Hindi – Part 3 Relationship and life lesson from Mahabharta – Chaitanya Charan
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Disclaimer: This transcript was generated using AI and may contain occasional errors or inaccuracies. इस संपूर्ण व्याख्यान में वक्ता ने नीतिशास्त्र (Ethics), भक्ति और व्यावहारिक जीवन के बीच के अत्यंत सूक्ष्म और जटिल संबंधों पर विस्तार से चर्चा की है। इसे निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है: हरे कृष्णा आपका स्वागत है। content क्या है, वो करने का intent क्या है और फिर वो करने का फल क्या है, consequence क्या है तो अभी ethics, जो नयतिक विचलेशन होता है उसमें काफ़ी विचार होता है कि इन तीनों में से सबसे महतुपूर्ण कौन सा है क्या intent महतुपूर्ण है या content महतुपूर्ण है या consequence महतुपूर्ण है इससे कोई doctor दवाई देता है तो doctor दवाई देता है उससे patient ठीक हो जाता है तो बहुत अच्छा है doctor दवाई देता है पर उससे patient के बिमारी और बढ़ जाती है, complication हो जाता है तो क्या वो doctor को पता नहीं था और किसी को पता ही नहीं था, research में इतना आया नहीं था तो consequence हो गया वो जबी vaccine आया था covid के समय तो कुछ side effects हुए उसके तो अभी वो उस vaccine का ज्यादा research लोग नहीं कर पाए क्योंकि वो emergency था तो consequence हो गया उसका कि बुरा हो गया तो consequence हो गया तो अभी वापस नहीं देना चाहिए लोगों को पर content ही बुरा था क्या कि वो doctor नहीं दिहान दिया doctor सोचा नहीं कि कॉंपलिकेशन हो सकता है इसको यह condition है तो doctor का दिहान नहीं था तो content बुरा था तो अभी इसमें ही भेध हो सकता है और जो है हम देखते हैं कि intent महतुपूर है और कोई मेरा इरादा तो अच्छा था मेरा इरादा यह नहीं था हम बोलते हैं तो अभी इनमें से कॉंसा अधिक महतुपूर है तो अभी देखते हैं कि जो अलग अलग value सिस्टेम होता है तो भकती में सबसे महतुपूरन क्या है intent है भगवानों क्या बोलते है भाव ग्राही जनारदना तो भकती में एक अध्यात्मिक स्थर पे जो हमारा intent है वह महतुपूरन है साइमल्टेनिसली जब हम भकती इस जगत में कर रहे हैं अभी हम देखते हैं कि प्रभुषी राम चंद्र जब सेतु बना रहे थे तो तभी एक चोटी स्कुरल चोड़ा सा कोई प्राणि अलग बसुत कहा थे वो कुछ चोटे से मिटि के पत्था ले के जा रही थे मिट्टी के तुकड़े के जा रहे थे। तो जो बड़े-बड़े वानर थे, तुम बाजू को जा थे, तुम मीच में आ रहे हैं। तो तो फिर क्या हुआ? प्रभुशी राम ने क्या कहा? कि तुम अपनी शम्ता के नुसार पत्त उठा रहे हैं, ये अपनी शम्ता के नुसार पत्त उठा रहे हैं। तो मैं, मेरे लिए तुम दोनों समान हो। तो ये बगवान की कुरुपा है। तो ये भकती में जो इंटेंट होता है, वो महत्वपूर्ण होता है। साइमल्टीनिसली, इसके साथ साथ, अगर व्यवाहारिक रूप से, हम प्राक्टिकल दुशिन देखेंगे, तो क्या वो छोटे मिट्टी से सेतु बनने वाला है? नहीं। तो इस जगत में अगर हमें कुछ परिणाम चाहिए, कुछ परिवर्तन चाहिए, तो जो कारिय है, वो करना महत्रपूर्ण है, उसके लिए इंटेंट परियाप नहीं है, तो कोई बोलता है कि, अभी मान दिजिए इस कारकेंट के बाद में परसाद है, मानने के ज़रूरत नहीं परसाद है, पर कोई बोलता है कि, अरे मुझे बड़ा स्वादिश्ट विजन बनाया था आज, मैंने सब भक्तों को परसाद नहीं करना था, पर वो क्या है, मैंने पहले कभी बनाया नहीं था, तो आप सब पर एकस्पेर्वेंबंड करने वाला हूँ, और भाव तो अच्छा है, पर वो जो होता है, वो इतना स्वाद रहित बनाया है, कि फिर बोलता है कि, अरे, मेरा इंटेंट तो अच्छा था, ठीक है, इंटेंट अच्छा है, इंटेंट इस गुड़ बड़ इटि नौट गुड़ इनफ़ हूँ है, अब कैसे है कि व्यवाहारिक रूप से, इस जगत में हमें कुछ कारे करना है, तो उसमें क्या है, इंटेंट इस नौट सफिशियेंट, कॉंपेटन्स ज़रूरी है, कि, जो इंटेंट, इस नौट असब्स्टिटूट, सोरी, इकल दो नहीं है, इंटेंट ये, इस नौट इस नौट सफिशियेंट, कॉंपेटन्स ज़रूरी है, केवल अच्छा इंटेंशन है, ये पर्याप नहीं है। अभी हम एक, हमारे शास्तों में प्रहुपा जी बोला करते थे, कोई समाज सेवा करता है, इंटेंट अच्छा हो सकता है, पर अगर कोई शराबी को, पैसा देता है, आर तुम तो भूके हो, मैं तुमको पैसा दे रहा हूँ, पर वो शराबी क्या करने वाला है, वो खाना नहीं गाएगा, शराब पी लेगा, तो इंटेंट अच्छा है, पर केवल इंटेंट अच्छा होने से, इस जगत में, सही होगा ऐसे नहीं है, तो क्या है कि, जगत में परेणाम लाना है, और इसलिए स्पिरिचियल और मेटिरियल भैल्यूस जो होते हैं, जो अभी हम मेटिरियल कहे सकते हैं, उनको भौतिक कहे सकते हैं, पर यह भौतिक जगत में परेणाम लाना है, तो हमें क्या करना है, भौतिक चीजों का भी, भौतिक दूरिश्य से भी कैलक्यूलेट करना बड़ता है, जब प्रहुपा जी रत्यात्रा चालू की, पहले रत्यात्रा कहां हुई किसी पता है, सैं फ्रेंसिस्को में, तो उसके बाद में रत्यात्रा बहुत प्रसिद्ध हो गई, जो हिप्पी लोग थे, जो पहले हमारे मंदिर में, पहले स्कॉर्मे के पहले मेंबर्स थे अधिकाल सुरुप से, तो वो बहुत कुछ एसे आउटरीजिस कारे करना चाहते थे, जो कोई और नहीं करता है, जो ऐसे बहुती विचित्र कारे है, विलक्षन कारे, अच्छी सखारात्मक से नहीं, तो अभी वो भी सोचते है कि रस्ते पे हम नाचेंगे, तो पोलिस आके उनको गिरभदार कर देते, पर रथ्यात्र पभुवन चालू कर दिया, और रस्ते पे नाच रहे थे, पोलिस उनको अभी एसकॉट कर रही थी, तो विक्याव बड़ा आनन्द हो गया, तो ये बहुत अच्छा से फेस्टिवल बन गया, तो फेर जो भक्ते लंडन में गए थे, तो लंडन में गए, तो वो ने रथ्यात्रा करने का फैसला किया, और जब वो गए थे, अभी लंडन का रथ्यात्रा जो है, मैं पिछली साल था वहाँ पर लंडन में, असके लिए तुम युदध्द क्यों करना चाहते हो? जहां ओहई सुखी रहो, ऑर अपने आध्यात्मिक उरवते और बहति करो, और बगवतदम चले जाओ. तो अभी