Hindi Why ingratitude is the worst of sins Ramayana ISKCON GEV
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Lecture Summary
इस प्रवचन में कृतज्ञता (Gratitude) के वास्तविक अर्थ, रामायण के प्रसंग और हमारे जीवन में इसके आध्यात्मिक महत्व पर गहराई से चर्चा की गई है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- कृतघ्नता सबसे बड़ा पाप: रामायण के प्रसंग का संदर्भ देते हुए बताया गया है कि जब प्रभु श्री राम ने सुग्रीव को उनका राज्य वापस दिलाया, तो सुग्रीव अपनी जिम्मेदारी भूलकर भोग-विलास में डूब गए। सीता माता को खोजने का अपना वचन भूलने पर लक्ष्मण क्रोधित होते हैं और कृतघ्नता (Ingratitude) को सबसे बड़ा पाप बताते हैं।
- जीवन के तीन मूलभूत ऋण: मनुष्य पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं है; वह तीन मुख्य स्तरों पर निर्भर है, जिनके प्रति उसका ऋण होता है:
- शरीर और मन (आध्यात्मिक): यह एक अद्भुत मशीन है। इसके प्रति हम अपना ऋण तपस्या (जैसे एकादशी का उपवास करके शरीर को आराम देकर) चुकाते हैं।
- समाज (आधिभौतिक): समाज से हमें बहुत कुछ मिलता है, जिसका ऋण हम दान के माध्यम से चुकाते हैं।
- प्रकृति (आधिदैविक): निसर्ग या पर्यावरण से मिलने वाले जीवनदायी संसाधनों का ऋण यज्ञ द्वारा चुकाया जाता है।
- कृतज्ञता केवल भावना नहीं, एक निर्णय है: कृतज्ञता महज़ एक भावना नहीं है जो कभी आए और कभी चली जाए। यह एक सचेत निर्णय (Conscious Decision) है कि हम जीवन की अच्छाइयों को देखने का चुनाव करें। हमारा मन अक्सर बुरी बातों को याद रखता है और अच्छी बातों को भूल जाता है; कृतज्ञता इस आदत को सुधारने का प्रयास है।
- ‘क्या है’ बनाम ‘क्या नहीं है’: जीवन में हमेशा कुछ चीजें हमारे पास होंगी और कुछ नहीं होंगी। यदि हम उस पर ध्यान देंगे जो हमारे पास नहीं है, तो हम हमेशा दुखी रहेंगे। संतुष्टि और कृतज्ञता तब आती है जब हम इस बात पर ध्यान केंद्रित करते हैं कि हमारे पास क्या-क्या है।
- आधुनिक युग और पूर्वजों का अपमान: आधुनिक (Post-modern) समाज अक्सर अतीत और पूर्वजों को अंधविश्वासी या मूर्ख मानकर उनका तिरस्कार करता है। इस अहंकार और जागरूकता (Awareness) की कमी के कारण कृतज्ञता का भाव समाप्त होता जा रहा है और लोग सुविधाओं को अपना जन्मसिद्ध अधिकार (Granted) मानने लगे हैं।
- साधारण में असाधारण को देखना: जो बातें हमारे लिए बहुत सामान्य हैं—जैसे शांति, सुरक्षा, स्वास्थ्य और भोजन—वे दुनिया के कई हिस्सों (जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों) में लोगों के लिए बहुत बड़ा संघर्ष हैं। श्रील प्रभुपाद जी की कठिन अमेरिका यात्रा का उदाहरण बताता है कि विपरीत परिस्थितियों और अभावों में भी ईश्वर के प्रति कृतज्ञ रहा जा सकता है।
- दृश्य और अदृश्य सत्य: यह जगत और इसके अनुभव सत्य हैं, लेकिन इसके पीछे एक बहुत बड़ा अदृश्य (Invisible) संसार भी काम कर रहा है। ईश्वर किसी न किसी व्यक्ति या माध्यम से हमारी सहायता करते हैं, इसलिए जीवन की हर छोटी-बड़ी कृपा के लिए आभारी होना चाहिए।
Full Transcription
कृतज्ञता का अर्थ और महत्व
एक प्रसंग में कृतज्ञता का बहुत ही स्ट्रांग पद्धति से उल्लेख आता है। उस प्रसंग से हम चर्चा करेंगे। पर उसके पहले, अगर हम gratitude, कृतज्ञता की बात करते हैं, अगर आप बोलें कृतज्ञता, gratitude, so what does this mean to you? कृतज्ञता का विचार करते हैं, तो क्या विचार आता है? कोई कृतज्ञ है, तो व्यक्ति कैसे बर्ताव करता है? कोई कृतज्ञ नहीं है, तो कैसे दिखता है वो? कृतज्ञता का क्या फायदा है? जब कृतज्ञता का विचार आता है, यह शब्द जब जुड़ते हैं, तो क्या विचार आते हैं? कोई कृतज्ञ नहीं है, तो क्या विचार आता है? या?
