Hindi, A new you for the new year Mira Road, Mumbai Youth meeting – Chaitanya Charan
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हरे कृष्णा तो आज नए वर्ष के इस अवसर पर आप सबका स्वागत है। तो मैं हर साल जहां पर भी होता हूं दुनिया के किसी जगह पर वहां पे कोई ना कोई तो न्यू ईयर पे न्यू ईयर रेज़ोलशंस पे हम कुछ चर्चा करते हैं। तो मैं आज सोच रहा था कि मैं यहां पर कुछ लिख के कुछ एक्सप्लेन करूंगा। तो आज हम साधारणतया लोग न्यू इजियर रेजोलशंस के बारे में बात करते हैं और रेजोलशंस महत्वपूर्ण है पर आज हम न्यू ईयर कन्विक्शंस के बारे में बात करेंगे कन्विक्शन मतलब क्या विश्वास कि जो रेोल्यूशन होता है वो मैं क्या करूंगा मैं ऐसे करूंगा ऐसे नहीं करूंगा मैं यह बनूंगा पर कन्विक्शंस क्या है ये है हमारी जो श्रद्धा होती है हमारी जो कि जो हमारे खुद के बारे में संकल्पनाएं होते हैं उसके बारे में हम चर्चा करेंगे तो आप में से कुछ लोगों को ये प्रभुपाद जी के ने जो अमेरिका जब गए थे तो उन्होंने एक गीत गाया था मार्किने भागवत धर्म तो उसका आप में से कितने लोगों के पास वो किताब है अभी आप यहां पर भी डिस्प्ले कर रहा हूं कुछ ही लोगों के पास है ओके वी डिस्ट्रीब्यूट ऑल कॉपीज प्रभु ओके तो यह किताब आप अभी पढ़ सकते हैं और आपके और हम उसमें से कुछ चर्चा करेंगे एंड यह आपको देखने के लिए है, पढ़ने के लिए उसके बाद में यू कैन रिटर्न द बुक इफ यू वांट और यू कैन बाय द बुक इफ यू लाइक। तो अभी यहां पे इसका नए साल से संबंध क्या है कि हम सब चाहते हैं कि नए साल में हम कुछ नया करें। तो अभी जो भी कुछ नया करें, कुछ नया बने। इसमें हम देखते हैं तो अभी श्रील प्रभुपाद जी जो थे वो जब अमेरिका गए तो वो इतनी नई चीज कर रहे थे कि इसके पहले उन्होंने कभी ऐसे किया ही नहीं था। इसके पहले उनके ना केवल उन्होंने नहीं किया था। किसी ने ऐसे नहीं किया था। क्या नया था? प्रभुपाद जी मान लीजिए भारत है। मैं भारत का नकाशा नहीं ड्रा करूंगा यहां पे। यह अमेरिका है। तो अभी वास्तव में काफी दूर है प्रभुपाद जी जहाज से अमेरिका गए और उस समय वह 70 साल के थे। साधारणता कुछ नया करना होता है तो नौजवान जवान होते हैं तो लोग नया करते हैं। जो जब थोड़ा उम्र ज्यादा हो जाता है तो साधारणत लोग सेटल होते हैं। ठीक है मैं यहां पे जी रहा हूं। और प्रभुपाद जी इसके पहले भारत से भी बाहर नहीं गए थे। बांग्लादेश नहीं गए थे, बर्मा नहीं गए थे। कुछ बाहर जैसे श्रीलंका ऐसे समा यहां पर संस्कृति थोड़ी सिमिलर है। वहां पर भी नहीं गए थे। तो अमेरिका तो पूरे विपरीत है। और वहां पर जब प्रभुपाद जी गए तो साधारणत हम कहीं अभी न्यू ईयर पर वेकेशन होता है तो लोग कहीं टूर पर जाते हैं तो टूर पे जाते हैं तो पहला क्या है पैसा सेविंग करते कि पैसा होना चाहिए जाने के लिए प्रभुपाद जी के पास कुछ पैसा नहीं था उनके पास केवल ₹40 थे और वो ₹40 भी ऐसे थे कि उस समय उसे कोई कीमत नहीं थी क्यों क्योंकि अमेरिका में कोई भारतीय थे ही नहीं भी इसलिए इंडियन करेंसी को कन्वर्ट करके वहां पर मिलने का संभावना भी बहुत कम था और प्रभुपाद जी जब 1968 में वापस आए भारत तो वही ₹40 वापस ले आ गए। वो खर्च भी नहीं किए उन्होंने तो बिल्कुल पैसे के बिना गए थे और अमेरिका में किसी को जानते भी नहीं थे वहां पे परदेश में। तो अभी इतना कठिन कार्य करना यह एक बहुत बड़ी चुनौती है और ऐसी चुनौती का सामना करना जो किस चेतना में थे तो प्रभुपाद जी एक तरह से ज्योग्राफिकली एक जगह से दूसरे जगह गए थे तो हम चाहते हैं कि हमारा जीवन भी एक जगह से दूसरे जगह पर जाए अभी हम सब आप सब तो जवान हो आपका सारा जीवन आपके आगे है और जीवन में क्या करना है कैसे जो भगवान ने हमको भेंट दिए हैं क्या टैलेंट्स दिए हैं इंटरेस्ट दिए हैं उनको डेवलप करना है उनसे कुछ करना है कुछ बनना है ये सब हमारे के जीवन में एक चुनौती के रूप में होता है। तो अभी हमको लगता है अरे कल क्या होगा? नए साल में क्या होगा? तो कुछ अस्पश्यता होती है। तो अभी थोड़ा स्लो करते हैं थोड़ा सा। थैंक यू। तो जब ऐसी अस्पश्यता होती है तो मैं आज तीन चीजों के बारे में देखेंगे हम। हम प्रभुपाद जी की प्रार्थना देखेंगे तो किस तरह से वो कुछ नया करने के लिए निकलते हैं तो क्या उनके पास होता है और वह चीजें अगर हमारे पास आ जाएगी तो कैसे हम भी कार्य कर सकते हैं। समस्याओं का सामना कर सकते हैं। चुनौतियों को स्वीकार कर सकते हैं। जो क्षमताएं हैं उनको डेवलप कर सकते हैं। तो उन सब की चर्चा आज हम करेंगे। तो जो गीत है इसमें से कुछ कुछ चीजें हम गाएंगे और फिर उसके बारे में चर्चा करेंगे। तो एक लाइन आप गा सकते हैं आप पहला लाइन जो है यहां पर आप अगर किताब है आपके पास तो आप 12व पेज पर जा सकते हैं। तो उस किताब में हमने क्या किया है कि क्या अभी हर एक जो लाइन है इसमें प्रभुपाद जी का जो गीत है वो यहां पर उसके हाथ जो अनेक मंदिर है विश्व भर में उन सब का एक सुंदर चित्र है। प्रभुपाद जी प्रार्थना करते हुए भाव है। वहां पर और फिर जो बंगाली गीत है उसको इंग्लिश पोएट्री में भाषांतरित किया है। फिर उसके आधार पर एक पेज की प्रार्थना है छोटी सी। तो हम एक उसमें से कुछ कुछ प्रार्थनाओं को पढ़ेंगे और जो गीत में क्या बताया जा रहा है? थोड़ा स्लो कर देना। थैंक यू। तो सबसे पहले प्रभुपाद जी क्या बोलते? तीन जो श्लोक है इसमें से देखेंगे। उसके आधार पर कुछ चर्चा भी करेंगे। तो पहला जो है बोरो कृपा कोयले कृष्ण अधमेर प्रति आपने बहुत कृपा की है। कृष्णा इस जीव अधम जीव के प्रति तो इसको इंग्लिश पोएट्री में ट्रांसलेट किया है। सच इमस मर्सी हैव यू शोन ओ कृष्णा अपॉन दिस सोल फॉलन एंड फॉललोन तो पहली पंक्ति आप गा सकते हैं। पहली जो पंक्ति है एक पंक्ति सिर्फ हरे कृष्णा हरे कृष्णा
गुरु कृपा कुल कृष्ण अधा मेरा प्रति गुरु कृपा कृष्णा राधा मेरा प्रति थ्री टाइम्स
गुरु कृपा कृष्ण अध मेरा प्रति
बोलो कृपा कर कृष्ण अध मेरा प्रति बोलो कृपा को कृष्ण अध मेरा प्रति बोलो कृपा को कृष्णा अध मेरा प्रति
थैंक यू तो यहां पे लेट मी ट्रेजर द अपॉर्चुनिटी इवन व्हेन देयर इज नो फैसिलिटी। यह भाव है। तो कोई पढ़ना चाहेगा यहां पे पहला पैराग्राफ जो है आपके किताब में देख सकते हैं यहां। माइक है हमारे पास। दूसरा बाय एनी चांस?
डू यू हैव अ सेकंड माइक बाय एनी चांस?
कोई पढ़ने के लिए?
आप पढ़ सकते है। आपके गले में माइक है? ओके। यस, प्लीज।
माय डियर लॉर्ड, हाउ स्टनिंग इज द कॉन्शियसनेस ऑफ़ द थिंग्स डिवोटेड टू यू। एस सी शीला प्रभुपाद हु डिक्लेयर्ड दैट ही रिसीव्ड इन इमस मर्स फ्रॉम यू येट टू बी एन ऑर्डिनरी आई नो मर्स वििबल ही स्टैंड्स द लोन नो फॉलो अकंपिंग हिम नन वेटिंग नॉन अवेटिंग हिम ही हैज़ नो इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट ह मटेरियल मीन्स आर ऑलमोस्ट नथिंग जस्ट ₹40 द वन द ओनली रिसोर्स ही पोज़ेस ह ओन बॉडी हैज़ एंड टू हार्ट अटैक ऑफ सक्सेसिव लाइट ड्यूरिंग ह बॉडी
यस तो अभी आप कल्पना कीजिए कोई व्यक्ति अकेला परदेश में गया है। उनको रास्ते में हार्ट अटैक हो गया है। तो पहले जब उतरेंगे तो शायद कहीं अस्पताल है कहीं मेडिकल केयर देखना चाहिए। ये बहुत गड़बड़ हो गया है। बहुत गलत हो गया है। पर पहली चीज प्रभुपाद जी क्या कह रहे हैं? बोरो कृपा कोई ले कृष्णा। आपने बहुत कृपा की है मुझ पर। कैन यू स्विच इट ऑफ? मिनिमम है ये। इज दिस मिनिमम?
