Hindi – Nityananda Prabhu’s opposite moods with Jagai-Madhai & Shrikant Sen – Chaitanya Charan
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संक्षिप्त सारांश
प्रभु के बारे में मैं एक सृष्टि को सच्चा करूँगा कि कैसे शेहरे महा प्रभु नित्यानन्प्रभु साथ में जीवों के उठार के लिए आये करते हैं। कैसे हैं कि ये प्रभु नित्यानन्प्रभु बारे में आपका स्वागत है। इसको कुछ नहीं आपके लिए कुछ लिखूंगा। तो अगर आप देखना चाहते हैं, आपको महाँ से लिखना चाहते हैं। तो आपके लिखना चाहते हैं, अगर आपके लिखना चाहते हैं, तो आपके लिखना चाहते हैं, तो आपके लिखना चाहते हैं। वो दोनों साथ में कारे करते हैं, इस जगत में जीवों में उपधार करेंगे।
मुख्य ट्रांसक्रिप्शन
प्रभु के बारे में मैं एक सृष्टि को सच्चा करूँगा कि कैसे शेहरे महा प्रभु नित्यानन्प्रभु साथ में जीवों के उठार के लिए आये करते हैं। कैसे हैं कि ये प्रभु नित्यानन्प्रभु बारे में आपका स्वागत है। इसको कुछ नहीं आपके लिए कुछ लिखूंगा।
तो अगर आप देखना चाहते हैं, आपको महाँ से लिखना चाहते हैं। तो आपके लिखना चाहते हैं, अगर आपके लिखना चाहते हैं, तो आपके लिखना चाहते हैं, तो आपके लिखना चाहते हैं। वो दोनों साथ में कारे करते हैं, इस जगत में जीवों में उपधार करेंगे।
हम जिस जगत में लेह रहे हैं, यह है भौतिक जगत, इसके ऊपर इससे बहुत बड़ा है आध्यात्मिन जगत. और इस आध्यात्मिन जगत से कई बार भगवान करते हैं। आध्यात्मिन जगत से कारेंगे। आध्यात्मिन जगत स जगत से कारेंगे।
आध्यात्मिन जगत से कारेंगे। एक है कि वो उनिवर्सिटी के रूप में काम करेंगे। उनिवर्सिटी मतलब क्या है।
यहाँ पर हम कुछ सीखते हैं। और हम क्या सीखते हैं। हम कैसे स्वार्थ भाव से जीना हैं।
सेवा भाव से जीना हैं। यहाँ पर हम कुछ सीखते हैं। य यहाँ पर हम कुछ सीखते हैं।
सृष्टि का नियम है पर सृष्टि का नियम जो है जीवन का बुद्धिश नहीं है। इसे कैसे नहीं है कि सृष्टि में सरस्य हैं जो चाहता सक्षिकाल जादबार होगा वो दुसरों को दबागे रहे हैं। पर हम मानों में देखते हैं, मानों केवल सर्वाइवल अप्रिटेश्ट से नहीं जीते हैं, मानों जो जीते हैं सैक्टरन पाईनीज बैद अप्रिटेश्ट।
जो शक्ति शाली करती है, मानों जो नदी में पच्चा नूग रहा है, तो कोई कहते है कि वो तो अनफिटे नूग रहा है। नहीं, पर जो शक्ति शाली है, जो चाहता है तेहना, वो खुद अपना जीवन जोकियों में डाल के वो खुद उसको बचानने लग तो जो मानविता के विशेक्ष्टा है, कि हम मानवे सक्टरेट वाइनस कर सकते हैं, जो खुद के सूट के लिए लेना है, नहीं, जो सही में फिर्ट है, वो क्या करना है, जो फिर्ट नहीं है, उनको दबाना नहीं है, उनकी मानवित करना है, उनकी सेवा करना है जख्री क्योंं होते हैं, शार्विक रूप से फिर्ट होते हैं, तो वो क्या करते हैं, शार्विक स्थर पे दुष्णों का सर्थ हैं, जो ब्रांग्रण होते हैं, वो बुद्धिक स्थर पे फिर्ट होते हैं, तो वो बुद्धिक स्थर पे दुष्णों का सर्थ है, तो इस जगर्ण को एक उनिवर्सिल समजना ये धर्म का बात है, तो जब भगवान कहते हैं, क्या होता है, कि जब धर्म की खिलामी होती हैं, जब धर्म की खिलामी होती हैं, तो मैं अपतार लेता हूँ, यदाहि दाहि धर्मस्या, खिलामन विर्वदंति भारत, अब द कि जो अभी अलग जगर्ण में अलग धर्म हैं, अलग रिलिजियोंस हैं, उनमें अलग अलग तरह से भगवान के बारे में मुझे बता जाया है, उन सबके पारे एक तरह से भुद्धीश एक ही है, कि लोगों को इस्वात्व सेवा और भगवत प्रेंग के ओर प्राउ भगवान के विक्तित्व, भगवान का परिवार, भगवान के मिट्र, उनका वर्णने विश्य शुब से आता है. तो अगर हम विश्यों की भगवान की संकल बना हैं, उसके तुछी से देखते हैं, तो आज का उत्सव क्या है, किसी को पूले ही आता है. अगर आज पूले ही आता है, किसी को प पूले ही आता है, किसी को पूले ही आत अग्याप्र जेगरल्य थाईसात, जैसे भगवान है भगवान का एक पंखमाईकी अवार।
जैसे किष्ण वलवां होते हैं, जैसे वां मलश में होते हैं, वैसे ही समदिद वन्ते हैं। जैसे क्या तो पति है नप्रभूपना आता है? अदर जो भरद की व और स्वार्थक मिसाजी लगते हैं तो उससे न केवल हम दुसरों को दुखी बनाते हैं पर वो भी दुखी बनायें. तो जैसे जो लोगी व्यक्ति होता है वो दुसरों का शोचन करता है उससे दुसरों को दुखी बनाता है. पर वो इतना शोचन करता है तो वो प्राप्त कर लेता है और वो प्राप्त करने से कुछ भी सुखी नहीं होता है. लोग जो होता है उसके लिए वो भी देखते रहता है जो उनके पास नहीं है. तो क्या होता है जो लोग ग्रीडी होते हैं जो ग्रीडी होते हैं अमेशा बोलो नीदी होते हैं. तो ग्रीडी होते हैं अमेशा नीदी होते हैं. इतना भी उनको पास होते हैं तो अमेशा कम है इसलिए. वह संतुष्टी रहते हैं. तो स्वार्थ है दूसरों उड़की ना रहते हैं खुद भी दुखी रहते हैं. खुद भी संतुष्टी नहीं होते हैं. तो ऐसे दुखमें जीवन से भगवान हमें राहत देना चाहते हैं. तो इस जगल में हम कहते हैं दुखोत हैं, डिस्ट्रेस होता हैं, दुख एक तर अपनी जगल नहीं होता है, अपनी जगल नह तो जो भगवान्या करने हैं, भगवान्या में संतीज देते हैं, तो जो अवाइजवल दुख होता है, वो हम अवाइजवल कर पाते हैं, और जो अवाइजवल दुख होता है, वो एलिमिनेट कर पाते हैं, तो इस तरह से जगल भी जगल में दुख होता है, पर भगवान क यही प्रपाल से हम वो दुख के परे जा सकते हैं, और वही संतीज बताने के लिए भगवान करते हैं, तो कल्यूग में जब दौरांद महां प्रभुण इत्यानन्द लोग आते हैं, तो यह जो है, दोस्, कल्यूग की चेतरे महां प्रभुणी बहुत प्रपाल है, और उ उनका वो प्रपाला भाव है, वो हम इत्यानन्द प्रभु और दर्शा करते हैं. कैसे चेतने महा प्रभुव साथ में कारण करते हैं और उनके दिव्य सहयोग से कैसे हम सहयोग का भाव सेख सकते हैं और कैसे हम एक दूसरे में साथ सहयोग करके कारण कर सकते हैं उसके बारे में मा चर्च करते हैं।
तो अभी चेतने महा प्रभुव कव आये थे किसी को बता हैं? चारे बासों के लिए पता है किसी को? कहना आये थे निर्मों कव था?