क्या है? इंग्लीश में एक शब्द होता है, Rationalize किसेन सुना आये यह शब्द है जब हम rationalize करते हैं तो क्या करते हैं हम rationalize बोलते हैं हम हमारी बुद्धी इस्तेमाल करते हैं जूट को सच बताने के लिए कोई पती है उसने अपने पती से वादा किया कि मैं सिघरेट पिना छोड़ दूँगा और पती के कमर में आ दिया और देखते हैं वहाँ पे सिघरेट का धुआ है तुम सिघरेट क्यों पी रहे हो यह जो कमरा था बहुत धन्डा था मैं तुमारे लिए गरम करना चाहता था हो क्या है rationalize तो अभी इस समय युधिष्ठेर फस्ते नहीं है झिश्णी कहते है तुम को लोगे हो गरूँगा मैं वो कहते है की मैंने कब कहा कि मैं युध करना चाहता हूँ मैं केवल अपना करत्तवे करना चाहता हूँ और अभी तक अभी तक हमने अभी हम युवख है Abhi आउस्था में हैं। अभी तक हमने हमारे जो नगरिक हैं, जान कसमार कि, अतना आजर दिया है, संभान दिया है, उनके कल्याण के लेए कुछ सेवा नहीं की, अमरे पुर्वज जो है, ।उनके लिए कुछ सेवा नहीं की है। पर जो हमारा आगे बड़ना है, उसकी सेवा है, तो जो हमारे करतव्य पूरा करने के लिए हमें राज्य की ज़रूरत है और जो आपने ही वचं दिये थे, उसके अनुसार ही जो हम आपको कारे करने को बोल रहे हैं, हमने अमारा पाठ कर लिया है, कृपया आपका, आपकी जी भुमिका है, वो आप कर लीजिये। तो यहाँ पे जो होता है, युदिश्टिर has become more of a hard-nosed realist. कैसे है कि यहाँ, एक तरसे आध्यात्मी तुष्टी से हम देखें के तो, क्या है, ये सारी जो लिला है, भगवान की लिला है। पर वो उसको भगवान की लिला है बोलेंगे, तो हमारे लिए सीखने के लिए कुछ नहीं है। हाँ, भगवान की योजना है सबको, सत्य है वो. तो प्रभुपा जी भी कैसे करते हैं, गीता के शुरुवात में बोलते हैं कि अर्जुन का जो मोह है, वो क्रिष्ण की योजना से आया है। हम केरिंग हैं पर केरिंग होने के कारण हम केरलिस बन सकते हैं तो क्या था यूधिश्टर महारा जो थे, वो केरिंग थे कि मैं मेरे परिश्णों का आदश का पालन करूँगा परिनाम कुछ भी हो जाए, मैं सही कारे करूँगा या सही फल आना वो महत्वपूर्ण है तो अभी material level, भौतिक स्थर्पे जब हमें कारे करना हैं तो भी फैसला करना है कौन सा सही है सही कारे करें या वो कारे करें जिससे सही फल आ जाए तब इन दोल में फ़रक क्या है कि अगर कोई गुने गार है तो अभी ऐसे एक law में एक principle होता है presumption of innocence कि कोई भी किसी को accusation हुआ है, आरोप हुआ है तो पहले कि जब तक वो आरोप साबित न हो तब तक उसको innocent मानते हैं उसको गलत नहीं मानते हैं फिर उसको defence मिलना चाहिए, उसको lawyer मिलना चाहिए उसको अपना case करने का मौका मिलना चाहिए पर कभी कभी ऐसे कुछ गुने गार होते हैं, कुछ आतंक्वादी होते हैं वो उन्हें इतने गुनास्पत कारे किये है कि अभी सरकार order ले दिये कि shoot at sight कि उनको तुरंट मार डालो. अभी जब मैं जब अमेरिका में आता हूं तो वहाँ पे अभी हम कई बार सवाल पूछते है कि how did you come to Krishna consciousness जब पास्चाते लोग हैं थे उनको वो come to Krishna consciousness वो अभी तक अगर उन्हें स्विकार नहीं किया कि ये जीवन का उद्देश है तो फिर क्या होता है वो बोलते हैं come to Krishna consciousness मतलब क्या है कि आप यहां पे आ गए आपने अपना भुद्धी विचार करना छोड़ दिया सब कुछ तो इसलिए वो बोलते है कि हम वो बास्चाते लोग में how did you come to Krishna consciousness नहीं पूछते है so how did you encounter भक्ति how did you encounter Krishna consciousness तो मैं ठीके बोला मैं अमेरिका में था तो इस शब्द इसस्वाल करने लगा था बारत में आ गया है तो encounter का कुछ और अर्थ होता है so अभी क्या होता है कभी कभी जो बहुत बड़े गुलेगार होते हैं उनका encounter कर देते हैं तो अभी एक तरह से कहेंगे कि ये content की दुरिश्टी से सही नहीं है कि हर एक को प्रॉपर जो है legal procedure मिलना चाहिए हर एक का court में केस होना चाहिए उसको डिफेंस करने का मौका मिलना चाहिए पर क्या होता है कभी कभी वो जो legal पद्धती में जो loop holes होते है कि इसको इसको रिश्वत दे दो ये evidence प्रॉपर नहीं है ये कर लो वो कर लो और कभी कभी court case होता है किसी को मौत की सजा देनी है पर उसका सारा जीवन मौत की सजा मिलने के पहले चला जाता है 30-40 साल लग जाते है और उसमें और गुने करते रहता है तो कभी कभी क्या है कि सही process follow करना जो content जो कारे है वो सही करना ज़रूरी है कभी कभी फल क्या है वो महतुपूर्ण देखना है तो एक तरह से जो ethics होते हैं दो प्रकार के ethics होते हैं एक है categorical ethics categorical मतलब क्या ये सही का category है और ये गलत का category है और सारा जगत जो है सही और गलत के category में फिक्स डिवाइड कर लिया गया है ये categorical ethics है और उसके विपरित में है contextual ethics contextual ethics मतलब क्या है कि हाँ कुछ चीजे सपष्ट रूप से सही है कुछ चीजे सपष्ट रूप से गलत है पर बीच में बहुत से ऐसी चीजे है वो हमें क्या सही है या गलत है वो बोलना इतना आसार नहीं है तो इसमें क्या है इसको कहते है इंग्लेश में muddle in the middle muddle in the middle मतलब क्या है हम बच्चों को सिखा कि आपको सत्य बोलना चाहिए हाँ च्या है सत्य बोलना. पर मान लिजे कोई आतंख्वादी है कोई रायटियर से वो किसी व्यक्ति का पिछा कर रहे हैं वो हमारा मिट्र है वो उसको मारने के लिए आ रहे है मुझे बचाओ आप तो हम उसको हमारे घर में गए, बेस्में में गए, तुम छिपा देते हैं फिर वो आतंख्वादी आके ढर्वादे में ठोकते हैं वो है यहाँ पे तो क्या हम सत्य बोलना चाहिए भी क्या हम जूद बोलना चाहिए तो अभी क्या है सत्य बोलना अच्छा है पर अगर सत्य बोलने से किसी निशपाप व्यक्ति की मुत्ति होने वाली है तो फिर क्या है सत्य बोलने से दूसरा एक वैलियो और बड़ा है प्रोटेक्ट प्रिजर्विंग लाइफ तो इसलिए हमें