Hindi Why ingratitude is the worst of sins Ramayana ISKCON GEV
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संक्षिप्त सारांश
एक प्रसंद में कृतग्यता का बहुत ही स्ट्रॉंग पदली से उज़रेक आता है। उस प्रसंद से हम चार्चा करेंगे। पर उसके पहिले, अगर हम gratitude कृतग्यता के बात करते हैं, अगर आप कोले कृतग्यता, gratitude, so what does this mean to you? कृतग्यता का विचार करते हैं, तो क्या विचार आता है? कोई कृतग्य है, तो विद्धी कैसे बरताव करता है? कोई कृतग्य नहीं है, तो कैसे दिखता है वो?
मुख्य ट्रांसक्रिप्शन
एक प्रसंद में कृतग्यता का बहुत ही स्ट्रॉंग पदली से उज़रेक आता है। उस प्रसंद से हम चार्चा करेंगे। पर उसके पहिले, अगर हम gratitude कृतग्यता के बात करते हैं, अगर आप कोले कृतग्यता, gratitude, so what does this mean to you?
कृतग्यता का विचार करते हैं, तो क्या विचार आता है? कोई कृतग्य है, तो विद्धी कैसे बरताव करता है? कोई कृतग्य नहीं है, तो कैसे दिखता है वो?
कृतग्यता का क्या फायण है? जिस कृतग्यता के विचार आता है, यह शब्दा जो जुत्ते हैं, तो क्या विचार आता है जो आते हैं? कोई कृतग्य नहीं है, तो क्या विचार आता है?
या? जब कोई कृतग्य नहीं करते हैं, तो जब कृतग्य नहीं करते हैं, तो जब कृतग्य नहीं करते हैं, हमने अगर कृतग्य नहीं करते हैं, तो इससे पर नदुबान है, मैं मुझे एक बात है, वो मुझे नहीं नदुबान है, अगर हम आड़ घंडा, दस घंडा बहुत मेहनत करके नौकरी करते हैं तो फिर हमको बहुत स्टालियर होता है तो I earned it. तो उसके लिए इतना gratitude नहीं लगता है उसको थोड़ा नहीं है, तो I earned it, I deserve it. पर अगर कोई हमें जैसे करता है जो वास्तव में उन्हें करने की जुरूरत नहीं थी जो हमें पातल नहीं है तो फिर उसके लिए हम घुदके दावा भी अपनी पूर्ट होती है इसको पोईंट नहीं है क्या बार है?
क्योंंकि आज इसके लिए भी आपके लिए हो सकते हैं तो यह एक अपनी अमोशिन है। पर वह हो या नहीं हो कारणे है, यह भी गेंगे पर देंगे के लिए है। कि आपने में कुछ किया हैं।वादू।
नामरता आती है कि यह जो हमें की किया है उनके याद करती है। इसके लिए हम नहीं लगता है कि मैंने जो प्रात किया यह मेरी मेहनच से प्रात किया, मेरी बुद्धी से प्रात किया हैं। वो सथ्य हो सकता है, पर उसके अलावा जो के में मिला हैं उसके लिए कई और factors भी होते हैं।
अमस्चल भी एक लिए क्सलिए तो जरूरत हैं। जो मैंने किया है माथपूर्ण हैं उसके अलाबा और इरे महतपूर्ण हैं। ख़फ़िए।
इरवनी अलो? इस जादागा में आपके फिर ज़ारी करें। यहाँ आप क्या कहने चाहते हूँ?
अच्छा, तो हम gratitude कब जाते होता है कि if someone, we feel it when someone goes out of the way तो अगर उसका उठरतवे ही था करना तो फिर हमें इतना gratitude नहीं लगता है पर अगर किसी customer service को call करते और जो पुछते ही मेरा device काम नहीं कर रहा है वो बताते यह करो, वो करो ऐसे कर सकते है तो क्या तो उनका जाब है पर उसका जाब है, जो beauty है उसके परे कोई आता है, वो बहुत उसे आदर कुछ करता है तो हमें gratitude में हिस्स होता है good point, anything else?
