OMG – Point-by-point response to the movie TV talk show Hindi
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Lecture Summary
- ईश्वर का स्थान सर्वोपरि: केवल ‘कर्म’ ही सब कुछ नहीं है। भगवद्गीता के अनुसार ईश्वर का स्थान सबसे पहला है। हमारे शरीर के भीतर होने वाली सूक्ष्म क्रियाएं (जैसे कोशिकाओं का बनना) भी ईश्वर की इच्छा से होती हैं। जिस प्रकार हम किसी बड़े नेता या प्रधानमंत्री के लिए समय निकालते हैं, वैसे ही हमें ईश्वर के लिए भी समय निकालना चाहिए।
- संस्थागत गलतियों के लिए धर्म दोषी नहीं: वक्ता तर्क देते हैं कि यदि किसी स्कूल में भ्रष्टाचार होता है, तो उसके लिए शिक्षा प्रणाली को खत्म नहीं किया जाता। उसी प्रकार, यदि किसी मंदिर या धार्मिक स्थल पर धन का दुरुपयोग होता है, तो उसके लिए वहां के लोग जिम्मेदार हैं, न कि ईश्वर या धर्म।
- पंडित और ज्योतिषी चेतावनी देते हैं, धमकी नहीं: लोग कहते हैं कि पंडित और ज्योतिषी डराते हैं। लेकिन वक्ता के अनुसार, जिस तरह एक डॉक्टर बीमारी के प्रति सचेत करता है या सड़क पर लगा एक बोर्ड आगे खाई होने की चेतावनी देता है, उसी तरह ज्योतिषी हमारे पूर्व जन्म के कर्मों (ग्रहों की दशा) के प्रति हमें केवल सचेत करते हैं। यह डराना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है।
- नास्तिकतावाद और ऐतिहासिक हिंसा: अक्सर धर्म को युद्ध और हिंसा का कारण माना जाता है। लेकिन इतिहास बताता है कि 20वीं सदी में नास्तिक सरकारों (जैसे हिटलर का जर्मनी, रूस और चीन) ने धर्म के नाम पर हुए युद्धों की तुलना में कहीं अधिक निर्दोष लोगों की जान ली है।
- मानसिक स्वास्थ्य और ईश्वर पर विश्वास: जो लोग ईश्वर पर विश्वास करते हैं, वे मानसिक रूप से अधिक मजबूत होते हैं। इसके विपरीत, जो नास्तिक होते हैं या स्वयं को अकेला मानते हैं, उनमें निराशा, हताशा, डिप्रेशन और आत्महत्या की प्रवृत्ति अधिक पाई जाती है क्योंकि संकट के समय उन्हें कोई सहारा नजर नहीं आता।
- ईश्वर की बुद्धिमत्ता (Doctor analogy): अक्सर लोग ईश्वर की शक्ति पर तो विश्वास करते हैं, लेकिन उनकी ‘बुद्धि’ पर संदेह करते हैं (विशेषकर जब उनकी प्रार्थना पूरी नहीं होती)। ईश्वर एक डॉक्टर की तरह हैं; एक मरीज जो मांगता है, जरूरी नहीं कि वह उसके स्वास्थ्य के लिए अच्छा हो। ईश्वर हमें वह नहीं देते जो हम अपनी जिद में मांगते हैं, बल्कि वह देते हैं जो हमारे लिए वास्तव में श्रेष्ठ है।
Full Transcription
कार्यक्रम की शुरुआत और ‘ओह माय गॉड’ फिल्म पर चर्चा
आज के सत्संग कार्यक्रम में आपका स्वागत है। आज ये जो पीछे स्वरूप में देख रहे हैं, शायद ये प्रस्तुतीकरण के अंदर आज मैं पहली बात कहूंगा कि एक कार्यक्रम, सत्संग कार्यक्रम में एक भूल का प्रभाव पड़ा रहना है, ये वो मैं गॉड (OMG) नहीं है, उसको मैंने लेकिन उस किताब में लिखी है। इसके सिर पर इस सवाल का जवाब मैं उस किताब से नहीं लूंगा। तो आज के प्रस्तुतीकरण में, वो ‘ओह माय गॉड’ जो हो रहे थे, उसमें से जल्द ही प्रभाव पड़ा रहना है कि जो टीवी टॉक शो हैं, उसमें कई सवाल, उस लोगों से पूछे जाते हैं, वो जवाब देते हैं। तो वो मेरी किताब का निष्कर्ष है कि वो सवालों का अपना जवाब देते हैं।
