When facing problems how can we go beyond blaming others and blaming our own past karma – Hindi?
Answer Podcast
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Lecture Summary
- दोषारोपण और पूर्व कर्मों का विचार: जब जीवन में समस्याएं आती हैं, तो हमारा स्वाभाविक रुझान दूसरों को दोष देने या इसे अपने पूर्व जन्म के कर्मों का फल मानकर शांत होने की ओर होता है। हालांकि, केवल पूर्व कर्मों का हवाला देना हर स्थिति में उचित नहीं है।
- धर्म और कर्तव्य का महत्व (राजा और चोर का उदाहरण): राजा और चोर के दृष्टांत के माध्यम से यह समझाया गया है कि संकट या अन्याय के समय केवल पूर्व जन्म के कर्मों का दोष मानकर बैठ जाना सही नहीं है। व्यक्ति या शासक का पहला धर्म और कर्तव्य वर्तमान परिस्थिति में उचित कदम उठाना और समाधान खोजना है।
- घाव और मानसिक पीड़ा से उबरना: किसी से मिले गहरे आघात या दुःख के बाद उस व्यक्ति या घटना के बारे में बार-बार सोचना, उस घाव को बार-बार कुरेदने जैसा है जिससे दर्द बढ़ता है। इससे बचने का उत्तम उपाय यह है कि मन को सकारात्मक कार्यों और सेवा में व्यस्त रखा जाए ताकि विचारों का वह चक्र टूटे।
- क्षमा और जीवन में आगे बढ़ना: जीवन में ‘माफ करो और भूल जाओ’ (Forgive and Forget) हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन समय के साथ घाव भरने पर पुरानी कटुता और क्रोध को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना आवश्यक है। अतीत की नकारात्मक भावनाओं को दिलो-दिमाग में बसाए रखने से मन की प्रगति रुक जाती है, इसलिए घावों को भरने का अवसर देकर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए।
Full Transcriptions
समस्या के समय दूसरों को दोष देने और पूर्व कर्मों के विचार से परे जाना
तो जब जब समस्याएं आती हैं, मेरे दूसरे को दोष देते हैं और ये दोष देने की बहुत संभावना है कि इसके पीछे हम सोच सकते हैं कि हमारे पूर्व जन्म का कर्म आ रहा है। पर वो ज्यादा समय तक रहता नहीं है हमारे मन में पूछा ये सत्य है कि जब समस्याएं आती हैं तो हम दूसरों को दोष देने का स्वभाव होता है। तो अभी ऐसे नहीं है कि दूसरे में दोष नहीं है और ऐसे नहीं है कि हमने भी दोष देने साधा में समस्या होती है, कुछ जगह हो रहा है वो जगह हो रहा है तो दोनों पक्ष में कुछ दोष होता है। हमें देखना है कि मेरे बुद्धि के लिए मेरे भक्ति के लिए मुझे आगे जीने के लिए क्या विचार देना अनुकूल है। तो अभी हमारे पूर्व जन्म का फल है, ये विचार करना कभी अनुकूल हो सकता है, कभी अनुकूल नहीं हो सकता है।
राजा और चोर का उदाहरण: धर्म और कर्तव्य
हमें देखना है कि अभी मान लेंगे कोई नागरिक है और उसके घर में कोई चोरी हो गई और वो नागरिक जाता है होता है मेरे घर में चोरी हो गई राजा होता है तुम्हारे पूर्व जन्म का फल है पूर्व जन्म का कर्म का फल है। तो अभी ये उचित नहीं है, क्यों? क्योंकि राजा को देखना है मेरा धर्म क्या है? मेरा धर्म है कि इस समय इसको ये चोर को पकड़ना इसकी जो संपत्ति है वो वापस नहीं होता था अभी राजा प्रयास करने के बाद भी अगर चोर पकड़ा नहीं जाए तो तभी वो सोच सकता है कि ये मेरे पूर्व जन्म का फल है। तो हमें पूर्व जन्म के कर्म का क्या फल है, वह विचार प्रदान दे रखना है कि मेरा अभी का धर्म क्या है? मेरा अभी का कर्तव्य क्या है? मेरे लिए उचित क्या है? कारिकार।
घाव का उदाहरण: दोष देने से बचना और मन को सकारात्मक रखना