it’s an emotional connection, gratitude yes, it’s not just an emotional connection it’s an emotional connection उसके द्वारा गलती से हम एक संवन्द चूड़ता है thank you good points, not expecting anything कैसे होता है, कभी कभी होता है कुछ लोग, they do favors but that favor is not a favor because they are going to ask a favor afterwards तो एक है कि it is not it is not the same as indebtedness कोई व्यक्ति कोई एहसान करता है और जिन्दगी पर याद लगता है मैं तुम्हारे लिए एहसान किया था एको भुराईल का बोल कहीं से नहीं, आपको सुने दे रहे हैं मुझे तो आप सुने दे रहे हैं अपको नहीं आ रहा है उस पर नहीं आ रहा है अब भी चाहिए हुआ तो अभी ग्राटिट्यूट को हम अनेक दुश्टि कौन से देख सकते हैं क्योंंकि अभी ये दुश्ट्यूट से है तो हम खास करके संबंदों की उपने ग्राटिट्यूट देखेंगे अभी ये खुतक्यता है उसका उन्देख विशेश एक स्थब पर काफी जोर से आता है वो है कि जब सुगरीव ये रामायन में आता है कि जब सुगरीव भी बनवास में होता है तब प्रभुशी राम चंगन उसको राज्जिन लाने मन करते है और उनकी संधी होती है कि मैं तो भी तुम्हारा राज्जी दिला दूँगा तो तुम्हारे राज्जे के विश्व मस्च्रस है उसका इस्तमाल करके तुम मुझे सिदा को धुन्यमाद करो तो तकी सुगरीव को राज्जी दिला जाये तो राम चंगन पर उसके बाद में बड़ा भीशन वातावर का परिवार हो जाता है बारिश बहुत आने लगती है अच्छा कतते हैं कि क्योंंकि जो वाली था इंद्रिवा पुत्र था ये वाली तो में क्रोगित हो जाते है इसलिए इतनी भीशन वर्षा करते हैं कि कोई घर से भी बाहर नहीं निकल सकते हैं राम तो घर नहीं होता है आप कहते हो कि कुफा में रह गए होगे वहाँ से बिल्कुल बाहर नहीं निकल सकते हैं इसलिए चार मेहनें आपको रुपना पढ़ता है अब यह कतना वसरते हैं यह कितना क्रस्ट्रीटिंग होगा है इतना से मैं बाहर लिए हमारे खेल में वह बेकती खुंग गया है हम कुछ भी करते होंगे वह दूने का प्रयास करेंगे बाहर में कितना भीशन वर्षा करते हैं कुछ भी पता नहीं है उनको उतका यह पता है क्योंंकि जड़ाई ने पता है कि रावण ने उनका अपरंड किया है पर कहां है क्या, किस गलती में पता नहीं है अभी रावण ने क्योंं अपरंड किया है क्या रावण ने पक्षन करना चाहता था क्या उनका भोग करना चाहता था क्या वो एक होस्टेज देके है जिसे हमास दे इस्राईल के लोगों पक्षन किया है कुछ बार्गेन करना चाहता था कुछ भी पता नहीं था कुछ पता तो होता था तो अपर अंसर्टिन्टी का होता है आमारी इस्राईल भक्ते हैं उनकी रिष्टेदार उनकी होस्टेज में कड़े होगे वहाँ थे तो अभी जीवित है जीवित नहीं है कुछ पता नहीं होगा तो बहुत कतरना परस्थिति जो परस्थिति मालकी होती है बहुत कठी होती है तभी तो अभी जब ऐसी परस्थिति है तो एक एक दिन वो गिन रहे है और चार मेनें ख़टब हो जाते हैं तो उसके बाद में सुघरियों से कुछ संकेत नहीं आता यह कुछ हो रहा है एक दिन होता है, दो दिन होते है राम नक्ष्मन पर उताले में जाते हैं और तभी नक्ष्मन को राम करते नहीं जाते है क्या हो रहा है और जब वो जाते है और सुघरियों की राज्जे में जाते