Hindi – Balaram as Guru tattva and as Duryodhana guru – Chaitanya Charan
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संक्षिप्त सारांश
ऱभावाग जो अनधकार से जोती के ओरने जाते हैं वो गुरोँ कह लाते हैं तभी गुरोँ का भाव क् भौतिक चेतना नहीं होती हैं। तो जीव को संसंदर्म बताते हैं जो गुरू होते हैं वो तीन प्रकार के हो सकते हैं। आप क्या कहते हैं कि वो ऐसे है कि उनके दोनों जो गुरू तीन प्रकार के क्या है कि यही अच्छी तो देखे गरों कि वो अभी वो आध्यात्मी जगत में हैं केबर उनका उनके दोनों पैर आध्यात्मी जगत में है एक तरह से पर क्या है कि वो उनका केबर देह होती जगत में है अतलब क्या है वो एक तरह से वो जीवन मुक्त हो चुके है कि सारी इच्छाय है सारी।
मुख्य ट्रांसक्रिप्शन
ऱभावाग जो अनधकार से जोती के ओरने जाते हैं वो गुरोँ कह लाते हैं तभी गुरोँ का भाव क् भौतिक चेतना नहीं होती हैं। तो जीव को संसंदर्म बताते हैं जो गुरू होते हैं वो तीन प्रकार के हो सकते हैं। आप क्या कहते हैं कि वो ऐसे है कि उनके दोनों जो गुरू तीन प्रकार के क्या है कि यही अच्छी तो देखे गरों कि वो अभी वो आध्यात्मी जगत में हैं केबर उनका उनके दोनों पैर आध्यात्मी जगत में है एक तरह से पर क्या है कि वो उनका केबर देह होती जगत में है अतलब क्या है वो एक तरह से वो जीवन मुक्त हो चुके है कि सारी इच्छाय है सारी आकानुशाय है सारी भावना है वो आध्यात्मी जगत से सम्मनते हैं दूसरा है कि इसका कहते है both feet in the spiritual world मतलब वो कहते है कि वो तीन गुणों से परे हो चुके है आध्यात्मी साथ जाते हैं मतलब क्या है आध्यात्मी प्रगति में अगर हम spiritual growth देखते हैं तो इसमें कई सीज होते हैं कि तमो गुण होता है तमस से हम रजस की औराते हैं रजस से हम सत्व की औराते हैं और सत्व से हम गुणातीत होते हैं गुणातीत मतलब क्या है गुणों के प्रभाव से परे जाते हैं जो गुणातीत होते हैं ये निरविषीष ब्रम्ह पर मुझे का प्रवचा होता है मामंचय या विभजारेन बक्तियोगेन सौयते सगुणानसमथीत्याइतन ब्रह्म्ह भुयायकलपते तो हम ब्रह्मण के स्थर में भी आ सकते हैं यो ब्रममन का स्तर है, वो पे भी आ सकते हैं।
पर गुणातित होने के बाद एक और स्तर क्या है? स्वरूपसिद्ध है। स्वरूपसिद्ध मतलब वो वेक्ति को मैं आध्यातनी जगत मेरा क्या स्वरूप है।
कोई गोपा है, कोई गोपी है, कोई मोर है, अलग अलग हमारे रूप होते हैं आध्यातनी अभी, वो स्वरूपसिद्ध भी हो चुका है। तो ये जो है, ये full devotional realization, पूर्णता या जो आध्यात्मिक स्तर पे पूर्णता प्राप्ति हो गई हैं। तो वो कहते है, कि जो गुरू होते है, गुणों का कोई प्रभाव नहीं है, स्वरूप भी उनको सिद्ध हो चुका है।
दूसरा है, कि वो गुणातीत है, पर अभी स्वरूप सिद्धी नहीं हुए है। बातिक गुणों का कोई प्रभाव नहीं है अन्पे, पर अभी तक वो आध्यात्मिक सर पे, वो कौन है आध्यात्मिक जगत में, यह हम पता नहीं है। और तीसरा कहते है, कि वो गुणातीत अभी तक नहीं हुए है, स्वरूप सिद्ध नहीं है, पर उनकी जो आखे हैं, वो एक तरह से दोनों पैर भोती जगत में हैं, पर आखे जो है, वो आध्यात्मिक जगत में हैं।
यहां पे कैसे हैं, दोनों पैर आध्यात्मिक जगत में ही हैं, वो सिर्फ यहां पे, अभी देहा कर्म के मसाझ अब तक है, अब तक रहने वाले हैं। दूसरा है कि एक पैर आध्यात्मिक जगत में हैं, एक पैर भोती जगत में हैं। तीसरा है कि दोनों पैर भोती जगत में हैं, पर आखे पूर्ण दया आध्यात्मिक जगत में हैं।
तो अभी ये हमें स्यास्वल बता है कि, हमें इन्हें सुझते है कि, कि जो भी स्टैंडर्ड बताते हैं, स्टैंडर्ड आर फ़ोर इवैलूएटिंग आवर ओं ग्रोथ, नाट जजिंग और लेबलिंग अधर्स। जब भी कोई स्टैंडर्ड होता है, उसका उद्देश क्या है? कि मैं कितनी प्रगती कर रहा हूं, दूसरों को जज्ज करने के लिए नहीं हैं, तो पॉइंट यह है, कि जब हम भौतिक चिगत में होते हैं, भगवान के प्रतिदी जो होते हैं, गुरू, वो भौतिक और आध्यात्मी चिगत के बीच में होते हैं, और एक तरह से किस हत्तक वो है, वो फ़रप हो सकता है, वो हमारे से थोड़े भी उपर है, हम रजोगोर्ड भगवान के प्रभाव में हैं, वो अगर रजोगोर्ड से थोड़े उपर सत्वगोर्ड में है, तो वहां से उतना तो हमें उठा सकते हैं वो, और जब हम उठ रहे हैं, वो भी भक्ति कर रहे हैं, वो भी उठ रहे हैं, और इस तरह से वो आके आते रहे हैं, तो अभी जो बलराम जी का इससे सम्मंद क्या है, हम बलराम पुर्णिबाप सचा कर रहे हैं, तो आध्यात्मी जगत में जब कृष्ण होते हैं, तो कृष्ण के पहले विस्तार होते हैं बलराम जी, और बलराम जी से फिर सारे विस्तार आते हैं, वो एक लंभी शंक्ला है, और उसमें फिर जो है, जो थीन पुर्शावतार आते हैं, महा विष्णु, गर्बो दक्षा विष्णु, शिरो दक्षा विष्णु आते हैं, तो यह काफ़े टेकनिकल है, इसकी मैं आपनी चर्चा नहीं करूँगा, तो प्रश्णों तरह समय में लेगा तुम चर्चा करेंगे, पर कहने का मतलब क्या है, कि भगवान का जो लिंक होता है इस भौतिक जगत से, भगवान पूरा रमण करते हैं आध्यात्मी जगत में, और एक तरह से उनको भौतिक जगत से लिखलेना देना नहीं है, तुसरी तरह से भौतिक जगत में जो है, वो सब उनके ही संतान हैं, तो भगवान जो पहला विस्तार करते हैं, जिससे वो शुंक्ला चालों होती है, जिससे कि वो उनके अनेक एकस्पैंशन होते हैं, विस्तार होते हैं, इससे कि बाद में, अब ये महाविष्ण, गर्बो, दक्षा, विष्ण जो हैं, ये तीनों खास करके भवतिक जगत को संभालने में सम्मनत होते हैं, तो ये सारी शुंक्ला, बलगराम जी जो हैं, उनके स्टार्टिंग पॉंट है, तो बलगराम जी शुरुवात होने की कारण क्या है, कि वह भगवान और भवतिक जगत में, लिंक जो होता है, उसकी शुरुवात है, और जब हमें आध्यातनिक प्रति करनी हैं तो क्या है, हमें और जो भगवान आध्यातनिक सर में हैं, उनमें लिंक जोड़ना है, तो वही भाव जो है बलगराम जी दिखाते है, अब ये लिंक कैसे होता है, जो बलगराम जी का नाम है, उसमें दो विभाग आते हैं, तो ये एक बलगराम जी का नाम है, लीला के स्थरपे देख सकते हैं, तत्व के स्थरपे देख सकते हैं, लीला के स्थरपे क्या है, कि बलगराम जी बहुत शक्तिशाली है, और बल के प्रदर्शिन में जो राम लेते हैं, जो आनंद लेते हैं, कई ऐसे लीलाई है, जो खुरू होते हैं, वो उनकी बात नहीं मानते हैं, तो क्या, वो सारे शहर को उठा लेते हैं, वो हलदर है, तो वो अपने हल क्या करते है, जो हलदर भी है, जो हल से सारे शहर को उठा लेते हैं, तो लीला की सरभी क्या आता है, जॉय इन स्ट्रेंथ, जो शक्ति में रमण करते हैं, तो उनकी लीला है, तो ये लीला की सरभी क्या आता है, तत्व की सरभी क्या आता है, कि इस भोतिक जगत से, अगर हमें इस भोतिक जगत से, आध्यात्मिक जगत के ओर जाना है, तो हमें दो चीज़ों की जगोते हैं, एक है कि बल, ये बल क्या है, कि इस भोतिक जगत के बाजू में एक, इससे कोई पुर्थ्री होती है, पुर्थ्री से कोई सैटलाइट है, उसको रोकेट से हम शूट कर रहे हैं, बहाँ जा रहा है, तो क्या होता है उसको, उसको ग्राविटी, गुरुत्वाकर्शन का फूल होता है, कोई भी चीज़, अगर हम कुछ चीज़ उपर फेकते हैं, तो उपर जाते ही रहती है, वो नीचे आ जाती है, नीचे खीच जाती है, तो वैसे क्या है, जब हम प्रगती करने का प्रयास करते हैं, जब हम आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं हमारी जीवन में, तो जो भौतिक आसक्ती है, ये क्या है, ये ग्राविटी है, गुरुत्वाकर्शन, गुरुत्वाकरशन, ग्राविटी क्या है, ये हमारी भौतिक आसक्ती है, हर रख्ति के अपनी अपनी अलग आसक्ती हो सकती है, पर उससे क्या होता है, वो वेट्ति नचींच चल जाता है, ये भौतिक आसक्ती है, तो इसके परी जाने के लिए, जो हमें बल लगता है, वो बल बलराम जी देते हैं, बल क्या है, ये बल हमें भौतिक आसक्तियों के पढ़ा करना है, मुझे ये भोग करना है, ये खाना है, ये देखना है, ये सब आसक्तियां हैं, ये सब आकांशाय हैं, उससे हम की जाते हैं लोड़गा, उससे संगर्श करने के लिए बल चाहिए होता है, पर क्या है, बल परियाप नहीं है, कभ तक हम संगर्श करते रहें, अभी क्या होता है कि, मान लिए कोई सेटलाइट है, वो पुरुथ्वी के जो घुरुत्वाकर्शियों से बाहर भी निकल जाता है, उसके बाद में ब्रह्मान्डे बड़ा विशाल है, उसमें चलते रहता है, घुंते रहेगा, तो हमें केवल भौतिक आसक्तियों से मुक्त नहीं होना है, उसके साथ साथ क्या है, कि अगर ये भगवान है, ये कृष्ण है, तो एक कृष्ण का भी एक दिव्या आकरशन होता है, कृष्ण का भी एक ग्राविटी पूल होता है, यह से गोपिया कहती है, हम चाहते हैं कि कृष्ण को भूलना, पर हम बोल नहीं सकते हैं, जो कृष्ण का जो ग्राविटी पूल होता है, मतलब क्या है, जब हम कृष्ण का समान करते हैं, कृष्ण की लागे शर्षा करते हैं, तो उसमें एक आनंद होता है, तो वो जो आनंदनिव होता है, यह जो है कि यह कृष्ण की, कृष्णा का अट्राक्टिव हैं से, हम कहते हैं कि आल अट्राक्टिव हैं से, कृष्ण सर्वा आकरशक है, तो यह जो कृष्ण के आकरशन में आनंद होता है, अभी वो कृष्ण के आकरशन में जो आनंद होता है, उसको राम कहते हैं, तो बलराम जी जो है, हमें बल देते है, जिससे हम भौतिक चीज़ों के आसक्ति से निची देख जाये, और बलराम जी हमें कृपा करते है, जिससे हम भक्ति में, कृष्ण के स्वर्ण, कृष्ण के सेवा में हम रमन कर सके, राम का अर्थ है, राम शंदर बगवान है, तत्व के अर्थ, तत्व के स्थर पर, राम का अर्थ है कि जो, जो रमन करते है, जो रमन करते है, जो रमन दिलाते है, रमती, रमयती, तो बलराम जी की कृपा से यह दोनों होता है, कि हमें भौतिक आसक्तियों से, जो है, वो मुक्ति मिलती है, और जो आध्यात्मिक आसक्ति है, उसमें हमें और उच्छी मिलने जाती है, अगर यह दोनों, अगर साथ में हो जाता है, तो फेर हमने भौवन्धन से, काफी आसानी से निकल सकते हैं, तो यह दोनों बलराम जी की कुरुपा होती है, कि वो आध्यात्मिक जगत है, भौति जगत में लिंक है, वो लिंक कैसे काम करता है, वो लिंक बलक और राम है, तो बलक इसके लिए, बलक to fight माया, अगेंस्ट माया, और राम क्या है, वो रमन जो है, इन कृष्णा, जब हमें कृष्णा में आनन लेना है, तो यही पॉंट है, हम अंत में इसी पॉंट में वापस आएगे, पर यह गुरु तत्व का भाव है, अभी साधार अंत्याँ, जब हम गुरु की भुमिका को देखते हैं, तो हम उनको बहुत करुणा में मानते हैं, वो बहुत, जो कोई गलती करता है, उसको माफ कर देते हैं, वो हर बार गुरु, जो गुरु पुरुपा बहुत महतुपुर्ण मानते हैं, असत्य है वो, पर कैसे है, कि जब गुरु किसी शिश्च को उद्धार करने का प्रयाज कर रहा है।
