Why is the intelligence said to come from goodness and the mind from passion – Hindi?
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Lecture Summary
इस व्याख्यान में बुद्धि और मन की कार्यप्रणाली तथा उनके गुणों (सतोगुण और रजोगुण) पर प्रकाश डाला गया है:
- सतोगुण और रजोगुण के कार्य: सतोगुण का मुख्य कार्य चीजों की पालना और उन्हें यथावत बनाए रखना (रखरखाव) है, जबकि रजोगुण का कार्य नई सृष्टि करना और विस्तार करना है।
- बुद्धि का स्वरूप: बुद्धि भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की हो सकती है। आध्यात्मिक बुद्धि हमें उच्च आदर्शों और आध्यात्मिक पूर्णता की ओर ले जाती है।
- बद्धावस्था और बुद्धि: आधुनिक समय में तकनीकी और भौतिक सुख-सुविधाओं के कारण बुद्धि का उपयोग बद्धावस्था (मोह-माया के बंधन) को और अधिक बढ़ाने में हो रहा है।
- निष्कर्ष: शास्त्रों और आचार्यों के अनुसार, जब बुद्धि केवल इंद्रिय तृप्ति और उसकी योजनाओं में लग जाती है, तो मनुष्य का भावबंधन और अधिक बढ़ जाता है।
Full Transcriptions
बुद्धि और मन का स्वरूप: सतोगुण और रजोगुण का प्रभाव
पहला सवाल है कि बुद्धि मन से ऊपर है। तो फिर सृष्टि की निर्मिति में ये बताया गया है कि बुद्धि रजोगुण से आ रही है और मन सतोगुण से आ रहा है। वैसे क्यों बताया गया है? इससे अलगद कार्य बताया गया है।
महत्वपूर्ण यह है कि हम देखें हैं कि कार्य क्या है। सतोगुण का कार्य है जो चीज हैं उसको परकराना। मेंटेनेंस, पालना। परकराना जो है उसको परकराना। रजोगुण का कार्य है क्या है? उसको बढ़ाना, सृष्टि करना।
भौतिक और आध्यात्मिक बुद्धि का कार्य
तो जो बुद्धि होती है वो भौतिक बुद्धि हो सकती है, आध्यात्मिक बुद्धि भी हो सकती है। आध्यात्मिक बुद्धि जो है, हम आध्यात्मिक पूर्ण के कैसे करनी हैं, उसके बारे में विचार करती हैं। उसके बारे में विचार करती हैं, मतलब, जो हमारी जैसे हमें भौतिक वस्ता है, भौतिक बढ़धा वस्ता है, उसको वैसे ही रखता हैं मारी।
और जो भौतिक है, तो वो बढ़धा वस्ता का और बढ़ाती है। अभी 100 या 500 साल पहले, जब इसके बारे में लुब्दी करनी है, तो क्या कर सकता है? शहर में कुछ जगाएं जब वो जाने के लिए लुब्दी कर सकता है पर अभी इंद्रेत उद्धी के लिए इतने सारे पॉखें नहीं है, क्या है, कंप्यूटर पर ही आप ये और कर सकते हैं, ये साथ के लिए कर सकते हैं, वो कर सकते हैं।
बुद्धि का उपयोग और बद्धावस्था
तो ये सब के लिए बुद्धि का इस्तेमाल है पर बुद्धि से क्या हुआ है, बद्धावस्था और बढ़ गई है, क्योंकि नहीं नहीं योजना बना है, बद्धन की बना है प्रवापात्य 3.39 लोई लगे।
इसलिए अध्यावास्ता के पापरी बोलते हैं, कि जब बुद्धि इंद्रियतुति में लग जाती है, इंद्रियतुति की योजना में लग जाती है, तो व्यक्ति का भावबंधन और बढ़ जाता है, वो इंद्रियतुति का बढ़ जाता ह हूँ।