जब कोई कृतज्ञ नहीं होता है, तो इससे बड़ा नुकसान है। अगर हम आठ घंटा, दस घंटा बहुत मेहनत करके नौकरी करते हैं तो फिर हमको बहुत टायर्ड होता है, तो I earned it. तो उसके लिए इतना gratitude नहीं लगता है उसको। थोड़ा नहीं है, तो I earned it, I deserve it. पर अगर कोई हमारे लिए ऐसे करता है जो वास्तव में उन्हें करने की ज़रूरत नहीं थी, जो हमें पता नहीं है, तो फिर उसके लिए हमारी खुद की भावना भी पूर्ण होती है। इसका कोई पॉइंट नहीं है, क्या बात है? क्योंकि आज इसके लिए भी आपके लिए हो सकते हैं, तो यह एक अपनी इमोशन है। पर वह हो या नहीं हो, करना है, यह भी देने के लिए है, कि आपने मेरे लिए कुछ किया है।
नम्रता आती है कि यह जो हमें किसी ने किया है, उसे हम याद करते हैं। इसके लिए हमें नहीं लगता है कि मैंने जो प्राप्त किया, यह मेरी मेहनत से प्राप्त किया, मेरी बुद्धि से प्राप्त किया है। वो सत्य हो सकता है, पर उसके अलावा जो हमें मिला है, उसके लिए कई और factors भी होते हैं। मसलन भी एक लिए, इसलिए तो जरूरत है। जो मैंने किया है महत्वपूर्ण है, उसके अलावा और भी महत्वपूर्ण है।
Is anyone alive? Hello? इस जगह में आप भी कुछ शेयर करें। यहाँ आप क्या कहना चाहते हो? अच्छा, तो हम gratitude कब फील करते हैं? If someone… we feel it when someone goes out of the way. तो अगर उसका कर्तव्य ही था करना, तो फिर हमें इतना gratitude नहीं लगता है। पर अगर किसी customer service को call करते हैं और जो पूछते हैं कि मेरा device काम नहीं कर रहा है, वो बताते हैं यह करो, वो करो, ऐसे कर सकते हैं। तो वो उनका जॉब है। पर उसका जॉब है, जो duty है, उसके परे कोई जाता है, वो बहुत उससे बढ़कर कुछ करता है, तो हमें gratitude महसूस होता है। Good point, anything else? It’s an emotional connection, gratitude, yes, it’s not just an emotional connection. It’s an emotional connection, उसके द्वारा एक संबंध जुड़ता है। Thank you, good points, not expecting anything.
कृतज्ञता और एहसान में अंतर
कैसे होता है, कभी-कभी होता है कुछ लोग, they do favors but that favor is not a favor because they are going to ask a favor afterwards. तो एक है कि it is not the same as indebtedness. कोई व्यक्ति कोई एहसान करता है और जिंदगी भर याद रखता है, “मैंने तुम्हारे लिए एहसान किया था।”
(एक मोबाइल का कॉल कहीं से आ रहा है, आपको सुनाई दे रहा है? मुझे तो आप सुनाई दे रहे हैं। आपको नहीं आ रहा है? उस पर नहीं आ रहा है? अब भी चालू हुआ।)
तो अभी ग्रैटिट्यूड को हम अनेक दृष्टिकोण से देख सकते हैं। क्योंकि अभी ये दृष्टिकोण से है, तो हम खास करके संबंधों के ऊपर ग्रैटिट्यूड देखेंगे।
रामायण का प्रसंग: सुग्रीव और कृतघ्नता
अभी ये कृतज्ञता है, उसका उल्लेख विशेष एक स्थल पर काफी जोर से आता है। वो है कि जब सुग्रीव, ये रामायण में आता है कि जब सुग्रीव वनवास में होता है, तब प्रभु श्री रामचंद्र उसको राज्य दिलाने में मदद करते हैं और उनकी संधि होती है कि “मैं तुम्हें तुम्हारा राज्य दिला दूँगा, तो तुम्हारे राज्य के जो भी रिसोर्सेज हैं, उसका इस्तेमाल करके तुम मुझे सीता को ढूँढने में मदद करो।” ताकि सुग्रीव को राज्य दिला दिया जाये।
पर उसके बाद में बड़ा भीषण वातावरण हो जाता है, बारिश बहुत आने लगती है। ऐसा कहते हैं कि क्योंकि जो वाली था, इंद्र का पुत्र था ये वाली, तो इंद्र क्रोधित हो जाते हैं, इसलिए इतनी भीषण वर्षा करते हैं कि कोई घर से भी बाहर नहीं निकल सकते हैं। राम तो घर में नहीं होते हैं, कहते हैं कि गुफा में रह गए होंगे। वहाँ से बिल्कुल बाहर नहीं निकल सकते हैं, इसलिए चार महीने उनको रुकना पड़ता है।