तो वो शिष्य को भी सहयोगी होना ज़रूरी है। अगर शिष्य सहयोगी नहीं होता है, तो फेर गुरू भी उसका उद्धार नहीं करपाएगी। रोकि भगवान किसी की स्वेच्छा के परे नहीं जाते हैं।
तो भगवान की लीला है, उसको हम चार स्थर पर समझ सकते हैं। इसको इंग्लिश में हम कह सकते हैं, लिल या अकरोनिम है। तो यह अलग-अलग स्थर पर भगवान की लीला समझ सकते हैं।
यह भकतिविन और ठाकुर अपने चेतने शिक्षाम्रुत में बताते हैं, सबसे एल जो है वो लिटरल स्थर है। लिटरल मतलब क्या? यह कहानी ऐसे होगी, इसने ऐसे किया, इसने ऐसे किया।
और जब लिटरल स्थर पर कहानी सुनते होते हैं, तो उसमें डरामा होता है। यह पहली बार सुनने में बड़ा मज़ा होता है, तो डरामा होता है। जब हम लिटरल स्थर पर सुन रहे होते हैं, तो फिर हम जब ही कोई कहानी सुनते हैं, कुछ नए कुछ बताओ मुझे।
तो फिर उनको भी कुछ न बगवान समझना चाहिए। तो इसलिए मन उरंजन होता है। तो फिर उसके बाद में है एक नयतिक स्थर।
एथिकल मतलब हम बगवान के लिए देखते हैं उसमें कि बगवान क्या कर रहे हैं, और बगवान के भक्त क्या कर रहे हैं, उसमें कौन से भक्ति ने क्या चुनाव किया, और वो क्या गलत था और क्या गलत नहीं था, इसमें हमको decision making, हमें खुद फैसला कैसे करना है हमरे जीवन में, इसके लिए नयतिक स्थरपे मारग दुशिन मिलता है। ऐसे फिर हम कह सकते हैं कि जब प्रभुपा जी किर्षिन और अर्जुन के वारे में बात करते हैं, तो कहते हैं कि जब अर्जुन को युद्ध करना पड़ रहा है, तो अर्जुन तो युद्ध करने में नहीं लिगता है, विचार कर रहा है, युद्ध करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए।
ऐसा जो जिम्मेदारी से विचार कारे करता है, ऐसा व्यक्ति आध्यात्मिक क्यान के लिए बहुत बात रहा है। तो ये नयतिक स्थर कहा जाता है। पिर इसके परे, पर विकेसे नयतिक स्थर में, एक महत्र पुर्ण है समझना, कि जब हम नयतिक स्थर पर देखते हैं, प्रभुपात जी, गीता के, अगर हम देखते हैं, गीता के जुगधार पर देखते हैं, तो लिटरल सर पर क्या है?
कि ये बहुत एक बड़ा वार होने वाला है, और वार के बीच में विजदम आता है, रण भुमी पर कोई आध्यात्मिक शिक्षन दे रहा है, ये बढ़ा दिल्चस्प लगता है, तो ड्रामा के दूसरे से लोगी अच्छी बात है, तो ये लिटरल हो गया है, अभी एथिकल जब आते हैं, तो प्रभुपा जी पहले क्या बोलते हैं, अगर पहला आध्याय देखते हैं, तो उसमें बोलते हैं कि अर्जुना क्या है, विचार वन्त है, अर्जुन थौटफुल है, और ये अच्छा है, पर दूसरे आध्याय में तुलिएं क्या बोलते हैं, अर्जुन रो रहे होते हैं, तभी वो कहते हैं, कि ये ऐसे रो रहे हैं, ये अज्ञान का लक्षन है, ये आसक्ती का लक्षन है, ये मोह का लक्षन है, और भगवान जो है, ऐसे अज्ञान, ऐसे आसक्ती, ऐसे मोह का अल्ट करने के लिए अर्जुन आसक्त है, अर्जुन अटैच्ट है, तो क्या अर्जुन तौर्टफुल है, विचारवन्त है, या अर्जुन आसक्त है, क्या सत्य है, तो जो एथिकल स्थर पे हम देखते हैं, तो नैतिक स्थर पे, हमें क्या देखना है, क्योंंकि ये सब महान हस्तिया होते हैं, कहीं भगवान के पार्शेज होते हैं, तो क्योंंकि ये देख सकते हैं, पर उससे महतुर्ण क्या है, कि हमें देखना है, कि सही क्या सीख सकता हूं, तो उस दुश्ची से क्या है, हम देखेंगे कि, कि जब एक बड़ी जिम्मेदारी का कारी करना है, तो सोच समस्य करना है, उससे अपेख्षाय से ये कर दो, ऐसे नहीं, तोड़ा विचार कर दो, पर क्या ये भी सीख सकते हैं, कि बावना होंके भी बोर नहीं हो जाना है, तो नेतिक स्थर पर हम, जो है सीखने का प्रयास करते हैं, तो आज हम, ये जो अधिकान शुक से नेतिक, और अगला आखरी जो स्थर है, तो देखें, तीसरा है, जो अलेगौरिकल है, अलेगौरी मतलब प्रतिकात्मक, प्रतिकात्मक रूप में क्या है, जब यनमाश्टमी होने वाली है, जब यनमाश्टमी में कृष्ण का आवेभा होता है, हम जानते हैं कि उसके पहले, देवकी के छे गर्ब होते हैं, अभी छे जो उनके संतान होते हैं, वो क्या बताय गया है, वो छे शल्ड रिपो के वाले बताय गया है, काम, क्रोध, लोब, मोह, मन्मात सरी, अभी वो छे उनके संतान थे, सही में संतान जन्म हुआ था, उनको बड़ी नुष्ठूरता से कमसे ने मारा भी था, पर साथ-साथ क्या है, वो कुछ प्रतीक है उनका, प्रतिनित्व करते हैं, तो यहाँ पर हम संबॉलजम देखते हैं, इस संबॉल का क्या आरत है, तो कभी प्रकुपात जी कहते है, कि ये कुरुक शेत्र जो है, वो एक तरह से हमारे चेतना की समान है, और हमारे चेतना में उद्ध हो रहा है, कौरव है और पांड़व है, तो हमें प्रतिकात्मक रूप से भी कभी देख सकते हैं उसको, तो इसमें क्या है, हमको थोड़ा बॉद्धिक स्थर पे, इंटेलेक्शल स्टिमिलेशन होता है, इसका अर्था यह है, इसका अर्था यह है, तो कई बार हम देखते हैं कि, इस प्रकार का स्टिमिलेशन बताया है, और आखरी जो है, वो है डिवोर्शनल या ट्रांसेंडेंटल, इसमें क्या है, केवल इस तरपे हम रेलिश करते हैं, हम क्या करते हैं, आनन लेते ही लगते हैं, सब कुछ भगवान की इच्छा के लिए हो रहा है, सब कुछ भगवनत की प्रसनता के लिए हो रहा है, तो अगर हम कई कई जो शर्यंत्र करती हैं, जिसे राम बनवास चल जाते हैं, तो उसको हम अध्यात्मी के दुश्य देखें तो क्या है, भक्ति के दुश्य देखें तो क्या है, यह सब भगवान की योजना थी, कई कई भी भगवान की योजना में सहवागी हो रही हैं, और इससे भगवान बनवास जाते हैं, पर अगर यही स्थर पर हम देखेंगे, तो हमें सीखने के लिए कुछ ज़्यादा रहता नहीं है, सब कुछ भगवान की योजना है, अगर नेतिक स्थन पर हमें देखना है, कैसे एक विक्ति दूसरी विक्ति को मैनिपिलेट कर सकता है, कैसे मन्थरा के प्रभाव से कैके ही मूखत हो जाती है, अगर यह हमें समझना है, तो अगर हम कहेंगे, अरे जो मन्थरा ने बोला वो ही भगवान की योजना थी, कैके ने जो किया वो ही भगवान की योजना थी, तो फिर हमारे लिए सीखनी के लिए कुछ नहीं रही था, तो इसलिए क्या है, अलग-अलग स्थर पर हम ये लीलाओं को देख सकते हैं, प्रभुपाद जी भी एक तरह से बता रहा था घीता में, वो जो एथिकल स्थर पर बता रहे है, कि अर्जुन आ सकता है, अर्जुन चारवंत है, पर कभी-कभी प्रभुपाद जी जब घीता के वाले में डिबोर्शन स्थर पर बोलते हैं, कहते हैं कि अर्जुन का जो सारा मोह था, वो कृष्ण की योजना से आया था, और कृष्ण की योजना से आया था, अर्जुन का जो मोह है, क्या है, वो कृष्णा’s प्लान, वो कृष्ण की योजना है, तो यह जो अर्थ है, दो अलग-अलग स्थर, प्रधान हमारे लिए क्या है, इसमें यह चार लेवल्स में से एथिकल और डिबोर्शन हैं, यह महतू पुर्ण है, तो अभी मैं, जो बल्राम, क्योंं इंटोड़क्शन दिया मैंने, कि मैं पहले मैं एक चीज़ बताई, गुरु तत्व बताई मैं, फिर मैंने दो लेवल्स, चार लेवल्स बताई, क्योंंकि वो देख रहे है, कि आज हम बल्राम जी की लीला, यह दो लेवल्स पर देखेंगे, एथिकल लेवल पर और डिवोशनल लेवल पर, नयतिक स्थर पर और भकती के स्थर पर, तो पहले नयतिक स्थर पर हम देखेंगे, और फिर हम भकती के स्थर पर देखेंगे, तो नयतिक स्थर पर हम देखेंगे कि, जो बलराह और दुर्योधन की जो मैत्री होती है, का जो सम्मंद होता है, वो क्योंं होता है, और उससे क्या समझा जा सकता है?
अभी अगर हम महाभारत की कहारी देखते हैं, महाभारत और रामायन, इन में कई फरक है, और इन फरकों में क्या है, कि एक तरह से, महाभारत और रामायन में, रामायन में क्या है, जो असुर है, वो असुर राक्षस है, असुरी प्रवर्ती की जो लोग हैं, वो राक्षस हैं, रावन राक्षस होता है, और राक्षस और मानव में युद्ध है, पर महाभारत में क्या है, वो मानव और मानव में युद्ध है, तो जो कुछ मानव है, जो दुरियोधन है, वो असुरी प्रवर्ती का है, असुरी भाव है उसमें, पर रावन में, इसलिए रावन का असुरी रूप था, वैसे दुरियोधन को असुरी रूप नहीं थे, वो अभी मानव है, और वास्तो में इस युद्ध में, जो कवरव है और पांडव है, इसमें जो राक्षस थे, वो दोनों पक्ष में थे, एक राक्षस पांडव के पक्ष में था, वो कौन था, गटोटकच था, वह भीम का पुतर था, जो गटोटकच था, और यहाँ पे एक अलंबुष नाम का राक्षस था, काफी शक्ताशाली था वो, और फिर अंत में उसको गटोटकची माते है, अलंबुश पहले अर्जुन के कुटर इर्वान का वध करता है, वो इसके बाद में गटोटकच अलंबुश का वध करता है, तो यहाँ पे, तो यह मानवों और राक्षसों भी होते नहीं हैं, यह मानवों और मानवों में ही होते हैं, और इसका महत्व क्या है, कि जो मानव शरीव में है, मानव शरीव में किसी का भी उद्धार हो सकता है, साधा हैं कि हर जीव का उद्धार कहीं से भी हो सकता है, पर मानव शरीव में हर जीव का उद्धार हो सकता है, तो अभी, जब आज हम कहानी पढ़ते हैं, महाबारत कहानी पढ़ते हैं, तो उसमें ऐसे लगता है, हाँ यह तो स्पष्ट है, दुर्योदन भिलन है, वहाँ पे जो पांड़व है, वो हीरो है, पर उसी कहानी के वृत्तान्त में जाते हैं, जब कोई नया पच्चा जन लेता है, तो माँ के गर्ब से जन लेता है, तो उसके सिर्फेंडि का तो भिलन है, ऐसे नहीं होता है, क्या होता है?