है सुघरियों की राज्जे में जाते है आप भी राज्जे में आके रहो प्रकुषिराम कहते है, अपने वचन के इतने बद्ध होते है और ब्रातुतनागा फर्म होता है कि उन्हें बनवास भजाये तो केवल अयूद्या से बनवास नहीं की मैं किसी और राज्जे में जाती नहीं हो सकता हूँ तो जड़ात महाराज कहते है उन्हें को कि तो अपने राज्जे में आके रहो पर वह कहते है नहीं तो अभी जो बैसे पुरता है इसलिए वह पहां रहते हैं और जो जाते हैं अहां पे तो उन्हें क्या सुनने दिता है सुनने ये संगीद का हुआ सुनने दिता है बैसे लिए आईश्वारां का हुआ सुनने दिता है और अभी क्या होता है कि अगर कहीं कोई बहुत दुख हुआ है और वहां पे कोई आनन मना रहा है तो फिर क्या होता है उससे बहुत क्रोल होता है अगर मान लेंजे कि भारत क्रिकेट मैच में बाकिस्तान से खा रहे है और बॉंबे में कोई लोग फिर हो और उसको आनन बचा रहे है उससे भारत में बहुत क्रोल हो रहे है तो बारत में कोई लोयली भारत को ये बाकिस्तान को लक्षमण को भी दुख है राम को और एक दुख है जिता से विरा है लक्षमण और राम का बहुत प्रेम है लक्षमण का सेवा भाव है तो अगर हम किसी के सेवा करना चाहते हैं और सेवा में बहुत हम समता से करना चाहते हैं बहुत सेवा भाव होता है वो विक्ति को दुख ही हैं देख नहीं पाते सेहन नहीं कर पाते मुझे कुछ करना है एक दुख करात करने का और फिर जब जाते हैं जिसको इस हर्यागा करनी थी जिसकी जिम्मेदारी थी वो जिम्मेदारी करने के जब होई भोग कर भोग करने में कुछ बुरा नहीं है पर जिम्मेदारी जब है तब भोग करना वो बहुत बुरा है माल लेजे कोई डॉक्टर क्रिकेट माई देखना था ठीक है पर कोई इमर्जन्सी की डूटी में है कोई निट्यू में है और डॉक्टर बोलना है पर जिम्मेदारी शोड़ते कोई भोग करता है तो उससे बहुत स्वाभग होना है और तभी तुम्छी नाम चेटनी तभी रख्ष्म कहते है कि इंग्राटिक्यूर इस दो वर्स्ट उफ सिन्स सारे पाप हुते हैं उन में से कुछ दग्ग्यां ये तो दो अपूसिट हैं तो कहते हैं कि इंग्राटिक्यूर इस दो वर्स्ट उफ सिन्स तो अभी शास्त्रों ये कोई विधान आते है वर्स्ट उफ सिन्स कोई कहते है कि सही नहीं है तो तो कहते है कि सबसे पुरा पाप है किसी को हत्या कर सकता है और हम बड़े बड़े पाप देख सकते हैं कोई को हत्या कर सकता है कोई मानवा हत्या कर सकता है कोई ब्रामणा हत्या कर सकता है इतने सारे पाप है तो गुद्दगेता को सबसे बड़ा पाप ही हत्या माना गया है शास्त्र जबी कोई स्टेट्मिल होते है एक होता है स्टेट्मिल जो का वो कॉंटेक्स्ट्शूल होते हैं संदर्म में होता जाते है और उनका कोई उनिवर्सल सित्र होता है कॉंटेक्स्ट्शूल मीनी होता है संदर्म में अर्थ होता है और कॉंटेक्स्ट्शूल मीनी होता है तो अवेरनिस ज्ञान होना चाहिए अवेरनिस ज्ञान ज्ञान नहीं है जो मुझे ज्ञान है वो मुझे ज्ञान रखना चाहिए मुझे बहुत से पता होगी पर वो मेरे दिमाख में नहीं रही है तो शास्त्र में बता है क्योंंकि वास्तव में हम अरे एक जीव जो है हम तीन कोशों में या तीन शेत्रों में हम परस्तित हैं पहला है हमारा शरीर दूसरा है हमारा समाच और तीसरा है निसर्ग तो पहले को कहते हैं आध्यात्मिक आध्यात्मिक तो कभी