अब यह कल्पना कर सकते हैं, यह कितना फ्रस्ट्रेटिंग होगा! इतने समय से… हमारे ख्याल में वो व्यक्ति खो गया है। हम कुछ भी करते होंगे, वो ढूँढने का प्रयास करेंगे। बाहर में इतनी भीषण वर्षा हो रही है, कुछ भी पता नहीं है उनको। इतना यह पता है, क्योंकि जटायु ने बताया है कि रावण ने उनका अपहरण किया है। पर कहां है, क्या है, किस स्थिति में है, पता नहीं है। अभी रावण ने क्यों अपहरण किया है? क्या रावण भक्षण करना चाहता था? क्या उनका भोग करना चाहता था? क्या वो एक हॉस्टेज देके है, जैसे हमास ने इस्राइल के लोगों का अपहरण किया है, कुछ बार्गेन करना चाहता था? कुछ भी पता नहीं था।
कुछ पता तो होता था, तो अनसर्टेन्टी कम होती। हमारे इस्राइल के भक्त हैं, उनके रिश्तेदार उनके हॉस्टेज में खड़े होंगे वहाँ पे। तो अभी जीवित हैं, जीवित नहीं हैं, कुछ पता नहीं होगा। तो बहुत खतरनाक परिस्थिति, जो परिस्थिति मानसिक होती है, बहुत कठिन होती है। तो अभी जब ऐसी परिस्थिति है, तो एक-एक दिन वो गिन रहे हैं और चार महीने खत्म हो जाते हैं।
लक्ष्मण का क्रोध और जिम्मेदारी का भान
तो उसके बाद में सुग्रीव से कुछ संकेत नहीं आता कि कुछ हो रहा है। एक दिन होता है, दो दिन होते हैं, राम-लक्ष्मण बहुत उतावले हो जाते हैं और तभी लक्ष्मण को राम कहते हैं जाते हैं कि क्या हो रहा है। और जब वो जाते हैं और सुग्रीव के राज्य में जाते हैं… “आप भी राज्य में आके रहो” सुग्रीव कहते हैं, पर प्रभु श्री राम कहते हैं, अपने वचन के इतने बद्ध होते हैं और भ्रातृत्व का धर्म होता है कि उन्हें वनवास भेजा है, तो केवल अयोध्या से वनवास नहीं, “मैं किसी और राज्य में जाके नहीं रह सकता हूँ।” तो जटायु महाराज (सुग्रीव) कहते हैं उनको कि “तो अपने राज्य में आके रहो”, पर वह कहते हैं “नहीं”। तो अभी जो बाहर रुकना है, इसलिए वह वहाँ रहते हैं।
और जो जाते हैं वहाँ पे, तो उन्हें क्या सुनाई देता है? उन्हें संगीत का स्वर सुनाई देता है। वैसे ही ऐश्वर्य का स्वर सुनाई देता है। और अभी क्या होता है कि अगर कहीं कोई बहुत दुखी हुआ है और वहां पे कोई आनंद मना रहा है, तो फिर क्या होता है? उससे बहुत क्रोध आता है। अगर मान लीजिए कि भारत क्रिकेट मैच में पाकिस्तान से हार रहा है और बॉम्बे में कुछ लोग इकट्ठा हों और उसका आनंद मना रहे हों, उससे भारत में बहुत क्रोध आएगा।
लक्ष्मण को भी दुख है। राम को और एक दुख है, सीता से विरह है। लक्ष्मण और राम का बहुत प्रेम है, लक्ष्मण का सेवा भाव है। तो अगर हम किसी की सेवा करना चाहते हैं और सेवा में बहुत हम समता से करना चाहते हैं, बहुत सेवा भाव होता है, वो व्यक्ति को दुखी देख नहीं पाते, सहन नहीं कर पाते, “मुझे कुछ करना है” एक दुख कम करने का। और फिर जब जाते हैं, जिसको सहायता करनी थी, जिसकी जिम्मेदारी थी, वो जिम्मेदारी करने के बजाय भोग करने में लगा है। भोग करने में कुछ बुरा नहीं है, पर जिम्मेदारी जब है तब भोग करना, वो बहुत बुरा है।
मान लीजिए कोई डॉक्टर क्रिकेट मैच देख रहा था, ठीक है। पर कोई इमरजेंसी की ड्यूटी में है, कोई ICU में है, और डॉक्टर बोल रहा है… पर जिम्मेदारी छोड़के कोई भोग करता है तो उससे बहुत क्षोभ होता है। और तभी लक्ष्मण कहते हैं कि Ingratitude is the worst of sins. सारे पाप होते हैं, उनमें से कृतघ्नता, ये तो दो अपोजिट हैं। तो कहते हैं कि Ingratitude is the worst of sins.