हर एक जो विट्सी होता है, वह उसमें अच्छाई, बुराई, सब होती है, तो क्या किस परकार से कारे करता है, वह किस परकार से वह संग लेता है, उस सब से उस पे प्रभाव होता है. तो अभी जब ये पांडवों में, जो गुरुवंश जो होता है, उसमें कवरों और पांडव होते हैं, तो एक तरह से ये हस्तिनापुर जो है, ये एक प्राचीन राज्य है, प्राचीन राज्य नहीं, प्राचीन शहर है, काफी समय से था वह, और वहाँ पे जो होते हैं, दितराश्टर और फिर दुर्योदन होते हैं, उसके बाजु में ये नया राज़ आ जाता है, नया क्योंंसा होता है वह, वह खांडव होता है वहाँ पे, इंद्र प्रस्था आ जाता है, तो ये एक इंशन, उस समय से भी काफी समय चलने वाला है, हस्नापुर होता है, जब इंद्र प्रस्था आ जाता है, तो उस समय ये एक तैसे नया राज़ हो, नया, कब समय शहर होता है, तो अभी जब ये नया शहर बनता है, ये पांडव बड़ी महनत से, बगवान की कुरपा से, मैदानों के वरदान से, वह खांडव का जंगल जो होता है, उसको एक बहुत ही एश्वरेशाली शहर बना रहते है, उसके पिछे राज़ बन जाता है, फिर वह राज़ इसको यज्ञे करते हैं, और फिर राज़ इसको यज्ञे में, जो दुरियोधन जो होता है, सब आते हैं, तो वहाँ पर दुरियोधन भी आता है, सब विश्वसी लोग आते हैं, कृष्ण भी आते हैं, तो अभी हम यहाँ पर देख रहे हैं, कि जो कृष्णा और आर्जुन का सम्मन्द कैसे बनता है, और बलराम और दुरियोधन का सम्मन्द कैसे बनता है, और इसमें कैसे दुरियोधन नीची जाता है, और अर्जुन उपर जाते है, तो साधारनत है हम, जब हम गुरू और शिष्ण के बारे में बात करते हैं, तो क्या है?
हम कई बार यह देखते हैं, कि जो शिष्ण गुरू से गुरू के आदेश का पालन कर रहा है, गुरू के जो कृपा है उसको सुखार कर रहा है, तो कई बार हम कहते हैं, शिष्य का जो एफ़र्ट होता है, कि अरे मुझे इतने सारा जब करना है, इतने सारा नियम पालन करने है, यह नहीं करना है, वो नहीं करना है, तो यह सारे जो नियम होते हैं, हम शिष्य को कितना परियास करना होता है, उस पर जोर देते हैं, और यह ज़रूर ही है देना, हमें प्रयास करना है, पर एक तरह से, इसमें गुरू की दुष्टी से भी एक रिस्क होता है, गुरू को अपने शिष्य बनाते हैं, तो क्या वो व्यक्ति परिवर्धित होगा, क्या वो व्यक्ति प्रगती करेगा, प्रहुपाद जी अमेरिका में गए, तो उनके लिए, केवल एक शार्रिक स्थर पर ख़त्रा नहीं था, कि वो हार्ट अटाक आया था, सप्टर साल के ते में, पर उसके आतरे से बड़ा ख़त्रा क्या था, कि जो लोगों को वो उद्धार करने वाले हैं, क्या वो उसकार करेगे और नहीं करेगे, क्या वो परिवर्धित हो गई या नहीं हो गया, क्या वो अपने बल और राम है, क्या वो पूर्वा आ सकते है, उसे पूर्वा नीचे खीचे जाएगे, तो यह बहुत बड़ा खतरा था, और शुरुवात में ही ऐसे हो गया, कि प्रवापाजी जहां पर रहे थे, माँपे एक अमेरिकन युख था, डेविड रह रहा था, डेविड आलन, और वो बोलना था, स्वामजी, मैं आपका शुरुवा बनना चाहता हूँ, अब प्रवापाजी अपने भारत में खद में दिखते है, कि शायद वो पहला अमेरिकन विश्ट बन जायेगा, और वही व्यक्ति क्या करता है, वही उनके खिलाव चले जाता है, वही डर्फ लेता है, प्रवापाजी को आकरमन करने के लिए आ जाता है, तो अभी यह जो है, कि हम कहीं जाते हैं प्रचार करने के लिए, मान लिए वैसे, वो कोई हाई क्राइन एरी है, फिर भी हम थोड़ा रिस्ट कर, थोड़ा रिस्ट कर जाते हैं, बुना होता है वहाँ, कि कोई चोर हमको पकड़ लेगा वगरे, फिर भी हम वो रिस्ट करके वहाँ प्रचार करने के लिए आते हैं, यह बक्त सिंसियर है, तो यह लोग हैं सिंसियर, उनको प्रचार करने जाते हैं, तो हम जब प्रचार करने जाते हैं, तब ही कोई जो हमसे चोरी करना जाता है, हमसे मार्फिट करता है, तो उससे भी हम सोचेगे कि, अरे मुझे हमें प्रचार करने जाना है कि नहीं, पर हम जहां प्रचार कर जाते हैं, जिसको प्रचार कर रहे हैं, वही हमसे चोरी करने लगता है, वही मार्फिट कर लगता है, तो हम बोले, यहां प्रचार कर नहीं है, आ रहे हैं कि उन्हें से, तो एक जब जो गुरू किसी का प्रचार करते हैं, किसी का उद्धार करते हैं, तो यह गुरू के भी रिस्क होता है, क्या यह व्यक्ति परिवर्तित होगा कि नहीं है, और यह जो रिस्क लेना, यह उनके करुणा का लक्षन होता है, यह कमपैशन का लक्षन होता है, तो जो बलराम है, उनका दुवियोधन के साथ जो सम्मन्ध है, वो क्या है, जो गुरू’s कमपैशन है, वो गुरू की करुणा है, पर वो कैसी करुणा है, वो एक रिस्की कमपैशन है, करुणा जब होती है, करुणा में भी खत्रा होता है, कि क्या दुवियोधन भी परिवर्तित हो सकता था, अभी हमको अभी वक्तर नहीं होने वाला परिवर्तित, पर उस समय दुवियोधन ने क्या देखा, कि जो अगर मैं यह उत्तान पताओंगा, दुवियोधन और बलराम के वक्ति से पताओंगा थोड़ा, ताकि हम बलराम जी ना जो दुवियोधन क्या किया, उसको भी समझने का प्रयास कर सकते हैं, कि अभी जब कोई राज परिवार होता है, तो उसमें अगर राजा होता है, तो उसको अपने बच्चा चाहिए होता है, क्योंंकि अगला राजा कौन बनेगा, राजकुमार कौन है, तो उसको इंग्लीश में एर कहते हैं, जो एर मतलब क्या, अगला राजकुमार है, जो भी है बच्चा है, अगला राजा बनेगा, तो अब एक बच्चा हो गया, उसके बाद में राजा राणी को जुन्ता होती है, अगर इस बच्चे को कुछ हो गया, इस बिमार हो गया है, इसकी मत्यों हो गया है, हमें कोई और चाहिए, तो पहला जो पत्ता होता है, उसको एर बोलते हैं, उसकी बाद में होता है, उसको स्पेर बोलते हैं, तो पहले एर आता है, फिर स्पेर आता है, अभी जो स्पेर है, उसकी परसिदे बड़ी मिछे तरह होती है, साधायन तो कोई भाई चाहेगा नहीं कि मेरे बड़े भाई के लिए कुछ बुरा हो जाये, पर जब तो उसके बड़े भाई के लिए कुछ बुरा नहीं होगा, ये कभी राजा नहीं मनने वाला, तो अभी क्या होता है, जब बच्चपन में दुर्योधन जो होता है, सोचता है कि मैं एर हूँ, मैं राजकुमार हूँ, क्योंंकि पांड़ो जंगल में चल, पांड़ो जंगल में चले गए है, उनको ऐसे शाप भी मिलाते है, उनको बच्चे होने वाले नहीं है, अगर वो आपस आएगे कि नहीं पताएगे, जब पता भी चल जाता है कि बच्चे हो गए उनको, तो शायद वो आपस आने वाले है, कुछ पता नहीं है, तो जो आखों के सामने है, वो राजकुमार कौन है भी, वो जो दुर्योधन ही है, तो उसको लगता है मैं राजकुमार बनने वाला हूँ, और जब इस तरह से होता है, वो बड़ा हो रहा होता है, थोड़ा उसको एंटाइटल भी होता है, तो गर्वा होता है, अंकार होता है, मैं यहाँ पर राजकुमार हूँ, यहाँ मेरा सब कुछ चलता है, उसकी पता तो आसक होते होते, थोड़े अंदे होते होते होते होते हैं, तो फिर पांड़व वापर आते होते हैं, तो जब पांड़व वापर आते होते हैं, तो युधिश्टिर क्या होता है, जब ये पहले युधिश्टिर जब आ जाते हैं, तो क्या होता है, अभी शायद युधिश्टिर राजा बनने वाले हैं, तो दुर्योधन को लगता है कि पहले मैं एर हूँ, पर अचानक फिर वो दुर्योधन क्या होता है, वो स्पेर बन जाता है, तो अभी मान लीजे किसी कोई कम्यूनिटी है, उसमें एक बहुत अच्छा कीर्तन है, और जब कोई बड़ा कीर्तन करना है, उसे व्यक्ति को सब बोलते हैं, तुम कीर्तन करो, पर उसी कम्यूनिटी में कोई नएया भखता जाता है, और वो उनसे अच्छा कीर्तन करता है, और अभी जब कीर्तन आता है, लोग उनके सामने आते हैं, उसे बाजो कोई होते हैं, तो तुम कीर्तन करो, तो अभी ऐसे होगा, तो क्या होगा, उस व्यक्ति को नैचिरली इंसेक्यूरिटी होगा, अरे ये क्या हो गया, ऐसे क्योंं हो रहा है, अरे मुझे लगाता है, मैं राजा बनने वाला हूँ, पर मैं सब कुछ भी चला गया हूँ, से घर में भी ऐसे होता है, कि घर में एगर एक बच्चा होता है, तो माता-पिता की जीवन की केंडर होता है, भी नया बच्चा आ जाता है, चोटा बच्चा, तो बड़े बच्चे को लगता है, अरे मुझे कुछ जहानी दे रहा है, तो ये माता-पिता की बहुत बड़ी जम्मेदारी है, कि वो चोटा बच्चा है, बड़े बड़ा बच्चा चो है, चोटे बच्चे को कमपेट्र के रुप में ना देखे, इसके भी प्रित क्या देखे, कि इसकी देखबाल भी तुम्हारी जम्मेदारी है, अभी तुम एक तरह से, हम तुम्हे देखबाल कर रहे थे, अभी तुम बड़े हो गए हो, और चोटे बच्चे को बड़ा हो गया है, बहुत अच्छा लगता है, बड़े हो गया मतलब, तुम भी देखबाल कर रहे हैं, तो क्या है, कहीं भी, हम एक केंडर होता है, और वो चला जाता है, तो क्या होता है, तो तोड़ा इंसकील होता है, यह सभाविक है, अमेरिका में कहीं ऐसे जगह है, जो बड़े बड़े शेहर हैं, शिकागो या लॉस ऐंजिल्स, उसमें, एक अगर आप कहीं वहाँ पर्क में जाओगे, वहाँ पर एक वीचितल चीज देखते हैं, क्या है कि मैं कैलिफोर्निया में था, वहाँ पर एक प्रोग्राम के लिए जा रहा था, वहाँ पर आगर कार था, कार पर कुछ एक कोट लिखा था, कि तो मैं लोगों में जानता हूँ, तो मैं लोगों में जानता हूँ, तो मैं लोगों में जानता हूँ, जितने मैं और लोगों को जानता हूँ, उतना मेरे कुटे के पती प्रेम बढ़ते जा रहे हैं, मतलब क्या है, लोग आप थो डिसस्पॉइंट करते हैं, लोग विश्वास जात करते हैं, तो लोगों को छोड़ो, कुटों से विश्वास करते हैं, तो अमेरिका में जो वाइट लोग हैं, उनके परिवारों में, जितने बच्चे हैं, उससे ज़्यादा कुटे हैं, तो अगर आप पार्थ में जाओगें, तो कोई पार्थ में होता है, कि बच्चे को खेलने के लिए माता, पिता लेके जाते हैं, पर वहाँ पर पार्थ में ज़्यादा लोग, अपने कुटे को वाप के लिए जाते हैं, बच्चे कम दिखते हैं, यह वाइट परिवारों में हैं, जो इमिग्रेंट्स हैं, जो ब्लाक्स हैं, या आरब्स हैं, इंडियन्स हैं, चाइनीज हैं, पर क्या होता है, अगर कोई परिवार है, उसमें केवल एक कुटा ही है, पर बाद में वो पती पती फैसा करते हैं, वो बच्चा चाहिए, तो कही बाद क्या होता है, वो कुटा बच्चे के परती रिशान हो जाता है, और कही बाद वो बच्चे को कुटे से सरभित करना पड़ता है, और वो कभी भी ऐसे होता है कि माता भी तो चुनना पड़ता है, कुटे को छोड़ता है कि