नावभी माया पूर्वें. अभी माया पूर्वें योग भी माया पूर्वें. अभी ये चेतने महा प्रभुव का जीवन हैं और नित्यासंद प्रभुव चेतने महा प्रभुव से चोड़े हैं या पड़े हैं? पड़े हैं. ये बगवान से बड़ा कौन हो सकते हैं? बगवान से बड़े सिर्द बगवान ही हो सकते हैं. तो ये बगवान का अध्वित तो नित्यासंद प्रभुव जो होते हैं वो कितमे बड़ा एक जोका था है?
पाटी जोका था है. तो नित्यासंद प्रभुव का ज़न्म कहां हुआ था? एक चक्ष्ट प्रभुव तो अभी इन दोनों का पार्थ था रस्ता था वो चक्ष्ट प्रभुव से मिलता हैं. तो हम देखेंगे कहां का में इंटरसेक्शन होता है. और तो कैसे वो काले रत्ता है? तो अभी चक्ष्ट महा प्रभुव जो अभी जीवन में पहले वो एक बड़ी पंदित बड़ी और पंदित की प्राखाशा उन्हें प्राख की और फिर उन्होंने ये दिखाया कि पंदित से परे पंदित उससे क्या हो रहा है?
उससे में लोग सोचते है कम बुद्धी वरे लोग भक्ति करते हैं. ऐसा भाव होता है. जो बुद्धी वरे लोग होते हैं, वो ज्यानी होते हैं. वो अद्भोईंद्र का चीज़न करते हैं. तो महाप्रू दिखाया कि वो बहुत बड़े पंदित थे, बड़े बड़े पंदितों को उन्हें हरा दिया. तो महाप्रू ने क्या किया? उससे सदाई, जो कंटेम्पररी डेफिनिशन का सुक्सस था, उसमें वो सुक्सस्पुर बुद्धे है. महाप्रू ने सदाई लोग बख्ति करते हैं तो अच्छा है, पर अगर मालिए कोई आयाइटी से जाज़ोड है वो बख्ति कर रहा है. तो तो क्या होता है अपने? ये क्या नहीं क्या विशेसे, तो बख्ति करती क्या होता है?
अभी गुंगो बिन्दम में आयाइटी बाबा बड़े पॉपिल हो गएते हैं, गावी देखने के स्कॉन में बहुत बगते हैं जो आयाइटी बाबा के लिए करते हैं, और वास्तध में वो बहुत सेवा करते हैं, ये पर किसी कारणों से संसेश्चल हो गया है, पर क्या है तो आजकर के समाज में जो सप्सेस का डेफिनिशन है, कोई बहुत भुतिमान होगा तो आयाइटी ये से बड़े उद्याने में जाएगा, मेरे पित्रे वो आयाइटी में पढ़ाई करने के लिए होगे, तो मैं आयाइटी का नया स्टुर्पॉंग दे किया, आयाइटी क् आजकर के समाज में जो सप्सेस का डेफिनिशन है, कोई बढ़े उद्याने में जाएगा, मेरे पित्रे वो आयाइटी में जाएगा, तो मैं आयाइटी का डेफिनिशन है, तो मैं आयाइटी का डेफिनिशन है, तो मैं आयाइटी का डेफिनिशन है, तो मैं आयाइटी का ड तो मैं आयाइटी का डेफिनिशन है, तो म तो सन्यास आश्रम में लगोड से नियम होती है, पर जो अवधूत होते हैं, वो सन्यास आश्रम से भी परे खेला होती है, तो वो अवधूत वन्देते हैं, तो वो साली भारत में ब्रहन करते हैं, और भी जैसे ही उनको पता चला, कि अभी महाँ प्रभू, जो उनके भाई वो अभी भक्ति का भाव पकड़ करने लगे, तो तुरंपो नवदीप में आगे, और फिर नवदीप में वो वहाँ में पहली बार यदूलिदनाचारिया मांके भगते हैं, उनके बिदर में उन दोनों के मुलाग करें, और फिर बहुत लीलाय में आगे, तो आप देख र तो इसलिए उन्ही लीलायों में हम पोकस करेंगे, उससे कुछ शानती देखने का प्यास है तो अभी जब महाप्रभुप आये, तो एक तरह से मैं पुला, पहले उनका लाइफ का ओबर्यो कर लेता हूँ, पिर बाते हम देखते हैं तो चार साल तक महाप्रभुप, जो मायापूर में वो भकती का भावधक्षा थे, उसके पाद महाप्रभुपने क्या किया, सन्यास्यों किया थे, और फिर वे जगनापुर चले गए, जगनापुरी से तो यह दोरों मायापूर में आये थे पिर उसके बाद में, क्या हो गया, महाप्रभुप जो है, उसके बाद में पूरी में थेंद थे, और पहले तो नित्यादिन प्रभुण के साल पूरी में आये थे, और उसके बाद में कहा, आप वापस बेंगॉल में जाओ, और फिर बेंगॉल में रह रहे थे वो, और फ आते थे और जाते थे, और ऐसे, मुझे अनेक सालों तक किया था, जब तक महाप्रभुप का आवेद महाप्रभुप नहीं था, और फिर जब महाप्रभुप बहुद्धाम चले थे, तो उसके बाद नित्यादिन प्रभुण की बहुद्धाम चले थे, तो अभी हम दो निलांग में चर्चा करेंगे, एक जो थी यहां पर, जब महाप्रभुप और नित्यादिन प्रभुण दोनों साथ पर मायापुर नहीं है, और दूसरी ऐसी निलांग है, जब नित्यादिन प्रभुण ट्रावल करके बेंगॉल से मायापुर आ रहे है, बेंगॉल स महावधन्य अवतार करता है, और जो