स्पिरिचूल कहते हैं पर आध्यात्मिक करता क्या है यहां बहुत कि हम हमारे शरीर और मन के सर्कल में स्थित हैं फिर हम समाच में स्थित हैं वो है आधी भौटिक निसर्ग में स्थित हैं वो है आधी दैविक तो क्या है यह तीनों जो उसको कोशी शब्द इस्तिमाल कर सकते हैं तीनों जो शेत्र हैं जिनमें हम स्थित हैं यह तीनों पर हम दिरभर हैं जीवन के लिए अगर हमारा शरीर काम नहीं करता है तो फिर हम काम नहीं करूबाते हैं हम रोज कहान हाते थे पर उससों पचन होता है हम द् Wayน मूझे लिए नहीं पचन करते है हाम वो अपनै आप होता है क्योंंकि नहीं कावी शक्र नहीं आओकि हम हमारे पचन के अंजला के लिए तभी विचार करते हैं जब वो काम नहीं करता तो क्या है कि ये कैसे है ये शरीर एक बहुती एक्स्ट्रोड़न्ट्री मशीन है ये और इसको हम नहीं चला रहे हैं हमारे ज्ञान के बिनाँ चल रहा है पर वो एक चमतकारिक मशीन है तो जो शरीर और मन है इस पे हम निर्भार हैं तो अभी इन सब के परती जो आति आत्मिक इसके परती दुरुण है शास्त्र बताए गए तीन चीज़े है यक्य, दान और तपव ये तीन हमें करना महवच ज़रूरी थी तो तपस्य क्या है जो हमारे शरीर का समतोर बनाय रहते हैं तो जब हम आंगे 15 दिल में एक बार उपवास करते हैं एकादशी की समय तो क्या होता है शरीर को बार बार हमसे काम करवा रहे हैं खाना किला रहे हैं उसको पिछानी का काम करा रहे हैं तो कैसे कोई मशीन उदर्श को लगा डाउं टाइम देना होता है तो जब हम एक आदशी में उपवास करते हैं तो वो शरीर को डाउं टाइम देते हैं अपस्या जो है उससे जो शरीर के बती जो हमारा रुन है वहाँ हम पूरा करते हैं जो शरीर हमको दे रहा है वो हमें एक शरीर मशीन जो काम कर रहा है वो मशीन के लिए हम कुछ करते हैं वो तब से करते हैं समाज से हमको बहुत कुछ मिलता है तो समाज से जो मिलता है उसके लिए हम डाउं करते हैं तो जो हम कहते हैं कि मैं समाज से कुछ लेता हूँ तो मैं उसके लिए टैक्स देता हूँ उसके लिए करता हूँ वो करता हूँ सही है पर ऐसे अनेग चीजे हैं जो हमें समाज में रहने से मिलती है उसके लिए हम डाउं दे के कुछ करते हूँ सकते हैं और जो निसर्ग है उसके लिए हम यग्या करते हैं तो यग्या, दाउं, तपः जो हैं ये तीनों कुछ नहीं महतों कोड़ों के बताया है कि ये तीनों खुदग्यता के लक्षे हैं कि भी शास्तों में थी चीज बतायी गई थी कि ऐसे है कि हमें एसे कुछ तत्व हैं जो हमसे बड़े हैं उनमें हम चीज स्थित है और उनसे हम बहुत कुछ देते हैं गईसे हमारे परिवार में ले रहे हैं तो परिवार से हम कुछ लेते हैं हम कुछ राष्ट में ले रहे हैं राष्ट में कुछ लेते हैं पर्यावरन में ले रहे हैं पर्यावरन से लेते हैं यहाँ पर इकोविलिज हमने बनाया है यहाँ पर इकोविलिज का क्या भाव है कि हम निसर्ग का बहुत शोचन कर रहे हैं तो क्या भाव है कि कुछ अभी कुछ जो इकोविलिजिस्से वो कहते हैं कि साधार अंतया जब लोग होते हैं वो अपने पूरुजों से कुछ संपत्ति प्रात करते हैं और फिर अपने जो डिसेंडन्ट के लोगे उनके लिए वो संपत्ति आगरेते हैं निवारिस के लोगे बढ़ क्या है कि हमने जिस तरह से डेवलप्मिट किया है क्या है हम नहीं हमें अंसेस्टर्स के लिए बारोड रहे हैं तो दिसर्ग