बच्चे को समभाज रखे, तो फिर पॉइंट यह है, क्योंंकि पहले वो जो घर में जो थे, पर अभी नए बच्चा आ गया है, तो खास कर कि अगर कोई पिट बुल हो गया है, तो थोड़े जो खतरना कुटे होते हैं, वो कभी वो बच्चे को काफ़ी जोखनी कर सकते हैं, मेरा पॉइंट यह है, कि जो इंसक्यूरिटी थी होती है, यह सबको होती है, और यह सवभाविक है, पर इंसक्यूरिटी से एक अगला स्टेप आता है, एनवी, इंसक्यूरिटी का मतलब क्या है, क्या मेरी अभी कुछ कीमत रही है, मुझे कोई बुचेगा कि नहीं, कि मुझे कोई कीमत है, मेरी कोई कीमत है, यह सवाल आना सब में सवभाविक है, सब में यह सवाल आएगा, क्योंं क्या होता है, जगत पर तुलना होती है, हम बोले तुलना मत करो, पर तुलना तो होती ही जगत में, हमसे अच्छा कोई दिखेगा था, हमको तोड़ा इंसक्यूरिटी होता है, पर इंसक्यूरिटी, इरिशा मतलब क्या है, मैं कोई अच्छा होता है, मैं कोई अच्छा होता है, कि मेरे कुछ अच्छा है या नहीं है उससे, उससे एन्वी क्या है, क्योंं आप अच्छा होते हैं, तुम इतने अच्छे क्योंं, तो कोई बहुत अच्छा कीरतन करता है, तो उदर ही कितना अच्छा कीरतन करता है, तो हमारे मन से आओत है, कितना परसाद काता है, दिखाया तुमने, तो क्या है, वो वेक्ति को हम नीचे दिखाने का प्रयास करते हैं, तो एक दरह से एनवी और आदर एक ही हैं, क्या एक है एनवी और आदर, इरशा और आदर एक ही हैं, नहीं, अलग हैं हम कहेंगे, एक तरह से अलग ही है, सही है, एक है और अलग भी है, क्या है, आदर जो होता है, वो हम आनन से देते हैं, जो इरशा होते हैं, दुख से तुम इतने अच्छे क्योंं, तो जो respect होता है, वो willingly, वो हम स्वेच्छा से और happily देते हैं, अरे, तुम इतना अच्छा गाते हो, तुम इतना अच्छा परोशन करते हो, तुम इतना अच्छा डिक्टिस का decoration करते हो, तुम इतना अच्छा करते हैं, आदर होता है तो हम आनन से बोलते हैं, पर इरशा होती हैं तो क्या होता है, वो अनिच्छा से और दुख से बोलते हैं, कि unhappy, यह इतना अच्छा क्योंं है, मैं इतना अच्छा क्योंं नहीं हूँ, यह मुझें अच्छा क्योंं है, तो अभी जो insecurity, असुरक्षित्ता महसूस करना यह स्वाभाविक है, यह एक तरह से अनिवार्य है, पर उस से इरशा होना, वो भी एक स्वाभाविक है, पर वो इतना अच्छा नहीं है, तो यह stage 1 है, यह stage 2 है, पर यहां से तीस्रा stage जो आता है, वो है शत्रत्व, इरशा जो होती है, यह मानसिक सर्ग होती है, पर जब हम इरिश्मा पर कार्य करने लगते हैं, तो तभी क्या होता है, वो शत्रत्व बन जाता है, तो क्या है, तुम इतना अच्छा गाते हो, तुम इतना अच्छा कोई एचा, कोई एभी दो टेनिस प्लेर हैं, इंडिया क्रिकेट, इंडिया पाकिस्तान, इंडिया इंग्लेंड, इंडिया उस टाम में क्रिकेट मैच चलता है, दोनों परतिस्पर्धी हैं, तो उस में समता है, यह इतना अच्छा बॉलर है, यह इतना अच्छा बैटस्पन है, यह इतना अच्छा फिल्डर है, तो क्या है, वो इतना अच्छा है, तो हमें भी और अच्छा बनना चाहिए, तो परतिस्पर्धी होना एक अच्छी बात है, दोनों उससे अच्छा होने का प्रेणाम मिलते हैं, पर मान लेगे कोई दो प्लेयरस में टेनिस मैच है, और टेनिस मैच के पहले एक प्लेयर क्या करता है, दूसरे प्लेयर के खाने में कुछ जान देता है, इसके लिए वड़ी मैच के पहले विमार हो जाता है, विमार हो जाता है, फिर खेल नहीं पाता है, उसके बिनाई जीत जाता है, उससे बड़ी क्या है कि वो दूसरे प्लेयर को मारने के लिए गुंडिल आता है, उसको इं पहले क्या है, इंसेक्यूरिटी, ये सब में आती है, अगर सब में आएगी, फिर उससे एन्वी वो इतना अच्छा नहीं है, पर वो भी आ सकती है, पर जो एन्मिटी है, वो नहीं आनी चाहिए तो अभी दूर्योधन में क्या इंसेक्यूरिटी थी, इरिशाथ थी या शत्र तो था पांड़ो के परतिये, तीनो था पर क्या शत्र तो दिख गया, तो अभी किसी में अगर अभी हम देखते हैं, तुम तो इतने बुरे हो, तुमने इतना गुनासपत कारे किया है, तुम कभी कभी करना पड़ता है, वो क्या है, वो कारे ऐसे होता है, तो हमारा जो परिस्थिती होता है, हमारा जो सिच्वेशल होता है, अगर हम समच्चते हैं, तो our situation, it explains our emotions, कि तुम्हें ऐसे क्योंं लगा, एक कोई भाई बेहनों में कभी कभी जगडा हो जाता है तो एक भाई दूसरे भाई के बारे में एक भाई बेहन दूसरे बेहन के बारे में इसके बारे में बुरा बोल देती है इसके बारे में बोल देती है इसके हल इसे हुआ बेहन उसे को बढ़नाम कर देती है तो भी तुम्हें अपने बेहन के बारे में क्योंं किया?
तो क्या है? कि उसको इंसिक्यूरिटी होती है आपका इंसिक्यूरिटी होती है तो आपका अपने बारे में क्योंं किया? पर जो भी हमारे इंसिक्यूरिटी को न हो अगर हमारे मन स्थिती, परस्थिती में समझ सकते हैं हमारे भावणाएं हम समझ सकते हैं पर जो तुम्हारे कार्य है उसके तुम्हारे माँफ नहीं कर सकते हैं अभी दुर्योदन को लगेगा कि अरे मैं तो सबसे शक्ति चाली था ये भीम कहां से आगे मुझसे वाल शक्ति चाली बन लिया है तो उसको असुरक्षित्ता लगना ही सवभाविक है पर उससे वो भीम को जहर देके मार डालना क्या ये असुरक्षित्ता है?
क्या ये इरिशा है? ये क्या हो गया? चत्रुत्व हो गया है तो जो कोई भिलंडी होता है उसकी भी अगर हम बावनाएं समझते हैं इससे ये नहीं कह रहा है कि ये भिलंडी अच्छा लिखती है पर वो उस प्रकार से एक भाई, दूसरे भाई को एक चौतिला भाई क्योंं बलाओंगा?
चचेरा भाई, चुंता भाई, जो भी है, कजिन अपने भाई को जो मार रहा है वो क्योंं मारने पर आता है? तो उसकी जो कारी है वो थोड़ा समझ सकती है तो अभी क्या होता है कि जब कोई नौजवान हो जाता है उसके बाद में जो शारी खुरुद्धी है वो कम हो जाती है वो क्या है? आपका हाइट जितना है वो 8, 17, 18, 20 साल तक बढ़ता है उसके बाद में कितने भी एक्सरैस कर आपका हाइट नहीं बढ़ने वाला है और कुछ मुझीस में दिखाते हैं कि आप बहुत एक्सरैस कर लो आप बहुत पहलवान बच जाओगे पर वो शरीर की बुद्धी कितनी होती है उसका थोड़ा लिमिटेशन होता है तो अभी क्या होता है भीम और दुर्योधन में भीम शारिक स्थर पे दुर्योधन से इतना अच्छा होता है कि दुर्योधन को कोई आशा है नहीं है कि भीम का वो सामना कर सके कि वो एक तरह से उससे बहुत जादा स्टॉंग है अभी दोनों गदा में युद्ध करते हैं और दोनों गदा युद्ध में बहुत प्रवीन हो जाते हैं तो दुरोण के गुरुकुल में जब जाते हैं वो दोनों सीखते हैं दोनों में टालेंट होता है दोनों में कमिटमिल्ड होता है दोनों बहुत अच्छा बन जाते हैं अभी गदा युद्ध जो होता है वह एक तरह से वो प्रवीन्ता महतुब होना है उसमें पर अगर प्रवीन्ता equal है expertise equal है तो फिर वो स्ट्रेंथ की बात आती है जो ज़्याला शक्ति शाली है वही क्या करेगा वो जीतेगा तो अभी दुर्योधन को बहुत insecurity रहती है कि वो अभी किसी ने बहुत बुरा कारे किया है तो वो बुरा कारे क्योंं किया उसने क्या अभी जो कोई बुरा कारे करता है दो कारण हो सकते है वहाँ हमारा बुरा चाहता है या वो खुदी insecure है तुम रहोगे तो मेरी जीवन के कोई कीमत नहीं रहेगी और इसे तुम्हारे साथ तुम्हारे बारे में ऐसे बोला तुम्हारे साथ ऐसे किया जो किया बुरा है पर क्या है जो bad action होता है वो किसके कारण किया है महतव पुर्ण है वो जो insecurity से शत्रतु आता है पर किसी ने insecurity के कारण कारे किया है और किसी ने enmity के कारण कारे किया है तो तुम मेरा बुरा चाहते हो इसलिए तुमने ऐसे कारे किया या तुम्हें लगा कि तुम्हारी को कीमत नहीं है और ऐसा करने कि तुम्हें कुछ तुम्हें की कीमत मिल जाएगी यह फ़रक समझ रहे हैं आप कि मानने कि स्कूल में एक बहुत लोगप्रिय विद्यारती है और दुसरा को इतना लोगप्रिय नहीं है तो यहें जो लोगप्रिय विद्यारती नहीं है वो लोगप्रिय विद्यारती के बारे में कुछ अफ़वां पहला जाता है औरे इसने ऐसे किया उसने वैसे किया उसने वैसे किया और उससे क्या होता है वो लोगप्रिय विद्यारती बढ़ना हो जाता है तो अब यह जो किया बुरा किया तो यह क्योंं किया एक सफ़ता की मुझे तुम्हारा विनाश करना था दूसरा था कि अरे सब तुमको ही देखते हैं मुझे कोई देखता ही नहीं है मुझे भी कोई देखना चाहिए तो यह दोनों भाव अलग होते है कैसे है इन सिक्यूरिटी है एक तरह से इसको यह रीफॉर्मेबल है रीफॉर्मेबल मतलब अरे तुम भी अपना कुछ टालेंड देखो तुम भी अपना कुछ अप खुद डेवलब करो तुमारी भी अपनी जगह है तुमारी भी अपनी कीमत है तुमें मेरे बिनाश करने के जुरूत नहीं है शत्रुत्व है यह भी रीफॉर्मेबल है पर यह एटिस मच टॉफर है फार लेस रीफॉर्मेबल है तो साधारन्त है यहाँ जब हमारे साथ कोई कोई बुरा करता है तो यह बुरा क्योंं कर रहा है मेरे साथ मेरे इतनी निनदा कर रहा है मेरे इतना परिशान कर रहा है क्योंं कर रहा है अगर वो व्यक्ति हमको अच्छा नहीं लगता है तो हम कहेंगे यह मेरा शत्रुत्व है अगर हमको अच्छा लगता है तो हम कोई और कारण नहीं है क्या है कि अगर अमने कुछ खाना बनाया है कुछ केक बनाया है और दस लोगों के लिए केक बनाया है और दस पीसेज है एक व्यक्ति पाँच पीसेज खा लेता है तो अगर हमें उस व्यक्ति के बाद नकारत्मक भाव पहले से है कुछ इंद्धियों पे यंतरन नहीं हो गए पर अगर हमको व्यक्ति अच्छा लगता है तो हम बोले क्या अच्छा है इनको पता नहीं ता लिमिटेड है कि उनको बहुत भूँप लगी होगी क्या उनको अच्छा लगा इतना अच्छा लगा तो उनको खा लिया बाकि धान नहीं ना तो क्या है हम किस प्रकार से उस व्यक्ति को देखते हैं उसे हम एक्स्प्रेशन देखते हैं तो अभी जो बलराम जी है तो दुर्योधन ने कार ही किया है तो दुर्योधन ने पांड़ो के हाथ कुछ बुरा किया है अभी किस हद तक बुरा किया है किस हद तक वो जम्मेदार था ये पहले स्पश्ट नहीं था अभी अगर हम दुर्योधन के बुरे कार्या दिखते हैं दुर्योधन’s misdeeds कौन कौन से बुरे कार्या किया है उस दिखते हैं सबसे पहले विशान महा अगने भीम को जहर दिया