How can we examine our emotions? (Hindi)
Answer Podcast
Disclaimer: This transcript was generated using AI and may contain occasional errors or inaccuracies.
संक्षिप्त सारांश
आप खुद की भावनाव का हम direction कैसे कर सकते हैं, मुश्किल होते हैं। हाँ, सत्य है गया। उसके लिए सत्वगुण ज़रूरी है। तो कई बार जब हम कुछ फ्रो आता है, कुछ भावनाया के वश्च में चले आते हैं, तबी जैसे ही हमारे बुद्ध जाओ जा जाते हैं, तबी हम खुद को नियजन करने करते हैं। खिलाने लगते हैं, नहीं करना चाहते हैं, चेक करो। जैसे ही सभी में आप चेक कर लो।
मुख्य ट्रांसक्रिप्शन
आप खुद की भावनाव का हम direction कैसे कर सकते हैं, मुश्किल होते हैं। हाँ, सत्य है गया। उसके लिए सत्वगुण ज़रूरी है।
तो कई बार जब हम कुछ फ्रो आता है, कुछ भावनाया के वश्च में चले आते हैं, तबी जैसे ही हमारे बुद्ध जाओ जा जाते हैं, तबी हम खुद को नियजन करने करते हैं। खिलाने लगते हैं, नहीं करना चाहते हैं, चेक करो। जैसे ही सभी में आप चेक कर लो।
उसके बाद में, जब हम सत्वगुण में हैं, तबी हम थोड़ा विश्चार करने चाहते हैं। तो, हर रोज के दिन, चरिया में, या कमसे महाप्ते में एक बाद, हम, जो हमारे जीवन में हुआ है, सब के बारे में पूरा विश्चार करने के सुरुथ नहीं है, उसके बारे में थोड़ा विश्चार करेंगे हम, तो, हम समझ सकते हैं। Emotions are felt in proximity. But emotions are best understood from a distance. जो भावना है, हमारे उपर आते हैं, तो हम अनूगो करते हैं, जो क्रोधा आते हैं, क्रोधा आते हैं, क्रोधा आते हैं, पर थोड़ा दूरी आती है, तो हम भावना को समझ सकते हैं।
भावना को महसूस करना और भावना को समझना हैं, वो छोड़ा अलग है। तो भावना को समझने के लिए कई बात थोड़ा दूरी लगते हैं। विचार मन में घुम रहे हैं, उनको बाहर लेकर जाते हैं, तो उसके बारे में हम एक तरह से शारीक दूरी आ जाते हैं।
फिजिकली डिस्टन्स कम्स। तो वह फिजिकल नहीं है, शारीक नहीं है, फिजिकल मतलब। शारीक दूरी आ जाते हैं, तो उससे भी हम विचार कर सकते हैं।