केवल कोई व्यक्ति फैसला कर लेता है सत्य बोलना असत्य बोलना यही मेरा बेसिस है फैसला करने का यह राइट है यह रॉंग है वो ऐसा फैसला कर लेता है तो क्या होता है वो व्यक्ति फस सकता है वो व्यक्ति गलत कारे कर सकता है और तो कही बार हमें विचार करना होता है ये कार्य से फल क्या होने वाला है और वो फल देखकर अब यह ऐसे नहीं व्यक्ति गलत कारे कर रहे है जूड बोल रहा है, बड़ देर इज अनदर वैल्यू तो बी कंसिदर करना है जुट बोलना एक दरसे बुरा है वो किसी को बिना किसी कायदे के सिधा मार डालना ये बुरा है पर कभी कभी वो करना पड़ता है और यह जो ethics का evolution है कि अभी जब हम जीवन जी रहे हैं तो life is tough, life is complicated तो इस जगत में सही क्या है, गलत क्या है वो समझना कई बार मुश्किल होता है तो अभी हम तीन चार प्रसंग देखे गए कि पांड़व कैसे फैसला करना मुश्किल होता है तो अभी जब अर्जुन गीता के शुरुवात में कहते हैं कि मैं युद्ध नहीं करूँगा तो वो क्यों बोलते हैं युद्ध नहीं करूँगा क्योंकि एक तरह से उनको दो धर्म होते हैं पहले वो आते हैं शत्रिय धर्म करने के लिए क्या मैं युद्धा हूँ और मैं युद्ध करूँगा शत्रिय धर्म कर रहे हैं तो क्या है? फाइट उसका अर्थ होता है पर जब वो रणभूमी पे आते हैं और सेन योरु भयोर मध्ये रथम स्थापे में अच्छुत उसके बीच में जब उनका राथ आता है तो क्या होता है? भीष्मद्रोड प्रमुक्ता सर्वेशां च महिक्षितां वो भीष्मद्रोड को देखते हैं और फिर उनको अपना जो कुलधर्म है उसका एहसास जादा हुने लगता है कि ये तो मेरा ही कुल है, ये मेरा ही परिवार है इनके खिलाफ मैं कैसे युद्ध कर सकता हूँ? प्रतिर्ण प्रतिर्ण प्रतिर्ण हर धर्म में आपको तोष होता है मुझे जियुदह… मेरे यी रिष्तारों देखा हैं कहना पड़ा कोई ब्राम्दमों हो गा तो असुवो हो यज़ान करना पड़ते है यज्यान में कभी जाणावरों को मानना पडौता है हरे एक धर्म में कुछ न कुछ थे दोश होता है। तो इसे दोश के कारण हम धर्म को त्याग नहीं सकते हैं। तो अभी यहाँ पे गीता का ओराल उद्देश क्या हाता है कि आपको जो सही फल है वो लाना है धर्म संस्थापनार्थाय संभवामी युगे युगे जो धर्म की प्रस्थापना करनी है उसके लिए जो आवश्चक है वो करना है तुम्हे तो अभी बगवान कहते है कि आज तुम जो है तुम कहोगे कि यद्यद आचलती स्रेश्ट सर्जुन को बताते हैं कि तुम कहोगे कि अरे ये तो मेरे रिश्टदार है इनको मैं मार नहीं सकता है इसलिए तुम्हे कथिन कर्तवे देखे अपने कर्तवे को छोड़ देखे तो यही उधारने लेंगे बाकी लोग भी जबी कोई कथिना आयेंगी तो वो अपना कर्तवे नहीं करेंगे तो इससे समाज का संग्रह, समाज का चलना है वो मुश्किल हो जाएगा तो अभी अर्जुन जो है युद्ध नहीं करेंगे तो उससे क्या होने वाला है क्या दुर्योधन युद्ध नहीं करने वाला है दुर्योधन तो युद्ध करने ही वाला है तो अर्जुन युद्ध नहीं करेंगे तो क्या होने वाला है वो अधिकान शुब से भीम को तो समझा नहीं होने वाले है वो युदिश्टर को मना पाएगे पता नहीं तो अगर अर्जुन के बिना युद्ध होगा तो संभावना है कि सारे पांडव का विनाश हो जाएगा अगर अर्जुन की सारे से युदिश्टर को मना लेते है युदिश्टर भीम को मना लेते है वो युद्ध नहीं करते है तो दुर्योधन क्या करने वाला है शायद द सब क्या होता है ये एक पॉलिटिकल रेंज्मेट हो रहा होता है कि मान लिजे कोई एलेक्शन होने वाला है तो तुम सब बड़े बड़े कंपनिया होते है बड़े बड़े लोग होते है तुम हमारे पास में जाओ हमारे पास में जाओ तो जो एक बड़े जो जीतता है फिर वो क्या करता है कई बार तुमने उसको सपोर्ट किया था मैं तुमको दिखाता हूँ भी तो ऐसे नहीं करना चाहिए पर दुर्भाक्याश ऐसे होता है तो दुर्भाक्याश क्या है जिन सब ने पांडव को सपोर्ट किया है उन पे वो अत्याचार करेगा तो अर्जुन तुम फल देखोगे तुम चाहा रहे हो कि युद्ध नहों हो युद्ध हिंसा नहों पर वो समभावी नहीं है तुम हिंसा को टालने के लिए उद्ध नहीं करोगे तो और हिंसा हो जाएगे तो इसलिए क्या है तुम्हें कॉंसिक्विन्स देखना है फल देखना है और फल देखके फैसला कर रहा है इसलिए भगविता के अंथ में जब भगवान बोलते है यत्र योगी इश्वरा कृष्री यत्र पार्थो धनोदर तत्रश्रीर विजयो भूति ध्रूआ नीतिरमतिरममा. अब वो नीति पे जोर क्यों दे रहे है यत्य पे हम देखते हैं कि पांडवो को कई बार ऐसी चीज़े करनी पड़ती है जो कुछ हद तक अनैतिक कहे जा सकती पर क्या है कि वो अनैतिक नहीं है वो कैसे है कि एक चीज़ जो है उसको इम्मॉरल कहे सकते है कि आप जो जुड़ बोला ये इम्मॉरल है पर वो इम्मॉरल नहीं है वो एक दिफरेंट मॉरल कंसेट्रेशन है कि जो दिफरेंट मॉरल कंसेट्रेशन है कि किसी और पढ़ती से हम विचार कर रहे है उसको तो अभी साथ अमेरिका में एक कंटरी है एल सालवडर नाम का तो वो जो कंटरी था वो जैसे था सारे विश्व का क्राइम केपिटल था तो उसमें एक प्रेसिडन बन गया और उसने पुरा फैसला कर लिया कि सारे गुनेगार जो है उनको जेल में डाल देगे तो उसने ब ग्रवधार कर दिया ग्रवधार कर दिया जेल में तो बड़ा अक्तेचार कर रहे हो उस पे पर क्या है उसके कारण उस देश के जो क्राइम है कमप्लीटली ड्रॉप हो गया है और अभी ये एक अच्छा टूरिस टेस्ट्टीजिस्क्षिन बन गया है तो बोल रह थे है कि वो बोलता है कि। उसका इविंट्रियो होगया तो। हाँ उनके राइटस है, पर मैं उनके राइटस की परवा। उनके यूमन राइटस की परवा करूंगा, तो फिर क्या हो रहा है? जन साधारन लोग हैं वो जब गुनेगार होते हैं, किसी को भी मा डालते हैं किसी का रेप कर देते हैं, किसी का बच्चे को उठा लेते हैं तो वो सारे सिटिजन्स हैं, उनके human rights के बारे में क्या है? तो मैं जो criminals हैं, उनके human rights को ज़्यादा जोर दू या जो normal law abiding citizen हैं, उनके human rights को ज्यादा जोर दू तो क्या है, life is difficult कभी-कभी अच्छे लोगों को भी, there are no good choice and bad choice there is one bad choice and another bad choice तो ये बुरा