कृतघ्नता सबसे बड़ा पाप क्यों है?
तो अभी शास्त्रों में कोई विधान आते हैं “Worst of sins”, कोई कहते हैं कि सही नहीं है, तो कहते हैं कि सबसे बुरा पाप है। कोई हत्या कर सकता है, और हम बड़े-बड़े पाप देख सकते हैं। कोई गोहत्या कर सकता है, कोई मानव हत्या कर सकता है, कोई ब्राह्मण हत्या कर सकता है, इतने सारे पाप हैं, तो कृतघ्नता को सबसे बड़ा पाप ही क्यों माना गया है?
शास्त्रों में जब भी कोई स्टेटमेंट होते हैं, एक होता है स्टेटमेंट जो कॉन्टेक्सचुअल होते हैं, संदर्भ में आते हैं, और उनका कोई यूनिवर्सल सूत्र होता है। कॉन्टेक्सचुअल मीनिंग होता है, संदर्भ में अर्थ होता है। तो अवेयरनेस, ज्ञान होना चाहिए। ज्ञान नहीं है, जो मुझे ज्ञान है, वो मुझे याद रखना चाहिए। मुझे बहुत सी चीजें पता होंगी पर वो मेरे दिमाग में नहीं रही हैं।
तीन ऋण: शरीर, समाज और निसर्ग
तो शास्त्र में बताया है क्योंकि वास्तव में हम हर एक जीव जो हैं, हम तीन कोशों में या तीन क्षेत्रों में हम उपस्थित हैं। पहला है हमारा शरीर, दूसरा है हमारा समाज, और तीसरा है निसर्ग।
तो पहले को कहते हैं आध्यात्मिक (आध्यात्मिक तो कभी spiritual कहते हैं, पर आध्यात्मिक का अर्थ क्या है यहाँ, कि हम हमारे शरीर और मन के सर्कल में स्थित हैं)। फिर हम समाज में स्थित हैं, वो है आधिभौतिक। निसर्ग में स्थित हैं, वो है आधिदैविक। तो क्या है यह तीनों जो… कोश शब्द इस्तेमाल कर सकते हैं, तीनों जो क्षेत्र हैं जिनमें हम स्थित हैं, यह तीनों पर हम निर्भर हैं जीवन के लिए।
अगर हमारा शरीर काम नहीं करता है, तो फिर हम काम नहीं कर पाते हैं। हम रोज खाना खाते थे, पर उसका पाचन होता है। हम डिसाइड नहीं करते कि “ये मेरे लिए पाचन करते हैं”, वो अपने आप होता है। क्योंकि हम हमारे पाचन के अंगों के लिए तभी विचार करते हैं जब वो काम नहीं करता। तो क्या है कि ये शरीर एक बहुत ही एक्स्ट्राऑर्डिनरी मशीन है। और इसको हम नहीं चला रहे हैं, हमारे ज्ञान के बिना चल रहा है। पर वो एक चमत्कारिक मशीन है। तो जो शरीर और मन है, इस पे हम निर्भर हैं।
तो अभी इन सब के प्रति जो आध्यात्मिक, इसके प्रति ऋण है। शास्त्र में बताए गए तीन चीज़ें हैं – यज्ञ, दान और तप। ये तीन हमें करना बहुत ज़रूरी है। तो तपस्या क्या है? जो हमारे शरीर का संतुलन बनाए रखते हैं। तो जब हम महीने में 15 दिन में एक बार उपवास करते हैं एकादशी के समय, तो क्या होता है? शरीर से बार-बार हम काम करवा रहे हैं, खाना खिला रहे हैं, उसको पचाने का काम करा रहे हैं। तो जैसे कोई मशीन को थोड़ा डाउन टाइम देना होता है, तो जब हम एकादशी में उपवास करते हैं तो वो शरीर को डाउन टाइम देते हैं। तपस्या जो है, उससे जो शरीर के प्रति जो हमारा ऋण है वो हम पूरा करते हैं। जो शरीर हमको दे रहा है, जो हमें एक शरीर मशीन जो काम कर रहा है, वो मशीन के लिए हम कुछ करते हैं, वो तपस्या से करते हैं।
समाज से हमको बहुत कुछ मिलता है, तो समाज से जो मिलता है उसके लिए हम दान करते हैं। तो जो हम कहते हैं कि “मैं समाज से कुछ लेता हूँ, तो मैं उसके लिए टैक्स देता हूँ, उसके लिए वो करता हूँ”, सही है। पर ऐसे अनेक चीजें हैं जो हमें समाज में रहने से मिलती हैं, उसके लिए हम दान दे के कुछ कर सकते हैं।