कैन स्विच इट ऑफ? सो तो बोरो कृपा कोई ले कृष्णा तो बहुत कृपा की है आपने मुझ पे तो साधारणता क्या होता है हमारे जीवन में तो मैं तीन चीजें देखने चर्चा करूंगा आज कि कैसे अगर नए साल को हम नया बनके प्रवेश करना है तो हम तीन चीजें देख लेते हैं ए सीटी क्या करना है हमको सबसे पहले है एप्रिशिएट अप्रिशिएट मतलब क्या कि प्रभुपाद जी देख रहे हैं एक तरह से उनके पास कुछ भी नहीं है। पर फिर भी वो कह रहे हैं कृष्णा आपने मुझ पर बहुत कृपा की है। तो ये क्या कृपा है? प्रभुपाद जी क्या होता है कि हमारे जीवन में अगर हम जीवन में आगे बढ़ रहे हैं तो हमारे जीवन में हम कह सकते हैं कुछ चीजें नेगेटिव होती है। कुछ चीजें पॉजिटिव होती है। अभी कुछ-कुछ लोगों के जीवन में ऐसे होता है कि हम कह सकते हैं कि 90% नेगेटिव है, ओनली 10% पॉजिटिव है। कुछ-कुछ लोगों 90% पॉजिटिव है, 10% नेगेटिव है। पर क्या सबके जीवन में कुछ अच्छा होता है, कुछ बुरा होता है। अभी भारत में आए, हम टीवी देखते, हम अमेरिका देखते हैं। लगता है अमेरिका में सब ऐशो आराम है, बहुत पैसा है। सत्य एक तरह से है। पर वहां पे भी बहुत कुछ गलत होता है। मैं अमेरिका में एक स्कूल में लेक्चर दे रहा था तो उसके बाद में मैं उसके प्रिंसिपल से बात कर रहा था कि व्हाट इज द मेजर प्रॉब्लम ओवर हियर? तो वो बता रहे थे कि जैसे है कि जहां भारत में अगर होते हैं हम कोई दो बच्चे मिलते हैं तो उनसे पूछते तुम्हारे तुम कहां रहते हो? तुम्हारा घर कहां है? साधारणता सवाल पूछेंगे। पर अमेरिका में जब स्कूल में बच्चे मिलते हैं तो वह सवाल क्या पूछते हैं? तुम किसके साथ रहते हो? अपनी मां के साथ या अपने पिता के साथ? क्या मतलब है कि इतना उसमें सेपरेशन है लोग जॉइंट जॉइंट फैमिली छोड़ दो न्यूक्लियर फैमिली है वो न्यूक्लियर का भी फ्यूजन हो गया है पूरा न्यूक्लियस का भी टूट गया है वो अभी तो जो बच्चे होते हैं बचपन से बहुत अकेलापन महसूस करते हैं और फिर वहां पे शारीरिक स्तर पर सुविधा होती है पर मानसिक स्तर पर बहुत अकेलापन होता है तो हर जगह पर कोई अच्छा है कुछ बुरा है तो अभी हम किस पर जोर देंगे? या तो हम जो हमारे जीवन में सही है उसको देख सकते हैं या हमारे जीवन में जो गलत है उसको देख सकते हैं। तो अभी प्रभुपाद जी के पास कुछ भी नहीं है। फिर भी अगर हम प्रभुपाद जी के प्रति देखेंगे तो हम कह सकते हैं जैसे मैं वो बोला था कि वो अकेले आए हैं। उनका शरीर भी अभी ठीक नहीं है। उनका पैसा नहीं है। तो क्या हम कह सकते हैं कि उनके के लिए जो 99% नेगेटिव है। कुछ भी नहीं है उनके लिए काम करना। कोई साधारण था हमने जो जीवन में किया है उस पर हमें विश्वास आता है। अच्छा मुझे 10वीं में अच्छे मार्क्स थे। 12वीं में अच्छे मार्क्स थे तो अभी मैं आईआईटी में जाऊंगा तो आईआईटी में अच्छा करूंगा या नीट में मैं अच्छा नीट में अलग-अलग पिछले एग्जाम में अच्छा किया है तो अभी मैं अच्छा करूंगा। तो पहले यश मिला है तो भविष्य में हम यश को अपेक्षा कर सकते हैं। पर अगर अभी प्रभुपाद जी ने भारत में प्रचार करने का प्रयास किया है। लगभग 40 सालों से वह प्रचार कर रहे हैं और फिर भी कुछ हुआ नहीं है। ज्यादा यश नहीं मिला है। और फिर भी उन्होंने क्या अमेरिका जाने का योजना बनाया है और जब अमेरिका गए हैं तो अभी एक तरह से उनका पीछे से बैकिंग कुछ भी नहीं है। पर फिर भी क्या है? एक सकारात्मक भाव है। तो प्रभुपाद जी के पास अगर फैसिलिटी के रूप में देखेंगे तो जीरो फैसिलिटी है। पर वह कृतज्ञ किस लिए है कि उनको बस एक अपॉर्चुनिटी मिल गया है। एक कम से कम अपॉर्चुनिटी तो है। क्या है? सुविधा नहीं है पर कम से कम एक मौका तो है। कि उनके गुरुदेव ने उनको बताया था कि आप जाकर पाश्चात देशों में प्रचार करो। तो अभी जीवन भर उन्होंने प्रयास किया था। अंत में अभी उनको एक मौका मिल गया है उसके लिए। और वह मिल गया है। इसी के लिए वह कृतज्ञ है। बोरो कृपा कृष्णा। ये जो भाव है कि हम सब आजकल की दुनिया में खास करके सोशल मीडिया का प्रभाव इतना है कि हम हमेशा दूसरों से खुद की तुलना करते रहते हैं। और अरे इसके पास यह है, इसके पास यह है, इसके पास यह है। और जितना हम देखते हैं, दूसरों को तुलना करते हैं, हमको लगता है अरे मेरा जीवन इतना अच्छा नहीं है। खास करके टीनएजर्स जो होते हैं जितना यह अनेक सोशल साइकोलॉजिस्ट ने रिसर्च किया है। जितना सोशल मीडिया ज्यादा यूज करते हैं सोशल मीडिया बुरा नहीं है। पर जितना ज्यादा यूज करते हैं उससे क्या होता है? इनसिक्योरिटी बढ़ जाता है। डिप्रेशन बढ़ जाता है। वो क्या होता है? दूसरों के जीवन को हम देखते हैं अरे इसने ऐसे ये किया। इसने यहां पे गया। उन्होंने कुछ फोटो दूसरे दिन फोटो लाया। उसको इतने सारे लाइक्स मिले। मैंने फोटो डाला कुछ लाइक्स मिले ही नहीं मुझे। क्या हो रहा है? वो उससे क्या होता है? बहुत इनसिक्योरिटी बढ़ जाता है। तो अभी हमारे जीवन में क्या सही है? ये जो देखना है, ये बहुत महत्वपूर्ण है। ऑलवेज हैव एन एप्रिशिएटिव एटीट्यूड। ठीक है? कोई और विद्यार्थी हो गए जो उनका उनकी याददाश्त हमसे ज्यादा अच्छी है। या देर लुक्स आर बेटर देन आवर्स। या उनके परिवार और अमीर है। ठीक है। ये सब हो सकता है। पर हमारे जीवन में क्या सही है। वो देखेंगे तो वह हमारा फाउंडेशन है। और अगर कुछ बदलना है हमको कि रो हर हर रोज एट द स्टार्ट ऑफ द डे अप्रिशिएट व्हाट इज राइट इन योर लाइफ ठीक है आज मेरा स्वास्थ्य अच्छा है आज मैं भी उठा एक नया दिन मेरे सामने है मैं इसमें कुछ करूंगा भगवान कहते हैं 17व अध्याय में 16व श्लोक में कि मन प्रसाद सौम्यत्वम मन को संतुष्ट रखना है और संतुष्ट कैसे रहेगा रहेगा वो सकारात्मक भाव से। तो यह जो है सकारात्मक भाव मतलब क्या है? सिर्फ पॉजिटिव थिंकिंग नहीं कर रहे। यहां पे हम यह देखना कि मेरे जीवन में जो अच्छा है वो भगवान की योजना से है। और मेरे जीवन में जो अच्छा नहीं है उसके बारे में भी भगवान अनजान नहीं है। भगवान जानते हैं और उसके थ्रू भी भगवान की कुछ योजना है मेरे लिए। जब यह भाव हम रखेंगे तो जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थिति आएगी तो यह उसको हम परिवर्तन कर सकते हैं हमारे जीवन में। हां जब मैं यहां पर आया तो शायद आपने देखा होगा कि मुझे चलने के लिए क्रचेस लगते हैं। तो जब मैं एक साल का था तभी हम चंद्रपुर नाम का एक शिला है भारत महाराष्ट्र में वहां पर हम रहते थे। उस समय वो काफी अंडर डेवलप्ड था और वहां पर मेरी मां मुझे पोलियो का वैक्सीन देने के लिए ले ले गई। पर क्योंकि वो जो शहर था उसमें पावर सप्लाई इतना वो अंडर डेवलप था कभी-कभी इलेक्ट्रिसिटी चला जाता था तो पिछले रात वहां पे वो जो क्लीनिक में था वो इलेक्ट्रिसिटी चला गया था जब क्लीनिक में इलेक्ट्रिसिटी चला गया ना तो वो अटेंडेंट ने देखा ना वो डॉक्टर ने देखा और वो फ्रिज में जो वैक्सीन रखे थे वो फ्रिज का टेंपरेचर बढ़ गया और जो वैक्सीन है उसमें जर्म्स जो है वो ज्यादा बढ़ गए उसके कारण और फिर वो वैक्सीन जब मुझे दिया गया तो पोलियो टालने