से हम कुछ ले रहे हैं तो हमें कुछ देना नहीं चाहिए समतोड रखना चाहिए तो किसी भी प्रात स्ट्रस के लिए हो सकता है मैंत्री हो सकती किसी तो वो अवेरनिस अगर अवेरनिस नहीं होगा तो ग्राटिटूड का सवाल ही नहीं होता है तो अगर हमारे पूर्वच हैं तो वो भी पूर्वचों से हमें हमारा शगीर मिला हैं हमारे हमारा जीवन मिला हैं तो क्या है कि इसकी जो हमारे मॉडल एज़ हमें मॉडल इसको पोस्ट मॉडल एज़ कहा सकता है जो है भी इसमें जो युमैनिटी का जो पास्ट है उसको हमेशां पुरा डिवैल्यू करते हैं कैसे है कि अगर हम शास्त्र को देखते हैं तो कैसे है कि हमारे पूर्वच जो थे पहले सत्युग था तो अभी कौन सा युग आ गया है अभी कल्युग आ गया है तो ये विचार क्या है कि पास्ट वो जो पुरा दिवाल्यू का जो पुरा दिव पर जो कहस करते है मओडर्न या खास करते है उसको पोस्ट मौडर्न वर्ड भ्यूव है वो क्या सोचता है कि जो पास था वो पूरा टार्क था पूरों में क्या था लोगों में अन्धविश्वास था लोगों में भेदभाव था कैसे था कि जाती के भेदभाव वास्चार देशों में रेस के उपर एक्शल डिस्करिनेशन था और अभी क्या है अभी वास्थमिक प्रॉकरेस है अभी विस्दम है अभी वर्जूद है तो इसके बारे में क्या होता है, वो पूर्व को एक तरह से गुणां की दुश्च देते हैं कि पूर्व के लोग सब मूर्खते हैं, पूर्व के लोग अन्धशल था, पूर्व के लोग नैरो थें, बायस थें, नैरो मैं देखने सकते हैं अभी ऐसे नहीं कि पूर्व के सारे लोग अच्छे थें या सारे लोग पूरे थें, पूर्व के साथ में भी राक्षस दो गुआ करते थें, और वहाँ काफी गुणांस पर थें पर यह विचार है, लिएका बहुत अलग है, और यह फंडिमेंटरी दिफरंस वालिज होते हैं, इसलिए जो आदमिक विचार धारा है, उसमें ग्राटिट्यूड फ़ौल दे पास्ट, यह आता ही नहीं है, यह पूर्व के सारे लोग के लोग पूर्व के सारे लोग के लि और क्या है ये जो अवेरनेस है कि हम क्योंंकि हमारा अस्टित्वा हमसे परें ये एक चीज़े हमें दिर्भरें ये अवेरनेस नहीं होता है तो सिर्फ राटिटूट विल्कुल नहीं होता है अमेरिका में भारती लोग जो है इंडियन्स आर दे वेल्थीस्ट माइनौरिटी इंडियन्स माइनौरिटी है तो इंडियन्स मेहनत करते है, टाक्सट मरते है, चौब करते है तो काफी धन्वान माइनौरिटी है असल चाइनीस से ब्याला धन्वान है पर वहाँ पे क्या देखा जाता है कि अगर अमेरिका में दो तीन पीड़ी तक लोग रहते हैं जो भारत से अमेरिका जाते हैं लोग बड़ी मेहनत करते हैं, उनके बच्चे को बड़ी मेहनत करत करते हैं, उनके बच्चे को बड़ी मेहनत करते हैं, उन को बड़े हैं, उनके बच्चे को बड़े मेहनत करते हैं बखती करना बहुत मुझ्किल था, बखती के कोई सुमिदाई नहीं थी अभी बखती के लिए काफी सुमिदाई है तो कह रहा है वो कुछ तक देता है, इन दिन वो देता है कि people start taking things for granted पर अगर कोई पुछार करता है तो अगर वो पुछार करना होता है, तो तभी awareness होता है तो awareness हम सब कोई जागरत करना बहुत ज़रूरी है पर awareness नहीं है, तो gratitude बहुत मुझ्किल होता है तो यह पहली चीज़ है, खास करके हम शास्तल का आध्यान करते हैं शास्तल का आध्यान करते हैं, कितने सारे लोगों हैं, कितने