उसके बाद में लाक्शा ग्रह लाक्शा ग्रह house of fire, house of light बोल सकते हैं सारे पांड़वो को जलाया हैं कपयास उसके बाद में विशान महा अगने उसके बाद में विशाद सभा आया है जो गैंबलिंग मैच है तो अभी जो अधिकांश बलराम और दुरियोधन का सम्मन्त जो बना वो इस परसती में बना बलराम और दुरियोधन का कब अभी जब भीम को जहर दिया गया वो पांडवों ने खुद बताया नहीं किसी को कि ये दुरियोधन ने किया था पहले तो भीम की इच्छा दिया जाकर दुरियोधन को पीटूगा दुरियोधन को सबक सिखाऊगा युदिश्चर ने कहा कि हम नए यहां पे आये हैं यहां पे नए आये हैं और हमारी बात कौन मानेंगे और कोई नहीं मानेंगे पता नहीं है यह क्या इसने मैंने कहा तुमने कहा ऐसे हो जाएगा केवल तुमारा वच्छन और दुरियोधन का वच्छन उसके खिलाग हो जाएगा यह तो अभी तुम कुछ मत करो इसके पारे हम शान्त रहे गए चोकन नहीं रहे गए शायद दुरियोधन भी शान्त हो जाएगा पर वैसे हुआ नहीं तो जो बीन को जहर देने का प्रयास क्या था यह सारे विश्व मिख्यात बात नहीं थी तो और जो लाक्शाग्रह में जो जल के जल गया था वो क्या एक हादसा था वो एक आक्सिडन्ट था क्योंं ऐसे हुआ था वो क्या उसमें दुरियोधन का कितना योगदान था कि कहे सकते है कि इतना बड़ा लाक्शाग्रह बनाना पांड़ो को ओपे भेजना ये सब उनके बिना नहीं हो सकता है पांड़ो को ओपे योजना के बिना नहीं हो सकता है पर इस किसी को बता नहीं था सबस्तुर्फ से तो बलराम की वो क्या देखा जब बलराम दुरियोधन से मिले तो ने देखा कि इसमें कुछ इंसक्यूरिटी है और देखा कि इसको पांड़ो के इरशा है पर ये तो साधारने सब में होता ही है ये इरशा जो है एक मानवी भाव है मानवी कमजोरी है पर ये मानवी भाव है सब में होता है तो उन्होंने क्या सोचा कि अगर इसको लगता है कि अगर भीम से मैं कमजोर हूँ भीम से आजा शक्तिशाली है उससे उसकी इंसिक्यूरिटी है तो अगर उसकी इंसिक्यूरिटी को निकाल देगे तो फिर क्या होगा उसको लगा मेरी कीमत है कोरो पांड़ो कीमत है इन दोनों में जगडा करने के क्या जुबत है तो ऐसे हो सकता है तो जो बलराम ची रे दुर्योदिन के साथ किया वो न केवल वो एसी तरह के दुर्योदिन इतना बुरा व्यक्ति है उसको क्योंं चिखाया आपने नहीं वो बुरा व्यक्ति है तो पता नहीं था अभी हम ये भक्ति के सरपे नहीं देख रहे हैं हमने चार लेवल देना एठिकल सरपे हम देख रहे हैं भक्ति के सरपे देखते हैं बगवान को सब कुछ पता है सब कुछ बगवान की लीला है तो उससे में सीखने के लिए कुछ नहीं है पर यहां पर क्या है जो दुर्योदिन में इंसक्यूरिटी है उस इंसक्यूरिटी को शायद रिमोग कर सकते हैं तो फिर शायद उसको लगा कि अरे ठीक है वो तो अपना अच्छा कीरतन करता है पर यहां पर तुम्हारे यहां पर एक बड़ा मंदिर है यहां पर सचसंग है यहां पर तुम जाकर कीरतन करो वो वहां पर कीरतन करेगा दोनों को अपनी परी जगा मिल जाती है तो क्या है वो इंसक्यूरिटी चल जाती है फिर इंसक्यूरिटी से एरिशा इतने आएगी एरिशा से एक शतुन तो होगा नहीं तो जो बलराम ने दुरियोधन के आथ किया वो दुरियोधन के कल्यान के लिए था वो सारे वमश के कल्यान के लिए था कि उनमें जग्रा कम हो जाए पर इसमें एक समस्या थी क्या होता है कि किसी को आप शक्ति देते हो वो शक्ति का क्या करता है वो उस पर निर्भर है वो अभी उसको जो इंसेकूरिटी है क्या भाव था उसको अभी जब इंसेकूरिटी है उसको अबिलिटी दी अबिलिटी क्या उसको गदा युद्ध में और इंप्रू किया तो अभी इंसेकूरिटी से क्या होना चाहिए वो इंसेकूरिटी क्या है तुम भी एकस्पर्ट हो भीम एक जग पर एकस्पर्ट है तुम एकस्पर्ट हो अभी भीम भी स्विखार किया था कि वास्तव में जहां तक युद्ध करना है उसमें वास्तव में दुर्योधन उसे आदा थोड़ा सक्षिव है अबिलिटी में तो ये उद्धेश था इस वास्तव था इंटेंशन कि ऐसे हो जाए ये इंटेंशन था पर जब हम कारी करते हैं किसी के लिए पर उसका क्या परिणाम होने वाला है उसको पता नहीं है तो क्या होगा वो अबिलिटी उसने क्या किया वो अबिलिटी से उसने और एन्मिटी को बढ़ा दिया ये जो है उसको जो शक्ति मिली उसका अपने शत्रु इरिशा को छोड़ने के लिए उप्योग नहीं किया शत्रु तो और बढ़ाने के लिए कर रहे हैं मतलब क्या है तुम यहां पर कीरतन करो तुम यहां पर आजा के कीरतन करो मैं यहां पर कीरतन करूँगा यहां पर अनुयाही बनोंगा और यहां के अनुयाहों को वहां पर भेज़ कर वो प्रोज़ेक को प्रोज़ेक कर दूना मैं तो क्या है यह जो है यह आपको कुछ अबिलिटी भी मिला है वो अबिलिटी का दुर्योग भी विक्ति कर सकता है तो यह नेतिक स्थर्प हैं से दुर्भाग के वश्च यह हो गया तो अबी आगे कैसे हो गया इसके पार में जब वो घटना घटी जहां पे दुर्योदन कितना खुरूर था कितना अधार्मिक था यह पुरा सपष्ट हो गया क्या हो गया जब दुरोपदी का अस्तरहन करने का प्रयास किया उसकी पार में जब पांडव अन्वास में गए थे वहाँ पे कृष्णा और बलराम उनसे मिलने आये थे कल मैं बताया था कैसे कि दुर्का बहुत सक्यूर था इसलिए कृष्णा को दुर्का की सर्फी की चित्ता नहीं थे हमेशा वो पांडव की साथ थे पर क्या जो असुर प्रवृत्ति के लोग होते हैं वो कहीं भी आके खत्रा कर सकते हैं तो एक शाल्व नाम का असुर था उसने शिवजी से वर प्राक्त करके एक हवाई जहाँज ले लिया उससे वो दुर्का पर आकरम करने लगे तो क्या हुआ?
ये थोड़ा time sequence हम देखते हैं इसमें कि जो राज सुरी जग्गिया हुआ और उसके कुछ समय के बाद वो gambling, जुआ कर खेल हुआ और ये सब कहां हो रहा है? ये सब देश के एक भाग में हो रहा है ये हम कहते है Northern India में हो रहा है राज सुरी जग्गिये इंद्रप्रस्थ में हुआ Gambling match कहा हुआ? हस्तिनापुर में हुआ पर ये दोनों हम कह सकते हैं North-East India में, North-North में कह सकते हैं पर उसके बीच में यो शाल्व जो है इसने द्वारका पे अटाक किया तो इसलिए जब कृष्ट राजवी जग्गी में थे तो अभी दुर्योदन वहाँ पे इंद्रप्रस्थ में रहा कृष्ण भी रहने के योज़ना थे उन्हें कृष्ण और पांडव में बहुत प्रियागा सम्मन था पर कृष्ण को छोड़के जाना पड़ा और फिर उन्हें शाल्व को हराया और जब शाल्व को हराया तो अभी ये जो ये अटाक काफी तमय तक चला इसके बाद में क्या हो गया?
पांडव अनवास में चले गया पांडव अनवास में चले गया तो ये जो युद्ध है यहाँ पे काफी समय तक चला और जैसे ही वो युद्ध खतम हो गया तो तभी कृष्ण को पढ़ा चला कि पांडव के लिए ऐसा हो गया है पांडव अनवास में है और जब कृष्ण बल्राम ची ने सुना क्या हुआ है कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष और फिर इसके बाद में जो 14 साल खतम होते हैं तो जो उत्तरा का विवा होता है विराथ युद्ध में तो इसके बीच में बल्राम और दुर्योधन में कई मीटिंग होते हैं पर अभी पांडव तो बाहर हैं पांडव वहाँ पर है नहीं और फिर जब विराथ में मिलते हैं उत्तरा का विवा विवनी के साथ होने वाला होता है तो तभी कृष्ण बल्राम वहाँ पर आते हैं और अभी वो विचार कर रहे है क्या करना है कैसे अभी आगे बढ़ना है तो बल्राम यूदिश्ची से कहते है कि यूदिश्ची तुम्हें तोड़ा नम रहना चाहिए कि तुम्हारा सारा बनवाज जो हुआ था तुमारे ही गलती थी किसे तुम्हें तुम्हारे भाईयों ले बड़ी महनत करते तुम्हें पुरा राज्या दिदा था और तुम्हें जूआ खेल के सारा राज्या गवा दिया तो तुम्हें राज्या गवाया है तुम दुलियोदन के पास जाओगे तो नमपता से जाओ तो ये सुनके पांड़ो पुरा शॉक हो गये ये क्या हो गया भाई?
ये क्या हो गया? ये कैसे हो गया? तो क्या हो गया?
कि जब बलराम दुलियोदन से मिलने गए तो दुलियोदन ने अपनी ही कहानी को भी बताई दुलियोदन ने क्या बताया? मैं जब राजशुरी यग्य में गया था मैंने पांड़ो की इतनी सेवा की मैंने उनके साहर में जो भेट थे वो सुखार किये मैं सोचता था, अभी सब अपनी ही कहानी बताता है मैं सोचता कि इतना बड़ा उत्सव हुआ है, पांड़ो ठक्के हो गे तो मैं उनकी महत करने के लिए स्वयं वहाँ पे रहा वो पांड़ो की महत करने के लिए रहा था वो पर कहा कि मैं उनकी महत करने के लिए वहाँ पे रहा पर जब मैं उनकी महत करने के लिए वहाँ पे रहा था वहाँ पे उनने मेरा अपमान किया हम जानते हैं कि वो जब गिर जाता है पानी में तो उसपे लोग हसते हैं तो उसको उनने मेरा अपमान किया और फिर उसके बाद में जुए के मैच की बारे में क्या होगी कोई भी घटना होती है वो किसी तरह से हम बोल सकते हैं और कैसे उसको स्पिन देते हैं कि अभी मान भी किसी को दिक्षा के लिए हम रेकेमेंट करना है तो अभी वो उसको पहले प्रॉबलन थे अभी वो स्टेबल है दो बाते हैं दो पॉइंट ही बोलेगे पर किस तरह से बोलेगे उसे पूरी कहानी बदल सकती है उसको पहले प्रॉबलन थे पर अभी वो स्टेबल है मतलब क्या है दिक्षा के लिए रेकेमेंट कर सकते हैं पर वो अभी स्टेबल है पहले उसको प्रॉबलन थे अभी क्या है वही दो चीज़े बोल रहे हैं पर दूसरे का मतलब क्या होता है प्रॉबलन थे अब जो आपसे प्रॉबलन आ सकते हैं बेटर रेकेमेंट बद कर सकते हैं तो वही फैक्ट को हम पुरा उल्टा स्पिन दे सकते हैं तो अभी जो हम देख रहे थे क्या की कैसे दुर्योधन ने द्रावपदी का इतना अपमान किया दुर्योधन ने बल्राम को क्या बताया कि यूधिश्टिर है इसको लोग धर्मराज बोलते है पर किस प्रकार का गैरजिंबेदार वेक्ति है ये कि अपना सारे धन समपत्ती वो जुए में लगा देगा सारे धन समपत्ती ही नहीं अपने भाईयों को जुए पे लगा देगा अपने भाईयों को नहीं अपने पत्मी को जुए पे लगा देगा जो वेक्ति अपनी पत्मी को जुए पे लगा सकता है वहाँ अपने घर का सरक्षन नहीं कर पाएगा वो राजि का सरक्षन कैसे करेगा क्या ऐसा वेक्ति कभी राजा बनना चाहिए एक बार हमने देख लिया है कि ये वेक्ति किस हथ तक गिर सकता है तो अभी उसको वापस राजा के बनना चाहिए क्या ये सत्य है अभी दुर्योधन वास्तो में उन्होंने युदिश्टु को मैनिपिलेट किया था युदिश्टु जुआ नहीं खेलना जाते थे जुआ क्योंं खेला?