महावधन्य अवतार हैं बहुत प्रणाम है, वो इसलिए है कि जो भगवत प्राप्ति की विध्यी है, अरिराम का दिल्दन करना, अरिराम करना, अरिराम के दोरा भगती के अगरे आसानी से भगवान को प्राप्ति करता है, पर न विध्यानजन प्रभुपों के उल्से भी जदा कुपान माते हैं, क्योंंकि क्या है, ये अगर हम समझते हैं कि कैसे ये कुपा है, अभी मान लिजे जब पैंडेलिक था, जब पैंडेलिक था तो कुछ वैक्सिन बन रहे हैं, वैक्सिन इसके लिए इसके लिए अगर लो पीटी हो रही हैं और कोई ऐसी दवाई है जो बत्ती को ठीप करती है, पर वो जो दवाई है, वो बहुत महेंगी है, क्योंंकि अभी-अभी भी तो वो बहुत महेंगी दवाई है, तो अगर महेंगी दवाई है, तो क्या होगा, उसको प्राक करने के लिए मिश्किल होगा होगा, पर अगर मांधीचिये, वो महेंगी दवाई को कोई फ्री देता है, तो क्या होता है, इसको हम बहुत खुपाल माने की, कि अगर कोई महें महेंगी दवाई को फ्री दे रहा है, तो कोई एसे अस्पेटल है, कोई सारे पार्वर्स के लिए, यहां पे हमको तो एक तुरी मिल लेता है, यह बहुत उदार्धल की बात है, उदार्धल की बात है. पर यह भौति जिनट का मोहा ऐसे है कि सबसे ही समस्या है जिनट में, यह नहीं है कि हम मोहा में हैं, एक समस्या है, हम अपने मोहा में हैं, कि हमको मोहा में हैं, यह नहीं बता नहीं है. कुछ लोग शराप भी देते हैं, नहीं 10-17 सालों से बाश्चार दिश्यों में, अमेरिका में उन्हें प्रचार कर रहा हूं, तो क्या है कि थोड़ा महाँ संस्कुति भी देखने को भी है, तो मुझे एक बात बता है, हम सारे लोग सोचते हैं कि शराप पीन कामसिक कारे कोई सत्वों को नहीं कर सकते हैं, प्रचों को नहीं कर सकते हैं, कामसिक कारे कोई सत्वों को नहीं कर सकते हैं, प्रचों को नहीं कर सकते हैं, कामसिक कारे कोई सत्वों को नहीं कर सकते हैं, कामसिक कारे को नहीं कर सकते हैं, कामसिक कारे को नहीं कर सकते हैं, काम एक लोगों को देखारे करते हैं, आज तुम्हारे पपा से आदिने, आज तुम्हारे पपा तो तुम्हारे पपा से आदिने, आज तुम्हारे पपा तो वो इतना शराप दिज़ुगा है, कि उसको ये एहसास भी नहीं होने शराप दिया ये कुछ नहीं होगा एहसास भी नहीं होगा तो क्या है, कि इस तरह से जो इतना मोहम है, उसको मोहम है, तो तुम्हारे पपा से आदिने कुछ नहीं होगा, तुम्हारे पपा से आदिने तो क्या होता है तो वो विक्ति फ्री मेडसे देना एक रुपा है मान फीच ये कोई ऐसे है हॉस्पिटल से घर गरना जाता है और वो दाए नारोडी फ्री अवेलेबिलिटी एक है कि आप यहां पे आजाओ और आप ये देखो फ्री अवेलेबिलिटी एक रुपा है पर फ्री डिस्ट्रिबूशन फ्री अवेलेबिलिटी नहीं है ये फ्री क्या है फ्री होम डिलिबरी तो फ्री होम डिलिबरी क्या है ये पापर घरना जाता है तो चेहटने महाराप्रोग जो है वो फ्री अवेलेबिलिटी देते है पर डिस्ट्रिबूशन लोग क्या करते है फ्री होम डिलिबरी करते है तो ऐसे है डिस्ट्रिबूशन रुप की रुपा ग्रिहे ग्रिहे गिलिया तो क्या करते है घर घर जाते है और घर घर जाके वो दर्बोग से दर्बाते है कि आप जितने महाप्रू आए है जितने महाप्रू आए है तो अपने महाप्रू आए है तो यह यह हरी कृष्णा मांत्रा का भगवान की भक्ति का भगवान की स्परंग का ऐसा एक जादूरी प्रभाव होता है कि विक्ति जो है स्वार्थ से स्वार्थ वो सब दिने दिने अपने आप करना होता है तो यह ऐसी दवाई है जो वास्तव में जितने आप उसको सिखाल ज़ाते हैं उसना हमारे स्वार्थ से सिखाल जाता है उसना ही हमारे सन्तुष्टी जो है चानवी और सन्तुष्टी वो बढ़ने जाती है तो यह इतने अपनी होगी और उसमें भी क्या है अभी प्री डिलिवरी गर्मना यह बहुत परिक होता है पर मान लिए जर कोई किसी के घरने आता है दवाई दे ले वोता है कि अगर तीपी होता है तो क्या अगर तीपी होता है तो क्या अगर एक साल से इसके दवाई दे ले पर वो पींचा दवाई दे लेते हैं इसके दवाई 22 साल से टीपी हुआ था तो डॉक्टर नहीं होगा तो पींचा दवाई दे ले अगर तीपी होता है तो क्या अगर तीपी होता है तो डॉक्टर नहीं होगा तो पींचा दवाई दे ले अगर तीपी होता है तो पींचा दवाई दे ले तो पींचा दवाई दे ले अगर तीपी होता है तो डॉक्टर नहीं होगा तो