोग उसको ध्यान नहीं देते था जो उसकरते एक बार यूज किया दूसरी बार यूज के कुछ फ़रक नहीं पड़ा बार यूज करने के बार एक बार ऐसे हो सकता है कि वो पानी के कारण उसका विस्पोड हो जाता है तो अभी ये क्योंं हुआ है ऐसे नहीं है कि वो फोन खराब है वो फोन कैसे इस्तेमाल करना है उसका ध्यान जो है जो कम परचलित है तो वैसे ही क्या है तत्वग्यान एक है पर जब वो तत्वग्यान संस्कृति में चला जाता है तो कल्चर में कई बार कुछ चीज़े आती है वो फिलोसोफी से आती है पर कई चीज़े जो होती है वो सुपरस्टिक्षन से भी आती है वो अंधविष्टवास से आती है कई चीज़े वो केवल एक तरह से ट्रेडिशन से आती है परंपरा से आती है पर वो ट्रेडिशन स्क्रिप्चर से नहीं आ रहा है इसलिए अगर भगवान गोबर्धनलिना में पूछते है वो नरजवासी उन्हां महाराज को आप इंद्र के पूजा कर रहे है यह शास्त्रों के अनुसार है या रितिरिवास के अनुसार मतलब स्क्रिप्चरल इस नाट नेसेसरली इकोल ट्रेडिशनल तो यह थोड़ा सुक्ष्म पॉइंट है पर यह महतुपूर्ण पॉइंट है कि भले भारत में जाती पद्धती हो और जाती पद्धती को जन्म से बताया गया हो यह स्क्रिप्चर से क्या आया है वरणाश्रम आया है और जो रितिर है वो से कास्ट सिस्टिम आयी है और जो कास्ट सिस्टिम है इसका शास्त्रों में ही शास्त्रों के आधार पर अनेक विचार तोने इसका कंडन भी किया है तो इसलिए कोई कहेंगा कि जन्म पुनर जन्म तत्वग्यान के नुसार इसको कास्ट सिस्टिम को बताया गया है ठीक है वो एक कारण है बड़ वो सोल कारण नहीं है और इसलिए शास्त्रों में भी अनेक अपवाध है ऐसे अनेक उधारण है जिसे भागोतम उधारण आता है कि जो भरत महाराज होते है रे की अनेक पूटर होते है और कुछ पूटर ब्रामहनपण होते है कुछ पूटर वैश्य बन जाती है दिनाय नहीं कर रहा है, पर ये शास्त्रों से आया है, ये भी बिल्कुल सही नहीं है, तो कर्मा और रींकारनेशन से डिस्क्रिमिनेशन होगा ये ज़रूरी नहीं है तो अपनी शास्त्रों में भी है, अपनी शास्त्रों में अपनी शास्त्रों में भी है, अपनी शास्त्रों में भ लोग काफ़ी लोग ये बहुत left wing के लोग होते, left wing मतलब communism होता है उसमें, socialism, communism ये सब होता है, तो अभी अगर हम देखते हैं कि application जो हुआ है, जब apply करते हैं, तो कई बार miss application होता है उसका, तो अगर हम communism का उधारन देखते हैं, तो सोवियत, रशिया और चाइना इन दोनों में communism का apply किया गया था, और लगबर 70 सालों तक चला ये, 1917 से लगबर 1989 तक, और इसका क्या परेणाम हुआ, इसका परेणाम ये हुआ कि बिना किसी युद्ध के hundred million deaths, कि इतने सारे लोगों के मृत्य हो गई, सरकार नहीं, जो भी राष्ट स्टेट के खिलाफ है, उसका बद कर दिया, तो अभी जो लोग, आज Marxist है, Communist है, Socialist है, और उनको पुछते हैं कि तुम्हारे तत्वग्यान से, तुम्हारे ideology से इतने सारे लोगों के मृत्य हो गई, तो वो कहे गए तुरंद की, स्टालिन लेनिन जो थे, यह Communist नहीं थे, उन्होंने काल-मार्क्सी शिक्षाओं को मिस-अप्लाय किया है, तभी वो यस्टिफाइ कर रहे हैं, यह mis-application है, पर जब कास्ट