परिया है, ये बुरा परिया है, उन में से कौन सा कम बुरा है? कौन सा कम बुरा है, मतलब क्या? कि उस से किस से जादा कम बुरा प्रभाव होने वाला है? तो अभी इस background से हम चार प्रसंग देखेंगे अभी कि जहांपे पांडवों को भी एक तरह से बुरा तारे करना पड़ा सबसे पहला था, जब भीश्म का वद हुआ तो अभी भीश्म इस तरह से युद्ध कर रहे थे कि ऐसे लग रहा था खास कि दसमे दिन, दसमे दिन उन्हें ने व्रत लिया था कि आज तो मैं या तो कृष्ण को शस्तर उठाने को लगाऊंगा या पांडव तो कृष्णने तभी अपना शस्तर नहीं उठाया पर एक चकर उठा लिया और तभी कृष्ण क्या बोलते है ये महतुपूर्ण है, अभी उस दिन क्या होता है कि एक तरह से आरिजुन जो है, अभी मैं भीश्म के बीश्मा द्रोन के इसमे थोड़ा और क्यों क्या है कि ये इसमे एक इंपॉर्ण प्रिंसिब आता है खास करें बीश्म के इसमे तो अभी यह ऐसा जो कृष्ण पांडव का युद्ध था, वो ऐसे नहीं था कि पांडव और कृष्ण जो है वो भकता और अभकता के बीच में युद्ध नहीं था, वो धर्म और अधर्म के बीच में युद्ध था, भकता और भकती और धर्म के में फरक क्या है, जब हम भगवान देखते है, 4.7, 4.8, उसमे धर्म संस्थापनार था या संभवामी यु युगे युगे, तो धर्म जो है वो एस्टाबलिश करते हैं, तो धर्म, धर्म का मतलब क्या है, बेसिक लौ और ओर्डर, और फिर उसके बाद में 4.9 और 4.10 क्या है, जन्म करमचमे दिव्यम और फिर वीतरागभहरतरोदा मनमयामाम उपाशुता, वह है भक्ति, अब भक्ति जो है, वो इंस्पायर की जाती है, वो एस्टाबलिश या इंफोर्स नहीं कर सकते हैं, भक्ति ये जो है, ये ये जो है, किसी को जबर्दस्ति उसके हाथ में जब माला देता है, उसको बोला, तुमको जब कर रहें तो गोली मार दूंगा, तो व इसलिए भगवान क्या बोलते हैं, कि अभी कोई नियाम पालन नहीं कर रहा है, वो बोलता है मैं ट्राफिक पह, ट्राफिक णियाम को पालन नहीं कुरूंँगा, तो फिर वो नियां पालन करने के लिए आपो गिरबदार के जाएगा। तो क्या है? धर्म जो है, वो इस्टेबिश करना है। भकती है, वो इंस्पायर करनी है। तो अभी जो पांडा और कवरो का युद्ध था, वो भकता और अभकता का युद्ध नहीं था। अभी कवरो के पक्षे में वैश्णव थे। कौन था यह? भीश्म कुद एक वैश्णव थे। भुरिश्राव भी एक वैश्णव था। कवरो के पक्षे में वैश्णव थे। पांड़ो के पक्षे में दुर्पत था। अधुर्प जो था वो शाईवाइट था। उनका जो कुल दाईवत था शिवजी की बुजा करते थे वो। तो ये वैश्णव और अवैश्णव में युद्ध नहीं था। ये धर्मा और अधर्मा में युद्ध था। और ये क्यों युद्ध था? क्योंकि जो दुर्योधन था वो अधर्मिक कारे कर रहा था। वो समाज पे अध्याचार कर रहा था। तो अभी जब युद्ध हो रहा था तो बीश्म जो है वो भक्त थे। पर बीश्म जो थे, वो जब मैं बता था कैटेगॉरिकल एथिक्स। उनके लिए एकी एथिकल प्रिंसिपल सबसे महतुपन है। सर्वोचन एथिक पूल्य क्या है? कि मैंने जो वचन दिया है, उसको मैं सत्य रहूँगा। I will always stick to my word. जो मेरा वचन है, उसके लिए सत्य रहूँगा। पर उनका वचन क्या था कि मैं विवाह नहीं करूँगा। मैं कुछ राज्ये पे क्लेम नहीं करूँगा। मैंने कोई पुत्र नहीं होगा जो मैं राज्ये पे क्लेम करेंगे। और जो राज्ये पे होगा, मैं उसका हमेशा सरक्षन करूँगा। पर जब उनने व्रत लिया तो कभी कलपना नहीं करूँगा कि धुतराश्ट और दुर्जधन जैसे कोई कुछ राज्ये पे होगा। और वो ही कुल का विनाश करने के लिए तुल जाएगे। तो अभी जब उन्होंने पांडवों के खिलाफ, कौरों के पक्ष में युद्ध करने का फैसला किया, तो वो क्या था? मैं जो कौरों का वांश का राजा है, उसके पक्ष में हमेशा रहूंगा। पर जो कुरों वांश का राजा है, वही कुरों वांश का विनाश कर रहा है अभी, करने पे तुला हुआ है, तो क्या उसके पक्ष में रहने चाहिए? जब कृष्ण भीष्म की ओर जाते हैं, वो अपना रत का पहिया उठाते हैं और दोर्ड से उजाते हैं, और जब भीष्म देखते हैं कि कृष्णा ने शस्तर उठा लिया है, यह सकते है पहिया शस्तर नहीं है, एक भील शस्तर नहीं है, पर अभी कृष्ण क्या होते है, कृष्णा पर सुधर्शिन चक्र उनका अस्तर है, पर साधरान चक्र अस्तर नहीं है वो, पर वो अभी अस्तर उठा लिया होते हैं, तो आचारे बता दे कि कृष्णा इतनी चिंता वे होते हैं अर्जुन के रक्षिके के लिए कि वो अप वही चक्र फेका, पर यहाँ पर वो पास में जा रहे थे भीष्मति, क्यों, कि किसी को अगर मारना है, दूर से मारना है तो नहीं चुक सकता है, पास में जा रहे थो, नहीं चुकने का संभाव रह नहीं है, तो इसलिए वो पास में जा रहे थे, और जब वो जा रहे थे, धब कृष्णने भीश्म से कहा गया, तुम इस युद्ध के मूल कारण हूं, जो मंत्री होता है, उसकी जिम्मेधारी है, कि जब राजा गलत मार्ग में जाये, तो वो राजा को सही मार्ग बताये, तुमने दुरुतराश्ट को सही मार्ग नहीं बताया, इसलिए युद् से मुझ्य होगी, तो यह मेरे जीवन का परम सवभाग्य है, और तुम जो बोल रहे हैं, वो हमेशा सत्य ही है, मैंने पूरा प्रयास किया धुतराश्ण को समझाने का, बार बार उसको बताया, कि ये युद्ध से कुल का विनाश हो जाएगा, पर उसने मेरी बात बिल्कु उठाएगे, तो कृष्णा अपने वचन तोड़ने वाले व्यक्ति बन जाएगे, और वो मेरे लिए ऐसे कर रहे हैं, मैं नहीं चाहता, तो आर्जुन कृष्णा को चिलाने लगे, कृष्णा रुख जाओ, पर कृष्णा भी इतने ख्रोध में आ गए थे, लाव इस कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, और कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, कृष्णा को रोखने के लिए, पर कृष्णा इतने ख्रोध में आ गए थे, तो कृष्णा को पकड़ लेते हैं, पर कृष्णा को पकड़ लेते हैं, तो कृष्णा को पकड़ लेते हैं कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, तो कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, तो कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, तो कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, तो कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, तो कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, तो