की जगह पर उसी के कारण पोलियो हो गया। अभी मुझे याद नहीं है। मैं एक साल का था। मुझे बताया जाता है कि मैं चलना सीख रहा था और तभी मैं गिर गया और वापस कभी नॉर्मली चल नहीं पाया। पर मेरी पहली याद जो है मैं ढाई तीन साल का था और तभी कोई दूर की रिश्तेदार हमसे मिलने आई थी और वो मेरी मां को सांत्वना दे रही थी। तुम्हारे बच्चे के साथ पोलियो पोलियो हो गया। बहुत बुरा हो गया ये। तो मेरी मां के वचन अभी तक मुझे याद है। वो कह बड़े शांति से काम काम ली कॉन्फिडेंटली क्लियरली उन्होंने कहा कि जो भी शारीरिक स्तर पर कमी होगी इसको भगवान उसे बौद्धिक स्तर पर दे देंगे। तो मां मेरी मां ने ये क्यों बताया मुझे पता नहीं। जो भी कारण हो सकता है या उस उम्र में उन्हें कुछ बौद्धिक बौद्धिक लक्षण दिखाए थे या ये उसकी आशा थी या उनके प्रार्थ प्रार्थना थी उनके आशीर्वाद थे जो भी है वो मेरे साथ रहा मुझे और उसी कारण शारीरिक स्तर पर तो मैं ज्यादा कुछ खेल खेल कूद नहीं कर सकता था पर पढ़ाई में अच्छा था थोड़ा बहुत याद अच्छा आता था मैं जो भी पढ़ता था उसको आर्टिकुलेट कर पाता था अच्छी तरह से और फिर मैं पढ़ाई में आगे बढ़ने लग गया और फिर हमारे नेबरहुड में एक लड़का था वो बहुत बहुत तंदुरुस्त था। एथलेटिक्स में बहुत अच्छा था। सर खेलकूद में अच्छा था वो। और फिर वो क्या करता था? वह क्योंकि वो खेलकूद में इतना अच्छा था। मैं खेल कूद में जीरो था। तो कई बार वो मेरे मजा उड़ाता था। तो लंगड़ा वगैरह बोला करता था। तो मुझे तो गुस्सा नहीं आता था। आई वास मोर अनोइड देन इरिटेटेड और हर्ट। और अनॉइड हो जाता था। तो हमारा संबंध इतना अच्छा नहीं था। तो एक दिन मेरी मां ने मुझे बुलाया और कहा कि उसकी मां उनसे मिलने आई। थी और वो बोली कि वो जो है वो मैथ्स में स्ट्रगल कर रहा है थोड़ा। और मैं मैथ्स में अच्छा था। तो मुझे तभी समझ गया कि ये कहां जा रहा है कन्वर्सेशन। मैं सिर हिलाने लग गया। तो वो बोले कि उसकी मां ने मुझसे कहा है कि तुम उसे मैथ्स में थोड़ी मदद कर दो। बोला मैं नहीं करने वाला हूं। तो मेरी मां ने कहा नहीं वो हमारे पड़ोसी है। और वो तुम्हारा मित्र है। बोला मैं सिर हिलाने वो तो मेरा मित्र बिल्कुल नहीं है। फिर भी मेरी मां ने बोला नहीं तुम्हें मदद करनी चाहिए। तो फिर उसको मैं उसके साथ बैठा उसको मैथ्स समझाने लग गया और जब उसको बेसिक मैथ्स था उस समय का समझा रहा था तो 10-15 मिनट उसके साथ बैठा और फिर मुझे एहसास हुआ कि उसके शरीर के उसके सिर के अंदर कुछ था ही नहीं। मतलब क्या है कि वो समझ ही नहीं पा रहा था। जैसे उसका हाइट उस समय उसके आईक्यू लेवल से ज्यादा था। तो एक तरह से मुझे उस पर हंसी आ रही थी और मुझे लगा था उस पर हंस हूं मैं पर किसी चीज ने रोक दिया मुझे उस समय और फिर मैंने सोचा कि अभी देखा कि मुझे एक शारीरिक स्तर पर कमी है और उसके कारण वो मुझ पर हंस रहा है मेरी शारीरिक स्तर पे जो कमी है वो सबको दिखती है पर किसी के बौद्धिक स्तर पर कमी होगी तो दिखती नहीं है पर जैसे उसका एक मेरा एक लिमिटेशन है उसका भी एक लिमिटेशन है और मैं मेरे लिमिटेशन के साथ मैनेज कर रहा हूं और उसका जो लिमिटेशन उसके साथ वह मैनेज कर रहा है। तो क्या है सबके जीवन में कुछ सही है कुछ गलत है। तो हमें हमारे जीवन में यह एक सबसे बड़ा डिसीजन करना होगा कि क्या सही है उस पर मैं जोर दूंगा या क्या गलत है उस पर मैं जोर दूंगा। सबको लगता है कभी-कभी कि मेरे जीवन में कुछ अनफेयर है। अनफेयर मतलब क्या? कुछ सही नहीं। है कुछ अन्याय हुआ है मेरे साथ बुरा हुआ है तो पर कुछ फेयर भी है तो लाइफ जो होता है उसको कह सकते हैं लाइफ इज फेयरली अनफेयर फेयरली अनफेयर का मतलब क्या है कि कुछ अच्छा होगा और कुछ बुरा होगा और किस पे हम जोर देने वाले हैं यह हमारा फैसला अगर हम जो फेयर है उस पे जोर देंगे तो हमारा जीवन अच्छा जाएगा जो अनफेयर है उस पे जोर देंगे तो हमारा जीवन बुरी दिशा में जाएगा। घृणा होगी, नफरत होगी, गुस्सा आएगा, डिप्रेशन हो जाएगा। ये सारे नकारात्मक भाव थे। जब अन जो किस तरह से मेरे जीवन में सब कुछ अनफेयर है उस पे हम जोर देते हैं तो क्या होता है? ये जो अनफेयरनेस पे जोर देते हैं। अगर ये अंदर आता है या यह बाहर जाता है? बाहर आता है तो उससे एग्रेशन होता है। मतलब जिसके साथ अच्छा है उसके साथ इतना अच्छा है। ऐसे क्यों है वो? भाव से हमको गुस्सा आ जाता है हम और ये अंदर जाता है तो उससे डिप्रेशन हो जाता है। अरे सारी दुनिया दुनिया मेरी किस्मत ही फूटी है। सब कुछ बुरा होता है मेरे साथ और इस तरह से हम नकारात्मकता में फंस जाते हैं। तो जो नए जो हमारे नए नई साल की हम शुरुआत कर रहे हैं। तो क्या है? लेट्स स्टार्ट बाय इसे प्रभुपाद जी अप्रिशिएट कर रहे हैं। तो यहां पर अगला कोई पैराग्राफ सकता है कोई इनसवेबल लॉ सिंपली द फैक्ट ही हैज़ रीच अमेरिका आफ्टर दैट जर्नी ही नाउ हैज़ अ चांस टू फुलफिल स्पिरिचुअल मास्टर इंस्ट्रक्शन टू शेयर विथ द वेस्टर्न वर्ल्ड दो ही हैज़ नो फैसिलिटी टू कैरी आउट द एडमिशन ही इज़ प्रोफाउंडिली ग्रेटफुल दैट एटलीस्ट अपर्चुनिटी
हम फैसिलिटी नहीं है पर अपॉर्चुनिटी तो है और उसके बारे में उनका सका भाव है। तो इस तरह से प्रभुपाद जी का उदाहरण है। अभी हमारे जीवन में नया हम कई बार अपेक्षा करते हैं कि मेरे जीवन में कुछ अच्छा होगा। मुझे कुछ अच्छे कॉलेज में एडमिशन मिल जाएगी। कुछ अच्छे लोग मेरे मित्र बन जाएंगे। किसी अच्छे व्यक्ति से मेरा रिश्ता हो जाएगा। मुझे अच्छे कंपनी में नौकरी मिल जाएगी। जाएगी। हम चाहते हैं, आशा करते हैं, शायद प्रार्थना भी करते हैं कि मेरे जीवन में कुछ अच्छा हो होगा। पर क्या है कि मेरे जीवन में अभी अच्छा क्या है वो अगर हम नहीं देखना देखना सीखेंगे तो जो अच्छा होगा भी वो देखेंगे अच्छा होगा। फिर अरे उसके साथ मेरे साथ अच्छा क्यों हुआ? और तुलना करते हुए वो अच्छे को हम एप्रिशिएट नहीं कर पाएंगे। तो इसीलिए एप्रिशिए िएट करना है कि जो मेरे जीवन में अच्छा है उसको एप्रिशिएट कीजिए। तो शायद आज आप न्यू ईयर के बाद जाओगे तो तीन चीजों का लिस्ट बनाएं जो आपके जीवन में अच्छा है। अप्रिशिएट कीजिए उनको और या उसको इंग्लिश में कहते हैं काउंट योर ब्लेसिंग्स। पर काउंट योर ब्लेसिंग्स ये महत्वपूर्ण है। पर उसके बाद में एक और चीज आता है। कैन वी सिंग दिस लाइन वंस अगेन वही लाइन गुरु कृ कृपा कुल कृष्ण आधा मेरा प्रति बोलो कृपा कृष्णा राधा मेरा प्रस बोलो कृपा कर कृष्णा अधा मेरा प्रति कृपा कर ले कृष्णा अधा मेरा प्रति तो अभी हम क्या करेंगे जो श्लोक है इसकी चर्चा करेंगे तो कुछ कुछ श्लोकों को हम गाएंगे कुछ कुछ समय हमारे पास कम है तो की लागी अनिले हेता कोए बे गति व्हाई हैव यू ब्रॉट मी टू दिस प्लेस नाउ डू वि मी एस सूट्स योर ग्रेस यहां पे अमेरिका में आप मुझे लेके आए हो क्या योजना है आपकी प्रभु मुझे पता नहीं है जो आप करना चाहते हैं वो मेरे साथ कर दो अभी हम क्या आप मेरे पीछे दोहरा सकते हैं ये? व्हाई हैव यू ब्रॉट मी टू दिस प्लेस? व्हाई हैव यू ब्रॉट मी टू दिस प्लेस?