इस्टिवती नहीं, यह mis-application नहीं है, यही actual teaching है, तो this is a game that can be played both ways, तो यह ऐसी तलवार है, दोनों तरह से कट सकती है, अगर आप उसको इसतमाल करने वाले हों, सानतन धर्म के खिलादा, तो वो आपकी जो ideology उसके खिलाब भी इस्तमाल हो सकता है, पर मुझे सम्हाव मैंने ठीक से उसको पढ़ा तो नहीं, लेकिन in general मेरी understanding बनी थी कि जो caste system है, इसको formally जो है, वो Britishers ने इंडिया में introduce किया, मला यह एक अनकही बात थी, कास्ट सिस्टम पहले, लेकिन Britishers ने proper document के साथ, मैंने एक बार सेध शुदान शुत्रिवेदी जी को स उन्होंने शायद ऐसा कुछ mention किया था कि पहली बार वो किसी नाम बता रहे थे बिटिशर का, कि उसने documented की थी कि 3000 जातियां हैं भारत में, अलग अलग तरीके से, मला जो कुमार हैं इस इस तरीके से तो क्या इसका मतलब यह है कि जो कास सिस्टम है, वो कहीं ना कहीं introduce हो गया था हमारे tradition में, culture में, समय के साथ, लेकिन बिटिशर ने इसको बहुत formalize करके, बहुत ज़्यादा propagate करके, मला इसको एक तरह से पूरा नाम दे दिया कास सिस्टम का, और उसको भेधभाव की तरह सन मातन धर्म के साथ जोड़ने का काम जो बिटिशर ने किया है, ऐसा कुछ है गया, या ऐसा नहीं है, और पहले से जोड़ा बाता है उनके आदमे के आदमे के लिए आज आज आज आज उन्होंने there was no socio-economic disturbance उन्होंने there was no socio-economic disturbance उन्होंने चाहिए संस्कुतिक स्थर्पे धार्मिक स्थर्पे थोड़ा विध्वन्स किया मंदिर को थोड़ा इसको थोड़ा उसको थोड़ा समाज का जो organization था उसको उन्होंने कुछ ज़्यादा interfere नहीं किया उन्होंने यहाँ पे यहाँ पे यहाँ पे इस वर्ण के लोग काम कर रहे हैं वहाँ पे उस वर्ण के लोग काम कर रहे हैं वहाँ पे उस लोग के लोग काम कर रहे हैं उन्होंने का क्या था जहाँ तक हमको taxes मिल रहे हैं ठीक है अभी और कुछ ज़्यादा नहीं हमको क्योंंकि यहाँ इस्लामिक जो लोग थे वह वर्ण के लोग काम कर रहे हैं आज भी बहुत से लोग जो इस्लामिक रुल थे वह भारत में रह रहे हैं तो बृतिश कभी ज़्यादा रोग नॉन रेसिडन्स ही रहे हैं तो बृतिश सबसे पहले चोड़ा सा देश है उसकी population भी बहुत चोड़ी सी है और वहाँ से जब बृतिश से लोग भारत में आते थे उनको लगता था कि ये भारत तो बहुत ही गरम देश है इसमें इतनी सारी बिमारिया है इतनी गर्मी है तो वो जब भारत में आते थे उनको लगता था भारत में जाना एकतसे उनके लिए एक punishment है तो इसलिए क्या था कि अभी इस्लामिक समय में भारत में जो भी पद्धती थी जाती पद्धती हो या जो भी हो जो वरना के अनुसार चल रही थी क्या उसमें भेदबाव था हो सकता है भेदबाव था पर उससे किसी को ज़्यादा प्रभाव नहीं हो रहा था क्योंं क्योंंकि जो अलग अलग वरना के लोग थे वो अलग अलग एरियाज में अपना काम कर रहे थे तो ब्रामहन, चत्रिय, वैश्य, शूद्र ये सब अपने अपनी एरियाज में काम कर रहे थे तो और इसकी कारण क्या था जो इससे functional area सबका अलग था पर जब बृतिश लोग आ गए