कृष के पैर को पकड़ लेते हैं, तो कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, तो कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, तो कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, तो कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, तो कृष्णा के पैर को पकड़ लेते हैं, तो कृष्णा के पै पर वो इतनी शक्तिशाली है, कैसे कर पाऊंगा मैं? अर्जुन को दो समस्या होती है, एक तो है ये तो मेरे आदर के पात रहे हैं, उनको कैसे वद करूंगा मैं? दूसरा वो इतनी शक्तिशाली है। उनका कैसे वद करपाऊंगा मैं? तो कृष्णा कहते है कि तुमने ही तुम पर ही जंबिदारी है, तुमने ही वादा किया युद्ध के पहले, कि तुम अगर भीश्म तुमारे विर्द होगे तो उनको भी नहीं छोड़ोगे, आज तुमने मुझे वापस वो वादा किया है, मैं ये करना पड़ेगा, और कैसे करना है? तुमने भीश्म को ज पड़ेगा किया होता है, युद्ध के पहले, वास्तव में, पहले अर्जुन रुख जाते हैं, और फिर कृष्णे को भगोरिता उनको बोलते हैं, दुसरी बार युद्धिष्णे रुख जाते हैं, युद्धिष्णे अपने रथ से उतर जाते हैं, और कौरो के पास ले जाते हैं, और सारे जो कौरो वरिष्ट हैं, भीष्म, द्रोन, कृपा और शाल्य, उन सब से आशिर्वाद मांते हैं, युजय के लिए, और कोई भी आशिर्वाद देने के त्यार नहीं होता है, और कहते हैं कि, अभी उनको बड़ा पुश्किल सवाल पूछना होता है कि भीष्म से पूछते हैं कि, मैं तुम्हें कैसे हरा सकता हूँ, क्योंकि कहते हैं कि, अभी वो समय नहीं आया है, बाद में आओ मेरे पास, मैं तुमको बताओंगा, द्रोन बताते है कि, जब किसी विश्वास, पातर से मैं कुछ बुरी सब खबर सुनुगा, तो मैं खुद युद्ध करना छोड़ दूँगा, तभी तुम मुझे हरा सकते हूँ, जब तक मैं, मेरा धनुशा हात मैं, मैं कभी हरा नहीं, कोई हरा नहीं पाएगा मुझे। तो अभी यहां पे, वो भीश्म के पास जाते हैं, और कृष्ण कहते हैं, अर्जुन और पांड़व से, अ पूरो, जो शिकणडी है, वो पूरो जन्म में, एक स्ट्री थी, कौन थी वो, अम्बा, तो मैं उसके खिलाफ युद्ध नहीं करूँगा, तुम उसको अपने सामने रखो, तुम अपने सामने रखो, और उसके फिर से तुम युद्ध करो, और तुम उससे मुझे हरा सक तो अभी एक तरह से, जो अम्बा के साथ हुआ होता है, क्या होता है, उसके स्वयमवर में, उसकी इच्छा होती कि शाल्ले से विभा करें, और वो ऐसे, शाल्ले में बड़ा शक्तिशाली युद्ध होता है, और क्योंकि भीष्मले ब्रह्मचारी का बत लिया होता है, तो कोई अपक्षा नहीं करता, भीष्मले वहाँ पर आ जाए, स्वयमवर में, तो उन्हें ऐसे, वह ऐसा कॉंटेस था, एक तरह से रिग्ड कॉंटेस था, कि क्या, वो स्वयमवर था उसमें, शाल्ले ही जीतने वाला था, और शाल्ले से उसका विभा हो जाने वाला था, पर भीष्मले अनुपेख्षिर रूप से आ गए, वह स्वयमवर में, वह थोड़ा अन्यूजूवल था, कि कोई, कोई स्वयमवर में जो विभा करना जाता है, वो आना चाहिए, ना कि उसके विधयप्रत्रित में कोई और आना चाहिए, पर भीष्मले सुचा जा की, जो सबसे सरोच स्थ्रिय जो है, वो हमारे कुल में होनी चुई है, तो इसलिए वो, जो उनके भाई थे, उनके लिए, वो भीचितरवीरे के लिए पत्नी दूनने के लिए, वो पत्नी के लिए वो खुद गये। तो जब वो अंबा को उन्होंने ले लिए, स्वयमवर तो वो जीत लिया तो उसके बाद में जब वो यहाँ पे आ गए तो अम्मा ने तभी बताया जब मौका मिला उनको तो पहले मौका पता थी कि मेरा तो रुदे मेंने शाले को दिया है तो भीश्मा ने कहा ठीक है अगर ऐसा है तो मुझे पता नहीं था तुम उनके पाद जा सकती हूँ पर जब शाले के पाद जाते हैं तो शाले कहता है कि मैं तो उद्ध में तुम्हें हरा चुका हूँ मैं उद्ध में मैं भीश्मा ने हराया है मुझे तुम उसके साथ रही हूँ मैं तुम्हें स्विकार नहीं कर सकता तो अंबा का रुदे तूट जाता है उससे वो भीश्मा के पाद जा दिया हूँ तुम्हारे कारण मैं इस प्रत्ति में हुए तुम्हें मुझे आश्रिदना पड़ता हूँ तुम्हें मुझे मेरे साथ विभा करना पड़ेगा भीश्मा के पाद जा दिया हूँ तुम्हें मुझे आश्रिदना पड़ता हूँ तुम्हें मेरे साथ विभा करना पड़ेगा भीश्मा के पाद जा दिया हूँ तुम्हें मुझे आश्रिदना पड़ता हूँ तुम्हें मुझे आश्रिदना पड़ेगा भीश्मा के पाद जा दिया हूँ तुम्हें मुझे आश्रिदना पड़ेगा भीश्मा के पाद जा दिया हूँ तुम्हें मुझे आश्रिदना पड़ेगा वो कौन है? कौरव है नतो वो धर्म का पालन कर रहे है नहीं बक्ती है उन्हें तो वो इस जगत में भी विद्वन्स करेंगे क्योंकि धर्म का पालन नहीं कर रहे है और अगर जगत में उनके वो डूम्ड है वो डूम्ड हैं वो इस जगत में विद्वन्स करेंगे और वो इस जगत में विद्वन्स करेंगे अगर कोई धर्म है पर उसमें बक्ती नहीं है तो फिर क्या होता है? तो अभी एसा विक्ति वो इस जगत में एसा विक्ति करेंगे इस जगत में शायद वो अच्छा कारे करेंगे ऐसे हो सकते कोई लोग भकत नहीं है वो नेथिक हो सकते है और अच्छा है वो नेथिक है पर क्या है? कि नेक्स्ट वर्ल्ड वो कैसा कारे कर रहे है उस पे निर्भरे क्या है? क्या है? भीष्म इसमें आ जाते हैं तो क्या है? भीष्म जो है क्या उनमें धर्म नहीं है? दर्म है एक तरसे वो अपने वचन से बड़े बद्ध है वो धर्म है पर क्या है? धर्म समझना बड़ा मुश्किल होता है तो वो क्या होता है? नीचे का धर्म जो है तो फिर वो उचीत नहीं है तो वो एक तरह अभी प्रोपा जी भी कहते है कि क्योंकि वो द्रावपदी के वसरण के समय शांत रहे कुछ उन्होंने कुछ प्रतिकार नहीं किया इसलिए ही अल्सो डिसर्ल्स टू डाइ उनका भी बाद होना सरूरी है तो उन्होंने अधर्म क्या मौनम सम्मति लक्षन जैसे कहते है वैसे हो गया उनके लिए तो अभी कृष्ण किस तरह से कारे करते है ये बोड़ा दिल्चस्प है अभी एक तरह से कृष्ण बीश्म से कह रहे है तूम इस युद्ध की जड हो और अर्जुन से कहते है तुम मत हिचकि चाओ बीश्म को मारो तुम पर वही कृष्ण अंत में जैसे भागोतमें वर्ण आता है महाबाभी वर्ण आता है वो पांड़ावों से कहते है कि तुम बीश्म के पास जाओ और बीश्म से उपदेश सुनो धर्म के बारे में उपदेश सुनो उन्होंने अधर्म