और जो निसर्ग है, उसके लिए हम यज्ञ करते हैं। तो यज्ञ, दान, तप जो हैं, ये तीनों कुछ नहीं, महर्षियों ने बताया है कि ये तीनों कृतज्ञता के लक्षण हैं। शास्त्रों में ये चीज बताई गई थी कि हमें ऐसे कुछ तत्व हैं जो हमसे बड़े हैं, उनमें हम स्थित हैं और उनसे हम बहुत कुछ लेते हैं। जैसे हमारे परिवार में रह रहे हैं, तो परिवार से हम कुछ लेते हैं। हम राष्ट्र में रह रहे हैं, राष्ट्र से कुछ लेते हैं। पर्यावरण में रह रहे हैं, पर्यावरण से लेते हैं।
यहाँ पर इकोविलेज हमने बनाया है। यहाँ पर इकोविलेज का क्या भाव है? कि हम निसर्ग का बहुत शोषण कर रहे हैं, तो क्या भाव है कि कुछ… अभी कुछ जो इकोलॉजिस्ट हैं वो कहते हैं कि साधारणतया जब लोग होते हैं, वो अपने पूर्वजों से कुछ संपत्ति प्राप्त करते हैं, और फिर अपने जो वंशज (डिसेंडेंट) के लोग हैं, उनके लिए वो संपत्ति आगे देते हैं, वारिस के लोग। पर क्या है कि हमने जिस तरह से डेवलपमेंट किया है, हम अपने एंसेस्टर्स के लिए borrowed (ऋणी) रहे हैं। तो निसर्ग से हम कुछ ले रहे हैं, तो हमें कुछ देना भी चाहिए, संतुलन रखना चाहिए। तो किसी भी ट्रस्ट के लिए हो सकता है, मैत्री हो सकती है, तो वो अवेयरनेस… अगर अवेयरनेस नहीं होगा तो ग्रैटिट्यूड का सवाल ही नहीं होता है। तो अगर हमारे पूर्वज हैं, तो वो भी पूर्वजों से हमें हमारा शरीर मिला है, हमारा जीवन मिला है।
आधुनिक युग और पूर्वजों के प्रति दृष्टिकोण
तो क्या है कि इसकी जो हमारी मॉडर्न एज, इसे पोस्ट-मॉडर्न एज कहा जा सकता है, इसमें जो ह्यूमैनिटी का जो पास्ट है उसको हमेशा पूरा डिवैल्यू करते हैं। कैसे है कि अगर हम शास्त्र को देखते हैं तो कैसे है कि हमारे पूर्वज जो थे, पहले सतयुग था, तो अभी कौन सा युग आ गया है? अभी कलियुग आ गया है।
पर जो मॉडर्न या खास करके जो पोस्ट-मॉडर्न वर्ल्ड व्यू है, वो क्या सोचता है कि जो पास्ट था वो पूरा डार्क था। पूर्व में क्या था? लोगों में अंधविश्वास था, लोगों में भेदभाव था। कैसे था कि जाति के भेदभाव, पाश्चात्य देशों में रेस के ऊपर रेसिअल डिस्क्रिमिनेशन था। और अभी क्या है? अभी वास्तविक प्रोग्रेस है, अभी विजडम है, अभी वर्चस्व है। तो इसके बारे में क्या होता है, वो पूर्व को एक तरह से घृणा की दृष्टि से देखते हैं कि पूर्व के लोग सब मूर्ख थे, पूर्व के लोग अंधविश्वासी थे, पूर्व के लोग नैरो थे, बायस्ड थे।
अभी ऐसे नहीं कि पूर्व के सारे लोग अच्छे थे या सारे लोग बुरे थे, पूर्व के समय में भी राक्षस हुआ करते थे, और वहाँ काफी बुराइयां भी थीं। पर यह विचार, इसका बहुत अलग है, और यह फंडामेंटल डिफरेंस ऑफ वैल्यूज होते हैं। इसलिए जो आधुनिक विचार धारा है, उसमें gratitude for the past, यह आता ही नहीं है।
और क्या है ये जो अवेयरनेस है कि हम, क्योंकि हमारा अस्तित्व हमसे परे एक चीजों पर निर्भर है, ये अवेयरनेस नहीं होता है तो फिर ग्रैटिट्यूड बिल्कुल नहीं होता है। अमेरिका में भारतीय लोग जो हैं, Indians are the wealthiest minority. Indians माइनॉरिटी हैं, तो Indians मेहनत करते हैं, टैक्स भरते हैं, जॉब करते हैं, तो काफी धनवान माइनॉरिटी हैं। असल में चाइनीज़ से ज्यादा धनवान हैं। पर वहाँ पे क्या देखा जाता है कि अगर अमेरिका में दो-तीन पीढ़ी तक लोग रहते हैं जो भारत से अमेरिका जाते हैं, लोग बड़ी मेहनत करते हैं, उनके बच्चे भी बड़ी मेहनत करते हैं।