तो उन्होंने क्या किया socio economic disruption कर दिया क्योंंकि उनकी केवल ये इच्छा नहीं थी कि हमें भारत में राज्य करके भारत से tax दिना है उनको भारत की सारी economic system को बदलना था उनका उद्देश क्या था कि हम अगर ये बृतिश है और ये भारत है तो भारत से हम raw materials वहाँ पर भीजेगे और फिर वहाँ से finish products यहां पर लाएगे और फिर उससे क्या करेगे हम उससे हम बहुत profit करेगे तो भारत में cotton रूई बनाएगे उससे उगाएगे उसको manchester में लेके जाएगे manchester में कपड़े बनाएगे और फिर वह कपड़े भारत में बेचेगे और उससे क्या होगा हमको बहुत profit होगा इसलिए गांधी जी ने खादी चालू किया था कि बोलें कि हम खादी बनाएगे तो यहीं से हम बनाएगे यहीं से हम उगाएगे तो हमारा पैसा जो है वहा है तो अभी ऐसा चेंज करने के लिए उनको भारत के जो socio-economic system था जो आर्थिक सम्रुद्धती थी उसको उध्वस्ट करना बहुत ज़रूरी था उसके बिना उनको ज्यादा फायदा नहीं होता था क्या है भी Muslim लोग जो भारत में आया थे अगर भारत सम्रुद्ध रहेग बर the British लोग सा थे उनको भारत की सम्रुद्धी नहीं चैए थी उनको बिरितन की सम्रुद्धी चाईये थी तो।
इसी लिए भारत को किस तरह से reorganize करना है जिससे कि बिरितन की संस्कुति सम्रुद्धी बढ़ जाये तो वो एक्टसर उनका उद्देस्य था इसलिए उन्हें क्या किया जो social division था यह लोग यहां पर काम कर रहे हैं यह लोग यहां पर काम कर रहे हैं उस सब को उद्वस्थ कर डिया और उसके कारण जो functional system थी जो कारक करने वाल system थी वो उद्वस्थ हो गई तभी भेडभाव जो है वो जादा परकट हो गया परकट हो गया मतलब क्या है जब एक वारणा के लोग यहां पर काम कर रहे है दुसरे वारणा के लोग यहां पर काम कर रहे थी कि सब अपने अपनी जगह में एक तरह से संतुष्ठ है एक तरह से सम्रुद्ध है ऐसे नहीं है कि जो वैशे लोग एशुदर लोग वो बहुत गरीवी में रह रहे थे अपने अपने प्रिस्थिक्योंं सार वो भी रह रहे थे पर जब वो सिस्टिम पुरा उद्वस्थ हो गया उद्वस्थ किया गया तो फिर जब भेदभाव है यह और ज़्यादा उसका परिणाम होने लग गया कि देसी देश दिफरेंस बिट्वीन सेपरेशन और डिस्क्रिमिनेशन यह दोनों अलग नहीं है यह अलग है आसतो में सेपरेशन मतलब तुम यहाँ पर काम करो हम यहाँ पर काम करते है यह ठीक है जरूरत है तो कर सकते है पर उससे जो भेदभाव है कि तुम यहाँ पर काम करी नहीं सकते हो तुम यहाँ पर काम करोगे तो तुम गलत हो तुम बुरे हो यहाँ कब बिद्देमान होने लग गया जब समाज की जो पढ़धती थी वह उद्वस्थ होने लग गया तो कह सकते है नहीं पहले के भी समाज की पढ़धती थी वो बुरी ही थी पर अभी जाती पढ़धती अगर कोई कह रहा है जो अगर कोई कहता है कि कास्ट सिस्टिम और वर्णाश्रम एक ही है कोई ऐसे दावा करता है कि एक ही है तो फिर हम सवाल कर सकते है कि कहीं भी अगर बहुत भेदबाव हुआ है किसी समाज में तो अगर भेदबाव हुआ है तो फिर उससे क्रांटी हुई है जहांबे अगर गरीब लोग यहां पे है और अमीर लोग बहुत उपर है तो अगर यह बहुत भेदबाव रहता है तो फिर गरीब लोग क्रांटी कर लेते हैं Revolution हो जाता