चुना है तो धर्म के बारे में उपदेश सुनो क्या है कि येस उन्होंने एक गलती की कि जज्जिमेंट एरर था उनका पर इसका मतलब नहीं है उनका पूरा ज्यान गलत था तो एक एक्स्ट्रीम है कि धर्मा और बक्ती में निगलेक्ट धर्मा निगलेक्ट बक्ती फ़र धर्म कोई धार्मीक है तो बक्त है ये नहीं बक्त है उसका फ़रक नहीं जीवता है और निगलेक्ट धर्मा फ़र बक्ती तो ये दोनों हमें अवाइड करना है जो बालेंस है कंसिडर बोत तो अभी कैसे है कंसिडर बोत का मतलब क्या है यहाँ पे अभी भीश्मा क्रिष्णा क्योंकि भीश्मा बक्त है इसलिए नहीं कहते है कि आर्जुन तुम उनसे युद्ध मत करो क्रिष्णा नहीं आर्जुन भीश्मा का अधर्मा करते है क्योंकि अधर्मा के लिए भीश्मा के लिए भीश्मा के लिए भीश्मा के लिए भीश्मा के लिए भीश्मा के लिए भीश्मा के लिए भीश्मा के लिए भीश्मा के लिए भीश्मा के लिए भीश्मा के लिए प्राइवेटली बिल्कुल प्राइवेट नहीं है पर वो कुछ भीश्मा है कुछ बड़े बड़े रिश्मूनी है जन साधारन लोग वहाँ पे नहीं है पांड़ वहाँ पे वो भीश्मा का अधर करते है तो क्या है वो एक तरह से धर्म और भक्ती में जब टेंशन आता ह कि क्या है कि कोई मान लिजे भक्त है उसने कुछ गलत कारे किया है तो मैं भी बैक टु गॉर्डड का एडिटर इस एक एडिटर हूँ है तो हम कई बार लोग कैसे भक्ती में आये उसके बारे में वो कहानी होती है How I came to Krishna Consciousness तो हमको एक कहानी आये थी साथ अफरिका से कैसे वो एक भक्त थे वो जेल में थे और जेल में उनको गिता मिल गई और जेल में गिता मिल के वो भक्त बन गए तो हमारी पॉलिसी है कि किसी मंदिर से किसी एरिया से कनेक्टेड है तो किसी भक्त की कहानी होती है तो हम उस भक्त के जो लीडर, उस एरिया के लीडर से उनसे बात करते हैं क्योंकि हम इसकी कहानी दिखने वाले हैं तो अभी वो कहानी तो काफ़ी प्रेनादायक थी पर जब हमने वहाँ की लीडर को लिखा तो उस ने बताया कि ये जेल में गया क्यों था ये जेल में इसलिए गया था कि वास्तव ने उसमें किसी स्ट्री के साथ बड़ा दो भेवार किया था अब जो स्ट्री थी वो वास्तव में अमारे कॉंगरगेशन की एक बीटी थी वो तो अभी क्या हो गया अभी बोले कि वो पहले की आय भी ऐसे नहीं करता है वो उसे छोड़ दिया उसे बक्त बन गया है तो अभी हमारे काफी डिबेट हुआ कि क्या उसकी कहाणी हम बीटी की में शाप रहे थे तो अभी वो बक्त बन गया है आध्यात्मिक स्टर्पे हम कहें सकते है कि बक्ती से सारे पापों का नाश हो जाता है पर अगर हम व्याभारिक स्टर्पे देखेंगे तो हमें क्या है कि अगर किसी ने गलत कारे किया है तो वो सत्य है हमें आपके लिए सर्व टाइम होगा और उसके कारण उसका रेकॉर्ड एक तरसे क्लीन हो जाता है पर क्या ऐसे विक्ति को हमें ग्लॉरिफाइ करना है क्या सर्व टाइम होगा अगर किसी ने गलत कारे किया है तो उसको हम ग्लॉरिफाइ कर सकते हैं क्या उसको हमें उसकी कहानी हैं बैक टुवर्ड में चापनी हैं तो हमने पिचार किया है फैसला किया है कि आपके लिए सर्व टाइम नहीं कर सकते हैं तो उसके भक्ती है ग्लॉरिफाइ पर क्या है अगर उसने पहले ऐसे कारे किया है तो आपके लिए सर्व टाइम पर कभी वासिता नहीं क्या थे तो तभी हम भिश्म हा का उधारण लेके चर्चा कर रहे थे इसके मैसे यह मुझकिल है भैसला करना कि हमें हमें भक्ति के नाम पर दर्म का उलन्गन नहीं करना है, आपके बच्चे है ये तो एक बहुती करतव है आपका, पर आप भक्ति नहीं छोड़ने चाहिए था, तो वो गर्भवती हो तो भी आप बुक्षि दिस्ट्रिपूर्ट के लिए जाओ, फिर आपका छोड़ा बच्चा है तो आप मंदिर के लिए जाओ, फिर आपके बच्च दिस्ट्रिपूर्ट के लिए जाओ, फिर आपका छोड़ा बच्चा है तो भी आपका छोड़ा दिस्ट्रिपूर्ट के लिए जाओ, फिर आपका छोड़ा दिस्ट्रिपूर्ट के लिए जाओ, फिर आपका छोड़ा दिस्ट्रिपूर्ट के लिए जाओ, फिर आपका चो कभी कभी धर्मों को भक्ति के लिए त्याग सकते हैं, पर साधारा इंत्यार धर्मों और भक्ति दोनों साथ में रखना हैं। तो अभी क्या होता है, पांडवों को जो धर्मा और भक्ति है, कहीं बार ऐसे होता है, कि हम देखते हैं, पांडवों ने जो किया, कृष्ण ने बोला, इसलिए किया, कृष्ण ने बोला कि करणों को मारो, पांडवों ने मार गया, यह उनके शर्णा गती है, कृष्ण ने कहा कि जुधिश्र को बोलो, कि अजि जैदरत है, ऐसे नहीं कि पांडवों, अरे कृष्ण ने बोला, इसलिए कर दो, कोई परवाह नहीं है, नहीं, वो विचार करते हैं, जब यह द्रोन का वद होता है, तो उस समय क्या होता है, कि द्रोन कमांडर होते हैं, और कमांडर जब होते हैं, तो उनके, उनके नित्रत में ही, चौदवे दिन, जैदरत का वद होता है, और वो एक तरसे उनके लिए बड़ी बेज़ती हो जाती है, कि पूरी सेना मैंने तेनाथ की थी, एक उद्धा को सक्षन करने के लिए, और एक उद्धा को नहीं बचा पाया मैं, और दुर्गेजन को बहुत डाटता है, त और फिर वो गुस्से में आकर, जो दिव्यास्त्र है, वो साधारारी उद्धाओं के किलाब इस्तवार करने लगते हैं, ये कैसे है, कोई नुकलियर वेपन्स, नौर्मल वार्फेर में यूज़ करने लगता है, तो जब ये होता है, तो कृष्ण कहते है, तुम्हें आज तो फिर द्रोण जो है, तुम्हारे साहरी सेड़ा का आज मिनाज कर देगा, और फिर तो उस अस्मान में रुशी मुनी भी आते हैं, वो कहने लगते हैं, द्रोण से तुम ये क्या कर रहे हो, रुख जाओ तुम, तुम रुख जाओ, ऐसे नहीं कर सकते, और जब ऐसे होता है, तो तभी द्रोण सोचने लगते हैं, पर फिर भी शत्र द्रोण में आकरमन करने लगते हैं, वो आकरमन करने लगते हैं, पुना दिव्यास्तर इस्तेमाल करते हैं वो, और तभी कृष्णे बोलते हैं, युधिष्टिर, तुम ही अपनी राज्य को बचा सकते हो, तुम मैं आटि है पता नहीं, पर तभी कया होता है, अऐसे आवज आती है, कृष्णेको बजा रहे है, तो द्रोण सुनते नहीं है. तो द्रोण आताज हो जाते हैं, और वो मतलब नहीं करूंगा, जो पने रत पे बैज़ जाते हैं. अभी पांडव की क्योजना ये होती है कि द्रोन को युद्ध करने से रोकी पर ये उनका प्लान होता है पर तभी क्या होता है धुष्टद्यूमना वहाँ पे द्रोन से युद्ध करने का प्रयास कर रहा है और धुष्टद्यूमना का जन्म हुआ इसलिए