भक्ति करना बहुत मुश्किल था, भक्ति की कोई सुविधाएं नहीं थीं। अभी भक्ति के लिए काफी सुविधाएं हैं। तो कह रहा है वो कृतज्ञता है, इन दिन वो देता है कि people start taking things for granted. पर अगर कोई विचार करता है, तो अगर वो विचार करना होता है, तो तभी awareness होता है। तो awareness हम सबको जागृत करना बहुत ज़रूरी है। पर awareness नहीं है, तो gratitude बहुत मुश्किल होता है। तो यह पहली चीज़ है, खास करके हम शास्त्र का अध्ययन करते हैं, कितने सारे लोग हैं, कितने सारे भक्त हैं, कितनी सारी difficulties से वो गए। क्या होता है, कि gratitude के लिए awareness होता है।
हमारे पास क्या है और क्या नहीं (Intention)
उसके बाद में दूसरा क्या बोला? Intention. Intention मतलब ज्ञान हो सकता है, पर जब हम grateful कब होते हैं? कि कोई भी परिस्थिति में हों, दो चीज़ें हमारे जीवन में हमेशा रहने वाली हैं। क्या है? What we have और what we don’t have. कितना भी हमें सब मिल जाये, हमारे पास कुछ चीज़ें जो मेरे पास हैं, और कुछ चीज़ें जो मेरे पास नहीं हैं, यह हमेशा रहने वाला है।
कोई लखपति बन जाएगा, करोड़पति बन जाएगा, अरबपति, कुछ भी बन जाएगा, फिर भी कोई भी व्यक्ति के पास, क्या विश्व का सब कुछ मेरे पास है? हर एक व्यक्ति के पास कुछ तो ऐसी चीज़ें हैं जो उनके पास नहीं होंगी। तो अगर हमारे पास जो है, उसको देखा जाएगा, तो उससे ग्रैटिट्यूड है। पर अगर हमारे पास जो नहीं है, उसको देखना होता है, तो इससे हम दुखी बन जाएंगे। “मेरे पास यह क्यों नहीं है, वो क्यों नहीं है?” और बहुत लोगों को लगता है कि “यह मुझे मिल जाएगा, तो मैं बहुत संतुष्ट हो जाऊंगा, मैं बहुत सुखी हो जाऊंगा, मेरा जीवन बन जाएगा।”
और कुछ चीज़ें ऐसी हो सकती हैं, जो हमें बहुत ज़रूरी हैं। पर क्या है, कि वो चीज मिल भी जाएगी, फिर भी क्या है, जो मन की आदत है, वो मन बाद में देखेगा क्या मेरे पास नहीं है। तो इसलिए यह महत्वपूर्ण है, कि वो हैबिट करने की ज़रूरी है, कि consciously लोग… कोई बहुत अनोखी चीज़ हो जाएगी हमारे जीवन में, उसके लिए कृतज्ञ होंगे, तो वो तो सब समय नहीं होगा। कोई नहीं होगा, तो फिर तुम्हारा बहुत दुर्भाग्य एक बात है। पर क्या है, ग्रैटिट्यूड वास्तविक रूप में व्यक्त हो सकते हैं, तो यह जो है वास्तव में एक्स्ट्राऑर्डिनरी है। कि जो छोटी-छोटी चीज़ें हैं हमारे जीवन में, अगर उनके लिए हम कृतज्ञ हो सकते हैं, तो यह वास्तव में एक्स्ट्राऑर्डिनरी है।
कृतज्ञता: एक निर्णय (Decision)
पर इसलिए मैं देख सकता हूँ कि मेरा स्वास्थ्य अच्छा नहीं है… मेरा स्वास्थ्य अच्छा है, तो अगर यह जो है, तो हम देख सकते हैं कि मेरा स्वास्थ्य इतना बुरा है, पर हम देख सकते हैं कि इसका स्वास्थ्य मेरे से अच्छा है, उसका स्वास्थ्य मेरे से बुरा है। हम क्या देखेंगे, उस पर निर्भर होता है कि हम ग्रैटिट्यूड रख पाएंगे।
छोटी-छोटी चीज़ों के लिए। जब हम प्रसाद लेते हैं तो महाप्रसाद हम बोलते हैं… तो हम क्या देखेंगे, उसके लिए वास्तव में कृतज्ञता का भाव होता है। और यहाँ एक तरह से हमें मेंटल शिफ्ट करना पड़ता है क्योंकि ग्रैटिट्यूड मन में कैसे आ सकता है? यह तो स्वाभाविक है। और जो हम स्वाभाविक सोचते हैं, वो भी बहुत से लोगों के लिए स्वाभाविक नहीं है। जो हमें एकदम ऑर्डिनरी लगता है, वो बहुत से लोगों के लिए नहीं है।