तो जो इस चित्रपट में उत्तर दिया गया था, वो वास्तव में आधा उत्तर है, आधा उत्तर कारण कई सवालों में वो चित्र स्पष्ट नहीं है। तो मैं वो टीवी टॉक शो दिखाऊंगा और उसके लिए थोड़ा-थोड़ा सवालों का जवाब आप इसे कैसे देते हैं, इसके लिए सही करने का उत्तर होगा। अब इतना है, आप देखना चाहते हैं, और बहुत उत्तर हैं सबके लिए सच्चा। तो यहाँ पर ऐसा नहीं है, इस सवाल कुछ नहीं है, इसको आपके देखने का सवाल होगा। आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, वास्तविकता बताने के लिए आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं, आपके लिए सही करना चाहते हैं।
भगवान का स्थान और आदेश का पालन
इसमें लोग भगवान को पहला स्थान देते हैं, अगर नहीं भगवान के आदेश का पालन करोगे, तो भगवान उसके साथ होगा, चाहे मैं धर्मों पर विश्वास करूँगा, तो मुझे भी तुमको शक्ति है, आपके पास शक्ति है, तुमको शक्ति है, तुमको शक्ति है, तुमको शक्ति है, तुमको शक्ति है। अच्छा नहीं कि तुम्हें बादलों के पास भागना पड़े, तो भगवद्गीता में बताया गया है कि भगवान पहला स्थान हैं, अगर भगवान के आदेश का पालन करोगे, तुम्हें भगवान के आदेश का पालन करना होगा, तुम्हें भगवान के आदेश का पालन करना होगा, तुम्हें भगवान के आदेश का पालन करना होगा, तुम्हें भगवान के आदेश का पालन करना होगा, तुम्हें भगवान के आदेश का पालन करना होगा, तुम्हें भगवान के आदेश का पालन करना होगा, तुम्हें भगवान के आदेश का पालन करना होगा, तुम्हें भगवान के आदेश का पालन करना होगा। हम हमारे देखने से केवल खाना नहीं उपजा पाते हैं, यह आदेश का पालन करना होगा, तुम्हें भगवान के आदेश का पालन करना होगा, तुम्हें भगवान के आदेश का पालन करना होगा, तुम्हें भगवान के आदेश का पालन करना होगा।
तो भगवान हर रोज हमारे 50,000 कोशिकाओं का निर्माण करते हैं, और आपके ख्यालों में भगवान क्या करते हैं, तो वास्तव में आप समझते हैं कि भगवान अदृश्य रूप में बहुत कुछ कर रहे हैं, इसलिए तुम्हें भगवान के आदेश का पालन करना होगा। और मैं कुछ समीक्षा, कुछ खाने के कारण के लिए कर रहा हूँ, कुछ इच्छा के लिए कारण कर रहा हूँ, मैं भगवान के लिए कर रहा हूँ।
दुर्घटनाएं और भगवान की कृपा
कल ही पर आपने किसी सीरियल में या टीवी में देखा होगा कि एक कोई गाड़ी का एक्सीडेंट हो रहा है, कोई पहाड़ से गिर जाता है, तो पहाड़ से जा रहा है, पहाड़ से कार गिर जा रही है वो नीचे, और तुम्हें वो नीचे गिरा दिया है, तो कैसे वो बच जाता है पहाड़ से गिर जाता है, और एक खाई पर गिर जाता है, यहाँ पर खाई पर गिर जाता है,।
समय की कमी और भगवान का नाम
जब हम भगवान के नाम का जप करते हैं, कि समय नहीं है, क्या करना है, समय नहीं है, हम बहुत काम करते हैं, तो अगर तुम यह घड़ी की ओर देखोगे, जब तुम्हें कहा जाता है कि उन्हें कुछ कहोगे, घड़ी की ओर देखोगे, मैं तुम्हें कहूँगा कि ओर देखोगे। जब हम भगवान के नाम का जप करते हैं, कि समय नहीं है, तो अगर तुम यह घड़ी की ओर देखोगे, अगर तुम यह घड़ी की ओर देखोगे।