पींचा दवाई दे ले ये जो हैं ये बाव हैं इत्यानन ग्रभु का किर के साथ जगाई और मदाई के साथ है इत्यानन ग्रभु क्या करचे है वो घर जगाई तस्ते तस्ते पर जा रहे है और वहां पे वो जगाई और मदाई को प्रिनानम देनी का प्रेवास करते है और तभी जब free home delivery होता है तभी उसमें attack होता है उसमें उसमें attack होता है उसमें injury होती है पर फिर भी वो service attitude रखता है वो दुसरों का कि कल्याँ चकता है तो ये क्या है ये परसे करुणा की प्रावाष्ट है मार के फ्रीम जब महाप्रभू ऐसे है तो जब इत्यान भू ऐसे है जो पीड़ा है जो मारता है जो भी इत्यान भू क्या करते है वो जब महाप्रभू मंत्यान भू को नहीं महूं करने के लिए ज़रूर नहीं हो जब इत्यान भू आक्रम हो जागा है जैसे महाप्रभू बाता चाहिए जागा है और शैदें महाप्रभू तुरस वहाँ पर आ जाते हैं जब वहाँ पर आ जाते हैं तो वो देखते है इत्यान भू एक छोटा सा बात प्रहार नहीं होता है और वो पास इत्यान भू हो दे एक ख़राख का लटका होता है जोर से पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल सारे शराबी भी एक समान में होते हैं. शराबी भी किसी जादा शराब किया और किसी जादा कौन शराब किया होते हैं. तो क्या होता है कि अगर माले वो शराबी है और कोई पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल पुरिद वो मठका महापुरों मारता है नज़ान लोई पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल प पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल जड़ाई महाबुल के चास में गिर जाता है पर महाबुल जड़ाई के चास में कोई कोई कोई जड़ाई के चास में मैं तुम्हें माँफ नहीं करूँ।
कलाफे माँफ नहीं करूँ। अगर मैंने कभी कोई पुन्य किया है, मैंने कभी आपको पसंद किया है तो पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल पुरिदा पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल पुरिदाल तो क्या है अगर सिर्फ मैं है तो भी अच्छा है मैंने तरह अंग्बंद कर रहा है पर जो फियर है फियर से फियर से क्या होता है फियर से आक्शन्स जो होते है वो चेंज होते है हो सकते है पर वो जो आक्शन्स चेंज है वो टेमपरलरी है और वो सुपरफिश्यम है बाहर जब तक वो खत्रा है तब तक मैं नहीं कर रहा हूँ पर जो लाव है जो कंपैशन है उससे क्या होता है एवन आक्शन्स नहीं बदलते है उससे दैज़ बदलता है तो महां प्रिभू के सुधर्शी चक्रा को देख कर क्या होता है जगाई नहीं आपना आक्रवना चोड़ते हैं पर लिध्याविंद प्रिभू की कमा का भाव कि हमने इस पर आक्रवन किया है और वो विक्त क्या कर रहा है हमें हमारे लिए आक्शना करते हैं तो वो देख के लिए वो भगवान की शर्म नहीं हो जाता है वो भगवान की परसी करने के लिए नहां तकि वो महां प्रिभू है तो यह बिध्याविंद प्रिभू की अग्रितिय कुर्पा है कि जो भगवत भक्ति हैं जो भगवत भक्ति में इसको प्राख करना बड़ा मुश्किल होता है योगी लोग बहुत प्रस्चा करते हैं सुद्रुल भगवत प्रशांत आत्मां गोटी श्व भगवत हैं जो बहुत हैं उन महाँ लोगे में वो दुर्लम होते हैं ऐसी वो प्राख भक्ति होते हैं वो भगवत बिध्याविंद प्रिभू की सप्रिभू होते हैं यही उनकी बहुत प्रिभू है जो दाओ होता है कभी कभी हमारा प्रेव दिखाते हैं कि हमारे भावनाएं हैं मारे उच्छा दुस्सा में होता है वो हम प्रिभू करते हैं मान दिज़े कोई मारी मदव होने देते हैं मैं उच्छा इससा काले की आदम से मुझे बहुत नाराद होते हैं क्रोध आ गया है पर अगर हमें अदर का भाव है प्रिभू का भाव है हम वो भावनाएं होते हैं पर कभी कोई प्रेम होता है वो दिखता है एक्सप्रेसियस जो भाव है क्रोध है योगी भाव है वो दिखाना होता है माहा उन्हें बिद्जात थी है अगर चाहिए प्रेसनी के बाद पहली बाद कोई हॉस्टेल में रहने जाता है तो तभी उसको भी डर लग रहा है चाहिए तो माहा उन्हें बिद्जात थी है क्रोध आ गया है तो उसको भी डर लग रहा है तो वो बच्चा है क्रोधी का भ अगर वो बच्चे से लिरा हो रहा है तो भाव आ रहा है क्रोधी का तो जो माहा है वो भाव को दिन्यांदन कर रहा है तो कभी क्योंं?
