SB 5 5 6 Hindi HG Chaitanya Charan Prabhu ji How Mind Causes Bondage
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संक्षिप्त सारांश
परिवधनाम प्रभू, प्राधाराजन प्रभू, निनोनी प्रभू, अमितेश कृष्ण प्रभू, कुर्मोतार प्रभू, पेगवमिन प्रभू परिवधनाम प्रभू, परिवधनाम प्रभू, परिवधनाम प्रभू, पर प्रभू, परिवधनाम प्रभू, परिवधनाम प्रभू, परिवधनामक प्रभू, सोचन पासे बायास रख रही हैं. ह कन्पोर मैं गुंबीता हम मकुछ Hankpur, हकी देंगेंहीं कुछ जरूम बान्काक्ति या Bombayester को फिर स्पर्ऺित है। तो कैसे मंदीर बन गया? इतना बड़ा मनदार बन गया? मैं पोले कभी कोई सोचता हूँ तो आस्चर्ज होता है कैसे हो सकता है, लेकिन जब हम लोग मंदीर बना रहे थे, पॉले मैं सोचा।
मुख्य ट्रांसक्रिप्शन
परिवधनाम प्रभू, प्राधाराजन प्रभू, निनोनी प्रभू, अमितेश कृष्ण प्रभू, कुर्मोतार प्रभू, पेगवमिन प्रभू परिवधनाम प्रभू, परिवधनाम प्रभू, परिवधनाम प्रभू, पर प्रभू, परिवधनाम प्रभू, परिवधनाम प्रभू, परिवधनामक प्रभू, सोचन पासे बायास रख रही हैं. ह कन्पोर मैं गुंबीता हम मकुछ Hankpur, हकी देंगेंहीं कुछ जरूम बान्काक्ति या Bombayester को फिर स्पर्ऺित है। तो कैसे मंदीर बन गया? इतना बड़ा मनदार बन गया?
मैं पोले कभी कोई सोचता हूँ तो आस्चर्ज होता है कैसे हो सकता है, लेकिन जब हम लोग मंदीर बना रहे थे, पॉले मैं सोचा नहीं था की इतना बड़ा हो जाएगा। मैं तो छोड़ दिया था प्रेमना जी पर डिजाइन करने के लिए और कैजरिवाल जी को सुपरभाईज करने के लिए लेकिन जब बन गया तब मैं देखा रही है इतना बड़ा हो गया मैं तो सोचा भी नहीं था लेकिन अब बन गया तो यह जो मंदिल बना है इसका कैपिसिटी है कम से कम दो सव डिभोटी वहाँ पर फूल टाइम रहने चाहिए मेरे पास ब्लूप्रिंट है दो सब भक्तों के लिए आइडल मैं नहीं खा कर सोने के लिए नहीं बल्कि सब के लिए मेरे पास सेवा है मैं तो वेटिंग करना हूँ कि कब डेड़ सौसे उपर जाएं तो फिर मैं अपना ब्लूप्रिंट आप लोगों के साथ में सेर करों तो मंदिल तो बन गया येसा की प्रिमधना प्रवंतया की हम अमरावती का बरण सुनते हैं स्वर्गलोग का चाहिए नंदन कानन का बरण सुनते हैं वैसे हैं गोलोग धाम में चाहिए अंजवपर कैसे सुन्दर सुनदर बाटिका हैं द्वारिका का इत्यादी तो उस रूप में हम लोगों ने राधा मादव के प्रसंता के लिए करने का प्रयास किआ बोट फेस्तिबाल हो गयातों को मना परोभो के बिन नहीं हूँ है आज सांद भरो जी missing to be the तो बोड़ फेस्टिबाल को गोुबर।ं धारन हो गया तो धिरज़ी सब पड़ा औगा जी ला रहे हैं लेकिन एक जो कार्ज है सेकेंट फेज जो बाकी रह गया है मेरा वो ही अंतिम से बाकी रह गया है अभी गोसाला भी हो गया योथ और गिरस्तों के लिए आश्रम भी हो गया तो धिरे धिरे सब चल रहा है लेकिन मैं जो 200 भक्त का जो कर्ण सेप्ट है मैं आप ल मज़ सकते हो तक से काम मीनिमम 25 ब्रामिम चाहिये full time जोकी ठाकुर जी का सेवा कर सके हूँ उसमें भी कितने कुछ चाहिए कितने कलिनर चाहिये कितने अटि के लिए सबकुछ वी है तो मीनिमम 25 भक्त चाहिये पूजा के लिए और वैसे ही मेरी इच्छ है कि यहाँ पर भी 24 आवर कृतन हो जैसे बृन्दावन में होता है तो कम से कम उसके लिए एक टीम चाहिए जैसे मैं 20 से 25 से भोटी वहाँ भी चाहिए तो 50 तो यही लोगों है उसके बाद मेरी अच्छा है कि परतेक दिन हरी नाम टोली जाये उनका वही सेवा रहे हरी नाम करना सिर प्रभुपात जी एसकान को अस्थापित किये तो दो important सर्विष था हरी नाम और बुक डिस्ट्रिविसर तो करीब 25 भक्त लोग ऐसे हों जो कि केवल हरी नाम संकृतन वाले ही है वो डेली 10 बज़े निकल जाए प्रसाद खा करके और साम तक हरी नाम करकर के अलगल एरिया में आए उसके बाद तो ऐसे होगे 75 भक्त लोग कम से कम 20-25 भक्त चाहिए हमको जो कि लोगों से संपर करे करने के लिए नहीं खैलांजी करें।
कपो पार तक पारंोर को लोगों होगे उसके बाद पुस्तक भित्रन के लिए भी वैसे डिवोर्टी चाहिए और वैसे ही करीद पचीद से तीस डिवोर्टी चाहिए फूल टाम टेमपुल के अंदर जो की आज करम जो मैने जेरियल कार्च करम हैं उसके बाद और साफस सफाई रखने के लिए जस भोटी टेंपो इंग्री हैं डेपाटमेट ढूपी थिन आज डेपाटमेट नादो जी फील और जो फ़चीस भक्त रहेंगे देवी पर आउटरिच वो टु डिफरिंट भिलेजे चाहे पढ़यात्रा करकरकरकर चाहे कैसे भी तो इस परकार से 200 भक्तों का हमारे पास ब्लूप्रिंट है और मैं आश्चा करता हूँ के निर्मणी प्रभु सुन रहे हैं इसको समझ भी रहे हैं और मन में कुछ सुच भी रहे होंगे तो अब कितना दीन लगेगा जितना जल्दी करते हो उतना अच्छा है लेकिन ये सब तो ठीक है 200 भक्तों ठीक है लेकिन फिर ही मैं चाहूंगा कि मेरे प्रभु पाजी के लिए था बुक्डिस्विशन हरी नाम तो सबता अपना है हुँ लेकिन मेरा बहुत क्लोज यह है कर सेवा कभी रुखना नहीं चाहिए कर सेवा एक ऐसा है जो सब लोगों को साथ रखता है उसमें स्रेरेटी जुनिरेटी इस सब को साइडर करके सभी मे हम कृष्ण के दास हैं इस बात की अन्भूती हमें प्राप्त होती है चाहे वो जाडू मारना है चाहे वो पेपर उठाना है कोई सफाई है भले आदा खंटा हो कोई बात नहीं लेकिन कर सेवा होना चाहिए और उसके बात दुसरा बात भौक्तों के लिए अपना समय होना चाहिए या नहीं साथ में बैट करके सब लोग भले गिता का पाठ करें भागोतम का पाठ करें और एस्टरी करें बागोतम स् होना चाहिए और एस्टरी करें भागोतम का पाठ करें भाग करें भागोतम का पाठ करें कोई भी सबीशेज हैं और कोई सबी सबीशेज हैं और कोई सबी प्रावपाजी की बड़ी इच्छा थी और उस इच्छा को पुरा करने में बहुत भक्तों ने सहजोग किया सभी भक्त सराना की पात्र हैं और मुझे पुज़ा विश्वास है कि राधा मादव जी उन लोगों पर