क्योंंकि उनके वरिष्ट दुतराश्ट उनको मुला था कि मेरे वरिष्टु का पिता नहीं है मेरे चाचा है चाचा के आदिश को पालू करना चाहते है और जुआ चल रहा था युदिश्टु के अपेक्षा कि दुर्योधन वितराश्ट न पहले बोलते है ये तो हम एक केवल गेम खेल रहे है ये क्या होता है कभी कोई बड़ा फेस्टिवल होता है कोई तो वितराश्ट को गलती नहीं थी पर क्या है वो पूरा उसको स्पिरिंग डॉक्टरिंग कहते है पूरी कहानी उलती बता थी तो इसलिए नयतिक दुरिश्टी से क्या सभी है क्या गलत है ये समझना मुश्किल है इतना मुश्किल नहीं कि समझ नहीं सकते पाणड़ो थे ही नहीं वहाँ पर क्योंंकि वो एक वान्वास में थे और दुरिश्टी से हर जगह पर जाता था वहाँ पर बड़े बनाज जो उत्सव हुआ करते थे किसी की किसी की राजकुमारी का विवाह है कि किसी का कोई यग्या है और हर जगह पर वो बराबर युदिश्टी की बदनामी करता था किस प्रकार का व्यक्ति है जो सब कुछ गमा देगा ऐसे व्यक्ति कैसे राजा बन सकता है क्या ऐसे गमा देता है और इसकी कारण क्या हो गया जब वो संधी, जब युद्ध का समय आ गया तो ग्यारा अक्शोनी लोग ज़्यादा लोग कौरों के साथ गए कम लोग पांड़ों के साथ गए ऐसे नहीं कि जो कौरों के साथ लोग गए वो सारे लोग जो थे वो बुरे लोग ही थे वो दुर्योधन की कहानी बताई उससे वो नेरेटिव से वो इंफ्लूइंस हो गए तो बानलीजी कि कोई व्यक्ति है कि इसका जो आच्कल के समाल पे रेलेवन्स है एक तरह से बानलीजी है कि कोई सोशल मीडिया पे है ही नहीं सोशल मीडिया से बहुत सारे डिस्ट्राक्शन होता है पर मानलीजी सोशल मीडिया पे किसी के पारे में बहुत बुरा बता जा रहे है और एक नेरेटिव बन रहा है ये लोग बहुत बुरे हैं ये लोग बुरे हैं बुरे हैं और उसका कोई अल्टरनेटिव देखाला कोई है ही नहीं तो एक बुरा बोलता है, दुसरा बुरा बोलता है, तिसरा बुरा बोलता है, तिसरा को पहलाता है और पूरा, जो एक पक्ष से ही सब कुछ बोला जा रहा है और दुसरे पक्ष से कोई बोली नहीं है तो क्या हो चाहिएगा?
तो वो व्यक्ति उसको पुरा बुरा ही मान लिए था यह राम मंत्र जब बना था, उसके बाद मैं अमेरिका के ढोर में गाया था और कई बार मुझे अमेरिकन युनिवर्सिटीज में, अमेरिका के विद्यारती पूछते थे जो अध्यात्में मुरुची रख रहे थे, बारत के साथ क्या हो रहा है? कि एक मस्जित को तोड़ दिया और मस्जित को तोड़ने के पाद वहाँ पे भी मंदीर बनाया है और जो मंदीर बनाया है, उसमें सारा राष्ट्र मस्जित को तोड़ के मंदीर बनाया है और राष्ट्र के प्रदाल मंत्री भी वहाँ पे आ रहे है तो क्या ये सारा राष्ट्र जो है, ये अभी इंटॉलरेंट बन गया है ये जो है एक्स्ट्रिमिजम का सपोर्ट कर रहा है और ये क्या है, वो भारत का अध्यात्मा अच्छा लगता है मुझे, पर भारत जो है, मुझे कुछ बिलूक अच्छा नहीं लग रहा है तो अगर उनको बताएगे अभी कि वो जो मस्जित, मंदीर को तोड़ के बनायी थे ये वो तो 300-400 मेडिवल टाइम्स में हुआ था, पहले तो बहुत कुछ ऐसे होते ही रहता था अभी जो पहले जो हुआ है, वही अगर हम पहले तुमने ऐसे मेरे साथ किया, इसलिए मुझे तुम ऐसे करूगा तो कितने आप पहले जो हुआ उसका बदला लेते रहोगे, हमें आगे बढ़ना चाहिए होगी अभी ये क्या है कि अमेरिकाम जो मेंस्ट्रीन मेरेटियों, मेंस्ट्रीन मेरेटियों काफ़ी लेफ़्टिस्ट होता है तो मेंस्ट्रीन मेरेटियों में पूरा संक्रियन वाली था तो मैं एक प्रॉपर आंसल करना चाहिए होगा कि वो कोई मस्जित पे आक्रमन का बात नहीं है यहाँ वो अयोंध्या में ही उसी एरिया में कही छे और मस्जित है और जो बड़ा अजिटेशन होता है तभी उसके लिए एक भी मस्जित पे कोई अटाक नहीं होता है कि यह यह एक धर्म के लिए बहुत ही महतूपूर्ण जगह है तो मानो यहने मानो यह उसके लिए बहुत महान एमेत रखता है और दूसरे धर्म के लिए उसके लिए कोई हिस्टोरिकल सिंग्रिफिकस नहीं है आप बोलते हैं कि तुम्हारे धर्म के जगह है उसको तोड़ के हमने मस्जित बना है यह हमारे लिए महतूपूर्ण है अगर वो बात मान लेते तो तुम संग्रिफ़िकस का ही सपोर्ट कर रहे है तो बॉइंट यह है कि एक नेरेटिव बन जाता है और अमेरिका में ऐसा नेरेटिव बन गया था कि इंडिया पुरा इंटॉलरंट हो रहे है तो मेंस्ट्री मेडिया में नेरेटिव था पर फैंकफुली जो सोशल मेडिया से एक अल्टरनेटिव आ रहा है और सोशल मेडिया में अच्छा है बुरा नहीं की करा हूँ है पर क्या है मेंस्ट्री मेडिया पर पुरा लेफ्ट का पकर था अगर उसका कोई अल्टरनेटिव देता ही नहीं था तो क्या होता है तो लोग सोचते है ये सारे संखिर्णमादी चीज़ में लोग हैं भारत में तो जो कहाणी किसी के बारे बता रहे है उसका प्रतिकार करना बहुत ज़दून है अगर वो प्रतिकार नहीं होता है तो वही काणी प्रतिकार जाती है तो पांडव अनुवास में थे दुरियो दुन उनकी बारे में क्या बोल रहा है उसका प्रतिकार करने वाला कोई नहीं था तो बलराम जी तो हम कह सकते हैं भगवान है सर्वक्य है पर वह लीला में नैतिक दुष्टी से यह नरेटिव का पवर क्या होता है वो दिखता है और फिर इसके बाद में तो अभी इसके कारण अभी बलराम जो होते हैं वो दुरियो दुन के पक्ष में होते हैं पहले से कृष्णा अर्जुन के पक्ष में होते हैं तो फिर भी यह तो भी फैसला कर लेते हैं हम यह इस युद्ध में सहवाखी निकी होते हैं तो कृष्णा जो होते हैं वो सार्थी बन जाते हैं अर्जुन के बलराम जो है रत्यात्रा चल जाते हैं रत्यात्रा नहीं का तीरत्यात्रा चल जाते हैं तो बलराम का तीरत्यात्रा चल जाते हैं तो यह बड़ी विचीतर चीज़ है विश्व का सबसे बड़ा युद्ध होने वाला है और बलराम सबसे बड़ी युद्धाओं में से एक है तो इस किरकेट का वर्ल कप होने वाला है और जो बड़ा किरकेट टरों कहता है कि मैं दुनिया के साइटसिंग टूर पर जा रहा हूँ अरे आप वर्ल कपे खेलने कुछ नहीं आ रहे हैं तो क्या होता है कि वो जो यद्धों में कुरोर पांड़ में युद्धा हो रहा है वो यद्धों ते नहीं वाला है कि साइटसिंग टूर पर जा रहा हूँ तो बलराम और कृष्णा वो उन में युद्धा नहीं होना होता है पर उसके अन्त में कुछ हो जाता है अन्त में जब जीतर यातरा से बलराम जी वापस आते है तो भागवतम में क्या उसका वर्णा आता है भागवतम में वो महाभारत की युद्धा का वर्णा नहीं है भागवतम की क्या है उसमें जब महाभारत का युद्धा चल रहा है तब बलराम कहा का जाते है इलवल बाकी सब जो असुरे उनको मारते उसका वर्णा आते है अलगे ऐसे क्योंं है अगर माल लिजिए कोई अगबार है वो न्यूस देता है उसको पर अगर भागवतम पकसा में युद्धा चल रहा है तो उसका कुछ न्यूस है ही नहीं उस पे युकरेन और रश्या में युद्धा चल रहा है उसका दो पेज का न्यूस है और भागवतम पकसा में युद्धा चल रहा है उसका जिक्र भी नहीं है यह क्या है यह न्यूस पेपर है यह क्या है तो भागवतम में अभी जो पांड़ा और कवरो में युद्धा वा बड़ा विश्व युद्धा उस समय में ये बलराम ने कोई चोटे मोटे असुर है इल्वाल्ला और उनको माई चोटे मोटे बड़े असुर है चोटे नहीं है वो पर विश्व में तो उसका प्रभाव नहीं था तो उनकी कहानी क्योंं बता रहे हैं वहाँ पर क्या है कि शुगदेव गोस्वामी नहीं जाते हैं कि परिक्षित माराज का मन भगवान के सुन्ती से इचलित हो और कुरुकशेत्र के युद्ध में परिक्षित के पिता है अभिमन्यों का बड़े बेरहमी से अन्याय से वद हुआ है तो वो याद दिला कर परिक्षित माराज तो परिपक्वर है वो गंभीर है पर फिर भी भावनाओं के से तो गहाव रहता है वो भी यूद्धा है और क्या है उन्होंने अपने पिता को कभी देखा भी नहीं है पर वो कहानी सुने कि कितने वीर थे और कितनी बेरहमी से उनको मारा गया है तो क्या है कि अभी हम सबको जो कुछ चीजे होती हैं वो बिछलित कर देती है हम सबको ऐसे प्रामा होता है प्रामा मतलब क्या कि कोई हमारे साथ कुछ बुरा हुआ है किसी ने किसे बहुत किसी एक community के व्यक्ति ने मान लिए किसी का हमारे साथ जो व्यवारत्यां पिता है चोरी की है तो उस community का कोई व्यक्ति आपस देखा तो वो ही आजाता है एक देश का व्यक्ति हो सकता है एक प्रकार का व्यक्ति हो सकता है तो अभी क्या है परिक्षित महराज को एक तरह से लग सकता है कि मैंने छोटी सी गलती की थी एक मरा हुआ साप मैंने एक रिशी के शेहरे पे डाला उसके अब मुत्यू का दंड हो गया अभी वो खुद राजा है न्याय और अन्याय क्या है उनको पता है और छोटी सी गलती के कड़े इतना बड़ा न्याय जो है वो जो अन्फेर कह सकता है तो मेदे साथ इतना बुरा हुआ तो इसलिए भागवतम में पुरे कुरुख शेतर के युद्ध का एक वर्ण नहीं है अधिकान शुरुचा का देखते है अभिवन्यू का भी ज़्यादा उनलेक नहीं है भागवतम में बहुती कम उनलेक आता है इंडिरेक्यों कुछ उनलेक आता है ज़्यादा उनलेक नहीं है तो क्या है कि जो उनको प्रेरणा दे भगवान के स्मृति में वो बता जा रहा है अर्जुन की महिमा, अर्जुन के से कैसे महान बक्ति थी वो सब बता जा रहा है तो जो इलवल की कहानी होती है पर भीम और दुर्योधन में युद्ध होने वाला है और भीम और दुर्योधन में जब युद्ध होता है तो उस समय क्या हो रहा है तो भी जो युद्ध होने लगता है तो दोनों काफी समय से युद्धार कर रहे हैं भीम को भी युद्धार कर रहे है दुर्योधन ने इतना अपमान किया था द्रावपदी का उसका अपमान किया था उसका बदला लेना है दुर्योधन को बहुत गुस्सा रहा है कि ये मेरा राज्यता पांड़ा उन्हें मुझसे चील लिया और फिर उन्होंने क्या है कि विश्म को द्रोन को करण को सब को क्या है अनेतिकता से मारा है तो मुझे इनका बदला लेना है तो अभी दोनों बहुत उद्धा करते हैं और तो भी दुर्योधन शुरुवात में बोलता है कि तुम अनेतिकता से अभी जीते हो अभी अनेतिकता होता है तो अनेतिकता से उद्धा करो तो भीम की योज़ना होती है भीमें ब्रत लिया होता है क्या है कि जिस जान पर उसने द्रोकपदी को बुलाया था तुम तो दासी बन गए तुम यहाँ पर आके बैठा होगी मैं इस जान को तोड़ने वाला हूँ पर भीम की योज़ना होती है कि वो दुर्योदन को हराएगे और फिर हराने के बाद उसकी जान को दोड़ेगे हराएगे प्रॉपर फाइट में, एक फेर फाइट में भारो भीम और दुर्योदन युद्ध करने रहते हैं कमासा निद्ध होता है, बाकि सब बलराम जी भी है, कृष्ण भी है वो सब देख रहे हैं वहाँ पे भीम बहुत अच्छे युद्ध करते है पर क्या होता है कि वो दुर्योदन को हराना नामुकिद हो गया होता है क्योंं?