नाउ डू वि मी एस सूट्स योर ग्रेस। नाउ डू वि मी एस योर ग्रेस।
सो आ किचु कार्ज ततबे ए अनुमाने किचुबे ए अनुमाने
यू मस्ट हैव सम पर्पस। आई हमली यस सम हिडन एम इन दिस वाइल्डरनेस। प्रभुपाद जी बोल रहे हैं कि यहां पे आप लेके आए हो मुझे तो आपका कुछ तो उद्देश्य होगा। कुछ तो योजना होगी। तो एक है कि जो हमारे पास है उसको एप्रिशिएट करना। पर अप्रिशिएट करते समय क्या है कि भविष्य में क्या होने वाला है कुछ पता नहीं है हमको। तो हमें एक तरह से जो हमारी भक्ति होती है। भक्ति से जो मेरे जीवन में है वह भगवान की योजना है। उसमें एप्रिशिएट करना है। पर जो भविष्य में होगा उसके बारे में हमें कॉन्फिडेंस होना चाहिए। कॉन्फिडेंस क्या है यहां पे प्रभुपाद जी? आपका कुछ उद्देश्य होगा। उसके बिना ऐसे हो नहीं तो यहां पे मैं क्यों आता? तो यू मस्ट हैव सम हिडन पर्पस। कैन यू सिंग दिस? अचकीचुका? आज की छु का अनुम का तब अनुम का तब एनुमने का तब एनु माने
सो प्रभुपाद जी बोल रहे हैं यू मस्ट हैव सम पर्पस आपको उद्देश्य जरूर होना चाहिए नहीं तो आप यहां क्यों लाते हैं? सो ग्रांट मी हंबल कॉन्फिडेंस इन डिवाइन प्रोविडेंस कि आपकी योजना में मुझे एक नम्रता है। नम्रता का मतलब नहीं कि हमें कॉन्फिडेंस नहीं है। ह्यूमिलिटी के साथ हमें कॉन्फिडेंस भी होना चाहिए। ग्रांट मी हंबल कॉन्फिडेंस। तो हुब लाइक टू रीड ये पैराग्राफ है यहां पे। आप पढ़ पाओगे? यस प्लीज।
माय डियर लॉर्ड प्रभुपाद दिस प्ले सर्टेन एंड हर सन। अनसर्टली भक्ति इन दिस वर्ल्ड ही कॉन्फिडेंटली एक्नॉलेजिंग दैट ही कैन अचीव फॉर इट्स टू हसनटी डज़ नॉट अराइज़ फ्रॉम अ डेफिशिएंसी ऑफ़ डिवोशन फ्रॉम द फाइनाइट फेस ऑफ़ द सोल अ फाइनेशन दैट रिमेन हाउ एवर स्पिरिचुअली एक्टेड
एक्सीलेंट व्हाट इज योर नेम
ओके एक्सीलेंट देर लॉट ऑफ़ डिफिकल्ट वर्ड्स ओवर हियर
तो डिसआर्मिंग अनसर्टेनिटी डेफिशिएंसी यू गॉट ऑल ऑफ देम राइट वै नाइस तो कभी-कभी क्या होता है कि हमें बताया जाता है कि आप आप मंदिर में आते हो भक्ति करते हो तो आपको नम्र होना चाहिए तो कभी-कभी क्या होता है कि नम्रता को अगर हम सही तरह से समझेंगे नहीं तो नम्रता को हम बोलेंगे उससे इनसिक्योरिटी बढ़ जाएगा हमारा तो पर क्या है एक डिवोटी को क्या होता है हम जो मैं तीन चीज पॉइंट चर्चा करना आ रहा था क्या था ए सीटी था तो ये पहला क्या था
एप्रिसिएशन टू है कॉन्फिडेंस वे क्या है हमारा ह्यूमिलिटी एक है पर हंबल कॉन्फिडेंस हंबल क्यों है कि हम ह्यूमिलिटी इससे आती है कि मेरी विज़न मेरी समझ माय विज़न इज लिमिटेड मैं कितना समझ सकता हूं। मेरा ज्ञान कितना है मेरी क्षमता कितनी है? ये सब लिमिटेड है। पर यद्यपि मेरा मेरा मेरी क्षमता लिमिटेड है। पर कॉन्फिडेंस कहां आ सकते हैं? कहां से आता है? कृष्णा हैज़ अ प्लान। कि भगवान की हम सबके लिए योजना है। भगवान हम सबके जीवन में कार्यरत है। तो जब हमें नम्रता नहीं होती है तो हम खुद के ही योजना में फंसे रहते हैं। पर क्या होता है कि मैं यह करूंगा और कर लेता हूं तो अहंकार बढ़ जाता है। नहीं करता हूं तो इनसिक्योरिटी बढ़ जाती है। पर जब नम्रता होती है। हां मैं यह कर रहा हूं। पर यहां पर भगवान की भी कुछ योजना है। है तो ह्यूमिलिटी से क्या होता है? ऐसे नहीं कि अरे मैं मैं निकम्मा हूं। मैं व्यर्थ हूं। मैं अर्थहीन हूं। नहीं ह्यूमिलिटी से इट इज नॉट ह्यूमिलिटी इज नॉट अबाउट लुकिंग डाउन एट आवरसेल्व्स। इट इज़ लर्निंग टू लुक अप एट कृष्णा। खुद को बुरा मानना, खुद को नीचा देखना। खुद को नीचा दिखाना नीचा दिखाना ये ह्यूमिलिटी नहीं है। क्या होता है हम खुद में फंसे रहते हैं। तो एक है एक तरह है ईगो। ईगो मतलब क्या है कि मैं सब कुछ कर सकता हूं और उसके ऑोजिट है इनसिक्योरिटी। मैं कुछ भी नहीं कर सकता। और इन दोनों के बीच में है ह्यूमिलिटी। मैं कुछ करता हूं कर सकता हूं और जो मैं नहीं कर सकता हूं उसमें भगवान की योजना है। जिस परिस्थिति में आया हूं ऐसे क्या है कि अगर हम कोई टीम में है क्रिकेट टीम में मान लीजिए तो टीम में अलग-अलग मेंबर होते हैं। और सब मेंबर अपना-अपना कार्य करते हैं। तो शायद मैं फास्ट बॉलिंग नहीं कर सकता हूं। ठीक है? पर मैं स्पिन बॉलिंग करता हूं। वो मैं मैं मेरा पार्ट करूंगा। और जो बाकी टीम है वो उनका पार्ट कर लेगी। तो ह्यूमिलिटी से क्या होता है कि हम एक बिग पिक्चर देख सकते हैं। ह्यूमिलिटी का मतलब नहीं मैं कुछ नहीं कर सकता। ह्यूमिलिटी का भाव यह है कि भले ही मैं सब कुछ नहीं कर सकता हूं। पर मैं कुछ कर सकता हूं और जो मैं नहीं कर सकता हूं वो भगवान देख ले। तो इसीलिए यहां पे आ किचु का तबे आपकी कोई योजना तो होगी भगवान अभी हम कैसे यह विश्वास कर सकते हैं जब हम अभी नए नए वर्ष में जा रहे हैं। हम ये कैसे विश्वास रख सकते हैं कि भगवान की कुछ योजना है मेरे जीवन के लिए। तो इसके लिए एक सिंपल इसको इंग्लिश में थॉट एक्सरसाइज कहते हैं। थॉट एक्सरसाइज मतलब विचार करना। कि कई बार अभी हम हमारे जीवन में देखते हैं कि अरे क्या यह गलत हो सकता है? वो गलत हो सकता है। यह ऐसे हो गया, वैसे हो गया। पर वास्तव में अभी ऐसे है कि ये जगत में इतने सारे खतरे होते हैं। इतने सारे डेंजर्स होते हैं। अभी मैं आई एम अराउंड 48। मैं मेरे स्कूल और कॉलेज के मित्रों से मिल रहा हूं। अब वापस थोड़ा कांटेक्ट वापस जोड़ रहा हूं। तो मुझे क्या पता चला कि उनमें थे हमारा जब स्कूल में थे हम 50 स्टूडेंट्स का हमारा बैच था क्लास में उसमें से 12 स्टूडेंट्स जो है उनकी मृत्यु हो गई तो अभी मतलब क्या है एवरेज लाइफ एक्सपेक्टेंसी जो है इंडिया का जो भी है पर उसमें से कुछ लोग आपके जितने भी उम्र है हम में से कितने लोग हैं आप जानते होंगे शायद कि आपके उम्र से कम होते हुए उनकी मृत्यु हो गई है तो क्या है कि इफ वी आर अलाइव हर एक के जीवन में कितनी सारी चीजें गलत हो सकती है। कोई एक बैंग हो जाएगा। एक ट्रक आके हमको लग जाता है। हमारी मुक्ति हो सकती है। एक बग एक एक जंतु अंदर से आ सकता है। वो हमारा जीवन अंत कर सकता है। तो इफ वी आर जस्ट अलाइव देन कृष्णा इज नॉट येट डन विद अस। अगर हम जीवित है इसका मतलब है कृष्ण की हमारे लिए कुछ योजना भी बची हुई है। तो लाइफ इट्स सेल्फ इज अ गिफ्ट। लाइफ इटसेल्फ इज अ मिरेकल। और हमारे जीवन में अभी शायद हम कोई आप में से कोई 15 साल का है, कोई 12 साल का है, कोई 20 साल का है, कोई 30 साल का है। जो भी आपकी उम्र होगी तो हमारे जीवन में कुछ पास्ट है और कुछ फ्यूचर है। तो अभी अगर भगवान को हमें त्यागना ही था। भगवान अगर कृष्णा वांटेड टू अबेंडन अस कि तुम्हारे तुम्हारा कर्म है। तुम तुम निपटो। उसको अगर भगवान को हमें ठुकराना था तो वह कभी भी ठुकरा सकते थे। कृष्णा हैज़ नॉट ब्रॉट अस दिस फार टू अबेंडन अस नाउ। अगर कृष्ण ने हमको यहां तक ले आए हैं तो यहां से भी वह आगे ले जाएंगे। प्रभुपाद जी का भाव क्या है? कि वो 70 की उम्र में अभी