कोई नहीं करता है ऐसा, और वास्तव में हम इतने जगत में हर जीवन में देखने के बाद ही श्रद्धा रखते हैं। वास्तव में हम देखते हैं, अगर बुलाएंगे तो हम चले जाएंगे, अपनी हो जाओ, अपनी हो जाएंगे तो मान लेते हैं। अगर भगवान की बात है, हमारे काम याद आ जाते हैं, हमें पसंद नहीं आता है, अगर भगवान की बात है, हमें पसंद नहीं आता है, अगर भगवान की बात है, हमें पसंद नहीं आता है, अगर भगवान की बात है, हमें पसंद नहीं आता है।
भगवान और प्रधानमंत्री का उदाहरण
अगर मैं कहता हूँ, मैं कहता हूँ, मुझे कहता है, कोई दूसरे ग्रह से आ रहा है, कोई सूर्य ग्रह से ले रहा है, जंगल में, और उसको बताया है, अगर भारत के प्रधानमंत्री हैं, अगर प्रधानमंत्री हैं, तो सारे भारत के नेता हैं, तो मैं दस लोगों को बोलूंगा, दस लोगों को बोलूंगा। तो भगवान को हमें देखना है, तो हम कुछ भी आसानी से जुड़ने का सोच सकते हैं, और एक शुद्ध हृदय हो जाएं, तो हम भगवान का दर्शन कर सकते हैं।
अगर हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए हैं, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए हैं, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए हैं। अगर हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है, तो हमारे प्रधानमंत्री के लिए है।
मांगें एक बार भी देखने के लिए ही समय मिल जाएगा, तो इसके लिए अगर मैं मेरी मनमानी प्रधानमंत्री के लिए हूँ, समझें तो कि भगवान हैं, उन्हें अब भगवान के अस्तित्व को महसूस नहीं करना है। प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है, प्रधानमंत्री के लिए है।
आपने मुझसे कहा कि मुझे प्रधानमंत्री के लिए दे दो, प्रधानमंत्री के लिए दे दी, इसलिए मैं फल लाके देती हूँ, मुझे फल लाके देती हूँ। प्रधानमंत्री के लिए है,
संस्थाओं में जिम्मेदारी और धर्म
अगर कोई स्कूल में जाता है और स्कूल चला रहा है, तो क्या पैसा खाया है, क्या पैसा सुरक्षित है, यहाँ जांच करना सरकार की जिम्मेदारी है। अगर कोई पाठशाला चला रहा है, पाठशाला चला रहा है, कोई पाठशाला करता है, तो पाठशाला के अधिकारों में जिम्मेदारी नहीं है, क्या पैसा खाया है। अगर मान लीजिए कोई मंदिर में आता है, अगर मंदिर में कोई दान पेटी में पाँच रुपये डालता है, तो उसका क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं, क्या करते हैं।
तो इसलिए यह यहाँ पे शास्त्र है, आचार्य हैं, तो क्या करते हैं, सबका किसमें किसमें करते हैं, तो भी अगर वो गुनाह भी कर रहा है, तो ऐसे नहीं कि धर्म वो गुनाह करता होगा, मंदिर गुनाह करता होगा। वास्तव में, वास्तव में थोड़ी तो भक्ति में शुरुआत हो गई है, इसलिए उसको भी भगवान की सेवा करनी होगी, वो कैसे पैसे खर्च कर रहा है, वो भगवान देख सकता है। पर अगर वो भगवान के मंदिर में आता है, तो भगवान को क्या देते हैं, किस तरह से आपका जीवन सफल होगा, आज भगवान आए किस तरह जाएँ, इस तरह तुम्हें आज आए, इस तरह से वो एक प्रगतिशील, कार्यशील सत्ता है, जिसके भीतर सब लोगों की प्रगति हो सकती है।
पंडित, ज्योतिषी और डराने का भ्रम
तो अभी यहाँ पे वापस एक तर्क निर्माण कर रहे हैं, कहते हैं पंडित लोग डराते हैं, कहते हैं आप रीति-रिवाज करो और उससे पूजा-पाठ करवाते हैं। तो अभी यहाँ पे लोग कहते हैं कि हम पंडितों से डरते हैं। फर्क क्या है इस बात में कि अगर हम धर्म का पालन करते हैं, अगर हमारे शास्त्र हैं तो हम धर्म के नियमों का पालन करते हैं। और वास्तव में दूसरा एक आपका फर्क ये है कि अगर हम नियमों का पालन करते हैं तो हत्या नहीं करते हैं, तो वो दूसरा करते हैं। वो ही हमारी समस्या करते हैं, पीटेंगे, उपवास करेंगे।