तो जब किसी के कारण में बहुत दुःख पहुँचा है, तो किसी के बारे में ना दोष ना देना ये आसान नहीं है। तो इस accord के साथ में हम दो चीजें कर सकते हैं, सबसे पहले कि जब तक हम किसी विचार कर रहे हैं तो उस विचार के बारे में हम अपने आपको बोला, न ऐसे किसी है यह हुआ। वो दोष के लिए चलाएगा। तो हम एक चीज़ कर सकते हैं कि हम उस व्यक्ति के बारे में विचार करना करते हैं। और वो कैसे दसकते हैं? हमारे मन में हमारा मन किसी और चीज़ से बढ़ता है। तो क्या किसी से बढ़ सकते हैं? हम कुछ सेवा ले सकते हैं। कुछ और चीज़ से ले सकते हैं। किसे कि हमारा मन सकारात्मक रूप विचार से भर जाएगा। तो क्या होता है? कभी कभी कुछ जख्म होता है। वह बहुत अगर फ्रेश होता है। अभी अभी घाव हुआ है। तो उसको फिर उसको स्पर्श किया थे भी दर्द होता है। तो अगर मान लीजिए मुझे कुछ जख्म हो गया है। और वो स्वभाव काल के प्रवाह से भर जाएगा। पर बार-बार उसको स्पर्श करके देखा, मुझे दर्द होता है कि दर्द होता है कि नहीं। हर बार दर्द होते रहेगा और स्पर्श करते रहेगा तो क्या होगा। उससे जख्म भरने कुछ समझने जाएगा।
तो कभी कुछ क्या होता है, तो जो हमें घाव हुए बहुनाद बख सर पे, उसके बारे में हम विचार करते हैं, तो हम बोलें कि नहीं, उसके बारे में सोचना है, उसको दोष देखते हैं। नहीं, नहीं पर कर पायें। तो बेटर दोष देना या दोष नहीं देना उसके बारे में सोचना ही नहीं है। आसान नहीं है, पर वो दोष न देने से उसके बारे में नहीं सोचना आसान है। अगर उसके बारे में सोचेंगे तो दोष देखे, तो अगर दोष नहीं देना है तो वो स्वभाव नहीं है, तो बेटर है कि उसके बारे में सोचेंगे उसके बारे में।
क्षमा, अतीत को भुलाना और जीवन में आगे बढ़ना
और कैसे होता है कि ऐवेंचुअली, कभी हम कहते हैं कि किसी ने हमें दुख दिया है तो हमें माफ करना चाहिए। सबसे करते हैं, फर्गिव और फर्गेट। कि अच्छी फर्गेट नहीं है, पर फर्गिविंग पर एक एक परिवार आ जाना चाहिए। मतलब, अगर जो घाव है, अभी घाव कुछ समय के पाद भर गया है, तो अभी उसकी साथ कोई कुछ निशाना अभी तक रह गया है, तो वो निशाना नहीं जाना है, पर फिर भी क्या होता है वो घाव अगर भर गया है तो वो निशानियों को देख के दर्द नहीं होता है। तो इसलिए एक ऐसा समय आएगा आमार जुन में कि जब हम देखे रहे थे, अभी जो हुआ, मैंने कुछ किया, उसने कुछ किया, जो भी हुआ, अभी यह एक बात है, यह आमार जुन में खत्म हो गया है। तो उसने कौन गलत है, कौन सही है, उसका निष्कर्ष हमें करना काफी मुश्किल होता है।
जब हम भावनात्मक स्तर में उसके बहुत पसर होते हैं। तो खत्म करना काफी मुश्किल होता है, जब हम भावनात्मक स्तर में उसके बहुत पसर होते हैं। कि अब यह जो किस्ताद में जुन खत्म हो गया है, तो यह मैं आगे बढ़ने करता हूँ। तो हमारा जीवन तो आगे बढ़ रहा है, समय का प्रभाव आगे बढ़ रहा है, पर जो घृणा होती है, गुस्सा होता है, क्रोध होता है, वो हमारे दिमाग में दिवाया कर देते हैं। इसलिए क्या होता है? हमारा मन आगे जाता ही नहीं, तो इसलिए वो भाव से अगर हम रखते हैं, तो धीरे-धीरे जाएं, उसके बारे में न विचार करते हैं, वो घाव भरना होता है। और जब घाव भर जाता है, तो उसके बाद में हम उसको और ऑब्जेक्टिवली विचार करते हैं, उसके बाद में कुछ को बिजी कर लेते हैं, सकारात्मक कारें हैं, तो फिर हमारा मन उससे निकल सकते हैं, और वो घाव को भरने का मौका देते हैं। सबसे दू? सबसे दू? सबसे दू?