कि वो द्रोन का वद करे पर वो धुष्टद्यूमना कभी द्रोन का वद करने के पास में भी नहीं आया है आरांथ है द्रोन हर बार उनको हरा रहा है और उसी दिन धुष्टद्यूमना के आखो के सामने द्रोन ने धुष्टद्यूमना के इपता दुर्पत का वद किया है तो उसके कारणा में धुष्टद्यूमना पूरा फ्रस्ट्रेट हो गया है और जैसे ही वो देखता है कि द्रोन युद्ध करना छोड़ जा वो तुरण द्रोन के और दौर जा जाते हैं अपने तलबार उठा के और जब देखते हैं दोनों पक्स से युद्ध जो होते हैं धुष्टद्यूमना के सामने के लिए कहते हैं रुको गौरो बोलते हैं अर्जुन भी बोलते हैं पर वो इतना तेज़े से हो जाता है कोई ऐसे एपिक्षा नहीं कर रहा होता है वो द्रोन के माल को पकड़ लेता है खीशता है गसिता उनका सर काट देता है और जब ऐसे होता है तो अर्जुन बहुत क्रुद हो जाते हैं तो वो तुम्हारे गुरू थे तुम कैसे उनका वद कर सकते हो तो अर्जुन धुष्टद्यूमन पे आक्रावन करने आते हैं अर्जुन के सामने के सामने साथ्यकी आता है तभी तभी भीम कहता है वो कैसे ब्राम्मण है ब्राम्मण होते हैं अधर्म के पक्षमें युद्ध कर रहे थे तुम ने देखा वो कैसे अधर्मिक रूप से विव्यास्ते इस्तमाल कर रहे थे उनका वद हुआ जैसे करनी वैसे बननी तो अर्जुन ये सुनके भीम पे गुरुद हो जाते है वो तुम्हारे गुरु थे उन्होंने तुम्हे शिक्षन गिये तो तभी उन्होंने एक तरह से युद्ध होने पे आ जाता है तो तभी कृष्ण बीच में आ जाते हैं और कृष्ण दोनों को रुखते हैं पर यहां पे क्या है कि जो हुआ है ऐसे नहीं कि कृष्ण दे बोला अच्छा सब कर लो और उनने भी धर्म पे डेलिबरीशन होता है क्या सही है क्या गलत है यहां पे content और जो consequence जो फल सही लाने के लिए जो करना पड़ता है वो करना पड़ता है पर इसके लिए नहीं कहते हैं हमारा फल अच्छा है इसलिए जो भी चाहिए हम कर लेगे नहीं उनमें विचार होता है और यह जो है thoughtfulness है क्या यह सही है यह क्या गलत है यह महत्वपूर्ण है यह thoughtfulness रखना। तो क्या था कि जो दुर्योधन को रोखना था वो एक प्लान था पर दुरोधन को इससे से बेरहमी से मारना यह प्लान नहीं था दुर्शुद्रुमने का अकेले का कारिया था और फिर उसी तरह से आगे भी होता है करणा के साथ जो होता है शासन का होता है, दुर्योधन का होता है तो क्रिश्न क्या दिखान चाहते है एक महतूपूर्ण प्रिंसिपल है, उसके आथ मैं अंत करता हूँ जो आज नहीं होता है जो गाधर के साथ होता है कि क्या है, बगवान कहते है कि कभी-कभी हमें शठो शात्यम करना के लिए हमें शात्यम करना करना करना है करना के लिए हमें शात्यम करना करना करना है कि वो थक गए है भी तो उनको कुछ विश्राम चाहिए तो अर्जुन एक दिव्य अस्तर से क्या उसी में, उसी रन्भूमी में ही वो एक लेक बना देते हैं, सर्वर बना देते हैं और वहाँ पे गास होता है, तो वहाँ पे जो घोड़े होते हैं यह नहीं है कि जो कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि तुम करना को करो वो करना ने ही पहले किया है अभिमुन्यू के साथ किया है, कौरो ने अर्जुन के साथ भी किया है तो यहाँ पे कहने का मतलब क्या होता है कि कृष्ण कहते है कि तुम्हे what is required for victory you have to do तो दुरभागेवश कई भारती राजाों ने यह सीखा नहीं तो क्या है कि एक तरह से प्रिंसिपल्स जो मूल तत्व है प्रिंसिपल्स वी लौन फरम राम स्ट्रैटेजी वी लौन फरम कृष्णा कि पर जब हम स्ट्रैटेजी राम से देखने लगते है तो यह कल युग है कई बार जो मुसल्मान राजा आक्रमन करते थे भारत पे तो क्या होता था वो देखने के अरे यो भारतीय लोग जो है यो हिंदु लोग है उनके लिए गाय बड़ी आदर की बात है तो क्या करते है युद्ध करते समय गायो को सामने रखने देते गायो को सामने रखने देते तो क्या होता था कि लोग सोचते हैं कि हम गायो को मार नहीं सकते बतलब जो शिकंडी उनके लिए गाय शिकंडी बन जाती है और फिर क्या होता है गायो को मार नहीं सकते बोलते है और फिर क्या होता है वह आकरमक करते है उनको मार डालते है और उससे होता क्या है कि वहाँ पर कुछ सैकडो गाय होंगे जिनको मार जाते थे पर उसके कारण अजारों करोडों की संक्या में कितने सद्दियों तक गाय मार रहे थे क्या होता था वह गायो को मार गए कभी कभी वह गायो का जो खून था वह नदी में डाल दे दे थे और अभी क्या है एक नदी के एक पक्ष पक्ष में हिंदु राजा है दुसरे जग पक्ष में मुसलिमा आकरमक है तो फिर अभी यह नहीं दिखता है गाय का खून यहाँ पही है हम यह पानी पी नहीं सकते है पर अभी नदी का पानी नहीं पी गए तो क्या पीगे यह अब तो अगर आप प्यासे रहो गए तो युद्ध कैसे कर पाओगे तो यह जो है शटो शाट्यम जब कोई दूरत है तो हमें उनके जैसे दूरत नहीं बनना है पर उनको हराने के लिए जो करना है वो करना ज़रूरी है तो यह सिखाते हैं क्रिश्ण दूर्योधन को अपनी जांग पे मारो तो उसके कमर के नीचे मारो तो यह से क्यों कहते हैं क्यों कि क्या होता है वो अरे यह तो अनेतिक है हाँ वो अनेतिक है सही में पर अब जो भीम दूर्योधन को मारते है तो वो एक दूर्शी से देखें तो क्या है वो अनफेर है ज़रूर अनफेर है वो पर अगर हम और बड़ी दूर्शी से देखते है तो क्या था वो पूरा मैच ही अनफेर था किसके लिए भीम के लिए क्यों कि ऐसे है कि गांधारी ने ऐसे वर्ध उसको वर्ध दे दिया था कि भीम कुछ भी करे वो दुर्योधन को कुछ होने ही वाला नहीं था भीम ने बड़ाये भीश्वर यूद्ध किया उस दिन दो तीन बार उसने दुर्योधन को ऐसा मारा कि इतना प्रहार किया उस पे कि कोई पहाड होता वो तूर जाता और दुर्योधन फिका गया जबर्द से कुछ भी नहीं हुआ और दूसरी ओर दुर्योधन उसको मार रहा है उसको मार रहा है भीम घायल हो रहा है तो भी भीम करेगा क्या यह जो ओ एक अटैक अनफेर था जरूर था पर वो मैच ही अनफेर हो गया है उसके लिए तो अभी उसमें करेगा क्या वैसे क्रिकेट मैच होगा तो अभी मान लिजे ऐसा कोई रूल बन गया या ऐसा कोई अरेंज्मेंड हो गया कि बॉलर बॉलिंग कर रहा है और कुछ भी करे बैटस्मन आउट ही नहीं होगा वो बैटस्मन को क्लीन बॉल भी कर दे