कृपा परशा रहे हैं और कृपा परशाते रहेंगे सरजोग किये हैं निर्मानी पभुके सीर पर बहुत बड़ा इस्पोंसेविलिटी है भक्त बनाना तो एक लेकिन सासाथ में टेमेंच बिल्डिंग बना देना आसान है लेकिन बिल्डिंग को में टेम करना उस से भी ज़्यादा करीन है लेकिन मुझे पुरा आसाव विश जो कि सब लोगों को साथ में करकर करके और सेवा करेंगे अमें मुझे पुरा भी टेंशन नहीं है कानपुर की विशय में क्योंंकि मुझे इन्हों पन्विक्षन है की प्रेमनां प्रभुके अच्छाने सावकाज अच्छा तरह से होगा आपको अच्छा दिवोटी हैं मुझे पुरा गोविन प्रभुके आपको हनुमान प्रभुके नहीं होगा प्रभुके नहीं होगा कि कैसे इतना बड़ा मंदिर बन गया लेकिन मैं इतना ही चाहता हूँ कि प्रभुपाजी की इच्छा थी और जैसा कि भागवतम में कहा गया है सत्यम विधातु निवित्तः शिदम भगवान अपने भगतों के इच्छा को पूरा करते हैं प्रभुपाजी की इच्छा थ और भगवान पूरा कर रहा है हम लोगों को माध्यम बना करके राधारणिया प्रभुप जितने भी में बरसीप प्रिचर हैं जो यहाँ पर हैं वो भी चले गए वे भी मारे कमिटी वाले सब लोग मिल करके और इस प्रकार से एकार्ज हुआ अब इसको लेट अस्मिन्टे साल बीच चुके समय बहुत जल्दी बीच जाता है कभी कभी अपने बच्चे बड़े हो जाते हैं नहीं इतना बड़ा हो गया हम लोग सोचते हैं मैं वही सोचा 10 साल बीच गया वह जल्दी 10 साल बीच गया तो यहाँ है सास साथ राधा मादव जीकरिपा सुन्दर फारम भी अपने पास है तो यह भी मैं चाहता हूँ बहुत लोग फारम पर भी थोड़ा ध्यान दें क्यूंकि ये नेचुरल है कृष्ण से जुड़ने का तरीका कृष्ण गाय से और कृषी से जुड़े हुए है तो जो कृष्ण से जुड़ना चाहता है उससे गाय और कृषी से जुड़ना ही चाहिए और जब इन से आप जुड़ोगे तो भागवत का टेस्ट आएगा मैं परसनली एकस्पेरियेंस किया हूँ तलासरी में ज़रा कर करके जब हम गायों के बीच में रते हैं और जब जो खेती देखते हैं चाहिए खेत चारतरा प्रहलते हैं तो निचरली कृष्ण भावना उत्पन्न होता है भागवत पढ़ने का मन करता है तो आप सभी भागत लोग भी फार्म अभता में एक दिन कमपल्सरी होना चाहिए सभी भागत लोग जाएं चाहिए वहाँ कर सेवा करें या गो माता का सेवा करें या कुछ भी करें वहाँ पर सभी भागत लोग अभता में एक दिन जाएं दिन भर पुरा वहाँ के लिए रखा जाएं पुजारियों के अलाबा आप हरिनाम कर सेवा कर सेवा कर सेव सेवा कर सेवा कर सेवा कर सेव कर सेवा कर सेवा कर सेवा कर से सेवा कर सेवा कर सेवा कर सेव कर सेवा कर सेवा कर सेवा कर से सेवा कर सेवा कर सेवा कर सेव कर सेवा कर सेवा कर सेवा कर से सेवा कर सेवा कर सेवा कर सेव कर सेवा कर सेवा कर सेवा कर से सेवा कर सेवा कर सेवा कर सेव कर सेवा कर सेवा कर सेवा कर से सेवा कर सेवा कर सेवा कर सेव कर सेवा कर सेवा कर सेवा कर से सेवा कर सेवा कर सेवा कर सेव कर सेवा कर सेवा कर सेवा कर से सेवा कर सेवा कर सेवा कर सेव कर सेवा कर सेवा कर सेवा कर से सेवा कर सेवा कर सेवा कर सेव सेवा कर सेवा कर सेवा कर सेव उसको हम कर्म के लिए मेरी आक्शन बोलते हैं पर अबज्जक्ट इलिए बोल सकते हैं कि रिजॉल्ट होता है कौज है तो उसका कोई एफेक्ट होता है तो अभी अधिकांश रूप से जब व्यक्ति भौतिक स्थर पर प्रगती करना चाहते हैं तो वो क्या करने का प्राज कर रहें है अंजी की भले ही में कोई कार्य करूम और जायन भावक्षियाज में परीह कोई सिव लिया है मैं कर्म करने बाला हूं इससे कोई सिव लिया हूं हांबि हुए लोग सोचते हैं कि अगर वी कैन जब मैं एक्शन कर रहा हूँ उसके साथ साथ मेरे पास अगर टेकनोलोजीकल पॉवर है तो फिर क्या होगा?
नो सफरिक तो लोग कई बार सोचते हैं वोट इस दे पॉर्पॉस अफ पॉवर पॉवर का यह उद्देश है शक्ति में इसलिए प्राप्त करनी है कि मैं कर्म करूँ पर उसका फल न आये मुझे और यह हम देख सकते हैं कई स्थरों पर कि जब व्यक्ति कुछ कारे करते हैं अभी हम साधान रूप से देख सकते हैं बाईशा दिश्व में तो प्रोवोकेटिव एक्जांपल है पर अभी जब पूर्श उसत्री साथ में आते हैं उसका एक नैसरगिक प्रभाव होता है कि संतान उत्पती होती है तो लोगों को भोग चाहिए पर संतान उत्पती नही चाहिए तो क्या करते हैं टेकनलॉजी से वो एक है तो पहले ही बर्थ कंट्रोल पिल लेके आते हैं या उसके बाद में अबॉर्शिन करवाते हैं अभी ये अम नोट ब्लेमिंग में और वुमिन ये यूमिन साइकलोजी इसमें कैसे है कि उससे क्या हो रहा है मुझे कर्म करना है पर मुझे कर्म का जो परिनाम होने वाला है वो नहीं चाहिए और टेकनलॉजी को इलाशिकती के क्या मतलब है यहांपे अबि इसे नहीं कह रहा हो कि साड़े क्याी टेकनोजीकल अद्वांस्मेंट इसी उद्देश से होती है।
इस दुनिया में तीन गुण होते हैं, तो टेकनोजी भी हम कह सकते हैं तीन गुणों में उसका उपयोग हो सकता है। सत्व, रजस और तमस। टेकनोजी यह एक तरह से एक आउजार है, यह एक टूल है।
इसका उपयोग अलग-अलग चीजों से, अलग-अलग कारियों के लिए कर सकते हैं। तो मान लेज़े कहीं प्रदूशन हो गया है, कहीं पानी बहुत कंटैमिनेट हो गया है। अभी हम पानी पीते हैं, गर्मी होती हैं, तो पीतल के हम कंटेनर में रखते हैं, तो उससे थंदा होता है, उससे शुद्ध भी होता है, ऐसे कहते हैं।
वो भी एक प्रकार टेकनोजी ही है। और कई जगपे आजकल जो रीसाइकलिंग प्लांट्स होते हैं, कुछ जगपे बहुत वो ट्रेडिशनल पद्धतियों से बनाये गए हैं। तो उसमें क्या है, वो टेकनोजी का इस्तमाल है, पर वो एक तरह साथ स्वत्वगुणी टेकनोजी है।
यह टेकनोजी हम यूज़ कर रहे हैं, जिससे कि हम जो समस्यां उसका हल कर सकें। पर टेकनोजी ऐसे भी हो सकती है, जो राजसिक हो सकती है, जो टामसिक हो सकती है, जब कोई अभी नुकलियर पावर से कोई हम एलेक्टरिसिट चला सकते हैं, नुकलियर पावर से हम वेपन्स बना सकते हैं, जिससे पूरे प्लानेट का भी द्याश हो सकें। तो क्या है, एक राजसिक ही इस्तमाल हो सकता है, एक टामसिक ही इस्तमाल हो सकता है।