सारे भक्तों हैं, कितने सारे difficulties से वो गए गए क्या होता है, कि gratitude के लिए awareness होता है उसके बाद में दूसरा क्या बुलाओं, intention intention मतलब ज्यान हो सकता है पर जब हम grateful कब होते हैं कि कोई भी परिस्थिती में हो, दो चीज़े हमारी जीवन में हमेशा रहने वाले क्या है, what we have और what we don’t have कितना भी हमेशा नहीं मिल जाये, हमारे पास कुछ चीज़े जो मेरे पास है, और कुछ चीज़े जो मेरे पास नहीं है, यह हमेशा रहने वाले कोई लकपती बन जाएगा, करणपती बन जाएगा, रपती करणपती, कुछ भी बन जाएगा, फिर भी कोई भी व्यक्ति के संथा, विश्व का सब कुछ मेरे पास है, हर एक व्यक्ति के पास कुछ तो ऐसे चीज़े हैं जो उनके पास नहीं होगा है, तो अगर हमारे पास के लिए जाएगा, तो उससे ग्राटिट्यूद है, पर अगर हमारे पास जो नहीं है, उसको देखना होता है, तो इससे हम नहीं बन जाएगा, हम नहीं बन जाएगा, मेरे पास यह क्योंं नहीं है, वो क्योंं नहीं है, और बहुत लोगों को लगता है कि यह मुझे मिल जाएगा, तो मैं बहुत संतुष्ट हो जाएगा, मैं बहुत रुद्धब्दी हो जाएगा, मैं, मेरा जीवन बन जाएगा, और कुछ यह एसी हो सकती हैं, जो हमें बहुत ज़रूरी है, पर क्या है, कि वो चीज मिल भी जाएगी, फिर भी क्या है, जो मन की आदत है, वो मन बाद में देखेगा क्या मेरे पास नहीं है, तो इसलिए यह महतुपण है, कि वो हाबिट करने का ज़रूरी है, कि कनश्यस्ली लोगे ज़रूरी नहीं है, कोई बहुती अनोकी चीज़ हो जाएगे हमारे जीवन में, उसके लिए कुछ तो क्या होगा, तो वो तो सब कोई नहीं होगा, कोई नहीं होगा, तो फिर तुम्हार बहुती दुर्बाग एक बात है, पर क्या है, ग्राटिटीट्यूड वार तकित्र हो सकते हैं, तो यह जो हैं वास्तद में एक्स्ट्रोडिनरी हैं, कि जो छोटी छोटी चीज़े हैं हमारे जीवन में, अगर उनके लिए हम तकित्र हो सकते हैं, तो यह जो हैं वास्तद में एक्स्ट्रोडिनरी हैं, हर पर इसलिए मैं देख सकते है कि मेरा स्वास्ते अच्छा नहीं, मेरा स्वास्ते अच्छा है, तो अगर यह जो हैं, तो हम देख सकते हैं कि मेरा स्वास्ते इतना पुरा है, पर हम देख सकते हैं कि अगर इसका स्वास्ते मेरे से अच्छा है, उसका स्वास्ते मेरे से पुर है, एक स्वास्ते मेरे से अच्छा नहीं है, तो हम क्या देखेंगे, उसके निर्वन होता है कि हम ग्रैकिटूट रख पाएंगे, ग्रैकिटूट पर अच्छा नहीं है, चोटे चोटे शीज़ों के लिए, जब हम पिसाद देते हैं तो महापिसादे हम बोलते हैं, कभी क अच्छा नहीं होता है, तो अच्छा नहीं होता है, तो हम क्या देखेंगे, उसके लिए वास्ते मेरे कुछ दक्जिता का भाव होता है, तो ग्रैकिटूट पर अच्छा नहीं होता है, तो अच्छा नहीं होता है, और यहाँ एक तरह से हमें मेंतल शिफ्ट का नज़ा क्योंंकि मैं ग्रैकिटूट पर अच्छा नहीं कैसे आ सकता है, यह तो स्वाभाविक है और जो हम स्वाभाविक सोचते हैं, वो भी बहुत से लोग के लिए स्वाभाविक नहीं है जो हमें एकटम ओर्डरी लगता है, उर्डरी लगता है, वो बहुत से लोग के लिए नहीं है उनके चीज़ी इसमें वेज़राल की बात का राधा है, मैं प्रोस्वित्र बता रहे थे कि जबी उनको वो दिन राथ कभी भी ऐसे एलाम है, एलाम मतलब क्या?