पर ऐसा नहीं है कि अगर धर्म का पालन करते हैं, पंडितों का पालन करते हैं, ऐसा नहीं है कि वो हमारी समस्या निर्माण करते हैं। तो वो समस्या निर्माण नहीं करते हैं, जो समस्या पहले से है, पहले से ही है। ऐसे मान लीजिए, जब कोई बच्चा जन्म लेता है तो उसको डॉक्टर को देते हैं, माता-पिता को बोलते हैं कि यह शिशु है, जच्चा-बच्चा, उसके स्वास्थ्य को जांचना है। तो अभी डॉक्टर ने जन्म दिया है क्या? डॉक्टर ने बीमारी पैदा नहीं की है, तो जन्म नहीं दिया है, डॉक्टर को उसके बारे में पता नहीं है।
मान लीजिए जो अगर कोई पहाड़ी रास्ते में जा रहा है और वहाँ पे एक विशाल खाई है। देखेंगे, मत जाइए, गिर जाएंगे, मर जाएंगे। तो अगर ये एक बात नहीं है, ये चेतावनी है। चेतावनी और धमकी एक नहीं है। चेतावनी मतलब खतरा नहीं है और वह खतरे के बारे में बता रहे हैं। धमकी मतलब डराना है। अगर तुम्हें डॉक्टर डरा रहा है, वह खतरा नहीं है। तुम्हें गुंडे डरा रहे हैं, वह धमकी देते हैं। जो डॉक्टर है, वह चेतावनी देते हैं। तो जो डॉक्टर जो है, वह शारीरिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य के बारे में चेतावनी देता है।
जो ज्योतिषी है, जो शास्त्रज्ञ है वह ग्रहों और कर्मों का डॉक्टर है। तो उसके बारे में, जो भविष्य के बारे में है, इसके बारे में चेतावनी देता है। तो इसलिए, मेरा जो विचार है, उनका उद्देश्य डराने की बात नहीं है, उनका उद्देश्य डराना नहीं है, इस विषय के बारे में है। और ऐसे हो सकता है, कि जो ज्योतिषी हैं ऐसे हैं जो बड़े रूप से ही वो डॉक्टर ही होते हैं। सत्यमेव जयते में आमिर खान का एपिसोड दिखाया था कैसे जो डॉक्टर होते हैं, एक बार डॉक्टर सही मायने करते हैं, डॉक्टर सही मायने करते हैं, वो लोगों को बहुत परेशान करते हैं। पर अगर बीमारी है तो उसके बाद में उसका निष्कर्ष तो है कि यह क्या है, डॉक्टर भी सही हैं, जो दवाई है वो भी सही है। इसलिए डॉक्टर के पास मत जाओ, दवाई मत लो तो सेहत अच्छी है, पर डॉक्टर और दवाई है पूरे लिए।
क्या आप अच्छी बात करते हैं? अच्छी बात करते हैं, डॉक्टर के पास मत जाओ, दवाई मत लो तो अच्छी बात करते हैं, डॉक्टर के पास मत जाओ, डॉक्टर के पास मत जाओ, डॉक्टर के पास मत जाओ, डॉक्टर के पास मत जाओ, डॉक्टर के पास मत जाओ, डॉक्टर के पास मत जाओ, डॉक्टर के पास मत जाओ, डॉक्टर के पास मत जाओ, डॉक्टर के पास मत जाओ। अच्छी बात करते हैं, कि आपने भगवान के नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, आपने भगवान के नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, अच्छी बात करना चाहते हैं, अच्छी बात करते हैं, कि आपने भगवान के नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, आपने भगवान के नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, अच्छी बात करते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, अच्छी बात करते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, अच्छी बात