तो किसलिए हम कर रहे हैं, आयुडवेदा भी एक टेकनलोजी ही है, वो टेकनलोजी ऐसी है कि ठीक है, इस प्रकार से कफ़बात पित्त का कुछ समस्या है, तो आप ये दवाई लो, ये ऐसा खाना मत खाओ, इससे आपका स्वास्त है और अच्छा हो जाएगा। तो टेकनलोजी हर जगह पे है, कई बार हम कहते हैं न, ये एक मॉडर्न सायंस या मॉडर्न टेकनलोजी है, तो ये कैसे है, this itself, ये दोनों को हम साथ में जब कर देते हैं, तो this is a mistake, सायंस ये मॉडर्निटी के पहले भी था, तो all science is not necessarily modern science, आजकल जो प्रभाव हो रहा है जिन्य में, वो मॉडर्न सायंस का है, आजकल जो प्रभाव हो रहा है, वो टेकनलोजी, मॉडर्न टेकनलोजी है।
अभी एक इंग्लेंड और अमेरिका में एक किताब बेस सेलर बन गया है, विलियम डाल रिंपल नाम का एक author, historian है, he is quite sympathetic to India उसने गोल्डन रोड नाम का एक किताब लिखा है, he says how everything that has made western civilization has come from India वो तोड़ा exaggeration है, वो भारत के आध्यात्म की बात नहीं कर रहे है, वो भारत के भोतिक प्रगती थी भी बात कर रहे है, तो इसलिए टेकनलोजी ये ऐसे नहीं है, अभी हम जो डिव्यास्त्र, महाभारत, रामान इस्तेमाल करते हैं, वो भी एक प्रकार के टेकनलोजी ह से आज़ेक है, अगर वो गोड़े से है कि ये जारे के लिए भार नहीं रहा है, तो चैसता नहीं है, वो खुद होगा जिंदने में भी है, तो नहां जो आजेक के लिए अच्छा थी नहीं जारे के लिए नहीं है तो अगर कुछ मुझे ते इसे दे जो है वो तपस्चा करके प्राप्त करता है।
तो वो एक तरह से तपस्चा करना सात्विक है। पर जब द्रोण, जो साधारन था या द्रोणाचारे जो थे वो आचारे थे, अर्चुन के गुरू थे, पर जब वो फ्रस्ट्रेट हो गए थे एक समय पे, तो वो साधारन योध्धावों पे दिव्यास्त्रों पे आकरमन करने लग गए। साधारन सेनों को भी. तो दिव्यास्त्रे एक तरह से ये दैवी हैं, देटाओं से आये हैं ये, पर जब उसका उप्योग ऐसा हो रहा था, वो तामसिक उप्योग है उसका।
तो पॉंट है कि टेक्लोजी जो है, वह सात्विक, राजसिक, तामासिक हो सकती है। तो अभी किसी का पेड़ बिगड गया है, तो हम दही लेते हैं से। दही से थोड़ा पेड़ ठीक हो जाता है।
यह भी एक प्रिमिटीव स्थर्प टेक्लोजी है। उसको ही हम दही को लेकर कुछ टाबलेट बना सकते हैं। टाबलेट और पोर्टेबल होते हैं।
कई और इंग्रेइडिन्स हो गए। तो टेक्लोजी जो है, पर टेक्लोजी का उप्योग कैसे हो रहा है। बहुत महत्वपूर्ण है।
एक पूरे मानवता के लिए एक पूरी पूर्ण प्रोब्लेम है। वो स्विकार भले करे या ना करे, जगत में डिस्ट्रेस है। जगत में दुख है।
यहाँ एक पूरी पूर्ण प्रोब्लेम है। और यह डिस्ट्रेस को कैसे हमें हल करना है। इसके लिए अलक अंलर विचारधराई है।
ऎलग अलग विचारधराई के लिए अलग अलग कारे होते हैं। आजकल Uncle के विचारधराई क्या है? जगत में डिस्ट्रेस है, पर विक merryा है जिन दुखा होता है s यगार डुख नहीं होता है न हो वो हम दुन के निकाले।
तो वो कार्यन न करे ये भाव नहीं है। अभी कई बार ऐसे होता है कि लोग शराप पीते हैं, शराप से हैंग ओवर होता है। तो वो ये investigation करे, research करे, कि कैसे लोगों को शराप से छुडाये।
उसको जाधा funding नहीं मिलता है। पर क्या research होता है, कि शराप पीने के बाद कोई और drink अगर आप लोगे, तो आपको hangover नहीं होगा। तो क्या होता है, उससे आप ये दवाई ले लो, उसके बाद में ये drink ले लो, या शराप के पहले आप ये ले लो, शराप के बाद ये ले लो।
इतना करना है, तो शराप लेना है क्योंं है पहले। तो पहले याद रखना परता है पहले। और ये एक बहुत बड़ा industry है, कि इसमें अभी क्या होता है, इसमें जो companies हैं, अगर ऐसे manufacture के तो, उनको पैसा हों मिलने वाला है।
इसके पहले आप ये ले लो, इसके बाद में ये ले लो। तो शराप के भी पैसा मिलेगा, और शराप के पहले बाद में जो ले लाएं, उसके लिए भी पैसा मिल जाएगा। तो क्या है, दो चीज़े है, if action leads to distress. Now, we don’t want distress. तो अगर distress नहीं चाहिए, तो दो solution हैं।
एक है, कि जो action से distress आ रहा है, उसके link को तोड़ने का प्रयास कर। दूसरा है, action को रोखो। तो अभी अधिकांश, आजकल का जो तंत्रग्यान है, वह क्या करता है, जो action से result होने वाला है, वह link को तोड़ दे हैं।
और जिस हद तक इस link को हम तोड़ सकते हैं, उसको वह progress कहते हैं। Again, this is not the only definition of progress. पर कुछ काफी हद तक ऐसे है, कि आप जो भी कारे कर रहे हो, उससे क्या होता है, जो result आने वाला है, वह result को हम कैसे रोक सकते हैं। वह देखो, अभी… इससे क्या होता है, जब प्रलाद बताते है, दुख अउशद हम तदपी दुख हम।
कभी इस लोग को ऐसे बोला जाता है, हम किसी दुख के अउशेडी को धूनना ही नहीं चाहिए। ऐसे नहीं बता जाता है। ऐसे नहीं है कि हर जो दुख इस जगत में आ रहा है, उसका अउशेडी धूनने से और दुखाने वाला है।
अगर वो तामसिक है, तो जुरूर होगा वैसे। अगर सात्विक है, तो जुरूर ही नहीं ऐसे होने वाला है। अगर मान लिजे कोई शराप पी रहा है, उससे उसको दुख हो रहा है।
और शराप पीना छोड़ देता है। शराप छोड़ने के लिए वो प्रयास करता है। और छूड जाती होते हैं।
तो वो दुख का आउशद ही है। क्या उससे उसको और दुख होने वाला है। नहीं, यहाँ पर जो दुख आउशद हम् तदपि दुख हम् जो बताया गया है, कि जब हम कोई दुख है, वो दुख का हल दूनना चाहते हैं, पर किस तरह से दून रहे हैं वो?