अमेरिका गए। और जब अमेरिका गए वो तो बहुत से विपत्तियां आई, बहुत से संकट आए। बहुत से ऑब्सकल्स आए थे। पर उसके बावजूद वो अभी अमेरिका पहुंचे हैं। तो प्रभुपाद जी का विचार क्या है? हे कृष्णा आपने मुझे यहां तक लाया है। यहां तक आपने मुझे इसलिए नहीं लाया है कि आप मुझे भी अबंडन कर दोगे। तो पहले कुछ दिन जब प्रभुपाद जी जहाज में थे तो क्या उनको सी सिकनेस हो गया? क्या होता है कि जब हम जहाज में होते हैं तो साधारणत हमारे मानव का स्थिति क्या है? हम जमीन पे होते हैं। जमीन होता है। जहाज हमेशा हिलते रहता है। हिलते रहता है। तो उसे सीसिकनेस हो जाता है। उल्टी वगैरह हो जाती है। फिर उसके ऊपर प्रपा जी को हार्ट अटैक आ गया दो। तो फिर उसके बाद में प्रभुपाद जी के दो बार हार्ट अटैक है। तीसरे दिन में प्रभुपाद जी ने कृष्ण से प्रार्थना की। हे कृष्ण अगर वापस हो गया ये हार्ट अटैक तो मैं जीवित नहीं रह पाऊंगा। तो प्रभुपाद जी को तभी एक दृष्टि आई। एक विज़न आया। कृष्ण आए। कृष्ण ने कहा कि मैं सब कुछ संभाल लूंगा। उसके बाद में प्रभुपाद जी जब वहां से भारत से जाते हैं तो इंडियन ओशन से नीचे जाते हैं। फिर अटलांटिक ओसियन में जाते हैं और फिर वहां से अमेरिका पहुंचते हैं। तो जब वो अटलांटिक ओसियन में गए तो जो कैप्टन थे वो कैप्टन पांड्या थे और उनकी पत्नी थे मिसेज पांड्या तो 40-50 दिन का वो सैर था अमेरिका पहुंचने के लिए। तो वो कैप्टन पांड्या बोले कि मैंने मेरे मैं 40 साल से मैं ट्रैवल कर रहा हूं। 30-40 साल से अभी तक सबसे यह जो मेरा अटलांटिक क्रॉसिंग था सबसे काम इतना काम कभी देखा नहीं मैंने। इतना शांत अटलांटिक सागर को कभी देखा नहीं मैंने। तो प्रभुपाद जी बोले कृष्णा हैज़ टेकन चार्ज। ये कृष्ण ने इसको संभाल लिया है। तो वो मिसेज पांड्या बोली स्वामी जी आप हमारे साथ वापस आ जाओ। हमारा वापस सैर भी आसान हो जाएगा। तो प्रभुपाद जी बोले इसलिए कृष्ण को मुझे यहां पे नहीं लाया है। तुरंत वापस आने के लिए। तो पॉइंट यह है कि हमारे जीवन में बहुत कुछ गलत हो सकता था और हम कह सकते हैं अरे ये गलत हो गया। इसने मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया। ये एग्जाम में पास नहीं हुआ। ये कॉम्पटीशन मैंने जीता। मुझे यहां पे सिलेक्शन नहीं हुआ। हां, बहुत कुछ गलत हुआ हो सकता है। पर कुछ तो सही हुआ है। हम जीवित हैं। तो क्या है यहां तक हमको भगवान लेके आए हैं तो यहां से आगे भी भगवान ले जाएंगे। तो ये हर एक भक्त को कॉन्फिडेंस होना चाहिए कि कृष्णा इज वि मी एंड कृष्णा इज फॉर मी। भगवान मेरे साथ है और भगवान मेरे लिए है। भगवान हम सबका कल्याण करना चाहते हैं। तो ये जो भाव है इससे कॉन्फिडेंस आता है हर एक। तो भक्ति में एक है कि हमें भक्ति के कुछ नियम पालन करने हैं, जप करना है, साधना करनी है। वो महत्वपूर्ण है। पर एक केवल रीति-रिवाज नहीं है, रूल्स नहीं है। इनसे क्या होता है? हमारे जो दृष्टि है विकसित हो सकती है। हो जाती है। हम और ज्यादा देख पाते हैं, ज्यादा समझ पाते हैं। तो हम हां मेरे जीवन में इसने ऐसे किया, मैंने वैसे किया। वो सब सत्य है। पर इससे और बड़ा कुछ हो रहा है। क्या मतलब है? कि हम हमेशा क्या करते हैं? हमारे जीवन को एक छोटी दृष्टि से देखते हैं। छोटी दृष्टि मतलब क्या? अरे ये इसने मेरे साथ ऐसे कर दिया या मैंने ऐसी गलती कर दी। कभी-कभी हम देखते हैं कि ये लोग हमारे बुरा करते हैं या बुरा हो जाता है हमारे साथ कुछ या कभी-कभी हम खुद गलती कर देते हैं। और यह जो दृष्टि है यह सत्य हो सकती है पर यह संकुचित दृष्टि है। हमारे जीवन को इतना ही देखेगा अरे मैंने क्या किया और मेरे साथ क्या हुआ पर क्या है इससे और एक बड़ी दृष्टि है। क्या है कि सबके ऊपर भगवान है और जो भी हमारे साथ हो रहा है भले ही किसी ने कुछ किया है हमारे लिए साथ पर उसके बावजूद जो है वो कृष्ण उससे भी कार्य कर रहे हैं और जो हम कर रहे हैं उसके माध्यम से भी भगवान कार्य कर रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं कि हमारे गलतियां हम भगवान पर जिम्मेदारी दे दे। पर हमारे गलतियां भी हुई है हमसे फिर भी उससे भी भगवान अपना प्लान आगे बढ़ा सकते हैं। तो यह एक कॉन्फिडेंस है कि हमारा अगला जीवन जो है अगले तो जब हम भक्ति करते हैं भक्ति करने का यह उद्देश्य नहीं है कि हम अच्छा जप करेंगे। उससे वी विल अर्न कृष्णास लव। कि उससे फिर कृष्णा मुझे प्रेम करने लगेंगे। हमारी सा आवर साधना इज नॉट टू अर्न कृष्णास लव इट इज टू रियलाइज कृष्णा लव। कि कृष्णा हम सबसे पहले से ही प्रेम करते हैं। सुरदम सर्वभूताना भगवान कहते मैं सबका हित चिंतक हूं। भगवान ये नहीं कहते सुरद मदत भक्ताना कि जो मेरे भक्त है उनका ही मैं सुर दूंगी मैं सबका सुरु हूं भगवान कहते हैं भगवान हम सबका कल्याण चाहते हैं पहले से और कैसे है इसका उदाहरण है कि मान लीजिए कोई आंखें बंद की किसी ने और ऊपर सूरज है तो अभी वो आंखें खोलने का प्रयास करता है। आंखें खोलने से ऐसे नहीं कि सूरज रोशनी देने लगता है। सूरज पहले से रोशनी दे रहा है। पर आंखें खोलने से उस व्यक्ति को रोशनी दिखने लगती है। तो ऐसे नहीं है कि हम भक्ति करेंगे उसके बाद में भगवान हमसे प्रेम करने लगे या उसके बाद में भगवान हमारे जीवन के लिए कुछ योजना बनाएंगे। हम भक्त हो अभक्त हो भगवान की सबके लिए योजना है। पर कैसे है? अगर किसी की आंखें बंद है, रोशनी है, रास्ता है पर आंखें बंद इसलिए तो रोशनी दिखती नहीं है और रास्ता भी दिखता नहीं है। तो क्या है हम जो साधना करते हैं उससे हमें आंखें खुल खुलती है हमारी और जितनी आंखें खुलती है उतनी रोशनी दिखती है उतना रास्ता भी दिखता है तो जब हम जब बोला अप्रिशिएट करना है अप्रिशिएट करने के बाद कॉन्फिडेंस है कि भगवान ने अभी तक मेरे साथ कुछ अच्छा किया है और भविष्य में भी अच्छा करेंगे ये दोनों क्या है जितना हम भक्ति करेंगे उतना ये वर्तमान के बारे में सकारात्मक भाव और भविष्य के बारे में एक विश्वास आएगा और जो अप्रिशिएट फिर क्या है?
कॉन्फिडेंस
अप्रिसिएशन है और फिर कॉन्फिडेंस है। अभी तीसरी जो चीज है हम देखेंगे कुछ श्लोक ऐसे गाएंगे और फिर विल गो टू द लास्ट पार्ट अभी इसमें हर एक है ना के नोानी बेन ए उग्र स्थाने व्हाई एल्स वुड यू ब्रिंग मी टू सच अ टेरेबल प्लेस सो लॉस्ट इन इल्लुजन सो वॉइड ऑफ ग्रेस प्रभुपाद जी बोले कि अगर आपकी कुछ योजना नहीं होती तो आप यहां तक मुझे अमेरिका में क्यों ले आते थे ये तो प्रभुपाद जी की दृष्टि से यह एक जो बहुत ही उग्र जगह है यहां पर कोई भक्ति नहीं है कोई भगवत चेतना नहीं है पर फिर प्रभुपाद जी का विश्वास है रजस्तमो गुणे सब अचोग सब अच बाय रजस एंड तमस इनफिडेबल माइट ऑल हियर आर कवर्ड इन इलुजंस नाइट रजो और तमोगुण का प्रभाव ऐसे है बहुत ही शक्तिशाली है और सब मोह के अंधकार में यहां पर फंसे हुए हैं और मोह के अंधकार का प्रभाव क्या हुआ है उसके कारण वासुदेव कथा रुचि ना से प्रसन्न वासुदेव कथा रुच ना से प्रसन्न