करते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, अच्छी बात करते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, अच्छी बात करते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, अच्छी बात करते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, अच्छी बात करते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, अच्छी बात करते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, अच्छी बात करते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, अच्छी बात करते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं, कि आपने नाम का यज्ञ करना चाहते हैं।
नास्तिकतावाद, इतिहास और हिंसा
तो क्या ऐसे हुआ है? इतिहास में बहुत ही कम ऐसे राज्य थे, जो प्राचीन काल के इतिहास में धर्म के नाम पर हिंसक थे, युद्ध के साथ हिंसक थे, बहुत हिंसक थे। ये जो राज्य थे, वो एक ऑफिशियल, सरकारी स्तर पर आस्तिक थे। और उनके धर्म का बहुत नुकसान देखा, लाखों लोगों को बहुत मारा गया, काटा गया, और क्या ये तो शांति के लिए है? तो अगर मैंने किताबों से आँकड़े निकाले हैं, सुनिश्चित लोगों के लिए, मैं क्या आत्मा सुनिश्चित लोगों की, जो 1920 से लगभग 2000 तक था, जो रशिया (Russia) और चाइना (China), उन्होंने जितने लोगों की हत्या की, इसका हत्या सरकार में।
तो जो हत्या है, वो इतने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, इसके खिलाफ, इस भारत का, विश्व के, बीसवीं सदी में, सारे देशों में, सारे युद्धों में, जितने लोगों की हत्या हुई है, इससे ज्यादा लोगों की हत्या हुई। जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई, जितने लोगों की हत्या हुई।
और जो विश्व युद्ध क्यों होता है, लोग सोचते हैं कि इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है, तो इस विश्व में क्या है।
आप कब तक मारेंगे, वो एक दिन का है, एक महीने का है, एक साल का है, वो आपका मारने की कुछ मर्यादा नहीं होती है। तो नास्तिकतावाद जो अपने ये एक-दो साल का है, तो हिटलर जर्मनी में राजा के समान था, तो उसने क्या दिया, उसने व्यवस्था दी कि जो भी सारे राष्ट्रों के लिए बोझ हैं, उनको मारना है, तो क्या है, जो लोग लंगड़े हैं, जो लोग लूले हैं, जो लोग बहरे हैं, जो लोग अपंग हैं, उन सबको मारना है, और वास्तव में वैज्ञानिक प्रक्रिया के द्वारा उनको मारा है, और वास्तव में फल देना पड़ेगा, वो किसी को मारा नहीं है।
और यहां तो धर्म की, धर्म की साथ ही बात है, हो सकता है कि धर्म की, धर्म को स्वीकार नहीं होती है, पर वह धर्म की, धर्म को स्वीकार नहीं होती है, तो जो लोग होते हैं, कभी-कभी लोगों को, लोगों को नहीं होता है कि पहले धर्म का हुआ वो इस धर्म का है, और मेरे धर्म के बचाव के लिए उस व्यक्ति के धर्म को हटाना चाहिए, उस व्यक्ति के उस धर्म के लिए। तो यह नहीं है, वास्तव में सब धर्म भगवान के धर्म हैं, और वो भगवान के पाठ हैं।
तो जब भगवान का ध्यान नहीं होता है, वो बकता है कि मेरा ही धर्म असली धर्म है, बाकी सब धर्म बकवास लगता है, और बाकी सब धर्म को हटा दिया जाना चाहिए। अगर अच्छी शिक्षा होगी, तो यह नहीं है, जब भगवान का ध्यान नहीं करते हैं, तो तभी मेरा ही विचार कर रहे थे, और पीछे नमाज़ की प्रार्थना चलो, तो भगवान तो तब यहाँ के लिए मौजूद हैं, और वो हाँ चलो, पूरी वो नमाज़ को सुननी, ये कितनी अच्छी समझ है।