है, जैसे French Revolution हुआ था, Russian Revolution हुआ था पर हम देखते हैं, भारत जो था, भारत में हजारों सालों से सम्रुद्धी रही थी Thousands of years there was prosperity, भले ही भारत का 700-800 सालों से मुसल्मान लोग राज्य किया फिर भी भारत सम्रुद्ध रहा, क्योंं, this prosperity came from the socio-economic system, socio-economic arrangement तो अगर जो हम कुछ जातियों के लोग हैं, जो निश्ला मान जाता है, अगर वो लोग इतने दुखी, इतने पीड़ित रहे थे तो फिर उन्होंने क्रांटी क्योंं नहीं की, अगर वो इतने पीड़ित रहे थे, तो जब भारत में अधिकान शुटूप से मुसल्मान राज्य था, तो भी सारे निश्ला मान जातियों के लोगों ने मुसल्मान धर्म क्योंं नहीं अपना लिया उसके पहले भी जब हम 5th century BC देखते हैं, 5th century AD to BC, तो उस समय में बुद्धिजम और जैनिजम काफ़ी था, इस 1000 सालों में जब बुद्धिजम और जैनिजम था, तभी सारे निश्ला मान जातियों के लोगों ने मुसल्मान धर्म क्योंं नहीं अपना लिया पहले इस्लाम के लोग आ आए थे, लगबगों 1700 साल तक उनका राज था, 1700-1800 साल तक कह सकते हैं, तो इस समय में, इस सारा समाज में भारत की जो prosperity थी यह बहुत रही है, तो अगर यह social economic system इतना खराब था, तो लोग इतनी, तो यह समय में बुद्धिजम और जैनिजम राश्टर इतना prosperous क्योंं रहा, लगते कि यह ठीक है, जो नीचे के जाती के लोग थे, उनको कोई options नहीं थे, इसलिए वो सम्रुद्ध था, पर उनको options थे, वो धर्म छोड़ के दुसर धर्म में जा सकते थे, पर फिर भी नहीं गए, तो यह point यह कहने का उद्देश है, कि जो separation था, वो था, पर separation से discrimination, domination, persecution, दुसर लोगों का दंबन करना, दुसर लोगों का बुरा मानना, दुसर लोगों का शोषन करना, ऐसे नहीं था, और जहां तक हम कह सकते हैं कि SBI सरकार का हैरार्की था, कि कुछ जाते हों को उपर मानन कुछ लोगों का बुरा मानना, यह तो ब्रितन में भी था, ब्रितन में था एक उनको जैंट्री कहते थे, जैंट्री थे या उसको aristocracy, वह जो वहाँ पर राजा लोगों होते थे, या जो राज, जैसे dukes, lords, वह गया था, होते थे, और फिर उसके बाद भी जो था, जो अलग-अलग प्रकार के लोग थे, सर्फ कहा गया थे तो अलग-अलग प्रकार के लोग थे, यह ब्रितन में भी था, ऐसे नहीं है कि ये केवल भारत में था, कि कुछ लोग उंचे हैं, और ये भी birth से ही था, कोई aristocrat, कोई duke के family जन्मा है, कोई lord के family, viscount के family जन्मा है, त कोई farmer है, कोई किसान के family जन्मा है, तो उसको किसानी बना रहना पड़े, यही जो system के लिए इसे पॉइंट में बोलना चाहता हूँ, क्योंंकि इस बर्थ-बेस्ट कास्ट सिस्टम था, तो जब वो इंडिया में आये, तो वो उसको भी उसी नजर से देखा और समझा और इसी तरिके से नोंने इसको डिफाइन के और प्रोपगेट करा, तो यहाँ पर भी वो बर्थ बेस्ट का और ज़्यादा इसका प्रचलन आ गया मतलब हाँ पॉस्सिबल है यह, इसलिए क्या था एक है class system और दूसरा है caste system तो अभी class system जो है, वो आज के भी