तो इत्यान प्रभो जो अपने भावना है तो अपने दिन्यांदन कर रहा है पर मान लिए हमारा बच्चा है हमारे बच्चे को माहा प्रिपाया है तो उसके समने उसके परती माहा का पिता क्रोधी करते हैं वो क्रोधी क्या है? वो प्रिपाया का बिच्चा है जिसे प्रहला को मानने के लिए रन्जी पर आते है तो क्या आता है? नरस्वदे जो होते हैं वो क्रोध के रुप में आता आते हैं क्रोध जो होता है वो विश्व की इत्यास में से क्रोध करता है तो तो दोनों तरह से माहों है तो ऐसे लिए नहीं है कि जिन्गर महा प्रभूर का प्रीम नहीं है जिन्गर महा प्रभूर का प्रीम है और दोनों का प्रीम नहीं है और दोनों का प्रीम है वो अलधल भाव से लिखता है और दोनों वो प्रेंटे की काल करते हैं तो जिन्गर महा प्रभूर का प्रीम नहीं है कि जिन्गर महा प्रभूर का प्रेंटे की काल करते हैं जिन्गर महा प्रभूर का प्रीम नहीं है कि जिन्गर महा प्रेंटे की काल करते हैं तो बच्चे को बढ़ा थरना एक प्रेंटी के लिए बहुत बुच्ची है तो दो ते सिम्मल पैरेंट पैनलिस जो कर रहे हैं ऐसे उनका जो समर, उनका जो लेडिकेशन है उसकी सहाना करने के लिए बहुत बुच्ची है तो क्या होता है, तो मां का ही भाव होता है, तो एक पैरेंट होता है जो लौव होता है, दो पैरेंट ज़रूरी हैं क्योंंकि एक पैरेंट जो होता है वो अंकडिशनल लाव देता है और दूसरा पैरेंट जो होता है वो कंडिशनल लाव देता है, क्योंंकि बच्चा लाव रख्षा मां से बहुत अइसा है, अभी जाहिर मां होने के लिए कुछ नहीं हो चाहिए, कुछ नहीं हो चाहिए, जाहिर मां होने के लिए ऐसा नहीं चाहिएगा आप, तो क्या है, अभी दोनों ज़रूरी हैं, क्योंंकि अगर दोनों का लाव अंकंडिशनल हो जाएगा, तो क्या होगा, बच्ची वो डिस्प्रिंब कौंट होगा, बच्चा वड़ा कैसे होगा, दोनों का लाव अंकंडिशनल हो जाएगा, तो फिर वो बच्ची को लाव के लि तो क्या है, वहाँ दोनों की कुर्पा है, चैसेन महापुरों की कुर्पा है, पर क्या है, वो कुर्पा का भाव हो जाएगा, और इत्यान प्रहुँ एक बहुत विशीजी का भाव हो जाएगा तो अभी मैं एक और कहानी बताओंगा, उसमें इत्यान प्रहुँ का भाव विशीजी का भा पर वो एकिकेट को भी आदिश्ट नहीं है, कुछ जुरूत होता है, कुछ एकिकेट होता है, चिस्टाफ़ार होता है, चिस्टाफ़ार नहीं है, नियम नहीं है, पर वो ऐसे कारण करना होता है, तो कभी कोई मित्मा, प्रित्मित, प्रित्मिता गजलते हैं, वो विल्कु पर वो बरीमी खोना बात होनी है, क्योंंकि भगवान ऐसे है, थाने भगोन ऐसे है, और भगवान उसके परिविविर्ध करता है तो किसी एक गुण से हम भगवान को सिम्मित करते हैं. वो गुण भगवान में हैं पर क्या होता है अगर भगवान को क्रोड नहीं करते हैं वो दिखाते हैं और बहुत आत्रित्या को से पार दिखाते हैं. केवल वही भुने की घंड़ी, हर एक व्यद्ति को होता है।
उनके अलग अलग भाव होते हैं, अलग अलग मून होते हैं। पर कम चोड़ी यहां तो शब्तर देते हैं, पूर और विशन. इस इसमें परुपा जी का पूर ने लिए होता है। तो क्या है कभी कभी हम दोनों शब्दे एक साथ मिलते हैं, पर वास्तव में दोनों शब्दे बहुत मिलते हैं, कैसे थी प्रहुपा जी का एक मिशन था पर उनके मेनी मूद्स थे. कि अलगन समय में मूद्स थे, कभी कभी लोग देहने थे कि आमारा जब्दुपण है, उससे जब्दुपण कोई लोग जब्दुपण नहीं है. तो प्रहुपा जी के अलगन मूद्स थे, पर मिशन क्या था, एक ही मिशन था कि कृष्णा पाउना होता है. तो वैसे ही नित्यानन्द रोहों का अलगन महारोगा एक ही मिशन है, कि सबका अलगन महारोगा करते हैं, पर उनके भी अलगन महारोगा नहीं होता है. तो दूसरा ही बात नहीं है, नित्यानन्द रोहों के सन्याज लेके जगनार पुरी में रह रहे थे, तो नित्यानन्द रोहों के संक्ति वहाँ पे आए, तो नित्यानन्द रोहों के संक्ति वहाँ पे आए, तो नित्यानन्द रोहों के संक्ति वहाँ पे आए, तो नित्य तो नित्यानन्द रोहों के संक्ति तो नहीं करता था, पर भी आदेश किया है, इसलिए चले थे अभी हर साल, जब माया भूल से, जब मैंकौल से आदे थे, चार मेंने चार भूल का से होता था, तो तभी वो पुरी आओ रहे थे और तभी वो महाप्रु पसंद करते थे, जब इतने पर लोगे आते थे, महाप्रु को देखे बहुत पसंद होते थे, पर बात में किलिए थे, चार मेंने बहुत लगा समय है कैसे है कि मानते जाएँ कोई पत्रेश में पुछार करता है, और हम महाप्रु देखा थे, नाम देखा थे, तो चार मेंने महाप्रु देखा थे, तो आपका चार मेंने महाप्रु सेंटर देखा था, तो तो समझ देना आपको, अपके आपकी सेवा एविज़े ले गया था तो महाप्रु देखा थे कि तुम मत आओ, तो हर साल महाप्रु देखा थे कि तुम मत आओ, और हर साल देखा थे कि तुम मत आओ, तो हर साल महाप्रु देखा थे कि तुम मत आओ, तो हर साल महाप्रु देखा थे कि तुम मत आओ, तो हर साल महाप्रु देखा थे कि त तो अभी एक बाद ऐसे ही जिन्जान आ रहे हैं, तो साले जो बख जाते थे तो वहाँ पे ये साले क्या तरह होते जाते थे, तो याफटरा के जो मेनिजिनल थे, वो शिवानंद से जाते थे, और उस साले जाना, तो एक बख जा रहे थे, तो हर जिनलों पे एक बा तो उस साले जो बादा थे तो तोन नाखा था, तो तोन नाखा थे वो बहुत बहसे नाखा थे, तो शिवानंद से बात कर रहे थे, तो उनकी कमे लग जाएगा, तो पाकी साल को जाना था, तो तोन नाखा थे तो पाकी साल चले गया, तो शिवानंद से प तो तोन नाखा थे, और येसे ही आ गए, नवर्भुक्र बताया, इत्यान पर नाराज हो गया है, तो इत्यान पर नाराज हो गया है, तो अभी क्या हो गया थे, तो श्वानसेन पर नाराज हो गया थे, और इत्यान प्रभु पर जैसे श्वानसेन पर देखा, नवर्भुक्र पर नाराज हो गय तो कहा कि तुम्हारे चारे में एक तनते भुका, आ तुम किनने गयर से मिला, मैं तुम्हें शाप देता हूँ अभी यहाँ जब हुआ तो अभी यहाँ पर इत्यान प्रभु थे, यहाँ पर श्वानसेन पर देखा, वो श्वानसेन के साथ उनके एक नेफ्यू क्या होता है भाव्या है नहीं, वो भी यहाँ पर देखा, तो वो कौन थे, श्रिकानसेन, वो भी थे तो अभी इत्यान के लिए जो खारे किया, एक बस कहती है अंद्रीज्जबल, नहीं क्या होता है, मैं कोई आरांदर सोनी रहा, मैं यहाँ पर ही होजना कर रहा था, वो आपे बस किया, कोई सकते है, तो क्या होता है, अभी इत्यान के लिए नहीं कह सकते है, अक्शन अंद् ये प्रभौ, ये तो मेरी कुरुपा है, कि आपके चरण का मल, मैं भी च्छाची कर रहा हूँ, और मैं माँफ़ि चाहता हूँ कि आपको सुनदा होते, मैं अपनी होजना कर रहा हूँ, कि वो बिल्कुल उस्सा नहीं हुए, वो बिल्कुल कोई जस्टिफाई नहीं तो अभी ये मुझकृपा मान लिया, पर ये बात हो गया, पर क्या हो गया, अर्जातों की तो तो शान्त हो गया, वो भी उनके साथ देखे, सब कुछ हो गया, पर ये क्योंं थे, शिवाज़ोची श्रीकान से, वो क्या हो गया, वो बान लिया है, वो कहने जा ये तो क्या है मरसी नहीं, ये अट्रोसिटी है, अट्रोसिटी ये अन्याए, अत्याचाल है, क्या ये तो इतने से डिमार्ण कर सकते हैं अब ही, मैं, जैसे चाचा में तो बड़ी लेकती हूँ, मैं अत्याचाल से डिमार्ण कर सकते हूँ, ये भी जैसे हां हो गया हो गया है, वो इतने कुछ उससा हो गया है, कि वो महले कि पाकिसम पर बोल रहा है, तो मैं पोल रहा हूँ, वो महान है, तो मैं क तो वो आगे चले गया है, तो जब वो आगे चले गया है, तो फिर वो पहले ही पहुँच गया है, कहां, जगनार्ण में पहुँच गया है, और जगनार्ण में पहुँच गया है, तो मैं पहले से पहुँच गया हूँ, और जगनार्ण में पहुँच गया है, तो मैं पहुँच गया हूँ, पहुँच गय कि तुम अन्वास्थान नहीं कर लगे तो जैसे वोल्डे वाला था, महाँ भूने का कुछ नहीं है कोई जहरे से मैं देख रहा हूँ, कि महाँ विच्चित हो तो पहले से उसका महाँ विच्चित है, उसका महाँ तुम पहुँच जीदी है तुम पहुँच जीदी है तो पहले, अभी महाँ भूने का स्नेहर के साथ वाच्चित के में महाँ भूने नहीं कहा कि त्यान हो तो मेरे भाई के तुम को अच्छा कर सकते हूँ तुम को अच्छा कर सकते हैं, तुम दे रहे हूँ विश्ण वे रति आपको तुम्हारे बिद्गेरना नहीं चाहिए, विश्णा अपराद नहीं करो, उसे चले जाए पड़े स्लेक्ष नहीं चाहिए, विश्णा नहीं चाहिए, तुम्हारे बिद्गेरना नहीं चाह क्योंं, अगर कुछ गलती होती हैं, वो प्रासार्ण में प्रासार्ण कर सकते हैं, पर कुछ हमारे नियातन्ते परे होता है, उसके कारण वो दूस्सा वाले होता है, तो हमें प्रासार्ण कर सकते हैं हैं, हमें प्रासार्ण कर सकते हैं, हमें प्रासार्ण कर वाहरोप से सिदा पर ऐसा करके उन्होंने शिवानन सेंगी महिमान करें, कि हम सबके साथ अन्याय होगा, क्योंं होगा, क्योंं होगा, एसे होगा, इजाकिफ्यक का सुभाव होगी है, उसके पावजूर अगर हम भगवान के पति सेमा हाँ रह सकते हैं, वो ये बहुत पर प्रभुपाजी जब अपने लिए 70 साल के उगर में अमेरिका चले गए, उस समय न प्रभुपाजी ने बहुत प्रयास किया था, बहुत प्रयास करने के बाद नहीं, कुछ ज़्यादा यश्य नहीं रही था, कुछ बंट दिख पाया थे, एकी बंट पी शिष्चें 40 नहीं था, माइनडस 40 था श्रिकान सेन का प्रभुपाजी नहीं कर सकता, वो दिपनी था, श्रिकान सेन का प्रभुपाजी नहीं कर सकता, वो दिपनी था, श्रिकान सेन का प्रभुपाजी नहीं कर सकता, वो दिपनी था, श्रिकान सेन का प्रभुपाजी नहीं कर सकता, वो दिपनी था, श्रिकान स और जब ऐसे होता है, तो ऐसे नहीं है, कि चैचन महाब्गर्भुन स्विद्धान को कैसे सोच कर सकते हैं, जो हम सब काफ़तों का आदरच होता है, कि इतना भी बड़ा हमारे ज़िन में हो जाये, हमारी पत्तिक्रिया खिवानन्से के साथ है, ये तो तो पेड जो भी बड़ा हुआ है, जो भी बड़ा हुआ हुआ है, जो भी बड़ा हुआ हुआ है, जो भी बड़ा हुआ हु श्रीकान सेंगी जो प्रतिक्रिया हुई है, इसमें क्या है?