मानसिक स्वास्थ्य और आस्तिकता
धार्मिक लोग और अधार्मिक लोग – इनमें कौन लोग मानसिक और शारीरिक दृष्टि से अधिक तंदुरुस्त रहते हैं? तो देखा गया है कि जो मानसिक समस्याएं होती हैं, जो बुरी आदतें होती हैं, डिप्रेशन होता है, आत्महत्या करने की प्रवृत्ति होती है, ये सब अधार्मिक लोगों में अधिक पाई जाती हैं। और अधार्मिक लोगों में नम्रता कम होती है।
एक बहुत बड़ा अधार्मिक तत्वज्ञानी था, नास्तिक तत्वज्ञानी था। और उसका सिद्धांत यही रहा था, उसका सिद्धांत यही रहा था कि भगवान को नकार देना चाहिए। वो जीवन में कोई भगवान अस्तित्व में नहीं रहा है, तो उसका तत्वज्ञान था कि पूरा जीवन ये तय है, कहीं एक भगवान अस्तित्व में नहीं रहा था। और आपने आखिरी साल से पढ़ाई कर रहा है, तो उसका एक भगवान के बिना आखिरी साल से आत्महत्या कर ली कि नहीं रहा है।
तो क्या है, निराशा और हताशा आती है। अगर आप सोचते हैं तो आपको इस दुनिया की समस्याओं का सामना करना है, कि मैं अकेला हूँ और कोई भी मेरे मदद के लिए नहीं है, तो उससे जो पूछा है सहन नहीं कर पा रहा है, तो उससे निराशा आती है। अगर आप समझते हैं कि भगवान मेरे साथ में हैं, तो भगवान कहते हैं कि आप मेरी चेतना में रहो, आप मेरा स्मरण करो, मेरे प्रताप से आप समस्याओं को पार करो, मेरी चेतना करो, तो आप समस्याओं का समाधान करते हैं। वास्तव में आस्तिकता के बारे में, उन्हें भगवान सशक्त बनाता है, यह भगवान सशक्त बनाता है, यह भगवान सशक्त बनाता है, आपको विश्वासी बनाता है। वास्तव में आस्तिकता के बारे में, उन्हें भगवान सशक्त बनाता है, यह भगवान सशक्त बनाता है, यह भगवान सशक्त बनाता है, यह भगवान सशक्त बनाता है, यह भगवान सशक्त बनाता है, यह भगवान सशक्त बनाता है, यह भगवान सशक्त बनाता है, यह भगवान सशक्त बनाता है।
ज्योतिष और कर्मों का फल
पर आजकल ज्योतिषी हैं, परिवार उनके बारे में भविष्यवाणी देखने जाते हैं। तो इसलिए आजकल ज्योतिषियों की जो भविष्यवाणी है, कहाँ तक सच हो, कहाँ तक सच हो, तो इसे भगवान सशक्त बनाता है, यह भगवान सशक्त बनाता है, यह भगवान सशक्त बनाता है।
तो देखने जाते हैं तो इससे होता है कि हमारे कर्म मुझे कैसे फल देते हैं। हमने जो पूर्व जन्म में कर्म किए हैं, उसके अनुसार एक शेष पल में हमारा जन्म होता है। और उस पल में जो ग्रहों की दशा है, तो हमने किस प्रकार के कर्म किए, यह देखने जाते हैं उसका लक्ष्य हम देखते हैं। और क्या बताते हैं, आपका मंगल ऐसा मतलब है इसलिए कि वो मंगल हमें परेशान करता है। हमने ही पूर्व जन्म में ऐसे कर्म किए हैं, उसकी गलती नहीं है, हमारे जन्म के साथ वो मंगल उसके लिए होता है। तो इसलिए देखने जाते हैं उसके लिए, मंगल को शांत करने के लिए आप इसे पढ़ सकते हैं, और हम मंगल के साथ भगवान को पूजते हैं कि भगवान को देखें। एक-दो चीज़ें जो हैं कभी-कभी क्या होता है कि अगर ज्योतिषीय दशा है, तो अगर नवजात शिशु जन्म लेता है, तो उसकी परवरिश क्या है, जिसे हम समझते हैं। तो थोड़ा बाहर दर्शन के लिए समझते हैं, तो थोड़ा बाहर दर्शन के लिए समझते हैं, तो थोड़ा बाहर दर्शन के लिए समझते हैं, तो थोड़ा बाहर दर्शन के लिए समझते हैं, तो थोड़ा बाहर दर्शन के लिए समझते हैं, तो थोड़ा बाहर दर्शन के लिए समझते हैं, तो थोड़ा बाहर दर्शन के लिए समझते हैं।