मिसाईल अटाक हो रहा है, तो हम बोल रहे हैं कि अगर वो मिसाईल हमाज से आ रहा है, तो कुछ परूमल नहीं है, उनका मिसाईल कुछ परूमल नहीं है पर अगर वो हिसमुला से आ रहा है, वो हिरान से आ रहा है, तो क्या आ रहा है? तो थोड़ा परूमल नहीं है तो ऐसे किते कि अगर वो मिसाईल के अटाक तो है, पर इस शत्रों से तो वो आड़रिड है तो वो बेसिक सेक्यूरिटी जो है, वो भी नहीं है, कई जगों पर कुछ बाया है, मैं स्कॉट्श्मिन में था, कि मैं कुछ उक्रेंड से भकता आये थे, उनसे मिला था तो उक्रेंड में जुद्धभव हो रहा है, उक्रेंड में हमारे बहुत भक्त थे प्रस्या और उक्रेंड में बहुत मातराण भकते हैं, अभी भी है, पर उक्रेंड से काँगी भक्तों को चोड़ के जाना पड़ा है तो अलग अलग दिख्षियोंने गए है वो, तो फूरा एक जीवन चालि करना है तो हमें एक चोड़ना होता है, तग्गेताल चाहिए, तो हमें करता है, हमे हम समझ पाते हैं तो वो जो है।
प्रहुपाराजी जब अमेरिकाँ जाने आए थे, वो जानदूरी भेड़गे, तो अबी, आबी तओ अमेरिकार जाना है, तो इतने 24 आज के अंदर भी अक बग़ाराच बोलने हैं दैलिजिन से मॉक, जुन्मियक अगर नहीं तो 36 आजा तो ज़्यादा लगता नहीं है। तभी प्रहोपाल जी को 30 से 30 से ज़्यादा लगा। और फिर शिप में, शिप में कोई लोग यादा वेजेट्रिन होते नहीं हैं।
क्योंंकि तो अभी कोई मेल बगता है, मितर है मेरे बगता है, वो शिप में, क्रूज में काम करते हैं। तो हीड्रिन फून वहाँ पर प्राथ करना इतना आसान नहीं है। थोड़ा-थोड़ा लिगन ट्रेंटी हो गया है।
पर फिर भी तो प्रहोपाजी कुछ पैक करके ले गये थे। प्रहोपाजी के बाद कुछ बैसा भी नहीं था। प्रहोपाजी के बाद कुछ बैसा थी जब अमेरिका गये हो।
40 उपरे थे। तो कुछ बैसा भी नहीं थे। प्रहोपाजी के बाद कुछ बैसा भी नहीं थे।
तो प्रहोपाजी के बाद कुछ बैसा थी जब अमेरिका गये थे। अन्न तो एक साथ चोटी सी चीज़ है। प्रहोपाजी के बाद कुछ बैसा थी जब अमेरिका गये थे।
प्रहोपाजी के बाद कुछ बैसा थी जब अमेरिका गये थे। जो भी व्यक्ति हमारे लिए कुछ कर रहा है, वास्तव में कृष्णा उस व्यक्ति के मात्यम से हमारे लिए कर रहे हैं। तो जो हमारा ग्राटिटूट होता है उस व्यक्ति के परती होता है, पर वो कृष्ण भगवानती व्यक्ति होता है।
जब कोई नावजात चिष्व होता है, उसको माँ अपने स्थनों से धूनते लिए हैं। तो अभी ये वो माँ का बड़े ही स्थनेह का इंटिमेंट एक्सप्रेशन है, पर वो केवल माँ के परीम का लक्षन नहीं है। क्योंंकि वो माँ ने तो कुछ खुद, कुछ टेकलोजिकल ब्रेक्ट्रू करके अपने स्थनों में धूनते लाया है।
कभी कभी क्या होता है कि एक व्यक्ति से कुछ अपिक्षा करते हैं, और व्यक्ति जो हम जाहते हैं, वो हम जो अपिक्षा करते हैं, वो ही करते हैं। पर ऐसे होगा, पर क्या है, वो एक व्यक्ति से कुछ नहीं मिलेंगा, आपको किसी व्यक्ति से मिलेंगा। ऐसे नहीं है कि साब लोग कोई भी विश्वास का पात्र नहीं, कोई भी हमें नहीं करें।
गर वैसा किसी की जीवानी में होता, तो व्यक्ति अपने लिए जीवित भी नहीं होता। ऐसे ज़रूर हो सकता है कि हमारा जो मन है न, वो उसका एक लक्षन होता है, इस विकिल करेक्टरस से गए, कि इट आफ़न रिमेंबर्स अबाड थिंग्ज़ अपने में होता है, और इट फर्गेट्स अबाद थिंग्ज़ अपने में होता है। जो हमें से बुड़ा हुआ, वो याद नहीं था।
अरे मैंने इस एक्जाम के लिए इतना मेंनत किया, वो इतने कम मार्क्स नहीं। कहीं बार हम थोड़ी पढ़ाई की होती हैं, जो पढ़ते हैं, वो एक्जाम में आते हैं, अच्छे मार्क्स हो जाते हैं। पर वो हम ब कुछ लोग हमारे जीवन में हैं, जो हम पेक्षा करते हैं, उससे बहुत जादा किया हैं।