चेतन महा प्रोमोडियों से प्रतिक्रिया हुई है, चेतन महा प्रोमोडियों से प्रतिक्रिया हुई है, चेतन महा प्रोमोडियों से प्रतिक्रिया हुई है, चेतन महा प्रोमोडियों से प्रतिक्रिया हुई है चेतन महा प्रोमोडियों से प्रतिक्रिया हुई है, चेतन म महा प्रोमोडियों से प्रतिक्रिया हुई है, चेतन महा प् महा प्रोमोडियों से प्रतिक्रिया हुई है, चेतन महा प् प्रतिक्रियों से प्रतिक्रिया हुई है, चेतन महा प्रोमोडियों से प्रतिक्रिया हुई है, चेतन महा प्रोमोडियों से प्रतिक्रिया हुई है, चेतन महा प्रोमोडियों से प्रतिक्रिया हुई है, चेतन महा प्रोमोडियों से प्रतिक्रिया हुई है, चेतन महा प्रोम प्रहुपाज्जी जो भगवान के ऐसे लीला होती हैं तो भी समझना में मुझे कुछ कुछ हो जाता है, प्रहुपाज्जी सारे विश्व भड़ी पचार करने के बड़े बड़े प्रकल तो बन रहा है, पर एक प्रचत का एक प्रकली था जिसमें प्रहुपाज्जी तो कौन सारे नहीं थी शायद कै कोई साथ है विश्व।
जर्गी, प्रहोपाजी तो भगवान ने नव्योंबर 14, 1977 को बिला जा जा था। और केबल 2 मेंहने पर, जानीयों 14 को यू हुमं नदे का लाण के लिए ज़िने जा था। तो अभी रहुपा जी ने इतनी महनद की थी वो मंदेर को लाने के लिए और रहुपा जी कृष्णो से कहते थे कि कुछ सद्गी को महने के लिए जीने तो मुझे देखे मैं ये मंदेर देखुंगा, आपके लिए मैं मंदेर बड़ा था और जी ने सद्गी के लिए तो प्रभुपा को पुछा देखा था कि आपके लिए आपके लिए चाहिए प्रभुपा जी ने कहा कि कुछ चाहिए कि कुछ चाहिए कि सेवा किया है वो सेवा का क्रेड़ी की प्रभुपा नहीं जाएगा सेवा किया है उसका सच्चेस्पल कम्प्लीशन यह पूरा हो जाएगा वो गिंदिश्वने के लिए तो प्रभुपा नहीं जाएगा उनकी जो असक्ती थी एवन बगवान के साथ और जो एक सी तुम्ही असक्ती है वहाँ बगवान की प्रभुपा नहीं जाएगा और विद्यान प्रभु से हम प्राखना कर सकते हैं तो इस जगत में कोई भी चीज़ हमें बगवान से कर सकते हैं हर बगवान से बगवान कर सकते हैं और विद्यान प्रभु से हम प्राखना कर सकते हैं विद्यान प्रभु से हम प्रभु से हम प्राखना कर सकते हैं जगत एक तरह से जंगल बन जाता है अगर हम सेल्फलेस रहते हैं इस वाद हम चाहते हैं उनिवर्सिटी बन जाता है तो हमें इन जंगल से उनिवर्सिटी जाने के लिए भगवान धर्म की समस्थमा अपना रहते हैं और ये करने के लिए भगवान भारा होता है तो ये भगवान धर्म की समस्थमा है तो इसमें जान देना भगवान धर्म की जान देना यही धर्म की समस्थमा है पर हम देखते हैं उत्यानन प्रभुष एक तरह से कहते है एक अंडर्स्टैंडेबल मुझ्सी एक एक श्रुपा जो है वो आसानी से हम समझ सकते है क्या है कि जो बड़ी महेंगी दवाई है वो फ्री देना और उसका रापियो फ्री देना और उसका हौम डिलिवरी करना और हौम डिलिवरी के गार भी इंचेरी भी होता है तो होगी क्या है उसको फिर भी उस व्यक्ति के लिए माफ़ी माँगना और उस व्यक्ति को फिर भी क्रुपा देना तो फ्री जो देना है वो क्या है ये चेतन महारापन के क्रुपा है हौम डिलिवरी करना है त्यानन लोग के क्रुपा है पर हौम डिलिवरी इन स्पाइट अप इंचुरी ये जो है चेतन महारापन के त्यानन लोग के जगाई मताई के क्रुपा है मेरी पार दिलिवरी ये क्रुपा है मार खेल करें दिलिवरी पर ये दूसरी क्रुपा जो है डित्यानन प्रभूस इंकोंप्रहेंसबल मनसी जो ऐसी क्रुपा है जो शायद समझ में नहीं आती है वो भी क्रुपा है ये क्या है ये पहली क्रुपा जो है हमें भक्ति में स्टार्ट करने होगे तर पर ये दूसरी है वो हमको सस्टेंग करने होगे तर वो क्या है डित्यानन प्रभूने से अन्रीजनिबल कारे किया जो अन्रीजनिबल क्या था जो शिवानन सेंग से बड़े क्रुदित होगे तो जब ऐसे हो गए तो शिवानन सेंग की चेतना है वह महा प्रभून की प्रभाव है कि ऐसे परिसती नहीं हो वह बहुवान प्रभून है अब ये शिवानन सेंग की जो पतिक्रिया है वह क्या है एक human reaction है तो उस समय में उनको शिवानन महा प्रभून ने सांग मिलता है तो हमें क्या है हमें चाहते हैं कि हमें जित्यानन प्रभाव मिल जाएं परिस्ति में इशे परिस्ति में हम प्रभूनां भी अनूपूल रहें और पतिकुन नहीं पर कोई पतिकुन बन जाना है तो जित्यानन प्रभूने चेदर महा सांग मिलता है हमें कोई सांग मिलता है कि यगर भी जित्यानन प्रभून की कुरुपा है जित्यानन की कुरुपा से ही चेदर महा कुरुपा करता है तो चाहिए हमें एक पैसी कुरुपा मिलने ज़रूरत होती है और कभी कोई शायद हमें पैसी कुरुपा बनना है जिसे तो बहुत सबधन होगा और हमने देखा पिछला प्रभूपा जी का जो प्रियक्शन था वह भी स्लांज है इस मांग देखा कि तो प्रसंद देखे शिदा प्रभूपा चीज़िवानित में कैसे