उनके बीच इजराइल की बात आ रही थी। प्रोफ़ेसर बता रहे थे कि जब उनको वो दिन-रात कभी भी ऐसे अलार्म है। अलार्म मतलब क्या? मिसाइल अटैक हो रहा है। तो हम बोल रहे हैं कि अगर वो मिसाइल हमास से आ रहा है, तो कुछ नॉर्मल नहीं है। उनका मिसाइल कुछ नॉर्मल नहीं है। पर अगर वो हिज़बुल्लाह से आ रहा है, वो ईरान से आ रहा है, तो क्या आ रहा है? तो थोड़ा नॉर्मल नहीं है। तो ऐसे कहते हैं कि अगर वो मिसाइल के अटैक तो हैं, पर इन शत्रुओं से तो वो ऑर्डिनरी है। तो वो बेसिक सिक्योरिटी जो है, वो भी नहीं है।
कई जगहों पर कुछ ऐसा है, मैं स्कॉटलैंड में था, कि मैं कुछ यूक्रेन से भक्त आये थे, उनसे मिला था। तो यूक्रेन में युद्ध हो रहा है। यूक्रेन में हमारे बहुत भक्त थे, रशिया और यूक्रेन में बहुत मात्रा में भक्त हैं, अभी भी हैं। पर यूक्रेन से काफी भक्तों को छोड़ के जाना पड़ा है। तो अलग-अलग दिशाओं में गए हैं वो। तो पूरा एक जीवन चालू करना है। तो हमें सब छोड़ना होता है। कृतज्ञता चाहिए… हम समझ पाते हैं तो वो जो है।
प्रभुपाद जी का संघर्ष और छोटी चीज़ों का महत्व
प्रभुपाद जी जब अमेरिका जाने आये थे, वो जलदूत में बैठ गए। तो अभी, अभी तो अमेरिका जाना है, तो इतने 24 आवर्स के अंदर भी एक महाराज बोलते हैं, देलही से न्यूयॉर्क… अगर नहीं तो 36 आवर्स से ज़्यादा लगता नहीं है। तभी प्रभुपाद जी को 30 दिन से ज़्यादा लगा। और फिर शिप में, शिप में कोई लोग ज्यादा वेजिटेरियन होते नहीं हैं। क्योंकि तो अभी कोई मेरा भक्त है, मित्र है मेरा भक्त, वो शिप में, क्रूज़ में काम करते हैं। तो वेजिटेरियन फूड वहाँ पर प्राप्त करना इतना आसान नहीं है। थोड़ा-थोड़ा वीगन ट्रेंडी हो गया है। पर फिर भी… तो प्रभुपाद जी कुछ पैक करके ले गये थे। प्रभुपाद जी के पास कुछ पैसा भी नहीं था जब अमेरिका गये थे। 40 रुपये थे। अन्न तो एक बहुत छोटी सी चीज़ है।
जो भी व्यक्ति हमारे लिए कुछ कर रहा है, वास्तव में कृष्णा उस व्यक्ति के माध्यम से हमारे लिए कर रहे हैं। तो जो हमारा ग्रैटिट्यूड होता है, उस व्यक्ति के प्रति होता है, पर वो कृष्ण भगवान का ही व्यक्ति होता है। जब कोई नवजात शिशु होता है, उसको माँ अपने स्तनों से दूध पिलाती है। तो अभी ये वो माँ का बड़ा ही स्नेह का इंटीमेट एक्सप्रेशन है, पर वो केवल माँ के प्रेम का लक्षण नहीं है। क्योंकि वो माँ ने तो कुछ खुद, कुछ टेक्नोलॉजिकल ब्रेकथ्रू करके अपने स्तनों में दूध नहीं लाया है।
बुरी यादों को छोड़कर अच्छाई पर ध्यान देना
कभी-कभी क्या होता है कि एक व्यक्ति से कुछ अपेक्षा करते हैं, और व्यक्ति जो हम चाहते हैं, वो हम जो अपेक्षा करते हैं, वो ही करते हैं। पर ऐसे होगा, पर क्या है, वो एक व्यक्ति से कुछ नहीं मिलेगा, आपको किसी अन्य व्यक्ति से मिलेगा। ऐसे नहीं है कि सब लोग, कोई भी विश्वास का पात्र नहीं, कोई भी हमारी मदद नहीं करेगा। अगर वैसा किसी की जीवनी में होता, तो व्यक्ति अपने लिए जीवित भी नहीं होता।
