When others’ words makes us disturbed and dissatisfied how to deal with that dissatisfaction – Hindi?
Answer Podcast
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Lecture Summary
- सही संग का चुनाव: जीवन में उत्साह बनाए रखना बहुत आवश्यक है। इसलिए, हमें उन लोगों के साथ रहना चाहिए जो हमें प्रोत्साहित करते हैं। जो लोग बिना कारण हमारी आलोचना करते हैं या नकारात्मकता फैलाते हैं, उनसे सम्मानपूर्वक दूरी बनाए रखनी चाहिए।
- तुलना और ईर्ष्या से बचें: भक्ति या किसी भी सेवा में दूसरों से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए। हर व्यक्ति की सेवा का स्वरूप अलग होता है। दूसरों के कार्य को छोटा समझे बिना, हमें अपनी निर्धारित सेवा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- बुद्धिमत्ता से दुर्लक्ष (Intelligent Neglect): यह मानवीय संबंधों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कला है। जो लोग स्वभाव से ही कमियां निकालते हैं और हमारा उत्साह तोड़ते हैं, उनकी बातों को शांतिपूर्वक नज़रअंदाज़ (ignore) करना सीखना चाहिए।
- वरिष्ठों का मार्गदर्शन सर्वोपरि: यदि लोग आपके काम पर सवाल उठाते हैं, तो उनकी बातों में उलझने के बजाय अपने वरिष्ठों या गुरुओं से मार्गदर्शन लें। यदि वे आपके कार्य को सही मानते हैं, तो आपको अन्य लोगों की आलोचनाओं की चिंता नहीं करनी चाहिए।
- सबको संतुष्ट करना असंभव है: दुनिया में हर किसी को खुश करना संभव नहीं है। यदि हम सबको प्रसन्न करने का प्रयास करेंगे, तो हम स्वयं ही दुखी हो जाएंगे। यह स्वीकार करना चाहिए कि कुछ लोगों की विचारधारा हमेशा हमसे अलग रहेगी, अतः हमें बिना विचलित हुए अपने सही मार्ग पर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
Full Transcriptions
असंतुष्टता का कारण और सही संग का चुनाव
जो असंतुष्टता हमें आती है, कभी कुछ लोग हमें कुछ कह देते हैं, उससे हम विचलित हो जाते हैं, तो उस असंतुष्टता से कैसे निकलें? और वह कौन से गुण में आती है?
हमारा जो संग है, किसका संग करना है, किसका संग नहीं करना है, इसके लिए बुद्धि चाहिए होती है। और बहुत बुद्धि अगर हम नहीं रखते हैं, तो हम किसी का भी संग करने लगते हैं। तो वास्तव में वो राजसिक-तामसिक है। बुद्धि का उपयोग न करके हम किसका संग लेते हैं? वो राजसिक-तामसिक होता है और कुसंग का प्रभाव भी बुरा होता है।
हमारे जीवन में हम सबको प्रोत्साहन चाहिए होता है और इस दुनिया में ऐसी बहुत सी चीज़ें हैं जो हमारा उत्साह कम करती हैं। दुनिया में बहुत से लोग भी होते हैं जो हमारा उत्साह कम करते हैं। कुछ लोग हमारे हितचिंतक हो सकते हैं जो हमको सावधान कर रहे हैं, और कुछ लोग ऐसे होते हैं कि उनको आदत ही होती है। भले उनका बुरा कोई इरादा न हो, पर जो भी परिस्थितियां आ रही हैं, उनके बारे में वो नकारात्मक रूप से बोलेंगे ही। और कुछ लोग होते हैं, उनको तो बड़ा आनंद मिलता है जो दूसरों को नीचा खींचेंगे।
उत्साह की रक्षा और भक्तों का आदर
तो हमें चौकन्ना रहना ज़रूरी है, पर हमें कभी भी हतोत्साहित नहीं होना है। अगर हम समझते हैं कि कुछ लोग ऐसे हैं कि हमेशा मेरे उत्साह का नाश कर देते हैं, तो उनसे हमें दूर रहना है। वो अगर भक्त हैं, तो हम उनको आदर दे सकते हैं।
भक्ति में भी कैसे होता है कि अलग-अलग लोगों की अलग-अलग परिभाषा होती है कि भक्ति में महत्वपूर्ण क्या है। अगर कोई भक्त है जो बहुत ग्रंथों का वितरण कर रहा है, और दूसरा कोई भक्त है जो शास्त्रों का बहुत अध्ययन कर रहा है, तो अगर वो व्यक्ति जो शास्त्रों का अध्ययन कर रहा है, वो ग्रंथों का वितरण करने वाले से मिलता है: “मैंने पिछले एक महीने में इतना ग्रंथ वितरण किया है, तुमने कितना किया है? तुमने इतने लोगों का उद्धार किया है, तुमने क्या किया है?” तो अब इस तरह से तुलना हो जाएगी। भक्तों के बीच में क्या होगा? हृदय में द्वेष सा उत्पन्न होने लगता है।
अपनी सेवा पर ध्यान केंद्रित करना
भक्ति में भक्तों की अलग-अलग परिभाषा होती है। तो अभी अगर मुझे शास्त्रों का अध्ययन करना है, तो मुझे उनका संग करना चाहिए जो शास्त्रों का अध्ययन करते हैं। मैं जो भी सेवा कर रहा हूँ, उस सेवा में प्रधान रूप से उस सेवा के लिए उनका ही संग करना है।