पहला कि जो अमेरिका पहुचे तो शुरुवाद में उनके प्रचार देखा खा रहे थे तभी कुछ भी नहीं है जिरो फैसिलिटी पर फिर भी क्या है ग्रैंटिप्यूट पर अपोर्ट्शुलिटी तो यो मौका तो विदा है इसके लिए प्रभूपा चीज़िवानित तक दिया है और फिर 1977 में नो अटैचमेंट इवन तो सर्विस कि अगर भगवान की इच्छा नहीं है तो मैं जिस बंदे के लिए उद्धव किया वो भी दर्शन नहीं मिला तो भी कुछ इच्छा नहीं है प्रभूपा चीज़िवानित के लिए हम सबको नित्यान पुरुपा मिलते हैं, इसलिए हमारे आर्टर में पहले गोर गरादर हुआ करते हैं प्रभूपा चीज़िवानित के लिए हम सबको नित्यान पुरुपा मिलते हैं प्रभूपा चीज़िवानित के लिए हम सबको नित्यान पुरुपा मिलते हैं प्रभूपा चीज़िवानित के लिए हम सबको नित्यान पुरुपा मिलते हैं प्रभूपा चीज़िवानित के लिए हम सबको नित्यान पुरुपा मिलते हैं प्रभूपा चीज़िवानित क काई श्रीज सोच बारगी या तुम कारण पुरुपा या तुम्हीं से तुम्हीं काई चीज़वानित के लिए प्रभूपा चीज़िवानित के लिए हम सबको नित्यान पुरुपा मिलते हैं इतनी गर्परा है कि अमारे बाद मैं सुरीज को पाहिंग आते रहा हूँ इसलिए ये गर्पार परेशे काम नहीं है हमें किसी परदार है, हमारे बाद आगे लागे लागे तो वो परदार है हमें जो बता है कि मिर्तोर जीकामें आने ते ख़ड़ा है और उनके माधर से एक बहुत अपवर्ट गैड़िक्स होना है जिए तो हम यहाँ शौपिंग के लिए हम सब के वोडियों के लिए कभी ना कभी ऐसा मौता आता है कि हमें पता रहता है कि जो करे से साथ होगा हम कुछ कुछ होगा है वोगा रहमें कुछ भाव होगी हम इसके लिए करते हैं अगर इसके लिए करते हैं तो वैलिस कुछ ना आज बरसी और तो मुझे के माधर से आज नहीं सब सीखने होगी दाए जिवन में अलग-अलग पता है तो समस्चा या आपनी पता है और जिस चीज़ से हम भगवान का आश्णा मिलता है कभी-कभी सर्व नर्मान करते हैं जिस मुझे लोग उस चीज़ को भी त्याग लेने के लिए बहुत चाहते हैं चाहता रहता है हमें भकतों के संभी में भगवान का आश्णा मिलता है पर कभी-कभी सर्व नर्मान करते हैं जिस मुझे भगवान का आश्णा मिलता है तो उसके साथ हम भगवान का आश्णा मिलता है तो हमें बगवान का आश्णा मिलता है तो उसके साथ हमें भगवान का आश्णा मिलता है तो उसके साथ हमें तो उसके साथ हमें भगवान का आश्णा मिलता है तो उसके साथ हमें तो आश्णा मिलता है तो उसके साथ हमें भगवान का आश्णा मिलता पर एक होती है उसके पहले हमें ऐसे समगन का प्रवास करना चाहते हैं ताकि हमारे मुझे अज़ट करने के लिए चलोग समझने के लिए भगवान का आश्णा मिलता है प्रभुशी तो अपने में क्या चेंज कर सकते हैं कि हम प्रवास का आश्णा मिलता हैं तो अगर हम प्रवास का आश्णा मिलता हैं तो उस समय में भगवान का आश्णा मिलता हैं क्या है कि अगर हमें भखती में पीस्ट मिल रहा हैं वो खुपा है पर एक इसके बिनाव की अगर एक पीस्ट में रहता है तो यह बड़ी खुपा है बड़ी नहीं पर जिसके खुपा ही है तो कभी कभी हो सकता है कि हम कहते हैं कि भगवान की मुझे खुपा है हमें खुप कभी कोई लगता है कि सोहा माला है और और अगर कभी कभी कोई लगता है कि जब माला है तो कभी पालते हैं तो यह सोहा नहीं है यह बढ़ा राट है तो बढ़ा बहुत है पर तेस्ट में नहीं होने बात है कि भगवान की मेरे लिटर नहीं चुछी है वो भी एक परता से बढ़ता है एसा है कि उसको इसका टेस्ट देखना है कि क्या मैं भगती मेरी पसंदा के लिए कर रहा हूँ या भगवान के लिए कर रहा हूँ अगर मुझे टेस्ट देखना है तो उसके लिए मेरी पसंदा के लिए कर रहा हूँ तो ऐसे भी कि भगवान चाहते है कि हम दुखी रहे हैं और उसके लिए ऐसा पहुंच नहीं है भगवान चाहते है कि उनकी भगती में हम भी सुखी हैं पर कभी कभी जो हम बहुत है उन्हां ने जो मुझे आपका संगीज़ेवे में नहीं लगता है।
मतलब उन्हें दोंग णागा इन्हां देख जाए, 2-। और श? आपको ऐसा खाड़ी माई खेल क्रिकाय है, मैंने खैले का शायव के लिए, वेशसों पीछने पर आगा करा, चिसमादा सुछिय फिर 10 झोंय फिर एंगे आपका नहीं सकते हैं।
और मुझे प्रभुजी इतना कमे हमें देख पड़ा और मुझे प्रभुजी प्रभुजी प्रभुजी प्रभुजी प्रभुजी प्रभुजी प्रभुजी प्रभुजी प्रभुजी प्रभुजी प्रभुजी प्रभुजी प्रभुजी प्रभुजी वो इसलिए तो अंग्रीद है अगर हम बहुत बेसा कर सकते हैं जिससे जीकान आगेब हो थे आज नस्कान में आओगी अतने बारे में बहुत कुछ न कराएगे इसलिए भाउते हैं पर प्रभुजी बारे में विश्वास देती है परवाजन परवजन परवजन परवजन परवजन परवजन परवजन परवजन परवजन परवजन परवजन परवजन परवजन परव करम्कीवर्येड़ और गंग्रेशारेड आपको तोच करकति आज शप्तरतकि करणे इस पर क्राइट से आज करणे करते हैं