स्थर पे ठीक है कारय था हो जाए पर कारय का कोई परिणाम नहूं हूँ। इस तरह से देखते हैं। तो उससे वास्तों में प्रगती नहीं होती है।
उससे वास्तों में कोई कल्याण नहीं होता है। अभी ऐसे नहीं था कि प्राचीन काल में people would unite only for procreation. वो unrealistic standard है बहुत लोग के लिए। But people would not stop procreation after union. क्या है कि जब पुरुष्टी साथ में आते हैं तो उससे बच्चे होते हैं।
इसलिए कि आप प्राचीन काल में देखते हैं, प्राचीन में नहीं, 200-300 साल पहले भी, लोगों को काफी बच्चे हुआ करते थे। प्रस्तुकार तो आपको बच्चे के लिए हुआ था नहुं, काही बच्चे बच्चपन में उनकी मुत्ति होगा थी. हम देखते हैं सची माता के समय भे भी, उनके कितने नौ बच्चे पहले थे उनकी मुत्ति होगी, फिर बार में विश्वांबर विश्वरूप विश्वांबर का जन्म हुआ। तो पॉइंट यह है कि जो नैचरल प्रोसेस है, उसमें इंटरफियरन्स नहीं था।
पर अभी बहुत सा एड़, बहुत सा टेकलोजिकल एडवांसमेंट ऐसे हो रहा है, कैसे हम कार्य करें पर उसका फ़ल हम नभुकतें। उसको ब्रेक डे लिंक बिट्विन एक्शन और रिजॉल्ड के लिए बहुत प्रयास हो रहा है। अभी आजकल बहुत से लोग बहुत वेट कौंशिस होते हैं।
आर कुछ लोग आसे होता है कि कुछ लोग ऐसे श्रीरे है की उनका बेत आसानास्य बढ़ जाथा है कुछ लोग असे होते हैं अपने जिहवा को एक समान से का रूपेल के संवान लेते हैं, वो पर फिर भी उनका कभी बेट बढ़ता नहीं है। अभी थोड़ा बहुत फ़रक है उसमें। पर क्या है, अभी अगर किसी का बेट बहुत बढ़ रहा है, तो थोड़ा हमें खाना रेगूड़ेट करना है।
पर अभी क्या एक बैरियाट्रिक सर्जरी नाम का सर्जरी है, वो क्या कर देते हैं, वो आपका पेट खोल के पेट को स्टिच कर देते हैं। ताकि क्या होता है, थोड़ा सा खाने पे ही आपको लगता है पेट भर गया है। तो अभी क्या करते हैं, जब हम वो पेट भरा हुआ लगता है, तो हम खाएगे नहीं।
पर पेट को पहले स्टिच कर दिया, तो थोड़ा सा जगर, बहुत सिंप्लिफाइब करके बोल रहा हूँ, बैरियाट्रिक सर्जरी क्या होती है वो, पर संप्लिफाइब करके बोल रहा हूँ, तो तोड़ा सं भारों को… कोई व्यक्ति है जो असंतुष्ट है अपने विवाव में. तो उनके पाबे की पिठाना हो जाती है, अगर मैं आकरशक हूँ, और आगर ओसे विवाव में आकरशक साथ चारता हुँ, तो अभी मैं आकरशक बन गया हूँ, मैं सर्जरी कर लिया, अभी मैं इतना, I am not so fat, so I can find a better partner. तो almost 80% bariatric surgeries are followed by divorce. तो वो bariatric surgery इसलिए नहीं कर रहे है, कि उनका सेहत अच्छा बनाना है, उनको खुद और आकरशक बनना है, ताकि I can find a better partner. तो अभी जिसने में वारियाटी सर्जरी कर सकता था, वो family breakdown होगा, यह सोचा नहीं होगा उनसे कर, अभी ऐसे होना ज़रूरी है, कुछ-कुछ लोगों का बहुत बिमारी हो सकता है, शायद वो वारियाटी सर्जरी कर सकते हैं, नहीं प्रिंसिपल के लिए, कि जो हम दुख के लिए, परिणाम, दुख से हम छूटने के लिए कारे कर रहे हैं, उससे हम छूट नहीं पाते हैं, यह हम भौतिक स्थर्प में भी देख सकते हैं, पर अगर क्या है, कि आर जो action होता है, उसके दो results होते हैं।
एक है external, और दूसरा है internal. और जो external result है, अब external result क्या है? कि मान लिजे कोई जानवर को मारता है, कसाई है वो. तो अभी जानवरों को मारना एक कर्म है, किसा तुछ कर्म है वो. उसका कुछ फल मिलने वाला है. पर अंदर से क्या होगा? वो विक्ति को, कि जो compassion है, sensitivity है, जो दूसरों के दुख को समझने की शम्ता है, वो धिरिधरी कम हो जाएगी. तो कई बार क्या होता है?
कि जो external result है, this can be delayed. Delayed by कर्मा. अभी कर्मा, भगवान कहते है, गहना कर्मनोगती. अभी कर्मा का फल, हम कर्मा से और दूर दखेल सकते हैं. क्या मतलब है इसका? कि अगर, मान लिजे, कोई दस्वी मंजल से कुठ के आत्माहत्या करता है, तो वो घिर जाएगा, उसका हाथ पैट तूट जाएगा, शायद उसका सिर्फ फूट जाएगा, उसकी मुक्ति हो जाएगी. पर, कोई 500 मंजल के, 500 स्टोरी बिल्डि के उपर गया है, और वहाँ से वो आत्माहत्या करता है. तो क्या होगा? वो भी घिरने वाला है, पर घिरने के लिए समय लगेगा. हा था हाagar hardly. कभी कभी क्या होता है?
जब किसे ने किछ करम किया है, अगर किसे ने कुछ लोग करम किया है, तो उसके अच्छे करम के कारण, उसके बुढ़े करम के फल में, पर धूर विक बड़या है, जब होता है, तो उस से इसे एक मोह निर्मित होता है कि मुझे फल नहीं मिलने वाला है। मैं फल से छूड़ गया हूँ। पर ऐसे नहीं हैं।
जो गहना कर्मणो गती होता है, कैसे है? कि वानलीजिये किसी को पता जलता है कि अरे इस बैंक में सो करोर रुपे आ गए। तो दस छोड़ होते हैं कि हम छोड़ी करने वाले हैं।
दस छोड़ चोड़ करने का प्रयास अलग अलग पता जलते हैं। दस अलग अलग गुरूप हैं, अलग अलग इंडिविज्विल हैं। उन में से एक छोड़ जो एशस्वी होता है।
बाकि कुछ कोई और गाड़ वा जाते हैं, ये हो जाता है, वो हो जाता है। इससे भी नहीं होते। तो अभी ये एक छोड़ ही एशस्वी क्योंं हुआ?
क्योंं? क्योंंकि उसका अच्छा कर्म था पहले से। तो आपको बाद कर्म करने के लिए गुड़ कर्म होता है।
तो अगर किसी को बुरा कर्म करना है, किसी भी कर्म करना है। वाहवार का स्वाथा है। हरे क्रिश्न सनुबये. आपको एक मौसे स्वाथा करने के लिए गुड़ कर्म होता है।
तो क्या है? कोई वेक्ति कोई बुरा कर्म भी करना चाहता है कि इस जगत में कुछ भी अगर आपको यशस्वी करना है तो वो यश प्राप्त करने के लिए कुछ अच्छे कर्म की ज़रूरत होती है अभी हिटलर जो था हजारों लाखों लोगों उसने मारा अगर आपको प्राप्त करने के लिए 8-9 मिलियन जूज करने के लिए तो अभी हिटलर की जो वाक शक्ति थी बहुत पावरफूल थी उसकी पर उसके पूर्व कर्मा से वो लीडर बनने वाला था पर उसका अभी जो उसने कर्म किया वो अगर इसके बारा कर्मा से बत रहे था में इस कुछ जब नहीं कर रहा हूं कि यहने कर्मा करने के लिए पतरी है वह खायती है, यह परूर क्राथा है कि जब मैं 10 यूनिट का कर्म किया है तो मुझे दस यूनिट का result मिलेगा।
अब कर्मा मैथेमाटिकल नहीं है। इतना सिंपल नहीं है कि मैथेमाटिक से हम संजाएं, पर हम यहाँ पर उधारन ले रहे हैं। नौरमली हम सोचते हैं, मैं 10 ुणिट का करम किया है तो मुझे 10 ुनिट का फल मिलेगा।
पर कई बार ऐसे होता है, हम 100 ुनिट का करम करते हैं और हमको 10 ुणिट का फल विलता है। कई बार हमें देखा होगा कभी, इतनी मेंहनत की पर कुछ हुआ है नि होगा। तो अब ये ऐसे क्योंं हो रहा है?
