When people don’t accept us.. Cincinnati Chaitanya Charan
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संक्षिप्त सारांश
अगर हम कहते हैं कि जब जो भगवान होर करते हैं, वो अच्छा ही करते हैं पर जब हमारी जब समस्या आती है, तो हमको मॉरल सपोर्ट की ज़रूर्द होती है पर उसके विफरीत अगर कोई लोग हमको डिप्रेस्ट करने लगते हैं तो फिर तब हमें क्या करना चाहिए है? यहाँ पर समस्या ज़्यादा हैवी होती है जब मॉरल सपोर्ट नहीं मिलता है तो यह ज़रूर्द ही करते है एक तरह से एक है तत्वज्ञान और दूसरा है तत्वज्ञान कैसे है? तो अभी हम महाभारत में अगर देखते हैं तो जब आर्जुन के पुतर अभिवन्यू का वाद बुदा है तो आर्जुन is devastated, रोने लगते है और तभी।
मुख्य ट्रांसक्रिप्शन
अगर हम कहते हैं कि जब जो भगवान होर करते हैं, वो अच्छा ही करते हैं पर जब हमारी जब समस्या आती है, तो हमको मॉरल सपोर्ट की ज़रूर्द होती है पर उसके विफरीत अगर कोई लोग हमको डिप्रेस्ट करने लगते हैं तो फिर तब हमें क्या करना चाहिए है? यहाँ पर समस्या ज़्यादा हैवी होती है जब मॉरल सपोर्ट नहीं मिलता है तो यह ज़रूर्द ही करते है एक तरह से एक है तत्वज्ञान और दूसरा है तत्वज्ञान कैसे है? तो अभी हम महाभारत में अगर देखते हैं तो जब आर्जुन के पुतर अभिवन्यू का वाद बुदा है तो आर्जुन is devastated, रोने लगते है और तभी भगवान कृष्णा क्या करते है?
भगवान कृष्णा तभी उनको यह नहीं बोलता है क्रिष्णा उनको सांत्वना करते है क्रिष्णा उनको भावनात्मक रूप से सपोर्ट देते है तो तत्वज्ञान महतुपूर्ण है, समझना ज़रूरी है पर हमें देखना है कि तत्वज्ञान का भी उद्देश क्या है? हम सब हमारे जीवन में अगरसल चल रहे हैं हमें आगे चलना है तो कभी-कभी हमें तत्वज्ञान के द्वारा शक्ति मिलती है कभी-कभी भावनात्मक रूप पे कोई हमारे साथ रहता है कोई हमारे सहान भूति दिखाता है कोई हमें हमें समझता है, मॉरल सपोर्ट है, तो उससे हमें शक्ति मिलती है तो हमें, जब हम किसी के साथ वारतालाफ कर रहे हैं तभी हमें इंट्रेक्शन कर रहे है तो भी हमें देखना है कि मैं इस व्यक्ति को अभी मदद कैसे करें अगर वो सेवा भाव हमारे पास होगा तो उचित सर पे हम उचित कारे कर पाएगे प्रभुपाजी जब अमेरिका में एक मंदिर में गए थे तो तभी वहाँ पे छोटा सा मंदिर था, एक ऐसे कॉंडो था, एक साइड में भक्तर रह रहे थे दुसरे साइड में एक वुर्द्धश्री रहे थी और वो वुर्द्धश्री वहाँ पे बहुत कम्प्लेन करे तुम इतना आवाज करते हो, और तुम इतना ये करते हो, वो करते हो तो ये भक्तों, प्रभुपाजी जब वहाँ पे आये अब भक्तों होते हैं, कोई भक्ति में अपोस्ट करता है भक्त बोल रहता है ये दीमन है, ये असुल है ये हमको, आप ये कीरतन के विरोद कर रहे है, ये कम्प्लेन कर रही है तो वहाँ पे वो जो लोकल अड्मिनिस्ट्री द्वारे थी, वहाँ पे उसको कम्प्लेन कर रही थी तो भक्तों को कीरतन में समस्या आ रही थी तो जब प्रभुपाजी मौर्णिंग वाक पे गए थे, जब वापस आये तो अपने मंदिन में जा गए, अपने सेंटर में जा गए, उस पुद्धस्ट्री से मिलने चलेगी और वहाँ पे जा गए, वो सिर्फ उसे बात करनी लगे, टिपिकल जो बुढ़े लोग बात करते है तुम्हारे बेटा कहा है, तुम्हारे बेटी कहा है, तुम्हारे तरह