How can we change our default settings that we don’t know about? – Hindi
Answer Podcast
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Lecture Summary
- परिवर्तन की शुरुआत ज्ञात कमियों से करें: हमारे स्वभाव (डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स) को बदलने की शुरुआत उन बातों से करनी चाहिए जिनके बारे में हमें पहले से पता है। एक साथ सब कुछ बदलने का विचार मन को डरा सकता है और हताश कर सकता है।
- छोटे कदम उठाएं, घबराएं नहीं: जिस तरह पैर में फ्रैक्चर होने के बाद व्यक्ति को सीधे पहाड़ से कूदने के बजाय धीरे-धीरे एक-एक कदम चलना सीखना होता है, वैसे ही स्वभाव परिवर्तन में भी बड़े लक्ष्य देखकर घबराने के बजाय छोटे-छोटे सुधार करने चाहिए।
- असामान्य प्रतिक्रिया (Overreaction) एक संकेत है: जिस तरह सामान्य त्वचा की तुलना में किसी घाव या फोड़े को छूने पर अत्यधिक दर्द होता है, उसी तरह जब हम किसी छोटी सी बात पर बहुत तीखी या असमानुपातिक प्रतिक्रिया (disproportionate reaction) देते हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि हमारे मन के भीतर कोई छिपी हुई कंडीशनिंग (conditioning) या पुरानी समस्या मौजूद है, जिसे पहचानने और सुधारने की आवश्यकता है।
Full Transcription
डिफॉल्ट सेटिंग्स और स्वभाव में परिवर्तन
और दूसरा सवाल था कि जो हमारी डिफॉल्ट सेटिंग्स (default settings) हैं, कई बार हमें पता ही नहीं होती हैं, तो उनको कैसे परिवर्तित कर सकते हैं? कैसे जान सकते हैं और उनको कैसे परिवर्तित कर सकते हैं? पहले जो सेटिंग्स हमें पता हैं, वहीं से हमें परिवर्तन करना शुरू करना चाहिए। उस पर हमें जोर देना चाहिए। क्या होता है कई बार, जब हमें स्वभाव का परिवर्तन करना होता है, तो मन ऐसे बोलने लगता है, “परिवर्तन करना है, तो इतनी सारी चीज़ों का परिवर्तन करना है।”
छोटे कदमों से शुरुआत: फ्रैक्चर का उदाहरण
जैसे मान लीजिए, अगर किसी को बोलते हैं कि अभी आपको चलना है। मान लीजिए किसी को फ्रैक्चर हो गया है और वो चल नहीं सकते हैं, तो अभी फिर धीरे-धीरे वापस चलना सीखना है। और वह चलने लगता है – एक कदम, दो कदम, तीन कदम चल सकता है। पर मान लीजिए वो व्यक्ति जब चलने लगता है, वो सोचता है कि वह खुद एक पहाड़ के ऊपर है और पहाड़ से वो नीचे देखता है और सोचता है, “मैं नहीं चल सकता! मैं नहीं चल सकता! मैं इस पहाड़ से नीचे नहीं कूद सकता!” पहाड़ से कूदने के लिए कोई नहीं बोल रहा है।
छिपी हुई कंडीशनिंग और हमारी प्रतिक्रियाएं
हममें कुछ ज़्यादा सेंसिटिविटी (sensitivity) होती है। अगर मैं यहाँ पर सामान्य हाथ को स्पर्श करता हूँ, तो मुझे कुछ दर्द नहीं होगा। पर यहाँ पर अगर कुछ फोड़ा वगैरह है, और तभी मैं स्पर्श करता हूँ, तो मुझे पता लग जाता है। जब मैं स्पर्श करता हूँ और मुझे ज़्यादा दर्द होने लगता है, तो मुझे पता चलता है कि यहाँ पर कुछ तो भी गड़बड़ है।
तो वैसे ही, जब छोटी चीज़ों पर हमारी बहुत प्रतिक्रिया (reaction) हो जाती है किसी कारण से, जब एक disproportionate reaction (असमानुपातिक प्रतिक्रिया) होता है, तो तभी हमें समझना चाहिए कि यहाँ पर कुछ तो भी डिफ़ॉल्ट है। माइंड में कोई invisible spot (अदृश्य बिंदु) था, ये ऐसी कोई चीज़ है जहाँ पर अंदर से कोई condition (स्थिति/संस्कार) है।
जैसे श्रील प्रभुपाद की जय! गौर भक्त वृन्द की जय!