ऐसा नहीं है कि मुझे दूसरी सेवा को बुरा मानना है। ग्रंथ वितरण करना भी महत्वपूर्ण है और मैं उनको भी आदर देता हूँ। पर ऐसा नहीं है कि वो कर रहा है इसलिए मुझे भी वो करना है, और मैं नहीं कर रहा हूँ तो मैं कुछ भी नहीं कर रहा हूँ। हमें हमेशा यह देखना है कि जो लोग हमको उत्साहित करते हैं, उनका ही संग करें।
ऐसा नहीं है कि हम दूसरों का संग पूरी तरह टाल सकते हैं, पर जब हम उनका संग टाल नहीं सकते, तो फिर हमें आदर बनाये रखना चाहिए पर उनके शब्दों को ज़्यादा महत्व नहीं देना है। वैसे वो आसान नहीं है, ये बोलना आसान है, पर फिर भी वो हम कब कर सकते हैं? जब हमें प्रोत्साहन देने वाले जो लोग होते हैं, उनका भी हमें संग मिल रहा हो।
सही संग का महत्व और बुद्धिमत्ता से दुर्लक्ष (Intelligent Neglect)
अगर मैं 10 लोगों से मिलता हूँ और 10 के 10 लोग सब मेरे उत्साह का नाश कर रहे हैं, तो फिर मैं पूरा हताश हो जाऊँगा। पर अगर हम अधिकांश ऐसे लोगों से संग कर रहे हैं जो हमको उत्साह देते हैं, हमको मदद करते हैं, और चौकन्ना भी करते हैं अगर हम कुछ गलत कार्य कर रहे हैं (तो यह अच्छा है)। पर हमेशा अगर निराशावादी लोग रहते हैं, तो वो अच्छा नहीं है।
तो हमें हमारा संग सोच-समझकर चुनना है। और जब हम संग चुन नहीं सकते हैं और ऐसे लोगों के संग में रहना ही है, तो हमें यह फैसला करना है कि किस व्यक्ति के वचनों को मुझे कितना वज़न देना है।
“Important skill in relationships is the art of intelligent neglect.”
संबंधों में एक महत्वपूर्ण क्षमता होती है, वो क्या है? बुद्धिमत्ता से दुर्लक्ष (ignore) करना। तो कुछ चीज़ों में हमें कुछ लोगों को दुर्लक्ष करना चाहिए। “ये लोग ऐसा ही विचार करने वाले हैं, इनकी विचारधारा ऐसी है, मुझे मेरा कार्य करते रहना है।”
वरिष्ठों का मार्गदर्शन और दूसरों की निंदा की उपेक्षा
अगर कई लोग ऐसे बोल रहे हैं, तो हमारे वरिष्ठ हैं, जिनसे हमारे अच्छे संबंध हैं। उनसे हम जाकर पूछ सकते हैं कि, “मैं ऐसे कर रहा हूँ पर यह लोग ऐसे बोल रहे हैं, तो क्या करूँ?” अगर हमारे वरिष्ठ भक्तों से हमें अच्छा मार्गदर्शन मिल रहा है, वो हमें कह रहे हैं कि आप अच्छा कर रहे हैं, सही कर रहे हैं, तो फिर हमें दूसरों की ज़्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए।
इस तरह से हम हमारा उत्साह बनाये रख सकते हैं। वो हमारी कभी सराहना नहीं करने वाले, वो लोग हमसे कभी सन्तुष्ट नहीं हो रहे हैं। तो अब उन लोगों को संतुष्ट करने का या सराहना पाने का अगर मैं प्रयास करूँगा, तो मेरी सारी ज़िन्दगी चली जाएगी।
सबको खुश करने का प्रयास न करें
ऐसा नहीं है कि वो लोग बुरे हैं या मैं बुरा हूँ। कुछ ऐसे अलग लोग हो सकते हैं कि उनका स्वभाव ही अलग है। हमें समझना चाहिए कि अगर हम सबको सुखी करने का प्रयास करेंगे, तो वो सुखी होंगे या नहीं पता नहीं, पर हम दुखी हो जाएँगे।
इसलिए हमें समझना चाहिए कि कुछ लोग ऐसे हैं जिनको मुझे संतुष्ट नहीं करना है। इसका मतलब यह नहीं कि उनको जानबूझकर परेशान करना है, उनको प्रोवोक (provoke) करना है, उनको उत्तेजित करना है, ऐसा नहीं है। पर हमें अपना कार्य करते रहना है।
यह समझना चाहिए, जैसे असंतुष्टता ऐसे होती है कि, “यह चीज़ मुझे मिली नहीं है, मैं असंतुष्ट हूँ।” ठीक है, छोड़ दो! यह चीज़ नहीं मिलेगी, तो भी ज़िन्दगी जा रही है, चल रही है ज़िन्दगी। ऐसे ही हमें समझना चाहिए कि, “यह व्यक्ति मेरे बारे में अच्छा क्यों नहीं बोलता है?” वो व्यक्ति तुम्हारे बारे में अच्छा नहीं बोलता है, छोड़ दो, चलो तुम अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ते रहो।
ऐसा नहीं है कि सारी दुनिया या हमारे समाज में सब लोग हमारी सराहना करने के लिए ही हैं। इसमें समझना चाहिए कि कुछ लोग ऐसे हैं कि उनकी विचारधारा अलग है, मेरी विचारधारा अलग है। तो अगर मैं सही कार्य कर रहा हूँ, मेरे वरिष्ठ मुझे बता रहे हैं कि मैं सही कार्य कर रहा हूँ, तो ठीक है, मुझे अपना कार्य करते रहना चाहिए।