तो भी अंपर बॉल नहीं आउट होगा वो बैटस्मन को LBW करे, बैटस्मन को कैच आउट करे, बैटस्मन को रन आउट करे कुछ भी करे वो आउट ही नहीं होगा तो भी बॉलर क्या करेगा फिर बड़ी महनत करके दोड़ के आ रहा है, बॉलिंग कर रहा है और आउट भी हो लेगा तो आउट ही नहीं हो रहा है तो तब ही बॉलर को क्या करना पड़ेगा अगर वो आउट नहीं करते हैं, वो आउट नहीं होगा तो उसको आउट करना पड़ेगा उसके शरीबे बॉल ला लो, उसको इंजूर कर दो, रेटाइड हर्ड कर दो उसको तो क्या है, भीम को ऐसे ही करना पड़ता है तो बलराम भी क्रोज होते उससे में कि इस वो अनफेर था तो किस्टने कहते हैं, पाण्डवों ने किया क्या वो अन्फेर था। तो उसके तीन आंसर्स हैं, हम एक बिग पिच्चर देखेंगे, तो वास्तों में बिग पिच्चर मतलब क्या है, जो भीम ने किया वो गलत था, पर बिग पिच्चर में नौ, क्यों क्या होगा, वो मैच ही अन्फेर हो गया था तो करना क्या क्या किया, क्या वो अन्फेर है, ए.. वो अन्फेर है जो धर्म क्या है, ये संभीजन आसान नहीं है। पाढ़डवों कभी अच्छे लगों को भी बुरा कारे करना पड़ता है। जब बुरा कारे करना पढ़ता है, तो फिर किएर है व्यक्ति को देखना चहाई की अशोcture के रहे है gel moving musicles आपको अपने गुरुदेव से जब मिले वो क्योंकि गुरुदेने कहा कि तुम इंग्लीश में पास्चाल दुश्य में परचार करना चाहते हैं तुमको तो प्रहुपाजी दिखते है अगर मेरा विवाह नहीं हुआ होता था उस समय तो मैं तुरंट फूल टाइम बन जा था अभी और वो कहते है कि मेरा भी विवाह हो चुका था मेरा एक बच्चा था तो इट उड़े बिन अन्फेर टु मै फैमिली प्रहुपाजी ने अपने जीवन भर अपना कर्तवे निभाया पर बाद में उनने फैसला किया कि नहीं बहुत हो गया अभी जब परसंग टी और मी जब बोलते हैं अपने पत्णी को तो तभी वो सन्यास ले देते हैं मानपस्ट लेते हैं बाद सन्यास लेते हैं बाद में तो उनके परिवार काफी उनको आतिक समस्या होती है पर प्रभुपाद जी तमाल कुछ महाज़ाल से बात करते हैं उनको उनको कुछ financial support मिल जाये तो प्रभुपाद अपनी पत्णी से बिलते नहीं कभी पर वो arrangement कर देते हैं तो एक तरह से धर्म को वो भक्ती के लिए त्याग देते हैं पर ऐसे नहीं है कि अगर हम धर्म कर सकते हैं तो नहीं करना चाहिए वो जब संभावना होती है तो तभी वो धर्म जरूर करते हैं अनुशिन करते हैं तो कई बार होती है अगर कोई ब्रमचारी बनता है तो फिर उसको अपने परिवार को त्याग देते हैं माता पिता को पर अगर उनको कोई जरूरत होगी तो अगर कोई emergency हो गया है तो उनको जो हम कर सकते हैं वो करना चाहिए तो करने का हम प्रयास करते हैं तो कभी कभी emergency में धर्म के लिए हम भक्ति त्याग करते हैं सर भक्ति के लिए धर्म त्याग देते हैं पर अगर हो सके तो हमें दोनों करना चाहिए प्रभुपाजी के साथ क्या होता है गुड़ इंटेंशन होता है उनका क्यांसे ठीक है मेरे परिवार का थोड़ देखबाल करने के लिए पर उसके बाद में क्या होता है कि जब प्रभुपाजी भगोदधाम चले जाते हैं तो उनका परिवार है वो इसकॉन पर कोड केस कर देता है वो उनका बेटा वो कहता है कि प्रभुपाजी ने कभी सन्यास लिया ही नहीं था और क्या है वो लोगे सन्यास होगे सर्टिफिकेट नहीं है और क्योंकि प्रभुपाजी सन्यासी नहीं है इसलिए सारी इसकॉन जो प्रापर्टी है वो उनकी परसल प्रापर्टी है और उनकी परसल प्रापर्टी है हम उनके बेटे हैं सब हमारे पास आजाएगा तो अभी ये बहुत कोड केस हो जाता है कि अभी क्या है सन्यास तो एक दिव्य है उस पर कौन सर्टिफिकेट देता है सन्यास लिया आपने और उस समय ऐसे कुछ होता नहीं है तो फिर जो भकत वहाँ पे जो प्रापर्ट जी को सन्यास दिया होता है वो गुरु भी गुजर गए होते हैं बगवधाम चले गए होते हैं आप कहा सकते हैं तो अभी उस समय जो भी और थे जो आई विटनिस होते हैं कोई होता ही नहीं होता है तो एक दो होते हैं वो आते हैं वो टेस्टिमेनी देते हैं फार फिर उनके टेस्टिमेनी को काउंटर करते हैं तो एक बहुत कॉंप्लिकेट कोड केस है आता है तो फिर बाद में क्या है तो जो अभी वो कहते हैं वो क्या कहते हैं वो प्रापर्ट जी पे ही आरोप लगा देते हैं कि तो इनका सन्यास वो नाफाई नहीं था और सका एविडेन्स क्या है कि प्रभुपायन जी ने अगर वो सन्यासी होथे तो हमारे लिए पैसेका र hear me क्यों करते वो कि तो दो सन्यासा क्यों करते हैं? प्रहौपाच जी ने आप उनको पैसे की arrangement करों उसका certificate होता है। तो क्या होता है? उसके कारण क्योंकि यह बहुत complicated court case बन जाता है। तो प्रहौपाच जी का intention अच्छा होता है। प्रकुषा के सांतव के दिवॉर्टी लॉर्ड नcies अपड़ा हुआ, पर वह दुयाता है ,यह कशुैल हुआ हैँ हस्यानां है Students of Shambhu Live अच्छा किया था उनने अच्छा किया था अच्छा किया था उनने अच्छा किया था उनने अच्छा किया था उनने अच्छा किया था उनने अच्छा किया था उनने अच्छा किया था उनने अच्छा किया था उनने अच्छा किया था उनने अच्छा किया था उनने अच्छा किया था उनने अच्छा किया था उनने अ इम scariest गोड़लोगन के लिए कुछ अगर हम पो सही कारीय न करना पड़े तो कर सकते हैं पर वो एक एक्सेप्शेंचय नचिन है वो नार्म नहीं बनना अच्छे लोगों के साथ बुरा होता है और अच्छे लोगों के साथ बुरा करना पड़ता है। युदिश्ठेर महाराज के जिरणी देखते हैं अच्छे लोगों के साथ बुरा करना पड़ता है और अच्छे लोगों के साथ बुरा करना पड़ता है और अच्छे लोगों के साथ बुरा करना पड़ता है। क्रिकेट बैच से वाल महतर नहीं है हम आपके ओपरा अच्छे लोगों के साथ बुरा करना पड़ता है और हम अच्छे लोगों के साथ बुरा करना पड़ता है।Lecture Summary
Full Transcription
नैतिकता, भक्ति और कर्म के सिद्धांतभौतिक जगत और व्यावहारिकcompetence
Rationalization और कर्तव्य का संघर्ष
Categorical और Contextual Ethics
कुरुक्षेत्र का प्रसंग और धर्म की स्थापना
भीष्म का वध और धर्म-संकट
धर्म, भक्ति और जीवन की जटिलता
द्रोणाचार्य का वध और व्यावहारिक निर्णय
दुर्योधन का वध और जीवन के कठिन चुनाव