कहा है, लगो 20-25 पिरिएट का, प्रभुपाजी ने ऐसे ही बात किया उनसे और भक्त को बात करते है, अब ही है किर्षन भक्त के बारे में, कुछ परचार करेंगे, कुछ तो क्या हम बता रहे हैं, प्रभुपाजी कुछ कुछ भी नहीं बता रहे है, और ते प्रभुपाजी महाँ से जिकल के आगे भक्तों के सब के मन में सवाल था और प्रभुपाजी भी सतर करें, समझ करें, प्रभुपाजी सिंप्ली बोले, sometimes old people, and because of loneliness, they become irritable, कभी कभी जो बुढ़े लोग थे, वो अकेला लगता है हमकुछ, और अकेला होने के खार में वो चीर चीर है प्रभुपाजी, अब प्रभ प्रभुपाजी क्रिशन के बारे में एक शब्द बोले बिना उस व्यक्ति को क्रिशन के करीब लिया है, तो यहां पर मैं कहने का मतलब यह है कि हमें जब दूसरों से आधान पढ़ान कर रहे हैं, तो हमें यह भाव रखना है कि मैं इस व्यक्ति की सेवा कैसे कर सकता हूँ तो यह भाव अगर हमारा होता है, तो हमें हम दूसरों को कभी मॉरल सपोर्ट चाहिए, कभी उनको फिलोसाफिकल नौलेज देना है, वह उच्छित हम कर सकते हैं और जहांतक अभी हमारे जीवन में ऐसी परिस्थति आ रही है कि हमको मॉरल सपोर्ट नहीं मिल रहा है, तो फिर हमें यह देखना है कि अलग-अलग लोगों की अलग-अलग प्रभुत्या होती है, तो कुछ-कुछ लोग ऐसे होते हैं, वो भावना उनकी, वो मॉरल स पूरा कर सकते हैं. हमारे जीवन में समस्यां कहीं बार इसलिए आती है कि जो हमारे जरूरत है, वो पूरी हो सकती है, पर हम चाहते हैं कि यह जरूरत इससे ही पूरी हो, यह व्यक्ति मुझे सपोर्ट करें, पर वो जो मुझे सपोर्ट चाहिए, कोई और व्यक्ति भी दे सकता है, पर जब हम अपेक्षा करते हैं इससे ही मिले और इससे नहीं मिलता है, तो हम आताश हो जाते हैं, क्योंंकि हमारी अपेक्षाओं को हमें मॉडरेट करना है, मॉडरेट करना है मतलब कि ऐसे अलग-अलग व्यक्तियों का अलग-अलग सभाव होता है और कुछ-कुछ जरूरते हैं, वो कुछ व्यक्ति पूर करी नहीं सकते हैं, क्योंंकि उनका दिमाग वैसे है ही नहीं, उनका, ऐसे नहीं कि वो बुरे लोग है, पर उनका दिमाग वैसे काम करता ही नहीं है, इसमें दो चीज़ है, एक है insensitive और दूसरा है desensitized, insensitive मतलब वो असंवैधन शील है, वो दूसरों के भावना का कदर ही न है, माल्ली जाएगा मुझे किसे बात करनी है, वो उधर देख रहे है, मैं उस कन्दे पर हाथ लगाता हूँ, और वो मुर्खे देखते ही नहीं, कितना रूड है, मैं उनको बात कर रहा हूँ, पर बाद मुझे पता जलता है कि उनको वास्तम है, वहाँ पर paralysis है, वहाँ पर सवयत नहीं है उनको, तो क्या है, वो बुरे नहीं है, पर उनसे, अगर मुझे communicate करना है, तो वो पढ़धती है ही नहीं, तो कभी तो क्या होता है, अलग-अलग लोगों के अलग-अलग शक्तियां और कमियां होती हैं, तो कुछ-कुछ लोग होते हैं, कि उनको moral support किसे को देना, उनको समझता है नहीं, मुझे करना चाहिए है, या मुझे ऐसा बरताव करना चाहिए है, ऐसे बरताव करने से ऐसा ह करते है, तो वही ktoś को पहला समझ दाएगा, तो मुझे सह है कि ये मेरे जुरुवथ है, ये व्यक्ति पूरा नहीं कर।ा है. तो फिर हमारे तो जहां हमारी जदूर्द जो पुरा कर सकता है वहां हमें अपेशार हो जाएगे अइसा करेगे तो हम उतना उससे हटाश नहीं होगे तो आपको देख सकते हैं कि आपको करते हूँ