ऐसे ज़रूर हो सकता है कि हमारा जो मन है न, वो उसका एक लक्षण होता है, इस व्हीकल के करैक्टरिस्टिक्स हैं, कि It often remembers bad things, और it forgets good things. जो हमें किसी ने बुरा कहा, वो याद रहता है। “अरे मैंने इस एग्जाम के लिए इतनी मेहनत की, वो इतने कम मार्क्स नहीं आने चाहिए थे।” कई बार हम थोड़ी पढ़ाई किए होते हैं, जो पढ़ते हैं, वो एग्जाम में आते हैं, अच्छे मार्क्स आ जाते हैं। पर वो हम भूल जाते हैं। कुछ लोग हमारे जीवन में हैं, जो हम अपेक्षा करते हैं, उससे बहुत ज्यादा किया है। तो हम सबके जीवन में ऐसे भी लोग होते हैं।
तो जो ग्रैटिट्यूड है, यह एक इंटेंशन क्यों बोलना है? तो ग्रैटिट्यूड नहीं है अपने अच्छे के लिए, जो हम अपेक्षा करते हैं। ग्रैटिट्यूड हमारा एक डिसीजन है। यह केवल एक भावना नहीं है। “अच्छा मुझे आज कुछ कृतज्ञता लग रही है। मुझे कुछ कृतज्ञता नहीं लग रही है।” हाँ वो भावना हो सकती है, पर अगर आप ग्रैटिट्यूड को केवल एक भावना के स्तर पर रखेंगे, तो उस पर हमारा कुछ नियंत्रण ज्यादा नहीं होता है। कभी भावना आती है, कभी भावना नहीं आती है। पर ग्रैटिट्यूड क्या है, यह एक डिसीजन है। कि यह मेरा निष्कर्ष है, कि मैं मेरे जीवन में जो अच्छा है, वो देखूंगा।
तो आप सभी को पता हो, मुझे कष्ट लगता है चलने के लिए। मैं जब एक साल का था, तो मुझे पोलियो हो गया था। तो मैं छोटे से महाराष्ट्र में, चंद्रपुर नाम के छोटे शहर में था, तो वहाँ पे मेरी मां मुझे पोलियो का वैक्सीन देने के लिए लेकर गयी। तो मुझे कष्ट लगता है चलने में… मृत्यु भी एक प्रकृति है। उसके बाद जिसे माफ़ करता हूँ, या तो कई लोगों की ऐसी नियति हो जाती है कि वो जीवन के लिए… उदाहरण के लिए कहा जा सकता है कि किसी का दस साल पहले कोई एक्सीडेंट हो गया है, उसमें किसी की आँख चली गयी है या पैर चला गया है। यह ट्रैजिक है। पर वो दस साल हो गया है उसको। और अभी भी वो मन में युद्ध कर रहे हैं कि यह क्यों हुआ…
माया और अदृश्य वास्तविकता
हमारे साथ खाना हो सकता है, वो भक्षण नहीं करेंगे, मन की तपस्या है। क्या है संतुष्टि? संतुष्टि कैसे आयेगी जब हम देखेंगे कि क्या मेरे पास है। तो इसलिए ग्रैटिट्यूड जो है, इसलिए हम कंप्लेन नहीं करेंगे। पर दूसरा भी है कि they are totally unreliable, यह भी गलत है।
तो वास्तविकता क्या है? क्या है कि जगत माया नहीं है। जगत माया नहीं है, जगत में जो सुख का हमें प्रॉमिस होता है, वो माया है। पर वहाँ पे केवल संवेदना है। जगत सॉलिड है, पर समझ व्यक्त करेंगे, मैं एक कण पर भी निर्भर नहीं हूँ। तो माया क्या है? कि जगत सत्य है, जगत में सुख है, ये दूसरा है। पर उस बूँद के समान सुख का संवाद होता है, और ऐसे प्रतीत होता है कि एक सागर के समान है। तो वो माया है।
तो visible is real, but invisible is also real. And actually, there is a much bigger invisible world. तो विज्ञान के अनुसार ये भी क्या है कि वो dark matter कहते हैं। Dark matter जो है, वो हमको दिखता नहीं है, पर वह हमारा universe उससे जाता है। तो even science is telling us that there is an invisible world that is bigger than the visible world. तो ऐसे नहीं है कि हमें जो visible है उसको reject करना है, we should not reduce the reality to the visible. वो उसका implication है। जो visible world में हमको दिख रहा है, उसके अनुसार हम, जो हमारे साथ अच्छा हो रहा है, वो देख के उसके लिए हम कृतज्ञ हो सकते हैं। Thank you very much.
श्री रामचंद्र भगवान की जय! श्री रामचंद्र भगवान की जय! निताई गौर प्रेमानंदे हरि हरि बोल!