समाज में है, अभी class system अगर आप flight में जाते हो, तो एक economy class है, एक business class है, एक first class है, और उसमें facilities लग लग है, तो अभी जो class system जो for example अभी जो है, economy के आधार पर है, कि इसके आधार कितना पैसा है, उसके आधार पर है, पर इसके पहले जो बाश तो वहाँ पर जो class system था, वो birth के आधार पर था, भारत में जो class system था, वो birth के आधार पर था, मैं जाती पददती में बोल रहा हूं, वरना शरम जो था वो गुणार करम के आधार पर था, तो अभी exactly कब वर्णाश्रम जो था वो caste system में बदल गया और कितना बदला वो कितना वो उसको historical research करना पड़ेगा, so generally unless there is very clear evidence I don’t want to blame all the problems of India on the west, इंडिया में भी this caste system था ये जो जनम के अनुसर भेदबा हो रहा था वो भेदबा पहले भी था, जैसे कि हम देखते हैं कि चेतन चरतामत में उल्लेक आता है कि किसी ब्रामभन पर किसी मलेच्च का पानी भी गिर जाएगा तो उसका ब्रामभन का जात चला जाएगा तो ऐसा उल्लेक था ये प्यूरिटी शुद्धी के अनुसर भेद था वो था पर वो जनम के अनुसर कितना था किस हरत तक था वो कब शुरू हुआ कब परचलित हो गया कब वो स्प्रेड हो गया पर हम ये जानते हैं कि बिरिटिश आने के पहले भी 14, 15, 16 संचुरी से कास करके यो 3 संचुरी जो है 14, 16 संचुरी इसमें भक्ति बहुत स्प्रेड ही बारत में 17, 18 में था पर इन दिन भक्ति बहुत स्प्रेड हुई और भक्ति में जो कास सिस्टेम था उसका बहुत रेफ्यूटेशन हुआ है उसके खिलाफ काफी कुछ हुआ है तो मैं पॉइंट ये है कि हम नहीं हैं कि अगर कोई कहता है सनातन धर्म का मतलब है ये ही है कि ये untouchability है कास सिस्टेम है तो तीक है मान लीजिये पर उसका खंडन इसी सनातन धर्म में ही हुआ है तो उसको eradicate करना ये बिल्कुल न केवल बिल्कुल गलत है पर ये this is horrible ये गुणासपध है वो ये बहुत अच्छे से परभु आपने बहुत अच्छे से क्लैरिफाई करा ये मतलब मुझे at least बहुत अच्छे समझ में आगे और I hope जो podcast देख रहे होंगे उनको भी समझ में आगी कि exactly untouchability कास सिस्टेम का हमारे शास्त्र में कोई reference नहीं है और कहां से और कैसे ये चीज़ प्रियास करना चाहिए लेकिन वो हर एक चीज़ को अपनी स्वार्थ के जश्टी से देखते हैं तो अभी पर वो क्या करें मतलब एक normal इनसान किस तरह से इस चीज़ को क्या reaction हो चाहिए हर कोई अपनी बढ़ास निकाल लेता है बट अभी practically क्या solution क्या इस चीज़ है क्योंंकि मुझे नहीं लगता politicians interested हैं जानने में कि सही क्या है मुझे तो लगता है बिलकि शायद वो जानते हैं लेकिन वो अपने स्वार्थ के जश्टी से देखते हैं एकस्पेल मतलब क्या कि अगर कुछ caste based discrimination है untouchability जो है इसको आजकल के कोई भी धर्मगुरू सुखार नहीं कर रहे हैं और कहीं प्रचलित है तो उसका भी खंडन कर रहे हैं अभी caste system जो है उसका भी काफरी हद तक खंडन हो रहा है तो अभी मैं साथ मैं हैदरबाद में गए था वहाँ पे एक temple of equality बनाया है कि रामानुचारे की जो है रामानुचारे जश्टी संपर्ण महान संतन थे और कैसे उन्होंने जाती की पद्धती का खंडन किया है और उन्होंने कैस तरह से इसके बारे में भक्ति के आधार पर शास्त्रों के आधार पर सबको समानता के बारे में बताये जाया है और यहां भगविता में भगवान बताते है अगर हम देखते हैं नौवे अध्याय के 323 स्लोक में वह कहते है कि भक्ति करता है तो किसी भरण कहा हो किसी का जन्म हो से कुछ फरक नहीं पड़ता है मामि पार्थ व्यापाशुत्या मान भी लेते किसी का जन्म बुरी है पूरों जन्म का कर्म बुरा है जिनने नीचे के जातियों में जन्म हुआ है तो सबका उधार हो सकता है तो जो भ्रांत धारणा है इसका हमें ज़रूर खंडन करना चाहिए तो इसको एकस्पेल करना चाहिए आजकर के समाच से बर्थ बेस डिस्करिमिनेशन और प्रभुपात जी ने ये बहुती स्ट्रॉंगली किया है जो प्रभुपात जी ने खास करके पास्चार देशों मे और वहाँ पे जो लोग जिनको साधारंत है वर्णाक्षम से पूरा बाहर मान जाता था न केवल उनको स्विकार किया पर उनको गुरू बनने का आधर दिया न केवल आधर दिया एक्शली पात्रता दी उन्होंने तो क्या है जो है वह इस तरह से जो discrimination है अगर यो fourth level बताया मैंने कि जो इसके चार चीज़ें बताये थी सनातान धर्मगर्ग क्या आर्थलोग लेते हैं तो चौथा क्या है कि spiritual knowledge कि जो आध्यात्मिक ज्ञान जो है उसका अगर हम और प्रचार करते हैं उसको और समझते हैं और समझाते हैं तो फिर क्या है ये जो expel अपने आप हो जाएगा तो कैसे है कि एक तरह से अलग-अलग भ्यांत धारणाय हैं उनका खंडन करने लगेगे तो अनेक भ्यांत धारणाय हो सकती हैं तो अगर हम को देखना है 3 plus 5 क्या है तो अगर हम 3 plus 5 एट हैं ये प्रस्थापित कर देते हैं तो वो 9 नहीं है 7 नहीं है 11 नहीं है वो अपने आप हो जाएगा तो अगर हम explain करते हैं तो एक तरह से बाकी जब expel हो जाएगा पर कभी कभी कोई भ्यांत धारणा बहुत रहती है उसका हमें खंडन करके ठीक है ये धारणा है पर ये वैदिक शास्त्रों के अनुसार नहीं है इसलिए इनको हमें expel कर देना चाहिए और काफी अभी इसकान के भी काफी भक्त है अभी इसकान ने tribal care ministry चालू किया है जो अलग अलग tribal लोग होते हैं जिनको शादा पहले से उनको ऐसे बताय गया है कि आप नीची की जातियों के हो आप वर्णाफ्शम में नहीं हो उन सब के और out reach हो रहा है उन सब के देखा जा रहा है बहुत से लोग भक्ति में आध्यात्मक के और आ रहे हैं सुकार कर रहे तो ये भ्रांत धार्णा को expel करना चाहिए और कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनको expose करना ज़रूरी है कि उनके ulterior motives उनके जो उद्देश है वह स्वार्थी उद्देश होते है उसको हमें expose करना है तो ऐसे नहीं है कि कोई भी अगर जाती पत्तिति के बोल रहा है तो उनका उद्देश बुरा ही होगा पर कोई अगर ऐसे बोल रहा है वो अग्जान से बोल सकता है या फिर वो एक बुरे उद्देश से बोल सकता है तो अगर कोई एक rational discussion एक तर्कवितर के आलधार पर बात करना मतलब क्या कि जो व्यक्ति है एक तरह से एक सत्य है पर एक कोई गलत