क्योंंकि कुछ पूर्व कर्म है जिससे माइनस नाइन्टी आ जाता है तो अभी हमको ये ऐसे याद रहता है जब हमने बहुत मेहनद की पर कुछ फल आया नहीं पर अगर हम, if we are truly honest, कई बर हम देखते हैं कि हमने दस युनिट का कर्म किया और हमको सौ का फल मिलता है हम थोड़ी से ही पढ़ाई करती किस एक्जाम के लिए और जो पढ़ाई किया है वो ही आता है और अच्छे मार्क्स मिल जाते हैं अभी ऐसे भी होता है तभी क्या हो गया? पीछे प्लस नैंटी आ गया तो अभी जो कर्म है ये मतलब आक्शन से result आते हैं ये सही है बट ऐसे ज़रूरी नहीं है कि only present action will lead to the present result क्या है?
present action प्लस past action will lead to the result और you can say present action minus past action कभी कभी ऐसे होता है कुछ वक्ति होते हैं उनके लिए हम बहुत कुछ करते हैं उनके लिए हम सौ चीज़े करते हैं और जो 101 चीज़ नहीं की है उसके बारे में खॉण करम के कारण वह अभी बहुत शक्तिशाली बन गया है. तो शायद वह कोई गुना भी करता है, तो पुलीस भिउस से डरती है तो पुलीस भी कुछ करने कुछ आता ही नहीं है उसको. तो क्या है? क्या वह करμα की नियम से भच रहा है?
नहीं, उसका पहले का जो कर्म है, वो कुछ हथ तक, कुछ समय तक बफर रहेगा. और जैसे मैं बता था कि बहुत उंचाय पर कोई आता है, और वहाँ से नीचे कूतता है, तो वो जमीन पे घिरने वाला है, पर कितना उंचा गया है, उसके अनुसर कितना समय लगेगा उसको गिरने के लिए, उसमें फ़रक हो सकता है. अभी जब दुर्योधन, जब दुरोपदी के साथ गैर वियवार करता है, तो अभी इस प्रकार से, कामवासना से हो, या ख्रोज से हो, या अहंकार से हो, जो भी, ऐसे दुर्योधन करने लोग हमेशा होते हैं, दुर्भाग्यवश समाच में, पर साधारंते ऐसे कोई गुना करने वाले, दुर्योधन करने वाला है, तो क्या होता है, वो वेक्ति कही, डार्क लेन, या किसी कम्रे में, वो जबरदस्ट कहा कि कोई गवा नहीं रहे है, पर अगर मान लिजे कोई, खुलम-खुला ऐसे कारे कर रहे हैं, तो वो पर्सन नहीं करता है, किसी कारे के लिए, उसको काइदे का कुछ भैही नहीं, अगर मान लिजे, खुलम-खुला किसी रस्ते पे नहीं करता है, वो पुलिस्टेशन में जाके, या कोट में जाके ऐसे कारे करता है, उसका मतलब क्या है, कि उसको नियम का, कानून का कुछ दर नहीं है, कानून को उसका डर है, तो अब ऐसे होगा, बगले था व्यक्ति कहीं भी कुछ भी कर सकता है, ऐसे लगता है, पर दुर्योधन को भी अपने कर्म का फल मिला, समय लगा उसके लिए, तो क्या होता है, तो यैसे कोई व्यक्ति, पॉलिटिकल पावर प्राप्ट करके, या फीजिकल पावर प्राप्त करके, कोई स्कुल में बुलि होगा कोई, वो सबके धाधाघरी करता है, सबको दराता है, उसको सामना कोई नहीं कर सकता है।
उसके आपके बांच में फीजिकल पावर हैं। तो कोई political power, physical power प्राप्ट करके कुछ बुरा कार्य कर सकता है और कुछ हद तक उसको कुछ परिणाम नहीं मिलता है, कुछ समय तक. तो उसी तरह से जो कोई power प्राप्ट करता है, power हो सकता है physical, power हो सकता है political, तो उसी तरह से power हो सकता है technological. तो अगर किसी को यो power मिला है, और उस power मिलने से क्या हो सकता है, कभी-कभी वो विक्ति जो कर्म कर रहा है, उसका फल उसको नहीं मिलेगा. मिलने वाला है, पर ऐसे लगता है कुछ समय के लिए वो उस फल से बच गया है. वो फल को ताल रहा है, पड़ बो जो है हमेंशा के लिए नहीं रहने वाला है. से क्योंंकि तो पाप का गड़ा भर गया है, क्या कुछ किसी के पाप का गड़ा बहुत बड़ा हो सकता है?
तो उसको भरने के लिये बहुत समय लग सकता है. तो आप बोलेंगे कितना यह मुरा कररा है कुछ क्योंं नहीं ओकरा है इसको सबको अपने-अपने कर्म का फल मिलेगा तो ये बहाये स्तर पे मुझे बात करणाओं क्या है कि बहाये स्तर्फे क्या है कि जो हम वेक्ति कारे करता है, उसका फल जरूर मिलता है. पर जोभी action होता है, अगर कोई कारे कर रहा है, तो उसका एक external result होता है. तो इसका external result, it depends on कर्मा. कब वो result आएगा, कब नहीं आएगा, उसमें कर्मा का नियम आता है कुछ हद तक. पर साथ-साथ, उसका एक इन्टरनल रजल्ड होता है।
इंटरनल रजल्ड क्या होता है की孤र मन में वो कंडिशनिंग आजाता है। मन में उसप्राकार का इंप्रेशें होजाता है। और यह जो impression है, इससे कोई नहीं बच सकता है।
यह सबको होने वाला है। अगर कोई काम-वास्ना से कुछ कारे करता है, कोई क्रोध से कुछ कारे करता है, कोई लोब से कारे करता है, तो उसी परकार का कारे करने की प्रवरुत्ति उसमें और और और strong होने वाली है। और जब इस तरह से प्रवरुत्ति और बढ़ जाती है उसमें, तो फिर वह क्या कर रहा है?
वास्तव में एक तरह से, he is using his own rope to hang himself. खुद की रस्ती से वह खुद को बांध रहा है। खुद को फसा रहा है। तो अभी क्या है इस तरह से, कोई, I’ll give two examples, ये मन में कैसे बंदन होता है, उसके बारे में हम चर्चा कर रहे हैं।
तो मैं अमेरिका में था, एक भक्त यहां पर रह रहा था, तो वो एक है, वो inheritance law में थे। अभी inheritance law क्या होता है, कि अगर कोई माता पिता गुदर जाते हैं, तो उनका पैसा है, उनके बच्चों में कैसे distribute होगा। उसके लिए will बनाते हैं लोग।
तो where there is a will, where there is a will, there are many willing relatives. तो जहांबे पैसा होते हैं, अदे किर्षियोदार वहां पे आ जाते हैं, मेरीगा पैसा आखे, उनकी पैसा धी है अगर भी और मुझे मिलें, कुछ आप को Bharat, में कुछ दे दो मुझे। क्या होता है कि अभी माता, पिता के बाद बहुत पैसा हो सकता हैं, और वह चाहते है कि सारा पैसा हमरी बच्चों केело बाओ, पर फिर भी वो अगर देखते कि मेरे बच्चे जिम्मेधार नहीं है, तो फिर वो सोचते कि सारा पैसा एक साथ में हमको नहीं देना चाहता।
देखो, अच्छविने के लिए गुड़ पास्ट कर्मा और बैड़ प्रेजेंट कर्मा, यह विस्ट कॉंबिनेशन है, क्योंंकि क्या है, मैं भकती में आने के पहले था कि मुझे गुश्टा जल्दी आ जाता था, और क्या था, बहुत लोग गुश्टा आता है, पर कुछ लोग ऐसे होते हैं, गुश्टा जब आता है, तो इतने वो आग बहुले थे, कुछ बोली नहीं पाते। कुछ लोग ऐसे चीकते हैं, चिल्लाते हैं, पर कुछ बोलते ही नहीं हैं। क्या बोलना हैं, समझ भी नहीं आता है।
पर क्या था, मेरे लिए I had a bad temper and good vocabulary. ये एक deadly combination है। तो गुस्ता आता है, और मेरे शब्दों के शम्ता थी उससे, मैं इस तरह से लोग, सरक्यास्टिकली बात करता था, इससे से इंसल्ट करता था, कि क्या है, वो जिन्दगी भी लोगों को याद रहता था। तो अभी मेरा अच्छा vocabulary है, that is probably because of past good karma. पर अभी, अगर मुझे गुस्ता आ रहा है, that is present bad karma. तो present bad karma and past good karma, ये बहुत कतरना combination हैं।
तो क्या होता है, उससे जो वेक्ति बुरा कारे करना चाह रहा है, उसको करने में सुविधा मिल जाती है। तो जैसे भागोतने बिता के महाराज वेन के बारे में, जो अंगाराजे पुतर थे, अभी पूरो कुछ अच्छा करना था, इसके लिए वो राजकुमार बने, पर अभी present प्रवुत्ति क्या थी? बड़ी क्रूर प्रवुत्ति थी।
तो एक साधार कोई गरीब बच्चा होगा, वो क्रूर होगा, ओ कितना कुछ परेशान किसे कर सकता है, थोड़ा बहुत करेगा किसी को, पर कोई राजकुमार होगा, वहाँ अगर क्रूर होगा, वो अगर बेरहम होगा, तो वो दूसरों पर कितना दुख कर सकता है, कितना अत्याचार कर सकता है। तो प्रेजेंट बैड कर्मा और पास्ट गुड कर्मा, यह एक तरह से बहुत डेड्ली कॉंबिनेश्य है। अगर हम देखेंगे, यह, I’ll come to this graph towards the end, तो प्रेजेंट कर्म मैं करना पास्टरं मा चला।
इसमें एक साथ में बास्ट गुड है और एक साथ में क्रणी cleaner दू है। तो इदे रह्य छakt गुड है प्रेजेंट कर्मा है बास्ट कर्मा है को लोग है। तो इसे बड़ पर कुछ प्राया नहीं है।
और बुरा वेकती है, पर ज्यादा कुछ कर नहीं सकता, भीज़िक पूर्वकर्म ज्यादा अच्छा नहीं है, ज्यादा कुछ शक्ति नहीं है उसके पास कुछ करने के लिए। किसे को बहुत गुष्टा आता है, पर क्या कहते है? वो कमजौर व्यक्ति नहीं है।
शैरी में कुछ शक्ति नहीं है। बोलने कुछ शक्ति नहीं है. कुछ अच्छे मित्र नहीं है. गुष्टा भी आएगा, तो क्या कर नवाला है वो? ज़्यादा कुछ करेगा नहीं हो।
तो बुरा है पर वो ज़्यादा उसवे पावर नहीं है। पुरा पावरलेस नहीं है। पर अगर present कर्मा अच्छा है, पूर्व कर्मा बुरा है, तो फिर क्या है?