क्योंंकि गान्धारी का उनको वर मिल गया है तो एक बार, दो, अस्टर्मी युद्ध में तीन बार ऐसे होता है कि भीम इतना जोर से प्रहार होता है, वो युद्ध कर रहा है तो व्यक्ति दूसरा आप पे आक्रमन कर रहा है आपको उससे बचना है और उससे आक्रमन करना है तो आक्रमन करना आसान नहीं है क्योंंकि दूसरा भी अगर नख्श है पर तीन बार भी होते हैं, वो दुर्योदन पे हावी होते हैं और दुर्योदन को इतना जोर से प्रहार करते है कि वो शक्ति ऐसी होते है कि कोई पहार हो जाएगा वो थूड़ जाएगा और वो जो बलो होता है, फटका होता है उससे वो प्रहार से दुर्योदन उपर उड़के फेका जाता है और काफ़ी दूर जाके गिर जाता है पर वो दूर जाके गिर जाता है और सभी सबको लगता है कि दुर्योदन के अभी पूरा हड़ी हड़ी तूड़ गई होगा और दुर्योदन गिर जाता है महाँ पे और फिर भसते वो जाता है, कुछ नहीं हो आया उसको और केवल अभी भीम मार नहीं रहे है दुर्योदन भी शक्ति शाली है, दुर्योदन भी प्रवी है तो वो मार भी कार रहे है तो दो बार ऐसे होता है कि दुर्योदन भीम पे बहुत प्राहार करते हैं और खास्ते हैं दुसरी बार वो ऐसा प्राहार करते हैं कि भीम उससे काफी गायल हो जाता है और तभी अगर भीम में थोड़ी भी कमजोरी निकाई होती है कि मान दिये कोई हमको मारता है तो अगर हम दर जाते हैं, सहं गए, दर्ध हुआ ऐसे दिखाते हैं तो क्या होता है, कोई बॉकसिंग खेल रहा है, एक पंच मारता है तो अगर पंच मारता है, तो क्या वो देखता है क्या पंच का प्रभाव हुआ है अगर प्रभाव हुआ दिखाता है, तो तुरंद वो आएगा, कमिन फॉर दखिल, उसको कहते हैं, मार डाओ उसको पर अगर उसको लगता है कि मैंने इतना शक्ति से प्रहार हुआ, उसको प्रभाव नहीं रहा है कुछ तो मैं आगे जाओगा मारने को, वो ही मुझे मार दिखा तो तभी वो दोनों बार, जब भीम पर दुर्योदन अकरमन करते है तो दुर्योदन अकर पूरी भावना को कंटोर लगता है, कुछ भी दर्ध नहीं दिखाता है तो उससे क्या होता है, दुर्योदन से हैं जाता है मुझे पता है कि मुझे कोई वर मिला है, क्या भीम को भी कोई वर मिला है मैं प्रहार कर रहा हूँ, कुछ होई नहीं रहा है पर वास्तव में, क्या हो रहे हैं, भीम कमजोर हो रहे हैं, भीम घायल हो रहे हैं वो खास करके अगर दुसरी बार, जो पहला प्रहार करता है और अगर भीम थोड़ी भी कमजोरी दिकाते है तो अगर वो दुसरा प्रहार तभी कर देता था, तो भीम की मृती हो जाती थी और भीम भी समझ जाते है, कि अगर तीसरी बार प्रहार होगा तो मैं, मैं जो स्टॉइक भाव है, कुछ भी कमजोरी दिकाना, वो नहीं कर पाओं कि दर्ध अंदर से इतना हो रहा है, वो जखम है इतनी तो तभी क्रिशन कहते है कि तुम्हें मारने का भी एक ही परिया है वो जान के ओर दिकाते है तो अभी जब भी मौका देख कि उसके जान पर मारते हैं, पूरी शुक्ति से मारते हैं तो वो सब को उसके जो कमर है वो तूपने का अबालाता है दुर्योदन चिलाता है और वही पे उस एक बलो से वो फाइट खतम हो जाती है और जब ये फाइट खतम हो जाती है तो वहाँ पे बलराम बहुत कोईद हो जाते हैं ये तो दुर्योदन उनका शिष्य है, दुर्योदन इतना अच्छी तरह से युद्ध कर रहा है, दुर्योदन जीतने वाला ऐसे लग रहा है और तभी क्या होता है, तभी भीम इस तरह से एक अनाइटिक बलो मार के वो भीम को मार रहा होता है तो भीम अपनी गदा लेकर आते हैं, सर दुर्योदन, सर बलराम अपनी गदा लेकर आते हैं भीम को मारने के लिए और जब ये देखते हैं तो भीम जानते है कि बलराम से कोई जुद्ध नहीं कर सकता है इस भावा में तो तो भीम अपने हाथ जोड लेते है और बलराम से प्रहार करने वाले कैसी आने के लिए मैं तुम्हें मार डालूंगा भी तो तभी कृष्ण बीच में जाते हैं और कृष्ण कहते है, एक ही तरप देते है कि भीम को जीतने का यही एक मार्ग था और जो जीत के लिए ज़रूरी है वो भीम ने किया है कहते हैं कृष्ण कहते है बलराम से कि तुम्हें पता है कि ये दुर्योधन ने कितने साथ अत्याचार किया है द्रोपदी के साथ क्या किया है जो अभिमज्ञू के साथ क्या किया है जो पांडो के साथ आज जीवन इसने अहो कष्टम अहो अन्या ये इतने साथ अत्याचार किये हैं ये अधर्म की पक्षे में हैं धर्म की जीत केवल इसी पद्धती से हो सकती थी तो अभी कृष्ण बलराम को पकड़ लेते हैं तो बलराम जी कहते है तुम अपनी बातों से किसी को भी मना लेते हो पर मुझे तुमारी बात नहीं सुखार है मैं अभी भी कहता हूँ कि जो दुर्योदन को मारा गया वो आनेतिकता से मारा गया है और बलराम जी वहां से चले जाते हैं तो अभी यहां भी क्या हो रहा है कि कोई भी चीज को हमें देखना है वो संधर्म में देखना है अलग-अलग संधर्म में देखना है और मान लीजिये कि मैं आप से बात कर रहा हूँ और मैं अच्छी तरह से आप से बात कर रहा हूँ पर अगर उसके पहले दस बार मैं आप पे चिलाया हूँ और आप दस बार शांत रहे हैं तो क्या है ये एक बार की दुश्टी से जो आप कर रहे हैं गलत है पर बड़ी दुश्टी से कहते हैं कि मैंने बहुत कुछ गुश्टा हो रहा हूँ तो कोई भी प्रसंग को देखना है तो हमें क्या करना है कोई प्रसंग है कोई incident है event जो है उसको किस संधर्व में देखना है एक संधर्व में एक context में देख सकते हैं context one उसके बड़े संधर्व में देख सकते हैं उसके और बड़े संधर्व में देख सकते हैं तो अनेक संधर्व हो सकते हैं तो भीम का जो अगर केवल भीम का वो blow देखते हैं भीम का जो अटाक किया वो देखते हैं वो unfair है उसमें कोई संशे नहीं है कि वो नियम के खलाफ था पर एक उधारण देखते हैं आजकल के निश्चे से क्रिकेट मैच में कोई अलग अलग परकार के नियम होते हैं अभी आज T20 आ गया है एंगलन में 100 चल रहा है अलग अलग परकार के नियम होते हैं तो अभी माल ले जी ये क्रिकेट मैच ऐसी तरह से खिला जा रहा है कि वो नियम ऐसे बदल गए है कि वो बैटस्मैन कभी आउट नहीं होगा वो बैटस्मैन क्लीन बॉल हो जाए, कॉर्ट बेहांड हो जाए, रन आउट हो जाए, अन्बिडब्यो हो जाए, कुछ भी हिट हो जाए, कुछ भी आउट नहीं होगा बैटस्मैन कुछ भी हो जाए, तो बेचारा बॉलर आखे बॉलिंग करते जा रहा है, करते जा रहा है, क्रिकेट में कैसे है?
जो मेहनत बॉलर को बैटस्में ज्यादा करना पड़ता है बैटस्में जो बॉलर, बैटस्में को थोड़ा दोरना पड़ता है इदा बीच में तो क्या है? बॉलर को बहुत मेहनत करना पड़ता है तो बॉलर बॉलिंग करते जा रहा है, करते जा रहा है और बॉलर भी अच्छा है, बैटस्में भी अच्छा है तो कभी बैटस्में बॉलर को पीटता है कभी बॉलर बैटस्में को चक्मा देता है, आउट करता है पर बॉलर बैटस्में को आउट करता है तो आउट नहीं है बैटस्में सिक्स माता है तो वो सिक्स है तो अभी क्या होगा? अगर ऐसा कोई मैच बोलेगा, यह तो अनफेरे बोलेगा, कैसे मैच चल रहा है?
अगर ऐसा कोई नियम बदल जाता है तो ऐसी परस्थिति भीम और दुरिवन के लिए कि भीम कुछना भी मारे दुरिवन को, दुरिवन कुछ नहीं होने बादा है दुरिवन भीम को मारे उसको प्रभाव होने बादा है तो एक तरह से यह जो गांधारिन भीम दुरिवन को मार दिया था उससे पूरा मैच है वो फिक्स हो गया था दुरिवन हारने का संभावना ही नहीं था अभी इसमें भीम क्या करे थे? क्या है? अगर मैं उसको हरा नहीं सकता, मैं उसको मार नहीं सकता तो क्या मैं पिठते रहो और मार जाओ?
यह कहा का निया होने है यह कहा का निया होने है तो अगर कोई बॉलर है, क्रिकेट का ऐसा रूल बन जाया है कि वो बैटस्पन को आउट नहीं कर सकते तो बॉल में फैसा करेगा एक ही मार क्या है? वो बॉल मैं स्टंक क्योंं नहीं डालूंगा वो बैटस्पन के मुँफे डालूंगा और वो बैटस्पन अगर आउट नहीं होता तो बैटस्पन को वो रेटियर्ड हर्ट कर दुना होगा तो अभी क्या है? सब लोग इच जगत में अपने-अपने लिमिटेशन्स में कारे करते हैं तो हमें अपने लिमिटेशन्स में कारे करते हैं कि जिस लिमिटेशन, जिस सीमावजित मर्यादाओं में हम कारे कर रहे हैं उन मर्यादाओं से हमको सही मार्गे वो निकालना है तो क्रिष्णर का लोजिक क्या था?
कि तिस वो अच्छा वाला था वो अच्छा वाला था दीमा वो अच्छा वाला था इसलिए उन्हों वही किया तो कवरो अधर्म के पक्ष में थे पांड़ो धर्म के पक्ष में थे तो यह अनैतिक था? हाँ यह पहले कोंटेक्स में कोगलो में अनैतिक था पर वो अगर मैच, पुरे मैच के कोंटेक्स में देखते था तो it was the only way तो क्या यह नैतिक है? यह depends, आपके संदर्ग में देख रहे हैं तो भीम ने वह किया जो ज़रूरी था उसके बिना कोई बद्धती ही नहीं देखी तो इसलिए जो नैतिकता है जो मुरालिटी है, वो क्या है?