बता रहा है अजान के कारण दूसरा गलत बता रहा है उसको वही धारणा जो है उससे उसका फायदा होगा तो अगर अभी caste जो है वो अगर इंडिया में अभी तक alive है तो mostly वो क्योंं है वो vote bank politics के कारण है अभी एक और चीज़ है कि marriage में भी लोग थोड़ा caste का ध्यान रखते है पर कि मुझे जिस चास्ति में जन्म होया उससे चास्ति में शादी करनी है पर यहां क्या है कि this is not so much यहां पर जो हो रहा है वो discrimination नहीं है वो selection है इसमें थोड़ा फ़रक है वो selection मतलब क्या है कि जब कोई विवाह करना चाता है तो फिर वो complicated है किस से विवाह करना चाहिए किस से विवाह नहीं करना चाहिए तो selection के लिए अलग अलग लोग अलग अलग reference point रखते हैं कुछ लोग reference point रखते हैं कि तुम्हार मुझे इस व् earning इतना होना चाहिए या उसके physical attributes ऐसे होने चाहिए तो एक तरह से sexual selection ये biology का ही feature है कि लोग जब हर योनी में जब व्यक्ति किसी को mate को ढूंढ रहा होता है तो कुछ न कुछ criteria यूज़ करते हैं तो अभी जब लोग caste का criteria यूज़ करते हैं उसका उद्देश क्या होता है कि it’s more of न केल उस गुल में जन्म उस जाती में जन्म होना चाहिए पर it’s more of cultural compatibility कि जो इतनी रिवाज हैं जब हमारे घर में अगर लड़की आएगी तो उस रिती रिवाज से पहले से परीचित होगी और अच्छे से ड़ल पाएगी तो वो मेरे खाल से main उसका उद्देश है रहता है exactly तो ये discrimination नहीं है क्योंंकि ऐसे नहीं है कि एक जाती के लोग है उनको कोई partner मिली नहीं रहा है और वो अभी extinct होने को आ गए अगर वैसे हो रहा था उसको discrimination कहते हैं पर वैसे discrimination नहीं है और ये भी क्या है कुछ हद तक है पर ये भी बहुत ज़्यादा नहीं है ऐसे inter-caste marriages हो रहे हैं और ऐसे नहीं कि एक inter-caste marriage हो जाएगा कि सारा समाज उसका खंडन करने के लिए आ जाता है थोड़ा विरोध होगा उस परिवार में विरोध होगा उस community में थोड़ा विरोध होगा और बाद में लोग सुखार भी कर लेते हैं तो marriage के कारणे इतना कास्ट का consciousness नहीं है थोड़ा है मेंलि वोड़ बैंक पॉलिटिक्स का कारणे है पॉलिटिक्स में क्या है लोग सुखते है कि मैं इस जाती से हूँ और मुझे इस जाती के वोट्स मिलने वाले मैं इसको फेवर करूँगा उसको फेवर नहीं करूँगा और इसका सबसे बड़ा significant चीज़ का है ये वोड़ मतलब क्या है यो left ideology जो है leftist ideology क्या है the way to end past discrimination is present discrimination ही कम्यों के कहते है past discrimination हुआ है और फिर उसको अगर हमें end करना है तो उसके end के का क्या करना चीज़ है हमको present discrimination मतलब अभी जो भी उंची आत्यों के लोग है उनके खिला उनको बढ़ा सुविधाय पास में मिल लिए तो अभी क्या करना चाहिए उनको सुविधाय नहीं देनी चाहिए बाकी लोगों को सुविधाय देनी चाहिए ठीक है आप उनको सुविधाय दे सकते है पर अगर सही जाती के लोग है जिनको पहले भूहितबाव