तो हम सबके जीवन में ऐसे भी लोग होते हैं। तो जो ग्राटिट्यूड है, यह एक इंटेक्शन क्योंं बोलना है। तो ग्राटिट्यूड नहीं है अपने अच्छे के लिए, जो हम पेक्षा करते हैं।
ग्राटिट्यूड हमें एक दिसीजन है। यह केवल एक भावना नहीं है, अच्छा मुझे अच्छा कुछ कुछ गिता लग रही है। मुझे कुछ गिता नहीं लग रही है।
हाँ वो भावना हो सकती है, पर अगर आप ग्राटिट्यूड के लिए एक भावना के स्थरपे रखे गए, तो उस पर हमारा कुछ विजंतर जाधा नहीं होता है। कहीं भावना आती हैं, कहीं भावना नहीं आती हैं। पर ग्राटिट्यूड क्या है, यह एक दिसीजिन है।
और अगर यह एक दिसीजिन है, यह एक दिसीजिन है। और अगर यह एक दिसीजिन है, यह एक दिसीजिन है। कि यह मेरा दिशकरश है, कि मैं मेरे जीवन में जो अच्छा है, वो देखोंगा।
तो आप सभी से पता हो, मुझे कचल लगता है चलने के लिए, मैं जब एक साल का था, तो मुझे पोलियो हो गया था। तो मैं चोटे से महराश्टर में, चंदरपुर्णा मुझे चोटे शहर में लगी, तो वहाँ पे मेरी मां मुझे पोलियो का वैकसी देने के लिए लेकर गयी। तो मुझे कचल लगता है, मुझे कच लगता है, मुझे कचल लगता है, मु मुझे कचल लगता है, मुझे कचल ल मरती भी की प्रक्तिक है उस के भी जिसे मात करता हूं, या तो मही लोकों के मिठी जिर्त के लोगों ने कर ले कि ने तक औ paper के लिए जरीग चीवने के लिए उन्हों का जा सकता है कि किसी को दस साल के लिए कोई एक्सेडन्ट हो गया है, उसमें के आग चली गया है या प्यार चला गया है।
यह ट्रैजिक है। पर भी वो दस साल हो गया है उसको हो गया है। आ बिलीबी वो मन में युद्ध कर रहे हैं।
यह क्योंं हुआ हुआ हुआ हुआ अपर अपर अपर अपर हमारे साथे खाना हो सकता है वो पक्षिन नहीं करेंगे मन की तपस्याल है क्या है संतुष्टी संतुष्टी कैसे आयेगी जब हम देखेंगे कि क्या मेरे पास है प्रत्खान लेवबास नहीं है तो इसलिए ग्राइटिट्यूब जो है इसलिए नहीं करेंगे इसलिए प्रत्खान नहीं करेंगे पर दुश्रा भी है कि देहार टोटली अन्रिलाइवर यह भी गलत है तो वास्तवी क्या है? क्या है कि जगत माया नहीं है जगत माया नहीं है जगत में जो सुक्ष का हमें प्रामिस होता है जगत में जो सुक्ष का हमें प्रामिस होता है वो हमाया है पर व्हाते कपल शबीदना है जगत सोड है पर समझ व्यक्त करंगी में एक कॉन बर्बी निर्ह नहीं है तो माया क्या है?
कि जगत सत्य है, जगत में सुקष है, कि दुश्रा है पर उस बूंत के समान भी संवादा था और ऐसे प्रतीत होता है कि एक सागर के समाध है। तो वो माया है। तो visible is real, but invisible is also real. And actually, there is much bigger invisible world. तो विज्ञान के अच्छार ये भी क्या है कि वो dark matter कहते हैं Dark matter जो है, वो हमको दिखता नहीं है पर वह हमारा universe उसके जाता है तो even science is telling us that there is an invisible world that is bigger than the visible world. तो ऐसे नहीं है कि हमें जो visible है उसको reject करना है we should not reduce the reality to visible, वो उसका implication है जो visible world में हमको दिख रहा है उसके आउसार हम, जो हमले अच्छा हो रहा है वो देख के उसके लिए कुछ तग्या हो सकते हैं Thank you very much. श्राँशंद्र भगवाद की चाय, श्राँशंद्र भगवाद की चाय, धाईदो मेरे परिमार