It is distress but auspicious. क्या है कि अभी उसमें दुख है उसके जीवन में भी। पर क्या है उसका भविश्य अच्छा है। कि पूर्व जन्म का जो कर्म है, वो अभी भुगत रहा है, पर वो पूर्व जन्म कितना भी बुरा कर्म हो, वो इन्फाइनाइट नहीं है।
वो खटम होने वाला है। और अगर अच्छे कर्मा भी कर रहा है, तो भविश्य उसका उजवल है। तो अगर पास्ट कर्मा पॉजिटिव है, प्रेजन्ट कर्मा नेगेटिव है, तो क्या है, वो अच्छा होने लगता है, पर अच्छा होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है।
पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है। पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है। पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है।
पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है। पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है। पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है।
पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है। पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है। पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है।
वो पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है। पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है। पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है।
पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है। पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगता है। तो तभी उसकी दादी गुजर गई पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने लगत है, पॉजिटिव होने लगता है, पॉजिटिव होने ल तो ये जो भक्त है, वो बोल रहे थे कि उनका specialization है कि वो ऐसा will बनाए कि कभी कोई break न कर सके उस will को तो मैं बोला is that a such a big need, वो बोला बड़ा profession है ये एक, कि ऐसे will बनाए कि कोई break न कर सके उस will को तो क्या है कि, यहाँ पर मैं कहने का आर्थे क्या बता रहा हूँ कि जो हमारे मन में प्रोर्डित्या होती है वो सब में होती है, पर अगर किसी की, क्योंंकि मन में कुई बुरी प्रवुत्या है, और कुछ अध्याक सब में होती है वो, जो मन में बुरी प्रवुत्या होती है, अगर बहाये रूप से वो प्रवुत्यों पे कारे करने की सुविधा किसी को मिल जाती है, तो यह एक अपने बड़ा है।
तो मन में जो हमारा बंधन होता है, वो वास्तव में कभी कभी दिखता नहीं है। क्योंंकि कभी कैसे लगता है कि व्यक्ति बुरा कारे कर रहा है, कुछ नहीं हो रहा है इसको। पर सबको उससे परिणाम होता है।
अगर कुछ लोग शराप पीते हैं, वो शराप पीने की कोंपिटिशन लेते हैं। कौन जादा पीएगा? और वो बोलता है कि, मैं तो 2, 3, 4, 5 बॉटल पीता हूँ, मुझे कुछ भी नहीं होता है।
उसके बाद मैं मैं कार ड्राइविंग कर सकता हूँ। आप कर सकते हों कार ड्राइविंग, बर आप जब कार ड्राइविंग करें, बाकि कोई उससे कार में कार ड्राइविंग कर सकता है के नहीं। पॉइंट यह है कि, कुछ लोग ऐसे होते हैं कि, वो थोड़ा शराप पीते हैं, और उनको तुरन्त हेड़े काता है, या हैंग ओर होता है।
कुछ लोग कहते हैं कि, अरे मैं इतना शराप पीता हूँ, मुझे कुछ नहीं होता है। वो क्या है? वो पूर्व कर्म से, कुछ लोग कहते हैं कि, अरे मैं तो रोज स्वीटस खाता हूँ, मुझे कुछ जायबेटिस कुछ नहीं हुआ है।
ठीक है, नहीं हुआ है, पर इसका मतलब है, नहीं है कि उससे कुछ होने वाला नहीं है। तो पॉइंट यह है, कभी-कभी, जब कोई बुरा कारे कर रहा है, उससे जो परिणाम होता है, वो शायद नहीं आएगा। पर जो बुरे कारे करने की जो प्रवृत्ति है, अगर वो मन में है, तो जैसे ही मौका मिल जाएगा, वो वैसे कारे कर लेगा।
तो इसलिए, जब एसी जब कपछल करना था, तो जब हमको किसी करेक्टर, किसी और का नहीं, कुछ का करेक्टर आसेस करना हैं, मुझे एक भग बोले, मुझे एक बहुत स्वभाल पूछना है, ठीक है, अगर मैं किसी और का अपमान करता हूँ, और उसको समझ भी नहीं आता है कि उसका अपमान हुआ है। तो क्या मुझे वो अपमान करने का कर्म मिलेगा। मैंने उनको बोला कि अगर आपको कर्म की रियम के बारे पता है तो क्योंं किसी को इंसल्ट करना है।
क्योंंकि नूगतति क्ये खाथ है। हम क्या करना चाहते थे और क्या वास्तों में परिणाम हुआ। तो मान लिजे कोई बैंक में चोरी करने जाता है और वो चोरी करने के बाद पकड़ा जाता है।
मतलब चोरी करके भाग रहा है तो भी पकड़ा जाता है। कोई चोरी करने जाता है और जब चोरी करने जाता है वो बैंक में ट्रेज़ेरी तक पहुँचने के पहले कोई पकड़ा जाता है। मैं तो चोरी की नहीं पर तुम चोरी करने गए थे तो कॉंसिक्वेंस नहीं आया है पर कंटेंट फिर भी था।
तो क्या होता है कि अभी राइट और रॉंग जो है न कॉंसा एक्शन सही है, कॉंसा एक्शन गलत है ये तीनों फैक्टर से फैसला होता है। अगर कॉंसिक्वेंस हो गया है और अभी अधिकांत जगत में शराप पीना इलिगल नहीं है पर शराप पीके ड्राइविंग करना ये इलिगल है। ये भौज जगपे इलिगल है और क्या है सारे विश्वें में लगबाग इलिगल है।
और जो लोगों को शराप पीने की भी आशा होती है, उनमें भी कुछ हद तक सत्बुद्धी होती है। अगर कुछ सत्बुद्धी कहे सकते, जो भी कहना है, कुछ बुद्धी होती है। मान लिजी अगर छैसात मित्र किसी पार्टी में जा रहे हैं, अपने शराब पीने वाले होते हैं।
तो वो छैसात मित्र पहले से फैसला कर लेते हैं। आज की पार्टी तुम्हारे तपस्चा का दिन है। यह क्या है, तुम हमको ड्राइब करने वाले हैं, तुम ड्राइब करके आपस लेने वाले हैं, तो तुमको शराब नहीं पीना चाहिए।
आज की पार्टी में तुम तपस्चा करो, अगले की पार्टी में मैं तपस्चा करूँगा। तो अभी वो शराब पी रहे हैं, वो हम कह सकते हैं, उसमें कोई साइस कंट्रोल नहीं है। पर वो शराब पी के ड्राइविंग नहीं करना है।
उतनी तो सद्वुद्धी है उनमें। तो अगर मान लिजे, कोई शराब पी के ड्राइविंग करता है, और फिर शराब से क्या होता है बेसिकली, बहुत चीज़े होती है, पर एक है, कि वेक्ति का जो इंपल्स कंट्रोल होता है, वो बहुत लो हो जाता है। गुस्ता आ जाता है, तो तुरंद उसका हाथ उड़चाएगा।
तो अभी मान लिजे, वो ड्राइविंग कर रहा है, कोई बीच में आ गया, और गाड़ी किसी को मार दे उन्हें, बेहोष हो गया, किसी को मित्य हो गया। तो अभी ये एक्सेडन्ट कहे सकते हैं, पर अगर वो शराब पीके कर रहे हैं, तो वो कॉंसिक्वेंस हो गया है, तो वो बहुत गंबीर होगा। अगर मान लिए वो शराब पीके ड्राइव कर रहे हैं, और कोई एक्सेडन्ट नहीं होता, किसी को मारते नहीं हैं, फिर भी उनको पकरते हैं वो, तो क्या होगा?