भगवान की शक्ति और बुद्धि पर श्रद्धा
भगवान की शक्ति में श्रद्धा होती है, अभी मेरे अज्ञान में पहला आना है और भगवान को पहला आ सकता है। तो इसलिए भगवान की शक्ति में श्रद्धा होती है। पर अगर वो पहला नहीं आता या भगवान कुछ काम नहीं करता है, अब एक ऐसा विचार करते हैं, तो इसका निष्कर्ष क्या है? हमारी भगवान में आस्था रहती है, भगवान की शक्ति में श्रद्धा होती है, पर भगवान की बुद्धि में श्रद्धा नहीं होती है। आप क्या सोच रहे हैं कि मेरी बुद्धि भगवान की बुद्धि से अच्छी है? मुझे नहीं चाहिए, अगर भगवान नहीं चाहिए तो भगवान की बुद्धि पर विश्वास नहीं होता है, वास्तव में नहीं होता है। भगवान की बुद्धि पर श्रद्धा नहीं होती है, हमारे भगवान की बुद्धि पर श्रद्धा नहीं होती है।
तो जब हम भगवान की बुद्धि पर श्रद्धा रखते होंगे, शास्त्र पढ़ते होंगे, तो हमारे भगवान की बुद्धि पर श्रद्धा नहीं रखते होंगे, उससे क्या होगा हम समझ नहीं पाएंगे। तो कभी-कभी मैंने जो माँगा है वो पूरा नहीं हुआ तो भगवान के प्रति श्रद्धा नहीं होगी। और मुझे नहीं लगता कि श्रद्धा हो सकती है, इसलिए कि जो मैं मांग रहा हूँ मैं कोई अच्छा हो सकता हूँ, पर भगवान जानते हैं कि क्या अच्छा हो सकता है। क्या है, एक तरह से जो भगवान से पेशेंट (मरीज़) है, भगवान डॉक्टर हैं। तो जो पेशेंट मांगता है, तो हम ऐसा सोचें कि उस पेशेंट के स्वास्थ्य के लिए क्या अच्छा होगा, अच्छा नहीं है, तो डॉक्टर तो भी वो चीज़ देगा, तो वो चीज़ नहीं देगा।
तो हमें भगवान के प्रति श्रद्धा होनी चाहिए। अगर आप कुछ जरूरतें तो मांग सकते हैं, तो भगवान अच्छा क्यों नहीं दे सकते, तो भगवान आपके लिए देखते हैं, भलाई के लिए होगा, ऐसा नहीं है। तो हमें भगवान पर श्रद्धा रखनी है। मुझे लगता है कि मेरे लिए अच्छा है, तो मैं आपके लिए देता हूँ कि आप करते हैं। पर अगर आपकी बुद्धि से आपके लिए लगता है कि मेरे लिए अच्छा नहीं है, तो जो मेरे लिए अच्छा है, तो मुझे आप दीजिए। पर अगर मेरे लिए अच्छा है, तो मुझे आपके लिए दीजिए। पर अगर आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है, तो मुझे आपके लिए लगता है।
शांति और मुक्ति
शांति से मुझे मुक्ति हो जाएगी। तो जब मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, ये मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी, तो मुझे मुक्ति हो जाएगी।
आपको मानसिक शांति है, वो प्राप्त करते हैं, तो आज प्राप्त करते हैं, तो आज प्राप्त करते हैं, मानसिक शांति सबसे बड़ी चीज़ है, मानसिक शांति सबसे बड़ी चीज़ है तो मुक्ति है। हमें आध्यात्मिक शांति प्राप्त करनी है, तो भगवान की दी हुई चीज़ है, जो चीज़ें भगवान की दी हुई हैं तो मानसिक शांति है। अगर कोई जुड़ा रहता है, वो अगर किसी बात के लिए परेशान रहता है, तो इसको उन लोगों को आध्यात्मिक शांति की बात से आध्यात्मिक शांति मिलेगी। भगवान की दी हुई चीज़ को भगवान की दी हुई चीज़ प्राप्त करनी चाहिए, प्राप्त करनी चाहिए, आपको धन्यवाद कि आपने इसे प्राप्त किया।