फॉर वासुदेव ग्लोरी दे हैव नो अट्रैक्शन इन द डिवाइन दे फाइंड नो सेटिस्फेक्शन कि भगवान में कोई रुचि नहीं है भगवान में कोई संतुष्टि नहीं है तो तबे जदी कृपा होए तबे ज तब कृपा होएतु की
तबे यदि तब कृपा दुखी
चूज ओ लॉर्ड टू ब्लेस वि योर मर्सी कॉजलेस तो तभी यह बहुत कठिन है परिस्थिति क्योंकि लोग अंधकार में है लोगों में रोशनी भी आने की रुचि भी नहीं है तो आपकी अहेतु की कृपा चाहिए सकल ही संभव होए तुम्ही से कौतुकी सकल संभव हो तुम सेकी
योर मर्सी मेक्स एवरीथिंग पॉसिबल यू आर इनक्रेडिबल अनस्टेबल मैजिकल कि हे प्रभु आपकी कृपा से सब कुछ संभव होता है तो ये सारा क्या है ये कॉन्फिडेंस का भाव है फिर कि भावे पूजा ले तारा भुजे से रस भावे पूजा ले तारा से रस
हाउ विल दे कम टू अंडरस्टैंड द टेस्ट ऑफ योर लव सो डीप सो ग्रैंड कैसे समझ पाएंगे प्रभु ये भक्ति के रस तो उसके बाद में क्या है इत कृपा करो प्रभु इत कृपा करो प्रभु कोरी निज बश कृपा करो प्रभु को निज
ग्रांट मी दिस ग्रांट दिस मर्सी ऑन मी ओ लॉर्ड ओमनीपोटेंट टेक चार्ज ऑफ मी एंड मेक माय वर्ड्स पोटेंट प्रभुपाद जी क्या बोल रहे हैं कि आप मुझे चार्ज ले लो और फिर जो मेरे शब्दों को अभी आप शक्तिशाली बनाओ तो तुम्हारा इच्छा है सब होए माया बश इच्छा है सब होए माया
इट इज ओ लॉर्ड बाय योर अरेंजमेंट दैट ऑल फॉल टू इलजंस एंड डाइसमेंट मोह में अगर कोई गया है तो वो आपकी योजना से ही गया है और आपकी योजना से लोग मोह से बाहर भी आ सकते हैं। तो इच्छा नाश माया पर
इट इज ओ लॉर्ड बाय योर बेनेडिक्शन दैट ऑल मे ब्रेक फ्री फ्रॉम इलजन कि आपकी योजना से लोग मोह से बाहर निकल सकते हैं। तब इच्छा होए जता देर उद्धार हो इच्छा का तेरा उद्धार
व्हेन योर विल मैनिफेस्ट एस ग्रेस दे विल ब्रेक फ्री फ्रॉम मायास एम रेस कि मोह में फंसे हुए हैं वो उससे आपकी कृपा से वो निकल सकते हैं बे निश्चय तबे कथा से तो मार निश्चय कथा से तो
देन दे विल अंडरस्टैंड फॉर शोर ओ लॉर्ड योर मैसेज सो प्योर वह जरूर आपके संदेश को समझ पाएगी। तो, अभी यहां पे प्रभुपाद जी बोल रहे कृष्ण आप अपनी योजना बनाओ। आपकी योजना कुछ तो होनी चाहिए। पर उनकी योजना कुछ है पर उसके साथ-साथ प्रभुपाद जी भी कुछ प्लान कर रहे हैं। कुछ स्टेप्स हैं वो भी कर रहे हैं। ऐसे नहीं है कि भक्ति का मतलब भगवान तुम सब कुछ संभालो। मैं कुछ नहीं करूंगा। मैं आराम करूंगा। मुझे हमें भी अपनी, हमें भी अपनी तरह से प्रयास करना है। तो प्रभुपाद जी अपनी योजना क्या है वह बता रहे हैं। भागवते कथा से तब अवतार कथा से
द भागवतमस मैसेज इज योर डिसेंट थ्रू इट योर मर्सी इज लविंगली सेंट भागवतम ये भगवान का ही अवतार है। इसमें भगवान की कृपा आती है। और उसकी कृपा से क्या होता है? धीर यशु ने जने बार-बार सुने दिखाने बार-बार
इफ दे हियर योर मैसेज अगेन एंड अगेन दे विल राइज अबव इलजन एंड पेन बार-बार सुनने से मोह और दर्द से वो ऊपर उठ जाएंगे तो क्या होगा इससे रजस्त मोहते तबे पाई बेस्तार मोहते तबे पाई बेस्तार
फ्रॉम पैशन एंड इग्नोरेंस पैशन एंड डार्कनेस दे विल डिपार्ट एंड फाइंड ट्रूपीस इन प्यूरिफाइड हार्ट हृदय भद्र सच बेताहा
देर देर मिसकसेप्शन टू विल डिपार्ट व्हेन योर मैसेज एंटर्स देर हार्ट तो अभी प्रभुपाद जी क्या कर रहे हैं हम आखरी पॉइंट जो देख रहे हैं कि ए सी और टी टी क्या है ट्रांसफॉर्मेशन तो हम अप्रिशिएट करते हैं। फिर क्या होता है? हमें कॉन्फिडेंस है। पर हमें ट्रांसफॉर्मेशन के लिए हमें कुछ कदम लेने हैं। हम कुछ कदम नहीं लेंगे तो भगवान भी हमें मदद नहीं कर सकते। कि कोरे भुजा वो कथा भरोसे चाहिए।
हाउ विल दे ग्रास्प योर मर्स मैसेज सो लॉफ्टी फॉर दैट ओ लॉर्ड आई सीक योर मर्सी तो आपका संदेह समझने के लिए मैं आपकी कृपा चाहता हूं। तो यहां पर अभी जो अगला श्लोक है प्रपाद जी कहते हैं कि मेरी कुछ क्षमता नहीं है। क्षद्राम में दिन ही कोनो शक्ति नाही कोनो शक्ति नाही
लोली आई एम सो फॉल सो स्मॉल आई हैव नो स्ट्रेंथ ओ लॉर्ड नन एट ऑल अच इन प्रभु कथा बोली बात प्रभु बोली ये स्टिल यू हैव ब्रॉट मी हियर टू स्पीक योर मैसेज ओ लॉर्ड मोस्ट डियर तो जे तो मार इच्छा प्रभु को रोए बारे तो इच्छा प्रभु को रोए बारे
व्हाटएवर योर विल ओ लॉर्ड मेड बी प्लीज डू इट नाउ लेट इट फ्लो थ्रू मी लेट इट फ्लो थ्रू मी। तो आपकी जो इच्छा है उसके लिए मैं एक इंस्ट्रूमेंट बनने के लिए तैयार हूं। तो जो ट्रांसफॉर्मेशन है इसका मतलब क्या है? इसमें हम दो पॉइंट्स की चर्चा करेंगे और फिर वी कैन हैव अ फ्यू क्वेश्चंस एंड वी कैन एंड। तो अभी ट्रांसफॉर्मेशन का मतलब क्या है? कि मेरे जीवन में क्या अच्छा है? मैंने देखा। मेरे जीवन में कुछ अच्छा भविष्य में होगा। उसकी मैं उसका कॉन्फिडेंस है। उसके बारे में मैं उस दृष्टि से देखने वाला हूं। पर क्या केवल अच्छा है या अच्छा होगा यह महत्वपूर्ण है समझना। पर उसके बाद में मैं कुछ अच्छा करूंगा वो भी है। इट्स नॉट जस्ट क्या मेरे पास है पर क्या होगा पर मैं क्या करूंगा वो महत्वपूर्ण है। तो अभी इसमें क्या है? दो चीजें हैं। ट्रांसफॉर्मेशन में मेनली हमें क्या लगता है? पहले विज़ लगता है। कि क्या करना है मुझे। और दूसरा डिटरमिनेशन लगता है। जैसे बोला था आप लोग न्यू ईयर रेज़ोल्यूशंस करते हैं। तो रेज़ोल्यूशंस में क्या होता है उसमें? कई बार हम डिटरमिनेशन पे जोर देते हैं। और मेरा डिटरमिनेशन कम है। बोलते हैं मैंने ये प्लान किया नहीं किया मैंने। वो फिर भी डिटरमिनेशन कम लगता है। पर वास्तव में डिटरमिनेशन के पहले हम सबको विज़न चाहिए। विज़न मतलब क्या? यहां पे साधारणत व्यक्ति परिवर्तन करने के लिए करना चाहता है। तो इसका एक हम एक उदाहरण से किसी व्यक्ति का एक घर है और अभी वो यहां पर रह रहा है। यह उनका प्रेजेंट घर है। तो अभी वो अपना घर छोड़ के फ्यूचर होम किसी और घर में कब जाएगा और क्यों जाएगा? तो दो चीजें हैं इसमें। कि कब जाएगा वो? या तो जो प्रेजेंट होम है वो अनबियरेबल बन जाएगा। मतलब क्या है कि यहां पे उसका रेंट उसने मालिक ने बहुत बढ़ा दिया है। या फिर यहां पे पड़ोस में लोग इतना आवाज करते हैं। शोर रात भर शोर करते रहते हैं। या फिर यहां पे पानी नहीं आता है। यहां पे बहुत गर्मी होती है। तो क्या है? सही में। तो अगर अभी का जो घर है वो असहनीय हो जाता है वो अनबियरेबल लगता है या फिर जो फ्यूचर होम होगा वो इर्रेजिस्टेबल लगता है। इररेजिस्टेबल मतलब क्या कि अरे ये इतना अच्छा ऑफर है इसको नहीं नहीं भूल सकते। ये इतने अच्छे लोकालिटी में घर है। ये इतने इतने अच्छा सस्ते अच्छे दाम पे मिल रहा है। सस्ते दाम पे मिल रहा है। या यहां पे इतना अच्छा स्कूल है। यहां पे इतना अच्छा पार्क है। ये है वो है। अगर हम भक्त ये मंदिर के बिल्कुल बाजू में नहीं है तो क्या है एक है कि जो मेरा प्रेजेंट है वो अच्छा नहीं है और जो फ्यूचर है वो बहुत अच्छा