वो भी क्राइम होता है, तो आपके खेलाब कोई स्ट्राइक हो जाएगा, अगर दो तीन बार हो जाएगा, तो आपका ट्राइविंग लैसंस ले लेगे हैं। तो उसमें क्या है, कुछ कॉंसिक्वेंस नहीं हुआ है। एक है कि शराब पीके ड्राइव कर रहे हैं, और उससे कोई एक्सेडन्ट हो जाता है, आप शराब पीके ड्राइव कर रहे हैं, कंटेंट भी है, वो भी गलत है।
उसका भी परिणाम होगा। अभी इंटेंट होगा। मान लिजे कॉंसिक्वेंस बहुत शराब पिया है।
और क्या होते है, कई बार ऐसे लोग शराब पीते हैं, और कुछ लोगों तो इतना तो बुद्धी होते हैं, कि शराब भी मैं ज़ादा पिये लिया हैं। तो कोई लोग बोलते है, कि वो शराब पीते है, तो वो भी बार टेंडर या बार में कोई बोलते है, तो वो पर्वान नहीं करते हैं। तो मानलीजिये वो आते हैं बहार खुद car drive करने के लिए और जब car drive करने के लिए आते हैं तभी कोई वो bartender किसी police को बोलता है ये he is drunk and he is trying to drive. तो उसको पकड़ लेते हैं. तो अभी क्या ये घुना है?
वो गुणा नहीं होगा, हम कहे सकते हैं, पर फिर भी, वो डॉक्टर बोलेगा नहीं, पुलीस बोलेगा, तो आप नहीं करता कर सकते हैं. आपको आपको कार कीज़ के लिए देखें और आपको किसी टाक्सी में डाल देगें. तो इंटेंड भी होगा, तो भी वो बुरा है. ये, मैं कार्मा के लिए नहीं करता हूँ, मैं कार्मा के लिए नहीं करता हूँ, जो हम कारे करते है, वो अगर कोई बुरा कारे करना चाहता है, बुरा कारे करता है, और बुरा कारे करने से बुरा फल होता है. तो क्या है, एक तरह से तीनों में reactions हैं, but वो reaction है, एक तरह से इंटेंड के लिए least होगा, content के लिए more होगा, और consequence हो गया तो most आता है. जो reaction होता है, जो अगर कारे करता है, तो उसका reaction और बढ़ जाता है. So, the last point I was going to make here, कि जैसे मैं बता रहा था कि, जो अगर किसी के मन में संसकार हो गये हैं, मन में impressions हो गये हैं, ऐसे कोई बार-बार गुस्सा करता है, कोई काम-वास्ना का भोग करता है, कोई कार-बार इर्शा करता है, पर शायद अभी external situation ऐसे नहीं है, कि उससे कुछ ज़्यादा परिणाम होता है. जैसे कोई व्यक्ति, उसको बहुत गुस्सा आता है, और व्यक्ति नहीं अगर गुस्सा आता है, नियंतन करने का प्रयास भी नहीं करता है, पर क्या है, अभी व्यक्ति के बाद कुछ ज़्यादा शक्ति नहीं है, तो व्यक्ति गुस्सा करते हैं, तो क्या होता है उससे, कुछ होता नहीं है, पर मान लीजिये, व्यक्ति गुस्से पर नियंतन करने का प्रयास नहीं कर रहा है, और एक देन, मान लीजिये, किसी के घर में गए है, और उसके घर में, मान लीजिये, गन है, और इस व्यक्ति को गुस्सा आता है, व्यक्ति गुस्सा आता है, व्यक्ति गुस्सा आता है, और इक्स्टर्नल एक्शन होता है, उसको एकटिविटी कही कुछ है, कीस्या होता है, किसीर भुणी ओपडर में कारे करता है, तो हर बुरे कारे कारेस से इंटरनल बूंससी बढ़ा है, शायद वो इंटरनल टेंडेंसी एक्स्टेरनल आक्शन में नहीं आएगा।
अभी नहीं आएगा। पर अगर बाहर से कोई उसको सुविधा मिल जाती है, वो opportunity या सुविधा मिल जाती है, तो फिर तभी वो व्यक्ति क्या करेगा, उसका कोई बरोसा नहीं है। क्या-क्या वो ज़रूर उससे कारे कर देगा?
It depends उसका व्यक्ति का संस्कृति क्या है, उसका व्यक्ति क्या विवेक, बुद्धी क्या है। पर अगर ये जो कर्मा, जो मन के स्थर पर हो रहा है, कर्मा का फल, अगर उसका, उसको हम टाल नहीं रहे, उसको नियंत्रित करने का प्रयास नहीं कर रहे है, तो जब उसको सुविधा मिल जाती है, तो वो बहुत बुरा कारे कर सकता है। That’s why, आमार चानक के पंडित भी कहते है, बाइबल में बैता गये थे, A person’s character is tested, not just in adversity, but also in prosperity. जब व्यक्ति के विजवन में विपत्ति आती है, तो उसका चरित्र दिखता है, किस तरह से क्या तूट जाता है, या वो प्रयास करते रहता है, तो चरित्र बहुत determined है, firm है, tough है वो, वो चरित्र adversity में दिखता है, पर वो चरित्र उससे ज़्यादा prosperity में दिखता है, क्योंं क्या है, prosperity में क्या होता है, अगर उसमें कोरी बुरी प्रवर्त्या है, तभी उसको वो कारे करने के लिए उसको मौका मिल जाता है, क्या तभी वो वैसा कारे कर देगा, और अभी हम हमेशा देखते है, कि मेरे जिवन में यह विपत्ति आ गई, वो विपत्ति आ गई, और यहसे क्योंं आया, कब ख़तम होगा, वो सही है, nobody wants unhappiness in life, पर जब हमारे पास prosperity आएगी, तो are we ready for that prosperity, प्रहुपाजी एक बार कहा था, मेरे शिष्यों से, GBC में कहा था कि, कृष्ण आपको पूरा जगत अठ्रा दिन में दे सकते, पर क्या आप यह जगत लेने के लिए तयार हो, किसी कृष्ण ने पांड़व को अठ्रा दिन में दे दिया, तो क्या हाग है, हमें अगर, बहुत से लोग, अब यह देवखिन्डन प्रो बता रहा था, कितना बड़ा विजिन है उनका, तो अगर हजारों के मात्रा में लोग भक्त बन गए, और वो सेवा में लग चाहते हैं, जो हम बोलते हैं, वो करने के लिए तयार हो जाते हैं, तो हमें अगर इतने साथ लोग आ जाएगे, तो उससे क्या हमारा हंकार बढ़ जाएगा, क्या जब लोग हमारी बात मानने लगेगे, तो क्या हम हमारा पवर अब्यूस करेंगे, क्या हम ऐसे नहीं करेंगे, तो क्या है, कि बहुत से लोग, हमको ऐसे लगता है कि बाहर से मुझे opportunity नहीं मिल रहा है, और उसके कारण मैं कुछ नहीं कर पा रहा हूँ, और ये सत्य हो सकता है, opportunity नहीं मिल रहा है, पर external opportunity के साथ साथ, जो internal purity है, वो भी ज़रूरी है, अगर वो नहीं होगा, तो external opportunity से, कुछ constructive होने जगबे, वो destructive हो जाएगा, सकारात्मक के जगबे, नकारात्मक हो जाएगा, तो इसलिए, जब हम भक्ति कर रहे हैं, तो भक्ति में, एक तरह से है, external service होता है, और internal remembrance होता है, तो service से, हम सेवा करते रहेगे, तो उससे धिरे धिरे opportunity आ जाएगा, अगर हम जिम्मेदारी से सेवा कर रहे हैं, तो क्या होगा, वरिष्णभक देखेगे, और हमको सुविधा ज़रूर दे देगे, पर हमारे अंदर से, जब हम भगवान का समन कर रहे हैं, तो उससे purity आता है, और जब ये purity आता है, जब अंदर से शुद्ध करना आता है, तो जब opportunity मिलेगा, तो उसको हम अच्छी तरह से use कर पाएगे, नहीं तो, कर्मात्म कमीन शरीर बद्धा जो बताता था, एवं कर्मवशंपर्यूंग जो आज बढ़ रहे थे, वो हमारे मन के वश्च में आकर, जो बाहर की सुविधा मिली है, उसका हम, शायद जानबुज के नहीं होगा, पर अंजाने में भी उसका धुरुप्योग हो सकता है, इसलिए our desire, we can always seek opportunity, but not at the cost of purity, हमें अंदर से purity चाहिए, और बाहर से opportunity चाहिए, आज हम चार पॉइंट्स में ले चर्चा किया है, किस तरह से, कि जो बहुत है हम कर्मा के लिए पेटिया कर रहे हैं, और वो प्यासका साथ, प्यासका सथ, यहाँ पे हम चर्चा की किस तरह से, आजकल से जो प्रोगरेस जो बोलते हैं, प्रोगरेस का, खास करें टेकनलोजीकल प्रोगरेस, उसका मतलब क्या है?