कुछ लोग कहते हैं वो absolute है यही सही है और यही गलत है सच बोलना सही है, जूल बोलना गलत है हाँ, यह अच्छा है पर मान जिये कोई आतंकवादी आये है वो हमारे मित्रों को मारा जाते है और हमारे मित्रों हमारे घर में आता है, मुझे चुपा बोलते है हम उसको किसी बेस्में में भी चुपा लेते हैं और आतंकवादी हमारे घर में आता हो गते हैं यह है क्या है हम? तो क्या सत्य बोलना चाहिए तो? असत्य बोलते हैं तो सत्य का आत्था क्या है?
इसका सत्य में हमको पता ही नहीं है नहीं न? तो क्या है? कि मुरालिटी यह अबसलूट नहीं होता है कुछ लोग कहते हैं यह पुरा रिलेटिव है यह तुमारे लिए सही है, मेरे लिए सही है नहीं, यह पुरा है, यह क्या है?
यह संधर्ब पे निर्भारत है ऐसे नहीं है कि सत्य बोलना, असत्य बोलना अच्छा है असत्य बोलना बुरा है यह रिलेटिव नहीं है रिलेटिव मतलब क्या है? यह तुमारे मनमानी पे है तो रिलेटिव मतलब क्या है? जस्त इंडिविजुल लाइकिंग हो जाता है पर सब कॉंटेक्श्ट्वल मतलब क्या है?
सिचुइश्णल मीर वो परिस्थिती में क्या जरूरी है? वो हम भी तो पुर्ण है अब एक शत्रियों का युद्ध करने का भाव क्या है? एक दूसर के सामने आकी तुम युद्ध करो पर मान लिजे अगर एक सेना में 10,000 लोग है दूसरे सेना के पास 100 लोग है तो सामने आकी युद्ध करेंगे तो क्या होगा?
आप पुरे मारी जाओगे तो अभी शिवाजी महाराज ने जो ओरंजेब से, शाईस्थे कान से, अभजल कान से युद्ध किया वो क्या था? वो गुरिला वार्फेर था आजकल आसमित्रकल वार्फेर कहते है क्योंं क्या है? वो सीधा सामना करते थे तो वो फुरा मारे जाते थे उसले यहाँ पर पॉइंट क्या है?
कि जो, हाँ, नौर्मली क्या है? दोनों को सामना करके, युद्ध करके जीतना है पर अगर दूसरे के पास इतनी शक्ति है मैं बास कोई शक्ति है ही नहीं, मान लेजी असली युद्ध करना है, मतलब क्या है? सामने सामने आखे युद्ध करो कोई चोर है, और कोई अच्छा पॉलिस है चोर के पास बंदुक है, पॉलिस के पास बंदुक नहीं है हम सामने सामने आखे युद्ध करते हैं चोर क्या करने वाला है?
वो युद्ध करने का मौका ही देगा जो वो बोली मार देगा तो क्या है? कि अगर वो बोली मारने वाला है तो पॉलिस को अगर कुछ करना है, तो चुप के रहना है पीछे से उस पे कुदना है तो इसको हरा मारा तो क्या है? साधारन तया जो अगर स्पोर्ट्स होता है स्पोर्ट्स में एक रेफरी होता है, एक रूल्स होते हैं रूल्स के अनसार युद्ध होता है पर अगर रूल्स ही नहीं है रूल्स फालो नहीं कर रहा है अगर दुसरी वर्ती बास गन है, आरे बास गन नहीं है और बोलता है जब आपको फैर फाइट करना है तो आप गन नीचे रखो, अगर वर फाइटिंग करते हैं पर वो गन से युद्ध करने वाला है तो फिर क्या फैर है उसमें वो उसको संदर्व के अमसार होता है आप यह समझ रहे हैं, नयतिक्ता जो है एथिक्स जो है, वो पॉंटेक्स्चूल होते हैं तो यहाँ पर जो बलराम जी कर रहे है तो आ, यह नहीं करता था कि एथिक्स कैसे नयतिक्ता जो होती है, पॉंटेक्स्चूल होती है वो बलराम और कृष्णा की मदभेत से होता है मैं बोला था कि मैं एथिकल और डिवोश्णल डिवोश्णल तो चीज़ा है, मैं इसको और पूंटेक्स्चूल पर एक चीज़ बता हूँ कि क्या है कृष्णा और बलराम, इन दोनों भगवान ही है तो इनमें डिफरेंस्स क्योंं है इसका एक नयतिक स्टर्प में हमें देखा कि कैसे बलराम ने कृष्णा हो पर इसका एक और बड़ा कारण क्या है कि भगवान को इस चीज़ में भी रस मिलता है कृष्णा लाइक्स के लिए अपोस्ट होता है क्या है कि अगर मान जी कोई मुवी है कोई हीरो है, हीरोइन है और पहले मिलते हैं, दुसरी बार मिलते हैं और फिर हैंपल एवर अफ्टरवर्थ है अगर कोई भिलन नहीं है तो फिर क्या है कुछ मज़ा नहीं ही होता है तो हइ कसी बाए नहीं तो नहीं कुछ बाए पतकता पटरव भी है अब आगे क्या होने वाला है पता है नहीं पप कुछ mention तो क्रिष्णोप holy love में भी क्या होता है कृष्णा कभी-कभी अपने भक्तों को ही उनकी विरोध में भुम्गा कर दे देते हैं।
तो जो कृष्णा का अपपोजिशन होता है वो अलग-अलग स्तर्फ पर होता है। तो एक अपपोजिशन है कि जैसे जय-विजय जो होते हैं वो असुर बन जाते हैं। वो ब्रावान-खुम्बकरण बनते हैं, युशिव-पाल-दन्तौकर बनते हैं, थिरने-गशीव बनते हैं।
ये बहुती जगत में हैं। पर वो डैरेक्क्ली क्या है? उनके चत्रु बन बनें।
अभी आध्यात्मिक जगत में क्या होता है? जेटिला-कुटिला जैसे लोगों होते हैं। जेटिला-कुटिला क्या करते हैं वो?
राधा–कृष्ण मिलना जाहते हैं और उनके मिलने में व्यक्ते लाते हैं। अभी वो भी बक्ती हैं पर वो क्या कर रहे हैं? भगवान की लीला में थोड़ा रस लाते हैं वो राधा–कृष्ण मिल पाईगे के नहीं, मिलने सबस्या होगे के नहीं।
और जो बलराम जी है वो बीच में हैं। कि बलराम क्या कर रहे हैं? वहाँ कृष्ण को अपोज करते हैं।
और जो कृष्ण को अपोज करके वो क्या दिखाते हैं? कि कृष्ण के ही लीला में और रस लाते हैं। तो यह बलराम का अपोजिशिन के लीला में कृष्ण के योजना के नुसार है कि यह लीला को स्पाइस अप करते हैं।
स्पाइस क्या करते हैं? और रस और मसाला उस लीला में आता है। कि अरे कृष्णा ने यह बोला, बलराम ने यह बोला, उन दोनों में बदवेद हुआ।
तो यह जो है एक तरह से, हम एक और इसमें देखते हैं, बलराम नहीं है, एक और करक्टर ऐसे जो है, वो भीष्म है। भीष्म वैश्णों होते हैं, महान भक्तों होते हैं, पर वो कृष्णा के विरुद्ध में उद्ध करते हैं। तो कृष्णा ही कभी अपने भक्तों को विरुद्ध करने के लिए बताते हैं, और यहां पर बलराम जी कभी कभी विरुद्ध का भाव लेते हैं।
वो क्या, यह भक्ति के स्थर पे एक स्थर पे जा जा जा जा जो हाँ दुर्योधन के पक्ष में क्योंं रहते हैं वो दुर्योधन का भी कल्यान चाहते हैं पर दुर्योधन वो उनकी गुर्पा को स्विकार नहीं करता है उसका दुरुप्योग करता है इसकी कारण उसका अन्त में पिनाश हो जा जा जा जा ज और दूसरी चीज़ हम देखें कैसे की ये भौती जगत में हम है अध्यात्मी जगत यहाँ पे है तो यहाँ से अगर उपर जाना है हमें तो जाने के लिए हमें किसी का मार्ग चाहिए तो ये जो गुरू होते हैं हमें तीस तर के गुरू देखें जो स्वरूप सिद्ध और गुणाती थे जो गुणाती थे पर स्वरूप सिद्ध नहीं है जो गुणाती थे स्वरूप सिद्ध नहीं है पर फिर भी वो पूरी तर से भगवान की भक्ति में स्थिर है तो उसके बाद में हमने एक चार स्थर देखें जो लिटरल उसमें हम ड्रामा देखें जो एथिकल उसमें हमने नयतिक स्थर पर देखा क्या एलिगोरिकल एक उसमें प्रतिकात्मक रूप से क्या आर्थ है और पिर डिवोश्ण और विस्तार रूप से हमने बलराम जी और दुर्योद का संबन्द उसको नयतिक स्थर पर देखा एथिकल स्थर पर देखा इसमें ने मेंली तीन चीज़े देखी हैं सबसे पहला कैसे कोई व्यक्ति, कोई बुरा कारे करता है बैड आक्शिन तो वो क्यों कर रहा है बुरा कारे करता है बैड बीड बुरा कारे करता है तो वो इंसेक्यूरिटी के कारण हो सकता है कि उसको लगता है रही ये व्यक्ति आ गए तो मेरे कोई कीमत नहीं रही एक न अच्छा की एरशा के कारण हो सकता है या चत्रतों के कारण हो सकता है तो अभी दुर्योधन जो करता है बलराम जी क्या देखते है दुर्योधन के पुरे आक्शन है वो इंसेक्यूरिटी के कारण है ये उनका एक रिस्की कमपैशन है देखा कैसे गुरु जो करुणा देते है वो रिस्क होता है तो उनका भाव था क्या इंसेक्यूरिटी से वो सेक्यूरिटी के ओर चला जाएगा ये भाव था उनका ये दिजायर था पर हुआ क्या उसने जो अबिलिटी सीखी उसे अबिलिटी से वो और शतूत बढ़ा दिया तो ये पहला पॉंट देखा हमने वो कैसे कितनी शक्तिशाली होती है तो बलराम जी को दुरियोधिन अपनी कहानी बता कर क्या करता है वो उनको कहता है कि युदिश्टिर इस दे बैड गाई ये सारा मेरे कारण मैं गलत नहीं हूँ इसमें युदिश्टिर भी गलत है तो जब कोई व्यक्ति एक परकार कहानी बता रहा है तो उसका प्रतिकार करना कितना ज़रूरी है वो भी हम देखा और तीसरा पॉंड देखा कि जो भीम का जो बलो था दुरियोधिन किलाब क्या वो अनफेर था क्या वो अनैतिक था हाँ और ना हम दोनों देखा क्या कि जो नैतिक था है वो केवल अपसलूट नहीं है कि इस प्रकार का बलो हमेशा गलत ही है पर इसका मतलब कि रिलेटे तू को जो चाहे वो करो नैतिक है वो क्या है वो संदर्ब के आधार पर है कि उस समय किर्षन ले क्या लाजिक दिया कि किर्षन भीम इसी पद्रत जीज़ सकते थे तो हाँ जो भीम ने किया वो गलत था पर वो उनको ऐसी पलिसती में डाला गया था कि उसके अलाग कुछ करने का मारगी नहीं था और आखरी में दिखा कि जो उनका जो अगर देखते है तो क्या है कि ये एक तरह से देरेज किर्षना किर्षना गेट्स जोय किर्षना को आनन मिलता है इन बिंग अपोस्ट जब उनकी विरुद्ध कोई जाता है तो उससे उनको आनन मिलता है अध्यात्मी जगत में जटिला कुरिला है इस भौती जगत में जय विजय आते है तो उसी जो यह है उसमें भीश्मा जैसे भक्तों भी उनका विरुद्ध करते है तो उसमें कभी बलराम भी एक जगत लेते है कि वो विरुद्ध करते है बलराम जी जो है वो इस तरह से सेवा करते है कि भले ही लोगों को लगे कि बलराम जो है जो इस रस में स्वितार करते है सेवा वो क्या है दे आर रेडी तुबी मिसंदस्टू यह बहुत बड़ा त्याग है तुबी मिसंदस्टू कि अरे तुमने भगवान का विरोद क्योंं किया क्या तुम भकता नहीं हो क्या तुमने भगवान का सेवा भाव नहीं है पर रेडी तुबी मिसंदस्टू जो है वह उनकी सेवा भाव की महंता है कि वो इस तरह से स्विकार करने के तयार है बले कि तुम मुझे गलत समझो दुनिया मुझे गलत समझे फिर भी अगर भगवान का विसंदस्टा कहते है जी ये भुमिका लेनी है तो वो लेनी के लिए तयार होते है शिबल्राम जी की शिबल्राम अगर्भा महा महुत सव की दाईगोर प्रिमान जी