होगा तो कई बार हम क्या जब डिटरमिनेशन हमको जब हमको कुछ नया बनना है कुछ परिवर्तन करना है कुछ ट्रांसफॉर्मेशन करना है तो क्या है ये दोनों फैक्टर्स अगर होगे तो बेस्ट है कि मैं अभी जहां पे हूं जिस परिस्थिति में हूं जिस रास्ते पे जा रहा हूं वो उसमें जिस वो किस क्या गलत है शायद मैं रोज एक दो घंटे सोशल मीडिया पर डाल वेस्ट कर देता हूं तो ठीक है उससे क्या हो रहा है सब लोग वेस्ट करते हैं पर क्या अगर मैं रोज एक घंटा सोशल मीडिया पर वेस्ट कर रहा हूं तो मतलब साल में मैं 365 घंटे वेस्ट कर रहा हूं 365 घंटे में आप अगर आप एक घंटे में 10 पेजेस पढ़ सकते हो तो साधारणता एक किताब होती है तीन 300 पेजेस की मान लीजिए तो 365 घंटों में क्या आप कितने किताब पढ़ सकते हो आप भगवत गीता दो तीन बार पढ़ सकते हो कम से कम एक बार तो पढ़ सकते हो आप उसी समय कितना कुछ कर सकते हो तो मेरा पॉइंट यह है कि जो भी चेंज करना है मैं सुबह जल्दी उठने वाला हूं मैं यह नहीं करने वाला हूं मैं वो करने वाला हूं या ऐसे बहुत से हम रेोल्यूशन बना लेते हैं पर क्या होता है वो रेजोल्यूशन के पीछे अगर विज़न नहीं नहीं होगा तो फिर वो चलता नहीं है। मैं पिछले साल में पिछले 2023 में एक भक्त मुझे मिलने आए। बोले कि 2023 इज गोइंग टू द बेस्ट ईयर ऑफ़ माय लाइफ। दो साल पहले की बात है ये था। मेरे मेरे जीवन का सबसे अच्छा साल होने वाला है। क्यों बोले? कि मैंने 108 रेलशंस बनाए इस बार के लिए। तो मैं उनको बोला कि विद ऑल ड्यू रिस्पेक्ट्स। जब भी कोई आपको बोलता है ना विद ऑल ड्यू रिस्पेक्ट। उसका मतलब जो बोलने वाले वो ज्यादा रिस्पेक्टफुल नहीं होते। होने वाला है उसके वो बोले कि बोले 108 ये रेजोल्यूशन नहीं है। यह क्या है? एक विश लिस्ट है। ये एक मेरे सपनों की श्रृंखला है। कोई भी 108 रेल याद भी नहीं रख पाएगा। उसको इंप्लीमेंट करना छोड़ ही दो। तो क्या होता है? एक दो तीन हम कुछ कर सकते हैं। इसमें सीरियस फोकस देना है। तो उसमें ट्रांसफॉर्मेशन मैं जिस रास्ते पे जा रहा हूं। शायद मैं रोज गप्पे मारने में बहुत समय डाल देता हूं। उस समय में कुछ जप कर सकता हूं, कुछ पढ़ सकता हूं, कुछ नया सीख सकता हूं, कुछ एक नई स्किल डेवलप कर सकता हूं। तो जो मेरे जीवन में अभी जो रॉन्ग है, जो रॉन्ग हैबिट है मेरी कोई रॉन्ग हैबिट है, कुछ रॉन्ग बिहेवियर है। और एक राइट हैबिट है। कोई अच्छी आदत है। मैं सकता हूं। गुड और बैड हैबिट जो है। तो वो रॉन्ग हैबिट अगर रहेगी तो मैं कहां तक चला जाऊंगा? कितना नेगेटिव मेरे जीवन में जाएगा। और अच्छी हैबिट आ जाएगी तो मेरे जीवन में कितना पॉजिटिव आ जाएगा। यह खुद विचार करना जरूरी है। तो प्रभुपाद जी क्या बोले? प्रभुपाद जी अमेरिका गए तो प्रभुपाद जी का विचार क्या था? कि भविष्य में मंदिर हो गए, भक्त हो गए। केवल समय ही हमको सेपरेट कर रहा है। तो उनका वो विज़न था। तो विज़न से प्रेरणा मिलती है कि मैं जहां पे हूं वो बहुत गलत। यहां पे सही परिस्थिति नहीं है। इसी रास्ते में रहूंगा तो मैं गलत दिशा में चला जाऊंगा। अगर वहां पे जाऊंगा तो मेरा जीवन और बस इतना आसान हो जाएगा। अगर मैं सुबह जल्दी उठना सीख जाऊंगा तो उससे ये ये कर सकता हूं मैं या फिर मैं इसमें समय कम डालूंगा तो इस सब के लिए समय दे सकता हूं। जो भी है हमारे लिए वो हमें ढूंढना है। और जिस हद तक हम वो ढूंढेंगे उस हद तक हम आगे बढ़ पाएंगे। तो इसलिए अभी जो विज़न है उसको इंप्रूव करना है। तो अगर आपने कोई भी रेजोल्यूशन बनाने का फैसला किया है। रेजोल्यूशन अच्छा है पर रेजोल्यूशन के पहले विज़ ना केवल मैं क्या करूंगा पर वो करने से क्या होगा और वो ना करने से क्या होगा अगर ये दोनों लिखते हैं हम लिख के रख सकते हैं कहीं तो भी एक भगवान कहते हैं कि मन तो बहुत चंचल रहता है शय श रूप परमे बुद्ध धति गितया आत्म समस्त मन किंचित चिंतेत मन तो भटके- भटकने वाला ही है। मैं पिछले साल गोवर्धन इको विलेज में था। वहां पे कुछ अमेरिकन लोग आए थे तो एक व्यक्ति बोल रहा था कि मुझे जनवरी एंड हो जाएगा। फरवरी के मिड तक मुझे वापस जाना है अमेरिका में। बोला आपका मेरा मतलब फरवरी में बिज़नेस बहुत बढ़ जाता है। मैं बोला फरवरी में क्यों बिज़नेस बढ़ जाता है। बोले आप कौन से बिज़नेस में हो?” बोले मैं थेरेपी में हूं। थेरेपी थेरेपी आप सब जानते हैं। लोगों को डिप्रेस हो जाते हैं। उनको अलग-अलग चाहिए होती है। तो उनके मानसिक स्तर पे उनको थोड़ा गाइडेंस मिलता है तो बोला थेरेपी अभी फरवरी में बिज़नेस क्यों बढ़ता है? बोले क्या होता है? जनवरी में लोग नए न्यू ईयर रेोल्यूशन लेते हैं और फरवरी तक सब रेोल्यूशन टूट जाते हैं। तो क्या होता है? फरवरी में डिप्रेस होने लगते हैं लोग। तो इसलिए थेरेपी का बिज़नेस बढ़ जाता है फरवरी तक। तो अभी ये क्यों होता है? हम सब कमजोर है और सबके रेोल्यूशन टूटते हैं। पर क्या है? वो टूटने वाले होने होगा पर उसको वापस हमें उठना है। वापस रिज्यूम करना है। और उसके क्या हमें सिर्फ जोश के आधार पर हम आगे नहीं बढ़ सकते। हमें विज़ चाहिए। डिटरमिनेशन सफिशिएंट नहीं है। क्या होगा? डिटरमिनेशन एक दिन होता है नहीं होता है। पर क्या है कि ठीक है। मैं अभी इस घर में हूं। उस घर में जाना है मुझे। अरे पर इसके लिए इतना झंझट करना पड़ेगा। ये पैसा लेना पड़ेगा। ये ऑफिस में जाना है। ये परमिशन लेना है। ये करना है। कौन करेगा? एकदम छोड़ दो। पर अगर हमने विजन लिखा हुआ है। यहां पे रहने में यही समस्या है। वहां वहां पर जाने में वो अच्छा है तो वो विज़ से जो हमारा मोटिवेशन वो बरकरार रहेगा। तो अगर हम ये ट्रांसफॉर्मेशन की दो चीजें रखती है विज़ और डिटरमिनेशन क्या है कि कभी-कभी हमारे विज़ कई बार भगवान बोलते हैं मई अर्पित मनो बुद्धि मामेवस संशय। तो जो हमारा बुद्धि से हमारा विज़न आता है और मन अगर स्थिर होता है तो उससे डिटरमिनेशन आता है। तो आइडियल है कि दोनों रहे हमारे साथ में। पर अगर एक भी नहीं है तो अगर इस क्लास से आप सब कुछ भूल जाओगे तो यह एक डायग्राम याद रखिए आप कि एक है हमारे पास विज़ वो यस और नो। अगर आपको चेंज करना है विज़ है या नहीं है। और फिर उसके बाद में डिटरमिनेशन है या नहीं है। डिटरमिनेशन मतलब ये करने ही वाला हूं मैं। मुझे अच्छा लगे ना लगे समस्या समस परिस्थिति अच्छी हो या ना हो मैं करने ही वाला हूं। तो अभी इन ये चार क्वाड्रेंट्स हो सकते हैं। वन टू थ्री और फोर। तो इनमें से कौन सा क्वाड्रेंट सबसे अच्छा है?
फोर्थ। बात सही है कि अगर विज़न भी है और डिटरमिनेशन भी है। तो अभी इन दोनों में से कौन सा हमारा ज्यादा कंट्रोल में है? विज़न है या डिटरमिनेशन है? हां। इन दोनों आपको समझ विज़न मतलब क्या है? एक स्पष्ट दृष्टि है। कि यह ऐसा है, यह ऐसा है। विज़न हमारे कंट्रोल में है, डिटरर्मिनेंट। मैं ये ही करने वाला हूं, वो नहीं करने वाला हूं।
विज़न और डिटरमिनेंशन में कौन सा हमारा ज्यादा कंट्रोल में है?