हुआ है तो उनमें से जो गरीब लोग है उनको आप शिक्षन की सुविधा दो उनको आपको नौकरी की सुविधा दो पर वो कहते हैं नहीं हमको किस आधार पर चाहिए हमको बर्थ के आधार पर चाहिए तो अभी जो present discrimination क आ रहा है जो हिंदु धर्मा का खंडन कर रहे है उनसे आ रहा है तो वो जान बुच्चा और अला अला अने और क्योंंकि ये इनका प्रभाव इतना जादा है भारत में तो अभी जो अनेक जातिया हैं वो भी कहते हैं कि हमको भी इसमें इंक्लूड कर लो अधर ओबीसी में कोई एसी जातिया भी है काफ़ी पॉर्वर्फुल है, वो शक्तिशाली है, वेल्डी है, पर ये भेदभाव इतना बढ़ गया है क्योंंकि हमकों भी इसमें डाल दो ताके हमकों भी सुविधा मिल जाएगी. तो अगर भारत में अभी भेदभाव है, वो हिंदु धर्म से, सानातन धर्म से नहीं आ रहा है, वो जो लोग सानातन धर्म की निंदा करते हैं, उनसे ही आ रहा है. तो किसी चीज़ को इराडिकेट करना है, तो जो डिस्क्रिमिनेशन को बनाए रख रहे हैं, उनको इराडिकेट करना चाहिए, इस विचार धारा उसको इराडिकेट करना चाहिए. और सानातन धर्म में, अन्त में ही बताए गया है कि हर एक व्यक्ति आत्मा हैं. क्योंं हर एक व्यक्ति आत्मा हैं, तो आत्मा के स्थर पर हर एक व्यक्ति बगवान का आंपुष्य है. सर्व योनीशु कौन्तेय मूर्तय संभवन्तिय, तासां ब्रह्ममद् योनिर आहं बीचे प्रधापिता।
तो अगर आप विचार धारा जाना चाहिए, तो वो सानातन धर्म को इराडिकेट करने से नहीं होगा. तो अगर विचार धारा जाना चाहिए, तो वो सानातन धर्म को इराडिकेट करने से नहीं होगा. तो उसको अगर सही में इराडिकेट करना है, तो हमको क्या चाहिए? स्पिरिच्वल नौलेज़ चाहिए। तो भगविता में बताये गया है कि पाथशुआ अध्याय के अट्रावेशलोक में विध्याविद्ने संपन्ने ब्राम्मने गविहरस्तिनी शुनी चाहिए वश्वपाकेच पंडितः समधर्शिना. तो अगर कोई सनातन धर्म को वास्तों में समझता है, उसका अनुशिलन करता है, तो तभी भेदभाव का अंठ होगा. क्योंंकि ऐसा पंडित हर एक व्यक्ति को, ये पंडित धर्म से नहीं बताया जा रहा है, पंडित विद्वत्ता से बताया जा रहा है, अध्यात्मिक ज् को ये सो गुणों से बता जा रहा है कि ऐसा पंडित जो है, वो हर व्यक्ति को वास्तों में समान द्रुष्टिक देखेगा, और उससे ही भेदभाव का अंठ हो सकता है. तो अगर कोई सही में भेदभाव का अंठ करना जाता है, तो सनातन धर्म को प्रस्थापित करो, उससे ही भेदभाव का अंठ हो जाएगा. अगर कोई सही में भेदभाव का अंठ हो जाएगा, तो सनातन धर्म को प्रस्थापित करो, उससे ही भेदभाव का अंठ हो जाएगा. हम बार-बार चितनचन पभुजी से बात करते हैं, मैं उनका बहुत अच्छा चैनल है, और उसमें पभुजी सोचल इशुस के उपर, स्पिरिशलिटी, जो भी स्पिरिशलिटी है, अध्यातम की सही इंडर्स्टेंडिंग क्या है, उसके उपर लगातार वो बात करते हैं, हजारों वीडियों, लेक्शर्स हैं, आप उनको जाके प्लीज देख सकते हैं, पभुजी का जो चैनल है, मैं वो टाइटल में, डिस्क्रिप्शन में, और फ़र्स्ट कमेंट में दूँगा, आप एक बार प्लीज उसको जाके देखेगा, बहुत करते हैं पभुजी, और मैं आपसे फिर से बात करता हूँ, पिर किसी अगले मुद्दे पर, बहुत करते हैं, बहुत करते हैं, हरे किष्णा, हरे किष्णा,