कि जो आक्शन से जो result आ रहा है, उसके लिंक को ब्रेक करना. पर जो spiritual progress जो होता है, उसमें क्या है? उसमें हम वो action को रोकने का प्रयास करते हैं. तो अभी टेकनलोजी itself is not bad, टेकनलोजी भी सत्व, रजस और तमस में हो सकती हैं. तमस में जो खास करें टेकनलोजी होती है, उसका उद्देश क्या होता है? कि हम action करें पर उसका परिणाम ना आये. शराप तो पीना है, पर एसा कोई substance पीना है जिसे शराप का बुरा परिणाम नहीं होगा. तो उस तरह से अलग-अलग हमने देखें उधारण इसके लिए. और फिर क्या इसमें कोई ऐसे कर सकता है, वारतम में कोई action करें और result को न लाए?
Is that possible? तो यह temporarily possible हो सकता है. वो कैसे हो सकता है हम देखा? कि किसी के बास power आता है. वो power physical हो सकता है, political हो सकता है या वो technological हो सकता है. और यह power आता है, तो क्या हो रहा है वास्तम में उससे?
उससे जो present action है, present action से भी present result आने वाला है, पर क्या होता है? अगर मान लिए present action minus 100 है, पर किसी के बास जो past action है, वो plus 100 है, तो क्या होगा उससे? उसको लगा है, मैंने action किया है, पर कुछ हद तक ऐसे लग सकता है, कि कोई कार्य कर रहा है, पर उससे फल उसको नहीं मिल रहा है. Power से लगा है?
तो उसके बाद में हमें देखा कि सबसे deadly combination क्या है? हमें एक four quadrant देखा कि Positive present karma and Positive past karma. तो उसके अनुसर सबसे deadly combination क्या है? Positive past karma and Negative present karma. तो उससे क्या होगा?
उस व्यक्ति को लगेगा कि मुझे कुछ नहीं होने वाला है और उससे वो बुरा करते रहेगा और बाद में जो फल आएगा वो बहुत सारे कर्मों का फल आने वाला है और इसलिए जब हम when we want to grow हम चाहते है कि हम जब भौतिक जगत में हो या भक्ति में हो हम जब ग्रो करना चाहते है तो we always think मुझे बाहर से, external से opportunity मिलना चाहिए पर उसके साथ साथ मुझे हमको internally जो है purity भी ज़रूरी है तो बाहर से अगर service से हमको opportunity मिलता है पर अंदर से remembrance नहीं है भगवान का स्मर्ण नहीं है तो क्या होगा?
हमें सेवा करने के सुविधा मिलेगी पर सेवा का भाव अंदर से नहीं रहेगा और फिर जो सुविधा मिलेगे उसका शायद हम दुरुप्योग भी कर सकते हैं तो इसलिए we can seek service but we also try to cultivate remembrance और उससे हम सकारात्मक रूप से जो है, we can transform Thank you very much हरे कृष्णा So we will have question answers tomorrow Okay one question हरे कृष्णा Thank you so much for wonderful class यह पूछना था कि जैसे नेचरली यह conclusion है ऐसा होना चाहिए कि पास्ट किसी का गुड गर्मा है तो अभी भी व्यक्ति अच्छा ही करना चाहिए लेकिन ऐसा कैसे हो जाता कि पास्ट गुड गर्मा है लेकिन अभी बहुत बदमाश क्या होता है कि जो पास्ट अगर गर्मा अच्छे है तो अभी अच्छा करना चाहिए किसे कि यह गर्मा काफी समय से है तो पास्ट मतलब क्या पास्ट वन लाइफ, पास्ट टू लाइफ, पास्ट फाई लाइफ पास्ट हंडरेड लाइफ किसी का भी पास्ट सबका पास्ट एक मिक्स्ट बैग ही होता है बहुत कम ऐसे लगते हैं ऐसे लोग होता है कि उनका पास्ट पुरा शुद्ध ही होगा तो ऐसे हो सकता है कि पिछले थीन चार जन्म पहले से जो कर्म के है उसका अच्छा परिणाम को अभी मिल रहा है पर पिछले जन्मे कुछ कर्म की है उससे बुरा परिणाम मिल रहा है तो इस कोंप्लेक्स आजामिल का प्रसंग देखते है तो आजामिल ने जरूर कुछ अच्छे कर्म किये थे उसके कारण उसका एक ब्रामभन परिवार में जन्म हुआ वो एक सुशील प्रवृत्ति सुशील संस्कुर्ति में रह रहा था अधिकांच रूप से हम कह सकते है कि वो जब बाहर गया था वो कोई भोग करने के लिए भी नहीं गया था वो तो सेवा के लिए गया था अपने पिताजी के सेवा के लिए तभी जो दुर्श्य उसने देख लिया वो जो दुर्श्य था वो एक दुरभागे कह सकते हैं वो शायद पूर कर्म पहले का कुछ नकारात्म कर्म हो सकता है उससे कह सकते हैं तो अभी कैसे कर साधारन तया हम कहते हैं कि कोई मिजरी आता है कोई दुख आता है तो उसको हम पूर जन्म का बुरा कर्म कहते हैं पर अच्छिली ट्रिभूलेशन, ट्रिभूलेशन इस स्ट्रेस और अद्वर्सिटी ट्रिभूलेशन के लिए आपको सोच्यल मेडिया नहीं है, आपको करने के लिए आपको सोच्यल मेडिया के लिए आपको अपने सारे लोगों के लिए आपने सारे लोगों क के लिए।
जिसके कारण वो टेम्टेशन उसके जीवन में आ गया है। अगर इस जीवन का भी कर्मा था, जिसके कारण उसने वो टेम्टेशन को स्विकार कर लिया। और, पर एक पर्सन के लिए एक रोमान्टिक इंट्रेस नहीं है।
पर, पर अगर वो नहीं करने के लिए, यह एक पर्सन के लिए एक रोमान्टिक इंट्रेस नहीं है। गंतराई श्रीमद्भागवतम् की, श्रील प्रभुपाद की, गौर भक्त बृंद की, इताई गौर प्रेमानंदी।