सॉरी, विज़न कितना बोल, हाउ मेनी से विज़न? ओके, ठीक है। हाउ मेनी से डिटरमिनेशन? हाउ मेनी से कुछ भी नहीं है कंट्रोल में। ओके। तो, अभी देखिए, किस तरह से है यह? एक तरह एक तरह से हम कहते हैं, कुछ भी हमारे कंट्रोल में नहीं है। वह सत्य नहीं है। जो अभी विज़न कहां से आता है? हमारे बुद्धि से आता है। और जो डिटरमिनेशन होता है एक तरह से हमारे मन में एसोसिएट मंस फिक्स्ड है कि नहीं? तो अभी क्या है कि हमारी हमारा जो मन है बहुत चंचल है। मन को हम इतना नियंत्रण नहीं कर सकते हैं। पर हमारे बुद्धि को क्या कर सकते हैं? हम उसको सुदृढ़ बना के रख सकते हैं। तो अगर बुद्धि को सुदृढ़ बना के रखेंगे तो मन बराबर सही मार्ग पे हम ला सकते हैं। मन चले भी जाएगा। तो उसको वापस ला सकते हैं। तो इसीलिए अभी अगर हमारे इसको बढ़ाना विजन को बढ़ाना है तो इसको शास्त्र का अध्ययन करना है। स्वाध्याय अगर शास्त्रों को पढ़ेंगे शास्त्रों से पढ़ने से समझेगा कि हम सब की कितनी क्षमता है। जो महान भक्तों के बारे में पढ़ते हैं। अभी भगवान चाहते हैं कि हम सब भी बहुत कुछ करें हमारे जीवन में। हम भी शुद्ध बने। हम भी समृद्ध हम भी भगवान की सेवा में कुछ महत्वपूर्ण योगदान करें तो स्वाध्याय से क्या होगा हमारा जो विज़न और क्लियर हो जाएगा और जो हमारी साधना है साधना से हमारा मन फोकस हो जाएगा उससे हमारा डिटरर्मिनेशन बढ़ जाएगा तो अभी साधना में कितना मन लगे हमारे नियंत्रण में नहीं है पर जिस हद तक हम प्रयास करेंगे उस हद तक अगर हम फोर में नहीं रहेंगे तो बेस्ट फोर है व कौन सा है इसमें सबसे खराब कौन सा है? टू है। हां। विजन भी नहीं है, डिटरमिनेशन भी नहीं है। तो क्या होगा? ओनली इलुजन हो जाएगा वो। तो पूरा मोह में ही चले जाएंगे। माया में चले जाएंगे। तो इस दिशा में जाने जाते हैं, पूरा यू टर्न करके जितना आगे गए थे, उतना ही और पीछे चले जाएंगे। पर अगर यह नहीं है, तो अभी वन और थ्री में कौन सा बेहतर है? वन यह क्या है? थोड़ा इट्स मोर कंट्रोलबल फॉर अस। एक तरह से हमारे बुद्धि को हम और नियंत्रण कर सकते हैं। मतलब कैसे है कि अगर मैंने लिखा है यह करने से ऐसे होगा। मैं रोज अगर 15 मिनट भी भगवता पढूंगा तो क्या है? 6 महीने में पूरी भगवता पढ़ के हो जाएगी। मैं 15 मिनट अगर ये प्रैक्टिस करूंगा ये नई भाषा प्रैक्टिस करूंगा। ये नई स्किल प्रैक्टिस करूंगा। मैं एक न्यू मृदंग प्रैक्टिस करूंगा। तो 3 महीने में 6 महीने में कुछ सीख सकता हूं यह। तो इस तरह से हम जो विज़न बना के रख सकते हैं। वो क्या है? वो हमारे हम पहले एडवांस में करके रख सकते हैं। पर जो डिटरमिनेशन है वह उसको क्या है तभी कभी उस समय में कभी हमको लगेगा करना है नहीं करना है तो यह जो है लेस कंट्रोलेबल है हमारे लिए पर जितना हमारा मन शुद्ध हो जाएगा उतना से डिटरमिनेशन भी और स्ट्रांग हो जाएगा तो आइडियल क्या है कि जहां भी है वहां से हम फोर्थ क्वाड्रेंट में आ जाए पर अगर फोर्थ में नहीं है तो कम से कम थर्ड में तो रहे कुछ कुछ भी हो जाए हमको ये सेकंड क्वाड्रेंट में नहीं फोर्थ नहीं है तो फर्स्ट में रह गया हमें हमको जो फोर्थ क्वाड सेकंड क्वाड्रेंट में नहीं जाना है तो अगर विज़ और डिटरमिनेशन दोनों अगर साथ में रखेंगे तो हम जरूर खुद का जो नया साल है उसमें वी कैन एक्सपीरियंस न्यू थिंग्स भगवान की कृपा भगवान की एंपावरमेंट भगवान की शक्ति उससे जो परिवर्तन है वो हम सब अनुभव कर सकते हैं। प्रभुपाद जी अंत में कहते हैं नचाओ नचाओ प्रभु नचाओ से मते कष्टेर पुतली जदा नचाओ से मते जैसे है प्रभु आप एक पुतली को नचाते हो वैसे मुझे नचाओ मेक मी डांस मेक मी डांस ओ लॉर्ड आई जस्ट अवेट योर ग्लांस मैं केवल आपकी दृष्टि का इंतजार कर रहा हूं तो वो जो भाव है प्रभुपाद जी ने कहा कृष्ण आप मुझे नचाओ और क्या हुआ ऐसे भगवान ने नचाया कि आखिरी 10 सालों में 108 मंदिर बन गए 70 से ज्यादा अधिक किताबें लिखी गई 14 बार प्रभुपाद जी ने विश्व का भ्रमण किया। हजारों लाखों की मात्रा में लोगों को प्रेरणा दिया। तो यह सब कैसे हो गया? यह सारा संभव हुआ क्योंकि प्रभुपाद जी भगवान की शरण में थे। पर शरण शरणागति मतलब पैसिविटी नहीं थी। अभी नचाओ मतलब आप जहां नचाना चाहते हैं मैं वहां पर नाचूंगा। प्रभुपाद जी अपना प्रयास कर रहे थे। प्रभुपाद जी का विज़ था कि मंदिर है, भक्त है। डिमिनेशन क्या था? एक व्यक्ति मुझसे मिलने आएगा तो मैं उससे बात करूंगा। मैं उसको समझाऊंगा। मैं उसके साथ उसको पर्सुएट करूंगा। और कुछ लोग सुने, कुछ लोग नहीं सुने धीरे-धीरे कुछ लोगों ने इतना सुन लिया कि वो उनके शरणागत शिष्य बन गए और सारे विश्व भर में प्रचार करने लग गए। हमें शायद इतना बड़ा टास्क नहीं है हमारे सामने। पर जो भी हमें करना है उसमें भगवान हम प्रयास करेंगे। भगवान भी जो हमारे जीवन में समस्याएं हैं, व्यत्यय है उसको निकालने में मदद करेंगे। इस तरह से हर एक व्यक्ति जो है हमारे जीवन में एक ब्राइट फ्यूचर जो है हम ला सकते हैं। तो हमारा टॉपिक था आज न्यू यू फॉर द न्यू ईयर कि अगर हम हमारे जीवन में नए साल में हम खुद नए कैसे बन सकते हैं? तो प्रभुपाद जी के उदाहरण से हमने देखा तीन पॉइंट देखे आज क्या एक्रोनिम था?
एक क्या था? एप्रिसिएशन। तो एप्रिसिएशन का मतलब क्या है? कि हमें सकार अगर हमारे जीवन में कुछ नया होना है तो हमें खुद का जो एटीट्यूड है, खुद का जो व्यवहार है, खुद की जो दृश्य खुद का जो देखने का पहलू है बदलना है कि हमारे जीवन में हमेशा कुछ पॉजिटिव कुछ नेगेटिव होगा, कुछ पॉजिटिव होगा। तो जब तक हम यह पॉजिटिव नहीं देखने वाले हैं तो हमारे जीवन में कल्याण नहीं होने वाला है। तो प्रभुपाद जी ने क्या देखा? उनको कुछ एक तरह से देखेंगे तो उनको फैसिलिटी जो थी जीरो थी। फिर भी प्रभुपाद जी क्या बोल रहे हैं? क्या बोरो कृपा को ले कृष्ण कृपा क्या है? कम से कम एक अपॉर्चुनिटी तो है मुझे सेवा करने की। तो जो पॉजिटिव है हमारे जीवन में। कई बार हमको लगेगा कि लाइफ अनफेयर है वो सत्य है। पर क्या है? लाइफ जो है फेयरली अनफेयर है। सबके जीवन में कुछ अच्छा होता है, कुछ बुरा होता है। दूसरा क्या था फिर?
कॉन्फिडेंस मतलब क्या अभी मेरे जीवन में कुछ अच्छा है और भविष्य में भी मेरे जीवन में कुछ अच्छा होगा। तो जब हम कॉन्फिडेंस कहते हैं कि क्या है कि जब हमारा विज़न एक तरह से जब हमारा सेल्फ सेंटर्ड विज़न होता है। सेल्फ सेंटर्ड मतलब क्या? अरे मैं कितना अच्छा हूं या मैं कितना बुरा हूं। हमारी जो दृष्टि ऐसे केवल सेल्फ सेंटर्ड होती है तो हम दो दिशा में जाते हैं। अगर हमको लगता है मैं अच्छा हूं तो ईगो होता है। मैं बुरा हूं। मैं मुझे बहुत कुछ अच्छा है तो अहंकार हो जाता है। अरे मेरे जीवन में यह गलत है वो गलत है। मैं ऐसा हूं तो इनसिक्योरिटी हो जाता है।
इन दोनों के बीच में क्या होता है?
ह्यूमिलिटी आता है। और ह्यूमिलिटी क्या है? कि मैं कुछ कर सकता हूं मैं और जो मैं नहीं कर सकता हूं वो भगवान करेंगे। ह्यूमिलिटी प्लस कॉन्फिडेंस। तो हमें क्या है? हंबल कॉन्फिडेंस है कि मैं मेरा माय पार्ट मैं करूंगा। और गॉड विल डू गॉड्स पार्ट। मैं एक टीम में हूं। मुझे जो नहीं कर सकता वह भगवान करेंगे। यह दूसरा तीसरा क्या था?
ट्रांसफॉर्मेशन। ट्रांसफॉर्मेशन मतलब क्या है? कि ना केवल मेरे जीवन में अच्छा हो है, जीवन में अच्छा होगा पर मैं भी कुछ अच्छा करूंगा। जो ट्रांसफॉर्मेशन है उसके लिए उसे कैसे करेंगे हम? हम कई बार बोलते हैं कि मैं ये रेजोल्यूशन बनाऊंगा, वो रेोल्यूशन बनूंगा। पर उसके लिए क्या है? एक है विज़न बहुत महत्वपूर्ण है कि अगर मुझे एक शहर से दूसरे शहर में रहने जाना है
तो क्या है इस घर से दूसरे घर जाना है इस शहर से दूसरे शहर जाना है
तो क्या होगा ये
कितना खराब है
ये या तो अनबियरेबल होना चाहिए या दूसरा
इररेजिस्टेबल होना चाहिए इतना अच्छा है कि उसको मैं ना नहीं बोल सकता कि क्या है अगर अगर दोनों होगा तो यह बेस्ट है तो अब ये दोनों को देखना जो है कैसे यह अनबियरेबल है, कैसे वह इरिजिस्टेबल है। यह विज की बात है। फिर उसके बाद में जो हम जर्नी करने वाले हैं, वो जर्नी जो है वो डिटरमिनेशन है। अगर दृष्टि ही नहीं होगी तो फिर जो है डिटरमिनेशन रहना बड़ा मुश्किल है। तो हमने देखा के चेंज के लिए दोनों है, बेस्ट है कि विज़न भी हो और डिटरमिनेशन भी हो। पर अगर दोनों है तो बेस्ट है। विज़न कहां से आता है? स्वाध्याय से आता है। शास्त्रों का अध्ययन करते हैं तो भगवान की हमारे लिए क्या योजना है? भगवान की क्या क्षमता है? महान भक्तों की कहानी सुनते हैं उससे हमारा विज़न बढ़ जाता है। और हमारी साधना से जो हमारा मन जो है वो और शांत होता है, स्टेबल होता है। उससे डिटरमिनेशन बढ़ जाता है। तो इसे जहां से भी है हम प्रयास कर सकते हैं कि यह फोर्थ क्वाड्रेंट में आ जाए और उससे हमारा जीवन ना केवल हमारा जीवन बदल जाएगा पर हम बदल जाएंगे। इस तरह से जो भगवान का हमने पोटेंशियल दिया है। भगवान ने हमारी जो डेस्टिनी बनाई है हमारे लिए उसको हम पूरा कर सकते हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद। श्री प्रभुपाद की
जय।
श्री कृष्ण भगवान की
जय।
गौर भक्त वृंद की
जय।
निताई गौर प्रेमानंदे
हरि बोल।